आयकर विभाग

वित्त मंत्रालय, भारत सरकार

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परिपत्र सं.

372

परिपत्र की तिथि

08/12/1983

दस्तावेज़ अपलोड की तिथि

08/12/1983

परिपत्र: सं 372, 08-12-1983 दिनांकित

वित्त अधिनियम, 1983 - परिपत्र सं. 372, दिनांक 1983/08/12

वित्त अधिनियम, 1983

एक नज़र में संशोधन

अनुभाग / अनुसूची विवरण
वित्त अधिनियम
2 और 1 Sch. दर संरचना 4-7
40jj बारीकी से आयोजित कंपनियों पर संपत्ति कर का पुनरुद्धार 54
आयकर अधिनियम
2 (15) "धर्मार्थ उद्देश्य 'की परिभाषा 8
2 (18) "जनता में काफी रुचि रखते हैं, जिसमें कंपनी 'की परिभाषा 9
9 (1), Expln. (ग) आय 10-11 एकत्रित होने या भारत में पैदा होती समझा
करने के लिए खंड (i)
और Expln.
खंड (ii)
10 (6A) तकनीकी सेवाएं 12 के लिए रॉयल्टी या फीस के संबंध में विदेशी कंपनी की ओर से भुगतान कर की छूट
10 (10) (ग) और Gratuities 13 के संबंध में छूट
3 Prov.
बहां
10 (15) (IIb) पूंजी निवेश बांड पर ब्याज के संबंध में छूट 14
10 (15) (चतुर्थ) (ए) / उधार के पैसे की रक़म पर देय ब्याज की छूट
(सी) / (डी) / (G) या कर्ज से विदेशी देशों के 15 में किए गए
10 (21), Prov. अनुमोदित वैज्ञानिक अनुसंधान संघों 16 की आय के संबंध में छूट
10 (26A), लद्दाख 17 के निवासियों के संबंध में छूट
Expln. 2.
11 (2) (बी) / (3) (बी) / चारी के लिए आयोजित की संपत्ति से आय की छूट
(5), 13 (1) (डी) / तालिका या धार्मिक उद्देश्यों 18
(2) / (4)
11 (4 ए), व्यापार के लिए उपलब्ध नहीं धारा 11 के तहत छूट
13 (1) (बी बी), धर्मार्थ और धार्मिक ट्रस्टों और संस्थानों की आय
164 (2), (3) माहौल 19
16 (मैं) वेतनभोगी करदाताओं 20 के मामले में स्वीकार्य मानक कटौती की स्थापना
24 (1) (vi), Expln. घर की संपत्ति 21 से आय की गणना में रुचि के संबंध में कटौती
32 (1) (ख) (1 मूल्यह्रास भत्ता 22
Prov.), (चतुर्थ), (वि)
32A (2) (ग) जहाज मरम्मत उद्योग 23 के लिए निवेश भत्ता
32A (-2) प्रदूषण नियंत्रण और पर्यावरण के संरक्षण के लिए मशीनरी और संयंत्र का सम्मान 24 में निवेश छूट
35 (2 क) एक वैज्ञानिक अनुसंधान संघ, आदि के लिए भुगतान के संबंध में कटौती, वैज्ञानिक अनुसंधान 25 के लिए इस्तेमाल किया जाएगा
35B (1) (क) निर्यात बाजार विकास भत्ता 26 की निकासी
35C (1) (क) कृषि विकास भत्ता 27 की भारित तत्व की वापसी
35CC (1), Prov. ग्रामीण विकास भत्ता 28
35CCA (1) (सी), संघों के लिए भुगतान के माध्यम से व्यय और
(2), (2), (2 बी) ग्रामीण विकास कार्यक्रमों के 29 से बाहर ले जाने के लिए संस्थानों
37 (2) (ग) और मनोरंजन खर्च 31-32
इसके Expln. 2.
37 (3), (3 बी), कुछ खर्च 33 के लिए आंशिक पाबंदी
(-3 सी), (3 डी)
37 (5) अतिथि गृहों 34 के रखरखाव पर व्यय
43B अवैतनिक वैधानिक दायित्व 35 साल की पाबंदी
44D (ए) / (बी) / (ग), विदेशी कंपनियों को 36 में से कुछ आय के कराधान
115A (1) (एए) /
(ख) / (आइए) / Expln.
(बी बी)
54E (1) [Prov. "मामले में" लंबी अवधि के पूंजीगत लाभ की छूट जहां
और Expln. शुद्ध विचार प्राप्त या का एक परिणाम के रूप में एकत्रित
1 (सी)], (2) स्थानांतरण निर्दिष्ट वित्तीय में निवेश या जमा किया जाता है
(Expln. 2), संपत्ति 37
(3), [Expln.
(IIIA) (ग)]
80 सी (2) (बी), (4) (मैं) निर्दिष्ट मोड 38 में लंबी अवधि के बचत के संबंध में कटौती
80 जी (5) (मैं), Prov. आदि कुछ धन, धर्मार्थ संस्थाओं को दान के संबंध में कटौती 39
80GG, Prov. किराए के संबंध में कटौती 40 का भुगतान
80GGA (2) (बी), ग्रामीण के लिए कुछ दान के संबंध में कटौती
प्रांत विकास 41
80HHC निर्यात कारोबार 42 के संबंध में कटौती
80-मैं (4 ए) कुछ औद्योगिक उपक्रमों 43 से मुनाफा और लाभ के संबंध में कटौती
80JJ पशुपालन या मुर्गी या डेयरी फार्मिंग 44 के व्यापार से लाभ और लाभ के संबंध में कटौती
80JJA बढ़ रही मशरूम 45 के व्यापार से लाभ और लाभ के संबंध में कटौती की वापसी
80L (1) (के माध्यम से), (ए) / (ख) निर्दिष्ट से आय के संबंध में कटौती
समापन भाग वित्तीय संपत्ति 46
80mm आदि रॉयल्टी, के संबंध में एक भारतीय कंपनी के मामले में कटौती की वापसी, भारत 47 में से किसी भी चिंता से प्राप्त
80P (2) (बी), (3) सहकारी समिति में 48 की आय के संबंध में कटौती
80R प्रोफेसरों, शिक्षकों, आदि के मामले में कुछ विदेशी स्रोतों से पारिश्रमिक के संबंध में कटौती 49
80VVA मुनाफा 50 में चल रही कंपनियों पर एक न्यूनतम कर की वसूली
109 (आईबी), Expln. खंड 51 के प्रयोजन के लिए अभिव्यक्ति "तकनीकी जानकारी के प्रावधान" की परिभाषा के निगमन
115-मैं करने के लिए 115C अनिवासी भारतीय नागरिकों और भारतीय मूल के 52 विदेशी नागरिकों के मामले में कुछ विशिष्ट संपत्ति से आय के कराधान से संबंधित विशेष उपबंध
280ZA शहरी क्षेत्र में 53 से औद्योगिक उपक्रम स्थानांतरण के लिए टैक्स क्रेडिट प्रमाण पत्र योजना
संपत्ति कर अधिनियम
5 (1) (XA) 55 लेखा की नकदी प्रणाली पर किताबें कुछ व्यवसायों पर ले जाने और बनाए रखने निर्धारिती की वजह से फीस की छूट
5 (1) (xvic), विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों में 56 की छूट
(Xvica)
5 (1) (XviD) पूंजी निवेश व्यक्ति के हाथों में बांड और एचयूएफ 57 की छूट
5 (1) (xviiia) तरह 58 में पदक, ट्राफी और पुरस्कार की छूट
- कंपनियों पर की पुनरुद्धार संपत्ति कर 54
उपहार कर अधिनियम
5 (1) (आईआईडी) विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों में 59 के तोहफे के संबंध में छूट
5 (1) (IIIC) पूंजी निवेश बांड 60 के तोहफे के संबंध में छूट
ब्याज कर अधिनियम
4 (1), Prov. प्रभार्य ब्याज एकत्रित की सम्मान या उत्पन्न होने में कर की दर 31 मार्च के बाद, 1983 में 61 कम
अनिवार्य जमा योजना (आईटीपी) अधिनियम
3 (1) / (3), में अनिवार्य जमा योजना का विस्तार
4 (1) (चतुर्थ) / एक और दो साल के 62 के लिए करदाताओं के मामले
(3) (क) (i) (ख) (बी) (सी),
6 (2) (क) (ख


दर - संरचना

वित्त अधिनियम, 1983

आकलन वर्ष 1983-84 के लिए कर के लिए उत्तरदायी आय के संबंध में आयकर की दरें

(4) निर्धारण वर्ष 1983-84 के लिए कर के लिए उत्तरदायी (कॉर्पोरेट और साथ ही गैर कॉर्पोरेट) करदाताओं की सभी श्रेणियों की आय के संबंध में, (अधिभार उस सहित) आयकर की दरें पहली अनुसूची के भाग में विनिर्दिष्ट किया गया है वित्त अधिनियम को. इन दरों "वेतन" और पंजीकृत के भागीदारों को देय सेवानिवृत्ति वार्षिकियां से "एडवांस टैक्स" की गणना के प्रयोजनों के लिए वित्त अधिनियम, 1982 की प्रथम अनुसूची के भाग III में निर्धारित उन, स्रोत पर कर की कटौती के रूप में वही कर रहे हैं निर्दिष्ट व्यवसायों में लगे हुए है, और वित्तीय वर्ष 1982-83 के दौरान कुछ मामलों में कर की गणना देय फर्मों.

वित्त अधिनियम, 1983

"वेतन" और सेवानिवृत्ति वार्षिकियां के अलावा अन्य आय से वित्तीय वर्ष 1983-84 के दौरान स्रोत पर कर की कटौती के लिए दरें

वेतन और निर्दिष्ट व्यवसायों में लगे पंजीकृत फर्मों के भागीदारों को देय सेवानिवृत्ति वार्षिकियां के अलावा अन्य आय से वित्तीय वर्ष 1983-84 के दौरान स्रोत पर आयकर की कटौती के लिए 5.1 दरें वित्त की प्रथम अनुसूची के भाग II में दिया गया है अधिनियम. इन दरों प्रतिभूतियों, ब्याज, लाभांश, बीमा कमीशन, लॉटरी और पहेली पहेली से जीता, घोड़ा दौड़ से जीत के रास्ते से आय के अन्य श्रेणियों पर ब्याज के रूप में आय के लिए लागू; और अनिवासियों के गैर वेतन आय के अन्य श्रेणियों. बाद में परिपत्र में बताया गया है, गैर कॉरपोरेट करदाताओं के मामले में आय पर सरचार्ज की दर आयकर के 12.5 प्रतिशत को 10 प्रतिशत से बढ़ा दी गई है. इसी तरह, कंपनियों के मामले में आयकर पर अधिभार की दर 5 प्रतिशत करने के लिए 2.5 फीसदी से बढ़ा दी गई है. नतीजतन, वित्तीय वर्ष 1983-84 के दौरान स्रोत पर आयकर की कटौती के लिए दरों के दौरान इस तरह की आय से स्रोत पर कर की कटौती के प्रयोजनों के लिए वित्त अधिनियम, 1982 की प्रथम अनुसूची के भाग द्वितीय में निर्दिष्ट दरों से अलग वित्तीय वर्ष 5.2-5.10 नीचे पैराग्राफ में विस्तार से बताया के रूप में कुछ मामलों में 1982-83,. नीचे पैरा 5.4 में बताया गया है, वित्त अधिनियम भी "अनिवासी भारतीयों" के मामले में "निवेश आय" और "दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ" से स्रोत पर कर की कटौती के लिए एक नया उपबंध किया गया है.

वित्त अधिनियम, 1983

कंपनियों के अलावा अन्य निवासियों के लिए 5.2 भुगतान - घोड़े दौड़, लॉटरी और वित्तीय वर्ष 1983-84 के दौरान निवासी करदाताओं (कंपनियों के अलावा) को देय पहेली पहेली से जीत के रास्ते से आय के मामले में, कर 33.75 की दर से घटाया है फीसदी, फीसदी और 3.75 (आयकर फीसदी किया जा रहा 12.5) का सरचार्ज 30 प्रतिशत की बुनियादी आयकर का बना हुआ है. यह कर 0.75 प्रतिशत द्वारा वित्तीय वर्ष 1982-83 के दौरान इस तरह की आय से घटाया था, जिस पर दर से अधिक है.

वित्त अधिनियम, 1983

केन्द्रीय या राज्य सरकार (एक कर मुक्त सुरक्षा पर नहीं किया जा रहा ब्याज) या डिबेंचर या द्वारा या किसी स्थानीय प्राधिकार की ओर से या एक सांविधिक पर जारी अन्य प्रतिभूतियों पर ब्याज द्वारा जारी प्रतिभूतियों पर ब्याज के रूप में आय के मामले में 5.3 निगम या इस तरह के डिबेंचरों वित्तीय वर्ष 1983-84 के दौरान (कंपनियों के अलावा) निवासी करदाताओं को देय भारत में किसी मान्यता प्राप्त स्टॉक एक्सचेंज में सूचीबद्ध हैं जहां कंपनियों द्वारा जारी डिबेंचरों पर ब्याज, कर 10 प्रति की दर से कटौती करने के लिए जारी रहेगा प्रतिशत. अन्य प्रतिभूतियों (एक कर मुक्त सुरक्षा पर ब्याज न हो) या वित्तीय वर्ष 1983-84 के दौरान (कंपनियों के अलावा) निवासी करदाताओं को देय लाभांश पर ब्याज के मामले में आयकर, हालांकि, दर में कटौती योग्य होगा (आयकर के 12.5 प्रतिशत किया जा रहा है) में 20 फीसदी फीसदी और 2.5 के अधिभार की बुनियादी आयकर से बना 22.5 फीसदी की. यह कर 0.5 फीसदी से वित्तीय वर्ष 1982-83 के दौरान इस तरह की आय से घटाया था, जिस पर दर से अधिक है.

वित्त अधिनियम, 1983

वित्त अधिनियम "अनिवासी भारतीयों" को देय आय की कुछ श्रेणियों से स्रोत पर कर की कटौती के लिए विशेष प्रावधान किया गया है - कंपनियों के अलावा अन्य गैर निवासियों के लिए 5.4 भुगतान. इन प्रावधानों के तहत कर में 20 प्रतिशत और किसी भी "निवेश आय" से 2.5 प्रतिशत (आयकर फीसदी किया जा रहा 12.5) का अधिभार प्रति देय के आयकर का बना हुआ है, 22.5 फीसदी की दर से कटौती की जाएगी वित्तीय वर्ष 1983-84 के दौरान उनके साथ. एक ही दर पर टैक्स "विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियां" के हस्तांतरण के लिए देय ध्यान में एम्बेडेड "दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ" के माध्यम से आय से बदली से कटौती की जाएगी. अभिव्यक्ति "अनिवासी भारतीय", "निवेश आय", "दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ" और "विदेशी मुद्रा परिसंपत्ति" की धारा 36 द्वारा आयकर अधिनियम में डाला, अध्याय बारहवीं ए की धारा 115C में परिभाषित किया गया है वित्त अधिनियम. इस संबंध में अधिक जानकारी के पैराग्राफ 52.1-52.11 में दिए गए हैं.

वित्त अधिनियम, 1983

(अनिवासी भारतीयों सहित) गैर निवासियों को देय एक कर मुक्त सुरक्षा पर ब्याज के संबंध में 5.5, स्रोत पर कर की कटौती के लिए दर प्रतिशत और अधिभार के अनुसार 15 से आयकर से बना फीसदी 16.875 है 1982-83 के दौरान 16.5 प्रतिशत की तुलना में 1.875 फीसदी (आयकर फीसदी किया जा रहा 12.5). (अनिवासी भारतीयों सहित) अनिवासी गैर निगमित करदाताओं की अन्य आय का कुल मिलाकर, स्रोत पर कर की कटौती के लिए दर फीसदी और 3.75 की अधिभार प्रति 30 पर आयकर से बना प्रतिशत 33.75 है उप पैरा मैं की में निर्धारित दरों पर ऐसी आय के पूरे के संबंध में प्रतिशत 1982-83 के दौरान 33 फीसदी की तुलना में (आयकर के 12.5 प्रतिशत किया जा रहा है), या आयकर (अधिभार सहित) प्रभार्य जो भी अधिक हो वित्त अधिनियम, की प्रथम अनुसूची के भाग III के पैरा एक.

वित्त अधिनियम, 1983

घरेलू कंपनियों के लिए आय का 5.6 भुगतान - 5 प्रतिशत करने के लिए 2.5 फीसदी से कंपनियों के सभी श्रेणियों के आधार पर देय आयकर पर अधिभार में वृद्धि के संदर्भ में, कंपनियों को देय आय से स्रोत पर कर की कटौती के लिए दरों में भी है बढ़ाया गया. बढ़ी दरों, तथापि, केवल आयकर पर अधिभार आयकर की एक अलग घटक के रूप में 1982-83 के दौरान स्रोत पर घटाया था और ऐसी कोई सरचार्ज अलग से घटाया था जहां मामलों को कवर नहीं है जहां के मामलों के संबंध में लागू होते हैं.

वित्त अधिनियम, 1983

5.7 प्रकार, वित्तीय वर्ष 1983-84 के दौरान एक घरेलू कंपनी को देय 'प्रतिभूतियों पर ब्याज' के अलावा और ब्याज के रूप में आय के मामले में, कर आयकर से बना (21 फीसदी की दर से घटाया है 20 फीसदी और 1 फीसदी का अधिभार), 1982-83 के दौरान प्रतिशत 20.5 की तुलना में. वित्तीय वर्ष 1983-84 के दौरान एक घरेलू कंपनी को देय (एक कर मुक्त सुरक्षा पर देय ब्याज को छोड़कर) किसी भी अन्य आय के मामले में, कर 21.5 के आयकर से बना (प्रतिशत 22.575 की दर से घटाया है फीसदी और 1.075 के अधिभार प्रति), 1982-83 के दौरान 22 प्रतिशत की तुलना में.

वित्त अधिनियम, 1983

विदेशी कंपनियों के लिए आय का 5.8 भुगतान - सरकार द्वारा एक विदेशी कंपनी या उधार धन या सरकार या विदेशी मुद्रा में भारतीय चिंता द्वारा किए गए ऋण पर एक भारतीय चिंता को देय ब्याज के रूप में आय के मामले में टैक्स में कटौती योग्य होगा 25 फीसदी की दर. सरकार या सरकार या भारतीय चिंता और 1 अप्रैल 1976 से पहले केन्द्र सरकार ने मंजूरी दे दी साथ यह द्वारा किए गए एक समझौते के अनुसरण में एक भारतीय चिंता से एक विदेशी कंपनी को देय रॉयल्टी के माध्यम से आय के मामले में, कर छूट होगी (50 फीसदी और 2.5 फीसदी की अधिभार का आयकर से बना) प्रतिशत 52.5 की दर से, 1982-83 के दौरान प्रतिशत 51.25 की तुलना में

वित्त अधिनियम, 1983

आय के मामले में 5.9 सरकार या 1 अप्रैल 1976 से पहले सरकार या भारतीय चिंता के साथ यह द्वारा बनाई गई है और केन्द्र सरकार ने मंजूरी दे दी एक समझौते के अनुसरण में एक भारतीय चिंता से एक विदेशी कंपनी को देय तकनीकी सेवाओं के लिए शुल्क के माध्यम से, टैक्स 1982-83 के दौरान प्रतिशत 51.25 की तुलना में, (प्रतिशत और 2.5 प्रतिशत की अधिभार प्रति 50 का आयकर से बना) प्रतिशत 52.5 की दर से घटाया है.

वित्त अधिनियम, 1983

5.10 इसके अलावा, वित्तीय वर्ष 1983-84 के दौरान एक विदेशी कंपनी के लिए एक कर मुक्त सुरक्षा पर देय ब्याज के रूप में आय के मामले में, कर 44 से आयकर से बना (प्रतिशत 46.2 की दर से घटाया है प्रतिशत और 2.2 प्रतिशत की अधिभार प्रति), 1982-83 के दौरान प्रतिशत 45.1 की तुलना में. वित्तीय वर्ष 1983-84 के दौरान एक विदेशी कंपनी के लिए (लाभांश, रॉयल्टी और आयकर अधिनियम की धारा 115A में निर्दिष्ट तकनीकी सेवाओं के लिए शुल्क नहीं होने के), देय किसी भी अन्य आय के मामले में कर की दर पर घटाया है 1982-83 के दौरान प्रतिशत 71.75 की तुलना में (70 फीसदी और 3.5 फीसदी की अधिभार का आयकर से बना) प्रतिशत 73.5 की.

वित्त अधिनियम, 1983

"वेतन", वित्तीय वर्ष 1983-84 के दौरान "एडवांस टैक्स" और विशेष मामलों में आयकर का चार्ज की गणना से स्रोत पर कर की कटौती के लिए दरें

6.1 1983-84 और भी करदाताओं की सभी श्रेणियों के मामले में उस वर्ष के दौरान देय "एडवांस टैक्स" की गणना के लिए वित्तीय वर्ष के दौरान व्यक्तियों के मामले में "वेतन" से स्रोत पर कर की कटौती के लिए दरों में निर्दिष्ट किया गया है वित्त अधिनियम की प्रथम अनुसूची के भाग III. इन दरों वित्तीय वर्ष (जैसे चार्टर्ड एकाउंटेंट, वकील, वकीलों, के रूप में) कुछ व्यवसायों में लगे पंजीकृत फर्मों के भागीदारों को देय सेवानिवृत्ति वार्षिकियां से 1983-84 के दौरान और आय चार्ज करने के लिए स्रोत पर भी कर की कटौती के लिए लागू कर रहे हैं त्वरित आकलन किया जाना है जहां मामलों में वर्तमान आय पर वित्तीय वर्ष 1983-84 के दौरान कर, गैर निवासियों, वित्तीय वर्ष 1983-84 के दौरान अच्छे के लिए भारत छोड़ने व्यक्तियों के आकलन के लिए भारत में उत्पन्न होने वाली शिपिंग लाभ के जैसे, अनंतिम मूल्यांकन टैक्स से बचने के लिए संपत्ति के हस्तांतरण की संभावना है, जो व्यक्ति के मूल्यांकन. निम्नलिखित पैराग्राफ में विस्तार में ये दरें कुछ मामलों में निर्धारण वर्ष 1982-83 के लिए कर के लिए उत्तरदायी आय के आकलन के लिए पहली अनुसूची के भाग में विनिर्दिष्ट दरों से अलग.

वित्त अधिनियम, 1983

आदि व्यक्तियों, हिंदू अविभाजित परिवार, अपंजीकृत फर्म, के लिए कुछ खास स्लैब में आयकर की दरों में 6.2 संशोधन - व्यक्तियों के मामले में आयकर छूट की सीमा एक या एक से अधिक सदस्यों के साथ उन लोगों की तुलना में अन्य हिंदू अविभाजित परिवारों ( आदि में छूट की सीमा से अधिक अलग आय), अपंजीकृत कंपनियों, व्यक्तियों का संघ होने रुपये है. 15,000. कर योग्य आय रुपये के पार हो गई कहां. रुपये के स्लैब में 15,000 आय. 15,001 - रुपये. 25,000 रुपये के स्लैब में 30 फीसदी और आय की दर से टैक्स वसूल किए गए. 25,001 - रुपये. 30,000 34 फीसदी की दर से टैक्स वसूल किए गए. कम और मध्यम आय के स्तर में करदाताओं को राहत प्रदान करने की दृष्टि से, वित्त अधिनियम रुपये की आय स्लैब विभाजित किया गया है. 15,001 - रुपये. 25,000 दो में. रुपये का नया स्लैब में आय. 15,001 - रुपये. 20,000 रुपये के स्लैब में 25 फीसदी और आय की दर से कर लगाया जाएगा. 20,001 - रुपये, 25,000 30 फीसदी की दर से कर लगाया जाएगा. इसके अलावा, रुपये के स्लैब में कर की दर. 25,001 - रुपये. 30,000 35 प्रतिशत करने के लिए 34 फीसदी से गोल कर दिया गया है. शेष स्लैब में कर की दरों को अपरिवर्तित ही रहेंगे.

वित्त अधिनियम, 1983

स्वतंत्र कर योग्य आय के साथ एक या अधिक सदस्यों की 6.3 हिंदू अविभाजित परिवारों प्रथम अनुसूची के भाग III के पैरा एक के उप पैरा द्वितीय में निर्धारित एक अलग दर अनुसूची के तहत टैक्स को चार्ज किया जाता है. कोई परिवर्तन नहीं ऐसे हिंदू अविभाजित परिवारों के लिए लागू दर अनुसूची में किया गया है. हालांकि, "आयकर पर सरचार्ज" के लिए नीचे पैरा 6.5 देखें.

वित्त अधिनियम, 1983

6.4 सहकारी समितियां, पंजीकृत फर्मों और स्थानीय अधिकारियों - सहकारी समितियां, पंजीकृत फर्मों और स्थानीय अधिकारियों के मामले में आयकर की दरों के रूप में भी उस पर अधिभार क्रमशः अनुच्छेद बी, अनुच्छेद सी और अनुच्छेद डी में निर्दिष्ट किया गया है वित्त अधिनियम की प्रथम अनुसूची के भाग III की. इन सभी मामलों में आयकर की बुनियादी दरें अपरिवर्तित रहते हैं, उनके द्वारा देय आयकर पर अधिभार की दर 12 से 10 फीसदी से बढ़ा दी गई है साढ़े फीसदी.

वित्त अधिनियम, 1983

सरचार्ज की दर में 6.5 बढ़ाएँ - आदि व्यक्तियों, हिंदू अविभाजित परिवार, अपंजीकृत फर्मों, सहित गैर निगमित करदाताओं की सभी श्रेणियों के मामले में आयकर पर अधिभार की दर 12 से 10 प्रतिशत से उठाया गया है साढ़े आयकर फीसदी.

वित्त अधिनियम, 1983

6.6 कंपनियों - अब तक आयकर कंपनी की कुल आय रुपए से अधिक नहीं था जहां मामलों में व्यापक रूप से आयोजित की घरेलू कंपनियों की कुल आय पर 45 फीसदी की दर से शुल्क लिया गया था. 1 लाख और कुल आय कहा राशि को पार मामलों में जहां 55 फीसदी की दर से. वित्त अधिनियम कर के इस अंतर दर को हटा दिया गया है: सभी व्यापक रूप से आयोजित की घरेलू कंपनियों के मामले में आयकर अब कुल आय का 55 प्रतिशत की एक समान दर से शुल्क लिया जाएगा.

वित्त अधिनियम, 1983

जिसकी कुल आय रुपए से अधिक नहीं किया बारीकी से आयोजित घरेलू और औद्योगिक कंपनियों के मामले में 6.7. 2 लाख, आयकर कुल आय 60 फीसदी की दर से कहा, राशि से अधिक मामलों में जहां 55 फीसदी की दर से शुल्क लिया गया था. कर की यह अंतर दर भी हटा दिया गया है और सभी बारीकी से आयोजित घरेलू औद्योगिक कंपनियों की आय अब कुल आय का 60 फीसदी की दर से कर लगाया जाएगा.

वित्त अधिनियम, 1983

6.8 अब तक, शब्द "औद्योगिक कंपनी" मुख्य रूप से पीढ़ी या बिजली के वितरण या सत्ता के किसी अन्य रूप से व्यापार में या जहाजों के निर्माण में या माल के निर्माण या प्रसंस्करण में लगी हुई है जो एक कंपनी मतलब करने के लिए परिभाषित किया गया है या खनन में. वित्त अधिनियम भी मुख्य रूप से सड़क या अंतर्देशीय जलमार्ग से, गाड़ी के कारोबार में लगे यात्रियों या माल की या परियोजनाओं के निष्पादन के व्यवसाय में हैं जो कंपनियों में शामिल करने के लिए शब्द "औद्योगिक कंपनी 'की परिभाषा बढ़े हुए है. शब्द "परियोजना" एक भवन, सड़क, बांध, पुल या अन्य संरचना या विधानसभा या किसी मशीनरी या संयंत्र की स्थापना के निर्माण के लिए एक परियोजना मतलब करने के लिए परिभाषित किया गया है. एक कंपनी मुख्य रूप पीढ़ी या बिजली के वितरण या यात्रियों या माल की सड़क या अंतर्देशीय जलमार्ग द्वारा या जहाजों के निर्माण में या परियोजनाओं के निष्पादन में या में सत्ता या गाड़ी के किसी अन्य रूप से व्यापार में लिप्त होने समझा जाएगा इन गतिविधियों में से किसी एक या अधिक के कारण आय प्रासंगिक वर्ष की कुल आय में शामिल है यदि (आयकर अधिनियम के अध्याय छठी ए के तहत किसी भी कटौती करने से पहले अभिकलन के रूप में), निर्माण या प्रसंस्करण माल की या खनन में नहीं इस तरह के कुल आय में से कम से कम 51 फीसदी.

वित्त अधिनियम, 1983

31 मार्च 1961 के बाद लेकिन 1 अप्रैल 1976 से पहले भारतीय चिंता के साथ यह द्वारा किए गए एक समझौते के अनुसरण में एक भारतीय चिंता से एक विदेशी कंपनी द्वारा प्राप्त 6.9 रॉयल्टी 50 प्रति की बुनियादी आयकर दर पर आय कर के दायरे में है समझौता केन्द्र सरकार द्वारा अनुमोदित किया गया है जिन मामलों में विनिर्दिष्ट दर पर प्रतिशत अधिभार उस पर. इस तरह के समझौते कर दिया गया है, तो एक ही दर, 29 फ़रवरी 1964 के बाद लेकिन 1 अप्रैल 1976 से पहले विदेशी चिंता के साथ यह द्वारा किए गए एक समझौते के अनुसरण में एक भारतीय चिंता से एक विदेशी कंपनी द्वारा प्राप्त तकनीकी सेवाओं के लिए शुल्क के संबंध में लागू है केन्द्र सरकार ने मंजूरी दे दी. वित्त अधिनियम की प्रथम अनुसूची के भाग III के अनुच्छेद ई में प्रासंगिक प्रावधानों में एक ही दर के भीतर में प्रवेश किया भी समझौते के तहत सरकार की ओर से एक विदेशी कंपनी द्वारा प्राप्त तकनीकी सेवाओं के लिए रॉयल्टी और फीस के संबंध में लागू है कि सुरक्षित करने के लिए संशोधित किया गया है केन्द्र सरकार ने मंजूरी दे दी उपरोक्त अवधि और. संशोधित प्रावधानों वित्तीय वर्ष 1983-84 के दौरान "एडवांस टैक्स" के भुगतान के प्रयोजनों के लिए लागू होगी.

वित्त अधिनियम, 1983

6.10 अब तक, सभी कंपनियों के मामले में आयकर की राशि ऐसी आयकर का प्रतिशत साढ़े 2 की दर से गणना की एक अधिभार की वृद्धि की जा रही थी. सरचार्ज की दर 5 प्रतिशत करने के लिए उठाया गया है.

वित्त अधिनियम, 1983

6.11 वित्त अधिनियम, एक कंपनी आयकर पर अधिभार के आधे का भुगतान के एवज में, कर सकता है, बशर्ते कि अग्रिम कर की अंतिम किस्त से पहले अपने मामले, औद्योगिक विकास बैंक के साथ एक जमा में की वजह से है भारत (7) इसलिए बनाया जमा की गई राशि के बराबर है या यह द्वारा आयकर पर अधिभार की राशि का आधा देय से अधिक है, जहां वित्त अधिनियम और की धारा 2 के तहत केन्द्र सरकार द्वारा तैयार किए जाने के लिए एक योजना के तहत , यह द्वारा देय अधिभार एक आधे से कम हो जाएगा. इसलिए बनाया जमा राशि सरचार्ज की राशि के आधे से कम हो जाता है, जहां कंपनी द्वारा देय अधिभार तो बना दिया जमा की गई राशि से कम हो जाएगा. यह कंपनी अग्रिम कर की अंतिम किस्त से पहले आईडीबीआई के साथ अपेक्षित राशि जमा करने के लिए इस प्रावधान का लाभ प्राप्त करने के लिए, यह जरूरी होगा कि उल्लेख किया जा सकता है अपने मामले में कारण है. आयकर पर अधिभार के आधे के भुगतान के लिए दायित्व है, तो केवल आयकर पर अनुमति दी समय और अधिभार के भीतर कर दिया जमा में कमी की सीमा तक देय होगा जमा करने के लिए संदर्भ के साथ कम खड़े होंगे किसी भी.

वित्त अधिनियम, 1983

6.12 यह भी एक कंपनी के वित्तीय वर्ष 1983-84 के दौरान किसी भी समय इस संबंध में केन्द्र सरकार द्वारा अधिसूचित होने के लिए एक योजना के तहत आईडीबीआई के साथ एक जमा कर सकता है कि उपलब्ध कराई गई है. इस संबंध में एक योजना, योजना, 1983 (आयकर पर अधिभार) अर्थात् कंपनियों जमाओं के बाद 14 सितंबर 1983 को अधिसूचित किया गया है. इसलिए बनाया जमा की गई राशि के बराबर है या अधिक है जहां निर्धारण वर्ष 1984-85 के लिए कंपनी द्वारा देय आयकर पर अधिभार, यह द्वारा देय अधिभार की राशि का आधा एक आधे से कम हो जाएगा. इसलिए बनाया जमा राशि निर्धारण वर्ष 1984-85 के लिए यह द्वारा देय अधिभार की राशि के आधे से कम हो जाता है, जहां कंपनी द्वारा देय अधिभार तो बना दिया जमा की गई राशि से कम हो जाएगा. इस संबंध में यह भी नहीं होगा आयकर पर अधिभार के आधे का भुगतान करने की दिशा में देनदारी में कमी वित्तीय वर्ष 1983-84 और कंपनी के दौरान किए गए जमा की गई राशि को सीमित किया जाएगा कि नोट किया जाए इस तरह के दायित्व आत्म मूल्यांकन पर या उठता है कि क्या निर्धारण वर्ष 1984-85 के लिए आयकर पर अधिभार में से एक से डेढ़ प्रति अपनी देयता के एवज में वित्तीय वर्ष 1983-84 की समाप्ति के बाद किसी भी आगे की राशि जमा करने के लिए उत्तरदायी नियमित मूल्यांकन पर या परिहार, अपील या पुनरीक्षण के माध्यम से किसी भी बाद की कार्यवाही में निर्धारित की.

वित्त अधिनियम, 1983

कृषि से प्राप्त आय के साथ गैर कृषि आय के आंशिक रूप से एकीकृत कराधान

प्र.7.        पहले की तरह, वित्त अधिनियम व्यक्तियों के मामले में, व्यक्ति या व्यक्तियों और कृत्रिम न्यायिक व्यक्ति के शव का हिंदू अविभाजित परिवार, अपंजीकृत फर्मों या अन्य संघों शुद्ध कृषि आय "अग्रिम कर की गणना के लिए ध्यान में रखा जाना जाएगा कि प्रदान करता है "और त्वरित आकलन वित्तीय वर्ष 1983-84 के दौरान किए जाने की आवश्यकता है जिन मामलों में निश्चित आय पर आयकर का चार्ज. इन प्रावधानों के पहले के वर्षों में उन लोगों के रूप में उसी तर्ज पर मोटे तौर पर कर रहे हैं.

[धारा 2 और वित्त अधिनियम की पहली अनुसूची]

 

आयकर अधिनियम में संशोधन

वित्त अधिनियम, 1983

"धर्मार्थ उद्देश्य 'की परिभाषा में संशोधन - धारा 2 (15)

8 धारा 2 के तहत (15) "धर्मार्थ प्रयोजन" गरीब, शिक्षा, चिकित्सा राहत की राहत और लाभ के लिए किसी भी गतिविधि की तरफ ले जाने को शामिल नहीं आम जनता उपयोगिता के किसी अन्य वस्तु की उन्नति में शामिल हैं. (क) वित्त अधिनियम की धारा 3 परिभाषा से "लाभ के लिए किसी भी गतिविधि की तरफ ले जाने को शामिल नहीं" शब्द लोप हो गया है. इस संशोधन के मुनाफे और धर्मार्थ या धार्मिक ट्रस्टों और संस्थाओं के मामले में व्यापार की बढ़त के मामलों को छोड़कर, कि धारा के तहत छूट पाने का हकदार नहीं होगा whereunder वित्त अधिनियम की धारा 6 (बी) द्वारा धारा 11 में किए गए संशोधन के लिए परिणामी है व्यापार धारा 11 में निर्दिष्ट शर्तों को पूरा जहां (4). संशोधन 1 अप्रैल 1984 से प्रभावी होता है और, तदनुसार, आकलन वर्ष 1984-85 और बाद के वर्षों के संबंध में लागू होगा.

[वित्त अधिनियम की धारा 3 (क)]

वित्त अधिनियम, 1983

"जनता में काफी रुचि रखते हैं, जिसमें कंपनी 'की परिभाषा में संशोधन - धारा 2 (18)

9.1 धारा 2 (18) (जो है, एक व्यापक रूप से आयोजित की कंपनी है) अभिव्यक्ति "जनता में काफी रुचि रखते हैं, जिसमें कंपनी" को परिभाषित करता है.उप खंड कंपनियों की विशेष श्रेणियों के साथ कहा परिभाषा सौदा (क), (एए) और (एबी) (जैसे, सरकार के स्वामित्व वाली कंपनियों, कंपनी अधिनियम, 1956 की धारा 25 के तहत पंजीकृत कंपनियों, कोई शेयर पूंजी वाले कंपनियों) जो व्यापक रूप से आयोजित की कंपनियों के रूप में माना जाता है. मामलों की व्यापकता में लागू है जो उपखंड (ख), कंपनी अधिनियम, 1956 में परिभाषित के रूप में यह एक निजी कंपनी नहीं है अगर एक कंपनी एक व्यापक रूप से आयोजित की कंपनी के रूप में माना जाएगा और यह स्थितियां या तो पूरा है प्रदान करता है मद (ए) में या उक्त खंड के मद (बी) में निर्दिष्ट. मद में निर्दिष्ट शर्त (ए) उक्त कंपनी में शेयर (लाभांश की एक निश्चित दर के हकदार शेयरों न हो) प्रासंगिक पिछले वर्ष के अंतिम दिन के रूप में, अनुसार भारत में किसी मान्यता प्राप्त स्टॉक एक्सचेंज में सूचीबद्ध थे सुरक्षा संविदा (विनियमन) अधिनियम, 1956 और उसके अधीन बनाए गए नियमों के साथ. (ए) के मद में निर्धारित शर्त को पूरा नहीं करता है एक कंपनी मद (बी) में निर्दिष्ट तीन शर्तों को पूरा करने के लिए है.

वित्त अधिनियम, 1983

9.2 वित्त अधिनियम एक नया आइटम द्वारा मद (बी) प्रतिस्थापित किया गया है.एवजी मद (बी) के प्रभाव को एक कंपनी के शेयरों प्रासंगिक पिछले वर्ष के अंतिम दिन के रूप में भारत में किसी मान्यता प्राप्त स्टॉक एक्सचेंज में सूचीबद्ध नहीं हैं, जहां कंपनी ने एक व्यापक रूप से आयोजित के रूप में नहीं माना जा जाएगा कि हो जाएगा कंपनी, मतदान शक्ति का प्रतिशत नहीं कम से कम 50 ले जाने कंपनी (शेयर नहीं किया जा रहा लाभांश की एक निश्चित दर के हकदार) (विनिर्माण गतिविधियों, आदि में लगे भारतीय कंपनियों के मामले में 40 फीसदी) के शेयरों में जब तक करने के लिए बिना शर्त आवंटित, या बिना शर्त द्वारा अधिग्रहीत, और लाभदायक सरकार, या एक सांविधिक निगम, या एक व्यापक रूप से आयोजित की कंपनी या ऐसी कंपनी की एक पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी द्वारा आयोजित प्रासंगिक पिछले साल भर थे गया. कंपनी के शेयरों का अपेक्षित प्रतिशत तो नहीं रखा है, तो कंपनी के पचास फीसदी या इसके शेयरों की अधिक आम तौर पर जनता के द्वारा आयोजित कर रहे हैं, भले ही एक निकट आयोजित की कंपनी के रूप में माना जाएगा.

वित्त अधिनियम, 1983

9.3 संशोधन 2 अप्रैल 1983 से प्रभावी होता है.इसलिए, संशोधन परिभाषा आकलन वर्ष 1983-84 के संबंध में लागू नहीं होगा, लेकिन केवल निर्धारण वर्ष 1984-85 और बाद के वर्षों के संबंध में लागू होगा. यह, हालांकि, संशोधन परिभाषा वित्तीय वर्ष 1983-84 के दौरान स्रोत पर अग्रिम कर और कर की कटौती के भुगतान के प्रयोजनों के लिए ध्यान में रखा जाना ही पड़ेगा कि उल्लेख किया जा सकता.

[वित्त अधिनियम की धारा 3 (ख)]

वित्त अधिनियम, 1983

धारा 9 - आय अर्जित करते हैं या भारत में पैदा होती समझा

धारा 9 (1) (क), कोई आय एकत्रित या उत्पन्न होने वाली, चाहे प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से, के तहत 10.1 -

एक. किसी भी व्यवसाय भारत में कनेक्शन, या के माध्यम से या से

बी. के माध्यम से या भारत में किसी भी संपत्ति से, या

सी. के माध्यम से या भारत में किसी भी संपत्ति या आय के स्रोत से, या

डी. एक पूंजी परिसंपत्ति के स्थानांतरण के माध्यम से, भारत में बैठाना

एकत्रित होने या भारत में पैदा समझा जाता है.

वित्त अधिनियम, 1983

10.2 वित्त अधिनियम एक समाचार एजेंसी चलाने का या प्रकाशित अखबारों, पत्रिकाओं या पत्रिकाओं के कारोबार में लगे एक अनिवासी के मामले में है कि उपलब्ध कराने के स्पष्टीकरण में एक नया खंड (ग) डाला गया है, कोई आय मानी जाएगी, एकत्रित होने या भारत के बाहर प्रसारण के लिए भारत में समाचार का संग्रह और विचारों तक ही सीमित गतिविधियों के माध्यम से या उससे भारत में पैदा होती है.

वित्त अधिनियम, 1983

10.3 यह संशोधन 1 अप्रैल 1962 से पूर्वव्यापी प्रभाव लेता है, यानी, आयकर अधिनियम के प्रारंभ होने की तिथि.

[वित्त अधिनियम की धारा 4 (क)]

वित्त अधिनियम, 1983

11.1 धारा 9 (1) सिर "वेतन" के तहत कर के (द्वितीय), आय प्रभार्य यह भारत में अर्जित की है अगर अर्जित किए जाने या भारत में पैदा समझा जाता है.

वित्त अधिनियम, 1983

[1980] 124 आईटीआर 391 वेतन का भुगतान करने के दायित्व भारत के बाहर पैदा होती है और वेतन भी भारत से बाहर देय है, तो एक ही नहीं हो सकता है कि आयोजित किया गया है एसजी Pgnatale वी. सीआईटी में 25 फ़रवरी 1980 को एक फैसले में 11.2 गुजरात हाई कोर्ट सेवाओं भारत में गाया जाता है, भले ही अर्जित किए जाने या भारत में पैदा होती समझा.

वित्त अधिनियम, 1983

11.3 वित्त अधिनियम भारत में की गई सेवा के लिए देय सिर "वेतन" के अंतर्गत आय प्रभार्य भारत में अर्जित आय के रूप में माना जाएगा कि, शंकाओं को दूर करने के लिए, वाणी जो एक स्पष्टीकरण डाला गया है.

वित्त अधिनियम, 1983

11.4 संशोधन 1 अप्रैल 1979 से पूर्वव्यापी प्रभाव लेता है.यह स्पष्टीकरण विशेष रूप से "शंकाओं को दूर करने के लिए" उपरोक्त प्रावधान करता है, यह आयकर अधिनियम के प्रारंभ से संगत प्रावधानों के संबंध में सच विधायी इरादे को प्रतिबिंबित करने के लिए लिया जाना चाहिए कि नोट करने के लिए प्रासंगिक है. करदाता निर्धारण वर्ष के लिए 1978-79 और उसके पहले साल, उनके आकलन नया स्पष्टीकरण के प्रावधानों की अनदेखी और गुजरात उच्च न्यायालय द्वारा प्रतिपादित सिद्धांत का पालन करते हुए खंड 264 के तहत संशोधित किया जाना चाहिए कि संघर्ष करने के लिए यह इसलिए अनुमति नहीं होगी . नई व्याख्या, शब्दों में, 1 अप्रैल, 1979 से डाला गया है लेकिन, जैसा कि यह भी पूर्व निर्धारण वर्ष 1979-80 के लिए आकलन वर्ष के लिए पूरा आकलन फिर से खोलना या सुधारने के लिए अनुमति नहीं होगी.

[वित्त अधिनियम की धारा 4]


न्यायिक विश्लेषण

इन हवाला देते हुए आर टी लॉरेंस वी. आईटीओ [1986] 15 आईटीडी 490 (All.) में पैरा 11.4, के संदर्भ में विस्तार से बताया इस प्रकार है: ट्रिब्यूनल मनाया,

". . .परिपत्र या पहली जगह में सीबीडीटी द्वारा जारी किए गए निर्देशों के बारे में, कोई विशेष निर्देश जारी किए गए हैं. परिपत्र ही वित्त अधिनियम, 1983 के उपबंधों के व्याख्यात्मक नोट के माध्यम से है. इस तरह की व्याख्या इस ट्रिब्यूनल पर बाध्यकारी नहीं है. यह अपने पक्ष में है जब तक कि इसके अलावा, एक निर्धारिती, किसी भी परिपत्र के लिये बाध्य नहीं किया जा सकता. यह निर्धारिती के पक्ष में है, तो आयकर अधिकारियों, बेशक, परिपत्र से बंधे हुए हैं. इन मुद्दों को अब अच्छी तरह से उच्चतम न्यायालय के विभिन्न फैसलों से बसे हुए हैं. . . "(पी. 499).

वित्त अधिनियम, 1983

रॉयल्टी या तकनीकी सेवाओं के लिए शुल्क के संबंध में एक विदेशी कंपनी की ओर से भुगतान कर की आयकर से छूट - धारा 10 (6A)

12.1 एक नया खंड (6A) प्रदान करने के लिए धारा 10 में सम्मिलित किया गया है कि आय विदेशी कंपनी द्वारा किए गए एक समझौते के अनुसरण में सरकार या किसी भारतीय चिंता से प्राप्त तकनीकी सेवाओं के लिए रॉयल्टी या फीस के माध्यम से एक विदेशी कंपनी से ली गई है, जहां सरकार या 31 मार्च 1976 के बाद भारतीय चिंता का विषय है और इस तरह की आय पर टैक्स के साथ इस तरह के समझौते की शर्तों के तहत, देय है, सरकार या केन्द्र सरकार को भारतीय चिंता से, तो भुगतान कर कुल आय की गणना में शामिल नहीं किया जाएगा विदेशी कंपनी के.दूसरे शब्दों में, किसी भी तरह के टैक्स के संबंध में "ऊपर कमाई करने वाली" नहीं होगा. प्रासंगिक समझौता किसी भी राज्य सरकार या भारतीय चिंता के साथ विदेशी कंपनी द्वारा किया जाता है जहां समझौता केन्द्र सरकार ने मंजूरी दे दी है, तभी इस प्रावधान के तहत छूट उपलब्ध होगी. अभिव्यक्ति "रॉयल्टी" और "तकनीकी सेवाओं के लिए शुल्क" (1) (सात) और अभिव्यक्ति 'विदेशी कंपनी' होगा धारा 9 (1) (vi) और धारा 9 के लिए स्पष्टीकरण 2 के तहत क्रमश उन्हें सौंपे अर्थ होगा खंड 80B में उसे सौंपे अर्थ.

वित्त अधिनियम, 1983

12.2 संशोधन 1 अप्रैल 1984 से प्रभावी होता है और, तदनुसार, आकलन वर्ष 1984-85 और बाद के वर्षों के संबंध में लागू होगा.

[वित्त अधिनियम की धारा 5 (क)]

वित्त अधिनियम, 1983

Gratuities के संबंध में छूट - धारा 10 (10)

धारा 10 के तहत 13.1 (10) केन्द्रीय सरकार या केन्द्रीय सिविल सेवा (पेंशन) नियम, 1972 या सरकारी कर्मचारियों या एक स्थानीय प्राधिकारी के कर्मचारियों पर लागू किसी अन्य समान योजनाओं की संशोधित पेंशन नियम के तहत प्राप्त किसी भी मृत्यु एवं सेवानिवृत्ति उपदान आयकर से पूरी तरह मुक्त है.ग्रेच्युटी अधिनियम, 1972 के भुगतान के तहत प्राप्त होने वाले उपदान भी यह (2) और (3) कि अधिनियम की धारा 4 के अनुसार गणना की राशि से अधिक नहीं है हद तक आयकर से छूट प्राप्त है. उनकी सेवानिवृत्ति पर या पर एक कर्मचारी द्वारा प्राप्त अन्य gratuities के संबंध में अपने पूर्व सेवानिवृत्ति के लिए या अपने रोजगार की समाप्ति, या उसकी विधवा, बच्चे या उनकी मृत्यु पर आश्रितों द्वारा प्राप्त किसी भी उपदान पर अक्षम बनने, आयकर से छूट प्रतिबंधित है रुपये की एक अधिकतम के अधीन पूरा सेवा के प्रत्येक वर्ष के लिए (ग्रेच्युटी भुगतान किया जाता है जिसमें तुरंत साल पिछले तीन वर्षों के लिए औसत वेतन के आधार पर गणना) एक से डेढ़ माह का वेतन पर गणना राशि के लिए. 30,000 या 20 महीने का वेतन तो जो भी कम हो, की गणना. ग्रेच्युटी एक ही वर्ष में दो या दो से अधिक नियोक्ताओं से एक कर्मचारी द्वारा प्राप्त होता है जहां, कर से मुक्त ग्रेच्युटी की अधिकतम राशि रुपये है. 30,000 है. अपने पूर्व नियोक्ता या नियोक्ता से किसी भी पहले वर्ष में किसी भी ग्रेच्युटी प्राप्त हुआ है, जो एक कर्मचारी, एक बाद में वर्ष में एक और नियोक्ता से रुपये की सीमा ग्रेच्युटी प्राप्त करता है, जहां एक मामले में. 30,000 किसी भी पहले वर्ष में छूट दी गई है जो उपदान की राशि से कम है.

वित्त अधिनियम, 1983

13.2 धारा 10 (10) रुपये से ग्रेच्युटी की राशि पर आयकर के भुगतान के लिए छूट सीमा बढ़ाने वित्त अधिनियम द्वारा संशोधित किया गया है. रुपये के लिए 30,000. ग्रेच्युटी प्राप्त होता है जिस पर घटना, वह यह है कि जिन मामलों, कर्मचारी की सेवानिवृत्ति या उसके बनने से अक्षम या उसके रोजगार की समाप्ति या उनकी मृत्यु 31 जनवरी 1982 को या उसके बाद तब होती है के संबंध में 36,000.केन्द्र सरकार के कर्मचारियों को देय मृत्यु एवं सेवानिवृत्ति ग्रेच्युटी की अधिकतम राशि रुपये करने के लिए उठाया गया था क्योंकि यह किया गया है. 31 जनवरी, 1982 से प्रभावी 36,000,. केन्द्र सरकार भी आगे देखने में सरकारी कर्मचारियों के मामले में छूट के लिए पात्र होंगे जो मृत्यु एवं सेवानिवृत्ति ग्रेच्युटी की अधिकतम राशि 'रखते ​​हुए उक्त वित्तीय सीमा को बढ़ाने के लिए सरकारी राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, अधिकार दिया गया है.

वित्त अधिनियम, 1983

13.3 संशोधन 1 अप्रैल 1982 से पूर्वव्यापी प्रभाव लेता है और उसके अनुसार आकलन वर्ष 1982-83 और बाद के वर्षों के संबंध में लागू होगा.हालांकि, रुपए की बढ़ी छत. 36,000 ही घटना पिछले पैराग्राफ 31 जनवरी 1982 को या उसके बाद से होता है में करने के लिए भेजा, जहां मामलों के संबंध में लागू होगा.

[वित्त अधिनियम की धारा 5 (ख)]

वित्त अधिनियम, 1983

पूंजी निवेश बांड पर ब्याज के संबंध में छूट - धारा 10 (15)

14.1 धारा 10 (15) (IIb), सरकारी राजपत्र में अधिसूचना द्वारा 1 अप्रैल, 1983 से प्रभाव के साथ, केन्द्र सरकार के रूप में इस तरह के पूंजी निवेश बांड पर ब्याज के संबंध में छूट प्रदान की निर्दिष्ट कर सकता है वित्त अधिनियम, 1982 द्वारा डाला इस संबंध में.अधिसूचना संख्या एफ 4 के तहत जारी किए गए पूंजी निवेश बांड (1) डब्ल्यू एंड M/82 वित्त मंत्रालय (आर्थिक मामलों का विभाग) का 11 जून, 1982 दिनांकित, पूर्वोक्त के प्रयोजनों के लिए केन्द्र सरकार द्वारा निर्दिष्ट किया गया था वित्त मंत्रालय (राजस्व विभाग) द्वारा जारी किए गए एक ही तिथि की अधिसूचना संख्या जीएसआर 413 (ई) के तहत प्रावधान. आर्थिक मामलों के विभाग द्वारा जारी अधिसूचना के तहत, पूंजी निवेश बांड उसके नाम में या एक नाबालिग की ओर से केवल एक व्यक्ति द्वारा आयोजित की, या संयुक्त रूप से एक अन्य व्यक्ति के साथ किया जा सकता है. इस पर बाद में हिंदू अविभाजित परिवारों को भी कहा बांड में निवेश करने की अनुमति दी जा सकती है कि निर्णय लिया गया. तदनुसार, धारा 10 (15) (IIb) भी पूंजी निवेश बांड पर ब्याज के संबंध में आयकर से कि छूट प्रदान करने के लिए वित्त अधिनियम द्वारा संशोधित किया गया है व्यक्तियों के लिए उपलब्ध हो जाएगा और यह भी अविभाजित परिवारों के हिंदू.

वित्त अधिनियम, 1983

14.2 संशोधन इस प्रावधान वित्त अधिनियम, 1982 द्वारा डाला गया था, जहां से वह यह है कि दिनांक 1 अप्रैल, 1983 से प्रभावी होता है, और, तदनुसार, आकलन वर्ष 1983-84 और बाद के वर्षों के संबंध में लागू होगा.

[वित्त अधिनियम की धारा 5 (सी) (मैं)]

वित्त अधिनियम, 1983

उधार के पैसे की रक़म या कुछ मामलों में विदेशी देशों में किए गए ऋण पर देय ब्याज की आयकर से छूट के दायरे के विस्तार - धारा 10 (15) (चतुर्थ)

15.1 वित्त अधिनियम (चतुर्थ) आयकर अधिनियम के विदेशी स्रोतों से, आदि ऋण, पर देय ब्याज की छूट के संबंध में धारा 10 (15) में कुछ बदलाव किए हैं.

वित्त अधिनियम, 1983

15.2 अनुभाग 10 (15) (iv) (क) ब्याज भारत के बाहर स्रोतों से सरकार या किसी स्थानीय प्राधिकारी द्वारा उधार ली गई धनराशि पर देय कर से मुक्त है.मौजूदा प्रावधान के कामकाज की ब्याज उदाहरण के लिए, के रूप में कुछ अन्य स्थितियों में देय था जहां मामलों को कवर नहीं किया, ब्याज क्रेडिट या जहां खरीद मूल्य किश्तों में देय है पर खरीदी मशीनरी और संयंत्र के अवैतनिक कीमत पर देय. वित्त अधिनियम तदनुसार भारत के बाहर सूत्रों के सरकार या किसी स्थानीय प्राधिकारी द्वारा बकाया ऋण पर देय भी आयकर से मुक्त किया जाएगा कि ब्याज उपलब्ध कराने के लिए इस प्रावधान में संशोधन किया गया है.

वित्त अधिनियम, 1983

धारा 10 के तहत 15.3 (15) (चतुर्थ) (ग) उधार धन या कच्चे माल या पूंजी संयंत्र और मशीनरी के भारत से बाहर खरीद के संबंध में एक विदेशी देश में यह द्वारा किए गए ऋण पर भारत में एक औद्योगिक उपक्रम द्वारा देय ब्याज मुक्त है टैक्स से, इस तरह के ब्याज ऋण या ऋण और अपने भुगतान की शर्तों को ध्यान में रखते हुए, इस संबंध में केन्द्र सरकार द्वारा अनुमोदित दर पर गणना की ब्याज की राशि से अधिक नहीं है जो करने के लिए इस हद तक.वित्त अधिनियम में इस प्रावधान में संशोधन और उधार के पैसे या घटकों की खरीद के लिए (ऐसी ही परिस्थितियों में) हुआ है ऋण के संबंध में छूट दी है. छूट का दायरा भी भाड़े के खरीद समझौते के तहत राजधानी संयंत्र और मशीनरी की खरीद या इस तरह के संयंत्र और मशीनरी की खरीद के लिए एक विकल्प के साथ एक पट्टा समझौते में शामिल करने के लिए बढ़ा दिया गया है.

वित्त अधिनियम, 1983

15.4 अनुभाग 10 (15) (चतुर्थ) (डी) भारत के बाहर स्रोतों से उनके द्वारा उधार ली गई धनराशि पर भारतीय औद्योगिक वित्त निगम, भारतीय औद्योगिक विकास बैंक और भारतीय औद्योगिक ऋण और निवेश निगम द्वारा देय ब्याज से छूट प्राप्त है इस संबंध में केन्द्र सरकार द्वारा अनुमोदित दर पर गणना ब्याज की सीमा तक टैक्स,.वित्त अधिनियम इंडिया एक्ट, 1981 के निर्यात आयात बैंक के तहत स्थापित भारतीय निर्यात आयात बैंक द्वारा भारत के बाहर स्रोतों से उधार ली गई धनराशि पर देय ब्याज को इसके दायरे का विस्तार करने के लिए इस प्रावधान में संशोधन किया गया है.

वित्त अधिनियम, 1983

15.5 वित्त अधिनियम भी (चतुर्थ) लंबी अवधि के वित्त उपलब्ध कराने का मुख्य उद्देश्य के साथ बनाई और भारत में पंजीकृत एक सार्वजनिक कंपनी द्वारा देय ब्याज के संबंध में छूट प्रदान करने के लिए धारा 10 (15) में एक नया आइटम (G) डाला गया है निर्माण या केन्द्र सरकार द्वारा अनुमोदित एक ऋण समझौते के तहत भारत के बाहर स्रोतों से विदेशी मुद्रा में यह द्वारा उधार किसी भी पैसे की रक़म पर आवासीय प्रयोजनों के लिए भारत में घरों की खरीद के लिए.छूट में इस तरह के ब्याज ऋण के नियम और इसके पुनर्भुगतान को ध्यान में रखते हुए, इस संबंध में केन्द्र सरकार द्वारा अनुमोदित दर पर गणना की ब्याज की राशि से अधिक नहीं है जो करने के लिए इस हद तक सीमित हो जाएगा. यह छूट केवल ब्याज का भुगतान कंपनी धारा 36 के प्रयोजनों के लिए केन्द्र सरकार ने मंजूरी दे दी है जिन मामलों में उपलब्ध हो जाएगा (1) (आठ).

वित्त अधिनियम, 1983

15.6 उपरोक्त संशोधन 1 अप्रैल 1983 से प्रभावी और, तदनुसार, आकलन वर्ष 1983-84 और बाद के वर्षों के संबंध में लागू होगा.

[धारा 5 (सी) (ख) (1), (2), (3) और (4) वित्त अधिनियम की]

वित्त अधिनियम, 1983

अनुमोदित वैज्ञानिक अनुसंधान संघों की आय के संबंध में छूट - धारा 10 (21)

धारा 10 धारा 35 (1) (ख) संघ के प्रयोजनों के लिए पूरी तरह से लागू किया जाता है जो कर से मुक्त है के प्रयोजन के लिए अनुमोदित किया जा रहा है समय के लिए एक वैज्ञानिक रिसर्च एसोसिएशन की (21) आय के तहत 16.1.वित्त अधिनियम एसोसिएशन द्वारा प्राप्त योगदान के माध्यम से किसी भी रकम अनुभाग में निर्दिष्ट रूपों या विधियों में से एक या अधिक की तुलना में अन्यथा 28 फ़रवरी 1983 के बाद निवेश या जमा कर रहे हैं, तो इस छूट उपलब्ध नहीं होगा कि उपलब्ध कराने के लिए इस प्रावधान में संशोधन किया गया है 11 (5) धर्मार्थ या धार्मिक ट्रस्टों और संस्थानों द्वारा निवेश या निश्चित धनराशि के जमा करने के संबंध में. एसोसिएशन के किसी भी राशि, 1 मार्च 1983 से पहले निवेश या जमा अगर टैक्स से छूट भी (अन्यथा ऊपर उल्लेख रूपों या मोड में से) मना कर दिया जाएगा, ताकि 30 नवम्बर 1983 के बाद निवेश या जमा रहने के लिए जारी है. इस प्रावधान के प्रयोजनों के लिए, यह 1983/01/03 से पहले निवेश या जमा एसोसिएशन द्वारा या अन्य फंडों से प्राप्त योगदान से बाहर कर दिया गया था कि क्या मायने नहीं रखती है. इसके अलावा, कर में छूट है कि वे 30 नवंबर 1983 के बाद (कंपनी अधिनियम 1956 या किसी सांविधिक निगम की धारा 617 में परिभाषित के रूप में एक सरकारी कंपनी होने के नाते नहीं) कंपनियों में किसी भी शेयर को पकड़ जहां भी मामलों में ऐसे संगठनों के लिए मना कर दिया जाएगा. इस प्रावधान के प्रयोजन के लिए, में निवेश या शेयरों के अधिग्रहण की विधा का स्रोत सारहीन है.

वित्त अधिनियम, 1983

16.2 संशोधन 1 अप्रैल 1984 से प्रभावी होता है और, तदनुसार, आकलन वर्ष 1984-85 और बाद के वर्षों के संबंध में लागू होगा.

[वित्त अधिनियम की धारा 5 (डी)]

वित्त अधिनियम, 1983

लद्दाख के निवासियों के संबंध में छूट - धारा 10 (26A)

धारा 10 (26A) आय एकत्रित या निर्धारण वर्ष 1962-63 के लिए प्रासंगिक पिछले वर्ष में लद्दाख के जिले के निवासी थे जो व्यक्तियों के लिए उत्पन्न होने वाली तहत 17.1 निर्धारण वर्ष 1982-83 के लिए आयकर ऊपर से मुक्त है अगर ऐसी आय लद्दाख जिले में या भारत के बाहर किसी भी स्रोत से प्राप्त होता है.

वित्त अधिनियम, 1983

17.2 वित्त अधिनियम के तहत तीन वर्ष की अवधि के लिए बढ़ा दिया गया है, कि मूल्यांकन वर्षों के लिए है, 1985-86 के लिए 1983-84 में लद्दाख के निवासियों के मामले में अधिनियम की धारा 10 (26A) के तहत आयकर से छूट .वित्त अधिनियम द्वारा किए गए संशोधन को भी लद्दाख के जिले कहा जिले बंटवारा किया गया था, जिसके बाद वह यह है कि दिनांक 30 जून 1979 पर है कि जिले में शामिल सभी क्षेत्रों, शामिल होंगे स्पष्ट किया.

वित्त अधिनियम, 1983

लद्दाख के जिले के निवासियों के मामले में आयकर से छूट का विस्तार 17.3 संशोधन 1 अप्रैल 1983 से प्रभावी होता है और, तदनुसार, आकलन वर्ष 1983-84 और बाद के वर्षों के संबंध में लागू होगा.लद्दाख के जिला 30 जून 1979 पर है कि जिले में शामिल सभी क्षेत्रों में शामिल होगा स्पष्ट है कि दूसरा संशोधन, 1 अप्रैल, 1980 से प्रभावी होता है और, तदनुसार, आकलन वर्ष 1980-81 और बाद के वर्षों के संबंध में लागू होगा.

[वित्त अधिनियम की धारा 5 (ई)]

वित्त अधिनियम, 1983

धारा 11 और 13 - धर्मार्थ और धार्मिक ट्रस्टों और संस्थानों से संबंधित प्रावधानों का संशोधन

आयकर अधिनियम के मौजूदा प्रावधानों के तहत 18.1, धर्मार्थ या धार्मिक उद्देश्यों के लिए विश्वास के तहत आयोजित किसी भी संपत्ति से आयकर से ऐसी आय भारत में इस तरह के उद्देश्यों के लिए आवेदन किया है करने के लिए किस हद तक मुक्त है.इन वर्षों में प्रासंगिक प्रावधानों ट्रस्ट या संस्था के मामलों से जुड़े व्यक्तियों द्वारा कर रियायत के दुरुपयोग की संभावनाओं को कम करने की दृष्टि से संशोधित किया गया है.

वित्त अधिनियम, 1983

18.2 वित्त अधिनियम विश्वास धन के निवेश को विनियमित करने और कुछ मामलों को छोड़कर, ऐसे ट्रस्टों के व्यापार के लाभ को चार्ज करने के लिए लाने के लिए एक दृश्य के साथ संगत प्रावधानों में कुछ संशोधन कर दिया है.इस संबंध में संशोधनों के पदार्थ निम्नलिखित पैराग्राफ में विस्तार से बताया गया है:

वित्त अधिनियम, 1983

किसी भी विश्वास या संस्था इसे एक वर्ष में बाद में धर्मार्थ या धार्मिक उद्देश्यों के लिए आवेदन के लिए आय जमा करना चाहता है कि जमीन पर धर्मार्थ या धार्मिक उद्देश्यों के लिए अपनी आय का 75 प्रतिशत लागू नहीं होता कहां 18.3, यह रखी निम्न शर्तों को पूरा करने के लिए है नीचे धारा 11 (2):

. एक ट्रस्ट आय संचित किया जा रहा है जिस उद्देश्य और संचय की अवधि को निर्दिष्ट आयकर अधिकारी को सूचना देनी होती है;

बी. ताकि संचित आय सरकार या अन्य अनुमोदित प्रतिभूतियों में निवेश या डाकघर बचत बैंक में जमा किया जा रहा है, अनुसूचित बैंकों, सहकारी बैंकों और अनुमोदित वित्तीय निगमों.

धारा 13 (1) (डी) धारा 11 के तहत छूट ट्रस्ट या संस्था के किसी भी राशि का निवेश या जमा कर रहे हैं अगर आकलन वर्ष 1983-84 या बाद में किसी भी वर्ष के लिए कार्य करते हैं या निवेश या किसी भी अवधि के लिए जमा रहने के लिए जारी नहीं करेगा कि प्रदान करता है अन्यथा (5) धारा 13 की उप - धारा में निर्दिष्ट रूपों या मोड में से किसी में से 1 अप्रैल 1982 को या उसके बाद शुरू होगा किसी भी पिछले वर्ष के दौरान.

वित्त अधिनियम, 1983

18.4 वित्त अधिनियम उक्त प्रावधानों में संशोधन और धारा 11 (2) और धारा 13 (1) (डी) में निर्दिष्ट धन के तहत संचित आय के लिए निवेश का एक समान पैटर्न निर्धारित की है.ऐसी आय या धर्मार्थ और धार्मिक ट्रस्टों और संस्थाओं के अन्य धन निवेश या जमा करने के रूपों और मोड निम्नलिखित हैं:

मैं धारा 2 के रूप में परिभाषित बचत पत्र में निवेश सरकार बचत प्रमाणपत्र अधिनियम, 1959 या किसी भी अन्य सुरक्षा या कि सरकार की लघु बचत योजना के तहत केन्द्र सरकार द्वारा जारी किए गए प्रमाण पत्र (ग).;

द्वितीय डाकघर बचत बैंक के साथ किसी भी खाते में जमा.

III. एक अनुसूचित बैंक या सहकारी समिति के साथ किसी भी खाते में जमा (एक सहकारी भूमि बंधक बैंक या सहकारी भूमि विकास बैंक सहित) बैंकिंग के कारोबार पर ले जाने में लगे हुए हैं.

इस प्रावधान के प्रयोजनों के लिए, "अनुसूचित बैंक 'भारतीय स्टेट बैंक, भारतीय स्टेट बैंक के एक सहायक बैंक, एक इसी बैंक बैंकिंग कंपनी (अधिग्रहण और उपक्रमों का हस्तांतरण) अधिनियम, 1970 या की धारा 3 के तहत गठित मतलब है बैंकिंग कंपनियों की धारा 3 के तहत (अधिग्रहण और उपक्रमों का हस्तांतरण) अधिनियम 1980 या किसी भी अन्य बैंक ऑफ इंडिया एक्ट, 1934 की रिजर्व बैंक की द्वितीय अनुसूची में शामिल;

चतुर्थ भारतीय यूनिट ट्रस्ट की इकाइयों में निवेश.

वी. केन्द्रीय सरकार या किसी राज्य सरकार द्वारा जारी किए गए किसी भी सुरक्षा में निवेश;

. द्वारा, या की ओर से जारी डिबेंचरों में छठी निवेश, किसी भी कंपनी या निगम प्रिंसिपल जिसका और पूरी तरह से और बिना शर्त केन्द्र सरकार या किसी राज्य सरकार द्वारा गारंटी दी जाती है जिस पर ब्याज दोनों;

सातवीं कंपनी अधिनियम, 1956 की धारा 617 में परिभाषित के रूप में किसी सरकारी कंपनी में निवेश या जमा.

आठवीं. साथ जमा या ऐसे निगम धारा 36 के प्रयोजनों के लिए केन्द्र सरकार ने मंजूरी दे दी है, तो भारत में औद्योगिक विकास के लिए लंबी अवधि के वित्त उपलब्ध कराने में लगी हुई है जो एक वित्तीय निगम द्वारा जारी किए गए किसी भी बॉन्ड में निवेश (1) (आठ) ;

नौवीं. साथ या आवासीय प्रयोजनों के लिए भारत में निर्माण या घरों की खरीद के लिए लंबी अवधि के वित्त उपलब्ध कराने के कारोबार पर ले जाने का मुख्य उद्देश्य के साथ बनाई और भारत में पंजीकृत एक सार्वजनिक कंपनी द्वारा जारी किए गए किसी भी बॉन्ड में निवेश जमा, अगर ऐसी कंपनी है धारा 36 के प्रयोजनों के लिए केन्द्र सरकार ने मंजूरी दे दी (1) (आठ);

अचल संपत्ति में एक्स. निवेश.इस प्रावधान के प्रयोजनों के लिए, शब्द "अचल संपत्ति" से जुड़ी कुछ भी करने के लिए बांधा करने के लिए, या स्थायी रूप से संलग्न (भले ही मशीनरी या इमारत की सुविधाजनक कब्जे के लिए एक इमारत में स्थापित संयंत्र के अलावा) किसी मशीनरी या संयंत्र शामिल नहीं होगी , पृथ्वी.

वित्त अधिनियम, 1983

18.5 धारा 13 (1) (डी), वित्त अधिनियम द्वारा संशोधित, किसी भी धर्मार्थ या धार्मिक विश्वास या संस्था की आय धारा 11 या धारा 12 के तहत छूट पाने का हकदार नहीं होगा प्रावधान है कि यदि पिछले वर्ष के दौरान किसी भी अवधि के लिए -

. मैं विश्वास या संस्था के किसी भी राशि नहीं तो ऊपर निर्दिष्ट रूपों या विधियों में से किसी एक या एक से अधिक की तुलना में, 28 फरवरी, 1983 के बाद, निवेश या जमा कर रहे हैं;

द्वितीय अन्यथा की तुलना में विश्वास या संस्था 1 मार्च 1983 से पहले निवेश या जमा की किसी भी राशि, किसी भी एक या ऊपर निर्दिष्ट रूपों या मोड से अधिक है, इसलिए 30 नवंबर 1983 के बाद का निवेश या जमा रहने के लिए जारी है.; या

III. 30 नवंबर 1983 के बाद ट्रस्ट या संस्था द्वारा आयोजित की जाती हैं (कंपनी अधिनियम 1956 या किसी सांविधिक निगम की धारा 617 में परिभाषित के रूप में एक सरकारी कंपनी के अलावा अन्य) एक कंपनी में किसी भी शेयर.उप वर्गों (2) और (4) धारा 13 के प्रावधानों को भी कहा उप वर्गों के प्रावधानों धारा 13 (1) (डी) में निर्धारित आवश्यकताओं पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना किया जाएगा कि स्पष्ट करने के लिए संशोधित किया गया है.

वित्त अधिनियम, 1983

18.6 हालांकि, उक्त प्रावधानों के संबंध में लागू नहीं होगा:

मैं. ऐसी संपत्ति 1 जून 1973 और ऐसी संपत्ति पर के रूप में विश्वास या संस्था के कोष का हिस्सा बनाया है जहां ट्रस्ट या संस्था द्वारा आयोजित किसी भी संपत्ति ट्रस्ट या संस्था द्वारा खरीदा या के रूपांतरण द्वारा यह द्वारा अधिग्रहीत, या नहीं कर रहे थे ; किसी अन्य संपत्ति, के लिए विदेशी मुद्रा में

द्वितीय किसी भी संपत्ति 1 मार्च 1983 से पहले ट्रस्ट या संस्था द्वारा अधिग्रहीत (द्वारा, या किसी भी कंपनी या निगम की ओर से जारी डिबेंचरों जा रहा है).; और

III. मुनाफा और व्यापार के लाभ, किया जा रहा है मुनाफे और आकलन वर्ष 1984-85 या बाद में किसी भी निर्धारण वर्ष के लिए प्रासंगिक किसी भी पिछले वर्ष के लाभ का प्रतिनिधित्व किसी भी राशि.

ट्रस्ट या संस्था इस तरह के व्यापार के संबंध में खाते की अलग पुस्तकों का कहना है जब तक में वर्णित अपवाद (iii) इसके बाद के संस्करण, हालांकि, लागू नहीं.

वित्त अधिनियम, 1983

विश्वास धन के निवेश से संबंधित 18.7 उक्त प्रावधान 1 अप्रैल 1983 से प्रभावी और, तदनुसार, आकलन वर्ष 1983-84 और बाद के वर्षों के संबंध में लागू होगा.यह अन्यथा आकलन वर्ष 1983-84 से आपरेशन में आ जाता है, जो धारा 13 (1) (डी) के मौजूदा प्रावधानों, वित्त अधिनियम द्वारा किए गए संशोधनों से रह खड़े ध्यान दें कि इस संबंध में प्रासंगिक है.

वित्त अधिनियम, 1983

धर्मार्थ और धार्मिक ट्रस्टों और संस्थाओं का व्यवसाय आय

19.1 वित्त अधिनियम प्रदान करने के लिए धारा 11 में एक नई उपधारा (4 ए) डाला गया है कि उप - धारा के प्रावधानों (1) धर्मार्थ या धार्मिक उद्देश्यों के लिए विश्वास के तहत आयोजित की संपत्ति से प्राप्त आय की छूट से संबंधित है कि खंड के; या उपधारा (2) के उसके संचय से संबंधित या अलग तरह के उद्देश्यों के लिए आवेदन के लिए ऐसी आय की स्थापना; या कहा अनुभाग के उप वर्गों के जुड़े प्रावधानों (3) और (3) के मुनाफे और व्यापार के लाभ के संबंध में लागू नहीं होगा.इस प्रावधान से प्रभावित हुए बिना लाभ और लाभ ट्रस्ट या संस्था द्वारा या ऐसे प्रयोजनों के लिए विश्वास में आयोजित किया जाता है जो एक व्यवसाय उपक्रम से पर किए गए एक व्यापार से प्राप्त कर रहे हैं कि क्या लागू होगी. एक अपवाद है, तथापि, निम्नलिखित मामलों में लाभ और व्यापार के लाभ के संबंध में किया गया है:

एक व्यापार पूरी तरह सार्वजनिक धार्मिक उद्देश्यों के लिए एक ट्रस्ट द्वारा किया जाता है और व्यापार के मुद्रण और पुस्तकें या किताबें या व्यापार राजपत्र में इस संबंध में केन्द्र सरकार द्वारा अधिसूचित एक तरह का है के प्रकाशन के प्रकाशन के होते हैं.;

बी. व्यापार धर्मार्थ उद्देश्यों के लिए पूरी तरह एक संस्था और व्यापार मुख्य रूप से संस्था के लाभार्थियों द्वारा किया जाता है के संबंध में काम द्वारा किया जाता है.

वित्त अधिनियम, 1983

खाते से अलग किताबें इस तरह के व्यापार के संबंध में ट्रस्ट या संस्था द्वारा बनाए रखा जाता है जब तक कि (क) के तहत और (ख) के ऊपर उपलब्ध नहीं होगा का उल्लेख 19.2 अपवाद.धारा 13 (1) (निर्धनों की सहायता के लिए धर्मार्थ ट्रस्टों और संस्थाओं के मामले में कारोबारी आय की छूट प्रतिबंधित जो की धारा 11 की उप - धारा में किए गए नए प्रावधान (4 ए), खंड (बी बी) के परिणाम में , केवल व्यापार ट्रस्ट या संस्था) के एक प्राथमिक उद्देश्य के बाहर वास्तविक ले जाने का पाठ्यक्रम चलाया जाता है उन मामलों में जहां शिक्षा या चिकित्सा राहत, हटा दिया गया है.

वित्त अधिनियम, 1983

19.3 यह धारा 11 के नए उप - धारा (4 क) के प्रावधानों धारा 10 के प्रावधानों पर हावी नहीं है कि नोट के लिए प्रासंगिक है, और इस तरह के रूप में, किसी भी विश्वास, संस्था, संघ, आदि द्वारा ली गई मुनाफा, खंड में निर्दिष्ट (21), (22), (22A), (23), (23A), (23B), (23BB) और (23 सी) आयकर से छूट जारी रहेगी.

वित्त अधिनियम, 1983

19.4 वित्त अधिनियम भी धारा 164 मुनाफे में और धारा 11 के तहत छूट प्राप्त नहीं कर रहे हैं, जो व्यापार के लाभ के रूप में यदि आयकर से वसूला जाएगा कि स्पष्ट करने के लिए संशोधन किया गया है इस तरह के लाभ और भी नहीं है जो किसी भी अन्य आय, यदि कोई हो, सहित लाभ ( ) धारा 11 के तहत मुक्त व्यक्तियों का एक संघ की आय थे.

वित्त अधिनियम, 1983

19.5 उपरोक्त संशोधन 1 अप्रैल 1984 से प्रभावी और, तदनुसार, आकलन वर्ष 1984-85 और बाद के वर्षों के संबंध में लागू होगा.

[धारा 6, 7 और वित्त अधिनियम के 37]


न्यायिक विश्लेषण

पैरा 19.1 में बोर्ड द्वारा लिया देखें सीबीडीटी वी. Thanthi ट्रस्ट [1995] 213 आईटीआर 639 (Mad.) में, अवैध और खारिज किया जाना करने के लिए उत्तरदायी के रूप में आयोजित किया गया था - में विस्तार से बताया.अदालत ने कहा:

"उप - धारा (4 क) पर ध्यान दिए बिना लाभ और लाभ ट्रस्ट या संस्था द्वारा किए गए एक व्यवसाय से या इस तरह के विश्वास में आयोजित किया जाता है जो एक व्यवसाय उपक्रम से प्राप्त कर रहे हैं कि क्या इस तथ्य के लागू होगी उस आधार पर कहा परिपत्र आय प्रयोजनों. उप - धारा (4 ए) की व्याख्या करते हुए बिंदु नंबर 1 के तहत, हम ने कहा कि उप - धारा (4 क) धर्मार्थ उद्देश्यों के लिए विश्वास के तहत आयोजित किया जाता है, जो व्यापार उपक्रम से प्राप्त आय के लिए कोई आवेदन करना होगा कि आयोजित किया है. (4) अधिनियम की धारा 11 के साथ पठित धारा 11 के एक सावधान व्याख्या (4 ए) पर हमारे द्वारा उठाए ऊपर देखने को देखते हुए, हम का उप सही व्याख्या नहीं देता है कि सर्कुलर नंबर 372 जोत में कोई हिचक नहीं है यह कहा उपधारा (4 ए) में निहित प्रावधानों के साथ असंगत है खंड (4 ए) अधिनियम की धारा 11 की और कहा कि (4) धारा 11 की उप - धारा के साथ पढ़ा. देखें, कि उप - धारा (4 क) पर ध्यान दिए बिना लाभ और लाभ ट्रस्ट या संस्था द्वारा या धर्मार्थ उद्देश्यों के लिए विश्वास में आयोजित किया जाता है जो एक व्यवसाय उपक्रम से पर किए गए एक व्यापार से प्राप्त कर रहे हैं कि क्या की, लागू होगा कहा परिपत्र में व्यक्त उप वर्गों के सादे भाषा (1), (4) और धारा 11 के (4 ए) और, इसलिए, यह कहा सर्कुलर नंबर 372 अवैध और खारिज किया जाना करने के लिए उत्तरदायी है कि आयोजित किया जाना है द्वारा warranted नहीं है. दूसरा प्रतिवादी, impugned आदेश पारित (1) याचिकाकर्ता को धारा 11 के तहत छूट नकार जबकि भी सर्कुलर नंबर 372 पर रिलायंस रखा. उस जमीन पर भी, impugned आकलन के आदेश को खारिज कर दिया किया जा सकता है .... (पीपी 658-659)

वित्त अधिनियम, 1983

वेतनभोगी करदाताओं के मामले में स्वीकार्य मानक कटौती की स्थापना - धारा 16 (मैं)

धारा 16 के तहत 20.1 (मैं) आयकर अधिनियम की, सिर "वेतन" के अंतर्गत आय पाने निर्धारिती कर योग्य वेतन की गणना में एक मानक कटौती के हकदार हैं.मानक कटौती रुपए की सीमा के अध्यधीन वेतन के 25 फीसदी के बराबर राशि में अनुमति दी है. 5,00 करदाताओं की इस श्रेणी को राहत प्रदान करने की दृष्टि से, वित्त अधिनियम रुपये के लिए अधिकतम सीमा बढ़ा दी हैं. 6000.

वित्त अधिनियम, 1983

20.2 यह संशोधन अप्रैल 1,1984 से प्रभावी होता है और, तदनुसार, आकलन वर्ष 1984-85 और बाद के वर्षों के संबंध में लागू होगा.

[वित्त अधिनियम की धारा 8]

वित्त अधिनियम, 1983

गृह संपत्ति से आय की गणना में रुचि के संबंध में कटौती - धारा 24

गृह संपत्ति से आय की गणना में 21.1, कटौती धारा 24 के तहत अनुमति दी है (1) (vi) के अधिग्रहण के लिए उधार ली गई पूंजी पर ब्याज का भुगतान के संबंध में, निर्माण, मरम्मत, नवीकरण, या घर की संपत्ति का पुनर्निर्माण.

वित्त अधिनियम, 1983

21.2 वित्त अधिनियम ऐसी संपत्ति कर दिया गया है, जिसमें एक घर की संपत्ति के अधिग्रहण या निर्माण के लिए उधार और पूर्व पिछले वर्ष की अवधि से संबंधित पूंजी के संबंध में एक निर्धारिती द्वारा देय है कि ब्याज उपलब्ध कराने के लिए उपरोक्त प्रावधान के लिए एक स्पष्टीकरण डाला गया है का अधिग्रहण या निर्माण, हद तक यह घर का अधिग्रहण या निर्माण किया है, जिसमें पिछले साल से शुरू होने के पांच समान वार्षिक किश्तों में काट लिया, अधिनियम के किसी अन्य प्रावधान के तहत कटौती के रूप में अनुमति नहीं है करेगा.

वित्त अधिनियम, 1983

21.3 संशोधन 1 अप्रैल 1984 से प्रभावी होता है और, तदनुसार, आकलन वर्ष 1984-85 और बाद के वर्षों के संबंध में लागू होगा.

[वित्त अधिनियम की धारा 9]

वित्त अधिनियम, 1983

मूल्यह्रास भत्ता के संबंध में कटौती - धारा 32

22.1 खंड के तहत 32 कटौती निर्धारिती द्वारा स्वामित्व में है और उसके व्यवसाय या पेशे के उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल इमारतों, मशीनरी, संयंत्र या फर्नीचर के अवमूल्यन के संबंध में, कर योग्य लाभ और एक व्यवसाय या पेशे की बढ़त कंप्यूटिंग में अनुमति दी है, अगर शर्तों इस संबंध में निर्धारित पूरा कर रहे हैं.आम तौर पर, स्वीकार्य मूल्यह्रास भत्ता मूल्यह्रास है जिसके लिए सागर जा रहा जहाजों के मामले में छोड़कर, परिसंपत्ति के नीचे लिखा मूल्य को आयकर नियमों में निर्धारित मूल्य ह्रास के लिए दर अनुसूची में विनिर्दिष्ट दर लागू करने से गणना की जाती है लागत का एक प्रतिशत के रूप में सीधे लाइन पद्धति पर गणना की थी.

वित्त अधिनियम, 1983

धारा 32 के लिए सबसे पहले परंतुक के तहत 22.2 (1), किसी मशीनरी या संयंत्र की वास्तविक लागत के पूरे ऐसी मशीनरी या संयंत्र की वास्तविक लागत रुपये से अधिक नहीं है जहां के मामलों में कर योग्य लाभ की गणना में कटौती की जाती है.750. वित्त अधिनियम में इस प्रावधान में संशोधन किया और रुपये की वित्तीय सीमा में वृद्धि हुई है. रुपये के लिए 750. 5,00

वित्त अधिनियम, 1983

22.3 धारा 32 (1) (iv) कम वेतन पाने वाले कर्मचारियों की या ऐसे कर्मचारियों के लिए कल्याणकारी गतिविधियों के लिए निवास के प्रयोजन के लिए इस्तेमाल केवल भवनों की वास्तविक लागत का 40 प्रतिशत के बराबर प्रारंभिक ह्रास कर योग्य लाभ और लाभ कंप्यूटिंग में अनुमति दी है लेखा वर्ष की जिसमें ऐसी इमारतों खड़ा कर रहे हैं.इसलिए अनुमति दी प्रारंभिक मूल्यह्रास, हालांकि, बाद के वर्षों में इस तरह के निर्माण के संबंध में स्वीकार्य मूल्यह्रास भत्ता कंप्यूटिंग के प्रयोजनों के लिए इमारत के नीचे लिखा मूल्य निर्धारण में निर्माण की वास्तविक लागत से काट नहीं है. वित्त अधिनियम में किसी भी तरह के निर्माण के संबंध में अनुमति दी प्रारंभिक मूल्यह्रास इसके नीचे लिखा मूल्य का निर्धारण करने में ध्यान में रखा जाना जाएगा कि उपलब्ध कराने के लिए इस खंड में संशोधन किया है.

वित्त अधिनियम, 1983

धारा 32 के तहत 22.4 एक भारतीय कंपनी के स्वामित्व और एक अनुमोदित होटल के रूप में इस तरह कंपनी द्वारा इस्तेमाल एक इमारत के निर्माण की वास्तविक लागत का 25 प्रतिशत की दर से (1) (वी) प्रारंभिक मूल्यह्रास की कर योग्य लाभ कंप्यूटिंग में अनुमति दी है ऐसी इमारत खड़ी है, जिसमें लेखा वर्ष का होटल व्यवसाय.इसलिए अनुमति दी प्रारंभिक ह्रास भी बाद के वर्षों में इस तरह के निर्माण के संबंध में स्वीकार्य मूल्यह्रास भत्ता कंप्यूटिंग के प्रयोजनों के लिए इमारत के नीचे लिखा मूल्य निर्धारण में खाते में नहीं लिया है. वित्त अधिनियम में इस तरह के निर्माण के संबंध में अनुमति दी प्रारंभिक ह्रास भी इसके नीचे लिखा मूल्य का निर्धारण करने में ध्यान में रखा जाना जाएगा कि उपलब्ध कराने के लिए इस खंड में संशोधन किया है.

वित्त अधिनियम, 1983

22.5 ये संशोधन 1 अप्रैल 1984 से प्रभावी और, तदनुसार, आकलन वर्ष 1984-85 और बाद के वर्षों के संबंध में लागू होगा.यह उक्त प्रावधानों के तहत प्रारंभिक मूल्यह्रास आकलन वर्ष 1983-84 या किसी भी पहले के आकलन में अनुमति दी गई है हो सकता है, भले ही उक्त संशोधन निर्धारण वर्ष 1984-85 के लिए इस तरह की इमारतों के नीचे लिखा मूल्य कंप्यूटिंग में लागू होगी कि नोट किया जाए वर्ष.

[वित्त अधिनियम की धारा 10]

वित्त अधिनियम, 1983

जहाज मरम्मत उद्योग के लिए निवेश छूट - धारा 32A

23.1 अनुभाग 32A के तहत निवेश भत्ता के कारण कटौती निम्नलिखित की वास्तविक लागत का 25 प्रतिशत की दर से कर योग्य लाभ की गणना में अनुमति दी है:

1करदाताओं द्वारा अधिग्रहीत नए जहाजों या नए विमान जहाजों या विमान के संचालन के कारोबार में लगे हुए हैं.

प्र.20. नई मशीनरी या पीढ़ी के व्यापार या बिजली या बिजली के किसी अन्य रूप से वितरण के प्रयोजनों के लिए स्थापित संयंत्र.

(3)नई मशीनरी या किसी भी लेख या बात के निर्माण या उत्पादन के व्यापार के प्रयोजनों के लिए एक छोटे पैमाने पर औद्योगिक उपक्रम में स्थापित संयंत्र.

(4)नई मशीनरी या ग्यारहवीं अनुसूची में सूची में निर्दिष्ट एक लेख या बात नहीं की जा रही किसी भी लेख या बात है, के निर्माण, निर्माण या उत्पादन के व्यापार के प्रयोजनों के लिए किसी अन्य औद्योगिक उपक्रम में स्थापित संयंत्र.

वित्त अधिनियम, 1983

23.2 जहाज मरम्मत उद्योग को प्रोत्साहित करने की दृष्टि से, वित्त अधिनियम के प्रयोजनों के लिए 31 मार्च 1983 के बाद से स्थापित नई मशीनरी और संयंत्र के संबंध में है, लेकिन 1 अप्रैल 1988 से पहले भत्ता देय बनाने के लिए निवेश भत्ता से संबंधित प्रावधान में संशोधन किया गया है व्यापार एक भारतीय कंपनी द्वारा किया जाता है और इस तरह के व्यापार केन्द्र सरकार द्वारा अनुमोदित किया जा रहा है समय के लिए है, तो सागर जा रहा वाहिकाओं या अन्य संचालित शिल्प की मरम्मत पर ले जाने के व्यापार की.

वित्त अधिनियम, 1983

23.3. संशोधन 1 अप्रैल 1984 से प्रभावी होता है और, तदनुसार, आकलन वर्ष 1984-85 और बाद के वर्षों के संबंध में लागू होगा.

[वित्त अधिनियम की धारा 11 (क)]

वित्त अधिनियम, 1983

प्रदूषण नियंत्रण और पर्यावरण के संरक्षण के लिए मशीनरी और संयंत्र के सम्मान में निवेश छूट - धारा 32A (-2)

24.1 वित्त अधिनियम 35 फीसदी की उच्च दर पर निवेश भत्ता के लिए उपलब्ध कराने के लिए खंड 32A में एक नई उपधारा (2 सी) डाला गया है मशीनरी या संयंत्र की वास्तविक लागत की (25 प्रतिशत की सामान्य दर की तुलना में) जो सरकारी राजपत्र में केन्द्र सरकार द्वारा इस संबंध में सूचित कर दिया गया है, जो प्रदूषण या पर्यावरण की सुरक्षा के नियंत्रण और में सहायता करेगा.मशीनरी या संयंत्र किसी भी औद्योगिक उपक्रम में 31 मई 1983 के बाद निर्धारिती द्वारा स्थापित होने पर ही यह रियायत की अनुमति दी जाएगी.

वित्त अधिनियम, 1983

24.2 संशोधन 1 जून 1983 से प्रभावी होता है.अनुरूपता से एक आकलन वर्ष की 1 अप्रैल को ही लागू मौलिक कानून है कि आकलन वर्ष के लिए लागू कानून है कि सिद्धांत के साथ, इस प्रावधान निर्धारण वर्ष 1984-85 और बाद के वर्षों के संबंध में लागू होगा.

[वित्त अधिनियम की धारा 11 (ख)]

वित्त अधिनियम, 1983

धारा 35 (2) - प्रावधान वैज्ञानिक अनुसंधान के लिए इस्तेमाल किया जाएगा, एक वैज्ञानिक रिसर्च एसोसिएशन, आदि के लिए भुगतान के संबंध में कटौती से संबंधित संशोधन

25.1 धारा 35 (2) एक और एक तिहाई गुना के बराबर एक भारित कटौती व्यय मुनाफे और व्यवसाय या पेशे से लाभ की गणना में अनुमति दी है के तहत, एक अनुमोदित वैज्ञानिक अनुसंधान एसोसिएशन के एक निर्धारिती द्वारा बनाई गई किसी योगदान के सम्मान में, विश्वविद्यालय, कॉलेज या अन्य संस्था या अनुमोदित कार्यक्रमों के तहत वैज्ञानिक अनुसंधान के लिए प्रयोग की जाने वाली सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी है.

वित्त अधिनियम, 1983

25.2 वित्त अधिनियम में इस तरह के अंशदान का भुगतान राशि किसी के किसी भी भूमि या भवन या निर्माण के अधिग्रहण के लिए इस्तेमाल नहीं किया जाएगा कि निर्धारिती द्वारा एक विशेष दिशा के साथ किया जाता है केवल अगर भारित कटौती उपलब्ध हो जाएगा कि उपलब्ध कराने के लिए उक्त प्रावधान में संशोधन किया गया है इमारत.

वित्त अधिनियम, 1983

25.3 संशोधन 1 अप्रैल 1984 से प्रभावी होता है और, तदनुसार, आकलन वर्ष 1984-85 और बाद के वर्षों के संबंध में लागू होगा.

[वित्त अधिनियम की धारा 12]

टी वह वित्त अधिनियम, 1983

निर्यात बाजार विकास भत्ता की वापसी - धारा 35B

निर्यात बाजार विकास भत्ता, एक घरेलू कंपनी या एक निवासी गैर कॉर्पोरेट निर्धारिती से संबंधित अनुभाग 35B के मौजूदा प्रावधानों के तहत 26.1 पूंजीगत व्यय के अलावा अन्य व्यय के संबंध में (व्यापार से लाभ या लाभ की गणना में एक भारित कटौती के हकदार है या माल, सेवाओं या सुविधाओं के निर्यात से संबंधित कतिपय निर्दिष्ट गतिविधियों पर निर्धारिती की निजी खर्च) में जो निर्धारिती सौदों या अपने व्यापार के पाठ्यक्रम में प्रदान करता है.कटौती पिछले वर्ष के दौरान निर्धारिती द्वारा किए गए इस तरह के खर्च का एक और एक तिहाई बार कुल के बराबर राशि में अनुमति दी है.

वित्त अधिनियम, 1983

26.2 वित्त अधिनियम में कोई कटौती 28 फ़रवरी 1983 के बाद किए गए व्यय के संबंध में इस प्रावधान के तहत अनुमति दी जाएगी कि उपलब्ध कराने के लिए खंड संशोधन किया गया है.

वित्त अधिनियम, 1983

26.3 संशोधन 1 अप्रैल 1983 से अस्तित्व में आता है और, तदनुसार, आकलन वर्ष 1983-84 और बाद के वर्षों के संबंध में लागू होगा.

[वित्त अधिनियम की धारा 13]

वित्त अधिनियम, 1983

कृषि विकास भत्ता की भारित तत्व की वापसी - धारा 35C

अनुभाग 35C, एक कंपनी या कच्चे माल या प्रक्रियाओं ऐसे उत्पाद सीधे चाहे या एक के माध्यम से, किए गए व्यय का एक भारित कटौती के लिए पात्र है के रूप में कृषि, पशुपालन या डेयरी या मुर्गी पालन के किसी भी उत्पाद का उपयोग करता है जो एक सहकारी समिति के तहत 27.1 किसान, उत्पादकों या इस तरह के उत्पादों के उत्पादकों के लिए कृषि आदानों और विस्तार सेवाओं के प्रावधान में, संघ या शरीर को मंजूरी दे दी.भारित कटौती योग्यता खर्च में से एक और एक पांचवें गुना राशि के बराबर राशि पर अनुमति दी है.

वित्त अधिनियम, 1983

27.2 वित्त अधिनियम (योग्यता खर्च का 20 फीसदी है) इस कटौती में भारित तत्व वापस लेने और केवल योग्यता व्यय की राशि का 100 प्रतिशत तक स्वीकार्य कटौती सीमित करने की दृष्टि से अनुभाग 35C संशोधन किया गया है.

वित्त अधिनियम, 1983

27.3 संशोधन 1 अप्रैल 1984 से प्रभावी होगा और, तदनुसार, आकलन वर्ष 1984-85 और बाद के वर्षों के संबंध में लागू होगा.

[वित्त अधिनियम की धारा 14]

वित्त अधिनियम, 1983

ग्रामीण विकास भत्ता से संबंधित प्रावधान का संशोधन - धारा 35CC

एक कंपनी या एक सहकारी समिति की जा रही एक निर्धारिती ग्रामीण विकास के किसी भी कार्यक्रम पर कोई खर्च incurs जहां ग्रामीण विकास भत्ता से संबंधित अनुभाग 35CC के तहत 28.1, एक कटौती पिछले वर्ष के दौरान किए गए इस तरह के खर्च की राशि की अनुमति दी गई है बशर्ते कि इस तरह के कार्यक्रम विहित प्राधिकारी द्वारा अनुमोदित किया गया है.एक कंपनी या एक सहकारी समिति द्वारा किए गए ग्रामीण विकास के किसी भी अनुमोदित कार्यक्रम में अपनी ओर से कार्यक्रम के संबंध में काम करने के लिए यह द्वारा लगे एक अन्य व्यक्ति के माध्यम से क्रियान्वित या यह द्वारा किया जाता है कहाँ, व्यय कंपनी या द्वारा किए गए ऐसे व्यय यह द्वारा किए गए व्यय के रूप में माना जाना है के रूप में इस तरह के अन्य व्यक्ति के माध्यम से कार्यक्रम के क्रियान्वयन पर सहकारी समिति भी इस धारा के तहत कटौती के लिए उत्तीर्ण.

वित्त अधिनियम, 1983

28.2 वित्त अधिनियम को एक नया प्रावधान डाला गया है उपधारा (1) के कार्यक्रम कार्यक्रमों के किसी भी तरह के वर्ग या श्रेणी में आने वाले एक कार्यक्रम है, जब तक विहित प्राधिकारी ग्रामीण विकास के किसी भी कार्यक्रम को मंजूरी नहीं होगा कि प्रभाव के लिए कहा अनुभाग की ग्रामीण विकास की इस संबंध में केन्द्र सरकार द्वारा विनिर्दिष्ट की जाए.

वित्त अधिनियम, 1983

28.3 संशोधन 1 अप्रैल 1983 से प्रभावी होता है और, कार्यक्रम कार्यक्रमों की निर्दिष्ट वर्ग या श्रेणी में आता है, जब तक इस तरह के रूप में, विहित प्राधिकारी, 1 अप्रैल, 1983 को या उसके बाद ग्रामीण विकास के किसी भी कार्यक्रम को मंजूरी देने से रोका जा जाएगा .यह प्रावधान है, तथापि, 1 अप्रैल 1983 से पहले विहित प्राधिकारी द्वारा अनुमोदित किया गया है जो कार्यक्रमों के संबंध में लागू नहीं होगा.

[वित्त अधिनियम की धारा 15]

वित्त अधिनियम, 1983

धारा 35CCA - ग्रामीण विकास कार्यक्रमों से बाहर ले जाने के लिए संगठनों और संस्थाओं को भुगतान के माध्यम से व्यय से संबंधित प्रावधानों में संशोधन

खंड 35CCA तहत 29.1 (1) (क) अपने उद्देश्य के रूप में ग्रामीण विकास के कार्यक्रमों का उपक्रम है जो किसी भी संस्था या संस्था, व्यवसाय या पेशे पर ले जाने के एक निर्धारिती द्वारा भुगतान रकम से लाभ और लाभ कंप्यूटिंग में कटौती के रूप में अनुमति दी जाती है व्यापार या ऐसी रकम ग्रामीण विकास के एक कार्यक्रम से बाहर ले जाने के लिए इस्तेमाल हो रहे हैं, जहां पेशे.संघ या संस्था और भी रकम का भुगतान किया जाता है, जिसके लिए ग्रामीण विकास कार्यक्रम विहित प्राधिकारी द्वारा अनुमोदित किया गया है केवल अगर कटौती की अनुमति दी है.

वित्त अधिनियम, 1983

निर्धारिती प्रभाव को संघ या संस्था से एक प्रमाण पत्र प्रस्तुत जब तक वित्त अधिनियम द्वारा किए गए एक संशोधन के तहत 29.2, उक्त कटौती ऐसे संगठनों या संस्थाओं के लिए भुगतान किसी भी रकम के संबंध में अनुमति नहीं दी जाएगी कि-

. मैं ग्रामीण विकास कार्यक्रम 1 मार्च 1983 से पहले विहित प्राधिकारी द्वारा अनुमोदित किया गया था; और

इस तरह के भुगतान 28 फ़रवरी 1983 के बाद किया जाता है, जहां द्वितीय., इस तरह के कार्यक्रम (चाहे एक डिस्पेंसरी, स्कूल, प्रशिक्षण या कल्याण केंद्र, कार्यशाला या किसी अन्य उद्देश्य के लिए उपयोग के रूप में) या किसी भी इमारत या अन्य संरचना के निर्माण के रास्ते से काम करना शामिल है किसी भी सड़क या निर्माण या एक अच्छी तरह से या ट्यूब अच्छी तरह से या किसी भी संयंत्र या मशीनरी की स्थापना, और इस तरह के काम के बोरिंग के बिछाने 1 मार्च 1983 से पहले शुरू हो गई है.

वित्त अधिनियम, 1983

29.3 धारा 35CCA (1) (ख) अपने उद्देश्य के रूप में ग्रामीण विकास कार्यक्रमों को लागू करने के लिए व्यक्तियों के प्रशिक्षण है जो एक अनुमोदित संस्था या संस्था, के लिए भुगतान रकम के संबंध में एक समान कटौती करने का प्रावधान है.निर्धारिती प्रभाव को ऐसी संस्था या संस्था से एक प्रमाण पत्र प्रस्तुत जब तक वित्त अधिनियम, ऐसे संगठनों या संस्थाओं को किसी भी राशि के भुगतान के माध्यम से व्यय के संबंध में कटौती से अनुभाग अनुमति नहीं दी जाएगी कहा करने के लिए किए गए एक अन्य संशोधन के तहत कि

. मैं विहित प्राधिकारी 1 मार्च 1983 से पहले संघ या संस्था को मंजूरी दी थी; और

द्वितीय. ग्रामीण विकास के किसी भी कार्यक्रम को लागू करने के लिए व्यक्तियों के प्रशिक्षण 1 मार्च 1983 से पहले संघ या संस्था द्वारा शुरू किया गया था.

प्रमाण पत्र इस में जाना जाता है और यह विहित प्राधिकारी से इस तरह के स्वभाव का प्रमाण पत्र जारी करने के लिए लिखित रूप में एक प्राधिकरण प्राप्त करने तक पूर्ववर्ती पैरा किसी भी संस्था या संस्था द्वारा जारी नहीं किए जाएंगे.

वित्त अधिनियम, 1983

वित्त अधिनियम, इस संबंध में स्थापित किया है और केन्द्र सरकार द्वारा अधिसूचित एक ग्रामीण विकास निधि के लिए किसी भी राशि का भुगतान द्वारा खंड 35CCA में किए गए एक अन्य संशोधन के तहत 29.4 कहा अनुभाग के तहत कटौती के लिए पात्र होंगे.

वित्त अधिनियम, 1983

29.5 ये संशोधन 1 अप्रैल 1983 से प्रभावी और, तदनुसार, आकलन वर्ष 1983-84 और बाद के वर्षों के संबंध में लागू होगा.

[वित्त अधिनियम की धारा 16]

वित्त अधिनियम, 1983

व्यवसाय या पेशे में परिहार्य या दिखावटी खर्च को रोकने के लिए प्रावधान - धारा 37

प्र.30. धारा 37 के बाहर रखी या खर्च, वर्गों 30-36 और अनुभाग 80VV, या पूंजीगत व्यय या निर्धारिती की निजी खर्च की प्रकृति में होने वाले खर्च में वर्णित प्रकृति के खर्च के अलावा अन्य किसी भी व्यय, की कर योग्य लाभ की गणना में कटौती के लिए प्रदान करता है पूर्ण और विशेष रूप से करदाता द्वारा किए गए व्यवसाय या पेशे के प्रयोजनों के लिए. व्यवसाय या पेशे पर ले जाने निर्धारिती द्वारा परिहार्य या दिखावटी खर्च की कुछ श्रेणियों को रोकने के दृष्टिकोण के साथ, वित्त अधिनियम की धारा 37 में कुछ संशोधन कर दिया है. इन संशोधनों के पदार्थ 31-34 इसके अंतर्गत पैराग्राफ में विस्तार से बताया है.


न्यायिक विश्लेषण

स्टेट्समैन लिमिटेड [वी. सीआईटी में - में समझाया1992] 198 आईटीआर 582 (Cal.), न्यायालय के अनुच्छेद 30 के हवाले से, और कहा:

"यह उप वर्गों (3 ए) के प्रावधानों और धारा 37 के (3 बी) शुरू में 'असाधारण और सामाजिक अपव्यय पर एक को रोकने के लिए जगह एक वस्तु के साथ, वित्त अधिनियम, 1978 के द्वारा शुरू किए गए थे, इसलिए है कि स्पष्ट है .. . सरकारी खजाने 'की कीमत पर. प्रावधान बाद में दो साल के बाद वापस ले लिया है और यह भी दो साल के लिए चली जो वित्त अधिनियम, 1983, यानी, आकलन साल 1984-85 और 1985-86 से पुनः शुरू किया गया. प्रावधानों के पुनरुद्धार की वस्तु 'व्यापार या पेशे पर ले जाने निर्धारिती द्वारा परिहार्य या दिखावटी खर्च की कुछ श्रेणियों को रोकने के दृष्टिकोण के साथ' था. "(पी. 588)

वित्त अधिनियम, 1983

मनोरंजन व्यय का 31.1 घेरा - अभिव्यक्ति "मनोरंजन व्यय" की गुंजाइश के बारे में संदेह को दूर करने के लिए, वित्त अधिनियम 2 बी धारा 37 और भी उप - धारा (की उप - धारा (2) के उद्देश्य के लिए एक नया स्पष्टीकरण डाला गया है ) कि उप - धारा के रूप में उस अनुभाग के 1 अप्रैल 1977 से पहले खड़ा था.स्पष्टीकरण "मनोरंजन व्यय" इस तरह के प्रावधान कारण के द्वारा किया जाता है भोजन या पेय पदार्थों के प्रावधान के माध्यम से किया जाए या किसी अन्य तरीके से जो भी और चाहे या नहीं, किसी भी व्यक्ति को निर्धारिती द्वारा हर तरह की सुविधा का प्रावधान करने संबंधी व्यय भी शामिल है कि स्पष्ट किया किसी भी एक्सप्रेस या निहित अनुबंध या कस्टम, उपयोग या व्यापार. हालांकि, उनके कार्यालय में कर्मचारियों को एक नियोक्ता द्वारा खाद्य या पेय पदार्थ उपलब्ध कराने में किए गए व्यय, कारखाना या उनके काम की अन्य जगह मनोरंजन व्यय के रूप में नहीं माना जा जाएगा.

वित्त अधिनियम, 1983

31.2 यह संशोधन 1 अप्रैल 1976 से पूर्वव्यापी प्रभाव लेता है और उसके अनुसार आकलन वर्ष 1976-77 और बाद के वर्षों के संबंध में लागू होगा.

वित्त अधिनियम, 1983

मनोरंजन खर्च की कटौती के लिए 32.1 सीमाएं - धारा 37 (2) के मौजूदा प्रावधानों के तहत मनोरंजन पर खर्च के संबंध में कटौती के तहत के रूप में लाभ की मात्रा के संदर्भ में गणना की निश्चित सीमा के अधीन है:

1पहले रुपए में. मुनाफा और व्यापार या पेशे के साढ़े मुनाफा या रुपये फीसदी दर पर, (निवेश भत्ता, विकास छूट या विकास भत्ता या मनोरंजन व्यय के संबंध में के संबंध में किसी भी कटौती करने से पहले अभिकलन के रूप में) की बढ़त के 10 लाख. 5000, जो भी अधिक है.

प्र.20. अगले रुपए पर. इसलिए इस तरह के लाभ का 1/4 फीसदी की दर पर गणना के रूप में लाभ और लाभ का 40 लाख.

(3)अगले रुपए पर. इस तरह के लाभ का 1/8 फीसदी की दर से इस तरह के लाभ और लाभ के 1,20,00,000,.

(4)पर इस तरह के लाभ और लाभ का संतुलन, कोई नहीं.

उक्त टेबल के नीचे अभिकलन अधिकतम घटाया राशि रुपये बैठती है. केवल 30,000.

वित्त अधिनियम, 1983

32.2 वित्त अधिनियम कटौती के लिए व्यय योग्यता से संबंधित प्रावधान में संशोधन किया है.उपरोक्त तालिका के पहले दो स्लैब के संबंध में कटौती रुपये से अधिक लाभ पर अपरिवर्तित बनी हुई है. 50 लाख, कटौती ऐसे लाभ का 1/8 फीसदी की दर से की अनुमति दी जाएगी. यह, हालांकि, अधिकतम कटौती किसी भी हालत में रुपये से अधिक नहीं होगी कि उपलब्ध कराई गई है. 50,000 रूपए. दरों की मौजूदा तालिका के तहत उपलब्ध 30,000.

वित्त अधिनियम, 1983

32.3 यह संशोधन 1 अप्रैल 1984 से प्रभावी होता है और, तदनुसार, आकलन वर्ष 1984-85 और बाद के वर्षों के संबंध में लागू होगा.


न्यायिक विश्लेषण

में समझाया - पटेल ब्रदर्स एंड कंपनी लिमिटेड वी. सीआईटी में [1995] 215 आईटीआर 165 (एससी), सुप्रीम कोर्ट के पैराग्राफ 30, 31.1, 31.2 और 32.1, और मनाया उद्धृत:

राजस्व के लिए "सीखा वकील स्पष्टीकरण 2 clarificatory और, इसलिए, यहां तक कि स्पष्टीकरण 2 बिना प्रावधान समझा जाना चाहिए और एक ही तरीके से लगाया है कि तर्क. यह हमारे लिए पूर्वव्यापी बनाया स्पष्टीकरण 2 की कि सम्मिलन होता है, लेकिन केवल 1 अप्रैल 1976 से प्रभाव के साथ अपने आवेदन में प्रतिबंधित, खुद से पहले 1 अप्रैल 1976 तक अपने आवेदन, बाहर रखा गया है कि एक संकेत है. स्पष्टीकरण 2 साधारण अर्थ के महज clarificatory था, राजस्व के लिए सीखा के वकील ने दलील के रूप में, यह केवल 1 अप्रैल 1976 से इस तरह से अपनी पूर्वव्यापी आवेदन को प्रतिबंधित करने के लिए अनावश्यक था. यह प्रासंगिक मूल्यांकन अवधि के दौरान अस्तित्व के रूप में हम धारा 37 की उप - धारा (2 क) से बना है निर्माण, इसलिए प्रासंगिक अवधि के दौरान अयोग्य था जो उप - धारा (2) के लिए स्पष्टीकरण 2 से प्रभावित नहीं किया जा सकता.

हमारी राय में, यह प्रासंगिक अवधि के दौरान अस्तित्व के रूप में हम प्रावधान से बना है निर्माण प्रावधान की भाषा से मात्र नहीं बहती है, लेकिन यह भी उसके उद्देश्य के साथ मेल खाता है. यह स्थापित व्यापार व्यवहार के अनुसार बाहरी ग्राहकों के लिए साधारण भोजन उपलब्ध कराने में करदाता द्वारा किए गए व्यय, जो निर्धारिती की गणना में हकदार थे करने के लिए धारा 37 की उप - धारा (2 क), के बावजूद एक अनुमेय कटौती था इसका मतलब है कि उनके आयकर अधिनियम, 1961 के तहत कर के भुगतान के प्रयोजन के लिए कुल आय, पिछले 1 अप्रैल 1976 को प्रासंगिक अवधि के दौरान. "(पी. 173)

वित्त अधिनियम, 1983

कुछ खर्च का 33.1 आंशिक पाबंदी - वित्त अधिनियम में चार नए उप वर्गों (3), धारा 37 में (3 बी), (3 सी) और (3 डी) डाला गया है.उप - धारा (3 ए) व्यय की निर्दिष्ट वस्तुओं में से किसी एक या एक से अधिक पर कोई निर्धारिती द्वारा किए गए कुल व्यय रुपये से अधिक हो गया है कि जहां प्रदान करता है. 1 लाख, ऐसे अतिरिक्त के बीस फीसदी कर योग्य लाभ कंप्यूटिंग में कटौती के रूप में अनुमति नहीं दी जाएगी.

वित्त अधिनियम, 1983

33.2 नई उप - धारा (3 बी) इस पाबंदी के प्रयोजनों के लिए व्यय की निम्न आइटम निर्दिष्ट करता है:

1विज्ञापन, प्रचार और बिक्री संवर्धन.

प्र.20. चल रहा है और विमान और मोटर कारों के रखरखाव.

(3)होटल को किए गए भुगतान.

उक्त उप वर्गों को स्पष्टीकरण स्पष्ट किया कि-

आयकर अधिनियम और नए प्रावधान के तहत पाबंदी के किसी अन्य प्रावधान के तहत अनुमति नहीं है के रूप में एक. निर्दिष्ट मदों में निर्धारिती द्वारा किए गए व्यय ऐसे व्यय का इतना से कम हो जाएगा, केवल करने के लिए संदर्भ के साथ किया जाएगा संतुलन;

. बी विज्ञापन, प्रचार और बिक्री को बढ़ावा देने पर खर्च कहा गतिविधियों में लगे हुए निर्धारिती के कर्मचारियों को पारिश्रमिक शामिल नहीं होगा; इसलिए, इस तरह के पारिश्रमिक में इस प्रावधान के तहत पाबंदी के प्रयोजनों के लिए ध्यान में रखा नहीं जा सकता;

सी. विमान या भाड़े के लिए plied कारों को उलझाने के लिए किराया शुल्क पट्टे पर पर खर्च, कर्मचारियों या निदेशकों को वाहन भत्ते के भुगतान पर खर्च इस पाबंदी के प्रयोजनों के लिए खाते में ले जाया जाएगा.

वित्त अधिनियम, 1983

33.3 नई उप - धारा (3 सी), व्यय की पाबंदी से संबंधित उप - धारा में प्रावधान (3) घरेलू कंपनियों और विज्ञापन पर निवासी गैर निगमित करदाताओं (एक) द्वारा पूर्ण और विशेष रूप से किए गए व्यय के संबंध में लागू नहीं होगा कि प्रदान करता है ; माल, सेवाओं या सुविधाओं जो निर्धारिती में सौदों या अपने व्यापार के पाठ्यक्रम में प्रदान करता है के संबंध में प्रचार और भारत के बाहर बिक्री संवर्धन या (ख) इस तरह के सामान, सेवाओं या सुविधाओं का भारत के बाहर बिक्री को बढ़ावा देने के लिए भारत से बाहर बनाए रखा किसी भी शाखा कार्यालय या एजेंसी में चल रहा है और मोटर कारों के रखरखाव पर.

वित्त अधिनियम, 1983

33.4 नई उप - धारा (3 डी) उप धारा (3) के तहत कोई पाबंदी चल रहा है और विमान के रखरखाव पर किए गए व्यय के संबंध में, विमान के संचालन के कारोबार में लगे एक निर्धारिती के मामले में किया जाएगा कि प्रदान करता है. इसी तरह, भाड़े के लिए मोटर कारों के रखरखाव और चलाने पर किए गए व्यय किराए पर मोटर कारों को चलाने का व्यवसाय में लगे व्यक्तियों के मामले में इस पाबंदी के प्रयोजनों के लिए खाते में नहीं लिया जाएगा.

वित्त अधिनियम, 1983

33.5 ये संशोधन 1 अप्रैल 1984 से प्रभावी और, तदनुसार, आकलन वर्ष 1984-85 और बाद के वर्षों के संबंध में लागू होगा.

वित्त अधिनियम, 1983

(5) (4) कहा अनुभाग के उप - धारा में समाहित मौजूदा प्रावधानों के प्रयोजनों के लिए प्रदान करने के लिए एक clarificatory संशोधन के माध्यम से धारा 37 में सम्मिलित किया गया है एक नई उपधारा - अतिथि गृह के रखरखाव पर 34.1 व्यय अतिथि गृहों के रखरखाव पर होने वाले खर्च की पाबंदी से संबंधित किसी भी आवास निर्धारिती एक कंपनी है, जहां किसी भी कर्मचारी या, सहित किसी भी व्यक्ति (, के लिए, आवास, या आवास और भोजन उपलब्ध कराने के लिए बनाए रखा, काम पर रखा है या आरक्षित या अन्यथा निर्धारिती द्वारा व्यवस्था भी के किसी भी निदेशक, या दौरे पर) कंपनी में किसी भी अन्य कार्यालय धारकों या इस तरह के आवास स्थित है, जिस पर जगह के लिए यात्रा, एक गेस्ट हाउस की प्रकृति में आवास के रूप में माना जाएगा.

वित्त अधिनियम, 1983

34.2 यह संशोधन 1 अप्रैल 1979 से पूर्वव्यापी प्रभाव लेता है और उसके अनुसार आकलन वर्ष 1979-80 और बाद के वर्षों के संबंध में लागू होगा.

[वित्त अधिनियम की धारा 17]

वित्त अधिनियम, 1983

अवैतनिक वैधानिक दायित्व की पाबंदी - धारा 43B

धारा 145 मुनाफे में और व्यवसाय या पेशे के लाभ के तहत 35.1 नियमित निर्धारिती द्वारा नियोजित लेखा की विधि के अनुसार गणना कर रहे हैं.मोटे तौर पर लेखांकन, आय और व्यय की व्यापारिक प्रणाली के तहत उपचय के आधार पर लिए जिम्मेदार नहीं है और वास्तविक प्राप्ति या संवितरण के आधार पर कर रहे हैं, ने कहा. मुनाफा और व्यापार या पेशे के लाभ की गणना के प्रयोजनों के लिए, धारा 43 (2) के मुनाफे या लाभ गणना कर रहे हैं, जिसके आधार पर लेखा - विधि के अनुसार "वास्तव में भुगतान किया है या किए गए" मतलब "अदा" शब्द की परिभाषा .

वित्त अधिनियम, 1983

35.2 कई मामलों करदाताओं ऐसे उत्पाद शुल्क के संबंध में के रूप में उनके वैधानिक दायित्व का निर्वहन नहीं है जहां सूचना के लिए आए हैं, कई वर्षों के लिए कभी कभी का विस्तार समय की लंबी अवधि, आदि के लिए भविष्य निधि, कर्मचारी राज्य बीमा योजना, के लिए नियोक्ता के योगदान,.उनके आयकर आकलन के प्रयोजन के लिए, वे मर्केंटाइल या प्रोद्भवन आधार पर खातों को बनाए रखने कि जमीन पर कटौती के रूप में दायित्व का दावा है. दूसरी ओर, वे दायित्व विवाद और उसी का निर्वहन नहीं करते. किसी कारण या अन्य, निर्विवाद देनदारियों के लिए भी भुगतान नहीं कर रहे हैं.

वित्त अधिनियम, 1983

इस अभ्यास पर अंकुश लगाने के लिए 35.3, वित्त अधिनियम तत्समय प्रवृत्त किसी विधि के अधीन कर या शुल्क के माध्यम से निर्धारिती या एक के रूप में निर्धारिती द्वारा देय किसी भी राशि से देय किसी भी राशि के लिए कि कटौती प्रदान करने के लिए एक नई धारा 43B डाला गया है किसी भी भविष्य निधि या सेवानिवृत्ति निधि या ग्रेच्युटी फंड या कर्मचारियों के कल्याण के लिए किसी अन्य फंड के लिए योगदान के माध्यम से नियोक्ता, केवल उस की आय की गणना में भले की ऐसी राशि का भुगतान करने के दायित्व खर्च किया गया था, जिसमें पिछले वर्ष की अनुमति दी जाएगी ऐसी राशि वास्तव में निर्धारिती द्वारा भुगतान किया है जो पिछले वर्ष में जो.

वित्त अधिनियम, 1983

35.4 अनुभाग भी संदेह को दूर करने के लिए एक विवरण शामिल हैं.स्पष्टीकरण दायित्व ऐसी राशि का भुगतान करने में जो आकलन वर्ष 1983-84 या किसी पूर्व आकलन वर्ष के लिए प्रासंगिक पिछले एक वर्ष किया जा रहा है, किसी भी राशि उक्त के संबंध में एक कटौती के किसी भी पिछले वर्ष के आय की गणना में अनुमति दी गई है कि जहां प्रदान करता है निर्धारिती द्वारा खर्च किया गया था, निर्धारिती राशि वास्तव में उस वर्ष में उसके द्वारा भुगतान किया गया है कि जमीन पर ऐसे योग के संबंध में खंड 43B के तहत किसी भी कटौती करने के हकदार नहीं होंगे. दूसरे शब्दों में, पहले से ही कर या शुल्क के कारण या आकलन वर्ष 1983-84 या किसी भी पहले साल के लिए किसी भी फंड के लिए योगदान के रूप में देय किसी भी राशि के संबंध में एक दायित्व की कटौती की अनुमति दी गई है, जो एक निर्धारिती देयता का भुगतान करने के लिए जो में खर्च किया गया था, कि दायित्व के संबंध में, वह वास्तव में उस वर्ष में इस तरह के दायित्व के प्रति एक भुगतान कर दिया है कि जमीन पर आकलन वर्ष 1984-85 या बाद में किसी भी वर्ष में एक कटौती की अनुमति नहीं किया जा सकता.

वित्त अधिनियम, 1983

35.5 संशोधन 1 अप्रैल 1984 से प्रभावी होता है और, तदनुसार, आकलन वर्ष 1984-85 और बाद के वर्षों के संबंध में लागू होगा.

[वित्त अधिनियम की धारा 18]


न्यायिक विश्लेषण

में समझाया - पैराग्राफ 35.1-35.5 उद्धृत किया गया और द्रव एयर (इंडिया) लिमिटेड वी. में समझाया DCIT [1997] 63 आईटीडी 182 (मुंबई), के रूप में इस प्रकार है:

"10. सीबीडीटी सर्कुलर के उपरोक्त विवरण के एक सादे पढ़ने से, यह अधिनियम, 1961 की धारा 43B, कई करदाताओं ने सहारा अभ्यास पर अंकुश लगाने के लिए 1984/01/04 से प्रभावी वित्त अधिनियम, 1983 द्वारा डाला गया था कि स्पष्ट है इस तरह के उत्पाद शुल्क, लंबी अवधि के लिए भविष्य निधि, ईएसआई आदि, आदि के लिए योगदान लेकिन एक ही समय में वे मर्केंटाइल पर खातों को बनाए रखा है या कि जमीन पर उनके आयकर आकलन में कटौती के रूप में इस तरह के देनदारियों का दावा करने के रूप में उनके वैधानिक देनदारियों का निर्वहन बिना प्रोद्भवन आधार. इसी समय, देनदारियों विवादित रहे थे और वे देनदारियों का निर्वहन नहीं किया. अधिनियम की धारा 43B किसी भी कानून के तहत कर या शुल्क के रास्ते या किसी भी भविष्य निधि या सेवानिवृत्ति निधि या ग्रेच्युटी फंड के लिए योगदान के माध्यम से नियोक्ता के रूप में निर्धारिती द्वारा देय किसी भी राशि से निर्धारिती द्वारा देय किसी भी राशि के लिए कि कटौती प्रदान करने के लिए डाला गया था , आदि, ऐसी राशि वास्तव में निर्धारिती द्वारा भुगतान किया जाता है, जिसमें वर्ष के आय की गणना में कटौती के रूप में दी जाएगी .... "(पीपी 189-190)

वित्त अधिनियम, 1983

धारा 44D और 115A - विदेशी कंपनियों के कुछ आय के कराधान

36.1 धारा 44D (एक) एक विदेशी कंपनी के मामले में, तकनीकी सेवाओं के लिए रॉयल्टी या फीस के माध्यम से आय की गणना में वर्गों 28 अधिनियम की 44c के तहत स्वीकार्य कटौती एक समझौते के अनुसरण में एक भारतीय चिंता से प्राप्त प्रदान करता है कि 1 अप्रैल से पहले भारतीय चिंता के साथ किए गए, 1976 में इस तरह के आय की सकल राशि के 20 प्रतिशत से अधिक नहीं होगी.इस तरह के समझौते पर 31 मार्च 1976 के बाद किया जाता है, धारा 44D (ख) कोई कटौती ऐसी आय की गणना में कहा वर्गों में से किसी के तहत किसी भी खर्च या भत्ता के संबंध में अनुमति दी जाएगी कि प्रदान करता है. दूसरे शब्दों में, 31 मार्च, 1976 के बाद किए गए समझौते के तहत एक भारतीय चिंता से विदेशी कंपनियों द्वारा प्राप्त तकनीकी सेवाओं के लिए रॉयल्टी या फीस के माध्यम से आय के सकल राशि कर के दायरे में है. प्रासंगिक समझौता केन्द्र सरकार ने मंजूरी दे दी है यदि अनुभाग 115A के तहत (1) (ख) आयकर अधिनियम की, ऐसी आय की सकल राशि चालीस प्रतिशत की समान दर पर कर के दायरे में है. बीस फीसदी की कम दर हालांकि, एकमुश्त रॉयल्टी के संबंध में लागू आदि, ड्राइंग, भारत के बाहर स्थानांतरण, या के आयात, किसी भी डेटा, प्रलेखन के संबंध में भारत से बाहर जानकारी के लिए प्राप्त है,

वित्त अधिनियम, 1983

36.2 वित्त अधिनियम रॉयल्टी या तकनीकी सेवाओं के लिए शुल्क के माध्यम से इस तरह के आय सरकार से एक विदेशी कंपनी द्वारा प्राप्त की है जहां के मामलों में भी उनके आवेदन का विस्तार करने के लिए इतना ही वर्गों 44D और 115A के उपरोक्त प्रावधानों में संशोधन किया गया है.

वित्त अधिनियम, 1983

36.3 वित्त अधिनियम भी खंड 44D उधार धन या विदेशी मुद्रा में सरकार या भारतीय चिंता द्वारा किए गए ऋण पर सरकार या किसी भारतीय चिंता से विदेशी कंपनियों से प्राप्त ब्याज के रूप में आय का सकल राशि के कराधान के लिए प्रदान करने के लिए संशोधन किया गया है .अनुभाग 115A के लिए किए गए एक संशोधन के तहत ब्याज के रूप में आय का कुल राशि 25 फीसदी की दर से कर लगाया जाएगा.

वित्त अधिनियम, 1983

36.4 उपरोक्त संशोधन 1 जून 1983 से प्रभावी और, तदनुसार, आकलन वर्ष 1984-85 और बाद के वर्षों के संबंध में लागू होगा.

[धारा 19 और वित्त अधिनियम के 35]

वित्त अधिनियम, 1983

शुद्ध विचार प्राप्त या स्थानांतरण का एक परिणाम के रूप में एकत्रित मामलों में जहां "दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ" के संबंध में छूट निर्दिष्ट वित्तीय परिसंपत्तियों में निवेश या जमा किया जाता है - धारा 54E

एक "दीर्घकालिक पूंजी परिसंपत्ति" के हस्तांतरण से उत्पन्न होने वाले खंड 54E पूंजीगत लाभ के तहत 37.1 शुद्ध विचार प्राप्त अगर आयकर से छूट दी गई है या हस्तांतरण का एक परिणाम के रूप में एकत्रित अवधि के भीतर निवेश या किसी भी निर्दिष्ट वित्तीय परिसंपत्ति में जमा किया जाता है हस्तांतरण की तारीख से छह महीने की.ध्यान का ही एक हिस्सा तो निवेश या जमा है कहां, पूंजीगत लाभ पर कर से छूट अनुपात में दी जाती है. पूंजी परिसंपत्ति अनिवार्य सरकार ने अधिग्रहण कर लिया है और अतिरिक्त मुआवजा, बाद में किसी भी वर्ष में करदाता के लिए अतिरिक्त मुआवजे की राशि किसी भी निर्दिष्ट में निवेश या जमा किया जाता है, तो भी कर से छूट दी है प्राप्त अतिरिक्त मुआवजा के कारण पूंजीगत लाभ का भुगतान किया जाता है कहां ऐसे अतिरिक्त मुआवजा प्राप्त हुआ है, जिस तारीख से छह महीने की अवधि के भीतर वित्तीय परिसंपत्ति.

वित्त अधिनियम, 1983

अतिरिक्त ध्यान एक हस्तांतरण के संबंध में एक बाद में वर्ष में प्राप्त होता है, जहां 37.2 इसी प्रकार के उपचार दिया जाता है, मूल रूप से निर्धारित या केन्द्र सरकार या भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा अनुमोदित किया गया था, जिसके लिए विचार.तो हासिल कर ली निर्दिष्ट वित्तीय परिसंपत्ति इसके अधिग्रहण की तारीख से तीन वर्ष की अवधि के भीतर सौंप दिया है, कहां, नई संपत्ति की लागत के आधार पर छूट दी पूंजीगत लाभ की राशि में जो वित्तीय लेखा वर्ष में कर के लिए शुल्क लिया जाता है संपत्ति तो स्थानांतरित कर रहा है.

वित्त अधिनियम, 1983

पूंजी परिसंपत्ति 28 फ़रवरी 1979 को इन प्रावधानों के प्रयोजनों के लिए निर्दिष्ट केवल वित्तीय परिसंपत्ति राष्ट्रीय ग्रामीण विकास बंधन है के बाद सौंप दिया है, जहां मामलों के संबंध में 37.3.

वित्त अधिनियम, 1983

37.4 वित्त अधिनियम उक्त प्रावधानों में निम्न संशोधन किया गया है:

128 फ़रवरी 1983 के बाद एक पूंजी परिसंपत्ति का हस्तांतरण पर उत्पन्न होने वाले पूंजीगत लाभ के संबंध में इन प्रावधानों के तहत छूट केवल निर्धारिती शुरू में की सदस्यता से पूरे या नई संपत्ति में शुद्ध विचार के हिस्से के निवेश या जमा मामलों में जहां उपलब्ध हो जाएगा नई परिसंपत्ति.

प्र.20. 28 फरवरी के बाद किसी भी पूंजी परिसंपत्ति का हस्तांतरण पर उत्पन्न होने वाले पूंजीगत लाभ के संबंध में, 1983 निर्धारिती अब तक निम्नलिखित वित्तीय आस्तियों के रूप में शुद्ध विचार निवेश के लिए इस तरह के मामलों में निवेश के उद्देश्यों के लिए निर्दिष्ट किया गया है की तुलना में एक व्यापक विकल्प होगा:

. एक जैसे केंद्र सरकार की प्रतिभूतियों सरकारी राजपत्र में अधिसूचना द्वारा कि सरकार द्वारा इस संबंध में निर्दिष्ट किया जा सकता है;

. ख के रूप में भारतीय यूनिट ट्रस्ट की इकाइयों की विशेष श्रृंखला इसलिए केंद्र सरकार द्वारा निर्दिष्ट किया जा सकता है;

[अधिसूचना संख्या जीएसआर 804 (ई) के द्वारा, 27 अक्टूबर 1983 दिनांकित, केन्द्र सरकार के तहत जारी इकाइयों की विशेष श्रृंखला को अधिसूचित किया है पूंजी उपखंड (के प्रयोजनों के लिए भारतीय यूनिट ट्रस्ट की यूनिट स्कीम, 1983 लाभ द्वितीय) उप - धारा को स्पष्टीकरण के खंड (ग) मैं (1) आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 54E के]

. सी ऐसी राष्ट्रीय ग्रामीण विकास बांड ताकि केन्द्र सरकार द्वारा निर्दिष्ट किया जा सकता है;

[अधिसूचना संख्या जीएसआर 504 (ई) के द्वारा, 21 जून, 1983 दिनांकित, केन्द्र सरकार स्पष्टीकरण मैं करने के उपखंड (ग) खंड (ग) के प्रयोजनों के लिए राष्ट्रीय ग्रामीण विकास बांड (दूसरे अंक) अधिसूचित किया गया है उप - धारा (1) आयकर अधिनियम, 1961] की धारा 54E के; और

डी. के रूप में आवास और शहरी विकास निगम लिमिटेड द्वारा जारी किए गए इस तरह के डिबेंचरों तो केन्द्र सरकार द्वारा निर्दिष्ट किया जा सकता है.

(3)शुद्ध विचार किसी भी निर्दिष्ट वित्तीय परिसंपत्ति में निवेश किया है और निर्धारिती ऐसी नई संपत्ति की सुरक्षा पर किसी भी ऋण या अग्रिम लेता है प्राप्त या 28 फ़रवरी 1983 के बाद एक पूंजी परिसंपत्ति का हस्तांतरण पर एकत्रित मामलों में जहां है, वह बदल दिया है समझा जाएगा (अन्यथा हस्तांतरण द्वारा की तुलना में) इस तरह के ऋण या अग्रिम लिया जाता है, जिस पर आज की तारीख में ऐसे परिसंपत्ति. तदनुसार, इस तरह के ऋण या अग्रिम नई परिसंपत्ति के अधिग्रहण की तारीख से तीन वर्ष की अवधि के भीतर ले जाया जाता है जहां मामलों में, पूंजी लाभ की राशि मूल रूप से नई संपत्ति की लागत के आधार पर छूट दी में कर के लिए शुल्क लिया जाएगा ऐसे ऋण या अग्रिम लिया जाता है, जिसमें लेखा वर्ष.

(4)ऐसे अतिरिक्त मुआवजा या विचार ऊपर 2 में निर्दिष्ट संपत्ति में से किसी में निवेश किया है अगर किसी भी अनिवार्य अधिग्रहण या हस्तांतरण के संबंध में 28 फरवरी 1983 के बाद एक करदाता द्वारा प्राप्त किसी भी अतिरिक्त मुआवजा या विचार के कारण पूंजीगत लाभ भी छूट दी जाएगी.

वित्त अधिनियम, 1983

37.5 ये संशोधन 1 अप्रैल 1983 से प्रभावी और, तदनुसार, भी पूंजी परिसंपत्ति 28 फरवरी, उसके बाद अतिरिक्त मुआवजा या ध्यान प्राप्त कर रहा है जहां 1983 या बाद सौंप दिया है, जिन मामलों में आकलन वर्ष 1983-84 के संबंध में लागू होगा तारीख.

[वित्त अधिनियम की धारा 20]

वित्त अधिनियम, 1983

निर्दिष्ट मोड में लंबी अवधि के बचत के संबंध में कटौती - धारा 80 सी

धारा 80 सी के कर राहत के तहत 38.1 टैक्स को अपनी आय प्रभार्य के बाहर करदाताओं की कुछ श्रेणियों से प्रभावित लंबी अवधि के बचत के संबंध में अनुमति दी है.एक व्यक्ति के मामले में, व्यक्ति के जीवन, अपने पति या पत्नी या बच्चे पर (नकद विकल्प के बिना) जीवन बीमा या आस्थगित वार्षिकी नीतियों के माध्यम से लंबी अवधि के बचत; प्रोविडेंट फंड और सुपर annuation धनराशि निश्चित; बीमा योजना, 10 वर्ष और 15 वर्ष संचयी समय जमा खातों यूनिट लिंक्ड और सरकारी प्रतिभूतियों अधिसूचित, कर राहत के लिए योग्य हैं. हिंदू अविभाजित परिवारों के मामले में, लंबी अवधि के बचत परिवार के किसी भी सदस्य के जीवन पर बीमा पॉलिसियों के माध्यम से प्रभावित और सरकारी प्रतिभूति कर राहत के लिए अर्हता प्राप्त अधिसूचित. एक करदाता लंबे दादरा और नगर हवेली और गोवा, दमन और दीव, संघ शासित क्षेत्र में बल में संपत्ति के समुदाय की प्रणाली द्वारा संचालित पति और पत्नी के केवल मिलकर, व्यक्तियों का एक संघ या व्यक्तियों का निकाय होने के मामले में अवधि, इस तरह के सहयोग से या शरीर के किसी भी सदस्य के जीवन पर या सदस्य या तो किसी भी बच्चे के जीवन पर (नकद विकल्प के बिना) जीवन बीमा या आस्थगित वार्षिकी नीतियों के माध्यम से बचत के रूप में भी पब्लिक प्रोविडेंट फंड, यूनिट लिंक्ड इंश्योरेंस प्लान के माध्यम से 10 साल संचयी समय जमा खातों और अधिसूचित सरकारी प्रतिभूतियों, कर राहत के लिए योग्य हैं.

वित्त अधिनियम, 1983

38.2 कर राहत, सभी मामलों में, करदाता, पहली रुपये का पूरी की कर योग्य आय की गणना में, घटाने के द्वारा की अनुमति दी है. योग्यता बचत प्लस अगले रुपए की 50 फीसदी की 6,000. 6,000 से अधिक इस तरह के बचत की शेष राशि का 40 फीसदी.लंबी अवधि के बचत ही बचत इस संबंध में निर्धारित छत सीमा से अधिक नहीं है कि हद तक कर राहत के लिए योग्य हैं. मामलों की व्यापकता में लागू सीमा करदाता या रुपए की सकल कुल आय का 30 फीसदी है. 40,000, इनमें से जो भी कम है. एक उच्च सीमा लेखकों, नाटककारों, कलाकारों, संगीतकारों, अभिनेताओं, खिलाड़ियों और एथलीटों के मामले में निर्धारित किया जाता है. उनके मामले में उच्चतम सीमा लेखक, नाटककार, कलाकार, संगीतकार, अभिनेता, खिलाड़ी और एथलीट प्लस सकल कुल आय या रुपये के शेष भाग की 30 फीसदी की व्यावसायिक आय का 40 फीसदी है. 60,000, इनमें से जो भी कम है.

वित्त अधिनियम, 1983

लंबी अवधि के बचत प्रभावशाली लिए आगे प्रोत्साहन प्रदान करने की दृष्टि से 38.3, वित्त अधिनियम संगत प्रावधानों में निम्न संशोधन किया गया है:

1सकल कुल आय के प्रतिशत के संदर्भ में कटौती के लिए योग्यता बचत की सीमा हटा दी गई है. योग्यता राशि, इसलिए रुपये में, वर्तमान में, के रूप में बने रहेंगे, जो केवल एक मौद्रिक सीमा के अधीन किया जाएगा. मामलों और रुपये की व्यापकता में 40,000. लेखकों, नाटककारों, कलाकारों, संगीतकारों, अभिनेताओं, खिलाड़ियों और एथलीटों के मामले में 60,000. यह नोट करना प्रासंगिक है कि रुपये की उक्त मौद्रिक छत. अब तक आयकर नियमों के नियम 11 ए में निर्धारित किया गया था जो 60,000, अब धारा 80 सी में शामिल किया गया है (4) (मैं).

प्र.20. हिंदू अविभाजित परिवारों के मामले में, लोक भविष्य निधि और 10 साल और 15 साल की संचयी समय जमा खातों के माध्यम से प्रभावित बचत भी कर राहत के लिए अर्हता प्राप्त करेंगे.

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38.4 ये संशोधन 1 अप्रैल 1984 से प्रभावी और, तदनुसार, आकलन वर्ष 1984-85 और बाद के वर्षों के संबंध में लागू होगा.

वित्त अधिनियम, 1983

1983-84 के लिए अपने बजट भाषण के पैरा 76 में 38.5 वित्त मंत्री उन्होंने राष्ट्रीय बचत पत्र (छठी और सातवीं मुद्दों) को शामिल करके बचत के लिए उपलब्ध मीडिया को चौड़ा करने का इरादा है कि घोषणा की थी.इस घोषणा के अनुसरण में एक अधिसूचना संख्या जीएसआर 112 (ई) धारा 80 सी के तहत 28 फ़रवरी 1983 पर केन्द्र सरकार द्वारा जारी किया गया है राष्ट्रीय बचत पत्र (छठी समस्या को निर्दिष्ट आयकर अधिनियम की (2) (एच) ) और कहा कि प्रावधान के प्रयोजनों के लिए प्रतिभूतियों के रूप में राष्ट्रीय बचत प्रमाणपत्र (सप्तम अंक). अधिसूचना 2 अप्रैल 1983 को अस्तित्व में आ गया है. अनुरूपता से निर्धारण वर्ष की 1 अप्रैल को ही कानून है कि आकलन वर्ष के लिए लागू कानून है कि सिद्धांत के साथ, ने कहा कि प्रमाण पत्र के लिए सदस्यता के रूप में भुगतान रकम धारा 80 सी के ही निर्धारण वर्ष से 1984-85 और नहीं से के तहत कटौती के लिए अर्हता प्राप्त करेंगे आकलन वर्ष 1983-84.

[वित्त अधिनियम की धारा 21]

वित्त अधिनियम, 1983

धारा 80 जी - आदि कुछ धन, धर्मार्थ संस्थाओं को दान के संबंध में कटौती से संबंधित प्रावधान में संशोधन

39.1 उप - धारा (5) धारा 80 जी के किसी भी संस्था या कोष में दान (चतुर्थ) धारा (2) ने कहा कि खंड के ही हैं, उस धारा के तहत कर रियायत के हकदार होंगे खंड में निर्दिष्ट प्रदान करता है कि संस्था या फंड एक धर्मार्थ प्रयोजन के लिए भारत में स्थापित किया और यह कहा कि उपधारा में निर्दिष्ट शर्तों को पूरा कर रहा है (5).निर्दिष्ट शर्तों में से एक संस्था या फंड किसी भी आय प्राप्त कर लेता है, जहां इस तरह के आय वर्गों 11 और 12 या खंड (22), (22A), (23) के प्रावधानों के तहत अपनी कुल आय में शामिल करने के लिए उत्तरदायी हो सकता है और नहीं होता है धारा 10 के (23 सी). वित्त अधिनियम द्वारा धारा 11 में सम्मिलित किया गया है, जो नए उप - धारा (4 क) के अंतर्गत, मुनाफा और व्यापार के लाभ के नए उप में निर्दिष्ट मामलों की बहुत सीमित वर्ग को छोड़कर, धारा 11 के तहत कर छूट के लिए पात्र नहीं होंगे धारा. उप खंड के खंड (क) में निर्धारित शर्त के पुण्य से (5) धारा 80 जी के जो दान किया जाता है के लिए एक धर्मार्थ संस्था या फंड द्वारा प्राप्त आय वर्गों 11 और 12, दान के तहत कर से मुक्त किया जाना चाहिए कि किसी भी धर्मार्थ संस्था या फंड पाने मुनाफा और व्यापार के लाभ के लिए कहा अनुभाग के तहत कटौती के लिए योग्य नहीं होता. हालांकि, वित्त अधिनियम (5) एक संस्था या फंड उक्त खंड (क) में किसी भी लाभ और व्यापार के लाभ, हालत निकला है जहां कि प्रभाव के लिए खंड 80 जी की उपधारा के खंड (क) के लिए एक प्रावधान डाला गया है कि इस तरह के आय धारा 11 निम्न शर्तों को पूरा कर रहे हैं, तो इस तरह के लाभ और लाभ के संबंध में लागू नहीं होगा तहत ट्रस्ट या संस्था की कुल आय में शामिल किए जाने के लिए उत्तरदायी नहीं होगा:

. एक संस्था या फंड इस तरह के कारोबार के संबंध में खाते की अलग किताबें रखता है;

. बी संस्था या फंड में किए गए दान इस तरह के व्यापार के प्रयोजनों के लिए, सीधे या परोक्ष रूप से, यह द्वारा नहीं किया जाता है; और

दान यह इस तरह के व्यापार के संबंध में और उस खाते से अलग पुस्तकों का कहना है कि इस आशय का एक प्रमाण पत्र करने वाले व्यक्ति को सी. संस्था या फंड मुद्दों से प्राप्त दान के प्रयोजनों के लिए, सीधे या परोक्ष रूप से, इस्तेमाल नहीं किया जाएगा इस तरह के व्यापार.

वित्त अधिनियम, 1983

39.2 उपरोक्त शर्तों जैसा भी मामला हो ट्रस्ट या संस्था द्वारा व्युत्पन्न लाभ और लाभ, धारा के तहत छूट पाने का हकदार (एक) या कर रहे हैं, जहां के मामलों में लागू नहीं होगा, खंड (ख) उप - धारा (4 क) के साथ पढ़ा उप - धारा (1), धारा 11 के.

वित्त अधिनियम, 1983

39.3 उपरोक्त प्रावधान 1 अप्रैल 1984 से प्रभावी होगा और, तदनुसार, आकलन वर्ष 1984-85 और बाद के वर्षों के संबंध में लागू होगा.

[धारा 39 के वित्त अधिनियम (ग)]

वित्त अधिनियम, 1983

धारा 80GG - भुगतान के किराए के संबंध में कटौती से संबंधित प्रावधानों में संशोधन

मकान किराया भत्ता की रसीद में, एक निर्धारिती नहीं 80GG खंड के तहत 40.1, की 15 प्रतिशत की सीमा के अध्यधीन उसकी कुल आय के 10 प्रतिशत से अधिक में उसके द्वारा भुगतान मकान किराया के संबंध में, एक कटौती के हकदार है कुल आय या रु. प्रति माह 400, कम जो भी है.इस कटौती, लेकिन, करदाता, उसके पति या पत्नी या नाबालिग बच्चे या वह एक सदस्य है, जिनमें से हिंदू अविभाजित परिवार, कहीं भी किसी भी रिहायशी आवास का मालिक है जहां के मामलों में स्वीकार्य नहीं है.

वित्त अधिनियम, 1983

40.2 वित्त अधिनियम वह एक सदस्य है, जिनमें से करदाता, उसके पति या पत्नी या नाबालिग बच्चे या हिंदू अविभाजित परिवार, जगह पर किसी भी रिहायशी आवास का मालिक है जहां केवल भुगतान किराया के संबंध में कटौती से इनकार किया जाएगा कि उपलब्ध कराने के प्रावधान में संशोधन किया गया है करदाता आमतौर पर रहता है या प्रदर्शन करती है उसके कार्यालय या रोजगार के कर्तव्यों या अपने व्यवसाय या पेशे पर किया जाता है.इस धारा के तहत कटौती भी करदाता किसी अन्य जगह पर किसी भी रिहायशी आवास का मालिक है और इस तरह के आवास के मूल्य (द्वितीय) की उपधारा (2) धारा 23 के खंड (क) या खंड के अधीन निर्धारित किया जाता है, जहां मामलों में, मना कर दिया जाएगा रियायती आधार पर एक स्वयं के कब्जे घर संपत्ति के संबंध में निर्धारित.

वित्त अधिनियम, 1983

40.3 यह संशोधन 1 अप्रैल 1984 से प्रभावी होता है और, तदनुसार, आकलन वर्ष 1984-85 और बाद के वर्षों के संबंध में लागू होगा.

[वित्त अधिनियम की धारा 22]

वित्त अधिनियम, 1983

धारा 80GGA - ग्रामीण विकास के लिए कुछ दान के संबंध में कटौती से संबंधित प्रावधान में संशोधन

व्यवसाय या पेशे पर ले जाने के अलावा अन्य अनुभाग 80GGA तहत 41.1 (2) (बी) निर्धारिती, उनके वस्तु के रूप में किसी भी कार्यक्रम का उपक्रम है जो अनुमोदित संस्थाओं और संगठनों के लिए पिछले वर्ष के दौरान भुगतान किसी भी रकम की कटौती के हकदार हैं ग्रामीण विकास या इस तरह के कार्यक्रमों को लागू करने के लिए व्यक्तियों के प्रशिक्षण.

वित्त अधिनियम, 1983

वित्त अधिनियम द्वारा किए गए एक संशोधन के तहत 41.2, ऐसे संगठनों या संस्थाओं को भुगतान रकम के संबंध में कटौती की अनुमति दी जाएगी करदाता उप - धारा (में निर्दिष्ट प्रमाणपत्र की तर्ज पर ऐसी संस्था या संस्था से एक प्रमाण पत्र का उत्पादन केवल अगर जैसा भी मामला हो) 2 या, उस अनुभाग के तहत कटौती के लिए योग्यता रकम के संबंध में खंड 35CCA की उप - धारा (2), [कृपया पैराग्राफ 29.1-29.5 देख].

वित्त अधिनियम, 1983

इस परिपत्र के पैरा 29.4 में कहा गया 41.3 के रूप में, मुनाफे और व्यवसाय या पेशे से लाभ पाने निर्धारिती अनुभाग 35CCA खड़े किए गए ग्रामीण विकास निधि को बनाया और द्वारा अधिसूचित योगदान के संबंध में (1) (सी) के तहत छूट के हकदार होंगे इस संबंध में केन्द्र सरकार.तदनुसार, एक प्रावधान द्वारा स्थापित और अधिसूचित किया जा सकता है कि किसी भी ग्रामीण विकास फंड के व्यवसाय या पेशे से कोई लाभ और लाभ के लिए नहीं है जो करदाता द्वारा भुगतान रकम के संबंध में कटौती के लिए खंड 80GGA (2) (डी) में किया गया है खंड 35CCA के तहत केन्द्र सरकार (1) (सी).

वित्त अधिनियम, 1983

41.4 ये संशोधन 1 अप्रैल 1983 से प्रभावी.यह इसलिए, प्रमाणपत्र ऊपर 41.2 (2) (बी) भी आकलन वर्ष 1983-84 के लिए खंड 80GGA के तहत कटौती का दावा करने के लिए करदाताओं से सुसज्जित करना होगा पैराग्राफ में निर्दिष्ट है कि नोट किया जाए.

[वित्त अधिनियम की धारा 23]

वित्त अधिनियम, 1983

निर्यात के लिए कर प्रोत्साहन - धारा 80HHC

कुछ वस्तुओं के बड़े निर्यात को प्रोत्साहित करने की दृष्टि से 42.1, वित्त अधिनियम, 1982 जिसका निर्यात कारोबार एक साल के लिए अधिक है भारतीय कंपनियों और भारत में गैर निगमित करदाताओं निवासी को कर राहत प्रदान करने के लिए 1 जून 1982 से प्रभावी अनुभाग 89A डाला था उसके 10 से अधिक प्रतिशत से तुरंत पूर्ववर्ती वर्ष के लिए निर्यात कारोबार.

वित्त अधिनियम, 1983

42.2 वित्त अधिनियम, 1983 के 1 अप्रैल 1983 से प्रभावी उपरोक्त प्रावधान लोप हो गया है.इसके साथ ही, एक नया खंड 80HHC निर्यात कारोबार के संदर्भ में एक कटौती प्रदान करने के लिए एक ही तिथि से प्रभावी सम्मिलित किया गया है. के रूप में निम्नानुसार नई धारा के व्यापक विशेषताएं इस प्रकार हैं:

1टैक्स रियायत प्रासंगिक लेखा वर्ष के दौरान भारत किसी भी योग्यता माल या माल के बाहर निर्यात किया है, जो भारत में भारतीय कंपनियों और गैर निगमित करदाताओं निवासी के लिए उपलब्ध हो जाएगा.

प्र.20. कर रियायत के तहत के रूप में गणना कर योग्य लाभ की गणना में कटौती के होते हैं:

एक एक लेखा वर्ष के दौरान क्वालीफाइंग माल या माल के निर्यात कारोबार का एक प्रतिशत के बराबर राशि की कटौती;. प्लस

पिछले वर्ष के दौरान क्वालीफाइंग माल या माल के निर्यात कारोबार तुरंत पूर्ववर्ती पिछले वर्ष के दौरान निर्यात इस तरह के सामान का कारोबार या व्यापार से अधिक की राशि के पांच प्रतिशत के बराबर राशि के बी. एक कटौती.

(3)निर्धारिती तुरंत कटौती का दावा किया है, जिसके लिए प्रासंगिक पिछले वर्ष पूर्ववर्ती पिछले वर्ष के दौरान भारत किसी भी योग्यता माल या माल के बाहर निर्यात किया जा चुका है और अगर (बी) पर कर रियायत ऊपर उपलब्ध हो जाएगा. एक निर्धारिती हाल में एक विशेष वर्ष के दौरान निर्यात व्यापार में प्रवेश करती है, तो दूसरे शब्दों में, वह केवल (एक) और नहीं रियायत पर (ख) ऊपर में निहित रियायत के लिए उस वर्ष के लिए हकदार होंगे.

(4)टैक्स रियायत (क) कृषि प्राथमिक वस्तुओं (वृक्षारोपण का उत्पादन नहीं किया जा रहा) को छोड़कर अन्य सभी वस्तुओं या माल के निर्यात के संबंध में उपलब्ध हो जाएगा; (ख) खनिज तेल; (ग) खनिजों और अयस्कों; और (घ) केन्द्र सरकार के रूप में इस तरह के अन्य सामान या माल सरकारी राजपत्र में अधिसूचना द्वारा इस संबंध में निर्दिष्ट कर सकता है.

प्र.5. कर रियायत के लिए अर्हता प्राप्त करने के लिए, माल या भारत से बाहर निर्यात माल की बिक्री से प्राप्त आय परिवर्तनीय विदेशी मुद्रा में निर्धारिती द्वारा प्राप्य होना चाहिए.

वित्त अधिनियम, 1983

नई धारा के लिए स्पष्टीकरण की 42.3 खण्ड (क), अवधि के विदेशी मुद्रा नियमन अधिनियम के प्रयोजनों के लिए परिवर्तनीय विदेशी मुद्रा के रूप में भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा इलाज किया जा रहा है समय के लिए है, जो विदेशी मुद्रा के रूप में "परिवर्तनीय विदेशी मुद्रा" को परिभाषित करता है 1973 और उसके अधीन बनाए गए किसी भी नियम."परिवर्तनीय विदेशी मुद्रा" की परिभाषा धारा 80-O में निहित के रूप में ही है. इस अभिव्यक्ति का अर्थ इस परिपत्र के पैरा 42.4 में समझाया गया है.

वित्त अधिनियम, 1983

42.4 सरकार बिक्री आय किसी भी अन्य परिवर्तनीय विदेशी मुद्रा में प्राप्त साथ सममूल्य पर इलाज किया जाएगा द्विपक्षीय खाता देशों (जैसे, रूसी Roubles) से गैर परिवर्तनीय रूपये में बिक्री आय के उस रसीद को स्पष्ट 21-6-1983 को एक प्रेस नोट जारी किया है खंड 80HHC के प्रयोजनों के लिए.

वित्त अधिनियम, 1983

स्पष्टीकरण का 42.5 खंड (ख) किसी भी सामान या भारत से बाहर निर्यात माल की बिक्री से प्राप्त आय का मतलब के लिए "निर्यात कारोबार" को परिभाषित करता है, लेकिन यह भाड़ा या सीमा शुल्क स्टेशन परे माल या माल के परिवहन के कारण बीमा के रूप में शामिल नहीं है सीमा शुल्क अधिनियम, 1962 में परिभाषित किया.

वित्त अधिनियम, 1983

अनुभाग 89A 1 जून 1982 से प्रभावी डाला गया था के रूप में 42.6, यह आकलन वर्ष 1983-84 और बाद के वर्षों के लिए लागू होगा.हालांकि, 1 अप्रैल, 1983 से उस खंड की चूक का असर यह आकलन वर्ष 1983-84 के लिए भी लागू नहीं होगा. यह वास्तव में लागू होने से पहले दूसरे शब्दों में, यह क़ानून से हटा दिया गया है और इसकी जगह 1 अप्रैल 1983 से अस्तित्व में आता है जो नए खंड 80HHC द्वारा लिया गया है और, तदनुसार, आकलन वर्ष 1983-84 के संबंध में लागू होगा और बाद के वर्षों.

[धारा 24 और वित्त अधिनियम के 33]


न्यायिक विश्लेषण

श्रीमती में - में समझाया इतो वी. सुधा शर्मा [1993] 44 आईटीडी 351 (दिल्ली - ट्राई बी) यह खंड 80HHC को शामिल करने के पीछे मुख्य उद्देश्य प्रोत्साहन आय से निर्यातकों को दिया जाता है देश के लिए और उस प्रयोजन के लिए विदेशी मुद्रा अर्जित करने के लिए भारत से बाहर निर्यात को प्रोत्साहित करने के लिए है कि आयोजित किया गया टैक्स.बोर्ड इस प्रावधान के दायरे और प्रभाव को समझा द्वारा जारी 1983/08/12 सर्कुलर नं 372, इस दृष्टिकोण का समर्थन.

भारतीय प्रॉडक्ट्स लिमिटेड [वी. सीआईटी में - में समझाया1994] 207 आईटीआर 647 (Cal.), कोर्ट निम्नलिखित टिप्पणियों के साथ पैरा 42.2 समझाया:

"हमारे विचार में, एक दोनों खंड के तहत कटौती (एक) और खंड (ख) उप - धारा (1) के लिए विशेष रूप से खंड (ख) के द्वारा बाहर रखा उन के अलावा अन्य योग्यता माल या माल के निर्यात कारोबार के संबंध में अनुमति है उप - धारा (2). खंड के अधीन (एक), कटौती एक प्रतिशत के बराबर होगा. प्रासंगिक पिछले वर्ष के दौरान और खंड के अधीन योग्यता माल या माल के निर्यात कारोबार का (बी) के पांच प्रतिशत के बराबर राशि की कटौती. पिछले वर्ष के दौरान क्वालीफाइंग माल या माल के निर्यात कारोबार तुरंत पूर्ववर्ती पिछले वर्ष के दौरान निर्यात में इस तरह योग्यता के सामान का कारोबार या व्यापार से अधिक है जिसके द्वारा राशि की. खंड (ख) के प्रयोजनों के लिए दूसरे शब्दों में एक तुरंत पूर्ववर्ती पिछले वर्ष के दौरान सभी योग्यता माल या माल के कुल निर्यात कारोबार के साथ प्रासंगिक पिछले वर्ष के दौरान सभी योग्यता माल या माल के कुल निर्यात कारोबार तुलना करने के लिए है. योग्यता माल या माल का कोई व्यक्ति वर्गीकरण खंड (क) या खंड (ख) में या तो विचार किया जाता है. हम उपरोक्त के रूप में ले रहे हैं कि व्याख्या संयोग वित्त अधिनियम, 1983 के विभिन्न प्रावधानों को समझाने में जारी सर्कुलर नंबर 372 का हिस्सा बनाने व्याख्यात्मक नोट में केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड द्वारा लिया गया था के रूप में ही है. कहा परिपत्र के पैरा 42.2 योग्यता माल या माल मतलब करने के लिए अभिव्यक्ति "इस तरह के सामान या माल" बताते हैं. "(पीपी 656, 657)

वित्त अधिनियम, 1983

आदि कुछ औद्योगिक उपक्रमों, से लाभ और लाभ के संबंध में कटौती - धारा 80-I

धारा 80-I के तहत 43.1, एक कटौती के एक नए औद्योगिक उपक्रम या एक जहाज या एक होटल के व्यापार से लाभ का (कॉरपोरेट करदाताओं के मामले में 25 फीसदी) सकल कुल आय में शामिल 20 प्रतिशत की अनुमति दी है.

वित्त अधिनियम, 1983

43.2 वित्त अधिनियम सागर जा रहा वाहिकाओं या अन्य संचालित शिल्प की मरम्मत के कारोबार से भारतीय कंपनियों द्वारा व्युत्पन्न लाभ और लाभ के लिए धारा 80-I के तहत "कर छुट्टी" रियायत बढ़ा दिया गया है. नए प्रावधान के तहत, एक कटौती के इस तरह के लाभ और लाभ के 20 फीसदी के बराबर राशि में अनुमति दी जाएगी.कटौती वह यह है कि कंपनी इस तरह के मरम्मत के रास्ते और चार वर्ष सफल में से प्रत्येक से काम शुरू साल में जो, प्रारंभिक वर्ष में अनुमति दी जाएगी. इस कटौती नव डाला उप - धारा (4 क) में निर्दिष्ट निम्न शर्तों को पूरा करने के लिए विषय की अनुमति दी जाएगी:

1व्यापार बंटवारे, या पहले से ही अस्तित्व में एक व्यापार के पुनर्निर्माण द्वारा गठित नहीं है.

प्र.20. यह मशीनरी या पहले से किसी भी उद्देश्य के लिए इस्तेमाल संयंत्र के लिए एक नया व्यापार के लिए स्थानांतरण द्वारा गठित नहीं है.

(3)यह सागर जहाज़ों या अन्य संचालित शिल्प 31 मार्च 1983 के बाद लेकिन 1 अप्रैल 1988 से पहले इस तरह कंपनी द्वारा शुरू किया गया है की मरम्मत के माध्यम से एक भारतीय कंपनी और काम से पर किया जाता है.

(4)यह केन्द्र सरकार द्वारा इस कर concessing के प्रयोजनों के लिए अनुमोदित किया जा रहा है समय के लिए है.

वित्त अधिनियम, 1983

43.3 यह (2) उपरोक्त में हालत (द्वितीय) के खंड में हालत के समान है उल्लेखनीय है कि उप - धारा (2) औद्योगिक उपक्रमों के मामले में लागू धारा 80-I की; लेकिन, खंड के संबंध में स्पष्टीकरण 1 और स्पष्टीकरण 2 के तहत प्रदान की सीमित छूट के विपरीत (द्वितीय) की उपधारा (2), ऐसी कोई छूट नए उप - धारा (4 क) में निहित पूर्वोक्त हालत के संबंध में अनुमति दी गई है.

वित्त अधिनियम, 1983

43.4 यह भी उप वर्गों के प्रावधानों (6), (8) और (9) खंड के 80-मैं समुद्र की मरम्मत के व्यापार से लाभ के संबंध में "कर छुट्टी" रियायत के संबंध में लागू होगा कि नोट किया जाए जहाज़ों या अन्य संचालित शिल्प वे अन्य व्यवसायों के संबंध में कर रियायत के संबंध में लागू के रूप में कहा उप वर्गों में करने के लिए भेजा.

वित्त अधिनियम, 1983

43.5 संशोधन 1 अप्रैल 1984 से प्रभावी होता है और, तदनुसार, आकलन वर्ष 1984-85 और बाद के वर्षों के संबंध में लागू होगा.

[वित्त अधिनियम की धारा 25]

वित्त अधिनियम, 1983

धारा 80JJ - पशुपालन या मुर्गी या डेयरी फार्मिंग के व्यवसाय से लाभ और लाभ के संबंध में कटौती से संबंधित प्रावधानों में संशोधन

44.1 अनुभाग 80JJ के तहत पशुपालन या मुर्गी या डेयरी फार्मिंग के व्यवसाय से आय पाने एक निर्धारिती इन से प्राप्त आय का कुल के पांचवें के बराबर राशि के बारे में उनकी कुल आय की गणना में, एक कटौती के हकदार है सूत्रों या रुपए. 15,000, जो भी अधिक है.जहां इस तरह के आय के कुल रुपये से अधिक नहीं है. 15,000, ऐसी आय की पूरी छूट प्राप्त है. मुर्गी पालन के व्यवसाय से व्युत्पन्न लाभ रुपये से अधिक है, जहां एक मामले में इस धारा के तहत कटौती कंप्यूटिंग में. 75,000, अतिरिक्त ध्यान नहीं दिया है. दूसरे शब्दों में, लाभ और मुर्गी पालन के व्यवसाय से लाभ के संबंध में कटौती रुपये तक ही सीमित है. रुपये के 15,000 (यानी, एक पांचवें. 75,000).

वित्त अधिनियम, 1983

44.2 वित्त अधिनियम उक्त प्रावधान में संशोधन और मुनाफे और इन स्रोतों से प्राप्त लाभ का 15 प्रतिशत पशुधन प्रजनन या मुर्गी या डेयरी फार्मिंग के व्यवसाय से लाभ के संबंध में स्वीकार्य अधिकतम कटौती सीमित कर दी है.रुपये से अधिक खर्च खेती पोल्ट्री के कारोबार से व्युत्पन्न मुनाफे के मामले में. (रुपये की तुलना में. मौजूदा प्रावधानों के तहत 75,000) 1 लाख कटौती की गणना के प्रयोजन के लिए नजरअंदाज कर दिया जाएगा. इसलिए, मुर्गी पालन का व्यवसाय से लाभ के संबंध में अधिकतम कटौती रुपये करने, वर्तमान में, के रूप में प्रतिबंधित किया जाएगा. 15,000, कि, रुपये का 15 फीसदी है. 1 लाख.

वित्त अधिनियम, 1983

44.3 स्थिति के तहत के रूप में सचित्र जा सकता है:

(हजारों में)

पशुपालन और / या डेयरी फार्मिंग से सकल कुल आय का हिस्सा बनाने मुनाफे

कुकुट पालन

कुल

कटौती section80JJ तहत sible admis

१

2.

I3

4 ज

15 जुलाई

-

15 जुलाई

15 जुलाई

-

15 जुलाई

15 जुलाई

15 जुलाई

15 जुलाई

15 जुलाई

३०

15 जुलाई

25 X 4 = 100, 100

-

25 X 4 = 100, 100

15 जुलाई

-

25 X 4 = 100, 100

25 X 4 = 100, 100

15 जुलाई

25 X 4 = 100, 100

25 X 4 = 100, 100

200 रु

३०

-

200 रु

200 रु

15 जुलाई

200 रु

200 रु

400 रु.

4

वित्त अधिनियम, 1983

44.4 संशोधन 1 अप्रैल 1984 से प्रभावी होता है और, तदनुसार, आकलन वर्ष 1984-85 और बाद के वर्षों के संबंध में लागू होगा.

[वित्त अधिनियम की धारा 26]

वित्त अधिनियम, 1983

बढ़ रही मशरूम के व्यापार से लाभ और लाभ के संबंध में कटौती - धारा 80JJA

प्र.45. मुनाफे और बढ़ती मशरूम के व्यापार से लाभ के संबंध में कटौती से संबंधित धारा 80JJA 1 अप्रैल 1984 से प्रभावी वित्त अधिनियम द्वारा हटा दिया गया है. कटौती, इसलिए आकलन वर्ष 1984-85 और बाद के वर्षों के लिए उपलब्ध नहीं होंगे.

[वित्त अधिनियम की धारा 27]

वित्त अधिनियम, 1983

निर्दिष्ट वित्तीय संपत्ति से आय के संबंध में कटौती - धारा 80L

एक व्यक्ति, एक हिंदू अविभाजित परिवार, या व्यक्तियों के एक संघ या केवल संघ राज्य क्षेत्रों में बल में संपत्ति के समुदाय की प्रणाली द्वारा संचालित पति और पत्नी से मिलकर व्यक्तियों की एक संस्था होने के नाते एक करदाता द्वारा व्युत्पन्न खंड 80L, आय, के तहत 46.1 दादरा और नगर ​​हवेली और गोवा, दमन और दीव, वित्तीय परिसंपत्तियों की निर्दिष्ट श्रेणियों में निवेश से रुपये की कुल राशि के लिए मुक्त है. 4,000 सकल कुल आय से कटौती की जाती है.एक वर्ष या उससे अधिक की अवधि के लिए वित्त अधिनियम, 1982, सरकारी प्रतिभूतियों और बैंक जमा पर ब्याज पर ब्याज द्वारा किए गए एक संशोधन के तहत रुपये तक की एक और कटौती के लिए योग्य हैं. 2,000. इसके अलावा, भारत के कानून के यूनिट ट्रस्ट, 1963 रुपये का एक और कटौती में निहित एक अलग प्रावधान के तहत. 3,000 इकाइयों पर प्राप्त आय के संबंध में अनुमति दी है.

वित्त अधिनियम, 1983

ऊपर उल्लेख 46.2 वित्तीय परिसंपत्तियों हैं:

(I) सरकारी प्रतिभूतियों; किसी भी सहकारी समिति, संस्था या प्राधिकारी (ii) अधिसूचित डिबेंचरों; (Iii) केन्द्रीय सरकार की अधिसूचित योजनाओं के तहत जमा; (चतुर्थ) भारतीय कंपनियों के शेयरों में; भारतीय यूनिट ट्रस्ट (v) इकाइयों; सहकारी बैंक, भूमि बंधक बैंक और भूमि विकास बैंकों सहित बैंकों के साथ (vi) जमा; भारत में औद्योगिक विकास के लिए या आवासीय प्रयोजनों के लिए निर्माण या भारत में घरों की खरीद के लिए लंबी अवधि के वित्त उपलब्ध कराने का मुख्य उद्देश्य के साथ भारत में पंजीकृत एक अनुमोदित सार्वजनिक कंपनी के साथ लंबी अवधि के लिए वित्त उपलब्ध कराने में लगे अनुमोदित वित्तीय कंपनियों के साथ (सात) जमा ; (आठ) किसी भी अधिकार के साथ जमा करके या आवास के लिए या शहरों, कस्बों और गांवों के नियोजन, विकास या सुधार के लिए, या दोनों के लिए जरूरत है संतोषजनक के लिए या तो अधिनियमित किसी भी कानून के तहत भारत में गठित; उसके एक सदस्य ने एक सहकारी समिति के साथ (नौ) जमा; और (एक्स) किसी भी सहकारी समिति में शेयरों.

वित्त अधिनियम, 1983

46.3 वित्त अधिनियम ऐसे किसी भी बैंक इस संबंध में केन्द्र सरकार द्वारा अनुमोदित किया जा सकता है के रूप में संसद द्वारा बनाई गई किसी विधि द्वारा या उसके अधीन स्थापित एक बैंक होने के साथ जमा शामिल करने के लिए क्वालीफाइंग निवेश का क्षेत्र बढ़ा है.

वित्त अधिनियम, 1983

रुपये के 46.4 मौजूदा अलग छूट. एक वर्ष या उससे अधिक की अवधि के लिए किसी भी सरकार सुरक्षा या एक बैंक जमा पर ब्याज के संबंध में 2,000 हटा दिया गया है.इसके बजाय, यह अलग सीमा (अब तक. रुपये था जो 4000) जनरल मौद्रिक सीमा के साथ विलय कर दिया गया है और छूट की अधिकतम सीमा रुपये करने के लिए उठाया गया है. 7,000. तदनुसार, निर्दिष्ट वित्तीय संपत्ति से आय के संबंध में एक करदाता को इस प्रावधान के तहत उपलब्ध अधिकतम कटौती रुपए हो जाएगा. 7,000 से अधिक रुपए तक एक अतिरिक्त छूट. 3,000 अलग से भारतीय यूनिट ट्रस्ट की इकाइयों पर लाभांश के संबंध में भारत के कानून की यूनिट ट्रस्ट के तहत अनुमति दी.

वित्त अधिनियम, 1983

46.5 ये संशोधन 1 अप्रैल 1984 से प्रभावी और, तदनुसार, आकलन वर्ष 1984-85 और बाद के वर्षों के संबंध में लागू होगा.

[वित्त अधिनियम की धारा 28]

वित्त अधिनियम, 1983

आदि रॉयल्टी, के संबंध में एक भारतीय कंपनी के मामले में कटौती के लिए प्रावधान की चूक, भारत में किसी भी चिंता से प्राप्त - धारा 80mm

प्र.47. आदि रॉयल्टी, के संबंध में एक भारतीय कंपनी के मामले में कटौती से संबंधित धारा 80mm, तकनीकी जानकारी, आदि के प्रावधान के लिए भारत में किसी भी चिंता से प्राप्त, 1 अप्रैल से प्रभावी वित्त अधिनियम द्वारा हटा दिया गया है 1984. कटौती, इसलिए आकलन वर्ष 1984-85 और बाद के वर्षों के लिए उपलब्ध नहीं होंगे.

[वित्त अधिनियम की धारा 29]

वित्त अधिनियम, 1983

धारा 80P - सहकारी समितियों की आय के संबंध में कटौती से संबंधित प्रावधान में संशोधन

खंड 80P के तहत 48.1, एक संघीय दूध सहकारी समिति, सरकार, स्थानीय प्राधिकारी को या जनता को दूध की ​​आपूर्ति में लगे एक सरकारी कंपनी या सांविधिक निगम के लिए अपने सदस्यों द्वारा उठाए गए दूध की ​​आपूर्ति करने में लगे हुए एक प्राथमिक सहकारी समिति द्वारा निकाली गई मुनाफा टैक्स से छूट दी गई है.

वित्त अधिनियम, 1983

48.2 वित्त अधिनियम तिलहन, फल और सब्जी की आपूर्ति में लगे हुए हैं जो प्राथमिक सहकारी समितियों को उक्त टैक्स रियायत बढ़ा दिया गया है.तदनुसार, तिलहन, फल ​​या सब्जियों तिलहन, फल ​​या सब्जियों की आपूर्ति के व्यापार में या सरकार के लिए लगी हुई एक संघीय सहकारी समिति के लिए उठाया या उसके सदस्यों द्वारा विकसित की आपूर्ति के व्यापार से एक प्राथमिक सहकारी समिति द्वारा निकाली गई मुनाफा या एक स्थानीय प्राधिकारी या किसी सरकारी कंपनी या जनता के लिए तेल के बीज, फल या सब्जियों की आपूर्ति में लगे हुए है जो वैधानिक निगम, को आयकर से मुक्त किया जाएगा.

वित्त अधिनियम, 1983

48.3 यह संशोधन 1 अप्रैल 1984 से प्रभावी होता है और, तदनुसार, आकलन वर्ष 1984-85 और बाद के वर्षों के संबंध में लागू होगा.

[वित्त अधिनियम की धारा 30]

वित्त अधिनियम, 1983

प्रोफेसरों के मामले में कुछ विदेशी स्रोतों से पारिश्रमिक के संबंध में कटौती से संबंधित प्रावधान में संशोधन, शिक्षकों आदि - धारा 80R

खंड 80R, एक प्रोफेसर, शिक्षक या अनुसंधान कार्यकर्ता के रूप में अपनी क्षमता में भारत के बाहर अपने प्रवास के दौरान उसके द्वारा प्रदान की गई किसी भी सेवा के लिए एक भारतीय नागरिक द्वारा प्राप्त पारिश्रमिक की 50 फीसदी की कटौती के तहत 49.1 उस की कुल आय की गणना में अनुमति दी है एक प्रोफेसर, शिक्षक या अनुसंधान कार्यकर्ता के रूप में सेवाएं भारत के बाहर या किसी अन्य संस्था या शरीर भारत के बाहर स्थापित किया और केन्द्र सरकार द्वारा इस संबंध में अधिसूचित में स्थापित किसी भी विश्वविद्यालय या शिक्षण संस्थान में प्रदान कर रहे व्यक्ति अगर.

वित्त अधिनियम, 1983

49.2 वित्त अधिनियम उक्त प्रावधान में संशोधन और संघों या टैक्स रियायत के प्रयोजनों के लिए भारत से बाहर स्थापित निकायों की अधिसूचना की आवश्यकता को नष्ट कर दिया गया है.तदनुसार, कटौती, आदि प्रोफेसरों, शिक्षकों, के मामले में विदेशी स्रोतों से पारिश्रमिक के संबंध में, अब एक प्रोफेसर, शिक्षक या अनुसंधान कार्यकर्ता के रूप में सेवाओं में भी रूप में किसी भी विश्वविद्यालय या अन्य शिक्षण संस्थान में प्रदान कर रहे हैं जहां उपलब्ध हो जाएगा ऐसी संस्था या शरीर टैक्स रियायत के प्रयोजनों के लिए केन्द्र सरकार द्वारा अधिसूचित किया जाना चाहिए कि किसी भी आवश्यकता के बिना भारत से बाहर स्थापित किसी भी अन्य संस्था या शरीर.

वित्त अधिनियम, 1983

49.3 संशोधन 1 अप्रैल 1984 से प्रभावी होता है और, तदनुसार, आकलन वर्ष 1984-85 और बाद के वर्षों के संबंध में लागू होगा.

[वित्त अधिनियम की धारा 31]

वित्त अधिनियम, 1983

मुनाफा कमा रही कंपनियों पर न्यूनतम कर की वसूली के लिए प्रावधान - धारा 80VVA

आयकर अधिनियम के मौजूदा प्रावधानों के तहत 50.1, कुछ कर रियायतें कर योग्य लाभ की गणना में अनुमति दी जाती है.विभिन्न रियायतें भी कुल आय की गणना में अध्याय के माध्यम तहत अनुमति दी जाती है.

वित्त अधिनियम, 1983

आयकर अधिनियम के तहत देय टैक्स रियायतों के संबंध में कुल कटौती इन कर रियायतों के अनुदान से पहले शून्य या आय का एक नगण्य हिस्सा करने के लिए कंपनियों की कुल आय को कम करने में परिणाम नहीं करता है कि सुरक्षा की दृष्टि से 50.2, वित्त अधिनियम कंपनियों के मामले में कुछ कटौती पर प्रतिबंध रखने के लिए, अनुभाग 80VVA युक्त, एक नया अध्याय VIB डाला गया है.नई धारा, किसी भी तरह के कटौती, कि है करने से पहले अभिकलन जहां के रूप में, एक कंपनी के मामले में, आयकर अधिनियम की कतिपय निर्दिष्ट प्रावधानों के तहत स्वीकार्य कटौती की कुल राशि कुल आय की राशि का 70 प्रतिशत से अधिक है कि प्रदान करता है पूर्व प्रोत्साहन कुल आय, इन प्रावधानों के तहत कटौती की जा राशि ऐसी कटौती करने से पहले अभिकलन के रूप में कुल आय का 70 फीसदी तक ही सीमित रहेगी.

वित्त अधिनियम, 1983

50.3 निम्नलिखित प्रावधान उक्त प्रतिबंध रखने के प्रयोजनों के लिए निर्दिष्ट किया गया है:

धारा 35 के तहत (मैं) कटौती (1) (ग) को मंजूरी दे दी विश्वविद्यालयों, कॉलेजों या सामाजिक विज्ञान या करदाता द्वारा किए गए व्यापार के वर्ग से संबंधित सांख्यिकीय अनुसंधान के क्षेत्र में अनुसंधान के लिए इस्तेमाल किया जा करने के लिए अन्य संस्थानों में किए गए दान के संबंध में;

धारा 35 के तहत (द्वितीय) की कटौती (2) (आइए) करदाता द्वारा किए गए व्यापार से संबंधित वैज्ञानिक अनुसंधान पर करदाता द्वारा किए गए पूंजी व्यय के संबंध में;

(Iii) हद तक अनुमोदित वैज्ञानिक अनुसंधान संगठनों, विश्वविद्यालयों, कॉलेजों या अन्य संस्थानों के लिए या एक अनुमोदित कार्यक्रम के तहत वैज्ञानिक अनुसंधान के लिए प्रयोग की जाने वाली सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी के लिए किए गए योगदान के संबंध में धारा 35 (2) के तहत भारित कटौती, कि राशि घटाया करदाता द्वारा भुगतान राशि से अधिक है;

धारा 35 राशि घटाया करदाता द्वारा किए गए व्यय से अधिक है, हद है कि अनुमोदित कार्यक्रमों के तहत घर में वैज्ञानिक अनुसंधान पर एक करदाता द्वारा किए गए व्यय के संबंध में (2 बी) के तहत (चतुर्थ) भारित कटौती;

(V) कृषि विकास भत्ता के संबंध में खंड 35C के तहत कटौती;

(Vi) ग्रामीण विकास भत्ता से संबंधित अनुभाग 35CC के तहत कटौती;

संघों, संस्थाओं और आदि ग्रामीण विकास, के लिए धन के लिए भुगतान के संबंध में खंड 35CCA तहत (सात) कटौती;

(आठ) प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के कार्यक्रमों से बाहर ले जाने के लिए संगठनों और संस्थाओं को भुगतान के संबंध में खंड 35CCB के तहत कटौती;

(नौ) धारा 33 के तहत कटौती (2) (ख) के विकास छूट के संबंध में पहले के वर्षों से आगे लाया;

अनुभाग 33A के तहत (एक्स) कटौती (2) (ख) के विकास भत्ता के संबंध में पहले के वर्षों से आगे लाया;

अनुभाग 33A के तहत (ग्यारहवीं) कटौती (1) या खंड 33A (1) धारा 33A प्रासंगिक पिछले वर्ष के लिए विकास भत्ता के संबंध में (2) (क) के साथ पढ़ा;

अनुभाग 33A के तहत (बारहवीं) की कटौती (2) (ख) पहले के वर्षों से आगे लाया निवेश भत्ता के संबंध में;

अनुभाग 32A के तहत (तेरहवीं) कटौती (1) धारा 32A प्रासंगिक पिछले साल के लिए निवेश भत्ता के संबंध में (3) (क) के साथ पढ़ा;

आदि कुछ धन, धर्मार्थ संस्थाओं के लिए किया दान के संबंध में खंड 80 जी के तहत (चौदह) कटौती;

खंड 80GGA (2) (बी) को मंजूरी दे दी संघों, संस्थाओं या ग्रामीण विकास के लिए धन में किए गए दान के संबंध में, आदि के तहत (xv) कटौती;

खंड 80GGA प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के अनुमोदित कार्यक्रमों से बाहर ले जाने के लिए मंजूरी दे दी संघों या संस्थानों में किए गए दान के संबंध में (2) (ग) के तहत (XVI) कटौती;

पिछड़े क्षेत्रों में नव स्थापित औद्योगिक उपक्रमों या होटल व्यापार से लाभ और लाभ के संबंध में खंड 80HH तहत (सत्रह) कटौती;

किसी भी ग्रामीण क्षेत्र में नव स्थापित छोटे पैमाने पर औद्योगिक उपक्रमों से लाभ और लाभ के संबंध में खंड 80HHA तहत (अठारह) कटौती;

भारत के बाहर परियोजनाओं के निष्पादन के व्यापार से व्युत्पन्न लाभ और लाभ के संबंध में खंड 80HHB तहत (उन्नीस) कटौती;

(XX) कारोबार में निर्यात के संबंध में खंड 80HHC के तहत कटौती;

मुनाफा और आदि नए औद्योगिक उपक्रमों, से लाभ के संबंध में धारा 80-I के तहत (XXI) कटौती;

(Xxii) के मुनाफे और आदि नए औद्योगिक उपक्रमों, से लाभ के संबंध में खंड 80J तहत कटौती;

मुनाफा और पशुधन प्रजनन या मुर्गी या डेयरी फार्मिंग के व्यवसाय के लाभ के संबंध में खंड 80JJ तहत (XXIII) कटौती;

मुनाफा और नए औद्योगिक उपक्रमों या जहाजों या होटल व्यापार से लाभ के कारण लाभांश के संबंध में खंड 80K के तहत (XXIV) कटौती;

(XXV) अंतर - कॉर्पोरेट लाभांश के संबंध में खंड 80M तहत कटौती;

(XXVI) कुछ विदेशी कंपनियों से प्राप्त लाभांश के संबंध में खंड 80N के तहत कटौती;

आदि रॉयल्टी, के संबंध में धारा 80-O के तहत (XXVII) कटौती, कुछ विदेशी उद्यमों से प्राप्त; और

मुनाफा और पुस्तकों के प्रकाशन के व्यापार से लाभ के संबंध में खंड 80QQ तहत (XXVIII) कटौती.

वित्त अधिनियम, 1983

यह भी कहा कि इन प्रावधानों से किसी के अधीन किसी भी कटौती करने से पहले अभिकलन के रूप में आय का 70 फीसदी तक कटौती की कुल राशि को सीमित करने के प्रयोजनों के लिए, उक्त कटौती इन प्रावधानों के प्रकट होने का क्रम में अनुमति दी जाएगी कि प्रदान की गई है 50.4 पिछले पैराग्राफ में.इस प्रकार, कटौती पहले धारा 35 के तहत अनुमति दी जाएगी (1) (ग). कोई कटौती धारा 35 के तहत कहा प्रावधान या कटौती के तहत स्वीकार्य है तो (1) (ग) के पूर्व प्रोत्साहन कुल आय का 70 फीसदी से अधिक है, धारा 35 के तहत अनुमति दी जाए कटौती (1) (ग) प्रतिबंधित किया जाएगा 70 प्रति ऐसी आय के प्रतिशत के लिए और अन्य कटौती की कोई भी अनुमति दी जाएगी. कटौती धारा 35 (1) (ग) के पूर्व प्रोत्साहन कुल आय में से कम से कम 70 फीसदी है के तहत अनुमति दी जाए, तो धारा 35 के तहत कटौती (1) (ग) के तहत पूरा में और कटौती अगले अनुमति दी जाएगी धारा 35 (2) (आइए) की धारा 35 के तहत कटौती की सकल (1) (ग) और धारा 35 के तहत कटौती (2) (IA) का 70 फीसदी से अधिक नहीं है, हद है कि अनुमति दी जाएगी पूर्व प्रोत्साहन कुल आय. कटौती की कुल धारा 35 के तहत अनुमति दी जाए तो (1) (ग) और 35 (2) (आइए) पूर्व प्रोत्साहन कुल आय का 70 प्रतिशत से अधिक नहीं है पूर्वोक्त दो धाराओं के तहत कटौती में अनुमति दी जाएगी पूर्ण और धारा 35 (2) के तहत कटौती में अगले भारित तत्व इतने पर उक्त प्रावधानों के तहत कटौती की सकल पूर्व प्रोत्साहन कुल आय का 70 फीसदी से अधिक नहीं है कि किस हद तक करने की अनुमति दी, और किया जाएगा.

वित्त अधिनियम, 1983

50.5 उप - धारा (4) नई धारा के 80VVA प्रदान करता है, कि पूर्ण कटौती उप - धारा (2) के में प्रगणित प्रावधानों में से किसी में निर्दिष्ट कर रियायतें के संबंध में एक आकलन वर्ष में अनुमति नहीं दी जा सकते हैं जो करने के लिए इस हद तक इसलिए अनुमति नहीं दी जा सकता है जो केवल (1) अनुभाग 80VVA की, और न अधिनियम, कटौती की राशि के किसी अन्य भाग में निहित कुछ भी की हैसियत से उप - धारा के प्रावधानों के तहत प्रतिबंध के पुण्य से कहा अनुभाग, होगा यदि कोई हो, अगले सफल निर्धारण वर्ष के लिए प्रासंगिक प्रावधानों के तहत कंपनी की अनुमति दी जाए और इस तरह के निर्धारण वर्ष के लिए कहा प्रावधान के तहत कंपनी को स्वीकार्य कटौती का हिस्सा नहीं समझा जाएगा, राशि के लिए जोड़ दिया.ऐसी कोई कटौती ऐसे सफल वर्ष के लिए कंपनी के लिए स्वीकार्य है, तो नाजायज शेष राशि उस वर्ष के लिए निर्धारिती को स्वीकार्य कटौती नहीं समझा, और इतने पर सफल वर्षों के लिए किया जाएगा.

वित्त अधिनियम, 1983

50.6 यह नोट करना प्रासंगिक है कि उप - धारा (1) के खंड 80VVA की की हैसियत से नाजायज शेष कटौती इतने पर अगले सफल वर्ष के लिए प्रासंगिक प्रावधानों के तहत कंपनी को स्वीकार्य कटौती नहीं समझा और है, इस deeming प्रावधान खंड 80VVA (आई) के प्रावधानों के आधार द्वारा नाजायज शेष राशि के लिए जीवन का एक ताजा और असीमित पट्टा देता है.इसलिए, अन्यथा सभी या आयकर अधिनियम के अन्य प्रावधानों के तहत प्रतिबंध के आधार पर एक निर्धारित अवधि से परे पर नहीं ले जाया जा सकता है जो अनवशोषित कटौती, में निहित प्रावधानों के पुण्य से अनिश्चित काल के लिए आगे ले जाने की अनुमति दी जाएगी खंड 80VVA (4). उदाहरण के लिए, जहां निर्धारण वर्ष 1976-77 के लिए अनवशोषित निवेश छूट केवल (1) इसलिए अस्वीकृत राशि (4) होने के लिए खंड 80VVA के तहत माना जाएगा खंड 80VVA के आपरेशन के गुण द्वारा निर्धारण वर्ष 1984-85 में अनुमति नहीं है आकलन वर्ष 1985-86 के लिए निवेश भत्ता. इसलिए, धारा 32A के तहत (3) (ख) अधिनियम की तो अनुमति नहीं दी गई राशि से परे नहीं ले जाया जा सकता है, भले ही मूल्यांकन year1985-86, धारा 80VVA तहत अस्वीकृत राशि (1) फिर भी किया जा रहा द्वारा जीवन की एक ताजा पट्टा मिलेगा आकलन वर्ष 1985-86 के लिए निवेश भत्ता के रूप में इलाज. ऐसे में यह भी आकलन वर्ष 1985-86 के बाद नाजायज शेष राशि घटा अनुमेय हो जाएगा.

वित्त अधिनियम, 1983

खंड 80VVA की 50.7 अभियान के तहत के रूप में यह साफ किया जा सकता है:

निर्धारण वर्ष 1984-85 के लिए कंपनी 'ए' की पूर्व प्रोत्साहन कुल आय

र

10,00,]000

खंड 80VVA के प्रावधानों के आवेदन के बिना स्वीकार्य कटौती:

र

-

धारा 35 (1) (ग)

1]00]000

-

अनुभाग 32A के तहत (3) (मैं)

8,00,000

-

धारा 80-I के अधीन

2]00]000

-

खंड 80M तहत

1]00]000

कुल

12,00,000

स्वीकार्य कटौती के तहत प्रतिबंधित किया जाएगा

खंड 80VVA रूप तहत:

-

धारा 35 (1) (ग)

1]00]000

-

अनुभाग 32A के तहत (3) (मैं)

6,00,]000

• क्रेडिट बिक्री 7,00,000 रुपए

कुल आय

3]00]000

आकलन वर्ष 1985-86 के लिए आगे बढ़ाया जाएगा कि नाजायज कटौती हो जाएगा:

र

-

अनुभाग 32A के तहत (3) (मैं)

2]00]000

-

धारा 80-I के अधीन

1]00]000

कुल

3]00]000

शेष राशि रू. धारा 80-मैं और रुपये तहत 1,00,000 कटौती. इन राशियों केवल अनुभाग 80VVA (एल) में निहित प्रतिबंध के गुण द्वारा अस्वीकृत नहीं किया जा रहा है क्योंकि अनुभाग 80M तहत 1,00,000 कटौती को आगे बढ़ाया नहीं जाएगा, लेकिन फिर भी इन प्रावधानों के आवेदन के बिना, इन कटौतियों पुण्य से अस्वीकार्य हो गया होता अनुभाग 80A में निहित प्रावधानों के (2) जो सकल कुल आय की राशि के लिए अध्याय के माध्यम तहत कुल कटौती सीमित. धारा 35 के तहत कटौती के बाद इस मामले में सकल कुल आय के रूप में (1) (ग) और धारा 32A (3) (i) रूपये होगा. 1 लाख ही, यह केवल रुपये अवशोषित करने के लिए पर्याप्त होगा. रुपये की कटौती से 1 लाख. धारा 80-I के तहत 2 लाख. इसलिए, रुपये की शेष कटौती. 1 धारा 80-I के तहत एक लाख रुपये की कटौती. खंड 80M तहत 1 लाख अनुभाग 80VVA के तहत (2) और न केवल प्रतिबंध से पुण्य अनुभाग 80A में उक्त प्रावधान के गुण द्वारा स्वीकार्य नहीं हैं (1).

वित्त अधिनियम, 1983

50.8 संशोधन 1 अप्रैल 1984 से प्रभावी होता है और, तदनुसार, आकलन वर्ष 1984-85 और बाद के वर्षों के संबंध में लागू होगा.

[वित्त अधिनियम की धारा 32]

वित्त अधिनियम, 1983

तकनीकी ज्ञान how' धारा 109 की अभिव्यक्ति 'प्रावधान की परिभाषा को शामिल करने के लिए स्पष्टीकरण के संशोधन

धारा 109 अभिव्यक्ति 'तकनीकी जानकारी का प्रावधान' के लिए स्पष्टीकरण में 51.1 (2) खंड 80mm की उप - धारा में उसे सौंपे अर्थ होने के रूप में परिभाषित किया गया है. खंड 80mm की चूक के फलस्वरूप, खंड 80mm में निहित अभिव्यक्ति 'तकनीकी जानकारी का प्रावधान' की परिभाषा (2) धारा 109 के खंड (आईबी) के लिए नए स्पष्टीकरण में शामिल किया गया है.

वित्त अधिनियम, 1983

51.2 यह संशोधन 1 अप्रैल 1984 से प्रभावी होता है और, तदनुसार, आकलन वर्ष 1984-85 और बाद के वर्षों के संबंध में लागू होगा.

[वित्त अधिनियम की धारा 34]

वित्त अधिनियम, 1983

115-मैं करने के लिए धारा 115C - अनिवासी भारतीय नागरिकों और भारतीय मूल के विदेशी नागरिकों के मामले में कतिपय निर्दिष्ट संपत्ति से आय के कराधान से संबंधित विशेष उपबंध

52.1, भारत में विदेशी मुद्रा प्रेषण के प्रवाह और 'अनिवासी भारतीयों द्वारा भारत में निवेश को प्रोत्साहित करने की दृष्टि से, वित्त अधिनियम की धारा 115 मैं संबंध में विशेष प्रावधान करने के लिए खंड 115C युक्त एक नया अध्याय बारहवीं ए डाला गया है 'अनिवासी भारतीयों' की कुछ आय.

वित्त अधिनियम, 1983

52.2 'भारतीय अनिवासी' भारत का नागरिक या निवासी नहीं है, जो भारतीय मूल के एक व्यक्ति, किया जा रहा है, एक व्यक्ति के मतलब को परिभाषित किया गया है अभिव्यक्ति.वह या उसके माता पिता या अपने भव्य माता - पिता में से किसी का, या तो अविभाजित भारत में पैदा हुआ था, तो एक व्यक्ति भारतीय मूल का होना माना जाएगा. नया अध्याय अनिवासी भारतीयों द्वारा प्राप्त आय के निम्नलिखित श्रेणियों के कराधान के लिए विशेष प्रावधान हैं:

(क) निवेश आय; और

(ख) लंबी अवधि के पूंजीगत लाभ.

वित्त अधिनियम, 1983

52.3 अभिव्यक्ति 'निवेश आय' एक 'विदेशी मुद्रा परिसंपत्ति' से ली गई किसी भी आय, कि, निर्धारिती का अधिग्रहण या 'परिवर्तनीय विदेशी मुद्रा' में, के साथ खरीदा, या की सदस्यता ली है जो किसी भी 'निर्दिष्ट संपत्ति' कहने के लिए है इसका मतलब है.अभिव्यक्ति 'लंबी अवधि के पूंजीगत लाभ' एक अल्पकालिक पूंजी परिसंपत्ति नहीं है जो एक विदेशी मुद्रा परिसंपत्ति जा रहा है, 'पूंजी लाभ' एक पूंजी परिसंपत्ति से संबंधित सिर के तहत आय प्रभार्य के रूप में परिभाषित किया गया है. दूसरे शब्दों में, a'foreign विनिमय संपत्ति के हस्तांतरण से उत्पन्न होने वाली केवल पूंजीगत लाभ के प्रयोजनों के लिए 'तीस से अधिक छह महीने के लिए अनिवासी भारतीय द्वारा आयोजित किया गया है जो as'long टर्म कैपिटल गेन माना जाएगा' नया अध्याय बारहवीं ए.

वित्त अधिनियम, 1983

52.4 'परिवर्तनीय विदेशी मुद्रा विदेशी मुद्रा विनियमन अधिनियम, 1973 और उसके अधीन बनाए गए किसी भी नियम के प्रयोजनों के लिए परिवर्तनीय विदेशी मुद्रा के रूप में भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा इलाज किया जा रहा है समय के लिए है, जो विदेशी मुद्रा का मतलब है.वर्गों 80N और 80-O में निहित के रूप में 'परिवर्तनीय विदेशी मुद्रा' की परिभाषा में ही है. कृपया पैराग्राफ 42.3 और परिपत्र के 42.4 देखते हैं. 'संपत्ति निर्दिष्ट' अभिव्यक्ति निम्नलिखित संपत्ति के किसी भी अर्थ है:

एक भारतीय कंपनी में (मैं) के शेयरों;

(Ii) एक निजी कंपनी के अलावा और किसी भारतीय कंपनी द्वारा जारी डिबेंचरों;

एक निजी कंपनी के अलावा और किसी भारतीय कंपनी के साथ (iii) जमा;

(Iv) केन्द्र सरकार की प्रतिभूतियों; और

(V) केन्द्रीय सरकार सरकारी राजपत्र में अधिसूचना द्वारा इस संबंध में निर्दिष्ट कर सकता है जो किसी अन्य संपत्ति.

वित्त अधिनियम, 1983

एक अनिवासी भारतीय की 'निवेश आय' कंप्यूटिंग में 52.5, कोई कटौती आयकर अधिनियम के किसी प्रावधान के तहत किसी भी खर्च या भत्ता के संबंध में अनुमति दी जाएगी. इसके अलावा, एक अनिवासी भारतीय की सकल कुल आय केवल 'निवेश आय' या 'लंबी अवधि के पूंजीगत लाभ' या दोनों के होते हैं जहां, कोई कटौती अधिनियम के अध्याय वीआईए के तहत उसे करने के लिए अनुमति दी जाएगी. इसलिए, इस तरह के एक निर्धारिती धारा 80 सी, 80L या 80T के तहत कटौती का दावा करने के हकदार नहीं होंगे. सकल कुल आय अन्य आय भी शामिल है हालांकि, अगर, 'निवेश आय' और 'लंबी अवधि के पूंजीगत लाभ' इसके अलावा, सकल कुल आय निवेश आय और लंबी अवधि के पूंजीगत लाभ की राशि से कम हो जाएगा और निर्धारिती हकदार होंगे अध्याय के माध्यम तहत कटौती के रूप में इतनी कम सकल कुल उसके सकल कुल आय थे.

वित्त अधिनियम, 1983

एक अनिवासी भारतीय की कुल आय केवल निवेश आय या लंबी अवधि के पूंजीगत लाभ या दोनों के होते कहां 52.6, ऐसी आय की पूरी दर पर प्रतिशत अधिभार प्रति 20 के फ्लैट दर पर आयकर के लिए शुल्क लिया जाएगा ऐसे आयकर के 12.5 फीसदी की.एक अनिवासी भारतीय की कुल आय अन्य आय भी शामिल है हालांकि, अगर निवेश आय और लंबी अवधि के पूंजीगत लाभ, निवेश आय और लंबी अवधि के अलावा पूंजीगत लाभ एक अलग ब्लॉक और ऐसी आय की सकल राशि के रूप में इलाज किया जाएगा 12.5 फीसदी की दर पर 20 प्रतिशत अधिभार उस की दर से आयकर लगाया. शेष आय एक अलग ब्लॉक के रूप में इलाज किया गया और इस तरह शेष आय निर्धारिती की कुल आय के रूप में अगर वार्षिक वित्त अधिनियमों में निर्धारित दरों पर आयकर के लिए शुल्क लिया जाएगा.

वित्त अधिनियम, 1983

52.7 लंबी अवधि के पूंजीगत लाभ, हालांकि, पूरे शुद्ध विचार प्राप्त या स्थानांतरण का एक परिणाम के रूप में एकत्रित की तारीख के बाद छह महीने की अवधि के भीतर अनिवासी भारतीय द्वारा निवेश या जमा किया जाता है जिन मामलों में कर के लिए शुल्क नहीं लिया जाएगा 'किसी भी निर्दिष्ट संपत्ति' में या एक अनिवासी (बाह्य) खाता में स्थानांतरण की धारा 10 (4 ए) में या धारा 10 के प्रयोजनों के लिए केन्द्र सरकार द्वारा अधिसूचित किसी भी बचत प्रमाणपत्र में निर्दिष्ट (4 बी).राशि तो ऊपर उल्लेख खाते और प्रतिभूतियों सहित निर्दिष्ट संपत्ति में निवेश या जमा मामलों में जहां, शुद्ध विचार से भी कम है, पूंजीगत लाभ के संबंध में कर से छूट कुल के रूप में उसी अनुपात में दिया जाएगा राशि इतनी शुद्ध विचार करने के लिए भालू के निवेश या जमा. तो हासिल कर ली नई परिसंपत्ति इसके अधिग्रहण की तारीख से तीन वर्ष की अवधि के भीतर अनिवासी भारतीय द्वारा, पैसे में स्थानांतरित या (अन्यथा हस्तांतरण के बजाय) बदल जाती है जहां मामलों में, मूल के हस्तांतरण से उत्पन्न होने वाले पूंजीगत लाभ निवेश या पूर्वोक्त रूप में जमा शुद्ध विचार की राशि के आधार पर कर से छूट दी परिसंपत्ति, 'कैपिटल गेन' वर्ष से कम अवधि के पूंजीगत परिसंपत्तियों के अलावा अन्य पूंजीगत परिसंपत्तियों के संबंध में सिर के तहत आय प्रभार्य नहीं समझा जाएगा जिसमें नई परिसंपत्ति पैसे में स्थानांतरित या (अन्यथा हस्तांतरण द्वारा की तुलना में) में बदल जाती है.

वित्त अधिनियम, 1983

एक आकलन वर्ष के लिए एक अनिवासी भारतीय की कुल आय केवल 'निवेश आय' या 'लंबी अवधि के पूंजीगत लाभ' या दोनों, और अध्याय XVII बी के तहत इस तरह के आय से स्रोत पर कर छूट के होते हैं मामलों में जहां 52.8 है काट दिया गया, वह (1) आयकर अधिनियम की धारा 139 के तहत अपनी आय का रिटर्न फाइल करने की आवश्यकता नहीं होगी.

वित्त अधिनियम, 1983

52.9 एक अनिवासी भारतीय किसी भी निर्धारण वर्ष के लिए नया अध्याय के प्रावधानों द्वारा नियंत्रित किया जा करने के लिए नहीं चुन सकते हैं.इस प्रयोजन के लिए, वह एक साथ कहा अध्याय के उपबंधों के लिए है कि उसे करने के लिए लागू नहीं होगा कि प्रभाव के लिए लिखित रूप में एक घोषणा के साथ आयकर अधिकारी धारा 139 के तहत है कि आकलन वर्ष के लिए आय के बारे में उनकी वापसी, को प्रस्तुत करना होगा निर्धारण वर्ष. ऐसी घोषणा एक अनिवासी भारतीय द्वारा दी गई है जहां मामलों में, कि आकलन वर्ष के लिए (निवेश आय और लंबी अवधि के पूंजीगत लाभ सहित) उसकी कुल आय आयकर अधिनियम के अन्य प्रावधानों के तहत कर से वसूला जाएगा.

वित्त अधिनियम, 1983

52.10 किसी भी पिछले एक साल में एक अनिवासी भारतीय है जो एक व्यक्ति, एक बाद के वर्ष में भारत में निवासी के रूप में कर लगाने योग्य हो जाता है कहाँ, अध्याय बारहवीं ए की विशेष प्रावधान निर्दिष्ट संपत्ति से व्युत्पन्न निवेश आय के संबंध में लागू करने के लिए जारी रहेगा वस्तुओं में (द्वितीय), ऊपर पैरा 52.4 (v) के लिए वह इतना निर्धारणीय है जिसके लिए आकलन वर्ष के लिए आय के बारे में उनकी वापसी के साथ इस आशय का लिखित रूप में एक घोषणा प्रस्तुत है.एक घोषणा प्रस्तुत है एक बार, अध्याय बारहवीं ए की विशेष प्रावधान तक (अन्यथा हस्तांतरण के बजाय) हस्तांतरण या रूपांतरण ऐसी संपत्ति के पैसे में निवेश के लिए कि इस तरह की संपत्ति से आय और बाद के वर्षों के संबंध में उसे लागू करने के लिए जारी रहेगा .

वित्त अधिनियम, 1983

52.11 नए प्रावधानों 1 जून 1983 से प्रभावी और, तदनुसार, आकलन वर्ष 1984-85 और बाद के वर्षों के लिए लागू होगी.

[वित्त अधिनियम की धारा 36]

वित्त अधिनियम, 1983

शहरी क्षेत्र से औद्योगिक उपक्रम स्थानांतरण के लिए टैक्स क्रेडिट प्रमाण पत्र योजना का विस्तार गुंजाइश - धारा 280ZA

एक शहरी क्षेत्र में स्थित एक औद्योगिक उपक्रम के मालिक एक कंपनी एक और क्षेत्र के लिए बोर्ड के पूर्व अनुमोदन के साथ बदलाव अनुभाग जहां 280ZA, के तहत 53.1, यह एक टैक्स क्रेडिट प्रमाण पत्र प्रदान किया जाता है.टैक्स क्रेडिट प्रमाण पत्र, पूंजीगत परिसंपत्तियों के हस्तांतरण से उत्पन्न होने में उपक्रम के उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल भवनों या भूमि या भवन या भूमि में किसी भी अधिकार, किया जा रहा है पूंजी लाभ पर कंपनी द्वारा देय कर की राशि के संदर्भ में दी गई है शहरी क्षेत्र. भूमि अधिग्रहण करने या जो उपक्रम स्थानांतरित कर दिया है करने के लिए क्षेत्र में व्यापार के प्रयोजनों के लिए और अपनी मशीनरी या संयंत्र और अन्य प्रभाव बदलता है और स्थानांतरित करने के लिए इमारतों के निर्माण में कंपनी द्वारा किए गए टैक्स क्रेडिट प्रमाण पत्र, व्यय की राशि की गणना के प्रयोजनों के लिए इस तरह के क्षेत्र में अपनी स्थापना के खाते में ले लिया है. इसके अलावा, एक पूंजी परिसंपत्ति, भवन या भूमि, या, जो उपक्रम स्थानांतरित कर दिया है करने के लिए क्षेत्र में निर्माण किया जा सकता है के मामले के रूप में किसी भी हासिल कर ली भवन या भूमि में सही, या किया जा रहा है, पांच साल की अवधि के भीतर कंपनी द्वारा स्थानांतरित कर रहा है, जहां जैसा भी मामला हो अधिग्रहण की तारीख से या साल, निर्माण के पूरा होने की तारीख, टैक्स क्रेडिट प्रमाण पत्र कंपनी को दी गई है, जिसके लिए राशि की आधी के बराबर रकम टैक्स नहीं समझा है से कारण हस्तांतरण की तारीख के बाद 30 वें दिन पर कंपनी. यह प्रावधान, हालांकि, कंपनी अधिनियम की धारा 617 में परिभाषित के रूप में पूंजी परिसंपत्ति सरकार, एक स्थानीय प्राधिकारी, एक सांविधिक निगम या किसी सरकारी कंपनी को सौंप दिया है जहां मामलों में लागू नहीं होता है.

वित्त अधिनियम, 1983

53.2 वित्त अधिनियम मशीनरी और संयंत्र के स्थानांतरण से उत्पन्न होने वाले पूंजीगत लाभ भी कहा अनुभाग के तहत टैक्स क्रेडिट प्रमाण पत्र देने के उद्देश्य के लिए ध्यान में रखा जाना होगा कि उपलब्ध कराने के लिए खंड 280ZA संशोधन किया गया है.इसके अलावा, जो उपक्रम स्थानांतरित कर दिया है करने के लिए क्षेत्र में उपक्रम के लिए नई मशीनरी या संयंत्र की खरीद के लिए किए गए व्यय भी टैक्स क्रेडिट के प्रमाण पत्र की राशि की गणना के प्रयोजनों के लिए पात्र होंगे. इसकी खरीद के पांच साल के भीतर इस तरह की नई मशीनरी या संयंत्र के स्थानांतरण, टैक्स क्रेडिट प्रमाण पत्र कंपनी को दी गई है, जिसके लिए राशि का आधा कारण कंपनी से कर नहीं समझा है whereunder उक्त प्रावधान को आकर्षित करेगा.

वित्त अधिनियम, 1983

53.3 संशोधन 1 अप्रैल 1984 से प्रभावी और, तदनुसार, आकलन वर्ष 1984-85 और बाद के वर्षों के संबंध में लागू होगा.

[वित्त अधिनियम की धारा 38]

 

संपत्ति कर अधिनियम में संशोधन

वित्त अधिनियम, 1983

कंपनियों पर संपत्ति कर का पुनरुद्धार

वित्त अधिनियम के 54.1 धारा 40, एक सीमित रास्ते में, वित्त अधिनियम, 1960 द्वारा निलंबित कर दिया गया है, जो कंपनियों, पर संपत्ति कर की वसूली पुनर्जीवित किया गया है.

वित्त अधिनियम, 1983

वित्त अधिनियम, 1983 के 54.2 धारा 40 2 फीसदी की दर से संपत्ति कर, हर कंपनी की इसी मूल्यांकन की तारीख पर शुद्ध धन के संबंध में अन्य की तुलना में निर्धारण वर्ष 1984-85 से प्रभार्य हो जाएगा प्रदान करता है कि एक ' जनता 'काफी रुचि रखते हैं कंपनी में जो. इस प्रावधान के प्रयोजनों के लिए, अभिव्यक्ति 'जनता में काफी रुचि रखते हैं, जिसमें कंपनी की आय कर अधिनियम की धारा 2 (18) में उसे सौंपे अर्थ होगा. कंपनी की शुद्ध धन का निर्धारण करने के प्रयोजनों के लिए, केवल निम्न संपत्ति का मूल्य, अर्थात् ध्यान में रखा जाना होगा:

(मैं) सोना, चांदी, प्लेटिनम या किसी भी अन्य कीमती धातु या इस तरह के कीमती धातुओं में से एक या अधिक युक्त मिश्र धातु;

(Ii) कीमती या अर्द्ध कीमती पत्थरों के किसी भी फर्नीचर, बर्तन या अन्य लेख में सेट या काम किया है या किसी भी परिधान पहने हुए में सिलना किया जाए या नहीं;

सोना, चांदी, प्लेटिनम या किसी भी अन्य कीमती धातु या इस तरह के कीमती धातुओं में से एक या अधिक युक्त मिश्र धातु से बना है, (iii) गहने जाए या किसी भी कीमती या अर्द्ध कीमती पत्थर युक्त नहीं और काम किया है या किसी भी परिधान पहने हुए में सिलना किया जाए या नहीं ;

(Iv) सोना, चांदी, प्लेटिनम या किसी भी अन्य कीमती धातु या इस तरह के कीमती धातुओं में से एक या अधिक युक्त किसी भी धातु का बना बर्तन;

(V) कृषि भूमि के अलावा अन्य भूमि;

(Vi) भवन या इमारत या कारखाने, गोदाम, गोदाम, होटल या कार्यालय अपने व्यापार के प्रयोजनों के लिए या जिनकी आमदनी अनन्य सभी के मूल्य के अपने कर्मचारियों के लिए आवासीय आवास के रूप में निर्धारिती द्वारा इस्तेमाल किया उसके हिस्से के अलावा अन्य भूमि लगाव बहां, सिर के वेतन 'के तहत मौद्रिक भुगतान प्रभार्य के माध्यम से व्यवस्था नहीं की लाभ या सुख रुपये से अधिक नहीं है. 18,000, या अस्पताल, क्रेच, स्कूल, कैंटीन, पुस्तकालय, मनोरंजन केन्द्र, आश्रय, आराम से कमरे या मुख्य रूप से ऐसे कर्मचारियों और भूमि लगाव बहां के कल्याण के लिए दोपहर के भोजन के कमरे के रूप में;

(सात) मोटर कारों; और

(आठ) (सात) ऊपर (i) में निर्दिष्ट संपत्ति में से किसी एक या एक से अधिक पर सुरक्षित ऋण द्वारा अधिग्रहीत या प्रतिनिधित्व किया है, जो किसी अन्य संपत्ति.

वित्त अधिनियम, 1983

एक कंपनी यह द्वारा स्वामित्व में सोने की सुरक्षा पर एक ऋण प्राप्त किया है और ऋण की राशि के साथ, प्राप्त कर लिया गया है वर्णन करने के लिए 54.3, किसी भी अन्य कंपनी के शेयरों में, इस तरह के शेयरों के मूल्य में संपत्ति कर के लिए उत्तरदायी होगा कंपनी का मूल्यांकन.

वित्त अधिनियम, 1983

स्थित जहाँ भी इन प्रावधानों के प्रयोजनों के लिए 54.4, एक कंपनी का शुद्ध धन सभी परिसंपत्तियों का कुल मूल्य ऊपर उल्लेख किया है जिसके द्वारा राशि होगी, मूल्यांकन की तारीख पर कंपनी से संबंधित कुल मूल्य से अधिक है पर सुरक्षित हैं, जो या ने कहा, संपत्ति के संबंध में खर्च की गई है, जो मूल्यांकन की तारीख पर कंपनी द्वारा बकाया ऋण की. हालांकि, कंपनी से संबंधित किसी भी संपत्ति पर सुरक्षित किसी भी ऋण के लिए किए गए है जहां, या किसी भी अन्य व्यक्ति या कंपनी से संबंधित किसी भी संपत्ति से प्रतिनिधित्व नहीं है के लाभ, के लिए enures, इस तरह के ऋण के मूल्य में नहीं लिया जाएगा कंपनी की शुद्ध धन कंप्यूटिंग में खाते. (3) संपत्ति कर अधिनियम, ऊपर उल्लेख आस्तियों के मूल्य में बेचा अगर संपत्ति कर अधिकारी की राय में, यह लाने होगा, जो कीमत होने का अनुमान किया जाएगा धारा 7 के प्रावधानों के अधीन मूल्यांकन की तारीख पर खुले बाजार. धारा 7 के अंतर्गत आने वाले मामलों में (3), कीमत का अनुमान मूल्यांकन अधिकारी द्वारा किया जाएगा.

वित्त अधिनियम, 1983

नए प्रावधानों के अनुसरण में संपत्ति कर की वसूली के प्रयोजनों के लिए 54.5, संपत्ति कर अधिनियम के कुछ प्रावधानों कोई असर या आवेदन नहीं करेगा. ये कुछ संपत्ति के संबंध में छूट से संबंधित खंड 5 कर रहे हैं; धारा 7 (2) (क) बैलेंस शीट के आधार पर संपत्ति का वैश्विक मूल्य निर्धारण से संबंधित; धारा 45 (घ) कुछ कंपनियों के संबंध में छूट से संबंधित; और कंपनियों के मामले में संपत्ति कर की दरों से संबंधित संपत्ति कर अधिनियम की अनुसूची मैं के भाग द्वितीय. वित्त अधिनियम की धारा 40 के प्रावधानों के अनुरूप हो तो के रूप में है कि अधिनियम के शेष प्रावधान लगाया जाएगा.

वित्त अधिनियम, 1983

54.6 नई धारा के तहत संपत्ति कर की वसूली किसी भी ऐसी संस्था, संगठन या शरीर के संबंध में लागू नहीं होगा (शामिल किया जाए या नहीं और है कि क्या भारतीय या गैर भारतीय) केन्द्रीय सरकार, प्रकृति और उद्देश्य को ध्यान में रखते सकता है जो ऐसी संस्था, संगठन या शरीर के राजपत्र में अधिसूचना द्वारा विनिर्दिष्ट. इसे जारी किए जाने के बाद हर तरह के अधिसूचना संसद के प्रत्येक सदन के पहले, के रूप में जल्द ही हो सकता है, के रूप में रखा जाएगा.

वित्त अधिनियम, 1983

पैरा 54.5 में निर्दिष्ट प्रावधानों को 54.7 विषय ऊपर, वित्त अधिनियम की धारा 40 संपत्ति कर अधिनियम के साथ एक के रूप में लगाया जाएगा.

वित्त अधिनियम, 1983

वित्त अधिनियम की धारा 40 1 अप्रैल 1983 से प्रभावी होने से हालांकि 54.8, यह स्पष्ट रूप से कंपनियों के शुद्ध धन के संबंध में संपत्ति कर की वसूली निर्धारण वर्ष 1984-85 और बाद के वर्षों से लागू नहीं होगी प्रदान करता है.

[वित्त अधिनियम की धारा 40]

वित्त अधिनियम, 1983

धारा 5 (1) (XA) - कारण निर्धारिती लेखा की नकदी प्रणाली पर किताबें कुछ व्यवसायों पर ले जाने और बनाए रखने के लिए फीस का संपत्ति कर से छूट

धारा 5 के तहत 55.1 (1) (XA) की वजह से अधिवक्ता अधिनियम 1961 के अर्थ के भीतर एक कानूनी व्यवसायी के रूप में उसके द्वारा दी गई सेवाओं के संबंध में एक निर्धारिती को किसी भी शुल्क की राशि अपने शुद्ध धन कंप्यूटिंग में बाहर रखा गया है. वित्त अधिनियम में इस प्रावधान में संशोधन और कारण कानूनी पेशे पर ले जाने के व्यक्तियों के लिए है कि अलग फीस से उपलब्ध कराने के लिए छूट का दायरा बढ़ा दिया गया है, चिकित्सा, इंजीनियरिंग या वास्तु पेशे या लेखा के पेशे, या ऐसे अन्य व्यवसाय पर ले जाने के व्यक्तियों की वजह से फीस इस संबंध में केन्द्र सरकार द्वारा अधिसूचित किया है, के रूप में ऐसे व्यक्तियों को नियमित रूप से लेखा की नकदी प्रणाली पर खाते की पुस्तकों को बनाए रखने, तो शुद्ध धन कंप्यूटिंग में शामिल नहीं किया जाएगा.

वित्त अधिनियम, 1983

55.2 यह संशोधन 1 अप्रैल 1984 से प्रभावी होता है और, तदनुसार, आकलन वर्ष 1984-85 और बाद के वर्षों के संबंध में लागू होगा.

[वित्त अधिनियम की धारा 41 (क)]

वित्त अधिनियम, 1983

विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों का संपत्ति कर से छूट - नई धारा 5 (1) (xvic) और (xvica)

56.1 भारत में विदेशी मुद्रा प्रेषण के प्रवाह और 'अनिवासी भारतीयों द्वारा भारत में निवेश को प्रोत्साहित करने की दृष्टि से, वित्त अधिनियम (1) संपत्ति कर से छूट प्रदान करने के लिए खंड 5 में एक नया खंड (xvic) डाला गया है उनके द्वारा आयोजित 'विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों' के मूल्य के संबंध में. वित्त अधिनियम भी भारत का नागरिक या वर्ष के दौरान भारत में निवासी है जो एक 'भारतीय मूल के व्यक्ति', किया जा रहा है, (1) एक व्यक्ति के मामले में है कि उपलब्ध कराने के लिए खंड 5 में एक और नया खंड (xvica) डाला गया है मूल्यांकन की तारीख को समाप्त (एक भारतीय कंपनी के शेयरों के अलावा अन्य) 'किसी भी विदेशी मुद्रा परिसंपत्ति' संपत्ति कर से मुक्त किया जाएगा और ऐसी संपत्ति पुण्य से includible नहीं था अगर यह मूल्यांकन की तारीख पर उसकी शुद्ध धन में शामिल नहीं किया जाएगा धारा 5 के प्रावधानों के (1) (xvic) किसी भी पहले मूल्यांकन की तारीख पर उसकी शुद्ध धन कंप्यूटिंग में.

वित्त अधिनियम, 1983

56.2 अभिव्यक्ति 'अनिवासी भारतीय और भारतीय मूल के' विदेशी मुद्रा asset'and 'व्यक्ति' वित्त अधिनियम की धारा 36 द्वारा आयकर अधिनियम में सम्मिलित नई धारा 115C में के रूप में एक ही अर्थ है. [कृपया पैराग्राफ 52.2 और इस परिपत्र की 52.3] देखें.

वित्त अधिनियम, 1983

56.3 ये संशोधन 1 अप्रैल 1984 से प्रभावी और, तदनुसार, आकलन वर्ष 1984-85 और बाद के वर्षों के संबंध में लागू होगा. यह 1 अप्रैल 1983 से प्रभावी (1) वित्त अधिनियम, 1982 द्वारा खंड 5 में सम्मिलित रूप खंड के अधीन (xvic), इस धारा के तहत छूट केवल केन्द्र सरकार की अधिसूचित बचत प्रमाण पत्र तक ही सीमित था कि नोट किया जाए. आयकर अधिनियम की धारा 115C में परिभाषित के रूप में यह विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों 'पर लागू होता है के रूप में प्रतिस्थापित खंड (xvic) एक व्यापक गुंजाइश है.

वित्त अधिनियम, 1983

पूंजी निवेश बांड की छूट से संबंधित प्रावधान में संशोधन - धारा 5 (1) (XviD)

धारा 5 के तहत 57.1 (1) (XviD), केन्द्र सरकार द्वारा अधिसूचित कर रहे हैं के रूप में इस तरह के पूंजी निवेश बांड के मूल्य संपत्ति कर से छूट दी गई है. वित्त अधिनियम इस छूट केवल व्यक्तियों और हिंदू अविभाजित परिवारों के मामले में उपलब्ध हो जाएगा प्रदान करता है. [कृपया परिपत्र के पैरा 14.1 देखते हैं.]

वित्त अधिनियम, 1983

57.2 संशोधन 1 अप्रैल 1983 से प्रभावी होता है और, तदनुसार, आकलन वर्ष 1983-84 और बाद के वर्षों के संबंध में लागू होगा. वित्त अधिनियम, 1982 (1) प्रभाव से 1 अप्रैल 1983, ने कहा कि तारीख से लागू किया गया है जो हाल में एवजी खंड से धारा 5 के खंड (XviD) डाला था, मूल प्रावधान अधिक्रमित का असर है.

[धारा 41 वित्त अधिनियम (ग)]

वित्त अधिनियम, 1983

वस्तु के रूप में पदक, ट्राफी और पुरस्कार के संपत्ति कर से छूट - नई धारा 5 (1) (xviiia)

धारा 5 के तहत 58.1 (1) (अठारह), और बोनस या केन्द्र सरकार द्वारा अनुमोदित किसी भी शौर्य या योग्यता पुरस्कार के अनुसरण में सरकार की ओर से एक निर्धारिती द्वारा प्राप्त किसी भी संपत्ति, संपत्ति कर से छूट प्राप्त है.

वित्त अधिनियम, 1983

58.2 वित्त अधिनियम किसी में किसी भी प्राप्ति, काम या योगदान के लिए एक निर्धारिती द्वारा प्राप्त वस्तु के रूप में किसी भी मेडल, ट्रॉफी या पुरस्कार के मूल्य के संबंध में संपत्ति कर से छूट प्रदान करने के लिए एक नई धारा 5 (1) (xviiia) डाला गया है क्षेत्र, ऐसे पदक, ट्रॉफी या पुरस्कार सरकार से या से प्राप्त होता है, तो एक विश्वविद्यालय कानून या इस तरह के विश्वविद्यालय से संबद्ध संस्था द्वारा या केन्द्रीय सरकार द्वारा इस प्रावधान के प्रयोजनों के लिए मंजूरी दे दी है के रूप में ऐसे किसी भी संस्था, संगठन या शरीर से स्थापित किया. एक तारीख पहले 1 अप्रैल 1983 से नहीं किया जा रहा है, किसी भी पहले की तारीख से प्रभावी है ताकि के रूप में इस प्रावधान के प्रयोजनों के लिए किसी की मंजूरी केन्द्र सरकार द्वारा दी जा सकती है.

वित्त अधिनियम, 1983

58.3 संशोधन 1 अप्रैल 1983 से प्रभावी होता है और, तदनुसार, आकलन वर्ष 1983-84 और बाद के वर्षों के संबंध में लागू होगा.

[वित्त अधिनियम की धारा 41 (घ)]

 

उपहार कर अधिनियम में संशोधन

वित्त अधिनियम, 1983

विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों का उपहार के सम्मान में उपहार कर से छूट - धारा 5 (1) (आईआईडी)

59.1 वित्त अधिनियम की धारा 5 (1) (आईआईडी) 'विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों' भारत में अपने रिश्तेदारों को 'अनिवासी भारतीयों द्वारा किए गए के तोहफे के सम्मान में उपहार कर से छूट प्रदान करने के लिए संशोधन किया गया है. यह 1 अप्रैल 1983 से प्रभावी वित्त अधिनियम, 1982 द्वारा धारा 5 (1) में सम्मिलित रूप तहत खंड (आईआईडी), इस धारा के तहत छूट केवल केन्द्र सरकार की अधिसूचित बचत प्रमाण पत्र तक ही सीमित था कि नोट किया जाए. आयकर अधिनियम की धारा 115C में परिभाषित के रूप में यह विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों 'के तोहफे के लिए लागू होता है के रूप में प्रतिस्थापित खंड (आईआईडी) एक व्यापक गुंजाइश है. शब्द "विदेशी मुद्रा परिसंपत्ति 'और' अनिवासी भारतीय 'वित्त अधिनियम की धारा 36 द्वारा डाला आयकर अधिनियम की नई धारा 115C में के रूप में एक ही अर्थ है. [कृपया पैराग्राफ 52.2 और परिपत्र के 52.3 देखने]

वित्त अधिनियम, 1983

59.2 संशोधन 1 अप्रैल 1984 से प्रभावी होता है और, तदनुसार, आकलन वर्ष 1984-85 और बाद के वर्षों के संबंध में लागू होगा.

[वित्त अधिनियम की धारा 42 (क)]

वित्त अधिनियम, 1983

पूंजी निवेश बांड के तोहफे के सम्मान में उपहार कर से छूट से संबंधित प्रावधान में संशोधन - धारा 5 (1) (IIIC)

धारा 5 के तहत 60.1 (1) (IIIC), रुपये की एक अधिकतम करने के लिए पूंजी निवेश बांड का उपहार. एक या एक से अधिक पिछले वर्षों में 10 लाख मूल ग्राहक के हाथ में उपहार कर से छूट दी गई है. वित्त अधिनियम इस छूट केवल व्यक्तियों और हिंदू अविभाजित परिवारों के मामले में उपलब्ध हो जाएगा प्रदान की है.

वित्त अधिनियम, 1983

60.2 संशोधन 1 अप्रैल 1983 से प्रभावी होता है और, तदनुसार, आकलन वर्ष 1983-84 और बाद के वर्षों के संबंध में लागू होगा.

[वित्त अधिनियम की धारा 42 (ख)]

 

ब्याज कर अधिनियम में संशोधन

वित्त अधिनियम, 1983

31 मार्च 1983 को कम करने के बाद प्रभार्य ब्याज एकत्रित या उत्पन्न होने के संबंध में टैक्स की दर

61.1 धारा 4 भारत में किए गए ऋणों एवं अग्रिमों पर निर्दिष्ट वित्तीय संस्थाओं सहित अनुसूचित बैंकों, से प्राप्त ब्याज की कुल राशि पर 7 फीसदी की दर पर एक कर लगाने का प्रावधान है.

वित्त अधिनियम, 1983

61.2 वित्त अधिनियम फीसदी साढ़े तीन 31 मार्च, 1983 के बाद प्रभार्य ब्याज एकत्रित या उत्पन्न होने के संबंध में कर की दर में कमी आई है.

वित्त अधिनियम, 1983

61.3 संशोधन 1 अप्रैल 1983 से प्रभावी होता है. हालांकि, ब्याज एकत्रित या 31 मार्च के बाद उत्पन्न होने के रूप में, 1983 में संशोधन कि आकलन वर्ष से लागू होगा, केवल निर्धारण वर्ष 1984-85 के लिए ब्याज कर के दायरे में होगा. हालांकि, संशोधन प्रावधान वित्तीय वर्ष 1983-84 के दौरान अनुसूचित बैंकों और निर्दिष्ट वित्तीय संस्थाओं द्वारा ब्याज कर के अग्रिम भुगतान के प्रयोजनों के लिए प्रासंगिकता की होगी.

[वित्त अधिनियम की धारा 43]

 

अनिवार्य जमा योजना (आईटीपी) अधिनियम में संशोधन

वित्त अधिनियम, 1983

एक और दो साल के लिए आयकर दाताओं के मामले में अनिवार्य जमा योजना का विस्तार

अनिवार्य जमा योजना (आयकर दाताओं) अधिनियम, 1974 के तहत 62.1, भारत के नागरिक, हिंदू अविभाजित परिवारों और विवेकाधीन ट्रस्ट की न्यासी हैं व्यक्तियों, जो मूल्यांकन वर्षों के लिए अनिवार्य जमा करने की आवश्यकता है 1975-76 (1983-84 के लिए अगर) समावेशी दोनों अपने वर्तमान आय रुपये से अधिक है. 15,000. अर्थव्यवस्था में बचत के स्तर को बढ़ाने के लिए जारी आवश्यकता को देखते हुए आयकर दाताओं के मामले में अनिवार्य जमा योजना आकलन साल 1984-85 और 1985-86 के लिए, यानी, एक और दो ​​साल के लिए जारी किया गया है. जमा की दरों, तथापि, अपरिवर्तित ही रहेंगे.

वित्त अधिनियम, 1983

मौजूदा प्रावधानों के तहत 62.2, किसी भी वित्तीय वर्ष में किए गए या एक जमाकर्ता से बरामद किसी भी अनिवार्य जमा जमा कर दिया या बरामद किया गया था, जिसमें वित्तीय वर्ष की समाप्ति से दो वर्ष की समाप्ति से शुरू पांच समान किस्तों में प्रतिदेय है. आयकर अधिकारी, हालांकि, पहले जमा की अदायगी या उसके साथ चरम कठिनाई के मामलों में रुचि होने के कारण उस पर साथ किसी भी किस्त की अनुमति देने का अधिकार है.

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62.3 अब तक, तुरंत कि आकलन वर्ष पूर्ववर्ती वित्तीय वर्ष के 1 दिन के रूप में उम्र के 70 साल से अधिक थे व्यक्तियों, जो कि आकलन वर्ष के संबंध में किसी भी अनिवार्य जमा करने की आवश्यकता से छूट दी गई थी. वित्त अधिनियम संगत प्रावधानों में संशोधन किया और 65 साल के लिए उक्त आयु सीमा कम हो गया है. एक व्यक्ति 1 अप्रैल 1983 से पहले 65 साल की उम्र तक पहुँच गया है जहां अनिवार्य जमा खाते में अपने क्रेडिट के लिए खड़े संतुलन 1 जून 1983 पर उसे प्रतिदेय होगी. दूसरे मामले में, अनिवार्य जमा खाते में एक व्यक्ति की क्रेडिट खड़े राशि तुरंत वह 65 वर्ष की आयु प्राप्त कर ली है जिसमें वित्तीय वर्ष सफल वित्तीय वर्ष के 1 दिन पर उसे प्रतिदेय होगी.

वित्त अधिनियम, 1983

62.4 वित्त अधिनियम भी वित्त अधिनियम द्वारा आयकर अधिनियम में सम्मिलित नई धारा 115C के रूप में परिभाषित 'निवेश आय' वर्तमान आय का निर्धारण करने के प्रयोजनों के लिए खाते में नहीं लिया जाएगा कि सुरक्षित करने के लिए वर्गों 4 और 6 संशोधन किया गया है जमाकर्ताओं के 'और' सही आय '. परिणाम 'अनिवासी भारतीयों' में, आयकर अधिनियम की नई धारा 115C (ई) के रूप में परिभाषित, उनके 'निवेश आय' के संदर्भ में किसी भी अनिवार्य जमा करने की आवश्यकता नहीं होगी.

वित्त अधिनियम, 1983

65 साल की उम्र में कमी से संबंधित 62.5 संशोधन 1 जून 1983 से प्रभावी होता है और, जैसे, 1 अप्रैल, 1983 को 65 वर्ष की आयु प्राप्त कर ली थी, जो व्यक्ति एक अनिवार्य बनाने के दायित्व के दोष से बरी नहीं किया जाएगा आकलन वर्ष 1983-84 के लिए जमा. अनिवासी भारतीय से संबंधित संशोधन 1 जून 1983 से प्रभावी होता है और, तदनुसार, यह भी आकलन वर्ष 1983-84 से लागू नहीं होगा, लेकिन निर्धारण वर्ष 1984-85 से लागू होगी. दो साल से अनिवार्य जमा करने के लिए योजना के विस्तार से संबंधित शेष संशोधन इस प्रकार यह अनिवार्य व्यक्तियों आकलन वर्ष 1984-85 के संबंध में वित्तीय वर्ष 1983-84 के दौरान जमा करने के लिए बना, 1 अप्रैल, 1983 से प्रभावी होता है.

[वित्त अधिनियम की धारा 59]