628 : परिपत्र: सं 628, 06-03-1992 दिनांकित
परिपत्र सं.
628
परिपत्र की तिथि
06/03/1992
दस्तावेज़ अपलोड की तिथि
06/03/1992
408. आकलन वर्ष 1985-86 के लिए खंड 44AB के प्रावधानों का अनुपालन करने में विफलता के लिए खंड 271B के तहत दंड के बारे में स्पष्टीकरण
1 बोर्ड आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 271B के तहत दंड कार्यवाही, खंड 44AB के प्रावधानों का अनुपालन करने में विफलता के लिए नहीं होना चाहिए फैसला किया है कि (स्पष्टीकरण 2 देखें) 19-6-1985 दिनांकित, ख़बरदार सर्कुलर नंबर 422 था मामलों जहां में, आकलन वर्ष 1985-86 के लिए शुरू की:
(मैं) नियम 6G साथ पढ़ा खंड 44AB के तहत निर्धारित ऑडिट रिपोर्ट 30 सितम्बर 1985 द्वारा प्राप्त किया गया है; और
(Ii) अधिनियम की धारा 140A के तहत आत्म मूल्यांकन कर आयकर रिटर्न दाखिल करने के लिए (1) इस अधिनियम की धारा 139 के तहत निर्धारित सामान्य अवधि के भीतर भुगतान किया गया है.
इसके बाद अभ्यावेदन की प्राप्ति पर, बात फिर से विचार किया गया था और सर्कुलर नंबर 582 कोई जुर्माना लेखापरीक्षा रिपोर्ट धारा के तहत निर्धारित मामलों में जहां खंड 271B के तहत आकलन वर्ष 1985-86 के लिए लगाया जाएगा कि स्पष्ट 23-10-1990 पर जारी किया गया था 44AB 6G, 30 सितम्बर द्वारा 1985 में प्राप्त किया गया था शासन के साथ पढ़ा.
प्र.20. मामला कानून मंत्रालय के साथ परामर्श में बोर्ड द्वारा फिर से विचार किया गया है और यह 23-10-1990 सर्कुलर नं 582, को वापस लेने का निर्णय लिया गया है.[स्पष्टीकरण 1].
परिपत्र: नहीं 628, 1992/06/03 दिनांकित.
स्पष्टीकरण 1
1ख़बरदार सर्कुलर नंबर 422, 19 जून 1985 (स्पष्टीकरण 2) दिनांक बोर्ड को निर्देश दिया था कि अधिनियम की धारा 44AB के प्रावधानों का पालन न करने के लिए लगाया आयकर अधिनियम की धारा 271B करना चाहिए, के तहत दंड कार्यवाही मामलों में जहां आकलन वर्ष 1985-86 के लिए शुरू किया जा नहीं:
(मैं) नियम 6G साथ पढ़ा खंड 44AB के तहत निर्धारित लेखापरीक्षा रिपोर्ट, 30 सितंबर, 1985 के द्वारा प्राप्त किया गया है; और
(Ii) अधिनियम की धारा 140A के तहत आत्म मूल्यांकन कर आयकर रिटर्न दाखिल करने के लिए (1) इस अधिनियम की धारा 139 के तहत निर्धारित सामान्य अवधि के भीतर भुगतान किया गया है.
प्र.20. अभ्यावेदन बाद में स्थितियां (मैं) में उल्लेख किया है कि क्या स्पष्ट करने के लिए बोर्ड का अनुरोध प्राप्त हुआ है और (ख) के ऊपर संचयी या स्वतंत्र थे.राजस्व लेखापरीक्षा भी खंड 271B के तहत दंड आत्म मूल्यांकन कर (1) इस अधिनियम की धारा 139 के तहत निर्धारित सामान्य अवधि के भीतर भुगतान नहीं किया गया था, जहां मामलों में लगाया गया है चाहिए कि आपत्तियों को उठाया गया है, लेकिन विस्तारित अवधि के भीतर भुगतान किया गया था, यानी , 30 सितंबर 1985.
(3) अधिनियम की धारा 271 बी के तहत दंड केवल अधिनियम की धारा 44AB के प्रावधानों का पालन न करने के लिए और नहीं आत्म मूल्यांकन कर के भुगतान में देरी के लिए लगाया है. इसलिए, यह आत्म मूल्यांकन कर के भुगतान के साथ खंड 271B के तहत जुर्माना लगाने जुड़ा हुआ insofar के रूप में कहा सर्कुलर नंबर 422 में एक स्पष्ट विसंगति हो रहा है.
(4) यह इसलिए, कोई जुर्माना, ऑडिट रिपोर्ट धारा 44AB के तहत निर्धारित मामलों में जहां खंड 271B के तहत आकलन वर्ष 1985-86 के लिए लगाए गए नियम 6G साथ पढ़ा, 30 सितम्बर, 1985 से प्राप्त किया गया है किया जाएगा कि स्पष्ट किया जाता है.इस स्पष्टीकरण अधिनियम की धारा 44AB के आपरेशन के पहले वर्ष किया जा रहा है, केवल आकलन वर्ष 1985-86 के लिए लागू होता है.
परिपत्र: नहीं 582, 23-10-1990 दिनांकित.
न्यायिक विश्लेषण
: ऑटो स्क्वायर में आईटीओ [1992] 43 वी. आईटीडी 259 (. PAT.-ट्राई बी), इसे नीचे के रूप में मनाया गया - में समझाया
"परिपत्र जाहिर राजस्व में ही आत्म मूल्यांकन कर, धारा 139 के तहत रिटर्न दाखिल करने का एक स्वाभाविक परिणाम के भुगतान अलग कर दिया गया है पता चलता है कि (1), धारा 44AB (sic) के तहत लेखापरीक्षा रिपोर्ट के दायरे से. मैं केवल इन मामलों में सीबीडीटी के मद्देनजर प्रकट होता है जो सीबीडीटी के सर्कुलर में शब्द पर जोर दिया है.निर्धारिती अनुभाग 44AB की निर्धारित तिथि से पहले लेखापरीक्षा रिपोर्ट प्राप्त की थी और स्वीकार किया गया था, जो वापसी, साथ इसे दायर किया था के रूप में मेरे विचार में, धारा 271B के तहत कोई जुर्माना नहीं लगाया जाना चाहिए.
स्पष्टीकरण 2
1 धारा 44AB नीचे देता है कि हर जिनकी बिक्री, कारोबार या सकल प्राप्तियों से अधिक रूपए चालीस लाख या एक पेशे पर ले जाने, जिसका सकल प्राप्तियों रुपए से अधिक दस लाख, ऐसे में पिछले साल के अपने खातों निर्धारित तिथि से पहले लेखापरीक्षित मिल जाएगा व्यापार पर ले जाने के व्यक्ति, और उस तारीख से पहले निर्धारित प्रपत्र में इस तरह के ऑडिट की रिपोर्ट प्राप्त करते हैं.
प्र.20. इस खंड की व्याख्या के तहत, "निर्धारित तिथि" पिछले वर्ष के अंत से चार महीने की समाप्ति की तारीख का मतलब है, या एक से अधिक पिछले वर्ष प्रारंभ होने से पहले अंतिम समय सीमा समाप्त हो, जो पिछले साल के अंत से, वहाँ हैं जहाँ निर्धारण वर्ष या जो भी बाद में निर्धारण वर्ष के जून, 30 दिन की.
(3) 1985/01/04 से प्रभाव के साथ आयकर (संशोधन) द्वारा डाला आयकर नियम, 1962 के नियम, 1985 के 6G नियम अनुभाग 44AB तहत आवश्यक लेखापरीक्षा रिपोर्ट प्रस्तुत किया जा रहा है जिस तरह से और फार्म निर्धारित करता है. ये नियम 31-1-1985 पर अधिसूचित किया गया.
(4) अभ्यावेदन की संख्या इस वर्ष "निर्धारित तिथि" द्वारा अंकेक्षित खातों प्राप्त करने में उनकी कठिनाइयों व्यक्त निर्धारिती और विभिन्न व्यापार संगठनों की ओर से प्राप्त किया गया है. बात तदनुसार बोर्ड द्वारा विचार किया गया है. इस खंड के आपरेशन के पहले वर्ष किया जा रहा है और प्रासंगिक नियम केवल 31-1-1985 पर, बोर्ड की विफलता के लिए खंड 271B के तहत दंड कार्यवाही खंड 44AB के प्रावधानों का अनुपालन करने के लिए फैसला किया है कि अधिसूचित किया गया था कि पर विचार नहीं करना चाहिए मामलों जहां में, आकलन वर्ष 1985-86 के लिए शुरू किया जाना:
(मैं) नियम 6G साथ पढ़ा खंड 44AB के तहत निर्धारित लेखापरीक्षा रिपोर्ट 30-9-1985 द्वारा प्राप्त किया गया है; और
(Ii) धारा 140A के तहत आत्म मूल्यांकन कर आयकर रिटर्न दाखिल करने के लिए धारा 139 (1) के तहत निर्धारित सामान्य अवधि के भीतर भुगतान किया गया है.
परिपत्र: नहीं 422 [एफ सं 201/156/85-IT (ए) द्वितीय], 19-6-1985 दिनांकित.
नोट: ऊपर परिपत्र इतो वी. में भेजा गया था अरुण कुमार भुवालका [1992] 40 आईटीडी 373 (Cal.)377.

