आयकर विभाग

वित्त मंत्रालय, भारत सरकार

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परिपत्र सं.

7/2007

परिपत्र की तिथि

23/10/2007

दस्तावेज़ अपलोड की तिथि

23/10/2007

परिपत्र: सं 7/2007, 23-10-2007 दिनांकित

परिपत्र सं. 7/2007 दिनांक 23-10-2007

आयकर 1961 की धारा 239 - - कर की कटौती के व्यक्ति को धारा 195 के तहत स्रोत पर कर कटौती की वापसी के लिए प्रक्रिया वापसी


बोर्ड अनिवासी को भुगतान से स्रोत पर कर की कटौती के व्यक्ति के लिए कुछ स्थितियों में, धारा 195 के तहत कर कटौती की वापसी के लिए प्रक्रिया नीचे बिछाने, 20 अप्रैल 2000 के सर्कुलर नं 790 जारी किया था. अभ्यावेदन कहा परिपत्र वापसी के लिए वास्तविक दावे अनिवासी को भुगतान से स्रोत पर कर की कटौती के व्यक्ति के लिए उठता है जहां खाता स्थितियों में लेने के लिए संशोधन किया जा सकता है और उस में गिर नहीं करता अनुरोध है कि करदाताओं से बोर्ड में प्राप्त किया गया है कहा परिपत्र के दायरे.

प्र.20. बोर्ड को भेजा जा रहा है जो मामलों में मुख्य रूप से परिस्थितियों से संबंधित हैं जहां, धारा 195 के तहत स्रोत पर कर कटौती के सरकार के खाते में जमा करने के बाद,

एक) अनुबंध रद्द कर दिया है और कोई प्रेषण अनिवासी करने के लिए किया जाता है;

ख) प्रेषण विधिवत अनिवासी करने के लिए किया जाता है, लेकिन अनुबंध रद्द कर दिया है.ऐसे मामलों में, प्रेषित राशि स्रोत पर कर की कटौती के लिए जिम्मेदार व्यक्ति को लौटा दिया गया है;

ग) अनुबंध गैर निष्पादित भाग के लिए आंशिक निष्पादन और कोई प्रेषण अनिवासी करने के लिए किया जाता है के बाद रद्द कर दिया है;

गैर निष्पादित भाग से संबंधित आंशिक निष्पादन और प्रेषण अनिवासी करने के लिए किया जाता है के बाद डी) अनुबंध रद्द कर दिया है.; ऐसे मामलों में प्रेषित राशि स्रोत पर कर या कोई प्रेषण किया जाता है लेकिन राशि अनिवासी के खाते में जमा किया गया था जब टैक्स काट लिया और जमा किया गया था घटाने के लिए जिम्मेदार व्यक्ति को लौटा दिया गया है

ई) कानून में संशोधन करके या आयकर अधिनियम, 1961 के प्रावधानों के तहत अधिसूचना द्वारा या तो टैक्स से प्रेषित राशि की छूट होती है,

च) एक आदेश धारा 154 या 248 या आयकर अधिनियम की 264, 1961 धारा 195 के तहत एक deductor की कर कटौती का दायित्व को कम करने के तहत पारित हो जाता है;

छ) ने गलती से एक ही आय से दो बार कर की कटौती के वहाँ से होता है;

ज) आयकर अधिनियम, 1961 के प्रावधानों के तहत आवश्यक नहीं था जो अशुद्ध करना का खाता पर टैक्स का भुगतान होता है,

कम दर भारत द्वारा प्रवेश प्रासंगिक दोहरे कराधान से बचाव संधि में निर्धारित है, जबकि मैं) घरेलू कानून के तहत एक उच्च दर पर कर का भुगतान होता है.

ऊपर उल्लिखित मामलों में 2.1, आय या तो अनिवासी को जमा नहीं करता है या यह धन वापसी का दावा किया है जो के संबंध में अतिरिक्त राशि लेकिन अर्जित करता deductor द्वारा वहन किया जाता है. धारा 195 के तहत टैक्स के रूप में कटौती और सरकार के ऋण के लिए भुगतान की गई राशि इसलिए deductor के अंतर्गत आता है. वर्तमान में, एक वापसी केवल लेन - देन का इरादा था, जिनके साथ अनिवासी द्वारा या 20 अप्रैल 2000 के सर्कुलर नं 790 के संदर्भ में किया जा रहा है एक दावे पर दिया जाता है.

(3) उप पैरा (क) अनुच्छेद 2 के, अनिवासी कोई भुगतान प्राप्त नहीं होने में निर्दिष्ट मामलों के प्रकार में वापसी के लिए लागू नहीं होगा.अनुच्छेद 2 (i) के लिए उप पैरा (ख) के अंतर्गत मामलों के लिए, कोई दावा है कि वह टैक्स या कर की निवासी deductor साथ आगे कोई लेन - देन है, जहां अनिवासी द्वारा बनाया जा सकता निवासी द्वारा वहन किया जा रहा है deductor.वह काट लिया और टैक्स के रूप में जमा की गई राशि वसूल करने में सक्षम नहीं होगा क्योंकि यह निवासी deductor इसलिए वास्तविक कठिनाई के लिए रखा जाता है.

(4) इस मामले में बोर्ड द्वारा विचार किया गया है. आय अर्जित किया है लेकिन कोई कर नहीं है कि आय पर देय है या कर एक कम दर पर देय है जहां कोई आय के कारण अनुबंध को रद्द करने या करने के लिए अनिवासी को अर्जित किया है, जहां ऊपर उल्लेख मामलों, के प्रकार में, राशि को जमा धारा 195 के तहत इस हद तक कि सरकार की साख, 'कर' होने के लिए नहीं कहा जा सकता.

4.1 यह इस राशि आयकर के मुख्य आयुक्त या संबंधित आयकर महानिदेशक के पूर्व अनुमोदन के साथ, वापस किया जा सकता है, कि निर्णय लिया गया है, के तहत, अनिवासी को भुगतान से कटौती की जाती है जो व्यक्ति के लिए धारा 195.

प्र.5. आय अनिवासी को जमा या आय नहीं कर प्राप्त कर रहा है, तो कारण है या कर एक कम दर पर देय है नहीं करता है के रूप में धारा 195 के तहत भुगतान करने वाले व्यक्ति को धन वापसी की अनुमति दी जा रही है. इस हद तक कि इस तरह के मामलों में सरकार के खाते में भुगतान की गई राशि, 'कर' नहीं रह गया है. इसे देखते हुए, धारा 244A के तहत कोई दिलचस्पी इस परिपत्र के साथ या पहले से ही सर्कुलर नंबर 769 या सर्कुलर नंबर 790 के अनुसार दी रिफंड पर अनुसार दी जा रिफंड पर स्वीकार्य है.

प्र.6. धारा 195 के तहत भुगतान किया है जो व्यक्ति के लिए बनाया जा रहा है धन की वापसी के मामले में मूल्यांकन अधिकारी, deductor को सूचना देने के बाद, आयकर अधिनियम के तहत deductor के किसी भी मौजूदा कर देयता, 1961, धन के खिलाफ इसे समायोजित कर सकते हैं टैक्स अधिनियम 1957 या किसी भी अन्य प्रत्यक्ष कर कानून. शेष राशि, यदि कोई हो, धारा 195 के तहत इस तरह के भुगतान कर देने वाले व्यक्ति को वापस किया जाना चाहिए. प्रत्यक्ष करों में से प्रत्येक के तहत इस तरह के दायित्व की सीमा तक एक पृथक वापसी वाउचर "आयकर विभाग" के पक्ष में आयकर अधिकारी या निर्धारण अधिकारी द्वारा तैयार और के चालान के साथ बैंक के लिए भेजा जाना चाहिए उचित प्रकार. समायोजित राशि और संतुलन, यदि कोई हो, धन वापसी की प्रमुख सिर "020-निगम टैक्स" या प्रमुख सिर भुगतान मूल रूप से प्रमुख के लिए जमा किया गया है कि क्या पर निर्भर करता है "निगम कर के अलावा अन्य आय पर 021 करों 'के तहत विकलनीय जाएगी सिर "020-निगम कर" या प्रमुख सिर "निगम कर की तुलना में अन्य आय पर 021 करों" के लिए.

प्र.7.        इस परिपत्र के मामले में एक वापसी केवल आयकर अधिनियम की धारा 203 के तहत कोई प्रमाणपत्र अनिवासी करने के लिए जारी किया गया है कि एक उपक्रम प्राप्त करने के बाद दी जानी चाहिए. इस तरह के एक प्रमाण पत्र जारी किया गया है, जहां मामलों में, इस परिपत्र के तहत धन वापसी का दावा करने वाले व्यक्ति इसे प्राप्त करना चाहिए या गैर द्वारा एक ही राशि के लिए धन की वापसी के किसी भी अलग दावे के कारण किसी भी संभावित नुकसान से आयकर विभाग को क्षतिपूर्ति चाहिए अनिवासी. Deductee आयकर रिटर्न दाखिल नहीं किया है और आयकर रिटर्न दाखिल करने के लिए समय समाप्त हो गया है तभी इस परिपत्र के मामले में एक वापसी के लिए दी जानी चाहिए.

8 इस परिपत्र के अनुसार धन की वापसी materialized नहीं है या बाद में रद्द कर दिया गया है जो गैर निवासियों के साथ लेनदेन के संबंध में अनुमति दी, अन्य बातों के साथ है.यह इसलिए, दावा किया कि अगर वे deductor बनाने वापसी का दावा किया जा रहा है, उस व्यक्ति के मामले में एक व्यय के रूप में, लेन - देन राशि इसी नामंज़ूर कि निर्धारण अधिकारी द्वारा यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए. इसके अलावा, सभी मामलों में, मूल्यांकन अधिकारी भी धन वापसी का दावा कर रही एक deductor के मामले में यह सुनिश्चित करना चाहिए, वापस कर टीडीएस का प्रतिनिधित्व खर्च राशि की इसी पाबंदी किया जाता है.

9 इस परिपत्र के तहत रिफंड का दावा करने के लिए सीमा स्रोत पर कर कटौती की जाती है, जिसमें वित्तीय वर्ष की समाप्ति से दो वर्ष का होगा. हालांकि, वापसी के लिए दावा सर्कुलर नंबर 790 जारी करने के बाद किया गया था इस परिपत्र और जहां के मुद्दे से पहले लंबित थे जो पैरा 2 (i) के लिए आइटम (ग) के तहत धन की वापसी के दावे के लिए सभी मामलों पर भी विचार किया जा सकता है.

10 यह सर्कुलर नंबर 769 दिनांक 6 अगस्त 1998 में, वापसी के लिए दावा करने के लिए कोई समय सीमा नहीं था कि सीबीडीटी को प्रतिनिधित्व दिया गया है. दो वर्ष की समय सीमा, एक वापसी का दावा करने के लिए, ख़बरदार सर्कुलर नंबर 790 दिनांक 20 अप्रैल 2000 नियत किया गया.सर्कुलर नं 790 से कवर किया गया है, जो सर्कुलर नंबर 769, द्वारा कवर कुछ मामलों में, अब (क) मद में सूचीबद्ध है और (ख) इस परिपत्र के पैरा 2 के, और सर्कुलर नंबर 790 के मुद्दे से पहले दायर की, समय हो गया क्योंकि सर्कुलर नंबर 790 में समय सीमा के विनिर्देश की रोक लगा दी.यह इस तरह के मामलों में भी वापसी के लिए माना जा सकता है कि स्पष्ट किया जाता है.

प्र।11. इस परिपत्र परिपत्र No.790/2000 दिनांक 20 अप्रैल 2000 के अधिक्रमण में जारी किया जाता है.

प्र.12.     इस परिपत्र की सामग्री अपने क्षेत्र में सभी अधिकारियों के ध्यान में लाया जा सकता है.