643 : परिपत्र: सं 643, 22-01-1993 दिनांकित
परिपत्र सं.
643
परिपत्र की तिथि
22/01/1993
दस्तावेज़ अपलोड की तिथि
22/01/1993
1057. संचयी जमा / डिबेंचरों / बांडों पर ब्याज से कटौती के संबंध में स्पष्टीकरण
1आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 194A एक व्यक्ति या आय घटा एक निवासी, ब्याज की तरफ से किसी भी आय, प्रतिभूतियों पर ब्याज के अलावा अन्य, के लिए भुगतान के लिए जिम्मेदार है जो एक हिंदू अविभाजित परिवार, नहीं किया जा रहा है, किसी भी व्यक्ति की आवश्यकता आदाता के खाते में इस तरह के आय के ऋण का समय पर निर्धारित दर उस पर या नकद या चेक या ड्राफ्ट की समस्या से या जो भी पहले हो किसी अन्य विधि द्वारा, उसके भुगतान के समय कर.
प्र.20. इसी तरह, अधिनियम की धारा 193 के नीचे देता है कि प्रतिभूतियों (डिबेंचर, बांड, आदि शामिल है, जो अवधि) पर ब्याज के रूप में किसी भी आय भुगतान के लिए जिम्मेदार व्यक्ति करेगा, आदाता के खाते में इस तरह के आय के ऋण का समय पर या नकद या चेक या ड्राफ्ट की समस्या से या इससे पहले, देय ब्याज की राशि पर बल में दर से आयकर घटा है, जो भी किसी अन्य विधि द्वारा भुगतान तत्संबंधी के समय में.
(3)वर्गों ब्याज आय दाता, इस तरह के जमा करने के लिए खाते की किताबों में, "ब्याज देय खाता" या "सस्पेंस अकाउंट" या किसी अन्य नाम से बुलाया है, चाहे किसी भी खाते में जमा किया जाता है, जहां 193 और 194A, में निहित स्पष्टीकरण के अनुसार जैसा भी मामला हो, वर्गों 193 और 194A के स्रोत पर आदाता और कर कटौती के प्रावधानों के खाते में ब्याज आय का क्रेडिट नहीं समझा है, आकर्षित कर रहे हैं.
(4)उदाहरणों कर संचयी जमा / डिबेंचरों / बांडों की परिपक्वता पर और नहीं आवधिक अंतराल पर ब्याज आय के ऋण का समय पर भुगतान के समय स्रोत पर काटा गया है, जिसमें बोर्ड का नोटिस, पर आ गए हैं. इस प्राप्तकर्ताओं को अनावश्यक कठिनाई का कारण बनता है. कानून के प्रावधानों के अनुसार, कर जो भी पहले हो उसके हित की क्रेडिट, या भुगतान के समय, पर स्रोत पर काटा जाना है.
प्र.5. यह एतद्द्वारा / संचयी जमा / डिबेंचरों / बांडों के संबंध में स्रोत पर कर ब्याज दाता के खाते पुस्तकों में श्रेय और जमा / डिबेंचर की परिपक्वता तक postponded होने की नहीं है हर बार कटौती करने की आवश्यकता है कि स्पष्ट किया जाता है बांड. इसलिए कर कटौती भी निर्धारित समय के भीतर केंद्र सरकार के खाते में जमा किया जाना आवश्यक है. हालांकि, संचयी जमाओं के मामले में, कर श्रेय ब्याज की कुल राशि / भुगतान किया है या प्रत्येक भुगतानकर्ता को वित्तीय वर्ष के दौरान भुगतान रुपये से अधिक नहीं है / श्रेय होने की संभावना अगर कटौती करने की आवश्यकता नहीं है. २५०० रु. है.
प्र.6. की कटौती और पूर्वोक्त रूप में, कर कटौती आयकर अधिनियम में निहित दंड प्रावधानों को आकर्षित करती है, जो टैक्स के भुगतान में देरी कर रहे हैं, कर जमा नहीं करके. कर कटौती ऊपर उल्लिखित के रूप में, कानून की सही स्थिति का पालन करने की सलाह दी जाती है.
प्र.7. यह, हालांकि, टैक्स अन्यथा वर्गों 193 और 194A के तहत कर कटौती से छूट दी गई है जो ब्याज आय से कटौती किए जाने की आवश्यकता नहीं है कि कहा जा सकता है. ये छूट बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949 लागू होता है जो करने के लिए एक बैंकिंग कंपनी के साथ जमा राशि पर ब्याज भी शामिल है.
परिपत्र: सं 643, 22-1-1993 दिनांकित.

