आयकर विभाग

वित्त मंत्रालय, भारत सरकार

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परिपत्र सं.

539

परिपत्र की तिथि

13/07/1989

दस्तावेज़ अपलोड की तिथि

13/07/1989

परिपत्र: सं 539, 13-07-1989 दिनांकित

1115. ठेकेदारों और उप ठेकेदारों को भुगतान - अधिभार की लेवी

1खंड 194C के प्रावधानों के अनुसार होगा, ऐसी राशि के ऋण का समय पर के खाते में उसमें विनिर्दिष्ट ठेकेदार और एजेंसियों के बीच एक अनुबंध के अनुसरण में किसी भी काम को करने के लिए किसी भी निवासी ठेकेदार को किसी भी राशि के भुगतान के लिए जिम्मेदार किसी भी व्यक्ति आदि नकद, में ठेकेदार या भुगतान क्या है, उसमें शामिल आय पर आयकर के रूप में ऐसी राशि का 2 प्रतिशत के बराबर राशि घटा देते हैं. एजेंसियों रहे हैं:

(क) केन्द्रीय सरकार या किसी राज्य सरकार; या

(ख) किसी स्थानीय प्राधिकारी; या

(ग) के द्वारा या एक केन्द्रीय, राज्य या प्रांतीय कानून के तहत स्थापित किसी निगम; या

(घ) किसी भी कंपनी; या

(ई) किसी भी सहकारी समिति.

एक ठेकेदार पूरे बाहर ले जाने के लिए एक अनुबंध के अनुसरण या वह जैसे राशि का 1 प्रतिशत के बराबर राशि घटा करने के लिए आवश्यक है कि उसके द्वारा किए गए काम के किसी भी हिस्से में एक निवासी उप ठेकेदार को भुगतान करता है इसी तरह जब आयकर आय पर उसमें शामिल थे. हालांकि, ऐसी कोई कटौती श्रेय या रुपये से अधिक न हो को ध्यान जिनमें से एक अनुबंध के अनुसरण में भुगतान किसी भी राशि के लिए किए जाने की आवश्यकता है. शुरू किया.

प्र.20. इस संबंध ध्यान में 19-2-1988 दिनांकित, बोर्ड के परिपत्र सं 505 के लिए आमंत्रित किया है. वित्त (संशोधन) द्वारा शुरू के रूप में 5 फीसदी की दर अधिनियम, 1987 पर अधिभार लगाने आप के लिए भेजी गई थी जिसमें. वित्त अधिनियम, 1989 के प्रावधानों के अनुसार, कर आयकर अधिनियम की धारा 194C के तहत कटौती की जानी है जिसमें मामलों में, कटौती है कि खंड में निर्दिष्ट दरों पर की जाएगी और के लिए एक अधिभार की वृद्धि की जाएगी ऐसी कटौती की आठ फीसदी की दर से गणना की संघ के प्रयोजनों.

परिपत्र: सं 539, 13-7-1989 दिनांकित.