347 : परिपत्र: सं 347, 07-07-1982 दिनांकित
परिपत्र सं.
347
परिपत्र की तिथि
07/07/1982
दस्तावेज़ अपलोड की तिथि
07/07/1982
727. पुस्तक प्रकाशन कंपनी - चाहे कंपनी अनुभाग 104 के अर्थ के भीतर वस्तुओं के निर्माण या प्रसंस्करण में लगी कंपनी के रूप में इलाज किया जा उत्तीर्ण (4) (क)
1बोर्ड पुस्तकों के प्रकाशन में लगी कंपनियों अनुभाग 104 के प्रयोजन के लिए औद्योगिक कंपनियों के रूप में व्यवहार किया जाना चाहिए कि अभ्यावेदन प्राप्त हुआ है. संदर्भ भारत की वाणिज्यिक कानून वी. सी आई टी के मामलों में मद्रास और कलकत्ता उच्च न्यायालय के निर्णय (पी.) को इस संबंध में किया गया हैलिमिटेड [1977] 107 आईटीआर 822 और अपर.सीआईटी वी. ए मुखर्जी एंड कंपनी (पी.) लिमिटेड [1978] 113 क्रमशः आईटीआर 718,. मद्रास उच्च न्यायालय के निर्णय में यह तह और मुद्रित शीट सिलाई और जैसा भी मामला हो, भागों या पुस्तकों में उन्हें बदलने, माल के प्रसंस्करण का गठन किया कि आयोजित किया गया है. कलकत्ता उच्च न्यायालय के निर्णय में यह एक प्रिंटिंग प्रेस के एक मालिक होने के लिए या पुस्तकों के एक निर्माता होने के लिए एक किताब बांधने की मशीन खुद होने के लिए पुस्तकों के एक प्रकाशक के लिए पूरी तरह अनावश्यक है कि आयोजित किया गया था. एक प्रकाशक किसी भी प्रिंटर से मुद्रित किताबें मिल सकता है, लेकिन प्रिंटर एक मात्र ठेकेदार है और प्रकाशक विनिर्माण और माल के प्रसंस्करण के कारोबार पर किया जाता है.
प्र.20. बोर्ड इन फैसलों को स्वीकार करने की सलाह दी गई है. विचार में क्या है, वे खुद छपाई में लगे हुए या पुस्तकों के बंधन नहीं किया जा सकता है, भले ही पुस्तक प्रकाशन कंपनियों औद्योगिक कंपनियों को दिए गए रियायती कर उपचार के लिए खंड 104 के रूप में अच्छी तरह से करने के प्रयोजन के लिए औद्योगिक कंपनियों के रूप में इलाज किया जा करने के लिए योग्य.
परिपत्र: सं 347 [एफ सं 166/4/81-IT (एआई)], 1982/07/07 दिनांकित.
न्यायिक विश्लेषण
Rashron भारी इंजीनियरिंग में - में विस्तार से बताया.(पी.) लिमिटेड इतो [1992] 43 वी. आईटीडी 355 (Ahd. -. ट्राई बी), यह सीबीडीटी के सर्कुलर नं 347, 1982/07/07 दिनांकित, स्पष्ट रूप से बोर्ड स्वीकार कर लिया है कि नीचे देता है कि मनाया गया देखें कुछ में व्यक्त यह निर्धारिती ही निर्माण की पूरी गतिविधियों पर ले जाने के लिए और इस तरह की गतिविधि निर्धारिती की देखरेख में अन्य इकाइयों की सहायता से किया जाता है, तो यह काफी है कि होना चाहिए कि जरूरी नहीं है कि इस आशय का निर्णय.
Ackrow इंडिया लिमिटेड वी. सीआईटी में - में समझाया [1991] 188 आईटीआर 485 (Bom.), ऊपर परिपत्र निम्नलिखित टिप्पणियों के साथ भेजा गया था:
"... इस मामले फैसला करते समय, हमारे उच्च न्यायालय इस मामले में करने के लिए भेजा और अपर में विशेष रूप से अपने फैसले कलकत्ता उच्च न्यायालय के कई फैसलों पर भरोसा किया.सीआईटी वी. AM मुखर्जी एंड कंपनी (पी.) लिमिटेड [1978] 113 आईटीआर 718 (Cal.). कलकत्ता मामले में, निर्धारिती कंपनी प्रकाशन की पुस्तकों के व्यवसाय को आगे बढ़ाया. यह एक प्रिंटिंग प्रेस के मालिक नहीं था, हालांकि निर्धारिती एक निर्माण या औद्योगिक कंपनी थी कि कलकत्ता उच्च न्यायालय द्वारा आयोजित की और इसे कहीं और मुद्रित पुस्तकों मिला था. 7 जुलाई 1982 दिनांकित अपने सर्कुलर नंबर 347, से, केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड के ऊपर भेजा निर्णय स्वीकार किए जाते हैं. एक भी मामले में, निर्धारिती कारखाने में अपने कर्मचारियों को नियुक्त और उनकी मजदूरी का भुगतान करके निर्माण की प्रक्रिया पर प्रत्यक्ष पर्यवेक्षण व्यायाम कर सकते हैं. एक अन्य मामले में, निर्धारिती ठेकेदार को लिखित निर्देश जारी करके और चित्र और विशिष्टताओं की आपूर्ति और समय - समय पर निर्माण की प्रक्रिया का निरीक्षण द्वारा समान पर्यवेक्षण व्यायाम कर सकते हैं. एक मामले के तथ्यों से ऊपर भेजा मामले के तथ्यों के साथ समान नहीं हैं, हालांकि पदार्थ में, प्रासंगिक परीक्षण संतुष्ट हो जाता है. "(पी. 489)
में समझाया - ऊपर परिपत्र Rashron भारी इंजीनियरिंग में पर भरोसा किया था.(पी.) लिमिटेड वी. आईटीओ [1992] 43 निम्नलिखित टिप्पणियों के साथ आईटीडी 355 (Ahd.),:
"... 1982/07/07 दिनांकित सीबीडीटी नं 347, के परिपत्र स्पष्ट बोर्ड यह निर्धारिती ही निर्माण की पूरी गतिविधियों पर ले जाना चाहिए कि जरूरी नहीं है कि प्रभाव के लिए और है कि कुछ फैसलों में व्यक्त देखें स्वीकार किया था कि नीचे देता है यह इस तरह की गतिविधि निर्धारिती की देखरेख में अन्य इकाइयों की सहायता के साथ पर ले गया था अगर पर्याप्त है. . . मैं थाली झुकने मशीन के निर्माण के निर्धारिती की गतिविधि औद्योगिक कंपनी और रियायती दर का दावा लाभ की स्थिति का दावा निर्धारिती समर्थ बनाना होगा मुख्य परियोजना निर्माण के तहत अभी भी था कि तथ्य अप्रासंगिक था कि पकड़ और कहा कि पूरे हालात पर विचार टैक्स. निर्धारिती भी अन्य शर्तों को पूरा कर रहे हैं, तो धारा 80-I के तहत कटौती का दावा करने के हकदार थे. . . . "(पी. 358)
में समझाया - ऊपर परिपत्र मिर्च में भेजा गया था हाउस लिमिटेड वी. एक्सपोर्ट्स सीआईटी [1997] 225 आईटीआर 814 (एससी).सुप्रीम कोर्ट ने कहा:
"हमें पहले से आग्रह किया कि प्रतिद्वंद्वी दलीलों पर सुनवाई, यह विभिन्न पहलुओं उस में अपने मुख्य निर्णय गाया के रूप में जब भी केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड के परिपत्र मद्रास उच्च न्यायालय के लिए उपलब्ध नहीं थे hereinabove को adverted निर्णयों में प्रकाश डाला है कि स्पष्ट है अपर.सीआईटी वी. मिर्च निर्यात हाउस लिमिटेड [1978] 115 आईटीआर 73. निर्धारिती माल के प्रसंस्करण के कारोबार पर ले जा रहा था कि क्या करने के रूप में अंतिम निष्कर्ष के मामले में उपलब्ध सभी प्रासंगिक सामग्री पर विचार करने पर निर्भर करेगी. . . . "(पी. 824)
में समझाया - ऊपर परिपत्र Gulabchand जैन वी. में भेजा गया था विश्व व्यापार संगठन [1983] 17 TTJ (Jab.)489. ट्रिब्यूनल ने कहा:
"2. यह हमारे सामने निर्धारिती एक प्रकाशक था लेकिन वह अपनी खुद की एक प्रेस के मालिक नहीं था कि प्रस्तुत किया गया है. वह दूसरों के द्वारा मुद्रित पुस्तकों रही द्वारा अपने स्वयं के व्यवसाय के आयोजन, तथापि, था. संदर्भ ए में कलकत्ता उच्च न्यायालय के मामले को बनाया गया था मुखर्जी एंड कंपनी (पी.) लिमिटेड [1978] 113 आईटीआर 718 (Cal.). इस मामले में यह यह एक प्रिंटिंग प्रेस के एक मालिक होने के लिए या पुस्तकों के एक निर्माता होने के लिए एक किताब बांधने की मशीन खुद होने के लिए पुस्तकों के एक प्रकाशक के लिए पूरी तरह अनावश्यक था कि आयोजित किया गया था. एक प्रकाशक किताबें किसी भी प्रिंटर से मुद्रित हो सकता है, लेकिन प्रिंटर एक मात्र ठेकेदार के रूप में काम करता है और प्रकाशक विनिर्माण और माल के प्रसंस्करण के कारोबार पर किया जाता है. यह निर्णय 1982/07/07 दिनांकित बोर्ड ख़बरदार सर्कुलर नंबर 347 से स्वीकार कर लिया गया.इस आईटी अधिनियम के तहत एक औद्योगिक उपक्रम के रूप में एक कंपनी के इलाज के लिए किया गया था हालांकि, स्थिति गुम्मट के कानून के तहत ही होगा. इसी प्रकार देखें स्पेशल द्वारा लिया गया था. 1977-78 की डब्ल्यूटीए नग 340-341 (80 ITJP 296 (sic.) "(पी. में बेंच490)

