56 : परिपत्र सं. 56, 19-03-1971 दिनांकित
परिपत्र सं.
56
परिपत्र की तिथि
19/03/1971
दस्तावेज़ अपलोड की तिथि
19/03/1971
कराधान कानून (संशोधन) अधिनियम, 1970 - परिपत्र सं. 56, 19-3-1971 दिनांक
कराधान कानून (संशोधन) अधिनियम, 1970
एक नज़र में संशोधन
धारा / अनुसूची |
विवरण |
आयकर अधिनियम |
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10 (1) |
"कृषि आय" 91-95 की परिभाषा |
10 (5), (6) (मैं) |
भारत 96-98 में कार्यरत भारतीय नागरिकों से प्राप्त की यात्रा रियायत / सहायता के मूल्य, और पारित होने के धन या विदेशी राष्ट्रीयता के व्यक्तियों से प्राप्त की मुफ्त / रियायती बीतने के मूल्य के कर से छूट |
10 (6) (VIIa), 40 (क) (वी) |
विदेशी तकनीशियनों 68-75 के पारिश्रमिक के कर से छूट |
10 (26) |
टैक्स से अनुसूचित जनजाति के 100 सदस्यों की आय की छूट |
10 (30) |
चाय की झाड़ियों से पौधरोपण या बदलने के लिए चाय उद्योग को दी गई सब्सिडी की छूट 60-62 |
23 (1), 2 Prov. |
नवनिर्मित आवासीय इकाइयों के लिए टैक्स हॉलिडे का उदारीकरण किराया 63 पर बाहर जाने के लिए |
23 (2) |
अपने निवास 64-66 के प्रयोजनों के लिए मालिक के कब्जे में गृह संपत्ति से आय की गणना |
32 (1 ए), 32 (2), |
नवीकरण या के विस्तार पर खर्च का परिशोधन, |
34 (1) / (2), |
या सुधार, पट्टे पर व्यावसायिक परिसर 56-57 को |
35 (2) (चतुर्थ), 38 (2), |
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41 (2) / (5), 43 (1), |
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Explns. 1 व 4, |
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55 (1), 57 (द्वितीय), |
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59 (3) |
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35 दिन |
कुछ प्रारंभिक व्यय 42-47 का परिशोधन |
35E |
के लिए पूर्वेक्षण पर होने वाले खर्च का परिशोधन, और, कुछ खनिजों 48-55 का विकास |
64 (2), 10 (2), |
एक व्यक्ति की अलग संपत्ति के रूपांतरण में |
295 (2) (बी) |
संयुक्त हिन्दू परिवार की संपत्ति 81-85 |
80B (5) |
"सकल कुल आय" 101-102 की परिभाषा |
80 जी (4), Prov. |
धर्मार्थ और अन्य दान के संबंध में कटौती 103-104 |
80K |
"कर छुट्टी" मुनाफा 105-106 के कारण लाभांश के संबंध में कटौती |
80QQ |
प्रकाशन उद्योग 58-59 बुक करने के लिए कर रियायत |
80U |
टैक्स राहत अंधा या शारीरिक रूप से विकलांग व्यक्तियों के लिए 99 |
89 (1), (2) |
आदि वेतन, बकाया राशि में या अग्रिम 76 में भुगतान किया जाता है, जहां के मामलों में राहत |
112A और |
कुल आय भी शामिल है जहां एक मामले में कर की गणना |
Expln. १ |
आय राष्ट्रीय बचत प्रमाणपत्र (प्रथम अंक) पर ब्याज के रूप में 107-109 |
1 |
प्रशासनिक निर्देश 13-16 जारी करने के लिए सीबीडीटी की शक्तियां |
139 (1), Prov., |
आयकर रिटर्न प्रस्तुत करने में देरी के लिए ब्याज, |
(1 ए), (2) |
और नुकसान 17-21 के रिटर्न प्रस्तुत करने के लिए समय |
Prov., (3), |
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(4) (डी), (8) |
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140A (3), |
टैक्स 23-24 का भुगतान न होने के लिए दंड |
221 (1) |
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141, 209 (डी) |
अनंतिम मूल्यांकन के लिए प्रावधान की चूक और |
210 (3), |
10-12 परिवर्तन परिणामी |
215 (2), 233, |
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234 |
|
141A (2) |
धनवापसी 10-12 के लिए अनंतिम मूल्यांकन |
143 |
नियमित आकलन 3-9, 12 बनाने के लिए नई प्रक्रिया |
153 (2) |
मूल्यांकन के पूरा होने के लिए समय सीमा अपील में अलग सेट या 22 फिर से खोल दी |
183 (बी) |
अपंजीकृत फर्मों का आकलन 86-87 |
184 (7), 185 (2) / |
साझेदारी फर्म के लिए पंजीकरण के अनुदान के लिए प्रक्रिया |
(3) |
110-111, 113 |
185 (1), Expln. |
भागीदारों 88-90 के रूप में benamidars होने पंजीकृत फर्मों |
235, Expln. |
लाभांश 114-115 का भुगतान कंपनी के कृषि आय के कारण लाभांश पर कर राहत |
243 (1), 244 (1) / |
धन वापसी का शीघ्र निपटान 25-27 दावा |
(2) |
|
246 (जे) |
क्योंकि आवेदन / घोषणा 112-113 में कुछ दोष की एक फर्म को पंजीकरण से इनकार कर आईटीओ के आदेश के खिलाफ अपील |
253 (6), 256 (1) |
ट्रिब्यूनल से 40 उनके अपीलों और संदर्भ अनुप्रयोगों के साथ निर्धारिती द्वारा देय शुल्क |
255 (3) |
ट्रिब्यूनल 41 के भी सदस्य न्यायपीठों की क्षेत्राधिकार |
271 (4 ए) |
आय 30-31 की स्वैच्छिक प्रकटीकरण के मामलों में कमी या दंड की माफी के लिए बोर्ड के पूर्व अनुमोदन प्राप्त करने के लिए मौद्रिक सीमा |
274 (2) |
आय में 28-29 की आड़ के मामलों में आईएसी द्वारा जुर्माना लगाने के लिए मौद्रिक सीमा का अवतरण |
275 |
जुर्माना की कार्यवाही के पूरा होने के लिए समय सीमा 32-34 |
276C, 276, |
आय से प्रस्तुत वापसी में चूक के लिए अभियोजन या |
276D, 279 (3) |
खातों और नोटिस 35-39 के लिए बुलाया दस्तावेजों के उत्पादन में |
280ZA |
शहरी क्षेत्रों में 67 से औद्योगिक उपक्रमों स्थानांतरण के लिए टैक्स क्रेडिट प्रमाण पत्र |
295 (2) (केके) |
नियम बनाने की शक्ति ब्याज गणना 77 के लिए प्रक्रिया नीचे बिछाने के लिए बोर्ड में निहित |
2 के नियम 60 |
के मामले में टैक्स की बकाया राशि पर ब्याज प्रभार्य की दर |
स्कूल. |
वसूली की कार्यवाही 116 में अचल संपत्ति की बिक्री |
नियम 15 (1) (बी बी) |
सेवानिवृत्ति धन को मंजूरी प्रदान करने के लिए प्रक्रिया |
भाग एक की, |
और ग्रेच्युटी फंड और धन के निवेश या जमा |
नियम 4 (1), |
के मान्यता प्राप्त भविष्य निधि, आदि 78-80 |
11 (1) (सीसी) की |
|
पार्ट बी, और |
|
नियम 4 (1), 8A, |
|
9 (1) (बी बी) भाग की |
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4 Sch के सी. |
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संपत्ति कर अधिनियम |
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5 (1) (के माध्यम से) |
वार्षिकी जमा पर देय वार्षिकियां के मूल्य के संपत्ति कर से छूट 117-118 |
15B (3) |
आत्म मूल्यांकन 119 पर कर का भुगतान करने के लिए विफलता के लिए पेनल्टी |
18 (2), Prov. |
माफी या धन 121 की स्वैच्छिक प्रकटीकरण के मामलों में दंड की कमी के लिए प्रक्रिया |
18 (3) |
धन 120 की आड़ लिए दंड की वसूली के लिए प्रक्रिया |
18 (5) |
जुर्माना की कार्यवाही 122 के पूरा होने के लिए समय सीमा |
24 (4) 26 (2), |
साथ साथ निर्धारिती द्वारा देय शुल्क की वृद्धि |
27 (1) |
ट्रिब्यूनल 123 को उनकी अपील और संपत्ति कर के मामलों में संदर्भ अनुप्रयोगों |
44c, 44D |
शुद्ध धन के बंद गोलाई और भी संपत्ति कर देय या प्रतिदेय 124 |
46 (2) (डीडी) |
नियम बनाने की शक्ति ब्याज 125 की गणना के लिए प्रक्रिया नीचे बिछाने के लिए बोर्ड में निहित |
उपहार कर अधिनियम |
|
23 (4), 25 (2), |
साथ निर्धारिती द्वारा देय शुल्क को बढ़ाकर उनकी |
26 (1) |
उपहार कर के मामलों में अपीलीय न्यायाधिकरण के लिए अपील की और संदर्भ अनुप्रयोगों 126 |
44A, 44B |
कर योग्य उपहार और उपहार कर के बंद गोलाई, आदि 127 |
46 (2) (ई) |
नियम बनाने की शक्ति ब्याज 128 की गणना के लिए प्रक्रिया नीचे बिछाने के लिए बोर्ड में निहित |
अधिनियम अधिकर |
|
12 (6) |
अधिकर में अपीलीय न्यायाधिकरण को उनकी अपील के साथ निर्धारिती द्वारा देय शुल्क को बढ़ाकर 129 मायने रखती है |
१४ |
कुछ परिस्थितियों में अधिकर संबंधी आदेशों का संशोधन 130 |
25 (2) (डीडी) |
नियम बनाने की शक्ति ब्याज 131 की गणना के लिए प्रक्रिया नीचे बिछाने के लिए बोर्ड में निहित |
आयकर अधिनियम में संशोधन
रिफंड, और दंड लगाने के अनुदान के लिए प्रक्रिया और समय सीमा सहित, मूल्यांकन प्रक्रिया को व्यवस्थित बनाने
शीघ्र निपटान को प्राप्त करने के रूप में तो और, मामले से जुड़ा
काम और बेहतर स्वैच्छिक अनुपालन हासिल की
कर कानूनों के साथ करदाताओं द्वारा
कराधान कानून (संशोधन) अधिनियम, 1970
नियमित रूप से आकलन करने के लिए नई प्रक्रिया
(3)धारा 143 के मौजूदा प्रावधानों के तहत एक नियमित मूल्यांकन निर्धारिती सुनने या अपने खाते की किताबें और आयकर अधिकारी रिटर्न सही और पूर्ण है कि संतुष्ट है, जहां केवल अन्य सबूत की जांच के बिना रिटर्न के आधार पर किया जा सकता है. उप - धारा (1) धारा 143 का, वर्तमान में, यहां तक कि स्पष्ट त्रुटियों के लिए बदले में घोषित आय या नुकसान के लिए किसी भी समायोजन करने के लिए आयकर अधिकारी को सशक्त नहीं है. आयकर अधिकारी रिटर्न सही और पूर्ण है कि संतुष्ट नहीं है, वह आयकर अधिकारी के समक्ष भाग लेने के लिए या उनकी वापसी के समर्थन में अपने खाते की किताबें और अन्य साक्ष्य प्रस्तुत करने के लिए निर्धारिती को एक अवसर की अनुमति की आवश्यकता और है एक आकलन केवल इस तरह के खाते पुस्तकें और सबूत की परीक्षा के बाद और निर्धारिती की सुनवाई के बाद किया जा सकता है. यह प्रक्रिया नियमित आकलन के पूरा होने में परिहार्य देरी में हुई है, भले ही मामलों की थोक में विवाद की कोई ठोस बिंदु शामिल है और स्पष्ट त्रुटियों को ठीक करने के लिए इतनी के रूप में निर्धारिती द्वारा दिया गया आय केवल कुछ दिनचर्या समायोजन के अधीन है.
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(4)बदले में घोषित आय निहायत महत्व नहीं होना होता है, जहां राजस्व मामलों के रिसाव के खिलाफ की रक्षा करते हुए, विवाद के किसी भी पर्याप्त बिंदु शामिल नहीं है जो मामलों की थोक में नियमित आकलन के काम में तेजी लाने के लिए प्रशासन सक्रिय करने के लिए एक दृश्य के साथ, धारा 143 एक नया अनुभाग द्वारा प्रतिस्थापित किया गया है. एवजी के रूप में उप - धारा (1) धारा 143 का, यह उसके द्वारा निर्धारिती या उत्पादन की उपस्थिति की आवश्यकता के बिना एक नियमित मूल्यांकन करना, आयकर रिटर्न की प्राप्ति के बाद, आयकर अधिकारी के लिए खुला होगा वापसी के समर्थन में कोई सबूत, और बदले सभी मामलों में सही और पूर्ण है कि संतुष्ट किया जा रहा बिना. इस तरह के एक "सारांश" आकलन करने में, आयकर अधिकारी बदले में घोषित आय या नुकसान के लिए कुछ समायोजन करने का अधिकार होगा. ये समायोजन के माध्यम से किया जाएगा:
. किसी भी अगर एक यह उनके साथ, बदले में किसी भी अंकगणितीय त्रुटियों और खातों और दस्तावेजों सुधार;
बी रिटर्न में दावा नहीं किया है, हालांकि किसी भी कटौती, भत्ता या इस तरह के बदले में उपलब्ध जानकारी के आधार पर, खातों और दस्तावेजों प्रथम दृष्टया, है जो, राहत, स्वीकार्य इजाजत दी.; और
सी. बदले में दावा किया है किसी भी कटौती, भत्ता या राहत अनुमति न देने, लेकिन इस तरह की वापसी, खातों और दस्तावेजों में उपलब्ध जानकारी के आधार पर अमान्य प्रथम दृष्टया, है जो,.
आयकर अधिकारी भी धारा 32 के तहत पूर्ववर्ती निर्धारण वर्ष से आगे लाया अनवशोषित ह्रास के कारण कटौती की वजह से प्रभाव देने के लिए, एक संक्षिप्त कर निर्धारण करने में, आवश्यक हो जाएगा (2); धारा 33 के तहत आगे लाया अनवशोषित विकास छूट (2) (ख); अनवशोषित विकास भत्ता अनुभाग 33A के तहत (2) (ख); (2) (i) धारा 35 के तहत पूर्व 1967/01/04 के लिए वैज्ञानिक अनुसंधान पर खर्च किए गए पूंजीगत व्यय का उचित किस्त; धारा 35 क के तहत पेटेंट अधिकार और कॉपीराइट के अधिग्रहण पर पूंजीगत व्यय (1); नई धारा 35 दिन तहत मुनाफे के खिलाफ amortisable हैं जो कुछ प्रारंभिक व्यय (1); के लिए पूर्वेक्षण पर व्यय या निर्दिष्ट खनिजों का विकास नई धारा 35E (1) के तहत मुनाफे के खिलाफ amortisable; राजधानी धारा 36 (1) (नौ) को पहले परंतुक के तहत किसी भारतीय कंपनी द्वारा किए गए परिवार नियोजन पर खर्च के लिए; अनवशोषित नुकसान के रूप में स्वीकार्य हैं, जो पहले साल से आगे लाया एक धारा 72 के तहत बंद सेट (1); या खंड 73 (2); या धारा 74 (1); और खंड 80J तहत बंद सेट के लिए पात्र है जो "कर छुट्टी" मुनाफे में कमी (3). इन मदों के संबंध में संक्षिप्त कर निर्धारण में अनुमति दी जाए राशि पहले निर्धारण वर्ष या वर्षों के लिए, यदि कोई हो, नियमित आकलन में की गई गणना के आधार पर किया जा रहा है. [यह तथापि, एक संक्षिप्त कर निर्धारण करने में, निर्धारिती के मामले में पिछले एक आकलन के रिकॉर्ड धारा 143 में वर्णित समायोजन करने के प्रयोजन के लिए ही कहा जा सकता है कि उल्लेख किया जा सकता है (1) (ख) (iv ), और ये किसी भी अन्य उद्देश्य के लिए इस्तेमाल नहीं किया जा सकता. उदाहरण के लिए, यह पहले साल के मूल्यांकन में लाभ इस तरह से अनुमान लगाया गया था, भले ही पुस्तकों में दिखाया गया है कि अधिक से सकल लाभ का एक उच्च दर लागू करने से लाभ के लिए एक अतिरिक्त बनाने के लिए आयकर अधिकारी के लिए खुला नहीं है और अपील में पुष्टि की गई. ब्याज का भुगतान किया गया है दावा किया है, जिस पर मात्रा एक अतीत में निर्धारिती की आय में जोड़ा गया है, भले ही ऋण पर ब्याज के संबंध में किसी भी दावे अस्वीकृत करने के लिए एक संक्षिप्त कर निर्धारण कर रही है जबकि इसी तरह, यह आयकर अधिकारी के लिए खुला नहीं होगा अस्पष्टीकृत कैश क्रेडिट के रूप में मूल्यांकन. धारा 143 के अधीन किए गए मूल्यांकन (1) कार्यवाही एक ताजा आकलन करने के लिए धारा 143 (2) के तहत शुरू कर रहे हैं जहां सिवाय, अंतिम होगा.
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प्र.5. उप - धारा (2) धारा 143 के एवजी के रूप में कुछ निश्चित परिस्थितियों में खाते और अन्य सबूत की पुस्तकों के लिए बुला कार्यवाही की दीक्षा के लिए प्रदान करता है. आय का रिटर्न प्राप्त हो गया है जहां आयकर अधिकारी, धारा 143 धारा 143 के तहत (1), सीधे मुद्दे पर एक नोटिस के तहत एक "सारांश" आकलन करने के बिना (2) निर्धारिती को निर्धारिती की उपस्थिति की आवश्यकता होती है या हो सकता है वापसी के समर्थन में खाता किताबें और अन्य सबूत के उत्पादन,. ऐसे एक मामले में, नियमित आकलन के पूरा होने के लिए प्रक्रिया मौजूदा कानून के तहत के रूप में लगभग एक ही हो जाएगा.
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प्र.6. धारा 143 के तहत नोटिस (2) एक आकलन धारा 143 के तहत बनाया गया है, जहां एक मामले में भी जारी किया जा सकता है (1). ऐसे मामलों में एक नोटिस जारी, तथापि, निरीक्षण सहायक आयुक्त के पूर्व अनुमोदन प्राप्त किया जाता है कि आवश्यकता के अधीन किया जाएगा. इस तरह के नोटिस जारी करने के लिए आधार आयकर अधिकारी यह आवश्यक या समीचीन इस संबंध में निर्धारिती या प्रमाण प्रस्तुत की उपस्थिति की आवश्यकता द्वारा वापसी की शुद्धता और पूर्णता को सत्यापित करने के लिए समझता है कि हो जाएगा.
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प्र.7. धारा 143 के तहत नोटिस (2) वापसी के समर्थन में खाता किताबें और अन्य साक्ष्य प्रस्तुत करने के लिए निर्धारिती पर बुला निर्धारिती खंड के अधीन किए गए "सारांश" आकलन करने के लिए वस्तुओं के एक मामले में जहां आयकर अधिकारी द्वारा जारी किया जाना चाहिए 143 (1) और इस निमित्त आयकर अधिकारी को एक आवेदन बनाता है. इस तरह के आवेदन धारा 143 के तहत मूल्यांकन के परिणाम में जारी मांग की नोटिस की सेवा की तिथि से एक माह के भीतर किया जा रहा है (1). मामलों की इस प्रकार में, निरीक्षण सहायक आयुक्त के पूर्व अनुमोदन धारा 143 के तहत नोटिस जारी करने से पहले प्राप्त किया जा करने की आवश्यकता नहीं होगी (2). धारा 143 के तहत एक अत्यधिक आकलन के खिलाफ निर्धारिती को एक और रक्षा के रूप में (1), यह विशेष रूप से धारा 143 को दूसरे परंतुक में प्रदान की है, (2), कि निर्धारिती धारा 143 (1) के तहत मूल्यांकन पर आपत्ति की है, जहां एक महीने की निर्धारित अवधि के भीतर आयकर अधिकारी को बनाया एक आवेदन, निर्धारिती, यह बदले में अंकगणितीय त्रुटियों के सुधार से संबंधित नहीं है insofar के रूप में विवादित टैक्स के संबंध में डिफ़ॉल्ट में खाते होने का नहीं माना जाएगा या दस्तावेजों. प्रकृति के किसी भी समायोजन करने निर्धारिती वस्तुओं उप खंड में निर्दिष्ट जहां दूसरे शब्दों में, (II), (ग) और (iv) खंड (ख) धारा 143 (1), इस तरह के समायोजन के कारण टैक्स करेगा धारा 143 के तहत मूल्यांकन के आधार पर निर्धारिती से स्वस्थ नहीं (1). इसके अलावा, कोई ब्याज भी अनुभाग 220 के तहत इस तरह के टैक्स के संबंध में प्रभार्य हो जाएगा (2). यह, हालांकि, विवादित टैक्स की वसूली करने और ब्याज की वसूली करने के लिए पट्टी, धारा 143 के तहत मूल्यांकन के अनुसरण में की गई मांग के लिए केवल संबंध में चल रही है कि उल्लेख किया जा सकता है (1). यह धारा 143 के तहत नए सिरे से आकलन के अनुसरण में उठाया जा सकता है, जो मांग की वसूली के लिए कोई प्रासंगिकता होगा (3).
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8 उप - धारा (3) एवजी के रूप में धारा 143 के खाते में पुस्तकों और अन्य सबूत की जांच के बाद और निर्धारिती सुनने के बाद नियमित मूल्यांकन के पूरा होने की परिकल्पना की गई है. कोई मूल्यांकन धारा 143 के तहत बनाया गया है, जहां (1), धारा 143 के तहत मूल्यांकन (3), पहले नियमित रूप से मूल्यांकन किया जाएगा, और इस संबंध में नए प्रावधान है, मोटे तौर पर मौजूदा प्रावधान के समान है. एक "सारांश" मूल्यांकन धारा 143 के तहत बनाया गया है, जहां (1), धारा 143 के तहत मूल्यांकन (3) एक "ताजा" नियमित रूप से मूल्यांकन किया जाएगा. इस तरह के एक ताजा आकलन निर्धारिती धारा 143 (1) के अधीन किए गए आकलन पर आपत्ति की है, जहां मामलों में अनिवार्य है, वहीं स्थिति (2) पर आयकर अधिकारी द्वारा जारी किया गया है धारा 143 के तहत नोटिस जिन मामलों में अलग है निरीक्षण सहायक आयुक्त के पूर्व अनुमोदन प्राप्त करने के बाद उसकी मर्जी. मामले के उत्तरार्द्ध प्रकार में एक ताजा आकलन के आयकर अधिकारी धारा 143 के अधीन किए गए मूल्यांकन (1) किसी भी सामग्री के संबंध में, गलत अपर्याप्त या अधूरा है राय है कि केवल जहाँ किए जाने की जरूरत है. धारा 143 को स्पष्टीकरण (3) धारा 143 के तहत एक आकलन (1) एक सामग्री के संबंध में, गलत अपर्याप्त या अधूरा होने के रूप में माना जाएगा जिन परिस्थितियों में निर्दिष्ट करता है. इन परिस्थितियों में निम्नलिखित हैं:
1कि मूल्यांकन में निर्धारित कुल आय की राशि निर्धारिती कर लिए ठीक से प्रभार्य है जिस पर कुल आय की राशि से अधिक है या छोटा होता है.
प्र.20. कि मूल्यांकन में निर्धारित के रूप में देय कर की राशि निर्धारिती द्वारा ठीक से देय कर की राशि से अधिक है या छोटा होता है.
(3)कि मूल्यांकन में निर्धारित के रूप में किसी भी नुकसान की राशि एक उचित अभिकलन पर अवधार्य, यदि कोई हो, नुकसान की राशि से अधिक है या छोटा होता है.
(4)कि मूल्यांकन में निर्धारित मूल्यह्रास भत्ता, विकास छूट या किसी भी अन्य भत्ता या कटौती की राशि मूल्यह्रास भत्ता, विकास छूट या, जैसा भी मामला हो, अन्य भत्ता या आय के तहत ठीक से स्वीकार्य कटौती की राशि से अधिक है या छोटी है कर अधिनियम.
प्र.5. कि मूल्यांकन में निर्धारित के रूप में वापसी की राशि होने के कारण एक उचित अभिकलन पर, यदि कोई हो, धन वापसी की राशि से अधिक है या छोटा होता है.
प्र.6. निर्धारिती उप - धारा के तहत मूल्यांकन किया गया है, जिसमें स्थिति (1) वह ठीक से निर्धारणीय है जिसमें स्थिति से अलग है. इस प्रयोजन के लिए, "स्थिति" एक व्यक्ति, एक हिन्दू अविभाजित परिवार या धारा 2 (31) में कर योग्य संस्थाओं के रूप में सूचीबद्ध हैं जो व्यक्ति के किसी अन्य श्रेणी के रूप में निर्धारिती के वर्गीकरण का मतलब है, और निर्धारिती एक साझेदारी फर्म, जहां इसकी एक पंजीकृत फर्म या एक अपंजीकृत फर्म के रूप में वर्गीकरण.
कराधान कानून (संशोधन) अधिनियम, 1970
9 यह धारा 153 में निर्दिष्ट समय सीमा (1) धारा 143 के तहत सभी आकलन करने के लिए लागू है कि नोट किया जाए. तदनुसार, धारा 143 के तहत आकलन (1) के रूप में भी (3) धारा 143 के तहत उन [परवाह किए बगैर इस तरह के आकलन धारा 143 के तहत सारांश आकलन के पूरा होने के बाद किया जाता है कि क्या (1) या अन्यथा] अवधि के भीतर पूरा किया जाना होगा सीमा धारा 153 में निर्दिष्ट (1). इस प्रकार, आकलन वर्ष 1969-70 या किसी भी बाद में वर्ष के लिए आकलन एक वापसी या जो भी बाद में संशोधित रिटर्न, दाखिल करने की तारीख से निर्धारण वर्ष या एक वर्ष के अंत से दो साल के भीतर पूरा किया जाना होगा. निर्धारण वर्ष के अंत से 8 साल के वैकल्पिक समय सीमा, बेशक, धारा 271 (1) (ग) के अंतर्गत आने वाले मामलों में लागू होगी.
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अनन्तिम निर्धारण
10 धारा 143 के तहत नियमित रूप से आकलन कर की नई स्कीम (1) में स्पष्ट मामलों के लिए लौट आय या नुकसान के लिए कुछ समायोजन करने के लिए आयकर अधिकारी अधिकृत रूप में, एक अनंतिम मूल्यांकन के निर्माण के लिए खंड 141 में मौजूदा प्रावधान कर मांग को हटा दिया गया है. हालांकि, अतिरिक्त में भुगतान कर की वापसी के अनुदान के लिए एक अनंतिम मूल्यांकन के निर्माण के लिए अनुभाग 141A में मौजूदा प्रावधान, कुछ संशोधनों के साथ रखा गया है. उस धारा के तहत एक अनंतिम आकलन कर रही है जबकि इन संशोधनों में से एक के तहत आयकर अधिकारी बदले में घोषित आय या नुकसान के लिए कुछ समायोजन करने के लिए, के लिए अधिकृत है. ये समायोजन धारा 143 के तहत एक संक्षिप्त कर निर्धारण में बनाया जा सकता है जो समायोजन करने के लिए सभी मामलों में समान हैं (1). अन्य संशोधन नियमित आकलन वापसी की प्राप्ति की तारीख से 6 महीने के भीतर नहीं किया जाता है, जहां आयकर अधिकारी के रिफंड देने के लिए इतना रूप में अनुभाग 141A के तहत एक अनंतिम मूल्यांकन करने के लिए बाध्य किया जाएगा कि प्रभाव के लिए है निर्धारिती द्वारा भुगतान अतिरिक्त कर.
कराधान कानून (संशोधन) अधिनियम, 1970
प्र।11.खंड 141 की चूक को परिणामी, कुछ संशोधन वर्गों 209, 210, 215, 233 और 234 तो अनुभाग 141 के लिए उन वर्गों में संदर्भ छोड़ के रूप में किया गया है.
कराधान कानून (संशोधन) अधिनियम, 1970
प्र.12. नई मूल्यांकन प्रक्रिया के संचालन की गुंजाइश - नियमित रूप से आकलन करने के लिए नई प्रक्रिया, अधिक भुगतान कर की वापसी के अनुदान के लिए एक अनंतिम मूल्यांकन के निर्माण के लिए मौजूदा प्रावधान में कर संशोधन की मांग करने का एक अनंतिम आकलन करने के लिए मौजूदा प्रावधान की चूक , और पिछले पैराग्राफ में निर्दिष्ट परिणामी संशोधन, 1970/01/04 पर बल में आ जाएगा और तदनुसार, नई प्रक्रिया निर्धारण वर्ष 1971-72 से प्रभाव से लागू होंगे. इन प्रक्रियात्मक प्रावधान हैं, नई प्रक्रिया आय की वापसी 1971/01/04 पर या के बाद किया जाता है, जहां 1970-71 और उसके पहले के साल के रूप में भी वापसी से पहले किया जाता है जहां आकलन वर्ष के लिए आकलन के संबंध में भी लागू होंगे उस तारीख, लेकिन कोई कार्यवाही मौजूदा कानून के तहत अनंतिम मूल्यांकन या नियमित मूल्यांकन के माध्यम से 1971/01/04 से पहले शुरू कर दिया गया है. यह भी आयकर अधिकारी कर मांग करने के लिए एक "अनंतिम" मूल्यांकन करने के लिए 31-3-1971 के बाद, यह प्रासंगिक अनुभाग 141 के रूप में 1 से कानून का हिस्सा नहीं रहेगा अनुमति नहीं होगी कि नोट किया जाए -4-1971. इस आय में से एक वापसी उस तारीख से पहले प्राप्त होता है, भले ही ऐसा हो जाएगा.
[धारा 28, 29, 30, 35, 36, 37, 39 और संशोधन अधिनियम के 40]
कराधान कानून (संशोधन) अधिनियम, 1970
कुछ मामलों के संबंध में प्रशासनिक निर्देश जारी करने के लिए केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड की शक्तियां
प्र.13. अधीनस्थ अधिकारियों को निर्देश जारी करने के लिए केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड की शक्तियों से संबंधित धारा 119 1971/01/04 से प्रभाव के साथ एक नया अनुभाग द्वारा प्रतिस्थापित किया गया है. एवजी के रूप में अनुभाग 119 के तहत (1), बोर्ड अधिनियम के समुचित प्रशासन और ऐसे अधिकारियों और में कार्यरत अन्य सभी व्यक्तियों के लिए अन्य आयकर अधिकारियों को आदेश, निर्देश और निर्देश जारी करने, वर्तमान में, शक्ति होगा अधिनियम के क्रियान्वयन के आदेश, निर्देश और बोर्ड के निर्देशों का पालन और पालन करने के लिए बाध्य होंगे. यह, हालांकि, आदेश, निर्देश या बोर्ड के निर्देशों के इस तरह के एक विशेष आकलन करने के लिए या किसी विशेष तरीके से एक विशेष मामले के निपटान के लिए किसी भी आयकर प्राधिकरण की आवश्यकता के रूप में नहीं होगा स्पष्ट किया गया है कि. इस स्थिति में पहले से ही अदालत के फैसले से स्थापित किया गया है. मौजूदा अनुभाग 119 के तहत के रूप में (1), आदेश, निर्देश या बोर्ड के निर्देशों उसकी अपीलीय कार्यों के अभ्यास में अपीलीय सहायक आयुक्त के विवेक के साथ हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए.
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प्र.14. अनुभाग 119 का एक नया उप - धारा (2) के तहत बोर्ड विशेष रूप से आकलन और राजस्व की वसूली के काम की उचित और कुशल प्रबंधन के उद्देश्य के लिए प्रशासनिक निर्देशों और निर्देश जारी करने का अधिकार दिया गया है. इस तरह के निर्देशों या निर्देश आय या मामलों के वर्ग के किसी भी वर्ग के संबंध में सामान्य या विशेष आदेश के माध्यम से हो सकता है. इस तरह के आदेश के दिशा निर्देशों, सिद्धांतों या मूल्यांकन या राजस्व का संग्रह या दंड के लगाने के लिए कार्यवाही की दीक्षा से संबंधित काम में अन्य आयकर अधिकारियों द्वारा अपनाई जाने वाली प्रक्रियाओं आगे निर्धारित कर सकते हैं. इस तरह के आदेश भी धारा 143 (नियमित मूल्यांकन की प्रक्रिया), धारा 144 (सबसे अच्छा निर्णय मूल्यांकन पक्षीय बना), धारा 147 और 148 (मूल्यांकन या भाग निकले आय के पुनर्मूल्यांकन के लिए आगे बढ़ने से), वर्गों 154 के प्रावधानों में से किसी का छूट में हो सकता है और 155 (संशोधन या आकलन का संशोधन) और धारा 210 (एडवांस टैक्स की मांग के लिए आयकर अधिकारी के आदेश), या आय के प्रस्तुत वापसी में चूक के लिए वर्गों 271 और 273 (दंड में निहित दंड कार्यवाही की दीक्षा से संबंधित प्रावधानों की , आदि खातों के उत्पादन, आय और अग्रिम करदाता स्वयं के अनुमान पर टैक्स) के भुगतान में चूक की आड़. इस तरह के आदेश, तथापि, निर्धारिती के प्रतिकूल नहीं होगा. यह भी विशेष रूप से बोर्ड यह तो, इस तरह के आदेश प्रकाशित किया है और सामान्य जानकारी के लिए परिचालित होने का कारण करने के लिए जनता के हित में आवश्यक है कि राय है कि जहां प्रदान की गई है.
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प्र.15. बोर्ड की शक्तियों को बढ़ा दिया गया है, जिसमें एक अन्य क्षेत्र अधिनियम के प्रावधानों के किसी भी आवेदन का मनोरंजन से आयकर अधिकारियों पट्टी या कारण के कानून के तहत किसी भी छूट, कटौती, वापसी या किसी भी अन्य राहत के लिए दावा जिन मामलों के संबंध में है , कारण के लिए इस तरह के आवेदन या दावा के निर्माण के लिए निर्धारित समय सीमा समाप्त हो गई है कि. बोर्ड अनुभाग 119 (2 (ख) के आयुक्त या इस तरह के आवेदन को स्वीकार करते हैं या यहां तक कि समय सीमा की समाप्ति के बाद दावा और विधि के अनुसार योग्यता के आधार पर इसके साथ सौदा करने के लिए आयकर अधिकारी को अधिकृत करने के तहत अधिकार दिया गया है. बोर्ड, इस उद्देश्य के लिए, यह इस वास्तविक कठिनाई से बचने के लिए वांछनीय या समीचीन मानता मामलों में जहां किसी भी मामले या वर्ग के संदर्भ में सामान्य या विशेष आदेश कर सकते हैं.
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प्र.16. उप - धारा (3) धारा 119 के एवजी के रूप में, हर आयकर अधिकारी ने अपने निरीक्षण के निदेशक द्वारा मार्गदर्शन या के लिए उसे जारी निर्देशों का पालन और पालन करेगा कि प्रभाव के लिए अनुभाग 119 (2) में मौजूदा प्रावधान को बरकरार रखे आयकर आयुक्त या निरीक्षण सहायक आयुक्त जिसका अधिकार क्षेत्र में वह कार्य कर रहा है.
[संशोधन अधिनियम की धारा 25]
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आयकर रिटर्न प्रस्तुत करने में देरी, और नुकसान की प्रस्तुत वापसी के लिए समय के लिए ब्याज के आरोप से संबंधित प्रावधानों में संशोधन
प्र.17. आय का रिटर्न प्रस्तुत करने में देरी के लिए ब्याज के आरोप से संबंधित प्रावधान और घाटा दिखा वापसी प्रस्तुत के लिए उपलब्ध समय स्तर एक और अधिक ध्वनि पर जगह के रूप में तो धारा 139 में संशोधन किया गया है. मौजूदा धारा 139 के तहत, प्रति वर्ष 9 फीसदी की दर से साधारण ब्याज आयकर अधिकारी द्वारा किए गए एक आवेदन पर वापसी के प्रस्तुत करने के लिए समय बढ़ा दिया गया है जिन मामलों में निर्धारित तिथि से परे रिटर्न प्रस्तुत करने में देरी के लिए प्रभार्य है इस संबंध में निर्धारिती. इस उद्देश्य के लिए निर्धारित तिथि, मामलों की व्यापकता में आकलन वर्ष की 30 सितंबर है और व्यवसाय या पेशे के खातों 31 दिसंबर ब्याज के बाद समाप्त होने के एक साल के लिए रखा जाता है जहां मामलों में ही वापसी के प्रस्तुत करने में देरी के लिए प्रभार्य है निर्धारण वर्ष 31 दिसम्बर से परे आय. कोई रुचि नहीं है, तथापि, निर्धारिती रिटर्न प्रस्तुत करने में विफल रहता है और मूल्यांकन धारा 144 के तहत पक्षीय किया जाता है जिन मामलों में प्रभार्य है.
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प्र.18. वर्तमान में धारा 139 के परन्तुक में समाहित कर रहे हैं, जो ब्याज के आरोप के लिए उपर्युक्त प्रावधानों, (1), अब मौजूदा उप - धारा (8 बदल देता है जो एक नया उप - धारा (8) में एक संशोधित रूप में शामिल किया गया है ) कि खंड की. धारा 139 के नए उप - धारा (8) के तहत, यह विशेष रूप से ब्याज आय की वापसी निर्धारित तिथि से सुसज्जित नहीं है, जहां सभी मामलों में प्रभार्य होगा कि उपलब्ध कराई गई है. इस तरह के ब्याज प्रभार्य होगा न केवल वापसी के बाद निर्धारित तिथि लेकिन यह भी वापसी सभी को सुसज्जित नहीं है जहां के मामलों में दी गई है जिन मामलों में. मौजूदा प्रावधान के तहत के रूप में, ब्याज निर्धारण वर्ष के 1 अक्टूबर से, मामलों की व्यापकता में, में गिना जाएगा. हालांकि, कुल आय पिछले साल तुरंत निर्धारण वर्ष पिछले वर्ष के 31 दिसंबर के बाद समाप्त हो गई है, जिसके लिए व्यापार या पेशे से कोई आय भी शामिल है जहां मामलों में, ब्याज निर्धारण वर्ष की 1 जनवरी से गिना जाएगा. यह भी है, जबकि वापसी सब पर सुसज्जित नहीं है जहां मामलों में, वापसी निर्धारित तिथि के बाद सुसज्जित है जहां मामलों में, ब्याज की गणना की जाएगी और वापसी की प्रस्तुत करने की तिथि को आरोप लगाया कि स्पष्ट कर दिया गया है ब्याज गणना की और धारा 144 के तहत मूल्यांकन के पूरा होने की तारीख तक कर वसूल किया जाएगा. ब्याज देगा के आरोप के आधार, सभी मामलों में, यदि कोई हो, अग्रिम कर से कम भुगतान किया है और किसी भी स्रोत पर कर कटौती की के रूप में नियमित मूल्यांकन पर निर्धारित कुल आय पर देय कर की राशि हो. ब्याज के लिए दायित्व आयकर अधिकारी आयकर रिटर्न प्रस्तुत करने के लिए तिथि बढ़ा दिया गया है या नहीं, विचार के संबंध के बिना पैदा होगा. कोई वापसी सुसज्जित है जहां मामलों में, रिटर्न प्रस्तुत करने में देरी के लिए ब्याज लगाने के लिए प्रावधान, नव 1971/01/04 से कानून में पेश किया जाता है, निर्धारण वर्ष से संबंधित इस तरह के मामलों में रुचि के लिए कोई दायित्व नहीं होगा 1970-71 या किसी भी पहले साल.
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प्र.19.आगे धारा 139 के नए उप - धारा (8), एक स्पष्टीकरण में, प्रदान करता है एक पंजीकृत फर्म के मामले में ब्याज या अनुभाग 183 के तहत एक पंजीकृत फर्म के रूप में मूल्यांकन किया है जो एक अपंजीकृत फर्म की गणना के लिए आधार (ख) होगा कि यह एक अपंजीकृत फर्म है कि आधार पर फर्म की कुल आय पर देय होगा कि कर किया. यह प्रावधान (क) धारा 139 के परन्तुक (iii) खंड के उपखंड में मौजूदा प्रावधान की तर्ज पर है (1). इसी प्रकार, प्रभाव को धारा 139 की उपधारा में मौजूदा प्रावधान (1 ए) के एक मामले में ब्याज देय था जिस पर कर की राशि की अपील, सुधार या संशोधन के रास्ते, द्वारा एक कार्यवाही का एक परिणाम के रूप में कम हो जाता है, जहां कि ब्याज के हिसाब से कम किया जाएगा और भुगतान किसी भी अतिरिक्त ब्याज, वापस किया, नई उपधारा के खंड (ख) के तहत जारी किया जा रहा है (8). धारा 139 की उप - धारा (1 ए) के हिसाब से हटा दिया गया है.
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प्र.20. कुछ परिस्थितियों के तहत आयकर रिटर्न प्रस्तुत करने में देरी खंड के लिए दूसरे परंतुक में बनाए रखा जा रहा है के लिए किसी भी व्यक्ति द्वारा देय ब्याज को कम या माफ करने के लिए आयकर अधिकारी के अधिकार के जो धारा 139 की उपधारा में मौजूदा प्रावधान (8) (क) नए उप - धारा (8). (2), आयकर में इसके अलावा, विशिष्ट शक्ति खंड में 295 का एक नया खंड (केके) के तहत, बोर्ड में निहित किया गया है निर्दिष्ट करने के लिए प्रक्रिया के लिए सरकार द्वारा देय निर्धारिती या ब्याज द्वारा देय ब्याज की गणना में पालन किया जाना नियम इस तरह के ब्याज ऐसी अवधि एक माह का एक अंश भी शामिल है, और भी जिन परिस्थितियों में और निर्धारिती द्वारा देय ब्याज की क्षुद्र मात्रा में हो सकता है किस हद तक निर्दिष्ट मामलों में जहां गणना की जानी है जिसके लिए अवधि के बंद गोलाई सहित निर्धारिती, नजरअंदाज कर दिया.
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प्र.21. आयकर सशक्त बनाने के लिए इतनी के रूप में उप - धारा (3) सिर "मुनाफा और व्यापार या पेशे के लाभ" या सिर "पूंजीगत लाभ" के तहत के तहत एक नुकसान दिखा वापसी के प्रस्तुत करने के लिए संबंधित धारा 139 का संशोधन किया गया है अपने विवेक, इस उद्देश्य के लिए उसे करने के लिए किया जा रहा है एक आवेदन पर इस तरह की वापसी प्रस्तुत करने के लिए समय में विस्तार करने के लिए अधिकारी. वर्तमान में, विशेष रूप से इस तरह की वापसी प्रस्तुत करने के लिए समय का विस्तार करने के लिए आयकर अधिकारी को सशक्त बनाने का कोई प्रावधान नहीं है.
[धारा में संशोधन अधिनियम की 26 और 55 (बी)]
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अनुभाग 146 के तहत अपील में रद्द करना या फिर से खोल आकलन के पूरा होने के लिए समय सीमा
प्र.22.(I) धारा 144 के अधीन किए गए मूल आकलन रद्द कर दिया गया है: आकलन और reassessments पूरा करने के लिए समय सीमा के संबंध में धारा 153, जिन मामलों में किए जाने के लिए नए सिरे से आकलन के पूरा होने के लिए एक समय सीमा, प्रदान करने के लिए इतनी के रूप में संशोधन किया गया है अनुभाग 146 के तहत निर्धारिती द्वारा एक आवेदन पर आयकर अधिकारी द्वारा; या (ii) मूल आकलन अपीलीय सहायक आयुक्त या आयुक्त द्वारा अपीलीय न्यायाधिकरण या संशोधन में से अलग सेट या अपील में रद्द कर दिया है. इस प्रयोजन के लिए एक नई उपधारा (2) धारा 153 में सम्मिलित किया गया है. इस उपधारा के तहत, (मैं) में उल्लिखित मामलों में नए सिरे से मूल्यांकन मूल मूल्यांकन के तहत आयकर अधिकारी द्वारा रद्द कर दिया गया था, जिसमें वित्तीय वर्ष की समाप्ति से दो वर्ष की समाप्ति से पहले किसी भी समय किया जा सकता है अनुभाग 146. (Ii) में उल्लिखित मामलों में, ताजा आकलन अपीलीय सहायक आयुक्त या अपीलीय न्यायाधिकरण के आदेश आयुक्त या द्वारा प्राप्त होता है जिसमें वित्तीय वर्ष की समाप्ति से दो वर्ष की समाप्ति से पहले किसी भी समय किया जा सकता है , जैसा भी मामला हो, संशोधन में आदेश आयुक्त द्वारा पारित कर दिया है. इस तरह के ताजा आकलन के उप - धारा (1) या आकलन या reassessments पूरा करने के लिए धारा 153 की उपधारा (2) में निर्दिष्ट समय सीमा समाप्त हो गई है, भले ही उपर्युक्त समय सीमा के भीतर पूरा किया जा सकता है. धारा 153 के मौजूदा प्रावधानों के तहत (3), इस तरह के ताजा आकलन के किसी भी समय सीमा के अधीन नहीं हैं. धारा 153 के नए उप - धारा (2) के तहत निर्धारित समय सीमा केवल आकलन वर्ष 1971-72 या बाद में किसी भी वर्ष के लिए आकलन के संबंध में लागू होंगे.
[संशोधन अधिनियम की धारा 31]
न्यायिक विश्लेषण
: 22 निम्नलिखित टिप्पणियों के साथ, आईटीओ 1991 टैक्स एलआर 521 (आईटीएटी दिल्ली) वी. राम कुमार गुप्ता में पर भरोसा पैरा - में समझाया
"8. हम प्रतिमिनट दलों की सीख प्रतिनिधियों की प्रस्तुतियाँ माना जाता है. हम अधिनियम की धारा 153 की उपधारा (2) के मैदान पढ़ने पर यह सीमा केवल आकलन साल 1971-72 और बाद के मूल्यांकन वर्षों के लिए लागू है कि स्पष्ट है कि सीखा विभागीय प्रतिनिधि के साथ सहमत हैं. हम धारा 153 की उपधारा (2) 1971/01/04 से प्रभाव के साथ कराधान कानून (संशोधन) अधिनियम, 1970 द्वारा डाला गया था उल्लेख है कि हो सकता है. सेंट्रल 19-3-1971 के तहत के रूप में स्थिति स्पष्ट सर्कुलर नं 56 के तहत जारी व्याख्यात्मक नोट में प्रत्यक्ष कर बोर्ड: -
****** "(पी. 523).
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टैक्स का भुगतान न होने के लिए दंड
प्र 23 आत्म मूल्यांकन पर देय कर का भुगतान न - आत्म मूल्यांकन पर कर के भुगतान से संबंधित धारा 140A, 1971/01/04 से प्रभाव के साथ एक नया अनुभाग द्वारा प्रतिस्थापित किया गया है. परिणामी संशोधन इसके अलावा, धारा 141 की चूक से उत्पन्न, उप - धारा (3) धारा 140A के, एवजी के रूप में, निर्धारिती उप - धारा (1) के तहत आवश्यक रूप आत्म मूल्यांकन पर कर का भुगतान करने में विफल रहता है कि जहां प्रदान करता है वह एक समय में लगातार किश्तों के बजाय में जारी चूक के मामले में, लगाया जा सकता है टैक्स देय है और इस तरह के दंड का 50 प्रतिशत की सजा अप करने के लिए उत्तरदायी होगा. जुर्माना imposable इच्छाशक्ति की कुल, हालांकि, कर की 50 फीसदी तक सीमित किया. अनुभाग 140A में मौजूदा प्रावधान के तहत (3), दंड अधिरोपित करने के लिए शक्ति केवल एक बार प्रयोग किया जा सकता है. यथा संशोधित प्रावधान के तहत, यह डिफ़ॉल्ट की गंभीरता के अनुसार दंड की मात्रा को विनियमित करने के लिए संभव हो जाएगा. मौजूदा प्रावधान के तहत के रूप में, किसी भी तरह के दंड लगाने से पहले, निर्धारिती को सुनवाई का उचित मौका दिया जाएगा. ऐसे मामलों में एक से अधिक अवसर पर जुर्माना लगाने का सत्ता किसी भी पिछले एक साल के लिए आत्म - मूल्यांकन पर कर की अदायगी में चूक, 1971/01/04 से पहले हुई होने के मामलों में जहां 1971/01/04 से प्रभावी हो जाएगा , (अनंतिम मूल्यांकन या नियमित मूल्यांकन के बिना बनाया गया है) उस तारीख को या उसके बाद जारी है, यह एवजी के रूप में 50 प्रतिशत की सीमा के अध्यधीन, धारा के तहत एक जुर्माना या दंड लगाने का आयकर अधिकारी के लिए खुला होगा कर की, जुर्माना पहले ही 1971/01/04 से पहले प्रयोग नहीं किया गया है लेवी के लिए शक्ति प्रदान की है.
[संशोधन अधिनियम की धारा 27]
कराधान कानून (संशोधन) अधिनियम, 1970
प्र 24 टैक्स का भुगतान न होने के लिए दंड की मांग की - धारा 221 कि खंड के मौजूदा उप - धारा (1) के लिए एक नई उपधारा (1) प्रतिस्थापन के वैसे, 1971/01/04 से प्रभावी संशोधन किया गया है. एवजी के रूप में उप - धारा यह स्पष्ट मांग कर के भुगतान में डिफॉल्ट के मामलों में दंड आयकर अधिकारी ने लगाया है, और, इसके अलावा, यह इस तरह के दंड आयकर अधिकारी जब लगाया नहीं किया जाएगा प्रदान करता है कि बनाता है डिफ़ॉल्ट और पर्याप्त कारणों के लिए किया गया था कि संतुष्ट. मौजूदा उप - धारा (1) के तहत अधिकार दंड निर्दिष्ट नहीं किया गया है और कोई विवेक वह डिफ़ॉल्ट अच्छे के लिए था वह संतुष्ट है कि जहां भी मामलों में एक दंड अधिरोपित करने के लिए नहीं आयकर अधिकारी को दिया जाता है लेवी के लिए सशक्त और पर्याप्त कारण हैं. संशोधन जुर्माना डिफ़ॉल्ट के गुरुत्वाकर्षण से संबंधित है जो सुरक्षित होगा. डिफ़ॉल्ट 1971/01/04 से पहले हुई है, लेकिन कोई जुर्माना, वास्तव में, कि आज तक लगाया गया है जहां मामलों में, यह जुर्माना लगाने से परहेज करने के लिए आयकर अधिकारी के लिए खुला होगा, तो वह निर्धारिती सुनने के बाद डिफ़ॉल्ट और पर्याप्त कारणों के लिए किया गया था कि संतुष्ट है.
[संशोधन अधिनियम की धारा 38]
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धनवापसी दावों के शीघ्र निपटान
प्र.25. धारा के कारण बाद के लिए धन की वापसी के लिए एक निर्धारित अवधि के भीतर नहीं दी है जहां निर्धारिती को केन्द्र सरकार द्वारा ब्याज के भुगतान से संबंधित 243 और 244,, आम तौर पर ब्याज देय होगा जो बाद की अवधि को कम करने की दृष्टि से संशोधन किया गया है ऐसे मामलों. धनवापसी निर्धारिती की कुल आय केवल प्रतिभूतियों या लाभांश या दोनों पर ब्याज से आय के होते हैं जिन मामलों में दावे की प्राप्ति से छह महीने से परे देरी हो रही है अगर मौजूदा अनुभाग 243 के तहत, ब्याज केंद्र सरकार द्वारा देय है. निर्धारिती इन के अलावा अन्य स्रोतों से भी आय है जहां मामलों में, ब्याज कुल आय आकलन पर निर्धारित किया जाता है, जिस पर तारीख से तीन माह की समाप्ति की तारीख से चलाता है. अपील, पुनरीक्षण या अन्य कार्यवाही में एक आदेश से उत्पन्न एक वापसी इस तरह के आदेश की तारीख से छह महीने के भीतर नहीं दी है कि अगर मौजूदा अनुभाग 244 के तहत, ब्याज केंद्र सरकार द्वारा देय हो जाता है. छह महीने की एक समान अवधि भी किसी भी क्रम से उत्पन्न धन वापसी धन वापसी को जन्म देने के आदेश एक अपील या आगे कार्यवाही या उस का विषय है कि इस आधार पर आयुक्त के पूर्वानुमोदन से रोका गया है, जहां के मामलों में भी लागू होता है कानून के तहत किसी भी अन्य कार्यवाही लंबित है.
कराधान कानून (संशोधन) अधिनियम, 1970
26 रिफंड के अनुदान में तेजी लाने के लिए एक दृश्य के साथ, तीन महीने के लिए एक समान अवधि अब वापसी के अनुदान में किसी भी देरी केन्द्र सरकार द्वारा उसे ब्याज का भुगतान करने के लिए निर्धारिती हकदार होगा जो परे वर्गों 243 और 244 में निर्दिष्ट किया गया है. हालांकि, यह कम समय सीमा का पालन करने की सुविधा की दृष्टि से, यह तीन महीने की अवधि एक कैलेंडर महीने के अंत में समाप्त हो जाएगा कि सुरक्षित किया गया है. इस प्रकार:
1निर्धारिती की कुल आय केवल प्रतिभूतियों या लाभांश या दोनों पर ब्याज के होते हैं जहां मामलों में, तीन महीने की अवधि वापसी के लिए दावा किया जाता है, जिसमें इस महीने के अंत से गिना जाएगा.
प्र.20. मूल्यांकन पर उत्पन्न होने वाले धन की वापसी के मामले में तीन महीने की अवधि में कुल आय निर्धारित किया जाता है, जिसमें इस महीने के अंत से गिना जाएगा.
(3)अपील, पुनरीक्षण या किसी भी अन्य कार्यवाही में किसी भी आदेश का एक परिणाम के रूप में उत्पन्न होने वाले धन की वापसी के मामले में तीन महीने की अवधि अपील, पुनरीक्षण या अन्य कार्यवाही में आदेश पारित कर दिया है, जिसमें इस महीने के अंत से गिना जाएगा.
(4)किसी भी क्रम से उत्पन्न धन वापसी धन वापसी को जन्म देने के आदेश आदि अपील की विषयवस्तु है कि जमीन पर, पर रोक लगाई है, जहां मामलों में, तीन महीने की अवधि इस महीने के अंत से गिना जाएगा जिसमें इस तरह के आदेश पारित कर दिया है.
धन वापसी की गणना और वापसी का आदेश जारी करने के लिए कार्रवाई केवल अपीलीय सहायक आयुक्त या अपीलीय न्यायाधिकरण के आदेश या आयुक्त, में किसी भी देरी के संशोधन में आदेश का उसके द्वारा प्राप्त होने के बाद आयकर अधिकारी द्वारा लिया जा सकता है आयकर अधिकारी को इस तरह के आदेश का संचार तदनुसार धनवापसी देने के लिए उसके पास उपलब्ध 3 महीने की अवधि कम हो जाएगा. अपीलीय और revisionary अधिकारियों की ओर से शीघ्र कार्रवाई तदनुसार रिफंड केन्द्र सरकार द्वारा ब्याज के भुगतान जिससे नहीं रही है के लिए 3 महीने और दायित्व की निर्धारित अवधि के भीतर प्रदान कर रहे हैं कि यह सुनिश्चित करने के क्रम में के लिए कहा जाता है.
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प्र.27. वर्गों 243 और 244 में संशोधन 1971/01/04 से प्रभाव में आ जाएगा. संशोधित समय सीमा है, इसलिए उस तारीख को या उसके बाद किए गए दावों वापसी, और पूरा आकलन पर उत्पन्न होने वाले रिफंड के लिए, या अपील, पुनरीक्षण या 1971/01/04 पर या उसके बाद में पारित अन्य कार्यवाही में आदेशों से बाहर करने के लिए ही लागू होगी. वापसी नहीं है, तो पिछले 1971/01/04 और पूरा आकलन पर उत्पन्न होने वाले धन की वापसी के लिए किए गए धन की वापसी के दावों के मामले में, या अपील, पुनरीक्षण या पारित कर अन्य कार्यवाही में आदेशों के बाहर, पूर्व 1971/01/04 के लिए, ब्याज अर्जित करेंगे मौजूदा समय सीमा की समाप्ति से पहले दी गई.
[धारा 42 और संशोधन अधिनियम के 43]
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दंड के लगाने से संबंधित प्रावधानों को व्यवस्थित बनाने
प्र 28 आय की आड़ के मामलों में निरीक्षण सहायक आयुक्त द्वारा जुर्माना लगाने के लिए मौद्रिक सीमा का अवतरण - धारा 274 वर्तमान मामलों आय की आड़ लिए imposable न्यूनतम जुर्माना रुपये से अधिक हो गया है कि जहां प्रदान करता है. 1,000 निरीक्षण सहायक आयुक्त को आयकर अधिकारी द्वारा कहा जाता है और बाद के अकेले ऐसे मामलों में जुर्माना लगाने की शक्ति होगी कि किया जाना चाहिए.यह प्रावधान आय की आड़ लिए imposable न्यूनतम जुर्माना से परहेज करने की मांग कर का 20 फीसदी के बराबर राशि थी जब एक समय में बनाया गया था. हालांकि, 1968/01/04 से प्रभाव के साथ, आय की आड़ के लिए न्यूनतम जुर्माना छुपा आय के बराबर राशि के लिए बढ़ा दी गई है. आय की आड़ के लिए दंड के पैमाने में इस परिवर्तन के संदर्भ में, धारा 274 में निर्दिष्ट मौद्रिक सीमा ऊपर की ओर संशोधित किया गया है. के रूप में संशोधन धारा 274 के तहत आयकर अधिकारी मूल्यांकन पर आयकर अधिकारी द्वारा निर्धारित रूप में छुपा आय रुपये से अधिक है, जिसमें केवल उन मामलों निरीक्षण सहायक आयुक्त का उल्लेख करने की आवश्यकता होगी. 25,000. अन्य मामलों में, आय की आड़ के लिए जुर्माना खुद को आयकर अधिकारी द्वारा imposable हो जाएगा.
कराधान कानून (संशोधन) अधिनियम, 1970
प्र.29. धारा 274 का संशोधन, उसके अनुसार, रुपये की वृद्धि की सीमा 1971/01/04 से प्रभावी है, और होगा. छुपा आय के मामले में 25,000 जुर्माना लगाने के लिए कार्यवाही उस तारीख को या उसके बाद शुरू कर रहे हैं, जहां के मामलों में लागू होगी. ऐसी कार्यवाही, 1971/01/04 से पहले रुपये की मौजूदा सीमा शुरू कर रहे हैं. Imposable न्यूनतम दंड के मामले में 1,000, लागू होगा.
[संशोधन अधिनियम की धारा 49]
कराधान कानून (संशोधन) अधिनियम, 1970
प्र.30. आय की स्वैच्छिक प्रकटीकरण के मामलों में कमी या दंड की माफी के लिए बोर्ड के पूर्व अनुमोदन प्राप्त करने के लिए मौद्रिक सीमा का अवतरण - खंड 271 (4 ए) के लिए मौजूदा प्रावधान के तहत आयकर आयुक्त पिछले प्राप्त करने के लिए आवश्यक है माफी या अनुभाग 271 (1) आय विवरणी प्रस्तुत करने में दोष के लिए (मैं), या आय की आड़ के मामलों में लगाया न्यूनतम जुर्माना, केवल जहां इस तरह के न्यूनतम तहत imposable न्यूनतम जुर्माना, की कमी करने के लिए बोर्ड की मंजूरी जुर्माना, प्रकटीकरण द्वारा कवर सभी वर्षों के लिए, रुपये से अधिक है. कुल में 50,000.वित्त अधिनियम, 1968 रुपये की इस मौद्रिक सीमा के नीचे छुपा आय, के बराबर राशि के लिए आय की आड़ लिए imposable न्यूनतम दंड के पैमाने में वृद्धि को देखते हुए. 50,000 से ऊपर की ओर संशोधित किया गया है. के रूप में संशोधन अनुभाग 271 (4 ए) के परन्तुक के तहत आयकर आयुक्त आय छिपाना के लिए माफी या imposable न्यूनतम जुर्माना की कमी करने के लिए बोर्ड के पूर्व अनुमोदन प्राप्त करने के लिए आवश्यक हो जाएगा, जहां केवल सम्मान में छुपा आय जुर्माना imposable है जिनमें से रुपये से अधिक है. प्रकटीकरण द्वारा कवर सभी वर्षों के लिए कुल में 5 लाख. मामलों में छुपा आय रुपये है. 5 लाख या उससे कम, आयुक्त बोर्ड को इस मामले की चर्चा करते हुए बिना न्यूनतम दंड को कम या माफ करने के लिए सक्षम हो जाएगा. रुपये की मौद्रिक सीमा. 50,000 माफी या आयकर रिटर्न प्रस्तुत करने में चूक के लिए imposable दंड की कमी करने के लिए बोर्ड की मंजूरी प्राप्त करने की आवश्यकता के संबंध में लागू करने के लिए जारी है.
कराधान कानून (संशोधन) अधिनियम, 1970
प्र.31.अनुभाग 271 का संशोधन, उसके अनुसार, रुपये की संशोधित सीमा 1971/01/04 से प्रभावी है, और होगा. छुपा आय के मामले में 5,00,000 आय की आड़ लिए imposable न्यूनतम जुर्माना छूट देना या कम करने के आदेश उस तारीख को या उसके बाद पारित कर दिया है जिन मामलों में लागू होगी.
[संशोधन अधिनियम की धारा 48]
कराधान कानून (संशोधन) अधिनियम, 1970
प्र.32. जुर्माना की कार्यवाही के पूरा होने के लिए समय सीमा - दंड कार्यवाही के पूरा होने के लिए समय सीमा निर्दिष्ट करता है जो धारा 275 एक नया अनुभाग द्वारा प्रतिस्थापित किया गया है. आय की आड़ या नोटिस या करदाता स्वयं अनुमान, आदि पर अग्रिम कर का भुगतान करने के लिए विफलता के लिए बुलाया वापसी या खातों प्रस्तुत करने में चूक के लिए मौजूदा अनुभाग, दंड कार्यवाही के तहत, तारीख से दो साल के भीतर पूरा किया जाना आवश्यक है जुर्माना कार्यवाही शुरू किए गए थे, जिनमें से पाठ्यक्रम में कार्यवाही के पूरा होने की. इस समय सीमा के संचालन अपीलीय सहायक आयुक्त आयकर अधिकारी ने आगे की जांच के लिए मूल्यांकन के खिलाफ अपील remands या हटाता है या छुपाया आय और विभाग तक ले जाता है के कारण बनाया अलावा कम कर देता है जिन मामलों में व्यावहारिक कठिनाइयों में हुई है अपीलीय न्यायाधिकरण के समक्ष आगे अपील में बात. कभी कभी, छुपा आय की मात्रा पर अंतिम निर्णय केवल दो साल की समय सीमा समाप्त होने के बाद उपलब्ध हो जाता है.
कराधान कानून (संशोधन) अधिनियम, 1970
प्र.33. धारा 275, एवजी के रूप में, निष्फल काम को कम करने और निर्धारिती को कठिनाई से बचने, ऐसे मामलों में कठिनाइयों obviating करना है. एवजी के रूप में अनुभाग के तहत, अध्याय XXI के प्रावधानों के तहत एक दंड अधिरोपित एक व्यवस्था बनाने के लिए समय सीमा, आमतौर पर, वित्तीय वर्ष की समाप्ति से दो साल हो जाएगा, जिसमें कार्यवाही के लगाने के लिए जो कार्रवाई के पाठ्यक्रम में जुर्माना शुरू किया गया है, पूरा कर रहे हैं. हालांकि, प्रासंगिक मूल्यांकन या अन्य आदेश अपीलीय सहायक आयुक्त या अपीलीय न्यायाधिकरण, दंड कार्यवाही को पूरा करने के लिए समय सीमा को आयकर अधिकारी द्वारा एक अपील के लिए एक अपील का विषय है, जहां एक मामले में या तो हो जाएगा ऊपर कहा गया है या अपीलीय सहायक आयुक्त या का आदेश, मामला अपीलीय न्यायाधिकरण का हो सकता है, के रूप में आयुक्त द्वारा प्राप्त की है, जिसमें इस महीने के अंत से छह महीने की अवधि के रूप में दो साल की अवधि, जो भी अवधि बाद में समाप्त हो रहा है . यह दो साल की अवधि आगे से एक वित्तीय वर्ष के अंत में समाप्त हो जाएगा, के बजाय अलग अलग तारीखों पर वर्तमान में वित्तीय वर्ष के दौरान, और छह महीने की अवधि एक कैलेंडर महीने के अंत में समाप्त हो जाएगा कि नोट किया जाए. इस सीमा अवधि की समाप्ति पर कर प्रशासन द्वारा सतर्कता का अभ्यास की सुविधा और कहा कि जुर्माना कार्यवाही अच्छा समय में सभी मामलों में पूरा कर रहे हैं यह सुनिश्चित करेगा. खंड 275 के लिए स्पष्टीकरण - प्रदान करता है जो कि (आयकर अधिकारी निरीक्षण सहायक आयुक्त या अपीलीय सहायक आयुक्त होने के अधिकार क्षेत्र के कार्यालय की नियुक्ति में परिवर्तन के कारण) निर्धारिती और किसी भी अवधि के फिर से सुनवाई में लगने वाले समय के दौरान जो दंड कार्यवाही अदालत के एक आदेश से रोक लगा दिया गया है, सीमा की अवधि कंप्यूटिंग में बाहर रखा जाएगा - बनाए रखा गया है.
कराधान कानून (संशोधन) अधिनियम, 1970
प्र.34. अनुभाग 275 का संशोधन 1971/01/04 से प्रभाव में आ जाएगा. तदनुसार, संशोधित समय सीमा दंड कार्यवाही के लिए लागू होगी भी जुर्माना कार्यवाही करने के लिए 1971/01/04 पर उस तारीख और लंबित पहले शुरू के रूप में, उस तिथि को या उसके बाद शुरू अनुभाग 275 के मौजूदा प्रावधानों में निर्दिष्ट सीमा की अवधि प्रदान नहीं की है पहले ही समाप्त हो गई है.
[संशोधन अधिनियम की धारा 50]
कराधान कानून (संशोधन) अधिनियम, 1970
आयकर रिटर्न प्रस्तुत करने में या नोटिस के लिए बुलाया खातों और दस्तावेजों का निर्माण करने में चूक के लिए अभियोजन
प्र.35. खंड 276 के मौजूदा प्रावधानों के तहत धारा 139 के तहत आवश्यक रूप स्वेच्छा से उनकी आय के रिटर्न प्रस्तुत करने में विफल रहता है, जो एक व्यक्ति के मामले में मुकदमा चलाने के लिए कोई दायित्व नहीं है (1). धारा 139 के तहत नोटिस के लिए बुलाया आय विवरणी प्रस्तुत करने के लिए उचित कारण या बहाना के बिना विफल रहता है, जो एक व्यक्ति (2) या धारा 142 के तहत नोटिस के लिए बुलाया खातों और दस्तावेजों का उत्पादन करने में विफल रहता है (1) अभियोजन के लिए उत्तरदायी है, लेकिन ऐसे मामलों में एक अदालत के समक्ष सजा पर सजा रुपए तक केवल एक ठीक है. डिफ़ॉल्ट जारी है, जिसके दौरान हर दिन के लिए 10. पूर्व मामले में अभियोजन पक्ष और बाद के मामले में सजा पर एक बहुत ही हल्के दंड का प्रावधान के अभाव जानबूझकर आयकर रिटर्न रोक की सरल डिवाइस से आय की आड़ के लिए भारी जुर्माना से बचने के लिए कर चोरों द्वारा दुर्व्यवहार किए जाने की संभावना है या कर अधिकारियों द्वारा परीक्षा के लिए खातों और दस्तावेजों के उत्पादन से refraining द्वारा. इस तरह के अपराध का ही परिणाम आयकर रिटर्न प्रस्तुत करने के लिए विफलता के लिए पक्षीय मूल्यांकन पर निर्धारित कर का 50 प्रतिशत तक जुर्माना के अलावा, सच आय से काफी कम गिर सकता है जो एक पक्षीय मूल्यांकन, है.
कराधान कानून (संशोधन) अधिनियम, 1970
प्र.36. भी नोटिस द्वारा, या नोटिस के लिए बुलाया खातों और दस्तावेजों के निर्माण में के लिए बुलाया के रूप में जब स्वेच्छा से आय विवरणी प्रस्तुत करने में चूक के खिलाफ एक प्रभावी निवारक प्रदान करने की दृष्टि से दो नए वर्गों 276C और 276D आय में सम्मिलित किया गया है कर अधिनियम. नई अनुभाग 276C एक वर्ष या रुपये से लेकर एक ठीक करने के सश्रम कारावास की सजा के पुरस्कार के लिए प्रदान करता है. 4 रुपये तक. डिफ़ॉल्ट जारी है, या जो दोनों के दौरान हर दिन के लिए 10, अदालत के विवेक पर, एक व्यक्ति जान - बूझकर कारण समय पर प्रस्तुत करने में असफल रहने के अपराध का दोषी पाया जाता है जिन मामलों में वह खंड के अंतर्गत प्रस्तुत करने की आवश्यकता है जो आयकर रिटर्न 139 (1) या धारा 139 के तहत नोटिस (2) या धारा 148. इस प्रकार, इस अनुभाग स्वेच्छा से आय विवरणी प्रस्तुत करने में चूक को शामिल किया गया, एक नोटिस धारा 139 (2) या धारा 148 के तहत दिए जाने के बाद भी नहीं लौटने सुसज्जित है जहां भी मामले के रूप में. हालांकि, स्वेच्छा से नव कानून में पेश किया गया है आय विवरणी प्रस्तुत करने में चूक के लिए अभियोजन पक्ष के लिए प्रावधान के रूप में, यह विशेष रूप से कोई अभियोजन निर्धारण वर्ष के लिए और समावेशी ऊपर किसी भी निर्धारण वर्ष के लिए इस तरह के एक डिफ़ॉल्ट के लिए झूठ होगा कि प्रदान की गई है 1970-1971. इसके अलावा, कम और मध्यम आय वाले कोष्ठक में और कर के थोक स्रोत पर रोक लगाई या एडवांस टैक्स के माध्यम से भुगतान किया जाता है या तो जिन मामलों में करदाता को कठिनाई के खिलाफ एक रक्षा के रूप में, यह विशेष रूप से कोई अभियोजन विफलता के लिए झूठ होगा कि प्रदान की गई है शुद्ध कर नियमित मूल्यांकन पर निर्धारित मामलों में जहां स्वेच्छा से आय विवरणी प्रस्तुत करने के लिए (यानी, स्रोत पर कर कटौती और यदि कोई हो, का भुगतान अग्रिम कर से कम के रूप में सकल कर) रुपये से अधिक नहीं है. 3,000. यहां तक कि नियत तिथि की समाप्ति के बाद एक उचित अवधि के भीतर स्वेच्छा से आय विवरणी प्रस्तुत करने के लिए एक प्रलोभन के रूप में, यह भी वापसी किसी भी समय सुसज्जित है अगर कोई अभियोजन आय का इस तरह वापसी प्रस्तुत करने में देरी के लिए झूठ होगा कि प्रदान की गई है प्रासंगिक निर्धारण वर्ष के अंतिम दिन तक.
कराधान कानून (संशोधन) अधिनियम, 1970
प्र.37. नई धारा 276C 1971/01/04 से प्रभाव में आ जाएगा. तदनुसार, उस तिथि को या उसके बाद (2), या अनुभाग 148 के तहत धारा 139 के तहत दिए गए नोटिस के लिए बुलाया आय विवरणी प्रस्तुत करने में चूक नई धारा के दायरे में आ जाएगा. आय की वापसी की तिथि के बाद की वजह से हो जाता है, जहां नई धारा, यानी, 31-3-1971 के बाद इन होते हैं, जहां ऐसी चूक के लिए भी लागू होगा.
कराधान कानून (संशोधन) अधिनियम, 1970
प्र.38. नई अनुभाग 276D धारा 142 के तहत नोटिस के लिए बुलाया खातों और दस्तावेजों के उत्पादन में जानबूझकर चूक के लिए एक व्यक्ति की सजा पर सजा (1) सश्रम कारावास एक साल तक, या ठीक रुपये से लेकर होगी कि प्रदान करता है. 4 रुपये तक. डिफ़ॉल्ट जारी है, या दोनों, अदालत के विवेक पर है, जिसके दौरान हर दिन के लिए 10. यह प्रावधान भी 1971/01/04 से प्रभाव में आ जाएगा और तदनुसार, यह उस तारीख को या उसके बाद उत्पन्न होने वाली ऐसी चूक के लिए लागू होगी.
कराधान कानून (संशोधन) अधिनियम, 1970
प्र.39. नए वर्गों 276C और 276D, की प्रविष्टि करने के लिए परिणामी के लिए बुलाया आय विवरणी प्रस्तुत करने में चूक के लिए अभियोजन पक्ष से संबंधित अनुभाग 276 में मौजूदा प्रावधानों धारा 139 के तहत (2) या धारा 142 के तहत नोटिस के लिए बुलाया खातों और दस्तावेजों के उत्पादन में (1) को छोड़ दिया गया है. नई धारा 276C या 276D के तहत अपराध के लिए अभियोजन आयुक्त के कहने पर छोड़कर शुभारंभ नहीं किया जाएगा कि सुरक्षित करने के लिए इतनी के रूप में धारा 279 भी संशोधन किया गया है. यह वे कर अपराधों के लिए अभियोजन पक्ष से संबंधित अन्य वर्गों के संबंध में लागू धारा 292 के प्रावधानों के नए वर्गों 276C और 276D के तहत अपराधों के संबंध में लागू हो जाएगा कि नोट किया जाए. तदनुसार, एक प्रेसीडेंसी मजिस्ट्रेट या प्रथम श्रेणी के एक मजिस्ट्रेट के अवर कोई अदालत किसी भी तरह के अपराध की कोशिश करने के लिए सक्षम हो जाएगा.
[धारा 51, 52 और संशोधन अधिनियम के 53]
प्रावधानों में संशोधन अपीलीय न्यायाधिकरण के लिए अपील करने के लिए संबंधित
कराधान कानून (संशोधन) अधिनियम, 1970
आयकर अपीलीय न्यायाधिकरण को उनकी अपील और संदर्भ अनुप्रयोगों के साथ निर्धारिती द्वारा देय शुल्क
प्र 40 धारा 253 (6) वर्तमान में अपीलीय न्यायाधिकरण के लिए एक निर्धारिती द्वारा एक अपील रुपये की फीस के साथ किया जाएगा कि प्रदान करता है. 100 धारा 256 (1) इसी रुपए की फीस के भुगतान के लिए प्रदान करता है. हाईकोर्ट में ट्रिब्यूनल के आदेश से उत्पन्न कानून के किसी भी सवाल का उल्लेख करने के लिए अपीलीय ट्रिब्यूनल को अपने आवेदन के साथ निर्धारिती द्वारा 100. ऐसे मामलों में शुल्क की मात्रा रुपये से बढ़ा दी गई है. रुपये के लिए 100. 125, वर्गों 253 और 256 के संगत प्रावधानों में संशोधन के द्वारा. ये संशोधन 1971/01/04 से प्रभावी.
[धारा 45 और संशोधन अधिनियम के 47]
कराधान कानून (संशोधन) अधिनियम, 1970
ट्रिब्यूनल के एक सदस्य न्यायपीठों की क्षेत्राधिकार
प्र.41. धारा 255 (3) के वर्तमान राष्ट्रपति या केन्द्र सरकार द्वारा इस निमित्त प्राधिकृत अपीलीय न्यायाधिकरण के किसी अन्य सदस्य, अकेले, वह है जो की पीठ को आवंटित किया गया है जो किसी भी मामले के निपटान बैठे हो सकता है कि, अन्य बातों के साथ प्रदान करता है एक सदस्य और जो जिसकी कुल आय रुपए से अधिक नहीं है आयकर अधिकारी द्वारा गणना के रूप में एक निर्धारिती से संबंधित है. 25,000. अपीलीय न्यायाधिकरण, रुपये की मौद्रिक सीमा से अपील की त्वरित निपटान की सुविधा की दृष्टि से. खंड 255 में निर्दिष्ट 25,000 (3) रुपये की वृद्धि की गई है. 40,000 अपीलीय न्यायाधिकरण के एक एकल सदस्यीय पीठ जिनकी कुल आय रुपए से अधिक नहीं है आयकर अधिकारी द्वारा गणना के रूप में एक निर्धारिती से संबंधित है, जो किसी भी मामले में अपील के निपटान के लिए सशक्त किया जाएगा ताकि. 40,000. अनुभाग 255 का संशोधन (3) इस उद्देश्य के लिए 1971/01/04 से प्रभावी होता है.
[संशोधन अधिनियम की धारा 46]
कुछ क्षेत्रों में अर्थव्यवस्था के विकास को बढ़ावा देने के लिए कर प्रोत्साहन
कराधान कानून (संशोधन) अधिनियम, 1970
कुछ प्रारंभिक खर्च का परिशोधन
प्र.42. संशोधन अधिनियम की धारा 8 1971/01/04 से प्रभाव के साथ, दो नए वर्गों 35 दिन और 35E शुरू की है. नई धारा 35 दिन एक भारतीय कंपनी या एक कंपनी के कारोबार के प्रारंभ से पहले या एक औद्योगिक उपक्रम का विस्तार या एक नई औद्योगिक इकाई की स्थापना के संबंध में अन्य की तुलना में एक निवासी निर्धारिती द्वारा किए गए कुछ प्रारंभिक व्यय के परिशोधन के लिए प्रदान करता है. परिशोधन मामला है, पिछले वर्ष हो सकता है के रूप में व्यापार, शुरू या जिसमें पिछले वर्ष की शुरुआत 10 साल की अवधि में 10 समान किस्तों में कंपनी या अन्य करदाता के मुनाफे के खिलाफ अनुमति दी जाएगी विस्तार की जिसमें औद्योगिक उपक्रम पूरा या नई औद्योगिक इकाई उत्पादन या ऑपरेशन शुरू कर रहा है. इस तरह के परिशोधन केवल निर्दिष्ट मदों में 31-3-1970 के बाद किए गए व्यय के संबंध में अनुमति दी जाएगी. इस उद्देश्य के लिए निर्दिष्ट योग्यता व्यय के प्रमुखों को निम्नलिखित हैं:
1के संबंध में व्यय: संभाव्यता रिपोर्ट (i) तैयार करने; (द्वितीय) परियोजना रिपोर्ट तैयार करना; (Iii) बाजार सर्वेक्षण या निर्धारिती के व्यापार के लिए आवश्यक किसी भी अन्य सर्वेक्षण का आयोजन; और (iv) इंजीनियरिंग सेवाओं निर्धारिती के व्यापार से संबंधित.
व्यय की ये आइटम व्यवहार्यता रिपोर्ट या परियोजना रिपोर्ट या बाजार सर्वेक्षण या अन्य सर्वेक्षण या इंजीनियरिंग सेवाओं के संचालन की तैयारी के सिलसिले में काम, कंपनी या अन्य के संगठन के भीतर किया जाता है जहां परिशोधन के लिए अर्हता प्राप्त करेंगे यह एक बाहर चिंता करने के लिए सौंपा गया है जहां, खुद निर्धारिती, या, ऐसी चिंता केन्द्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड ने इस प्रावधान का उद्देश्य के लिए मंजूरी दे दी है, कुछ समय के लिए है.
प्र.20. स्थापना या निर्धारिती के कारोबार के संचालन से संबंधित किसी भी उद्देश्य के लिए कर निर्धारिती और किसी भी अन्य व्यक्ति के बीच किसी भी समझौते का मसौदा तैयार करने के लिए कानूनी शुल्क.
(3)एक कंपनी के मामले में, आइटम के तहत गिरने व्यय के अतिरिक्त (1) और (2) के ऊपर, व्यय की निम्न आइटम्स भी परिशोधन के लिए अर्हता प्राप्त करेंगे:
. कंपनी के संघ के ज्ञापन और लेख का मसौदा तैयार करने के लिए एक कानूनी शुल्क;
बी ज्ञापन और संगम अनुच्छेद की छपाई पर खर्च.
सी कंपनी अधिनियम, 1956 के प्रावधानों के तहत कंपनी के पंजीकरण के लिए शुल्क.
जनता में शेयर की सदस्यता, या कंपनी की डिबेंचर के लिए इस मुद्दे के संबंध में डी. खर्च, हामीदारी कमीशन, ब्रोकरेज और प्रारूपण, टाइपिंग, मुद्रण और प्रॉस्पेक्टस के विज्ञापन के लिए शुल्क के माध्यम से.[यह प्रॉस्पेक्टस का मसौदा तैयार करने के लिए कानूनी शुल्क और लेखा परीक्षकों की फीस शामिल होंगे]
केन्द्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड ने आयकर किसी अन्य मद या कानून किसी भी भत्ता या कटौती के लिए प्रदान नहीं करता है जिनके संबंध में व्यय की मदों के नियमों में निर्दिष्ट करने के लिए सशक्त, और, इस के बाद, व्यय की मदों इतना निर्दिष्ट किया जाता होगा भी खंड 35 दिन तहत परिशोधन के लिए योग्य हो.
कराधान कानून (संशोधन) अधिनियम, 1970
प्र 43 सभी निर्दिष्ट मदों में खर्च की कुल राशि, परिशोधन के उद्देश्य के लिए परियोजना की लागत का 2 प्रतिशत साढ़े तक ही सीमित रहेगा. "परियोजना की लागत" अचल संपत्तियों की वास्तविक लागत, (भूमि और भवनों के विकास पर खर्च सहित) अर्थात्, भूमि, भवन, पट्टाभूमियों, संयंत्र, मशीनरी, फर्नीचर, फिटिंग और रेलवे साइडिंग, मतलब करने के लिए परिभाषित किया गया है जो निर्धारिती की व्यापार शुरू में जो पिछले वर्ष के अंतिम दिन के रूप में निर्धारिती की पुस्तकों में दिखाया गया. परिशोधन एक मौजूदा औद्योगिक उपक्रम के विस्तार के साथ या एक नई औद्योगिक इकाई की स्थापना के संबंध में संबंध में किए गए खर्च के संदर्भ में अनुमति दी जाए कहां है, "इस परियोजना की लागत" वास्तविक लागत का मतलब करने के लिए परिभाषित किया गया है जो जैसा कि ऊपर कहा अचल संपत्तियों के मामले में हो सकता है के रूप में औद्योगिक उपक्रम का विस्तार, या पूरा कर रहा है जो पिछले वर्ष के अंतिम दिन के रूप में निर्धारिती की पुस्तकों में दिखाया गया है, नई औद्योगिक इकाई उत्पादन या आपरेशन शुरू ऐसी अचल संपत्तियों औद्योगिक उपक्रम का विस्तार या निर्धारिती की नई औद्योगिक इकाई की स्थापना के संबंध में प्राप्त या विकसित किया गया है insofar के रूप में.
कराधान कानून (संशोधन) अधिनियम, 1970
प्र.44. परिशोधन के लिए पात्र प्रारंभिक व्यय की राशि से अधिक परियोजना की लागत का 2 प्रतिशत साढ़े की सीमा लाभ उपलब्ध है जिसे करने के लिए करदाताओं की सभी श्रेणियों के लिए लागू होता है. यह इच्छाओं ताकि हालांकि, अगर एक भारतीय कंपनी के मामले में, 2 की एक वैकल्पिक छत साढ़े कंपनी के कारोबार में नियोजित पूंजी फीसदी, कंपनी द्वारा निर्वाचित किया जा सकता है. "कंपनी के कारोबार में लगाई गई पूंजी" amortized होने के लिए प्रारंभिक व्यय कारोबार के प्रारंभ से ठीक पहले किए गए थे, जहां एक मामले में, मतलब को परिभाषित किया गया है, के रूप में जारी किए गए शेयर पूंजी, डिबेंचर और लंबी अवधि के उधार की समग्र कंपनी का कारोबार शुरू में जो पिछले साल के अंतिम दिन पर. Amortized होने के लिए प्रारंभिक खर्च कंपनी या एक नई औद्योगिक इकाई की स्थापना के औद्योगिक उपक्रम के विस्तार के साथ संबंध में किए गए उन कहाँ हैं, "कंपनी के कारोबार में नियोजित पूंजी" जारी शेयर की कुल किया जाएगा पूंजी, डिबेंचर और औद्योगिक उपक्रम का विस्तार जैसा भी मामला हो, नई औद्योगिक इकाई अब तक इस तरह के पूंजी, डिबेंचर के रूप में, उत्पादन या आपरेशन शुरू, या पूरा कर रहा है जो पिछले वर्ष के अंतिम दिन के रूप में लंबे समय तक उधारी और लंबे समय तक उधारी जारी या औद्योगिक उपक्रम का विस्तार या कंपनी की नई औद्योगिक इकाई की स्थापना के संबंध में प्राप्त किया गया है. शब्द "लंबे समय तक उधारी," इस संदर्भ में, (मैं) शामिल होंगे, सरकार या भारतीय औद्योगिक वित्त निगम या औद्योगिक ऋण और भारत या है जो किसी भी अन्य वित्तीय संस्था के निवेश निगम से कंपनी द्वारा उधार किसी भी धन, , धारा 36 (1) (आठ) या किसी भी बैंकिंग संस्था के उद्देश्यों के लिए केन्द्र सरकार द्वारा अनुमोदित किया जा रहा है समय के लिए; और (ii) ऐसे धन उधार ली गई हैं या ऋण किए गए है जिसके तहत शर्तें दौरान उसके भुगतान के लिए प्रदान करते हैं जहां पूंजी संयंत्र और मशीनरी, भारत के बाहर खरीद के संबंध में एक विदेशी देश में कंपनी द्वारा किए गए किसी भी उधार धन या ऋण एक नहीं कम 7 वर्ष की अवधि.
कराधान कानून (संशोधन) अधिनियम, 1970
प्र.45. यह परिशोधन के लिए प्रावधान व्यय मुनाफे के खिलाफ एक कटौती के रूप में स्वीकार्य है जिसके तहत आयकर कानून में किसी अन्य प्रावधान के उल्लंघन करने का इरादा नहीं है ध्यान दिया जा सकता है. उदाहरण के लिए, जहां व्यापार में पहले से ही है जो एक कंपनी, डिबेंचर के मुद्दे पर होने वाले खर्च incurs, और इस तरह के व्यय यह के मामले में उच्चतम न्यायालय के निर्णय के आधार द्वारा किए गए है, जिसमें साल के मुनाफे के खिलाफ एक कटौती के रूप में स्वीकार्य है इंडिया सीमेंट्स लिमिटेड सीआईटी [1966] 60 आईटीआर 52 वी., धारा 35 दिन एक 10 साल की अवधि में मुनाफा खिलाफ amortized होने के लिए खर्च के दायरे के भीतर है कि व्यय लाने का असर नहीं होगा. किसी भी व्यय निमित्त निर्धारिती द्वारा किए जा रहे एक दावे पर खंड 35 दिन तहत परिशोधन के प्रयोजन के लिए शामिल किया गया है जहां यह, के लिए एक परिणाम के रूप में, इस तरह के खर्च में एक ही या के लिए अधिनियम के किसी अन्य प्रावधान के तहत कटौती के लिए पात्र नहीं होगा खंड 35 दिन के किसी भी अन्य निर्धारण वर्ष ख़बरदार उप - धारा (6).
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प्र.46.योग्यता व्यय किए गए है जिसमें वर्ष या साल के लिए निर्धारिती की मात्रा में एक चार्टर्ड एकाउंटेंट द्वारा लेखा परीक्षा की गई है, जहां केवल एक कंपनी या एक सहकारी समिति के अलावा अन्य एक निर्धारिती के मामले में प्रारंभिक व्यय का परिशोधन स्वीकार्य होगी या (2) कंपनी अधिनियम, 1956 की धारा 226 की शर्तों के तहत कंपनियों के एक लेखा परीक्षक के रूप में कार्य करने के लिए नियुक्त किए जाने का हकदार है जो एक व्यक्ति. ऐसे एक मामले में, निर्धारिती आगे खंड के तहत कटौती का दावा किया है, जिसमें प्रथम वर्ष के लिए आय के बारे में उनकी वापसी के साथ प्रस्तुत करने की आवश्यकता है, इस उद्देश्य के लिए निर्धारित किया जा करने के लिए एक फार्म में इस तरह के ऑडिट की रिपोर्ट, विधिवत हस्ताक्षर किए और निर्धारित हो सकता है, के रूप में इस तरह के चार्टर्ड एकाउंटेंट या अन्य व्यक्ति और ऐसे विवरण के आगे की स्थापना द्वारा सत्यापित.
कराधान कानून (संशोधन) अधिनियम, 1970
प्र.47. खंड 35 दिन के तहत प्रारंभिक व्यय का परिशोधन का लाभ आमतौर पर केवल व्यय जो भारतीय कंपनी या अन्य निर्धारिती के लिए उपलब्ध हो जाएगा. हालांकि, लाभ परिशोधन करने का हकदार है जो एक भारतीय कंपनी के उपक्रम परिशोधन के 10 साल की अवधि के भीतर समामेलन की एक योजना में एक और भारतीय कंपनी को सौंप दिया है, जहां एक मामले में गुम नहीं होगा. उस घटना में, पिछले वर्ष के संबंध में कटौती जिसमें समामेलन जगह लेता है और 10 साल की अवधि के भीतर निम्नलिखित पिछले साल, एकीकृत कंपनी के लिए और न मिलाकर कंपनी की अनुमति दी जाएगी.
[संशोधन अधिनियम की धारा 8]
कराधान कानून (संशोधन) अधिनियम, 1970
के लिए पूर्वेक्षण पर होने वाले खर्च का परिशोधन, और, कुछ खनिजों का विकास
प्र 48 भी संशोधन अधिनियम की धारा 8 द्वारा डाला नई धारा 35E, जुड़े खनिज की निर्दिष्ट खनिज या समूहों के लिए या एक खदान या अन्य प्राकृतिक धरोहर के विकास पर पूर्वेक्षण से संबंधित किसी भी कार्य पर पूर्ण और विशेष रूप से किए गए व्यय का परिशोधन के लिए प्रदान करता है जुड़े खनिजों के किसी भी तरह के खनिज या समूह का. इस प्रावधान के प्रयोजनों के लिए खनिज और जुड़े खनिजों के समूह में संशोधन अधिनियम की धारा 58 द्वारा डाला एक नया सातवीं अनुसूची में निर्दिष्ट किया गया है.
कराधान कानून (संशोधन) अधिनियम, 1970
प्र.49. प्रारंभिक खर्च के लिए पूर्वेक्षण पर व्यय के संबंध में परिशोधन, और निर्दिष्ट खनिजों के विकास के मामले में, यह भी केवल भारतीय कंपनियों और कंपनियों के अलावा अन्य निवासी निर्धारिती के मामले में अनुमति दी जाएगी. इस तरह कंपनी की परवाह किए बिना अपनी हिस्सेदारी के पैटर्न की भारत में अपने लाभांश वाणी है, और यहां तक कि अगर परिशोधन के लाभ के एक विदेशी कंपनी के लिए उपलब्ध नहीं होंगे. यह भी आम तौर पर अनिवासी करदाताओं के लिए उपलब्ध नहीं होंगे.
कराधान कानून (संशोधन) अधिनियम, 1970
प्र.50. खंड 35E के तहत amortized होने के लिए व्यय "वाणिज्यिक उत्पादन का वर्ष" के साथ समाप्त एक 5 साल की अवधि के दौरान, 31-3-1970 के बाद निर्दिष्ट मदों में किए गए व्यय किया जाएगा, यानी, पिछले साल जो में, के रूप में एक शुरू निर्दिष्ट खनिज या जुड़े खनिजों में से किसी एक या एक से अधिक के व्यावसायिक उत्पादन पूर्वेक्षण से संबंधित किसी भी कार्रवाई का परिणाम. शब्द "पूर्वेक्षण से संबंधित ऑपरेशन" किसी भी खनिज की जमा राशि, तलाश लगाने या साबित करने के उद्देश्य के लिए और विशेष रूप से किए गए आपरेशन निष्फल या निष्फल होने का पता चला है जो किसी भी तरह के आपरेशन में शामिल शामिल हैं. के लिए पूर्वेक्षण पर व्यय, या निर्दिष्ट खनिजों का विकास पूरी तरह या आंशिक रूप से किसी अन्य व्यक्ति या प्राधिकारी द्वारा सीधे या परोक्ष रूप से पूरा किया जाता है जहां किसी भी अगर, परिशोधन ऐसे व्यय की, केवल शेष राशि के संबंध में स्वीकार्य होगी. किसी भी संपत्ति या अधिकार व्यय का एक परिणाम के रूप में अस्तित्व में लाया और निर्धारिती ऐसी संपत्ति या अधिकार के संबंध में किसी भी बिक्री, बचाना, मुआवजा या बीमा धनराशि का एहसास कर रहे हैं, जहां इसके अलावा,, तो एहसास हुआ राशि व्यय के खिलाफ बंद सेट और किया जाएगा केवल संतुलन, यदि कोई हो, परिशोधन के लिए पात्र होंगे.
कराधान कानून (संशोधन) अधिनियम, 1970
51 व्यय की निम्नलिखित श्रेणियों में विशेष रूप से खंड 35E के तहत परिशोधन के लिए व्यय पात्र से बाहर रखा गया है:
1निर्दिष्ट खनिज या जुड़े खनिजों का या में या ऐसी साइट पर किसी भी अधिकार के समूहों में से किसी के स्रोत की साइट के अधिग्रहण पर व्यय.
प्र.20. निर्दिष्ट खनिज या जुड़े खनिजों की या ऐसी जमाओं में या पर कोई अधिकार के समूहों में से किसी की जमा राशि के अधिग्रहण पर व्यय.
(3)किसी भी भवन, मशीनरी, संयंत्र या मूल्यह्रास के माध्यम से जो भत्ता के लिए फर्नीचर के संबंध में एक पूंजी प्रकृति का व्यय धारा 32 के तहत स्वीकार्य है.
कराधान कानून (संशोधन) अधिनियम, 1970
52.योग्यता व्यय का परिशोधन व्यय किया गया था जो के संबंध में किसी भी मेरा या निर्दिष्ट खनिज या जुड़े खनिजों के किसी भी अन्य प्राकृतिक धरोहर का वाणिज्यिक दोहन से उत्पन्न होने वाले मुनाफे के खिलाफ एक 10 साल की अवधि में समान किस्तों में दिया जाएगा , जहां इस तरह के वाणिज्यिक दोहन न केवल वाणिज्यिक उत्पादन पहले के किए आपरेशन का एक परिणाम के रूप में स्थापित किया गया था जहां सवाल में पूर्वेक्षण या विकास के कार्यों लेकिन यह भी से हुई. हालांकि, परिशोधन निर्धारिती की किसी भी अन्य आय के खिलाफ स्वीकार्य नहीं होगा. तदनुसार, यह विशेष रूप से एक भी वर्ष के लिए संबंधित amortisable व्यय की किस्त पूर्ण परिशोधन की अनुमति दी जानी है, जिसके खिलाफ लाभ द्वारा अवशोषित नहीं किया जा सकता है कि जहां प्रदान की गई है, अनवशोषित राशि अगले वर्ष के लिए खत्म किया और उस को जोड़ा जाएगा साल की किस्तों और इतने पर पिछले साल सफल होने के लिए. पर ले जाने के इस तरह के व्यावसायिक उत्पादन का साल से माना के रूप में 10 वीं पिछले वर्ष सहित केवल करने के लिए और ऊपर की अनुमति दी जाएगी. किसी भी अनवशोषित राशि 10 वीं वर्ष के अंत में है, तो यह लैप्स हो जाएगा.
कराधान कानून (संशोधन) अधिनियम, 1970
५३.खंड 35 दिन के लिए पूर्वेक्षण पर होने वाले खर्च का परिशोधन, और, निर्दिष्ट खनिजों के विकास के तहत प्रारंभिक व्यय का परिशोधन के मामले में भी निर्धारिती एक कंपनी या एक सहकारी अलावा किसी अन्य व्यक्ति है कि, जहां आवश्यकताओं के अधीन है समाज, व्यय किए गए है जिसमें वर्ष या वर्षों के लिए अपने खातों पैरा 46 में कहा गया है कि एक चार्टर्ड अकाउंटेंट या अन्य व्यक्ति द्वारा लेखा परीक्षा और निर्धारिती पहले वर्ष के लिए आय के बारे में उनकी वापसी के साथ प्रस्तुत है कि आवश्यकता के भी अधीन कर दिया गया है परिशोधन दावा किया है, जिसमें विधिवत चार्टर्ड एकाउंटेंट या के रूप में इस तरह के ब्यौरे आगे की स्थापना अन्य व्यक्ति द्वारा हस्ताक्षरित और सत्यापित, उद्देश्य के लिए निर्धारित किया जा करने के लिए एक फार्म में इस तरह के ऑडिट की रिपोर्ट निर्धारित किया जा सकता है.
कराधान कानून (संशोधन) अधिनियम, 1970
54 खंड 35E के तहत परिशोधन भी केवल खर्च incurs जो निर्धारिती को उपलब्ध है. हालांकि, कंपनी के उपक्रम परिशोधन के 10 साल की अवधि के भीतर समामेलन की एक योजना के तहत एक और भारतीय कंपनी को सौंप दिया है जहां परिशोधन का लाभ संरक्षित है एक भारतीय कंपनी के मामले में. ऐसी स्थिति में, समामेलन जगह लेता है और 10 साल की अवधि के शेष पिछले साल नहीं समामेली कंपनी को एकीकृत कंपनी की अनुमति दी जाएगी और जो पिछले वर्ष के संबंध में बकाया किश्तों का परिशोधन.
कराधान कानून (संशोधन) अधिनियम, 1970
55 दत्ताजीखंड 35 दिन नीचे के रूप में, यह विशेष रूप से खंड 35E के तहत कटौती का दावा किया और परिशोधन के लिए किसी भी खर्च योग्यता के संबंध में किसी भी निर्धारण वर्ष के लिए अनुमति दी गई है, जो कटौती के संबंध में व्यय तो अनुमति दी है कि (8) अनुभाग 35E में प्रदान की गई है उसी या किसी भी अन्य निर्धारण वर्ष के लिए अधिनियम के किसी अन्य प्रावधान के तहत कटौती के लिए योग्य नहीं माना जाएगा.
[धारा 8 और संशोधन अधिनियम के 58]
कराधान कानून (संशोधन) अधिनियम, 1970
, पट्टे पर व्यावसायिक परिसर के लिए नवीकरण या का विस्तार, या सुधार पर खर्च का परिशोधन
56आयकर अधिनियम के मौजूदा प्रावधानों के तहत एक निर्धारिती नवीकरण या के विस्तार पर उसके द्वारा किए गए पूंजी व्यय के संबंध में ह्रास या किसी भी अन्य कटौती के हकदार नहीं है, या एक इमारत उससे संबंधित नहीं, करने के लिए सुधार के लिए प्रयोग किया जाता है जो अपने व्यवसाय या पेशे के उद्देश्यों. 1971/01/04 से प्रभावी संशोधन अधिनियम की धारा 5 द्वारा धारा 32 में डाला एक नया उप - धारा (1 ए) के तहत प्रावधान उद्देश्य के लिए निर्धारिती द्वारा किए गए पूंजीगत व्यय पर मूल्यह्रास के अनुदान के लिए किया गया है किसी भी संरचना का निर्माण या किसी भी काम की रही पर उसके व्यवसाय या पेशे के, में या के संबंध में, और नवीकरण या के विस्तार के माध्यम से, या सुधार करने के लिए, व्यवसाय या पेशे के प्रयोजन के लिए उपयोग किया जाता है जो किसी भी इमारत, ऐसे भवन निर्धारिती द्वारा लेकिन निर्धारिती अधिभोग का एक पट्टा या अन्य अधिकार रखती है जिनके संबंध में स्वामित्व में नहीं है जहां. मूल्यह्रास केवल 31-3-1970 के बाद किए गए पूंजी व्यय के संबंध में अनुमति दी जाएगी और यह आयकर नियमों में निर्धारित किए जाने की दरों पर संरचना या काम के नीचे लिखा मूल्य के संदर्भ में अनुमति दी जाएगी. संरचना या काम बेचा जाता है, त्याग, ध्वस्त, नष्ट या यह निर्माण या गया जिसमें पिछले वर्ष की तुलना में अन्य किसी भी पिछले वर्ष में इमारत (के संबंध में पट्टा या अधिभोग की अन्य अधिकार के दृढ़ संकल्प का एक परिणाम के रूप में आत्मसमर्पण कर दिया ) किया, निर्धारिती किसी भी अगर देय संरचना या काम के नीचे लिखा मूल्य से, स्क्रैप मूल्य के साथ एक साथ लिया धन की कमी को पूरा करने के लिए बराबर एक "टर्मिनल भत्ता" के हकदार होंगे. शब्द "देय धनराशि," किसी भी संरचना या काम के संबंध में, संरचना या काम बेचा जाता है जहां किसी भी बीमा या मुआवजा उसके संबंध में देय धनराशि और, यह बेचा जाता है, जिसके लिए कीमत शामिल करने के लिए परिभाषित किया गया है. यह धारा 32 के मौजूदा प्रावधानों के तहत किया गया है "के रूप में बेच दिया" शब्द का वही अर्थ होगा, यानी, यह विनिमय के माध्यम से एक हस्तांतरण या किसी भी कानून के तहत एक अनिवार्य अधिग्रहण शामिल होंगे लेकिन एक के लिए एक कंपनी से एक हस्तांतरण शामिल नहीं होगा एकीकरण की योजना में भारतीय कंपनी.
कराधान कानून (संशोधन) अधिनियम, 1970
57 निम्नलिखित परिणामी संशोधन भी इस संबंध में आयकर अधिनियम के अन्य प्रावधानों के लिए बनाया गया है:
1धारा 32 (2) आगे अनवशोषित मूल्यह्रास भत्ता के लिए ले जाने से संबंधित संरचना या काम के संबंध में अनवशोषित मूल्यह्रास भत्ता (1 ए) एक ही तरीके से और उसी को आगे ले जाई जाएगी धारा 32 में निर्दिष्ट है कि सुरक्षित करने के लिए संशोधन किया गया है अन्य परिसंपत्तियों के संबंध में ह्रास के रूप में हद.
प्र.20. आयकर नियमों में निर्धारित किए जाने की ब्यौरे सम्मान में प्रस्तुत किया गया है केवल अगर (1 ए) की अनुमति दी जाएगी धारा 32 में निर्दिष्ट किसी संरचना या काम के संबंध में जो ह्रास सुरक्षित करने के लिए इतनी के रूप में धारा 34 (1) में संशोधन किया गया है तत्संबंधी.
धारा 32 (1 ए) के तहत सभी कटौतियों की कुल कोई कटौती में धारा 32 (1 ए) के तहत अनुमति दी है कि आगे संरचना या काम की वास्तविक लागत से अधिक है और यह नहीं है कि सुरक्षित करने के लिए इतनी के रूप में धारा 34 (2) को भी संशोधित किया गया है संरचना या काम, बेचा त्याग, ध्वस्त या नष्ट कर दिया, या निर्माण के संबंध में पट्टा या अधिभोग की अन्य अधिकार के दृढ़ संकल्प पर आत्मसमर्पण कर दिया है, जिसमें किसी भी पिछले वर्ष के संबंध.
(3)धारा 35 (2) (iv) किसी भी कटौती के किसी भी संपत्ति से पूर्ण या आंशिक रूप में प्रतिनिधित्व वैज्ञानिक अनुसंधान व्यय के संबंध में धारा 35 के तहत अनुमति दी है, जहां एक मामले में है कि सुरक्षित करने के लिए संशोधन किया गया है, कि संपत्ति के संबंध में कोई मूल्यह्रास अनुभाग के तहत अनुमति दी है 32 (1 ए).
(4)एक आनुपातिक राशि के लिए प्रतिबंधित कर दिया जाएगा इमारत आंशिक रूप से ही व्यवसाय या पेशे, धारा 32 (1 ए) के तहत मूल्यह्रास के प्रयोजनों के लिए प्रयोग किया जाता है जहां एक मामले में है कि सुरक्षित करने के लिए इतनी के रूप में धारा 38 (2) में संशोधन किया गया है.
प्र.5. धारा 41 एक नई उपधारा (2) के सम्मिलन द्वारा संशोधन किया गया है. किसी भी संरचना या काम धारा 32 में निर्दिष्ट जहां नए उप - धारा के तहत (1 ए), बेचा, त्याग, ध्वस्त, नष्ट या इमारत के संबंध में पट्टा या अधिभोग की अन्य अधिकार के दृढ़ संकल्प का एक परिणाम के रूप में आत्मसमर्पण कर दिया है और "स्क्रैप मूल्य" के साथ एक साथ लिया "देय धनराशि", यदि कोई हो, संरचना या काम के नीचे लिखा मूल्य से अधिक है, एक "संतुलन प्रभारी" अन्य मूल्यह्रास के मामले में, इस तरह के अतिरिक्त के संबंध में की जाएगी संपत्ति. वे धारा 32 (1 ए) के प्रयोजनों के लिए है के रूप में अभिव्यक्ति "धनराशि देय" और "बेचा", इस उद्देश्य के लिए, एक ही अर्थ हो जाएगा.
धारा 41 (5) भी अटकलें व्यापार में या सिर "पूंजीगत लाभ" के तहत किसी भी नुकसान को छोड़कर इस तरह के कारोबार या पेशे (के संबंध में किसी भी अनवशोषित नुकसान रोक दिया गया है जो एक व्यवसाय या पेशे के मामले में है कि प्रदान करने के लिए संशोधन किया गया है ) धारा 41 (2) के तहत कर के दायरे में है जो किसी भी आय के खिलाफ बंद का गठन किया जाएगा.
प्र.6. धारा 43 निम्नलिखित मामलों के संबंध में संशोधन किया गया है:
(1) धारा 43 के स्पष्टीकरण 1 (1) "कि बाद में व्यापार के लिए ही प्रयोग किया जाता है, जो व्यवसाय से संबंधित वैज्ञानिक अनुसंधान पर पूंजीगत व्यय का प्रतिनिधित्व एक परिसंपत्ति के सम्मान में ह्रास और" टर्मिनल भत्ता "की गणना के प्रयोजन के लिए, प्रदान करता है पहले से ही धारा 35 के तहत अनुमति दी कटौतियों से कम के रूप में वास्तविक लागत "वास्तविक लागत का मतलब होगा (1) (चतुर्थ). इस विवरण के व्यापार से संबंधित वैज्ञानिक अनुसंधान के लिए एक किराए के भवन के संबंध में धारा 32 (1 ए) में निर्दिष्ट एक संरचना या कार्य संबंधित वैज्ञानिक अनुसंधान पर किसी अन्य संपत्ति का प्रतिनिधित्व पूंजीगत व्यय के रूप में एक ही तरीके से इलाज किया जाता है कि सुरक्षित करने के लिए संशोधन किया गया है व्यवसाय के लिए.
(2) धारा 43 के स्पष्टीकरण 4 (1) एक परिसंपत्ति, एक बार निर्धारिती के थे होने और अपने व्यवसाय या पेशे के उद्देश्य के लिए उनके द्वारा इस्तेमाल किया लेकिन उसके बाद उसकी संपत्ति नहीं रह गया हो रही है, जहां एक मामले में, आवश्यक है कि प्रदान करता है वास्तव में अनुमति दी ह्रास से कम है, और आगे की वृद्धि हुई जैसा भी मामला हो उसे करने की अनुमति दी "टर्मिनल भत्ता" या, से कम - उसके द्वारा, मूल्यह्रास वह पहली परिसंपत्ति का अधिग्रहण जब वास्तविक लागत के आधार पर गणना की है जो भी कम हो धारा 41 (2) के अधीन किए गए किसी भी "संतुलन आरोप", या वास्तविक पुनर्खरीद मूल्य,. इस विवरण है कि खंड में निर्दिष्ट एक संरचना या काम के संबंध में धारा 32 (1 ए) के तहत अनुमति दी मूल्यह्रास वास्तविक लागत और, इसके अलावा, धारा 32 के तहत "टर्मिनल भत्ता" (1 ए कंप्यूटिंग में कटौती की जाती है कि सुरक्षित करने के लिए संशोधन किया गया है जैसा भी मामला हो), या काट, धारा 41 के तहत "संतुलन प्रभारी" (2 क) इस प्रावधान के प्रयोजन के लिए, जोड़ा.
प्र.7. में निर्दिष्ट के रूप में संरचना या काम के संबंध में एक पूंजी परिसंपत्ति, धारा 32 (1 ए) के तहत टर्मिनल भत्ता देय की "अधिग्रहण की लागत" (द्वितीय) का पता लगाने में कि सुरक्षित करने के लिए इतनी के रूप में धारा 55 (1) में संशोधन किया गया है ऐसी संरचना या काम के संबंध में उस अनुभाग या धारा 41 (2) के तहत, जैसा भी मामला हो, "संतुलन प्रभारी," वर्तमान में टर्मिनल भत्ता के लिए दी जा रही है या, जैसा भी मामला हो सकता है के रूप में ही उपचार प्राप्त करता है अन्य मूल्यह्रास संपत्ति के मामले में "संतुलन प्रभारी".
8 धारा 57 (ख) धारा 32 (1 ए) के तहत उस मूल्यह्रास सुरक्षित करने के लिए संशोधन किया गया है या एक इमारत के संबंध में उस खंड में निर्दिष्ट एक संरचना या काम के संबंध में अनुमति दी है, यहां तक कि जहां इस तरह के निर्माण के उद्देश्य के लिए प्रयोग किया जाता है सिर "अन्य स्रोतों से आय 'के तहत कर से कोई आय प्रभार्य कमाई.
9 धारा 41 (2) के तहत "संतुलन प्रभारी" (धारा 32 में निर्दिष्ट एक संरचना या काम के संबंध में किया जाएगा कि सुरक्षित करने के लिए इतनी के रूप में धारा 59 के एक नए उप - धारा (3) के सम्मिलन द्वारा संशोधन किया गया है 1 ए ) इमारत सिर "अन्य स्रोतों से आय 'के तहत कर से कोई आय प्रभार्य कमाने के उद्देश्य के लिए प्रयोग किया जाता है, यहां तक कि जहां.
[धारा 5, 6, 7, 9, 11, 12, 13, 14 और संशोधन अधिनियम के 15]
कराधान कानून (संशोधन) अधिनियम, 1970
पुस्तक प्रकाशन उद्योग के लिए कर रियायत
58 भारत में पुस्तकों के प्रकाशन को प्रोत्साहित करने की दृष्टि से, एक नया प्रावधान खंड 80QQ में शुरू की गई है जिसके तहत किताबें, या छपाई की गतिविधि के बिना पुस्तकों के ही प्रकाशन के मुद्रण और प्रकाशन का भारत में एक व्यापार पर ले जाने के लिए किसी भी व्यक्ति, इस तरह के व्यापार से लाभ का 20 फीसदी के बराबर रकम के बारे में उनकी कर योग्य आय की गणना में कटौती के हकदार होंगे. कटौती पाँच आकलन साल 1971-72, 1972-73, 1973-74, 1974-75 और 1975-76 के लिए स्वीकार्य होगा. यह तो मुद्रित पुस्तकों उसके द्वारा "प्रकाशित कर रहे हैं" जब तक इस धारा के तहत कटौती, पुस्तकों के "मुद्रण" के व्यापार पर किया जाता है, जो एक निर्धारिती को स्वीकार्य नहीं है ध्यान दिया जा सकता है. इस प्रावधान के प्रयोजनों के लिए, "किताबें" अखबारों, पत्रिकाओं, पत्रिकाओं, डायरी, ब्रोशर, इलाकों, पर्चे और कहा जाता है जो कुछ भी नाम से एक समान प्रकृति के अन्य प्रकाशनों में शामिल नहीं होगा. निर्धारिती या अनुभाग 80P (नव स्थापित औद्योगिक आम तौर उपक्रमों, से लाभ और लाभ के संबंध में) या खंड 80J (एक नई औद्योगिक विस्थापित लोगों को रोजगार उपक्रम से व्युत्पन्न लाभ के संबंध में) अनुभाग 80H के तहत कटौती (में भी हकदार है कहां सहकारी समितियों की आय की कुछ श्रेणियों के सम्मान), नई धारा 80QQ के तहत कटौती में शामिल पुस्तकों का प्रकाशन (या मुद्रण और पुस्तकों का प्रकाशन) से लाभ और लाभ का 20 प्रतिशत की सीमा तक स्वीकार्य होगी वर्गों 80H, 80J और 80P के तहत कटौती से कम के रूप में सकल कुल आय.
कराधान कानून (संशोधन) अधिनियम, 1970
५९.अनुभाग 80A (3) के लिए एक परिणामी संशोधन के आधार पर, यह जहां किताबें (या मुद्रण और पुस्तकों का प्रकाशन) के प्रकाशन के व्यापार पर ले जाने के व्यक्ति एक फर्म, व्यक्तियों का संघ या व्यक्तियों के शरीर, है कि सुरक्षित किया गया है नई धारा 80QQ के तहत कटौती फर्म, संस्था या शरीर की कुल आय की गणना में उपलब्ध हो जाएगा, लेकिन फिर से फर्म के भागीदारों या संघ या शरीर के सदस्यों की कर योग्य आय की गणना में उपलब्ध नहीं होगा.
[धारा 17 और संशोधन अधिनियम के 21]
कराधान कानून (संशोधन) अधिनियम, 1970
चाय की झाड़ियों से पौधरोपण या बदलने के लिए चाय उद्योग को दी गई सब्सिडी की छूट
60 रू भारत में चाय बागानों के पौधरोपण को प्रोत्साहित करने की दृष्टि से भारत सरकार ने इस तरह के पौधरोपण पर खर्च के एक हिस्से को कवर करने के लिए एक सब्सिडी देने दिया गया है. यह सब्सिडी अक्टूबर 1968 के बाद से दी जा रही है और यह चाय बोर्ड के माध्यम से कराई है. सब्सिडी पहले से ही लगाए क्षेत्रों में पुराने और गैर उत्पादक बन गया है, लेकिन यह भी के दौरान नष्ट या दूर धोया गया है जो उन लोगों को बदलने के लिए नए क्षेत्रों में चाय की झाड़ियों के रोपण के लिए है, जो उन के प्रतिस्थापन में चाय की झाड़ियों के रोपण के लिए ही नहीं दी जा रही है दार्जिलिंग जिले में बाढ़. चाय बागान के पौधरोपण में खर्च आयकर नियम, व्यय के नियम 8 के तहत, यानी, पहले से परित्यक्त नहीं किया गया था, जो पहले से ही लगाए एक क्षेत्र में मर गया है या स्थायी रूप से बेकार हो गए हैं कि झाड़ियों के प्रतिस्थापन में चाय की झाड़ियों रोपण, राजस्व के रूप में घटाया है चाय हो गई है और भारत में विक्रेता द्वारा निर्मित की बिक्री से प्राप्त आय की गणना में व्यय. [नियम 8 में यह प्रावधान इस तरह के रोपण दूर होने के कारण एक और क्षेत्र में लगाया और नष्ट या धोया गया था, जो चाय की झाड़ियों की जगह के लिए एक दृश्य के साथ किया जाता है, भले ही, लेकिन, एक नए क्षेत्र में झाड़ियों रोपण में किए गए व्यय के लिए लागू नहीं है किसी भी कारण के लिए.] ऊपर कहा गया है replanting पर खर्च में कमी के रूप में, वैकल्पिक रूप से एक राजस्व रसीद या, के रूप में या तो खातों में प्रदर्शित किया जा सकता है के रूप में भारत सरकार से एक चाय बागान से प्राप्त की सब्सिडी. चाय बागान के लिए सब्सिडी का पूरा लाभ हासिल करने के लिए एक दृश्य के साथ, यह खातों में राजस्व प्राप्ति के रूप में प्रदर्शित किया जाता है, जहां सब्सिडी की राशि, विशेष रूप से धारा 10 में डाला एक नया खंड (30) के तहत कर से छूट दी गई है . इस संशोधन 1969/01/04 से प्रभाव में आ गए हैं समझा है और, तदनुसार, आकलन वर्ष 1969-70 और बाद के वर्षों के लिए लागू होगी. सब्सिडी कि शासन के मामले में आय की गणना में इस तरह के खर्च की कटौती के प्रयोजन के लिए replanting पर व्यय के खिलाफ बंद सेट नहीं की जाएगी कि सुरक्षित करने के लिए इतनी के रूप में इसके साथ ही आयकर अधिनियम के नियम 8 पूर्वव्यापी संशोधन किया जा रहा है. तदनुसार, आकलन वर्ष 1969-70 और बाद के वर्षों के लिए, पौधरोपण पर खर्च की पूरी राशि अपने सब्सिडी की राशि से कम होने के बिना भारत में एक चाय बागान के आय की गणना में कटौती के रूप में स्वीकार्य होना जारी रहेगा .
कराधान कानून (संशोधन) अधिनियम, 1970
६१.धारा 10 का नया खंड (30) सब्सिडी देने के लिए योजना केन्द्र सरकार द्वारा सरकारी राजपत्र में अधिसूचित किया जाना चाहिए की आवश्यकता है. कदम एक प्रारंभिक तिथि पर जारी अपेक्षित अधिसूचना पास करने के लिए उठाए जा रहे हैं. नया खंड भी है कि खंड के तहत छूट के लिए पात्र होने के लिए, निर्धारिती संबंध निर्धारण वर्ष के लिए आय के बारे में उनकी वापसी के साथ या आयकर अधिकारी के रूप में इस तरह के अतिरिक्त समय के भीतर के साथ, आयकर अधिकारी को प्रस्तुत करना चाहिए कि आवश्यकता अनुमति दे सकता है, के रूप में प्रासंगिक पिछले वर्ष के दौरान निर्धारिती को भुगतान ऐसी सब्सिडी की राशि के लिए चाय बोर्ड से एक प्रमाण पत्र. छूट 1969-70 के बाद, मूल्यांकन साल 1969-70 और दावा सब्सिडी की छूट के लिए किया जाता है, जहां 1970-71 के लिए चाय बागानों का आकलन नए प्रावधानों के आलोक में निपटाया जाना चाहिए निर्धारण वर्ष के लिए लागू होता है धारा 10 के खंड (30).
कराधान कानून (संशोधन) अधिनियम, 1970
62 यह replanting की लागत, पौधरोपण पर खर्च के संदर्भ में खंड 33A के तहत विकास भत्ता कंप्यूटिंग के प्रयोजन के लिए सब्सिडी की राशि से कम खड़े होंगे कि इस संबंध में उल्लेख किया जा सकता है. यह खंड 33A में शब्द "रोपण की वास्तविक लागत" की परिभाषा (7) विशेष रूप से किसी अन्य व्यक्ति या प्राधिकारी द्वारा सीधे या परोक्ष रूप से मुलाकात की गई है उसके जैसे भाग द्वारा लागत में कमी के लिए प्रदान करता है कि स्थिति को ध्यान में रखते है . धारा 10 के खंड में प्रावधान (30) अनुभाग 33A में प्रावधान अधिभावी का असर नहीं है (7).तदनुसार, चाय बागान के पौधरोपण के एक मामले में विकास भत्ता देय, शुद्ध लागत का 30 प्रतिशत हो जाएगा, यानी सब्सिडी की राशि से कम के रूप में इस तरह के replanting पर सकल व्यय. यह चाय बागानों के पौधरोपण के संदर्भ में विकास भत्ता केवल replanting का काम 1970/01/04 से पहले पूरा हो चुका है जिन मामलों में उपलब्ध है कि देखने में रखा जाएगा.
[संशोधन अधिनियम की धारा 3 (ई)]
कराधान कानून (संशोधन) अधिनियम, 1970
स्वयं के व्यवसाय के लिए किराया और घर की संपत्ति का भी निर्माण पर बाहर जाने के लिए कम लागत के आवासीय आवासों के निर्माण को प्रोत्साहित करने के लिए प्रावधान
63 रूपयेनवनिर्मित आवासीय इकाइयों के लिए "कर छुट्टी" के उदारीकरण किराए पर बाहर जाने - धारा 23 को मौजूदा दूसरे परंतुक के तहत (1), किराए पर बाहर जाने के लिए है, जो 1961/01/04 के बाद निर्माण गृह संपत्ति से आय एक रियायती पर कर लगाया जाता है 3 साल की एक प्रारंभिक अवधि के लिए आधार है. इस अवधि के दौरान ऐसी संपत्ति का वार्षिक मूल्य रुपये की सीमा तक कम हो जाता है. प्रत्येक आवासीय इकाई के संबंध में प्रति वर्ष 600. कम और मध्यम आय वर्ग के लिए किराए पर बाहर जाने के लिए घर की संपत्ति के निर्माण को प्रोत्साहित करने, और ऐसी संपत्ति के किराए में सामान्य वृद्धि को ध्यान में रखते हुए की दृष्टि से, धारा 23 के बाद दूसरे परंतुक (1) एक नया द्वारा प्रतिस्थापित किया गया है परंतुक, तो ऐसे मामलों में वर्तमान में उपलब्ध कर रियायत उदार बनाने के रूप में. एवजी के रूप में प्रावधान के तहत, गृह संपत्ति 31-3-1970 के बाद पूरा हो गया है, जो के निर्माण के मामले में, वार्षिक मूल्य रुपये के लिए एक राशि से कम हो जाएगा. निर्माण के पूरा होने की तारीख से 5 साल की कुल अवधि के लिए प्रत्येक वर्ष के लिए प्रत्येक आवासीय इकाई के संबंध में 1,200. दूसरे शब्दों में, कर से छूट रुपए का किराया मूल्य अप करने के लिए उपलब्ध हो जाएगा. वर्तमान में 3 साल के खिलाफ 5 साल की कुल अवधि के लिए प्रत्येक मकान के संबंध में प्रति माह 100. अन्यथा अभिकलन के रूप में संपत्ति से शुद्ध आय एक हानि नहीं है, जहां केवल मौजूदा प्रावधानों के अंतर्गत छूट उपलब्ध होगी. यह भी इस प्रावधान के तहत छूट केवल किराया और नहीं अपने ही निवास के लिए मालिक के कब्जे में है, जो घर की संपत्ति के संबंध में पर बाहर जाने के लिए है जो घर की संपत्ति के संबंध में उपलब्ध है कि नोट किया जाए.
कराधान कानून (संशोधन) अधिनियम, 1970
64 अपने ही निवास के प्रयोजन के लिए मालिक के कब्जे में गृह संपत्ति से आय की संगणना - धारा 23 के मौजूदा प्रावधानों के तहत (2), अपने ही निवास के प्रयोजनों के लिए मालिक के कब्जे में गृह संपत्ति से आय एक रियायती आधार पर कर लगाया जाता है ऐसी संपत्ति का वार्षिक मूल्य यद्यपि के रूप में उसके एक आधा या रुपये के बराबर राशि से कम है. 1800, जो भी कम है, और परिणामी मूल्य निर्धारिती की, यदि कोई हो, अन्य कर योग्य आय के दसवें करने के लिए, जहां उपयुक्त हो, आगे सीमित है.हालांकि, अपने ही निवास के लिए मालिक के कब्जे में घर की संपत्ति का वार्षिक मूल्य कंप्यूटिंग में, कोई कटौती संपत्ति पर स्थानीय करों के लिए, वर्तमान में, स्वीकार्य है. संपत्ति एक किरायेदार के कब्जे में है, जहां केवल धारा 23 के लिए सबसे पहले परंतुक के तहत (1), इस तरह के करों के लिए कटौती विशेष रूप से अनुमति दी है, क्योंकि यह है.
कराधान कानून (संशोधन) अधिनियम, 1970
65.{{/1}धारा 23 (2) में प्रावधान को युक्तिसंगत बनाने और स्वयं के व्यवसाय के लिए घर की संपत्ति के निर्माण के लिए एक प्रोत्साहन प्रदान करने के लिए एक दृश्य के साथ, उप - धारा (2) धारा 23 की एक नई उपधारा द्वारा प्रतिस्थापित किया गया है. एवजी के रूप में संपत्ति छोड़ दिया गया था के रूप में यदि उप - धारा के तहत (2), अपने ही निवास के प्रयोजनों के लिए मालिक द्वारा इस्तेमाल घर की संपत्ति का वार्षिक मूल्य पहले ही तरीके से गणना की जाएगी, यानी, सकल से घटाकर वार्षिक मूल्य की संपत्ति के संबंध में किसी भी स्थानीय प्राधिकारी द्वारा लगाए गए करों के पूरे. वार्षिक मूल्य का संतुलन तो उसके एक से डेढ़ रुपये से कम हो जाएगा. 1800, जो भी कम है. निर्धारिती अपने ही निवास के प्रयोजनों के लिए उपयोग किया जाता है, जो दोनों के दोनों सदनों, जहां ऐसे प्रत्येक घर के वार्षिक मूल्य इस तरह से गणना की जाएगी. निर्धारिती दो से अधिक घरों का मालिक है और ऊपर कहा गया है केवल निर्धारिती की पसंद के दोनों सदनों के संबंध में अनुमति दी जाएगी के रूप में अपने ही निवास, वार्षिक मूल्य की गणना के लिए रियायती आधार के लिए उन्हें का उपयोग करता है कहां. [वे बाहर जाने के रूप में यदि शेष मकानों के वार्षिक मूल्य निर्धारित किया जाएगा.] अपने ही निवास के प्रयोजनों के लिए करदाता द्वारा स्वामित्व और कब्जे में घर या दो मकानों के एवज में वार्षिक मूल्य, वर्तमान में, के रूप में, आगे सीमित हो जाएगा जहां करदाता की अन्य कर योग्य आय का 10 फीसदी, उचित और अतिरिक्त, यदि कोई हो, नहीं लिया जायेगा.
कराधान कानून (संशोधन) अधिनियम, 1970
६६.पैराग्राफ 63 और 65 के रूप में समझाया धारा 23 में संशोधन, 1971/01/04 पर प्रभाव में आ जाएगा और तदनुसार निर्धारण वर्ष 1971-72 और बाद के वर्षों के लिए लागू होगी.
[संशोधन अधिनियम की धारा 4]
कराधान कानून (संशोधन) अधिनियम, 1970
शहरी क्षेत्रों से औद्योगिक उपक्रमों के स्थानांतरण के लिए टैक्स क्रेडिट प्रमाण पत्र
6भीड़ को राहत देने के लिए इतनी के रूप में शहरी क्षेत्रों से औद्योगिक उपक्रमों के स्थानांतरण के लिए टैक्स क्रेडिट प्रमाण पत्र के अनुदान से संबंधित धारा 280ZA, वर्तमान में, केवल सार्वजनिक कंपनियों के मामले में लागू होता है. शहरी क्षेत्रों में औद्योगिक उपक्रमों को निजी कंपनियों और यहां तक कि विदेशी कंपनियों के स्वामित्व में कई मामलों में, कर रहे हैं, और अन्य क्षेत्रों में इस तरह के उपक्रमों के स्थानांतरण भीड़ को राहत देने के लिए मदद मिलेगी के रूप में टैक्स क्रेडिट का लाभ का विस्तार करने के लिए इतनी के रूप में, खंड 280ZA संशोधन किया गया है सभी कंपनियों को उस धारा के तहत प्रमाण पत्र. इस संशोधन 1971/01/04 पर प्रभाव में आ जाएगा और तदनुसार, निजी कंपनियों या पर या उस तारीख के बाद किसी भी अन्य क्षेत्र के एक शहरी क्षेत्र से उनके औद्योगिक उपक्रमों स्थानांतरण विदेशी कंपनियों के तहत है कि टैक्स क्रेडिट प्रमाण पत्र के अनुदान के लिए पात्र हो जाएगा उसमें विनिर्दिष्ट अन्य शर्तों के संतोष के अधीन अनुभाग,.
[संशोधन अधिनियम की धारा 54]
युक्तिकरण और आयकर अधिनियम के प्रावधानों में से कुछ के सरलीकरण के लिए उपाय
कराधान कानून (संशोधन) अधिनियम, 1970
विदेशी तकनीशियनों की पारिश्रमिक की कर छूट की योजना में संशोधन
६८.आयकर कानून, कई वर्षों के अतीत के लिए, भारत में कार्यरत विदेशी तकनीशियनों की पारिश्रमिक के कर से छूट के लिए प्रदान की गई है. पहला 1955/01/04 पर कानून में शुरू किए गए थे, जो इन प्रावधानों, समय - समय पर उदार बनाया गया है. इस संबंध में मौजूदा प्रावधानों के तहत, जिनकी सेवा का अनुबंध एक निर्धारित अवधि के भीतर केन्द्र सरकार ने मंजूरी दे दी है एक विदेशी तकनीशियन भारत में उनके आगमन की तारीख से 36 महीने की अवधि के लिए भारत में अपने पारिश्रमिक पर कर से छूट के हकदार है . विदेशी तकनीशियन 36 महीने की अवधि समाप्त होने के बाद भारत में रोजगार में जारी है, और उसके मालिक सरकार को उनके वेतन आय पर देय कर का भुगतान करती है, जहां इसके अलावा, नियोक्ता द्वारा अपने टैक्स बकाया राशि के भुगतान के प्रतिनिधित्व वाले दस्तूरी मुक्त है 60 महीने की अवधि के लिए आगे तकनीशियन के हाथों में आगे कर से. इस प्रकार, एक विदेशी तकनीशियन 8 साल की कुल अवधि के लिए एक कर मुक्त पारिश्रमिक पर भारत में नियोजित किया जा सकता है. यह प्रावधान एक उचित कीमत पर विदेशी तकनीशियनों की सेवाओं को सुरक्षित करने के लिए भारतीय उद्योग के लिए सक्षम है. हालांकि, हमारे उद्योग तुलनीय योग्यता, विशेषज्ञता और अनुभव, और भी हमारे औद्योगिक उद्यमों को रोजगार की लागत का एक उच्च शेयर सहन करने वाले भारतीय तकनीशियनों को वरीयता में लंबी अवधि के लिए विदेशी तकनीशियनों के रोजगार पर भी भारी नहीं झुक सकता है कि आदेश में विदेशी विशेषज्ञों, विदेशी तकनीशियनों की पारिश्रमिक की कर छूट से संबंधित प्रावधानों को निश्चित दिशाओं में संशोधित किया गया है. संशोधित योजना एक नया उपखंड (VIIa) में शामिल धारा 10 के खंड (6) में डाला और विदेशी तकनीशियनों 31-3-1971 के बाद भारत में रोजगार में प्रवेश करने के लिए लागू किया जाएगा किया गया है. नए प्रावधानों की मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित पैराग्राफ में व्याख्या कर रहे हैं.
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६९.छूट की अवधि - नए प्रावधानों के तहत एक विदेशी तकनीशियन औद्योगिक और व्यापार प्रबंधन तकनीकों में ज्ञान और अनुभव विशेष होने के भारत में कर से कोई भी छूट के लिए पात्र नहीं होंगे.वर्तमान में, इस तरह के एक तकनीशियन भारत में उनके आगमन की तारीख से 6 महीने की अवधि के लिए कर से छूट प्राप्त है. कराधान कानून (संशोधन) विधेयक, 1969 पर विचार किया जो प्रवर समिति, इस क्षेत्र में भारतीय तकनीशियनों की उपलब्धता को ध्यान में रखते हुए, अब किसी भी प्रबंधन तकनीशियनों के लिए कर छूट जारी रखने का कोई औचित्य नहीं होगा, उस दृश्य का था.
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70 अन्य विदेशी तकनीशियनों के मामले में, कर से पारिश्रमिक की छूट की अवधि 24 महीने से 36 महीने से कम हो गया है. इस अवधि के दौरान विदेशी तकनीशियन रुपये की दर से गणना की एक राशि के लिए अपने पारिश्रमिक अप पर छूट के हकदार होंगे. प्रासंगिक वर्ष के दौरान भारत में अपने रोजगार के हर महीने के लिए 4,000. रुपये से अधिक पारिश्रमिक, यदि कोई हो,. प्रति माह 4,000 नियोक्ता केन्द्र सरकार को इस तरह के अतिरिक्त पर कर देता है, तो नियोक्ता कर भुगतान के आधार प्रतिनिधित्व रिआयत भी तकनीशियन के हाथों में आगे कराधान से मुक्त हो जाएगा, कर के लिए उत्तरदायी हो, लेकिन जाएगा. भारत में उनके आगमन की तारीख से 24 महीने की प्रारंभिक अवधि के बाद, तकनीशियन के पारिश्रमिक का पूरे कर के दायरे में होगा. नियोक्ता केन्द्र सरकार को पारिश्रमिक के पूरे पर कर देता है, हालांकि, तो भुगतान कर द्वारा प्रतिनिधित्व दस्तूरी विदेशी तकनीशियन के हाथों में आगे कराधान से मुक्त हो जाएगा. जैसा कि ऊपर कहा 24 महीने की प्रारंभिक अवधि के बाद अगले यह बाद छूट 24 महीने की अवधि के लिए उपलब्ध हो जाएगा. इस प्रकार एक विदेशी तकनीशियन एक कर मुक्त पारिश्रमिक पर 31-3-1971 के बाद भारत में नियोजित किया जा सकता है, जिसके लिए कुल अवधि के रूप में वर्तमान में 8 वर्षों के खिलाफ 4 साल हो जाएगा.
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७१.कवर के रूप में तो शब्द "तकनीशियन" की परिभाषा को संशोधित किया गया है - "- विदेशी तकनीशियन" की परिभाषा के अलावा निर्माण या निर्माण कार्यों में या खनन में या बिजली या बिजली के किसी अन्य रूप की पीढ़ी में विशेष ज्ञान और अनुभव रखने वाले व्यक्तियों - इसके अलावा हमारे भोजन संसाधनों और हमारे जहाज निर्माण उद्योग के विकास के लिए इन क्षेत्रों में विदेशी विशेषज्ञों के रोजगार को सक्षम करने के लिए एक दृश्य के साथ कृषि, पशुपालन, डेयरी फार्मिंग, गहरे समुद्र में मछली पकड़ने या जहाज निर्माण में इसी तरह के ज्ञान और अनुभव वाले उन . इसी समय, औद्योगिक या व्यापार प्रबंधन विशेषज्ञों और भी व्यक्तियों शब्द "तकनीशियन" के दायरे से बाहर रखा गया है बिजली या (पीढ़ी से अलग) सत्ता के किसी अन्य रूप से वितरण में ज्ञान और अनुभव विशेष.
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72 उद्यमों या विदेशी तकनीशियनों काम कर सकते हैं जो एजेंसियों की श्रेणियाँ - वर्तमान में, कर छूट किसी विशेष कानून के तहत या भारत में पर किए गए किसी भी व्यवसाय में स्थापित सरकार या किसी स्थानीय प्राधिकारी या किसी निगम द्वारा नियोजित विदेशी तकनीशियनों के लिए उपलब्ध है. नए प्रावधानों के तहत कर छूट विहित प्राधिकारी द्वारा इस संबंध में मंजूरी दे दी है, जो वैज्ञानिक अनुसंधान, पर ले जाने के लिए भारत में स्थापित किसी भी संस्था या निकाय द्वारा नियोजित विदेशी तकनीशियनों के मामले में भी उपलब्ध हो जाएगा. अधिकारियों को पहले से ही वैज्ञानिक अनुसंधान संघों का अनुमोदन करने के प्रयोजन के लिए आयकर नियमों में निर्धारित, कर रियायतें के उद्देश्य के लिए विश्वविद्यालयों, कॉलेजों और अन्य संस्थानों, वैज्ञानिक अनुसंधान व्यय के संबंध में, अर्थात्, सीएसआईआर (वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान) भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (परिषदभारतीय कृषि अनुसंधान परिषद) और भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद) को भी धारा 10 (6) (VIIa में नए प्रावधान के प्रयोजन के लिए वैज्ञानिक अनुसंधान संस्थानों या शरीर के लिए अनुमोदन) देने के लिए अधिकारियों को किया जाएगा.
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73 धारा 10 में मौजूदा प्रावधानों के तहत के रूप में (6) (सात), विदेशी तकनीशियन के लिए पात्र होने के लिए तुरंत वह भारत आए जिसमें वित्तीय वर्ष के पहले के चार वित्तीय वर्षों में से किसी में भारत में निवासी नहीं होना चाहिए उसके पारिश्रमिक पर कर से छूट. केन्द्र सरकार द्वारा तकनीशियन की सेवा के अनुबंध का अनुमोदन की मौजूदा आवश्यकता भी इस तरह के अनुमोदन, इसके बाद, सभी मामलों में प्राप्त किया जा करने की आवश्यकता होगी कि संशोधनों के साथ लागू करने के लिए जारी है, और अनुमोदन के लिए आवेदन किया जाना चाहिए कि भारत में तकनीशियन की सेवा के प्रारंभ होने से पहले या ऐसे प्रारंभ करने के 6 महीने के भीतर केन्द्र सरकार को बनाया. नए प्रावधानों के तहत कर से छूट इस तरह के अनुमोदन के अभाव में किसी भी मामले में उपलब्ध नहीं होगा. वर्तमान में, कर से छूट औद्योगिक या व्यापार प्रबंधन विशेषज्ञों के अलावा और तकनीशियनों के मामले में 12 महीने की अवधि के लिए, अनुमोदन की आवश्यकता के बिना, उपलब्ध है. यह प्रावधान अब बंद कर दिया गया.
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74 जैसा कि पहले कहा, धारा 10 के उपखंड (VIIa) में नए प्रावधानों (6) 31-3-1971 के बाद भारत में रोजगार में प्रवेश करने वाले विदेशी तकनीशियनों के लिए लागू होगी. रोजगार में पहले से ही कर रहे हैं, जो या 31-3-1971 अप करने के लिए भारत में रोजगार में प्रवेश करने वाले विदेशी तकनीशियनों की धारा 10 की उप - खंड (सात) में मौजूदा प्रावधान के तहत कर छूट के लिए पात्र हो जाएगा (6).
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७५.खंड 40 के लिए एक परिणामी संशोधन द्वारा, यह सीमा लागू करने में (वी) खंड (क) एक व्यवसाय या पेशे में किए गए व्यय की कटौती राशि से अधिक है कि खंड के लाभ, सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए उप - खंड में निर्दिष्ट है कि सुरक्षित किया गया है या कर्मचारियों को अनुलाभ, धारा 10 (6) के नए उप - खंड (VIIa) के तहत विदेशी तकनीशियन की आय के रूप में आगे कराधान से छूट के लिए पात्र है जो एक विदेशी तकनीशियन, के वेतन पर नियोक्ता द्वारा होगा भुगतान कर ध्यान में रखा जाना नहीं.
[धारा 3 (सी) (ख) और (ग) और संशोधन अधिनियम की धारा 10]
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आदि वेतन, बकाया राशि में या अग्रिम में भुगतान किया जाता है, जहां के मामलों में राहत
७६.वेतन आय या "प्रतिभूतियों पर ब्याज" जिससे अन्यथा लागू हो गया होता से कर की ऊंची दर को आकर्षित बकाया राशि में प्राप्त होता है जिन मामलों में आयकर आयुक्त ने कर राहत के अनुदान से संबंधित धारा 89,, इसलिए संशोधन किया गया है अपने ऑपरेशन को सरल करने के रूप में. कानून के तहत, वेतन आय यह कारण है या भुगतान किया जाता है, जिसमें वर्ष में कर योग्य है. वेतन की बकाया राशि में या अग्रिम में भुगतान किया जाता है या जहां अधिक से अधिक 12 महीने के लिए एक "वेतन के एवज में लाभ" (जैसे, सेवानिवृत्ति लाभ) या वेतन है जो किसी भी राशि किसी भी एक वित्तीय वर्ष में प्राप्त होता है, कि जहां वर्ष की आय हो सकती है वेतन यह संबंधित है जो करने के लिए वर्ष में प्राप्त किया गया था अगर लागू किया गया होता है की तुलना में अधिक दर पर कर के लिए उत्तरदायी बन जाते हैं. ऐसी ही स्थिति प्रतिभूतियों पर ब्याज की बकाया राशि में प्राप्त होता है, जहां एक मामले में उत्पन्न हो सकती है. खंड 89 के मौजूदा प्रावधानों के तहत आयकर आयुक्त वह बोर्ड द्वारा जारी किए गए प्रशासनिक निर्देशों के अधीन, ऐसे मामलों में, उचित समझता है के रूप में इस तरह के राहत देने के लिए सशक्त है. संशोधन के तहत, इस धारा के तहत राहत देने के लिए बिजली आयकर अधिकारी में निहित किया गया है और बोर्ड आयकर मामलों की विभिन्न श्रेणियों में दिया जा रहा है कि राहत की प्रकृति के नियमों में प्रदान करने के लिए सशक्त है और यह दिया जा रहा है जिस तरह से.
[संशोधन अधिनियम की धारा 23]
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ब्याज की गणना का सरलीकरण
77 कुछ परिस्थितियों में करदाता के लिए केंद्र सरकार द्वारा देय विभिन्न आयकर अधिनियम के तहत देरी और भी हित के लिए करदाता द्वारा देय ब्याज की गणना को सरल बनाने, और ब्याज की छोटी मात्रा में मांग और ठीक करने के लिए होने में निष्फल काम को नष्ट करने के लिए एक दृश्य के साथ, शक्ति है खंड 295 में डाला नया खंड (केके) के तहत केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड में निहित किया गया (2), नियम से ब्याज प्रभार्य की गणना और आयकर अधिनियम के तहत करदाता को देय में अपनाई जाने वाली प्रक्रिया के नीचे बिछाने बनाने के लिए . ऐसे नियमों ब्याज की गणना की जानी है जिसके लिए अवधि की, पूरे महीने के लिए, बंद गोलाई और भी किन परिस्थितियों में और निर्धारिती द्वारा देय ब्याज की क्षुद्र मात्रा में नजरअंदाज नहीं किया जा सकता करने के लिए किस हद तक निर्दिष्ट कर सकता है के लिए प्रावधान शामिल हो सकते हैं.
[संशोधन अधिनियम की धारा 55 (ख)]
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सेवानिवृत्ति निधि और ग्रेच्युटी निधियों को मंजूरी प्रदान करने के लिए प्रक्रिया को युक्तिसंगत
७८.सेवानिवृत्ति निधि और चौथी अनुसूची में निहित ग्रेच्युटी फंड, को मंजूरी प्रदान करने के लिए नियम, वर्तमान की आवश्यकता है कि एक सेवानिवृत्ति निधि के मामले में एक वर्ष के लिए और एक ग्रेच्युटी फंड के मामले में खातों, 3 साल के लिए खातों , अनुमोदन के लिए आवेदन के साथ प्रस्तुत किया जाना चाहिए. यह एक सेवानिवृत्ति निधि यह है कि यह अस्तित्व के 3 वर्ष पूरे होने के बाद ही, एक वर्ष और एक ग्रेच्युटी फंड के लिए अस्तित्व में किया गया है के बाद ही स्वीकृति के लिए आवेदन कर सकते हैं कि स्थिति की ओर जाता है. इस तरह के धन और इस तरह के अनुमोदन के अनुदान की मंजूरी के लिए आवेदन करने में देरी obviating करने की दृष्टि से, चौथी अनुसूची के भाग ख और ग में प्रासंगिक प्रावधानों में संशोधन किया गया है. संशोधित प्रावधानों के तहत, एक सेवानिवृत्ति निधि या एक ग्रेच्युटी कोष के न्यास निधि की मंजूरी के लिए आयकर अधिकारी को अपने आवेदन के साथ प्रस्तुत करना होगा, तीन में से हर एक के लिए निधि के खातों की दो प्रतियां पिछले फंड अस्तित्व में था, जिसमें और अपने खातों को बनाया गया है, जिसके लिए वित्तीय वर्ष के लिए साल. निधि पूर्व आवेदन किया जाता है, जिसमें वित्तीय वर्ष के लिए किसी भी वर्ष या साल के दौरान अस्तित्व में रहा है जहां केवल इस आवश्यकता को लागू है. आवेदन फंड की संस्था के पहले वर्ष में किया जाता है जहां तदनुसार,, निधि के खातों की प्रस्तुत प्रतियों की कोई आवश्यकता नहीं होगी.
कराधान कानून (संशोधन) अधिनियम, 1970
79 एक अन्य संशोधन के तहत, एक नया नियम 8A चौथी अनुसूची के भाग ग में सम्मिलित किया गया है. अनुमोदित सेवानिवृत्ति धन से संबंधित चौथी अनुसूची के भाग ख के 10 शासन से मेल खाती है जो नए नियम 8A के तहत आयकर अधिकारी एक अनुमोदित ग्रेच्युटी कोष के न्यास से प्रासंगिक रिटर्न, बयान, ब्यौरे और जानकारी के लिए कॉल करने के लिए अधिकृत है और किसी भी नियोक्ता से, जो इस तरह के एक कोष में योगदान देता है. इस तरह के रिटर्न, आदि बयान, ब्यौरे, अनुपालन के लिए कम से कम 21 दिन का समय देने के एक नोटिस के लिए बुलाया जा सकता है.
[संशोधन अधिनियम की धारा 57 (ख) (i), (ग) (क) और (ग) (ख)]
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मान्यता प्राप्त भविष्य निधि की धनराशि और अनुमोदित सेवानिवृत्ति निधि और ग्रेच्युटी निधियों के निवेश या जमा
80पार्ट्स ए, बी और भविष्य निधि की मान्यता और सेवानिवृत्ति निधि और ग्रेच्युटी निधियों के अनुमोदन के लिए नियम निर्दिष्ट जो चौथी अनुसूची, सी, बनाया है, इसलिए नियमों से विनियमित करने के लिए केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड को सशक्त बनाने के रूप में संशोधन किया गया है आयकर नियमों में, एक मान्यता प्राप्त भविष्य निधि या एक अनुमोदित सेवानिवृत्ति निधि या ग्रेच्युटी फंड की धनराशि के निवेश या जमा. हालांकि, यह विशेष रूप से इस शक्ति के अधीन किए गए किसी भी नियम सरकारी प्रतिभूतियों में किसी भी तरह के फंड की धनराशि के 50 से अधिक प्रतिशत की निवेश की आवश्यकता नहीं होगी कि उपलब्ध कराई गई है. इस संबंध में बोर्ड द्वारा किए जाने के लिए नियमों के अनुपालन मान्यता या प्रोविडेंट फंड या सेवानिवृत्ति निधि या ग्रेच्युटी निधियों के अनुमोदन की स्वीकृति या बने रहने की मान्यता की निरंतरता के लिए शर्तों में से एक होगा.
[धारा 57 (क), (ख) (ii) और संशोधन अधिनियम (ग) (ग)]
टैक्स की चोरी या परिहार का मुकाबला करने के लिए उपाय
कराधान कानून (संशोधन) अधिनियम, 1970
संयुक्त हिन्दू परिवार की संपत्ति में एक व्यक्ति की अलग संपत्ति का रूपांतरण
81 धारा 64 इस समय कुछ निश्चित परिस्थितियों में अपने पति या पत्नी या नाबालिग बच्चे को एक व्यक्ति द्वारा हस्तांतरित परिसंपत्तियों से प्राप्त आय अंतरणकर्ता की कर योग्य आय में शामिल किया जाता रहेगा कि प्रदान करता है. 3 दशकों के लिए कानून में किया गया है जो इस प्रावधान, एक व्यक्ति, एक हिन्दू अविभाजित परिवार का सदस्य होने, पटाने द्वारा अपने अलग संपत्ति संयुक्त परिवार की संपत्ति में धर्मान्तरित जहां एक मामले में अयोग्य होने की अदालतों द्वारा आयोजित किया गया है ऐसे संपत्ति परिवार से संबंधित या परिवार के सामान्य शेयर में फेंक के चरित्र के साथ अलग संपत्ति. परिहार या वह एक सदस्य है, जिनमें से हिंदू अविभाजित परिवार से संबंधित एक संपत्ति में एक व्यक्ति की अलग संपत्ति में परिवर्तित करने का उपकरण के माध्यम से कर दायित्व की कमी के लिए इस बचाव का रास्ता बंद करने के लिए एक दृश्य के साथ, धारा 64 ए के सम्मिलन द्वारा संशोधन किया गया है नए उप - धारा (2) उसमें, मौजूदा प्रावधान उप - धारा के रूप में गिने जा रहा है (1). धारा 64 के नए उप - धारा (2) के तहत, एक हिन्दू अविभाजित परिवार का सदस्य होने के एक व्यक्ति, 31-12-1969 के बाद किसी भी समय धर्मान्तरित जहां एक मामले में, हिंदू अविभाजित परिवार से संबंधित संपत्ति में अपनी अलग संपत्ति, वह संयुक्त रूप से उनके द्वारा आयोजित किया जा रहा है के लिए परिवार के सदस्यों के परिवार के माध्यम से संपत्ति का तबादला किया है समझा जाएगा. इसके अलावा, परिवार द्वारा परिवर्तित संपत्ति या उसके किसी भाग से प्राप्त आय व्यक्ति को खुद उठता समझा जाएगा और परिवार को परिवार की संपत्ति में व्यक्ति की रुचि के कारण नहीं है insofar के रूप में. इसके अलावा, यह पति या परिवार की संपत्ति में व्यक्ति के किसी भी नाबालिग बेटे की रुचि के कारण है insofar के रूप में ऐसी संपत्ति से आय से परोक्ष रूप से उन्हें हस्तांतरित परिसंपत्तियों से पति या पत्नी या नाबालिग बेटे को पैदा करने के लिए समझा जाएगा तदनुसार व्यक्ति और, ऐसी आय धारा 64 के मौजूदा प्रावधानों के अनुसार व्यक्ति की कुल आय में includible होगा. परिवार में एक आंशिक या कुल विभाजन की स्थिति में, पति या पत्नी या नाबालिग बेटे को पूरी से या इस तरह के विभाजन में पति या पत्नी या नाबालिग बेटे को आवंटित परिवर्तित संपत्ति के किसी भी भाग में उत्पन्न होने वाली आय भी, इसी प्रकार, समझा जाएगा व्यक्ति द्वारा परोक्ष रूप से उन्हें हस्तांतरित परिसंपत्तियों से उन्हें उठता है, और धारा 64 के मौजूदा प्रावधानों के तहत व्यक्ति की आय में includible हो. परिवर्तित संपत्ति या किसी भी भाग से आय क्या है इन प्रावधानों के पुण्य से व्यक्ति की आय में शामिल होने की वजह से गिर जाता है जहां मामला हो सकता है, इस तरह के आय से, परिवार की कुल आय से बाहर रखा गया है या हो जाएगा पति या पत्नी या नाबालिग पुत्र की कुल आय.
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82 शब्द "संपत्ति" (2), चल या अचल संपत्ति में कोई दिलचस्पी, शामिल करने के लिए धारा 64 के स्पष्टीकरण में परिभाषित किया गया है, उसके बिक्री और बिक्री की आय और जहां का प्रतिनिधित्व करने जा रहा है समय के लिए किसी भी पैसे और निवेश की आय संपत्ति किसी भी विधि, इस तरह के अन्य संपत्ति के द्वारा किसी अन्य संपत्ति में बदल दिया है. परिवार या पति या पत्नी के हित की संपत्ति में व्यक्ति की रुचि या परिवार की संपत्ति में व्यक्ति की नाबालिग बेटा, एक के कारण है जो परिवर्तित संपत्ति से आय की राशि का निर्धारण करने के प्रयोजन के लिए काल्पनिक विभाजन प्रासंगिक पिछले वर्ष और व्यक्ति को आवंटित कर दिया गया होता, जो परिवार की संपत्ति की हिस्सेदारी के अंतिम दिन के रूप में परिवार में जगह लेने के लिए ग्रहण किया जाएगा, उसके पति और ऐसे विभाजन पर नाबालिग बेटों निधारित किया जाएगा. व्यक्ति या उसके पति या पत्नी या नाबालिग बेटे की रुचि के कारण आय परिवार की संपत्ति में संबंधित व्यक्तियों के शेयर के अनुपात में है जो परिवर्तित संपत्ति से आय का वह हिस्सा होने के लिए ले जाया जाएगा.
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83 यह धारा 64 के नए उप - धारा (2) में निर्दिष्ट परिस्थितियों, आय का उचित मात्रा में रूपांतरण बनाने व्यक्ति की कुल आय में शामिल और हिंदू अविभाजित की कुल आय से बाहर रखा जाना चाहिए जहां मौजूद उल्लेखनीय है कि हो सकता है इस कोर्स के लिए राजस्व के लिए एक लाभ में परिणाम नहीं करता है, भले ही परिवार या, मामले के रूप में, पति या पत्नी या नाबालिग पुत्र का हो सकता है. निर्धारिती के अलावा किसी अन्य व्यक्ति की किसी भी संपत्ति से आय अध्याय वी, आय के कारण कर की वसूली के प्रावधानों के कारण निर्धारिती की कुल आय में शामिल किया जाता है, जहां कि प्रभाव के लिए धारा 65 के प्रावधानों तो शामिल एक व्यक्ति वह एक सदस्य है, जिनमें से हिंदू अविभाजित परिवार से संबंधित संपत्ति में परिवर्तित की अलग संपत्ति के संबंध में भी लागू किया जाएगा - जिसका नाम ऐसे परिसंपत्ति में खड़ा व्यक्ति के खिलाफ लागू करने योग्य हो जाएगा.
कराधान कानून (संशोधन) अधिनियम, 1970
84 खंड 295 के लिए एक परिणामी संशोधन के तहत (2) (बी), केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड के आय के मामले में पर पहुंचे किया जाएगा जिसके द्वारा जो और प्रक्रिया में ढंग के लिए आयकर नियमों में प्रदान करने का अधिकार दिया गया है धारा 64 के नए उप - धारा (2) के तहत मूल्यांकन किया जा करने के लिए उत्तरदायी है जो एक व्यक्ति की. तदनुसार, बोर्ड के नियम, जैसे परिस्थितियों में हिंदू अविभाजित परिवार की संपत्ति में अपने अलग संपत्ति के रूपांतरण बनाने व्यक्ति की आय के रूप में मूल्यांकन किया जा आय के निर्धारण के लिए उपलब्ध कराने बनाने की स्थिति में होगा, जहां के कारण संयुक्त परिवार के अन्य फंडों के साथ बिक्री या धन की परिवर्तित संपत्ति और विलय के आदान परिवर्तित संपत्ति अपनी पहचान खो देता है और यह बाद के वर्षों में इस तरह की संपत्ति से प्राप्त हुए आय का पता लगाना मुश्किल हो जाता है. धारा 10 के खंड (2) के लिए किसी अन्य परिणामी संशोधन करके इसे सुरक्षित किया गया है कि कुल में शामिल किए जाने से परिवार की आय के बाहर एक हिंदू अविभाजित परिवार के एक सदस्य के रूप में किसी भी व्यक्ति द्वारा प्राप्त किसी भी राशि की है कि खंड के अधीन छूट व्यक्ति की आय, धारा 64 के नए उप - धारा (2) में प्रावधान के अधीन किया जाएगा. तदनुसार, धारा 10 (2) धारा 64 में प्रावधान अंतर्निहित उद्देश्य हताश करने के लिए काम नहीं करेंगे (2).
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85 धारा 64 और वर्गों 10 और 295 के लिए परिणामी संशोधन के संशोधन 1971/01/04 पर प्रभाव में आ जाएगा. तदनुसार, नए प्रावधान निर्धारण वर्ष 1971-72 और बाद के मूल्यांकन वर्षों के लिए लागू होगा, लेकिन यह बाद 1970/01/01 से हिंदू अविभाजित परिवार की संपत्ति में परिवर्तित अलग संपत्ति से प्राप्त आय पर लागू होंगे.
[धारा 3 में संशोधन अधिनियम (क), 16 और 55 (एक)]
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अपंजीकृत फर्मों का आकलन
८६धारा 183 वर्तमान में एक अपंजीकृत फर्म के मामले में आयकर अधिकारी इसकी कुल आय पर फर्म से ही देय कर का निर्धारण कर सकते हैं या, कुछ निश्चित परिस्थितियों में, एक पंजीकृत फर्म और प्रभारी के रूप में फर्म का आकलन करने के लिए आगे बढ़ना हो सकता है कि प्रदान करता है फर्म की आय में उनके शेयरों के संबंध में भागीदारों पर कर. बाद के पाठ्यक्रम आयकर अधिकारी फर्म पंजीकृत फर्म के रूप में इलाज किया गया, तो भागीदारों द्वारा देय कर की कुल राशि फर्म द्वारा देय होगी जो कर की कुल राशि से अधिक होगा पता चलता है कि जहां अपनाया जा रहा है यह एक अपंजीकृत फर्म और उनके अन्य आय के संबंध में अलग - अलग पार्टनर्स द्वारा देय होगा जो कर के रूप में व्यवहार किया जाता है, अपंजीकृत फर्म से किसी भी (शेयर केवल दूसरे के लिए लागू कर की दर का पता लगाने के उद्देश्य के लिए ले जाया जा रहा है अगर भागीदारों की आय). इस बाद पाठ्यक्रम को अपनाया जाता है, कोई कर नहीं, वर्तमान में, फर्म पर ही आरोप लगाया है, लेकिन किसी भी अगर फर्म की आय में भागीदारों के शेयरों, उनके अन्य आय के साथ साथ उनके हाथ में कर के लिए शुल्क लिया जाता है.
कराधान कानून (संशोधन) अधिनियम, 1970
87 अनुभाग 183 (ख) में यह प्रावधान एक अपंजीकृत फर्म वह कर फर्म द्वारा देय यह एक पंजीकृत रूप में मूल्यांकन किया जाता है तो पता चलता है कि जहां एक पंजीकृत फर्म के तरीके में आयकर अधिकारी द्वारा मूल्यांकन किया जा सकता है कि प्रदान करने के लिए संशोधन किया गया है फर्म तो आकलन किया गया, तो अलग - अलग पार्टनर्स द्वारा देय कर के साथ एक साथ लिया फर्म, एक अपंजीकृत फर्म और व्यक्तिगत भागीदारों द्वारा देय कर के रूप में फर्म द्वारा देय कर की कुल राशि से अधिक होगा. संशोधन आगे इस प्रक्रिया को अपनाया जाता है, फर्म के साथ फर्म की आय में उनके संबंधित शेयरों पर कर के दायरे में हो जाएगा एक पंजीकृत फर्म और भागीदारों के रूप में एक ही तरीके से अपनी कुल आय पर कर के लिए उत्तरदायी होगा कि प्रदान करता है उनके अन्य आय, यदि कोई हो. इस संशोधन 1971/01/04 से प्रभावी हो जाएगा और तदनुसार निर्धारण वर्ष 1971-72 और बाद के वर्षों के लिए लागू होगी.
[संशोधन अधिनियम की धारा 32]
कराधान कानून (संशोधन) अधिनियम, 1970
साझेदार के रूप में benamidars होने पंजीकृत फर्मों
88.धारा 185 एक साझेदारी फर्म के लिए पंजीकरण के अनुदान के लिए प्रक्रिया को निर्दिष्ट. इस खंड के मौजूदा प्रावधानों के तहत आयकर अधिकारी साझेदारी के साधन के रूप में निर्दिष्ट फर्म की असलियत और अपने संविधान में पूछताछ, और वह है या था कि संतुष्ट तभी फर्म के लिए पंजीकरण करने के लिए अनुदान की आवश्यकता है अस्तित्व में पिछले वर्ष के दौरान संविधान के साथ एक वास्तविक फर्म ताकि निर्दिष्ट.
कराधान कानून (संशोधन) अधिनियम, 1970
८९ .ए वी. सीआईटी के मामले में अब्दुल रहीम एंड कंपनी [1965] 55 आईटीआर 651, सुप्रीम कोर्ट के पंजीकरण केवल भागीदारों में से एक अन्य साथी की एक benamidar है कि जमीन पर एक फर्म से इनकार कर दिया नहीं किया जा सकता है आयोजित किया.कोर्ट के मुताबिक, "कहा benamidar की हिस्सेदारी से संबंधित आय में लाभकारी ब्याज (आय का असली मालिक का) मूल्यांकन की बात करने के लिए प्रासंगिक है, लेकिन पंजीकरण के प्रश्न के संबंध में कोई भी हो सकता है". कानून में यह स्थिति कर देयता कम करने के लिए एक दृश्य के साथ साझेदारी फर्म में बेनामी भागीदारों की शुरूआत के लिए देता है. इस तरह के उपकरणों का मुकाबला करने के लिए, अनुभाग 185 (1) एक फर्म एक वास्तविक फर्म के रूप में नहीं माना जाएगा, जिसके तहत एक विवरण, की प्रविष्टि द्वारा संशोधन किया गया है फर्म के किसी भी साथी पूरी करने के संबंध या किसी में था, अगर पिछले वर्ष के दौरान किसी भी समय फर्म की आय या संपत्ति में अपने हिस्से का हिस्सा है, किसी भी अन्य साथी की एक benamidar जिसे करने के लिए पहले उल्लेख साथी एक पति या पत्नी या नाबालिग बच्चे के रिश्ते में खड़े नहीं करता है. विवरण के रूप में भी (1) पंजीकरण, या जो दी गई है जो एक फर्म के मामले में उस के हकदार है अनुभाग 186 में प्रावधान के प्रयोजन के लिए, धारा 185 के तहत फर्म के लिए पंजीकरण के अनुदान का उद्देश्य के लिए लागू होगी खंड 184 की हैसियत से पंजीकरण की निरंतरता (7), आयकर अधिकारी की राय है, तो पिछले वर्ष के दौरान दर्ज की है, वह यह है कि आकलन वर्ष के लिए फर्म का पंजीकरण रद्द कर सकते हैं के रूप में अस्तित्व में कोई वास्तविक फर्म था कि वहाँ . यह भी इस तरह के एक फर्म को दी गई पंजीकरण रद्द, चाहे अन्य भागीदारों बेनामी व्यवस्था के बारे में पता कर रहे हैं कि क्या की व्याख्या के तहत सुरक्षित हो जाएगा के रूप में एक साथी, एक और की एक benamidar है या यह है जिसमें एक फर्म के लिए पंजीकरण का इनकार उन्हें खुलासा नहीं किया. benamidar स्पष्टीकरण के दायरे से एक पति या पत्नी या बाद के नाबालिग बच्चे के रूप में लाभकारी मालिक से संबंधित है जहां मामलों के बहिष्कार फर्म की आय में पति या पत्नी या नाबालिग बच्चे के शेयर में है कि विचार पर आधारित है धारा 64 में प्रावधान की हैसियत से दूसरे साथी की आय के रूप में निर्धारणीय किसी भी घटना. तदनुसार, जीवन साथी के दोनों साथी या भागीदारों में से एक के नाबालिग बच्चे भागीदारी के लाभों में भर्ती कराया गया है, जिनमें से एक हैं, जिसमें एक फर्म, पति या पत्नी या नाबालिग बच्चे को केवल एक benamidar होना होता है यहां तक कि जहां पंजीकरण वंचित नहीं किया जाएगा अन्य साथी की.
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90अनुभाग 185 का संशोधन (1) 1971/01/04 से प्रभावी हो जाएगा. तदनुसार, पंजीकरण केवल निर्धारण वर्ष 1971-72 और बाद के वर्षों के लिए विवरण के आधार पर एक साझेदारी फर्म से इनकार कर दिया जा सकता है. स्पष्टीकरण निर्धारण वर्ष 1971-72 के लिए प्रासंगिक पिछले वर्ष के लिए यह करने के लिए लागू होता है इसी प्रकार, यदि अप करने के लिए आकलन वर्ष के लिए पंजीकरण के लाभ का आनंद ले रहे हैं और आकलन वर्ष 1970-71 सहित दिया गया है जो एक फर्म लाभ खोने के लिए उत्तरदायी है या किसी भी उप सिलसिलेवार साल.
[संशोधन अधिनियम की धारा 34 (क)]
कुछ में कर राहत प्रदान करने के लिए उपाय
दिशाओं
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"कृषि आय" की परिभाषा
91.धारा 10 (1) आयकर से कृषि आय छूट और भी निर्धारिती की कुल आय की गणना में इसकी बहिष्कार करने का प्रावधान है. केन्द्रीय कराधान से कृषि आय की छूट संसद कृषि आय के अलावा अन्य आय पर करों के संबंध में कानून बनाने के लिए विशेष शक्ति है जिसके अनुसार संविधान में प्रावधान है, पर आधारित है एक राज्य विधानमंडल के संबंध में कानून बनाने की अनन्य शक्ति है, जबकि कृषि आय पर कर, (1) संविधान के अनुच्छेद 246 के तहत मैं सातवीं अनुसूची में (संघ सूची), और अनुच्छेद 246 (3) सूची II (राज्य सूची) की प्रविष्टि 46 के साथ पढ़ा सूची की प्रविष्टि 82 के साथ पढ़ा. अभिव्यक्ति "कृषि आय", उपर्युक्त प्रविष्टियों के प्रयोजन के लिए, (1) संविधान के भारतीय आयकर ख़बरदार अनुच्छेद 366 से संबंधित अधिनियमितियों के प्रयोजनों के लिए परिभाषित के रूप में कृषि आय का मतलब है. खंड में "कृषि आय" की परिभाषा के तहत (1) की धारा 2 के, अभिव्यक्ति का अर्थ है:
. एक कृषि प्रयोजनों के लिए प्रयोग किया जाता है और जो है, जो जमीन से निकाली गई किसी भी किराया या राजस्व भारत में राजस्व भूमि के लिए मूल्यांकन या तो है या इस तरह के रूप में सरकार के अधिकारियों द्वारा मूल्यांकन किया और एकत्र एक स्थानीय दर के अधीन है;
. ख उठाया या यह बाजार के लिए फिट रेंडर करने के रूप में किराए में तरह इतनी के रूप में प्राप्त कृषि उपज की प्रोसेसिंग, या इस तरह के उत्पादों की बिक्री सहित कृषि कार्यों से ऐसी भूमि से निकाली गई किसी भी आय; और
सी. फार्म हाउसों के कारण आय, यानी, किराए पर या किसी भी ऐसे देश के राजस्व का रिसीवर द्वारा या इमारत पर या में है कि किराए में तरह, इस शर्त पर की कल्टीवेटर या रिसीवर के स्वामित्व और कब्जे में किसी भी इमारत तत्काल भूमि के आसपास के क्षेत्र और भूमि के साथ अपने संबंध के कारण किराया या राजस्व या कल्टीवेटर या किराए में खास तरह का रिसीवर, के रिसीवर, एक रिहायशी घर के रूप में या एक दुकान घर के रूप में की आवश्यकता है जो एक इमारत है या अन्य बाहर इमारत.
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92 हाल के वर्षों में कृषि कार्यों भूमि राजस्व भूमि का मूल्यांकन नहीं और कृषि के उपर्युक्त परिभाषा के तहत आवश्यक रूप से किसी भी स्थानीय दर के अधीन नहीं है, जहां आदि तराई क्षेत्रों या छावनियों, वन भूमि, में भूमि के लिए बढ़ा दिया गया है आय. तदनुसार, ऐसी भूमि पर कृषि कार्यों से प्राप्त आय "कृषि आय" के दायरे से बाहर वर्तमान में है और मध्य आय कर के लिए उत्तरदायी हो जाता है. इसके अलावा, कई राज्यों में, निर्दिष्ट सीमा तक भूमि भू - राजस्व आकलन से छूट दी गई है. इसलिए, इन राज्यों में ऐसी भूमि पर कृषि कार्य के प्रदर्शन से प्राप्त आय भी केंद्रीय आयकर के दायरे में आ जाएगा.
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93कृषि कार्यों से प्राप्त आय का चरित्र भूमि भू - राजस्व या एक स्थानीय दर के अधीन है या नहीं, एक ही है, ऐसे में यह कोई भू - राजस्व है, जहां उन मामलों में केन्द्रीय आयकर ऐसी आय के अधीन करने के लिए विषम होगा मूल्यांकन अन्य मामलों में एक ही प्रकृति की आय छूट है. इस विसंगति को दूर करने और छोटे जोत पर भू - राजस्व को समाप्त कर दिया है जो तराई क्षेत्रों या छावनियों में या राज्य में वन भूमि पर खेती, जो किसानों, भूमि के लिए कर राहत प्रदान करने के लिए एक दृश्य के साथ, खंड में "कृषि आय" (1) की की परिभाषा आय प्राप्त होती है, जिसमें से भू - राजस्व या किसी स्थानीय दर देश के लिए मूल्यांकन किया जाना चाहिए कि हालत ड्रॉप करने के लिए इतनी के रूप में धारा 2 में संशोधन किया गया है. यह परिवर्तन अभिव्यक्ति "कृषि आय" के दायरे में लाना होगा, वन भूमि, तराई क्षेत्रों में भूमि और भी राज्य सरकार किसी भी भू - राजस्व की वसूली नहीं करता है के संबंध में भूमि के रूप में छावनियों की खेती से प्राप्त आय.
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94 कृषि भवन के कारण आय के संबंध में, 'कृषि आय "के संशोधित परिभाषा ऐसी इमारत के कारण आय इमारत पर, या, भूमि की तत्काल आसपास के क्षेत्र में स्थित है शर्त यह है कि कृषि आय विषय के रूप में माना जाएगा कि प्रदान करता है वर्तमान में, या, वैकल्पिक रूप से, निर्माण शहरी "के बाहर स्थित है जो (हालांकि राजस्व या किसी स्थानीय दर से भूमि का मूल्यांकन नहीं) भूमि की तत्काल आसपास के क्षेत्र पर या में है, के रूप में राजस्व या एक स्थानीय दर से भूमि का आकलन किया जाता है जो क्षेत्रों ", यानी, (प्रासंगिक आंकड़े के पहले दिन से पहले प्रकाशित किया गया है, जो अंतिम पूर्ववर्ती जनगणना के अनुसार कम नहीं दस हजार से अधिक व्यक्तियों की आबादी होने के किसी भी नगर पालिका या छावनी बोर्ड के अधिकार क्षेत्र में शामिल है जो किसी भी क्षेत्र पिछले वर्ष) या इस तरह की दूरी के अंदर (जो केन्द्रीय सरकार ऐसे किसी भी नगर पालिका या छावनी बोर्ड की सीमा से) 8 किलोमीटर की अधिकतम करने के लिए सरकारी राजपत्र में सूचित कर सकते हैं. ऐसी सूचना है कि यह किसी भी तरह के नगर पालिका या छावनी बोर्ड के बाहर शहरीकरण की गति "शहरी क्षेत्रों 'के रूप में ऐसे क्षेत्रों के उपचार को सही ठहराते संतुष्ट है कि केवल जहां केंद्र सरकार द्वारा जारी की जानी है. इस संशोधन का प्रभाव फार्म हाउस पर स्थित है जिस पर भू - राजस्व या किसी स्थानीय दर से भूमि का आकलन किया जाता है जब तक कि कृषि आय के रूप में नहीं माना जाएगा जैसे कि "शहरी क्षेत्रों" में स्थित फार्म हाउसों के कारण उस आय होगी. हालांकि, "ग्रामीण क्षेत्रों" में स्थित फार्म हाउस के मामले में यानी, किसी भी नगर पालिका या छावनी बोर्ड नहीं कम दस हजार से अधिक व्यक्तियों की आबादी होने और भी की सीमा के बाहर अधिसूचित दूरी से बाहर के अधिकार क्षेत्र के बाहर है, जो किसी भी क्षेत्र ऐसे किसी भी नगर पालिका या छावनी बोर्ड, आय फार्म हाउस पर स्थित है जिस पर भू - राजस्व या किसी स्थानीय दर से भूमि का मूल्यांकन नहीं है यहां तक कि जहां कृषि आय के रूप में माना जाएगा. इस परिभाषा के प्रयोजन के लिए, नगर पालिका जैसे, "नगर निगम" एक नगर निगम, अधिसूचित क्षेत्र समिति, शहरी क्षेत्र समिति, शहर समिति या बुलाया भी नाम से अन्य समान अधिकार, शामिल होंगे.
कराधान कानून (संशोधन) अधिनियम, 1970
95 के रूप में पिछले पैराग्राफ में व्याख्या की कृषि आय की परिभाषा में संशोधन, पूर्वव्यापी है और 1962/01/04 से प्रभाव में ले लिया है माना जाता है, यानी, आयकर अधिनियम अस्तित्व में आया, जिस पर तारीख. तदनुसार, राजस्व भूमि का मूल्यांकन नहीं है या किसी स्थानीय दर सेंट्रल आयकर के अधीन कर दिया गया है, जो भूमि पर कृषि कार्यों से प्राप्त आय, प्रासंगिक मूल्यांकन अब सुधारा जाना चाहिए और जहां के रूप में, वापस या प्रेषित ऐसी आय पर आरोप लगाया टैक्स मामला हो सकता है. मूल्यांकन कार्यवाही कर लिए ऐसी आय लाने के लिए शुरू किया गया, जहां इन गिरा दिया जाना चाहिए.
[संशोधन अधिनियम की धारा 2]
न्यायिक विश्लेषण
: पारस के संदर्भ का हवाला देते हुए 91 कर्नाटक उच्च न्यायालय के ऊपर से 95 इतो वी. बी एस Jayachandra [1986] 161 आईटीआर 190 (Kar.) में निम्नलिखित टिप्पणियां की थीं - में समझाया
"हम इस परिपत्र की जांच की है. हम एक ही सही ढंग से (1) इस अधिनियम के संशोधित धारा 2 की गुंजाइश है और दायरे से बाहर है कि सेट देखने की हैं. "(पी. 198).
कराधान कानून (संशोधन) अधिनियम, 1970
भारत में कार्यरत यात्रा रियायत या भारतीय नागरिकों द्वारा प्राप्त सहायता के मूल्य, और पारित होने के धन या विदेशी राष्ट्रीयता के व्यक्तियों से प्राप्त की मुफ्त या रियायती बीतने के मूल्य का आयकर से छूट
96 धारा 10 (5) वर्तमान में कर से भारत में उसके घर में जिले के लिए छुट्टी पर उसकी कार्यवाही के सिलसिले में खुद को, अपनी पत्नी और बच्चों के लिए अपने नियोक्ता से एक भारतीय नागरिक से प्राप्त किसी भी यात्रा रियायत या सहायता के मूल्य छूट. यात्रा व्यक्ति की सेवा की सेवानिवृत्ति या समाप्ति के बाद किया जाता है जब छूट वर्तमान में उपलब्ध नहीं है.
कराधान कानून (संशोधन) अधिनियम, 1970
97 धारा 10 (6) (क) वर्तमान में कर बीतने के धन से छूट या भारत के बाहर घर छोड़ने पर उसकी कार्यवाही के संबंध में, खुद के लिए अपने नियोक्ता से विदेशी राष्ट्रीयता के एक व्यक्ति ने अपनी पत्नी और बच्चों को प्राप्त किसी भी मुफ्त या रियायती बीतने के मूल्य . यह प्रावधान भी है, वर्तमान में, पारित होने के धन या भारत में अपनी सेवा की सेवानिवृत्ति या समाप्ति के बाद अपने घर देश के लिए उसकी कार्यवाही के संबंध में व्यक्ति द्वारा प्राप्त मुफ्त या रियायती पारित होने को कवर नहीं करता.
कराधान कानून (संशोधन) अधिनियम, 1970
98 करने के लिए उन खंड के अंतर्गत छूट के दायरे का विस्तार करने के लिए इतनी के रूप में खंड में प्रावधान (5) और (6) (i) धारा 10 की, पिछले पैराग्राफ में कहा गया है,, पूर्वव्यापी 1962/01/04 से संशोधन किया गया है -
एक. सेवा या समाप्ति से सेवानिवृत्ति के बाद भारत में उसके घर में जिले को उसकी कार्यवाही के संबंध में किसी भी यात्रा रियायत या सहायता के लिए खुद को उसके नियोक्ता या पूर्व नियोक्ता से होने के कारण एक भारतीय नागरिक को या द्वारा प्राप्त किया, उसके पति और बच्चों के मूल्य उसकी सेवा की;
बी. बीतने धनराशि या उनकी की सेवा या समाप्ति से सेवानिवृत्ति के बाद अपने घर देश के लिए उसकी कार्यवाही के संबंध में, खुद के लिए अपने नियोक्ता या पूर्व नियोक्ता, अपने पति और बच्चों से विदेशी राष्ट्रीयता के एक व्यक्ति द्वारा प्राप्त मुफ्त या रियायती बीतने के मूल्य भारत में सेवा.
निर्धारण वर्ष 1971-72 से प्रभावी छुट्टी पर या उसकी कार्यवाही के सिलसिले में उसकी कार्यवाही के संबंध में नियोक्ता या पूर्व नियोक्ता से प्राप्त किसी भी यात्रा रियायत या सहायता के मूल्य के संबंध में एक भारतीय नागरिक के मामले में छूट वह भारत में अपने घर में जिले आय लेकिन यह भी कहा कि वह भारत में किसी अन्य जगह के लिए आय जहां जहां सेवा से सेवानिवृत्ति के बाद या उसकी सेवा की समाप्ति के बाद, न केवल उपलब्ध हो जाएगा. बाद के हालात में, कर से छूट केवल वह प्राप्त होता है जो या भारत में अपने घर में जिले को उसकी कार्यवाही के संबंध में कारण उसे करने के लिए होता है, जो राशि की सीमा तक उपलब्ध हो जाएगा.
[धारा 3 (ख) और संशोधन अधिनियम (ग) (i)]
कराधान कानून (संशोधन) अधिनियम, 1970
अंधे या शारीरिक रूप से विकलांग व्यक्ति को टैक्स से राहत
99.खंड 80U के मौजूदा प्रावधानों के तहत पूरी तरह से अंधा है, जो एक निवासी व्यक्ति रुपये की कटौती करने का हकदार है. उसकी कर योग्य आय की गणना में 2,000. यह खंड ऐसे मामलों में कटौती रुपये की वृद्धि की गई है जिसके तहत एक नई धारा द्वारा प्रतिस्थापित किया गया है. 5000, और यह काफी हद तक एक लाभकारी रोजगार या व्यवसाय में उलझाने के लिए उनकी क्षमता को कम करने का असर है जो (अंधापन के अलावा अन्य) एक स्थायी शारीरिक विकलांगता से ग्रस्त है जो किसी भी निवासी व्यक्ति को भी बढ़ा दिया गया है. कटौती का लाभ उठाने के लिए आदेश में, करदाता कटौती कुल अंधापन, एक पंजीकृत नेत्र विशेषज्ञ से एक प्रमाण पत्र, और अन्य शारीरिक के एक मामले में के एक मामले में, का दावा किया है, जिसके लिए पहले आकलन वर्ष के संबंध में, प्रस्तुत करने की आवश्यकता है विकलांगता, एक पंजीकृत चिकित्सक से एक प्रमाण पत्र. धारा 80U एवजी के रूप में 1971/01/04 पर प्रभावी होगा और इसके प्रावधानों, उसके अनुसार आकलन वर्ष 1971-72 और बाद के वर्षों के लिए लागू होगी.
[संशोधन अधिनियम की धारा 22]
कुछ विसंगतियों को दूर करने के लिए संशोधन,
मसौदा तैयार करने खामियों, आदि
कराधान कानून (संशोधन) अधिनियम, 1970
अनुसूचित जनजातियों के सदस्यों की आय का कर से छूट
100 धारा 10, सरकार की सेवा में नहीं है, और जो भाग ए में निर्दिष्ट किसी भी क्षेत्र में रहता है, जो संविधान के अनुच्छेद 366 (25) के रूप में परिभाषित एक अनुसूचित जनजाति के एक सदस्य के खंड (26) में मौजूदा प्रावधान के तहत या संविधान की छठी अनुसूची के पैरा 20 से संलग्न सारणी के भाग ख (मोटे तौर पर, कुछ क्षेत्रों असम में और भारत के उत्तर पूर्व सीमांत पर) या नागालैंड राज्य में या मणिपुर और त्रिपुरा के संघ शासित क्षेत्रों में है मणिपुर और त्रिपुरा नागालैंड या केन्द्र शासित क्षेत्रों के उक्त क्षेत्रों में किसी भी स्रोत से उसे उत्पन्न होने वाली आय के संबंध में आय कर से मुक्त. यह छूट लाभांश या प्रतिभूतियों पर ब्याज के रूप में आय के संबंध में भी उसे उपलब्ध है. एसके दत्ता, आईटीओ वी. लॉरेंस सिंह Ingty [1968] 68 आईटीआर 272 के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने धारा 10 के खंड में मौजूदा प्रावधान (26), सीमा तक यह कर से एक के एक सदस्य को छूट से इनकार किया कि आयोजित सरकार की सेवा में है, जो अनुसूचित जनजाति असंवैधानिक था. धारा 10 (26) के हिसाब से उस क्लॉज से "सरकार की सेवा में नहीं है जो" शब्द का आयोग ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले के साथ कतार में लाने के लिए संशोधन किया गया है. इस संशोधन 1962/01/04 पर प्रभाव ले लिया है माना जाता है.
[संशोधन अधिनियम की धारा 3 (डी)]
कराधान कानून (संशोधन) अधिनियम, 1970
"सकल कुल आय" की परिभाषा
101. खंड के मौजूदा प्रावधानों के तहत (5) धारा 80B की, "सकल कुल आय" कुल आय खंड के अंतर्गत अध्याय के माध्यम से नीचे या वार्षिकी जमा के संबंध में किसी भी कटौती करने से पहले, आयकर अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार में गणना का मतलब 280 हे, और धारा 64 के प्रावधानों (व्यक्ति द्वारा या पति या पत्नी एक होने के कारण उन्हें हस्तांतरित परिसंपत्तियों से पति या व्यक्ति की नाबालिग बच्चे के लिए उत्पन्न होने वाली आय के संबंध में एक व्यक्ति के मूल्यांकन के संबंध में लागू किए बिना साथी, या बच्चे के व्यक्ति को भी एक साथी है, जो की एक फर्म) में, साझेदारी के लाभ में भर्ती कराया जा रहा है. "सकल कुल आय" की इस परिभाषा के सीधे कटौती की अनुमति देकर कर संगणना के सरलीकरण के संदर्भ में, 1968/01/04 से प्रभाव के साथ, वित्त (नं. 2) अधिनियम, 1967 द्वारा आयकर अधिनियम में सम्मिलित किया गया था पूरे या आय और पूर्व कुल आय पर लागू कर की औसत दर पर गणना कर का पूरा या आंशिक छूट के लिए योग्यता भुगतान का हिस्सा है. धारा 64 के प्रावधानों के तहत उसके हाथ में मूल्यांकन किया जा रहा है जो आय के एक व्यक्ति की "सकल कुल आय" से बहिष्कार, अनजाने में, और भी विषम था. एक व्यक्ति के मामले में "सकल कुल आय", पति या पत्नी या नाबालिग बच्चे के लिए उत्पन्न होने वाले भी आय में शामिल करने के लिए इतनी के रूप में खंड (5) अनुभाग का 80B तदनुसार, पूर्वव्यापी 1968/01/04 से, संशोधन किया गया है व्यक्ति धारा 64 के तहत कर के दायरे में है जिनके संबंध में व्यक्तिगत. संशोधन के प्रभाव अध्याय के माध्यम से, के प्रावधानों के तहत कटौती जैसे, अनुमोदित मीडिया में लंबी अवधि के बचत (जीवन बीमा, भविष्य निधि, आदि), धर्मार्थ दान और लंबी अवधि के पूंजीगत लाभ के संबंध में, हो जाएगा के संबंध में भी एक व्यक्ति को उपलब्ध है, या व्यक्ति की आय के रूप में कर लगाने योग्य है जो पति या पत्नी या नाबालिग बच्चे की आय, के उपयुक्त प्रतिशत तक.
कराधान कानून (संशोधन) अधिनियम, 1970
102 खंड 80B के संशोधन (5) 1968-69 के लिए और निर्धारण वर्ष से लागू होता है. तदनुसार, अनुमोदित मीडिया या धर्मार्थ दान में लंबी अवधि के बचत के संबंध में कटौती के तहत केवल सकल कुल आय छोड़कर आय निर्धारणीय के संदर्भ में गणना की निर्दिष्ट प्रतिशत तक का समय इस तरह की बचत या दान के संबंध में एक व्यक्ति को अनुमति दी गई है, जहां आकलन धारा 64, या पति या व्यक्ति और उसकी आय के रूप में कर के अधीन ऐसे पूंजीगत लाभ की पूरी करने से इनकार किया नाबालिग बच्चे के लिए उत्पन्न होने वाले लंबी अवधि के पूंजीगत लाभ के संबंध में खंड 80T के तहत कटौती, इस तरह के आकलन प्रकाश में संशोधित किया जाना चाहिए संशोधन और निर्धारिती की अनुमति दी कर राहत की उचित मात्रा का. भारतीय कंपनियों के शेयरों पर लाभांश के संबंध में खंड 80L के तहत कटौती (निर्दिष्ट वित्तीय परिसंपत्तियों में निवेश से होने वाली आय को कवर करने के लिए बढ़े बाद से) भी की आय के रूप में कर लगाने योग्य है जो पति या पत्नी या नाबालिग बच्चे की आय के संदर्भ में स्वीकार्य हो जाएगा जहां संशोधन परिभाषा के आलोक में उचित धारा 64, और पिछले कुछ वर्षों के लिए पूरा आकलन के तहत व्यक्तिगत संशोधित किया जाना चाहिए.
[संशोधन अधिनियम की धारा 18]
कराधान कानून (संशोधन) अधिनियम, 1970
धर्मार्थ और अन्य दान के संबंध में कटौती
१०३ .खंड 80 जी के तहत, एक निर्धारिती कुछ धन, धर्मार्थ संस्थाओं, या किसी मंदिर की मरम्मत या नवीकरण के लिए उसके द्वारा किए गए दान का एक निर्धारित प्रतिशत से उसकी कुल आय की गणना में कटौती करने के लिए, कुछ शर्तों के अधीन हकदार है , मस्जिद, गुरुद्वारे, चर्च या कि खंड के प्रयोजनों के लिए केन्द्र सरकार द्वारा अधिसूचित है जो पूजा के अन्य जगह. इस धारा के तहत कटौती के लिए योग्यता धर्मार्थ संस्थाओं को दान की राशि आयकर देय नहीं है जिस पर उसके किसी हिस्से से और किसी भी राशि से कम के रूप में दाता के "सकल कुल आय" (के 10 प्रतिशत तक सीमित है निर्धारिती अध्याय के माध्यम तहत कटौती के हकदार) और भी रुपये की एक समग्र मौद्रिक सीमा के अधीन है सम्मान है जो की. 2,00,000. करदाता है कहाँ, प्रासंगिक वर्ष के दौरान किसी भी अधिसूचित मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारे, चर्च या पूजा के अन्य जगह, रुपये की मौद्रिक सीमा का नवीकरण या मरम्मत के लिए किसी भी दान कर दिया. 2,00,000 रुपए तक की वृद्धि हुई है. इस तरह के दान केवल कवर करने के लिए इतनी के रूप में 5,00,000,. मौद्रिक सीमा में इस छूट को निर्दिष्ट प्रासंगिक प्रावधान [धारा 80 जी के परन्तुक (4)] के रूप में वर्तमान शब्दों में, किसी भी दान अधिसूचित मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारे, चर्च या पूजा के अन्य जगह पर बना है जहां कि व्याख्या करने के लिए खुद को उधार दे सकता है यहां तक कि एक छोटी राशि में, रुपये की उच्चतर समग्र सीमा. 5,00,000 कि खंड के तहत कटौती के लिए योग्यता सभी धर्मार्थ दान के संबंध में उपलब्ध होगा. इस प्रासंगिक प्रावधान अंतर्निहित मंशा के विपरीत है जैसा कि स्पष्ट रूप से मौजूदा प्रावधान अंतर्निहित इरादा बाहर लाने के लिए इतनी के रूप में, उप - धारा के परन्तुक (4) खंड 80 जी का एक नया परन्तुक द्वारा प्रतिस्थापित किया गया है. एवजी के रूप में प्रावधान के तहत, यह स्पष्ट है कि कटौती के लिए योग्यता रकम की कुल किसी भी अधिसूचित मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारे, चर्च या पूजा के अन्य जगह पर मौद्रिक सीमा की मरम्मत या नवीकरण के लिए किसी भी दान भी शामिल है जहां कि कर दिया गया है खंड 80 जी के तहत कटौती के लिए पात्रता राशि (1) रुपये की सामान्य सीमा से बढ़ जाएगा. रुपये की विशेष सीमा को 2,00,000. 5,00,000, केवल इस तरह के कुल रुपये की सामान्य सीमा से अधिक है कि सीमा तक. रुपये से अधिक की मरम्मत या आदि अधिसूचित मंदिरों के नवीकरण के लिए के अलावा अन्य दूसरे शब्दों में, धर्मार्थ दान, आदि अधिसूचित मंदिरों, दान के शामिल किए जाने की वजह से 2,00,000. 2,00,000 खंड 80 जी के तहत छूट के लिए पात्र नहीं होगा, लेकिन आदि की मरम्मत या मंदिरों के जीर्णोद्धार के लिए दान, अन्य धर्मार्थ दान के साथ लिया, यदि कोई हो, तो रुपये तक अर्हता प्राप्त करेंगे. 5,00,000. कटौती के लिए पात्रता राशि, वर्तमान में, जैसा कि आयकर देय नहीं है जिस पर उसके किसी हिस्से से और किसी भी द्वारा कम के रूप में दाता के "सकल कुल आय" (के 10 फीसदी के वैकल्पिक सीमा के अधीन किया जाएगा निर्धारिती) अध्याय के माध्यम से किसी अन्य प्रावधान के तहत छूट पाने का अधिकार है जिनके संबंध में राशि.
कराधान कानून (संशोधन) अधिनियम, 1970
१०४.खंड 80 जी में संशोधन आकलन वर्ष 1968-69 से, पूर्वव्यापी, लागू होगा. तदनुसार, जहां किसी भी दावे रुपए से अधिक की राशि धर्मार्थ दान के संबंध में की गई और खंड 80 जी के तहत छूट के लिए अनुमति दी गई है. ऐसी मात्रा मरम्मत या किसी भी अधिसूचित मंदिर, आदि के नवीकरण के लिए दान शामिल है कि जमीन पर 2,00,000, मूल्यांकन तो अनायास लाभ वापस लेने के लिए के रूप में संशोधित किया जाना चाहिए. [यह संशोधन किसी भी छत के बिना खंड 80 जी के तहत छूट के लिए पात्र होने के लिए जारी है, जो राष्ट्रीय रक्षा कोष, जवाहरलाल नेहरू मेमोरियल फंड या प्रधानमंत्री का सूखा राहत कोष, दान के संबंध में स्थिति को बदल नहीं करता है कि नोट किया जाए सीमा.]
[संशोधन अधिनियम की धारा 19]
कराधान कानून (संशोधन) अधिनियम, 1970
"कर छुट्टी" मुनाफे के कारण लाभांश के संबंध में कटौती
105धारा 80K शेयरधारक की कुल आय की गणना में लाभांश का भुगतान कंपनी के "कर छुट्टी" मुनाफे के कारण लाभांश की पूरी की कटौती करने का प्रावधान है. वर्तमान में, इस धारा के तहत कटौती केवल लाभांश का भुगतान किया है, जो के संबंध में किसी भी शेयर या शेयरों की मालिक है जो एक निर्धारिती को उपलब्ध है. तदनुसार, कटौती व्यक्ति धारा 64 के तहत कर के दायरे में है जिनके संबंध में पति या एक व्यक्ति की नाबालिग बच्चे के स्वामित्व वाले शेयरों पर लाभांश के संबंध में वर्तमान में उपलब्ध नहीं है. की आय के रूप में कर लगाने योग्य है जो उसमें आय शामिल करने के लिए के रूप में तो यह "कर छुट्टी" लाभांश, और "सकल कुल आय" की परिभाषा में संशोधन के संदर्भ में करने के संबंध में कर राहत के लाभ के एक अनपेक्षित इनकार है के रूप में स्पष्ट रूप से अंतर्निहित इरादा बाहर लाने के लिए इतनी के रूप में एक व्यक्ति धारा 64 (देखें पैरा 101) के प्रावधानों के तहत खंड 80K, पूर्वव्यापी 1968/01/04 से, एक नया अनुभाग द्वारा प्रतिस्थापित किया गया है. एवजी के रूप में खंड 80K के तहत, "कर छुट्टी" किसी भी शेयर पर लाभ या किसी भी व्यक्ति के स्वामित्व वाली कंपनी के शेयरों के कारण लाभांश के माध्यम से आय, आयकर अधिनियम के प्रावधानों के तहत कर के दायरे में है, जहां की आय के रूप में किसी भी अन्य व्यक्ति, जैसे कि लाभांश की सारी दूसरी उल्लेख व्यक्ति की कुल आय की गणना में कटौती के रूप में अनुमति दी जाएगी.
कराधान कानून (संशोधन) अधिनियम, 1970
106इस संशोधन 1968-69 के लिए और निर्धारण वर्ष से लागू होता है. तदनुसार, खंड 80K के तहत कटौती के लिए दावा कर निर्धारिती प्रासंगिक शेयरों के मालिक नहीं था कि जमीन पर "कर छुट्टी" मुनाफे के कारण लाभांश के संबंध में अनुमति दी गई है, जहां आवश्यक हो, राहत आकलन सुधार द्वारा अनुमति दी जानी चाहिए एवजी के रूप में खंड के प्रकाश में.
[संशोधन अधिनियम की धारा 20]
कराधान कानून (संशोधन) अधिनियम, 1970
कुल आय राष्ट्रीय बचत प्रमाणपत्र (प्रथम अंक) पर ब्याज के रूप में आय भी शामिल है जहां एक मामले में कर की गणना
107धारा 112A एक गैर कॉर्पोरेट करदाता की कुल आय राष्ट्रीय बचत प्रमाणपत्र (प्रथम अंक) या इस तरह के प्रमाण पत्र की बैंक श्रृंखला पर ब्याज के रूप में आय भी शामिल है जहां एक मामले में टैक्स का चार्ज करने के लिए एक रियायती आधार नीचे देता है. पिछले 1968/01/04 के लिए, की कुल के रूप में इस तरह के एक मामले में देय टैक्स के निर्धारण के लिए प्रदान की धारा:
(I) साधारण आय पर कर की गणना कर, नेशनल पर यानी, (एक) मुआवजा एक प्रबंध एजेंसी, आदि के मामले का निर्धारण या संशोधन पर प्राप्त की तुलना में अन्य आय, (ख) के पूंजीगत लाभ, और (ग) ब्याज बचत प्रमाणपत्र (प्रथम अंक) या ऐसी साधारण आय पर लागू कर की औसत दर पर इस तरह के प्रमाण पत्र की बैंक सीरीज,;
(Ii) मुआवजे के रूप में आय पर कर की गणना कर धारा 112 में प्रदान की तरह, एक प्रबंध एजेंसी, आदि के मामले का निर्धारण या संशोधन पर प्राप्त;
(Iii) धारा 114 के विशेष प्रावधान के तहत पूंजीगत लाभ पर कर की गणना कर; और
(Iv) राष्ट्रीय बचत प्रमाणपत्र (प्रथम अंक) या इस तरह के प्रमाण पत्र की बैंक सीरीज, पर ब्याज पर टैक्स साधारण आय पर लागू कर की औसत दर से ऊपर (मैं) में करने के लिए भेजा.
कराधान कानून (संशोधन) अधिनियम, 1970
108. 1968/01/04 से प्रभाव के साथ, की गणना के लिए आदि एक प्रबंध अभिकरण के मामले के निर्धारण या संशोधन, पर मुआवजा, और धारा 114 के माध्यम से आय पर कर की गणना के लिए धारा 112,, में विशेष प्रावधान लंबी अवधि के पूंजीगत लाभ पर कर, एक गैर कॉर्पोरेट करदाता इस तरह के मुआवजे और लंबी अवधि के माध्यम से अपनी आय का एक निर्धारित अनुपात की कटौती करने का हकदार है जिसके तहत क्रमश वर्गों 80 और 80T, में नए प्रावधानों के द्वारा बदल दिया गया था पूंजीगत लाभ, क्रमशः, उसकी कर योग्य आय की गणना में. प्रदान करने के लिए इतनी के रूप में इन परिवर्तनों को परिणामी, अनुभाग 112A, retros-pectively 1968/01/04 से, संशोधन किया गया है कि जिनकी कुल आय राष्ट्रीय बचत पत्र पर ब्याज के रूप में आय भी शामिल है एक गैर कॉर्पोरेट करदाता (प्रथम द्वारा देय कर अंक) या इस तरह के प्रमाण पत्र की बैंक श्रृंखला के कुल होने के लिए ले जाया जाएगा:
(क) इस तरह के हित के बारे में उनकी कुल आय अनन्य पर टैक्स प्रभार्य; और
(ख) अपने साधारण आय, यानी करने के लिए लागू कर की औसत दर पर इस तरह के ब्याज पर गणना कर, उक्त ब्याज की कुल आय अनन्य और भी मुआवजा और पूंजीगत लाभ, यदि कोई हो, उसमें शामिल थे.
कराधान कानून (संशोधन) अधिनियम, 1970
109कि राष्ट्रीय बचत पत्र पर ब्याज के रूप में अपनी आय पर टैक्स प्रभार्य गणना के प्रयोजन के लिए एक गैर कॉर्पोरेट करदाता की साधारण आय पर आयकर की औसत दर कंप्यूटिंग में (जो प्रदान करता है अनुभाग 112A, को स्पष्टीकरण 1 सबसे पहले यह है के रूप में जारी करना) या इस तरह के प्रमाण पत्र की बैंक सीरीज, ऐसे साधारण आय प्रासंगिक वर्ष के वित्त अधिनियम में परिभाषित के रूप में "अर्जित आय" की पूरी तरह से मिलकर समझा जाएगा, 1969/01/04 से प्रभाव के साथ हटा दिया गया है "अर्जित आय" और एक ही तिथि से प्रभावी कर की वसूली के प्रयोजन के लिए "अनर्जित आय" के बीच भेद की समाप्ति के बाद बेमानी हो जाते हैं.
[संशोधन अधिनियम की धारा 24]
कराधान कानून (संशोधन) अधिनियम, 1970
साझेदारी फर्म के लिए पंजीकरण के अनुदान के लिए प्रक्रिया
110पंजीकरण किसी भी निर्धारण वर्ष के लिए किसी भी कंपनी के लिए प्रदान किया जाता है जहां अनुभाग 184 के मौजूदा प्रावधानों के तहत (7),, यह कुछ आवश्यकताओं को हर बाद निर्धारण वर्ष विषय के लिए प्रभावी होंगे. इन आवश्यकताओं में से एक फर्म प्रासंगिक निर्धारण वर्ष के लिए आय की अपनी वापसी, फर्म का संविधान में कोई परिवर्तन या के साधन के द्वारा सबूत के रूप में भागीदारों के शेयरों है कि इस आशय का एक घोषणा के साथ प्रस्तुत करना चाहिए पंजीकरण प्रदान की गई थी, जिसके आधार पर भागीदारी. इस आवश्यकता को, व्यवहार में, कारण फर्म आय की वापसी के साथ साथ घोषणा प्रस्तुत करने में सक्षम नहीं था किसी भी कारण के लिए कठिनाई जहां के लिए प्रेरित किया. कुछ साथी या साझेदार (उनमें से सभी ने किसी भी भागीदारों में से एक है और नहीं द्वारा हस्ताक्षर किए जा सकते हैं) आयकर रिटर्न प्रस्तुत करने की तारीख से पहले घोषणापत्र पर हस्ताक्षर करने के लिए उपलब्ध नहीं थे, जहां इस तरह के कारणों में से एक होगा. इस मामले के संबंध में करदाताओं के लिए असुविधा और कष्ट से बचने के लिए एक दृश्य के साथ, खंड (ख) के अनुभाग 184 के परन्तुक (7) पंजीकरण की निरंतरता के लिए घोषणा प्रस्तुत किया जा सकता है, जिसके तहत एक नया खंड, जरूरी नहीं द्वारा प्रतिस्थापित किया गया है आयकर रिटर्न के साथ साथ, लेकिन मूल रूप से या विस्तार पर तय है, चाहे वापसी प्रस्तुत करने के लिए अनुमति दी गई समय की समाप्ति से पहले. आयकर अधिकारी फर्म ने कहा कि इस अवधि के भीतर घोषणा प्रस्तुत से पर्याप्त कारण से रोका गया था वह संतुष्ट है कि इसके अलावा, जहां, वह आकलन किया जाता है इससे पहले घोषणा किसी भी समय प्रस्तुत करने की अनुमति दे सकता.
कराधान कानून (संशोधन) अधिनियम, 1970
111.खंड 185 के लिए एक संशोधन के द्वारा, यह भी आयकर अधिकारी अनुभाग 184 के अनुसरण में फर्म द्वारा दी गई घोषणा (7) क्रम में नहीं है पता चलता है कि जहां, वह करने के लिए घोषणा में दोष सूचित करेगा कि प्रदान की गई है फर्म और यह इस तरह की सूचना की तारीख से एक माह की अवधि के भीतर दोष को ठीक करने का अवसर दे. दोष उस अवधि के भीतर सुधारा नहीं जाता है, तो केवल आयकर अधिकारी पहले वर्ष या साल के लिए फर्म को दी गई पंजीकरण प्रासंगिक निर्धारण वर्ष के लिए प्रभाव नहीं होगा कि घोषणा के लेखन में एक आदेश पारित करेंगे. यह प्रावधान अनुभाग 185 का एक नया उप - धारा (3) में किया गया है. खंड 185 के मौजूदा उप - धारा (3) के पदार्थ (2), प्रदान करने कि खंड, अन्य बातों के साथ की [मौजूदा उप - धारा (2) के लिए प्रतिस्थापित] एक नई उपधारा में शामिल किया गया है कि जहां आवेदन एक फर्म के पंजीकरण के मौजूदा उप - धारा (3) के रूप में प्रदान आवेदन में दोष, की अनुमति दी समय के भीतर सुधारा नहीं है कि जमीन पर आयकर अधिकारी द्वारा अस्वीकार कर दिया है, के लिए आयकर अधिकारी ऐसा करेगा लेखन में एक आदेश से. वर्तमान में, खंड 184 के अनुसरण में यह द्वारा दिए घोषणापत्र में किसी भी दोष को ठीक करने के लिए फर्म के लिए एक अवसर की अनुमति के लिए आयकर अधिकारी की आवश्यकता का कोई प्रावधान नहीं है (7). न ही किसी भी आवश्यकता के लिए एक लिखित आदेश उसे भी दोष को ठीक करने के लिए फर्म के लिए अवसर के अनुदान के बाद, अपनी दोषपूर्ण होने के कारण पंजीकरण के लिए आवेदन खारिज, या पंजीकरण दी कि घोषणा के द्वारा किया जाना चाहिए कि, वर्तमान में, वहाँ है पहले के एक आकलन वर्ष या साल के लिए फर्म के लिए प्रासंगिक निर्धारण वर्ष के लिए असर नहीं होगा. संशोधन ऐसे किसी भी प्रावधान के अभाव की वजह से भागीदारी फर्मों के लिए हुई असुविधा और कष्ट को दूर करता.
कराधान कानून (संशोधन) अधिनियम, 1970
आयकर अधिकारी के आदेश बाद में एक वर्ष के लिए पंजीकरण की निरंतरता के लिए क्योंकि आवेदन में या घोषणा में कुछ दोष की एक फर्म को पंजीकरण से इनकार कर के खिलाफ अपील
112एक अवसर के रूप में इसे करने के लिए अनुमति दी गई है, के बाद भी मौजूदा कानून के तहत, कोई अपील क्योंकि फर्म द्वारा सुधारा नहीं कर रहे हैं, जो आवेदन में कुछ दोष के एक साझेदारी फर्म के पंजीकरण के लिए आवेदन खारिज आयकर अधिकारी के आदेश के खिलाफ झूठ अनुभाग 185 द्वारा आवश्यक (2). इसी तरह, किसी भी वर्ष के लिए एक फर्म को दी गई पंजीकरण क्योंकि अनुभाग 184 के तहत यह द्वारा दिए घोषणापत्र में कुछ दोष के बाद साल के लिए प्रभाव है करने की अनुमति के लिए आयकर अधिकारी के इनकार के खिलाफ कोई अपील नहीं है (7). ऐसे मामलों में करदाता को असुविधा और कष्ट से बचने के लिए एक दृश्य के साथ, एक अपील अपीलीय सहायक आयुक्त को जो झूठ के खिलाफ आयकर अधिकारी के आदेश को निर्दिष्ट करता है जो अनुभाग 246, के लिए एक नया खंड (जे) प्रतिस्थापन द्वारा संशोधन किया गया है उस अनुभाग के मौजूदा खंड (जे). खंड (जे) के तहत एवजी के रूप में, एक अपील अर्थात् आयकर अधिकारी के निम्न आदेश के खिलाफ अपीलीय सहायक आयुक्त को झूठ होगा:
1अनुभाग 185 के तहत एक आदेश (1) (बी) के आयकर अधिकारी अपनी असलियत को ही संतुष्ट नहीं है, जहां एक फर्म के लिए पंजीकरण से इनकार कर.
प्र.20. (2) क्योंकि आयकर अधिकारी द्वारा अनुमति दी समय के भीतर सुधारा नहीं गया, जो कि आवेदन में कुछ दोषों की एक फर्म के पंजीकरण के लिए आवेदन खारिज अनुभाग 185 के तहत एक आदेश.
(3)अनुभाग 185 (3) (के रूप में पिछले पैराग्राफ में समझाया एक नया प्रावधान है) पहले के एक आकलन वर्ष या साल के लिए एक फर्म को दी गई पंजीकरण क्योंकि में कुछ दोष के प्रासंगिक निर्धारण वर्ष के लिए प्रभाव नहीं होगा कि घोषणा के तहत एक आदेश खंड 184 के अनुसरण में फर्म द्वारा दी गई घोषणा (7) आयकर अधिकारी द्वारा अनुमत अवधि के भीतर सुधारा नहीं गया है.
(4)अनुभाग 185 के तहत एक आदेश (5) एक सबसे अच्छा निर्णय मूल्यांकन धारा 144 के तहत किया जाता है, जहां एक फर्म रजिस्टर करने से इनकार.
आइटम के खिलाफ निर्दिष्ट आदेश (2) और (3) के ऊपर पहली बार के लिए अपीलीय किए गए हैं, जबकि कम से उल्लेख किया उन लोगों (1) और (4) के ऊपर पहले से ही अनुभाग 246 (जे) के मौजूदा प्रावधानों के अंतर्गत आते हैं.
कराधान कानून (संशोधन) अधिनियम, 1970
113के रूप में पिछले पैराग्राफ में विस्तार से बताया वर्गों 184, 185 और 246 में संशोधन 1971/01/04 से प्रभावी होगा. वर्गों 184 और 185 प्रकृति में प्रक्रियात्मक हैं में संशोधन के रूप में, नए प्रावधानों 1970-71 या किसी भी पहले साल के लिए मूल्यांकन करने के लिए भी निर्धारण वर्ष 1971-72 और बाद के वर्षों के लिए आकलन के संबंध में न केवल लागू होगा, लेकिन जहां पंजीकरण के पंजीकरण या जारी रखने के सवाल 1971/01/04 पर या के बाद माना जाता है और प्रासंगिक आदेश उस तारीख को या उसके बाद पारित कर रहे हैं. अपील के बारे में अनुभाग 246 (जे) के संशोधित प्रावधानों, तथापि, केवल अनुभाग 185 के तहत पारित आदेश को लागू (2) या धारा 185 (3) 1971/01/04 पर या के बाद और न उस तारीख से पहले पारित आदेशों को. जाएगा
[धारा 33, 34 (ख) और संशोधन अधिनियम के 44]
कराधान कानून (संशोधन) अधिनियम, 1970
लाभांश का भुगतान कंपनी के कृषि आय के कारण लाभांश पर कर राहत
114धारा 235 एक राज्य के कानून के तहत कृषि आयकर के अधीन कर दिया गया है, जो भुगतान कंपनी के कृषि आय के कारण है जो उनके शेयरों पर लाभांश के उस भाग पर कंपनियों के शेयरधारकों के लिए कर राहत प्रदान करने के लिए प्रदान करता है. कंपनियां खुद कर रहे हैं, जो शेयरधारकों के मामले में, कर राहत वर्तमान में लाभांश की कृषि तत्व के 27.5 फीसदी तक सीमित है. हालांकि, आयकर कानून के अन्य प्रावधानों के तहत अंतर - कॉर्पोरेट लाभांश पर कर की प्रभावी घटना 14 फीसदी से केवल 26 फीसदी के बीच है. सुरक्षित करने के लिए इतनी के रूप में इस तरह के लाभांश पर अन्यथा प्रभार्य कर की प्रभावी दर से अधिक दर पर अपनी अंतर - कॉर्पोरेट लाभांश पर कर राहत प्राप्त करने के लिए एक कंपनी के लिए सक्षम बनाता है जो इस विसंगति को दूर करने की दृष्टि से, धारा 235 में संशोधन किया गया है कि टैक्स ऐसे मामलों में राहत लाभांश की कृषि तत्व पर प्राप्त कंपनी द्वारा वास्तव में देय केन्द्रीय आयकर तक सीमित है. इस संशोधन 1971/01/04 पर प्रभावी होंगे और, तदनुसार, आकलन वर्ष 1971-72 और बाद के वर्षों के लिए लागू होगी.
कराधान कानून (संशोधन) अधिनियम, 1970
115अनुभाग 235 के तहत कर राहत केवल "शेयरधारक", यानी, कंपनी की किताबों में शेयरधारक के रूप में पंजीकृत है जो व्यक्ति के लिए वर्तमान में उपलब्ध है. यह एक मामले में, इस खंड के मौजूदा प्रावधानों के तहत उपलब्ध नहीं है जहां लाभांश एक करदाता से संबंधित शेयरों पंजीकृत हैं जहां लाभकारी स्वामी, जैसे, के अलावा किसी अन्य व्यक्ति के नाम पर पंजीकृत स्टैंड प्राप्त है जिनके संबंध में शेयर लाभांश के संग्रह की सुविधा के लिए एक बैंक के नाम पर. कर राहत एक व्यक्ति व्यक्ति के पति या पत्नी के नाम पर पंजीकृत खड़े शेयरों के संबंध में लाभांश पर धारा 64 के तहत कर के दायरे में है, जहां एक मामले में भी उपलब्ध नहीं है. इन और इसी तरह के मामलों में अनुभाग 235 के तहत कर राहत की अनायास ही इनकार हटाने के लिए एक दृश्य के साथ, अनुभाग यह स्पष्ट है कि जो बनाता है एक विवरण के अलावा द्वारा, 1962/01/04 से पूर्वव्यापी संशोधन किया गया है कि खंड के अंतर्गत राहत शेयरधारक के अलावा अन्य किसी भी व्यक्ति का भुगतान कंपनी के कृषि आय के कारण लाभांश पर कर के दायरे में है, जहां एक मामले में भी उपलब्ध हो जाएगा. ऐसे एक मामले में, कर राहत के बजाय पंजीकृत शेयरधारक की, लाभांश के संबंध में कर के दायरे में है, जो दूसरे व्यक्ति के लिए उपलब्ध हो जाएगा. इस संशोधन पूर्वव्यापी है, यह आकलन वर्ष 1962-63 और बाद के वर्षों के संबंध में लागू होगा. तदनुसार, धारा 235 के तहत कर राहत व्यक्ति जिनके हाथ लाभांश आय कर के दायरे में है में पंजीकृत शेयरधारक, प्रासंगिक आकलन सुधारा या संशोधित किया जाएगा और उसे करने की अनुमति दी उपयुक्त राहत नहीं है कि जमीन पर केवल वंचित किया गया है जहां.
[संशोधन अधिनियम की धारा 41]
कराधान कानून (संशोधन) अधिनियम, 1970
वसूली की कार्यवाही में अचल संपत्ति की बिक्री के मामले में टैक्स की बकाया राशि पर ब्याज प्रभार्य की दर
११६ .(1) दूसरी अनुसूची के नियम 60 एक कर दोषी या जिनके हितों टैक्स की बकाया राशि की वसूली के लिए एक प्रमाण पत्र के निष्पादन में बनाया अचल संपत्ति की बिक्री से प्रभावित कर रहे हैं किसी भी अन्य व्यक्ति, कर वसूली अधिकारी को आवेदन कर सकते हैं प्रदान करता है कि बिक्री निवारक के लिए. इस प्रयोजन के लिए, दोषी या अन्य व्यक्ति को एक साथ की घोषणा की तारीख से प्रतिवर्ष 6 प्रतिशत की दर से गणना की ब्याज के साथ, बिक्री का आदेश दिया गया था, जिनमें से वसूली के लिए बकाया में कर की राशि जमा करने के लिए आवश्यक है जमा किया जाता है जब तिथि करने के लिए बिक्री. करों के भुगतान में चूक के लिए आयकर अधिनियम के अन्य प्रावधानों के तहत ब्याज प्रभार्य की दर, रिफंड का अनुदान में देरी के लिए आदि आय का रिटर्न, और भी करदाता के लिए केंद्र सरकार द्वारा कि देय प्रस्तुत करने में देरी की है, 1967/01/10 के बाद से प्रतिवर्ष 9 फीसदी होने के लिए निर्दिष्ट किया गया. अन्य प्रयोजनों, प्रतिवर्ष अर्थात् 9 फीसदी के लिए लागू ब्याज दर के साथ लाइन में है कि शासन के प्रयोजन के लिए ब्याज की दर लाने के रूप में तो दूसरी अनुसूची के नियम 60, इसलिए संशोधन किया गया है. इस संशोधन 1971/01/04 पर प्रभावी होंगे और, तदनुसार, उच्च दर बिक्री की घोषणा 1971/01/04 पर या के बाद किया जाता है जिन मामलों में लागू होंगे.
[संशोधन अधिनियम की धारा 56]
कराधान कानून (संशोधन) अधिनियम, 1970
आयकर अधिनियम के प्रावधानों के तहत बनाया वार्षिकी जमा पर देय वार्षिकियां के मूल्य के संपत्ति कर से छूट
117 मूल्यांकन वर्षों के लिए (भारत के नागरिकों, स्थानीय अधिकारियों और पंजीकृत फर्मों नहीं कर रहे हैं, जो व्यक्तियों के अलावा) निवासी गैर निगमित करदाताओं द्वारा वार्षिकी जमा के निर्माण के लिए प्रदान की जाती वित्त अधिनियम, 1964, द्वारा डाला अध्याय XXIIA, 1968 तक 1964-65 -69 (शामिल), वर्ष दर वर्ष वित्त अधिनियमों में निर्दिष्ट दरों पर. खंड 280D तहत किसी भी वर्ष में किए गए या बरामद वार्षिकी जमा केन्द्रीय सरकार द्वारा अधिसूचित दर पर मूलधन और ब्याज के 10 वार्षिक बराबर किश्तों में केन्द्र सरकार द्वारा प्रतिदेय हैं. उस अनुभाग के परन्तुक संबंधित प्राधिकरण (आयकर अधिकारी) इस तरह के भुगतान किया जाता है जब तक कि वास्तविक कठिनाई की वजह से हो जाएगा संतुष्ट है, जिसमें किसी भी मामले में बकाया वार्षिकियां की रूपान्तरित मूल्य के भुगतान के लिए परमिट.
कराधान कानून (संशोधन) अधिनियम, 1970
118 इसके दायरे से धारा 2 शामिल नहीं है, अन्य बातों के साथ, किसी भी मामले में किसी भी वार्षिकी का अधिकार की धारा में शब्द "संपत्ति" (ई) की परिभाषा है, जहां उसका एक मुश्त राशि में किसी भी हिस्से का रूपान्तरण रोकना उससे संबंधित नियम और शर्तों अनुदान. खंड 280D, उस अनुभाग के लिए विशेष रूप से प्रावधान के प्रावधानों को ध्यान में रखते हुए, यह नियम और आयकर अधिनियम के तहत कर दिया वार्षिकी जमा करने के लिए बदले में वार्षिकियां के भुगतान से संबंधित स्थितियां पूरी तरह ऐसी वार्षिकियां का रूपान्तरण रोका नहीं कहा जा सकता है . यह संपत्ति कर बकाया वार्षिकियां के मूल्य के अधीन करने का इरादा नहीं है के रूप में, एक विशिष्ट प्रावधान धारा 5 में डाला एक नया खंड (माध्यम) में किया गया है (1), जिसके तहत एक निर्धारिती द्वारा प्राप्य बकाया वार्षिकियां के मूल्य आयकर अधिनियम के अध्याय XXIIA के प्रावधानों के तहत बनाया वार्षिकी जमा के संबंध में केन्द्र सरकार से पूरी तरह संपत्ति कर से मुक्त किया जाएगा. वार्षिकी जमा पहले वित्तीय वर्ष 1964-65 के दौरान शुरू किए गए थे के रूप में, बकाया वार्षिकियां के मूल्य मुक्त करने के लिए संपत्ति कर अधिनियम में संशोधन आकलन वर्ष 1965-66 और बाद के वर्षों के लिए, पूर्वव्यापी, प्रभावी बना दिया गया है.
[संशोधन अधिनियम की धारा 59]
कराधान कानून (संशोधन) अधिनियम, 1970
आत्म मूल्यांकन पर कर का भुगतान करने के लिए विफलता के लिए पेनल्टी
११९. धारा 15B वापसी के आधार पर देय टैक्स रुपये से अधिक है, जहां एक मामले में, धन की वापसी प्रस्तुत करने के 30 दिनों के भीतर, आत्म मूल्यांकन पर संपत्ति कर के भुगतान की आवश्यकता है. 500. उप - धारा (3) खंड की 15B ऊपर इस तरह के टैक्स का भुगतान नहीं किया जाता है तो आत्म मूल्यांकन पर देय कर का 50 प्रतिशत करने के लिए एक दंड लगाना के लिए प्रदान करता है. जुर्माना लगाने के लिए बिजली, मौजूदा प्रावधान के तहत, तथापि, केवल एक बार प्रयोग किया जा सकता है. लेवी के लिए, आत्म मूल्यांकन पर कर के भुगतान में जारी डिफ़ॉल्ट के एक मामले में, संपत्ति कर अधिकारी को सक्षम करने से अधिक लचीला जुर्माना की लेवी के लिए प्रावधान बनाने के लिए उप - धारा (3) खंड की 15B संशोधन किया गया है डिफ़ॉल्ट की गंभीरता के अनुसार समय से चरणों में समय के लिए दंड,. जुर्माना की कुल राशि, हालांकि, भुगतान किया जाना है, लेकिन भुगतान नहीं किया गया था की वजह से जो टैक्स का 50 प्रतिशत करने के लिए, वर्तमान में, के रूप में सीमित हो जाएगा. खंड 15B के संशोधन 1971/01/04 पर बल में आ जाएगा. किसी भी पिछले एक साल के लिए आत्म - मूल्यांकन पर संपत्ति कर के भुगतान में चूक, 1971/01/04 से पहले हुआ है कि, तारीख को या उसके बाद जारी है जहां मामलों में, यह एक दंड या लेवी के लिए संपत्ति कर अधिकारी के लिए खुला होगा खंड 15B के तहत दंड (3) के रूप में संशोधन, कर की 50 फीसदी की सीमा के अध्यधीन, जुर्माना पहले ही 1971/01/04 से पहले प्रयोग नहीं किया गया है लेवी के लिए शक्ति प्रदान की है.
[संशोधन अधिनियम की धारा 60]
कराधान कानून (संशोधन) अधिनियम, 1970
धन की आड़ लिए दंड की वसूली के लिए प्रक्रिया
12 धारा 18 के धन या आदि दस्तावेजों के उत्पादन के लिए नोटिस के साथ पालन की वापसी प्रस्तुत करने के लिए विफलता के लिए दंड का अधिरोपण के लिए प्रदान करता है, और धन की आड़ के लिए. उप - धारा (3) कि खंड की, वर्तमान में, जैसा कि ऊपर कहा धन की आड़ लिए imposable न्यूनतम जुर्माना, रुपये से अधिक हो गया है कि जहां प्रदान करता है. 1,000 संपत्ति कर अधिकारी उसके बाद जुर्माना लगाने के लिए आगे बढ़ना होगा जो निरीक्षण सहायक आयुक्त को मामले का उल्लेख होगा. रुपए की इस सीमा. न्यूनतम जुर्माना imposable के मामले में 1,000 धन की आड़ के लिए न्यूनतम जुर्माना से परहेज करने की मांग की संपत्ति कर का 20 प्रतिशत होने के लिए निर्दिष्ट किया गया था जब एक समय में निर्धारित किया गया था. वित्त अधिनियम, 1968 के तहत, धन की आड़ के लिए दंड के पैमाने छुपा धन के बराबर राशि का एक न्यूनतम और दो बार उस राशि की अधिकतम करने के लिए बढ़ा दिया गया था. रुपये की सीमा. जैसा कि ऊपर कहा न्यूनतम दंड के मामले में 1,000, इसलिए, अवास्तविक बनने और निरीक्षण सहायक आयुक्त द्वारा पारित किया जाना धन की आड़ के लिए व्यावहारिक रूप से सभी दंड के आदेश की आवश्यकता होती है की आभासी प्रभाव पड़ा है. एक अधिक तर्कसंगत आधार पर धन की आड़ के लिए जुर्माना लगाने के लिए इस प्रावधान रखने और निरीक्षण सहायक आयुक्त और संपत्ति कर अधिकारी के बीच काम का उचित विभाजन के बारे में लाने के लिए एक दृश्य के साथ, उप - धारा (3) के लिए संशोधित किया गया है धन की आड़ से जुड़े मामलों में, जुर्माना की लेवी के लिए कार्यवाही छुपा धन, मूल्यांकन पर संपत्ति कर अधिकारी द्वारा निर्धारित रूप में, रुपये से अधिक है, जहां केवल निरीक्षण सहायक आयुक्त को संपत्ति कर अधिकारी द्वारा संदर्भित करना होगा कि प्रदान . 25,000. इस संशोधन 1971/01/04 पर प्रभावी होंगे. स्थिति धारा 274 के समान संशोधन के संबंध में, के रूप में अच्छी तरह से संपत्ति कर के संबंध में लागू होगा, पैरा 29 में कहा गया है.
[संशोधन अधिनियम की धारा 61 (ख)]
कराधान कानून (संशोधन) अधिनियम, 1970
माफी या धन की स्वैच्छिक प्रकटीकरण के मामलों में दंड की कमी के लिए प्रक्रिया
121 धारा 18 की उप - धारा (2) छुपा धन की स्वैच्छिक प्रकटीकरण के मामलों में, नेट धन की वापसी प्रस्तुत में या धन की आड़ के लिए देरी के लिए एक व्यक्ति पर imposable न्यूनतम जुर्माना की कमी या छूट का प्रावधान है. इस तरह की कमी या छूट है कि वह प्रकटीकरण पूर्ण और पूरा हो गया है और स्वेच्छा से और अच्छा विश्वास में किया गया है से संतुष्ट है कि अगर आयुक्त द्वारा आदेश दिया जा रहा है; निर्धारिती प्रकटीकरण के अनुसरण में मूल्यांकन से संबंधित किसी भी जांच में सह संचालित गया है कि; और निर्धारिती भुगतान किया है या इस तरह के मूल्यांकन के परिणाम में देय होना निर्धारित कर और ब्याज के भुगतान के लिए संतोषजनक व्यवस्था की है कि या तो. छुपा आय की स्वैच्छिक प्रकटीकरण से संबंधित अनुभाग 271 (4 ए) में इसी प्रावधान में, आयुक्त मामलों में दंड की कमी या छूट के लिए बोर्ड के पूर्व अनुमोदन प्राप्त करना चाहिए कि वहाँ एक आवश्यकता है जहां न्यूनतम imposable जुर्माना या छुपा आय की राशि विनिर्दिष्ट मात्रा, इस परिपत्र के देखें पैरा 30 से अधिक है. आयकर अधिनियम में इसी प्रावधान के साथ लाइन में छुपा धन की स्वैच्छिक प्रकटीकरण से संबंधित प्रावधान में लाने के लिए एक दृश्य के साथ, धारा 18 (2) के आयुक्त प्राप्त करने के लिए आवश्यक हो जाएगा जिसके तहत एक प्रावधान के अलावा द्वारा संशोधित किया गया है माफी या जुर्माना imposable है जिनके संबंध में छुपा धन की राशि रुपये से अधिक है, जहां धन की आड़ लिए imposable दंड की कमी करने के लिए बोर्ड के पूर्व अनुमोदन. प्रकटीकरण द्वारा कवर आकलन वर्षों में से किसी एक के लिए 5 लाख रुपए. इस संशोधन 1971/01/04 पर प्रभावी होंगे. स्थिति है, साथ ही संपत्ति कर के संबंध में लागू होगा अनुभाग 271 (4 ए) के समान संशोधन के संबंध में, अनुच्छेद 31 में कहा गया है.
[संशोधन अधिनियम की धारा 61 (क)]
कराधान कानून (संशोधन) अधिनियम, 1970
जुर्माना की कार्यवाही के पूरा होने के लिए समय सीमा
122 उप - धारा (5) धारा 18 की, वर्तमान में, यह दो साल की समय सीमा वर्तमान में गिना जाता है आदि, खातों, रिटर्न प्रस्तुत करने में धन की आड़ के लिए या चूक के लिए जुर्माना कार्यवाही के पूरा होने के लिए दो वर्ष की समय सीमा को निर्दिष्ट जो के पाठ्यक्रम में कार्यवाही के पूरा होने की तारीख से जुर्माना कार्यवाही शुरू की गई. अपीलीय सहायक आयुक्त छुपा धन और विभाग के खाते पर किए गए इसके अलावा संपत्ति कर अधिकारी द्वारा जांच के लिए मूल्यांकन के खिलाफ अपील remands या हटाता है या कम कर देता है जिन मामलों में व्यावहारिक कठिनाइयों में इस समय सीमा के परिणाम के आपरेशन में बात लेता है अपीलीय ट्रिब्यूनल से अपील. कभी कभी, छुपा धन की मात्रा पर इस तरह के मामलों में अंतिम निर्णय केवल दो साल की सीमा समाप्त होने के बाद उपलब्ध हो जाता है. ऐसे मामलों में कठिनाइयों obviating निष्फल काम को कम करने और करदाताओं के लिए कठिनाई से बचने के लिए एक दृश्य के साथ, उप - धारा (5) धारा 18 की एक नई उपधारा द्वारा प्रतिस्थापित किया गया है. नई उपधारा के तहत (5), धारा 18 के तहत एक दंड अधिरोपित एक व्यवस्था बनाने के लिए समय सीमा, आमतौर पर, दो साल के वित्तीय वर्ष के अंत से किया जाएगा जिसमें कार्यवाही के लगाने के लिए जो कार्रवाई के पाठ्यक्रम में जुर्माना शुरू किया गया है, पूरा कर रहे हैं. हालांकि, प्रासंगिक मूल्यांकन या अन्य आदेश अपीलीय सहायक आयुक्त या अपीलीय न्यायाधिकरण, दंड कार्यवाही को पूरा करने के लिए समय सीमा को संपत्ति कर अधिकारी द्वारा एक अपील करने के लिए अपील की विषय वस्तु है, जहां एक मामले में या तो दो साल हो जाएगा अपीलीय सहायक आयुक्त या, मामले के रूप में के आदेश हो सकता है, जिसमें इस महीने के अंत से ऊपर या छह महीनों से कहा गया है, अपीलीय न्यायाधिकरण जो भी बाद में संपत्ति कर के आयुक्त द्वारा प्राप्त होता है. धारा 18 के स्पष्टीकरण में मौजूदा प्रावधान (5) [जो प्रदान करता है कि कारण संपत्ति कर अधिकारी, निरीक्षण सहायक आयुक्त या अपीलीय सहायक आयुक्त दौरान क्षेत्राधिकार और किसी भी अवधि होने के कार्यालय की नियुक्ति के परिवर्तन को निर्धारिती फिर से सुनवाई में लगने वाले समय जुर्माना कार्यवाही अदालत के एक आदेश से रोक लगा दिया गया है जो सीमा की अवधि कंप्यूटिंग में बाहर रखा जाएगा] बनाए रखा जा रहा है. धारा 18 में संशोधन (5) 1971/01/04 पर प्रभावी होंगे. पैरा 35 में कहा गया है, आयकर अधिनियम की धारा 275 के समान संशोधन के संबंध में, जुर्माना कार्यवाही के पूरा होने के लिए संशोधित समय सीमा दंड कार्यवाही के लिए लागू होगी दंड के रूप में भी, 1971/1/4 को या उसके बाद शुरू उस तारीख (5) पहले ही समाप्त नहीं किया गया है धारा 18 के मौजूदा प्रावधानों के तहत निर्दिष्ट सीमा की अवधि प्रदान की पहले कार्यवाही शुरू.
[धारा 61 में संशोधन अधिनियम (ग)]
कराधान कानून (संशोधन) अधिनियम, 1970
आयकर अपीलीय न्यायाधिकरण को उनकी अपील और संपत्ति कर के मामलों में संदर्भ अनुप्रयोगों के साथ निर्धारिती द्वारा देय शुल्क की वृद्धि
123 आयकर अधिनियम के संबंधित प्रावधानों में किए गए संशोधन के अनुरूप आयकर अपीलीय न्यायाधिकरण को उनकी अपील और संपत्ति कर के मामलों में संदर्भ अनुप्रयोगों के साथ निर्धारिती द्वारा देय शुल्क रुपये से बढ़ा दी गई है. रुपये के लिए 100. 125 इस प्रयोजन के लिए, संपत्ति कर अधिनियम के वर्गों के 24, 26 और 27 1971/01/04 से प्रभावी संशोधन किया गया है.
[धारा 62, 63 और संशोधन अधिनियम के 64]
कराधान कानून (संशोधन) अधिनियम, 1970
शुद्ध धन के बंद गोलाई और भी संपत्ति कर देय या प्रतिदेय
124 गणना को सरल बनाने के लिए एक दृश्य के साथ, दो नए वर्गों, 44c और 44D, 1971/01/04 से प्रभावी संपत्ति कर अधिनियम में पेश किया गया है. नई धारा 44c संपत्ति कर अधिनियम के अन्य प्रावधानों के तहत अभिकलन शुद्ध धन रुपये के निकटतम गुणज तक राउंड ऑफ किया जाएगा प्रदान करता है. रुपए से कम किसी भी राशि की अनदेखी करके 100. 50 ऐसे शुद्ध धन में शामिल है और रुपए से लेकर मात्रा बढ़ रही है. 50 रुपये के लिए, 99. 100 नई धारा 44D संपत्ति कर अधिनियम के अन्य प्रावधानों के तहत संपत्ति कर ब्याज, दंड या देय किसी भी अन्य राशि और कारण धन वापसी की राशि की राशि, एक रुपया के निकटतम गुणज तक राउंड ऑफ किया जाएगा प्रदान करता है. इन प्रावधानों आकलन वर्ष 1970-71 या 1971/01/04 को या उसके बाद पूरा कर रहे हैं जो किसी भी पहले साल के लिए आकलन करने के लिए भी लागू होगा.
[संशोधन अधिनियम की धारा 65]
कराधान कानून (संशोधन) अधिनियम, 1970
ब्याज की गणना का सरलीकरण
125 नियमों की जाने वाली प्रक्रिया नीचे बिछाने बनाने के लिए केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड को सशक्त करने के लिए इतनी के रूप में आयकर अधिनियम के तहत के रूप में, प्रावधान, उप - धारा (2) की धारा 46 के का एक नया खंड (डीडी) में, शुरू किया गया है ब्याज से प्रभार्य और संपत्ति कर अधिनियम के तहत करदाता को देय की गणना में पीछा किया. नया खंड विशेष रूप से इस तरह के नियम निर्धारिती द्वारा जो ब्याज की क्षुद्र मात्रा में देय के लिए ब्याज की गणना की और भी जिन परिस्थितियों में निर्दिष्ट किया जाता है, जिसके लिए अवधि की, पूरे महीने के लिए, बंद गोलाई लिए प्रावधान और हद शामिल हो सकते हैं प्रदान करता है कि हो सकता है अनदेखा किया जा.
[संशोधन अधिनियम की धारा 66]
कराधान कानून (संशोधन) अधिनियम, 1970
उपहार कर मामले में आयकर अपीलीय न्यायाधिकरण को उनकी अपील और संदर्भ के साथ आवेदन पत्र निर्धारिती द्वारा देय शुल्क की वृद्धि
१२६ प्रासंगिक आयकर अधिनियम के प्रावधानों और संपत्ति कर अधिनियम, वर्गों 23, 25 और 26 उपहार कर मामले में आयकर अपीलीय न्यायाधिकरण के लिए अपील की और संदर्भ आवेदनों से संबंधित करने के लिए किए गए संशोधनों के अनुरूप संशोधन किया गया है रुपये से करदाता द्वारा देय शुल्क में वृद्धि करने के लिए एक दृश्य के साथ. रुपये के लिए 100. 125 ये संशोधन 1971/01/04 पर प्रभावी होंगे.
[धारा 67, 68 और संशोधन अधिनियम के 69]
कराधान कानून (संशोधन) अधिनियम, 1970
कर योग्य उपहार और उपहार कर, आदि के बंद गोलाई लिए प्रावधान
127. गणना को सरल बनाने के लिए एक दृश्य के साथ, दो नए वर्गों 44A और 44B 1971/01/04 से प्रभाव के साथ सम्मिलित किया गया है. नई धारा 44A सभी कर योग्य उपहार के मूल्य जा रहा है के रूप में उपहार कर अधिनियम के अन्य प्रावधानों के तहत मूल्यांकन किया राशि ऐसे मूल्य में शामिल मात्रा में कम से कम पांच रुपये की अनदेखी और से, दस रुपए के निकटतम गुणज तक राउंड ऑफ किया जाएगा प्रदान करता है दस रुपए के लिए पांच रुपए से नौ रुपए से लेकर मात्रा बढ़ रही है. नई धारा 44B उपहार कर, ब्याज, दंड या किसी भी अन्य राशि देय की राशि, और उपहार कर अधिनियम के प्रावधानों के तहत की वजह से वापसी की राशि, निकटतम रुपया को राउंड ऑफ किया जाएगा प्रदान करता है. इन प्रावधानों 1971/01/04 को या उसके बाद पूरा कर रहे हैं जो आकलन वर्ष 1970-71 या किसी भी पहले साल के लिए आकलन करने के लिए भी लागू होगा.
[संशोधन अधिनियम की धारा 70]
कराधान कानून (संशोधन) अधिनियम, 1970
ब्याज की गणना का सरलीकरण
128. नियमों की जाने वाली प्रक्रिया नीचे बिछाने बनाने के लिए केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड को सशक्त करने के लिए इतनी के रूप में ब्याज की गणना को सरल बनाने के लिए एक दृश्य के साथ, प्रावधान, (2) की धारा 46 की उप - धारा का एक नया खंड (ई) में किया गया है, ब्याज से प्रभार्य और उपहार कर अधिनियम के तहत करदाता को देय की गणना में पीछा किया. नया खंड विशेष रूप से इस तरह के नियम ब्याज की गणना की और भी जिन परिस्थितियों में निर्दिष्ट किया जाता है, जिसके लिए अवधि की, पूरे महीने के लिए, बंद गोलाई लिए प्रावधान और निर्धारिती द्वारा ब्याज की क्षुद्र मात्रा में देय किस हद तक शामिल हो सकता है प्रदान करता है नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है.
[संशोधन अधिनियम की धारा 71]
कंपनियों (मुनाफा) में संशोधन अधिनियम अधिकर
कराधान कानून (संशोधन) अधिनियम, 1970
अधिकर मामलों में आयकर अपीलीय न्यायाधिकरण को उनकी अपील के साथ निर्धारिती द्वारा देय शुल्क की वृद्धि
129 मामलों अधिकर के संबंध में अपीलीय न्यायाधिकरण को उनकी अपील के साथ निर्धारिती द्वारा फीस देय आयकर अधिनियम में किए गए संशोधन, संपत्ति कर अधिनियम और उपहार कर अधिनियम, के साथ लाइन में भी रुपये से बढ़ा दी गई है. रुपये के लिए 100. 125 इस प्रयोजन के लिए कंपनियों (मुनाफा) अधिकर अधिनियम की धारा 12 के 1971/01/04 से प्रभावी संशोधन किया गया है. रुपये की बढ़ी हुई दर पर [शुल्क. 125 आवेदन कर अधिनियम की धारा 18, अन्य बातों के साथ, अतिरिक्त कर के प्रयोजनों के लिए अनुभाग 256 की हैसियत से भी अधिकर मामलों में अपीलीय न्यायाधिकरण को उनके संदर्भ अनुप्रयोगों के साथ निर्धारिती द्वारा देय होगा.]
[संशोधन अधिनियम की धारा 72]
कराधान कानून (संशोधन) अधिनियम, 1970
कुछ परिस्थितियों में अधिकर संबंधी आदेशों का संशोधन
130 कंपनियों (मुनाफा) अधिकर अधिनियम, आयकर अधिकारी धारा 154 या धारा 155 के अधीन किए गए संशोधन या पुन: संगणना के किसी भी आदेश के आधार पर अतिरिक्त कर के प्रयोजनों के लिए प्रभार्य मुनाफा recompute के लिए अधिकृत है की धारा 14 के मौजूदा प्रावधानों के तहत आयकर अधिनियम. अतिरिक्त कर के प्रयोजनों के लिए प्रभार्य लाभ के फिर से गिनना भी आयकर अधिनियम के तहत विभिन्न अन्य आदेश के परिणाम में किए जाने के लिए आवश्यक हो सकता है के लिए प्रभार्य मुनाफा recompute को आयकर अधिकारी सक्षम करने के लिए इतनी के रूप में, धारा 14 में संशोधन किया गया है इसी आयकर आकलन आयकर अधिनियम के तहत अपील, संदर्भ या संशोधन के माध्यम से एक कार्यवाही में पारित किसी भी आदेश का एक परिणाम के रूप में परिवर्तित कर दिया गया है जिन मामलों में भी अधिकर.
[संशोधन अधिनियम की धारा 73]
कराधान कानून (संशोधन) अधिनियम, 1970
ब्याज की गणना का सरलीकरण
१३१ . आयकर अधिनियम, संपत्ति कर अधिनियम और उपहार कर अधिनियम में किए गए संशोधन के साथ लाइन में, प्रावधान एक नई उपधारा (2) कंपनियों की धारा 25 के (मुनाफा) के खंड (डीडी) में किया गया है अधिकर अधिनियम, नियम ब्याज से प्रभार्य और उक्त अधिनियम के तहत करदाता को देय की गणना में अपनाई जाने वाली प्रक्रिया के नीचे बिछाने बनाने के लिए केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड को सशक्त बनाने के लिए एक दृश्य के साथ. नया खंड विशेष रूप से इस तरह के नियम निर्धारिती द्वारा जो ब्याज की क्षुद्र मात्रा में देय के लिए ब्याज की गणना की और भी जिन परिस्थितियों में निर्दिष्ट किया जाता है, जिसके लिए अवधि की, पूरे महीने के लिए, बंद गोलाई लिए प्रावधान और हद शामिल हो सकते हैं प्रदान करता है कि हो सकता है अनदेखा किया जा.
[संशोधन अधिनियम की धारा 74]

