5/2009 : परिपत्र: सं 5/2009, 02-07-2009 दिनांकित
परिपत्र सं.
5/2009
परिपत्र की तिथि
02/07/2009
दस्तावेज़ अपलोड की तिथि
02/07/2009
बीआईएफआर और एएआईएफआर पहले प्रतिनिधित्व के लिए प्रक्रिया
परिपत्र सं. 5/2009, 2009/02/07 दिनांक
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महानिदेशक आयकर (प्रशासन), [प्र. (प्रशासन)] बीआईएफआर और सीबीडीटी के बीच और एएआईएफआर और सीबीडीटी के बीच समन्वय के लिए नोडल एजेंसी होगी.
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यह आयकर राहतें ड्राफ्ट रिहैबिलिटेशन स्कीम के तहत की मांग की है, जिसमें हर मामले में या में बीआईएफआर और एएआईएफआर पहले सीबीडीटी का प्रतिनिधित्व करने प्र. (प्रशासन) की जिम्मेदारी होगी स्वीकृत योजना बीआईएफआर / एएआईएफआर द्वारा वितरित किया.
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(2) सीका, 1985 की धारा 19 में विचार के रूप प्र. (प्रशासन) की सहमति के उद्देश्य के लिए प्रत्येक व्यक्ति के मामले की योग्यता के आधार पर प्रत्यक्ष कर कानूनों के तहत आयकर राहतें / रियायतें के प्रत्येक मामले पर विचार करेगी.कंपनी और आकलन अधिकारी आयकर राहतें मात्रा निर्धारित है ऐसे मामलों में जहां प्र. (प्रशासन) सीबीडीटी का अनुमोदन प्राप्त करने के बाद ही सुनवाई के समय बीआईएफआर को सहमति की सहमति या इनकार बातचीत करेंगे. कंपनी और आकलन अधिकारी से जानकारी अधूरी है कहां, प्र. (प्रशासन) संबंधित पक्षों से आवश्यक जानकारी प्राप्त करने और सीबीडीटी के विचार के लिए फाइल लगाई और बाद में अंतरंग बीआईएफआर जाएगा.
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यह आय कर राहत / रियायतों की मांग की है, जिसमें हर मामले में सीबीडीटी का अनुमोदन प्राप्त करने के लिए और बीआईएफआर और संबंधित मूल्यांकन अधिकारी को सीबीडीटी का अनुमोदन संवाद करने प्र. (प्रशासन) की जिम्मेदारी है. इस प्रकार सीबीडीटी की ओर से प्र. (प्रशासन) द्वारा भेजी निर्णय सभी आकलन अधिकारियों पर बाध्यकारी है.
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आकलन अधिकारी केवल उपरोक्त के रूप में अनुमोदन प्राप्त करने के बाद बीमार कंपनियों को आयकर राहतें देना चाहिए. बीआईएफआर / एएआईएफआर सीबीडीटी के उस से एक अलग दृष्टिकोण ले जा रहा है, जहां मामलों में, यह अपीली से पहले अपील दायर करने के लिए प्र. (प्रशासन) की जिम्मेदारी होगी प्राधिकरण (एएआईएफआर) या मामले के रूप में दिल्ली उच्च न्यायालय के समक्ष हो सकती है.यह भी एतद्द्वारा बीमार कंपनियों को दिल्ली उच्च न्यायालय के अलावा अन्य उच्च न्यायालय से किसी में बीआईएफआर / एएआईएफआर के आदेश के खिलाफ अपील फाइल जिन मामलों में, इसे बचाने के लिए इनकम टैक्स के संबंधित मुख्य आयुक्त (प्रशासन) की जिम्मेदारी होगी कि स्पष्ट किया जाता है संबंधित उच्च न्यायालय में मामला.
इस परिपत्र कड़ाई से अनुपालन के लिए अपने क्षेत्र में काम कर रहे सभी अधिकारियों के ध्यान में लाया जा सकता है.

