आयकर विभाग

वित्त मंत्रालय, भारत सरकार

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परिपत्र सं.

308

परिपत्र की तिथि

29/06/1981

दस्तावेज़ अपलोड की तिथि

29/06/1981

परिपत्र सं. 308, 29-6-1981 दिनांकित
वित्त अधिनियम, 1981 - परिपत्र सं. 308, 29-6-1981 दिनांक

1981 वित्त अधिनियम

एक नज़र में संशोधन

धारा / अनुसूची

विवरण

वित्त अधिनियम

2 और 1 Sch.

दर संरचना 3-5

आयकर अधिनियम

10A

मुक्त व्यापार क्षेत्र 6 में स्थित औद्योगिक इकाइयों के लिए कर अवकाश

16 (क) और

मामले में स्वीकार्य मानक कटौती की स्थापना

इसके Prov. (मैं)

वेतनभोगी करदाताओं 7 की

32A (2),

में एक "छोटे पैमाने पर औद्योगिक उपक्रम" की परिभाषा

[Expln. (2)]

औद्योगिक नीति 8 के बयान के अनुसरण

80HHA,

[Expln. (ख)]

33A (7), Prov.

विकास भत्ता 9 से संबंधित प्रावधान के उदारीकरण

36 (1) (आठ)

अनुमोदित वित्तीय निगमों और सार्वजनिक आवास वित्त कंपनियों को 10 के मामले में विशेष आरक्षित करने के लिए स्थानांतरित कर मुनाफे के संबंध में कटौती के कुल की मात्रा में वृद्धि

42 (उद्घाटन

विदेशी कंपनियों को कर रियायत पूर्वेक्षण में लगे

पैरा) Prov.

, या निकासी या के उत्पादन, खनिज तेल या प्राकृतिक गैस के लिए

खंड (ख),

भारत 11 में

Expln. 293A

80 डी (2)

विकलांग आश्रितों 12 पर चिकित्सा खर्च के संबंध में कटौती की मात्रा में वृद्धि

80M (1) (क)

नौवीं अनुसूची 13 में इलेक्ट्रॉनिक उद्योग के कुछ क्षेत्रों का समावेश

80QQ (1), (2)

पुस्तक प्रकाशन उद्योग से 14 टैक्स रियायतों का एक्सटेंशन

86 (वी) (Expln.),

के माध्यम से कर परिहार प्रतिक्रिया करने के लिए प्रावधान

167A

शेयर विनिर्देशों 15 बिना व्यक्तियों की कई संघों का माध्यम

160 (1) (v) और

के माध्यम से कर परिहार प्रतिक्रिया करने के लिए प्रावधान

Expln., 164A

मौखिक ट्रस्टों 16 का निर्माण

208 (2) (ग)

कुछ मामलों में अग्रिम कर के भुगतान के लिए सीमा की स्थापना 17

252 (2) / (2),

अपीलीय न्यायाधिकरण के सदस्यों की योग्यता और

253 (6), 256 (1),

ट्रिब्यूनल में अपील के लिए संबंधित मामलों / वृद्धि फीस

269C (1)

और उच्च न्यायालय 18 के संदर्भ में आवेदन

11 वीं अनुसूची.

लेख या कम प्राथमिकता की बातें वर्गों 32A के प्रयोजनों के लिए और 80CC 19 की सूची

संपत्ति कर अधिनियम

21 (1) (Expln.),

कर परिहार के लिए खामियों को दूर करने के उपाय

227 ohms प्राप्त मूल्य है और हम निकटतम स्तर वाला प्रतिरोध यानि 220 ohms का उपयोग कर सकते हैं।

(4) / Expln. 2,

मौखिक ट्रस्टों 20 का माध्यम

(4 ए)

21AA, 41 (4)

सदस्यों के शेयरों अनिश्चित या 21 अज्ञात हैं जिसमें व्यक्तियों के संघों के माध्यम से कर परिहार के लिए खामियों को दूर करने के उपाय

24 (4), 26 (2),

अपीलीय के लिए अपील के संबंध में फीस की वृद्धि

27 (1)

ट्रिब्यूनल और उच्च न्यायालय के 22 के संदर्भ में आवेदन

उपहार कर अधिनियम

23 (4),

अपीलीय के लिए अपील के संबंध में फीस की वृद्धि

25 (2), 26 (1)

ट्रिब्यूनल और उच्च न्यायालय के 23 के संदर्भ में आवेदन

अधिकर अधिनियम

7 दिन, 9A को 7A

अग्रिम का भुगतान 24 अधिकर

12 (6)

अपीलीय न्यायाधिकरण से 25 अपीलों के संबंध में फीस का भुगतान

24AA

विदेशी कंपनियों के लिए कर रियायतें भारत 26 में खनिज तेल, के, या निकासी या उत्पादन के लिए पूर्वेक्षण में लगे

Expln. शासन करने के लिए

लाभांश का बहिष्कार, रॉयल्टी, आदि 27

1 Sch के 1.

ब्याज कर अधिनियम

16 (6)

अपीलीय न्यायाधिकरण 28 को अपील के संबंध में शुल्क का भुगतान

होटल प्राप्ति कर अधिनियम

19 (6)

अपीलीय न्यायाधिकरण 29 को अपील के संबंध में शुल्क का भुगतान

अनिवार्य जमा योजना (आयकर दाताओं) अधिनियम

3 (1), 4 (1) (ग)

एक और दो साल के लिए 30 आयकर दाताओं के मामले में अनिवार्य जमा योजना का विस्तार

8 (1 ए)

अनिवार्य जमा का पुनर्भुगतान 30.2

दर - संरचना

वित्त अधिनियम, 1981

निर्धारण वर्ष 1981-82 के लिए आयकर की दरें

3.1 निर्धारण वर्ष निर्धारिती की सभी श्रेणियों के मामले में 1981-82 के लिए आयकर की दरों (कॉर्पोरेट और साथ ही गैर कॉर्पोरेट) वित्त अधिनियम की प्रथम अनुसूची के भाग I में निर्दिष्ट हैं. इन दरों "एडवांस टैक्स" की गणना के प्रयोजनों के लिए वित्त (नं. 2) अधिनियम, 1980 की प्रथम अनुसूची के भाग III में निर्दिष्ट उन लोगों के रूप में वही कर रहे हैं, "वेतन" और देय सेवानिवृत्ति वार्षिकियां से स्रोत पर कर की कटौती निर्दिष्ट व्यवसायों और त्वरित आकलन वित्तीय वर्ष 1980-81 के दौरान किए जाने के लिए आवश्यक थे, जहां कुछ मामलों में देय कर की गणना में लगे पंजीकृत फर्मों के भागीदारों के लिए.

वित्त अधिनियम, 1981

3.2 अतीत में के रूप में, वित्त अधिनियम व्यक्तियों, हिंदू अविभाजित परिवार, अपंजीकृत फर्म या व्यक्ति या व्यक्तियों और कृत्रिम न्यायिक व्यक्ति के शव की अन्य संघों के मामले में, नेट कृषि आय दरों का निर्धारण करने के लिए ध्यान में रखा जाना जाएगा कि प्रदान करता है आकलन वर्ष के लिए कर के लिए उत्तरदायी आय पर आयकर की 1981-82 [(2) वित्त अधिनियम की धारा 2]. ऐसे मामलों में शुद्ध कृषि आय की गणना के मोड वित्त अधिनियम की प्रथम अनुसूची के भाग IV में निर्धारित है. इस परिपत्र के पैरा 5.4 में विस्तार में इन प्रावधानों कुछ मामूली संशोधनों के लिए छोड़कर व्यावहारिक रूप से वित्त (नं. 2) अधिनियम, 1980 में निहित उन लोगों के रूप में ही हैं.

वित्त अधिनियम, 1981

"वेतन" के अलावा अन्य आय से वित्तीय वर्ष 1981-82 के दौरान स्रोत और "सेवानिवृत्ति वार्षिकियां" पर आयकर की कटौती के लिए दरें

(4) "वेतन" और निर्दिष्ट व्यवसायों में लगे पंजीकृत फर्मों के भागीदारों को देय "सेवानिवृत्ति वार्षिकियां" के अलावा अन्य आय से वित्तीय वर्ष 1981-82 के दौरान स्रोत पर आयकर की कटौती के लिए दरों, प्रथम द्वितीय भाग में निर्दिष्ट किया गया है वित्त अधिनियम को अनुसूची. इन दरों प्रतिभूतियों, ब्याज, लाभांश, बीमा कमीशन, लॉटरी और पहेली पहेली, घोड़ा दौड़ से जीता और अनिवासियों के गैर वेतन आय के अन्य विभाग से जीत की अन्य श्रेणियों पर ब्याज के रूप में आय के लिए लागू होते हैं. इस परिपत्र में बाद में बताया गया है, कॉर्पोरेट करदाताओं के मामले में आयकर पर अधिभार की दर आयकर का 2.5 प्रतिशत करने के लिए 7.5 प्रतिशत से कम हो गया है. नतीजतन, वित्तीय वर्ष 1981-82 के दौरान स्रोत पर आयकर की कटौती के लिए दरों में स्रोत पर कर की कटौती के प्रयोजनों के लिए वित्त (नं. 2) अधिनियम, 1980 की प्रथम अनुसूची के भाग द्वितीय में निर्दिष्ट दरों से अलग नीचे की व्याख्या के रूप में वित्तीय वर्ष कुछ मामलों में 1980-81 के दौरान इस तरह की आय से:

1 घरेलू कंपनियों के लिए भुगतान - (i) "प्रतिभूतियों पर ब्याज" के अलावा और ब्याज के संबंध में एक घरेलू कंपनी को देय, वित्तीय वर्ष 1981-82 के दौरान कटौती की दर 20 प्रति पर आयकर से बना प्रतिशत 20.5 हो जाएगा 0.5 फीसदी (आयकर का 2.5 फीसदी) में प्रतिशत, और अधिभार.

(Ii) किसी अन्य आय के संबंध में (एक कर मुक्त सुरक्षा पर देय ब्याज को छोड़कर), कर की तुलना में 0.5 फीसदी फीसदी और अधिभार प्रति 21.5 पर आयकर से बना 22 फीसदी की दर से घटाया होगा 23 प्रतिशत अब तक.

प्र.20. 31 मार्च 1961 के बाद किए गए एक समझौते के अनुसरण में एक भारतीय चिंता से देय लेकिन 1 अप्रैल 1976 से पहले भारतीय चिंता का विषय है और केन्द्र सरकार ने मंजूरी दे दी साथ रॉयल्टी के माध्यम से आय के मामले में विदेशी कंपनियों (मैं) के लिए भुगतान, आयकर ऐसी आय से स्रोत पर प्रतिशत घटाया प्रति 53.75 की तुलना में प्रतिशत और 1.25 प्रतिशत (आयकर फीसदी किया जा रहा है 2.5) का सरचार्ज 50 प्रतिशत का आयकर से बना प्रतिशत 51.25 की दर से कटौती की जाएगी वित्तीय वर्ष 1980-81 के दौरान.

(Ii) इसी प्रकार, 29 फ़रवरी 1964 के बाद किए गए एक समझौते के तहत एक भारतीय चिंता से देय तकनीकी सेवाओं के लिए शुल्क के माध्यम से आय के मामले में, लेकिन 1 अप्रैल से पहले, 1976 और केन्द्र सरकार ने मंजूरी दे दी, आयकर कटौती की जाएगी वित्तीय वर्ष 1980-81 के दौरान स्रोत फीसदी घटाया प्रति 53.75 के मुकाबले 50 फीसदी और 1.25 फीसदी (आयकर फीसदी किया जा रहा है 2.5) के अधिभार का आयकर से बना प्रतिशत 51.25 की दर से.

(Iii) घरेलू कंपनियों द्वारा या रॉयल्टी या तकनीकी सेवा के माध्यम से 31 मार्च 1976 या आय से बाद किए गए समझौते के तहत भारतीय चिंताओं से देय कॉपीराइट रॉयल्टी से देय लाभांश से स्रोत पर आयकर की कटौती के लिए दरों में कोई बदलाव नहीं हुआ है उस तारीख के बाद बनाया अनुमोदित समझौतों के अनुसरण में भारतीय चिंताओं से देय फीस.

(Iv) वित्तीय वर्ष 1981-82 के दौरान विदेशी कंपनियों को देय किसी भी अन्य आय के मामले में आयकर फीसदी और 1.75 प्रति की अधिभार प्रति 70 का आयकर से बना प्रतिशत 71.75 की दर से कटौती की जाएगी प्रतिशत वित्तीय वर्ष 1980-81 के दौरान स्रोत फीसदी घटाया प्रति 75.25 की तुलना में (आयकर का 2.5 फीसदी किया जा रहा है).

(3) गैर कॉर्पोरेट निवासी करदाताओं के लिए भुगतान - केन्द्रीय या राज्य सरकार (एक कर मुक्त सुरक्षा पर ब्याज न हो) या डिबेंचर या द्वारा या ओर से जारी किए गए अन्य प्रतिभूतियों पर ब्याज द्वारा जारी प्रतिभूतियों पर ब्याज के रूप में आय के मामले में एक स्थानीय प्राधिकारी या ऐसे डिबेंचर वित्तीय वर्ष 1981-82 के दौरान (कंपनियों के अलावा) निवासी करदाताओं को देय भारत में किसी मान्यता प्राप्त स्टॉक एक्सचेंज में सूचीबद्ध हैं जहां कंपनियों द्वारा जारी डिबेंचरों पर एक सांविधिक निगम या ब्याज की, टैक्स कटौती करने के लिए जारी रहेगा 10 फीसदी की दर से. अन्य प्रतिभूतियों (एक कर मुक्त सुरक्षा पर ब्याज न हो) या वित्तीय वर्ष 1981-82 के दौरान (कंपनियों के अलावा) निवासी करदाताओं को देय लाभांश पर ब्याज के मामले में आयकर, हालांकि, दर में कटौती योग्य होगा 20 फीसदी और 2 फीसदी का अधिभार की बुनियादी आयकर से बना 22 प्रतिशत की. यह टैक्स 1 प्रतिशत से वित्तीय वर्ष 1981-82 के दौरान इस तरह की आय से घटाया था जिस दर से कम है. यह परिवर्तन घरेलू को देय लाभांश से स्रोत पर आयकर छूट के मामले में के रूप में एक ही दर पर (कंपनियों के अलावा) निवासी करदाता को देय लाभांश से स्रोत पर आयकर की कटौती के लिए उपलब्ध कराने की दृष्टि से किया गया है 22 फीसदी तक कम खड़ा है जो कंपनियों.

वित्त अधिनियम, 1981

"वेतन", वित्तीय वर्ष 1981-82 के दौरान "एडवांस टैक्स" और विशेष मामलों में आयकर का चार्ज की गणना से स्रोत पर कर की कटौती के लिए दरें

वित्तीय वर्ष 1981-82 के दौरान और निर्धारिती की सभी श्रेणियों के मामले में उस वर्ष के दौरान देय "एडवांस टैक्स" की गणना के लिए व्यक्तियों के मामले में "वेतन" से स्रोत पर आयकर की कटौती के लिए 5.1 दरों निर्दिष्ट किया गया है वित्त अधिनियम की प्रथम अनुसूची के भाग III में. इन दरों वित्तीय वर्ष आदि चार्टर्ड एकाउंटेंट, वकील, वकीलों, के रूप में पेशेवर सेवाएं प्रदान जो पंजीकृत फर्मों के भागीदारों को देय सेवानिवृत्ति वार्षिकियां से 1981-82 के दौरान स्रोत पर भी आयकर की कटौती के लिए लागू कर रहे हैं, और आयकर चार्ज करने के लिए त्वरित आकलन किया जाना है, जहां विशेष मामलों में वर्तमान आय पर वित्तीय वर्ष 1981-82 के दौरान. ये विशेष मामलों हैं:

- जब्त संपत्ति के प्रतिनिधित्व वाले अघोषित आय पर आयकर की गणना [धारा 132 (5)].

- भारतीय बंदरगाहों से माल या यात्रियों की शिपिंग से गैर निवासियों की आय पर प्रोविजनल आधार पर कर की वसूली [धारा 172 (4)].

- भारत छोड़ने व्यक्तियों के आकलन [धारा 174 (2)].

- टैक्स [धारा 175] से बचने के लिए संपत्ति के हस्तांतरण की संभावना व्यक्तियों का आकलन.

- एक बंद व्यापार या पेशे के लाभ का आकलन [धारा 176 (2)].

ये दरें कुछ संशोधनों के लिए छोड़कर निर्धारण वर्ष 1981-82 के लिए कर के लिए उत्तरदायी आय के आकलन के लिए वित्त अधिनियम की प्रथम अनुसूची के भाग I में निर्दिष्ट उन लोगों के रूप में वही कर रहे हैं. वित्त अधिनियम की धारा 2 के साथ पढ़ा दर अनुसूची में संशोधन, निम्नलिखित मामलों से संबंधित हैं: -

1 रुपये से छूट की सीमा की स्थापना. रुपये के लिए 12,000. व्यक्तियों के मामले में 15,000, आदि (एक या अधिक सदस्यों को अलग आय से अधिक रुपये. 15,000 होने के साथ उन लोगों की तुलना में अन्य) हिंदू अविभाजित परिवार, अपंजीकृत फर्मों,

प्र.20. व्यक्तियों के लिए लागू दर अनुसूची में संशोधन, आदि, अपंजीकृत कंपनियों, व्यक्तियों के संघों, (छूट सीमा से अधिक अलग आय होने के एक या अधिक सदस्यों के साथ उन लोगों की तुलना में अन्य) हिंदू अविभाजित परिवार

(3) 2.5 प्रतिशत 7.5 प्रतिशत से सभी कॉर्पोरेट निर्धारिती के मामले में सरचार्ज की दर में कमी.

(4) निर्धारिती कुल आय के अतिरिक्त किसी भी शुद्ध कृषि आय है जिन मामलों में आयकर की गणना के लिए प्रावधान में संशोधन.

उपरोक्त मामलों के संबंध में संशोधनों पैराग्राफ इस परिपत्र की 5.2-5.4 में समझाया जाता है.

वित्त अधिनियम, 1981

छूट की सीमा 5.2 स्थापना - व्यक्तियों के मामले में छूट की सीमा, (अलग आय रुपये से अधिक 15,000 होने में एक या अधिक सदस्यों के साथ उन लोगों की तुलना में अन्य.) हिंदू अविभाजित परिवार, अपंजीकृत कंपनियों, व्यक्तियों के संगठनों, व्यक्तियों और कृत्रिम न्यायिक के शव व्यक्तियों रुपये से उठाया गया है. रुपये के लिए 12,000. 15,000. यह निर्धारिती के इन वर्गों के मामले में शून्य दर स्लैब भी रुपये करने के लिए उठाया गया है कि नोट किया जाए. 15,000. छूट सीमा से अधिक अलग आय होने के एक या अधिक सदस्यों के साथ हिंदू अविभाजित परिवारों के मामले में छूट की सीमा, हालांकि, रुपये के वर्तमान स्तर पर बनाए रखा गया है. 12,000.

वित्त अधिनियम, 1981

दर अनुसूची में 5.3 संशोधन - व्यक्तियों के मामले में लागू दर अनुसूची, (छूट सीमा से अधिक अलग आय होने के एक या अधिक सदस्यों के साथ उन लोगों की तुलना में अन्य) हिंदू अविभाजित परिवार, अपंजीकृत फर्मों, आदि व्यक्तियों के संघों, कर दिया गया है संशोधित. आय से पूर्व मौजूदा तीसरे और चौथे स्लैब, अर्थात्, रुपये. 15,000 - रुपये. 20,000 रु. 20,001 - रुपये. 25,000 मिला दिया गया है और टैक्स लागू बहां की दर क्रमश: 18 फीसदी और 25 फीसदी के मुकाबले 30 फीसदी तय किया गया है. इसके अलावा, आय रुपये के स्लैब पर लागू कर की दर. 25,001 - रुपये. 30,000 34 फीसदी से 30 फीसदी से तेज कर दी गई है. आय के बाद स्लैब पर लागू कर की दरें, तथापि, अपरिवर्तित बनी हुई है. गैर कॉर्पोरेट निर्धारिती की सभी श्रेणियों के लिए लागू आयकर पर अधिभार की दर 10 फीसदी पर अपरिवर्तित रखा गया है.

वित्त अधिनियम, 1981

नेट कृषि आय वित्त अधिनियम की प्रथम अनुसूची के भाग IV में निहित नियमों के अनुसार गणना की जानी है - निर्धारिती कुल आय के अलावा नेट कृषि आय है जिन मामलों में आयकर की गणना के लिए प्रावधानों में 5.4 संशोधन . नेट कृषि आय की गणना की विधि को इनमें संशोधन के लिए छोड़कर, वित्त (नं. 2) अधिनियम, 1980 के प्रावधानों के तहत के रूप में एक ही है:

1 आकलन वर्ष 1980-81 के लिए प्रासंगिक पिछले वर्ष के दौरान किए गए कृषि में अनवशोषित नुकसान भी निर्धारण वर्ष 1981-82 के लिए प्रासंगिक पिछले वर्ष के लिए कृषि आय के खिलाफ बंद का गठन किया जाएगा.

प्र.20. निर्धारण वर्ष 1981-82 के लिए प्रासंगिक पिछले वर्ष के दौरान किए गए अनवशोषित नुकसान वित्तीय वर्ष 1981-1982 के दौरान अग्रिम कर के भुगतान के प्रयोजन के लिए नेट कृषि आय का निर्धारण करने में बंद का गठन किया जाएगा.

(3) व्यक्तियों द्वारा देय "एडवांस टैक्स" कंप्यूटिंग में, (छूट सीमा से अधिक अलग आय होने के एक या अधिक सदस्यों के साथ उन लोगों की तुलना में अन्य) हिंदू अविभाजित परिवार, अपंजीकृत फर्मों, आदि व्यक्तियों के संघों, वित्तीय वर्ष 1981-82 के दौरान, आयकर अर्थात् निम्नलिखित तरीके से गणना की जाएगी: -

. एक करदाता की आय का कृषि और गैर कृषि घटक पहले एकत्रित किया जाएगा और आयकर ऐसे कुल कुल आय के रूप में अगर कुल पर गणना (अधिभार को छोड़कर);

रुपए की राशि की वृद्धि हुई के रूप में बी. (अधिभार को छोड़कर) आयकर फिर नेट कृषि आय पर कर की गणना की जाएगी. 15,000 बढ़ा नेट कृषि आय कुल आय के रूप में अगर;

(क) के तहत की गणना आयकर (अधिभार को छोड़कर) है जिसके द्वारा सी. राशि (ख) उसकी कुल आय पर करदाता द्वारा देय (अधिभार को छोड़कर) आयकर होगा तहत गणना की राशि से अधिक है. यह राशि निर्धारिती द्वारा देय कर की जाएगी, जो इस तरह के आयकर की 10 फीसदी की दर से सरचार्ज की वृद्धि हुई होगी.

एक या अधिक सदस्यों को छूट सीमा से अधिक अलग आय होने, और कुल आय के अलावा नेट कृषि आय होने के साथ हिंदू अविभाजित परिवार का संबंध है, इस में वित्त (नं. 2) अधिनियम, 1980 के प्रावधानों में कोई बदलाव नहीं है ओर.

[की धारा 2, और वित्त अधिनियम, प्रथम अनुसूची]

आयकर अधिनियम में संशोधन

वित्त अधिनियम, 1981

मुक्त व्यापार क्षेत्र में स्थित औद्योगिक इकाइयों के लिए पूरा कर छुट्टी - नई धारा 10 ए

मौजूदा प्रावधानों के तहत 6.1, एक आंशिक कर छुट्टी नव भारत में स्थापित एक औद्योगिक उपक्रम से उनके द्वारा किए गए मुनाफे के संबंध में करदाता की सभी श्रेणियों के लिए प्रदान किया जाता है. औद्योगिक उपक्रम 1981/01/04 करने से पहले स्थापित किया जाता है, "कर छुट्टी" रियायत कुछ शर्तों के अधीन पांच प्रारंभिक आकलन के वर्षों के लिए उपक्रम में कार्यरत राजधानी के एक निर्धारित प्रतिशत, के लिए आयकर ऊपर से छूट के होते हैं . इस निमित्त विनिर्दिष्ट प्रतिशत एक कंपनी और दूसरों के मामले में 6 प्रतिशत के मामले में 7.5 प्रतिशत थी. एक औद्योगिक उपक्रम 31-3-1981 के बाद स्थापित किया जाता है, मुनाफे और औद्योगिक उपक्रम से लाभ प्राप्त कर लेता है, जो निर्धारिती लाभ और लाभ का 20 फीसदी (25, उसकी कर योग्य आय की गणना में, एक कटौती के हकदार है सहकारी समितियों के मामले में, कर छुट्टी 10 प्रारंभिक आकलन वर्ष की अवधि के लिए प्रदान किया जाता है, जबकि एक कंपनी के मामले में प्रतिशत), 8 प्रारंभिक आकलन वर्ष के लिए ऐसे औद्योगिक उपक्रम से निकाली गई.

वित्त अधिनियम, 1981

6.2 कांडला मुक्त व्यापार क्षेत्र 1965 में भारत सरकार द्वारा स्थापित किया गया था न केवल एक निर्यात संवर्धन उद्यम के रूप में भी है लेकिन कच्छ के तहत विकसित क्षेत्र के औद्योगीकरण के लिए और भी एक विकल्प के रूप में कांडला पोर्ट के विकास के लिए एक अग्रणी योजना के रूप में कराची के लिए. इसी तरह, सांताक्रुज इलेक्ट्रॉनिक्स एक्सपोर्ट प्रोसेसिंग जोन के रूप में भी इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र में प्रतिशत निर्यात उन्मुख उद्योगों प्रति 100 की स्थापना को प्रोत्साहित करने के इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग के तेजी से विकास को बढ़ावा देने के लिए बंबई के निकट स्थापित किया गया था. मौजूदा प्रावधानों के तहत लाभ और इन मुक्त व्यापार क्षेत्र में स्थापित नए औद्योगिक उपक्रमों से लाभ प्राप्त जो निर्धारिती आंशिक कर छुट्टी, निवेश भत्ता, निर्यात बाजार विकास भत्ता, अतिरिक्त मूल्यह्रास भत्ता, औद्योगिक उपक्रमों के संबंध में कटौती के लाभ के हकदार हैं और सभी औद्योगिक उपक्रमों के मामले में उपलब्ध अन्य प्रोत्साहन (कांडला मुक्त व्यापार क्षेत्र में स्थित औद्योगिक उपक्रमों के लिए) पिछड़े क्षेत्रों में स्थापित की. देशों की संख्या साल के एक निर्धारित संख्या के लिए एक पूरा कर छुट्टी सहित पर्याप्त कर रियायतें प्रसाद द्वारा औद्योगिक विकास के लिए निवेश को आकर्षित करने के लिए मुक्त व्यापार क्षेत्र की स्थापना की है.

वित्त अधिनियम, 1981

6.3 मुक्त व्यापार क्षेत्र में निर्यात उन्मुख उद्योगों की स्थापना को प्रोत्साहित करने की दृष्टि से, वित्त अधिनियम मुक्त व्यापार क्षेत्र में नव स्थापित औद्योगिक उपक्रमों के संबंध में विशेष उपबंध किया गया है जो आयकर अधिनियम में एक नई धारा 10 ए के डाला गया है. नई धारा 10 ए की मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित पैराग्राफ में व्याख्या कर रहे हैं.

वित्त अधिनियम, 1981

6.4 नई धारा पांच प्रारंभिक आकलन वर्ष की अवधि के लिए किसी भी मुक्त व्यापार क्षेत्र में स्थापित एक औद्योगिक उपक्रम से व्युत्पन्न लाभ और लाभ के संबंध में एक पूरा कर में छूट का प्रावधान है. इस प्रयोजन के लिए अभिव्यक्ति "मुक्त व्यापार क्षेत्र" कांडला मुक्त व्यापार क्षेत्र और सांताक्रुज इलेक्ट्रॉनिक्स एक्सपोर्ट प्रोसेसिंग जोन का मतलब है और केन्द्र सरकार, शासकीय राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, इस के प्रयोजनों के लिए निर्दिष्ट कर सकता है जो किसी भी अन्य मुक्त व्यापार क्षेत्र भी शामिल है खंड. कर छूट औद्योगिक उपक्रम का निर्माण या किसी भी लेख या बात और चार तुरंत सफल आकलन वर्ष के प्रत्येक उत्पादन शुरू होता है, जिसमें पिछले साल के लिए प्रासंगिक निर्धारण वर्ष के संदर्भ में दी जाती है. इस धारा के प्रावधानों अर्थात्, निम्न शर्तों को पूरा जो किसी भी औद्योगिक उपक्रम पर लागू होते हैं:

1 औद्योगिक उपक्रम आकलन वर्ष 1981-82 या मुक्त व्यापार क्षेत्रों में से किसी में किसी भी बाद आकलन वर्ष के लिए प्रासंगिक पिछले वर्ष के दौरान किसी भी लेख या बात के निर्माण या उत्पादन शुरू करना चाहिए. (यह पैरा 6.8 में विस्तार से बताया अपवाद के अधीन है.)

प्र.20. औद्योगिक उपक्रम पहले से ही अस्तित्व में एक व्यापार के बंटवारे के ऊपर या पुनर्निर्माण द्वारा गठित किया गया है नहीं करना चाहिए. हालांकि, परिस्थितियों में और उस खंड में निर्धारित अवधि के भीतर, अनुभाग 33b में संदर्भित किया जाता है के रूप में एक औद्योगिक उपक्रम ऐसे किसी औद्योगिक उपक्रम के व्यापार का निर्धारिती द्वारा पुनः स्थापना, पुनर्निर्माण या पुनरुद्धार का एक परिणाम के रूप में बनाई है जहां, एक ही नई कर रियायत के लिए पात्र होंगे.

(3) औद्योगिक उपक्रम मशीनरी या पहले से किसी भी उद्देश्य के लिए इस्तेमाल संयंत्र के लिए एक नया व्यापार के लिए स्थानांतरण द्वारा गठित किया गया है नहीं करना चाहिए.

वित्त अधिनियम, 1981

(3) ऊपर, निर्धारिती के अलावा अन्य किसी भी व्यक्ति द्वारा भारत के बाहर किया गया था, जो किसी मशीनरी या संयंत्र मशीनरी या निम्न स्थितियों अर्थात्, पूरा कर रहे हैं, तो पहले से किसी भी उद्देश्य के लिए इस्तेमाल संयंत्र के रूप में नहीं माना जाएगा करने के प्रयोजन के लिए 6.5:

. एक ऐसी मशीनरी या संयंत्र पहले से भारत में उपयोग नहीं किया गया था;

. बी ऐसी मशीनरी या संयंत्र एक विदेशी देश से भारत में आयात किया जाता है; और

सी. ऐसी मशीनरी या संयंत्र के सम्मान में ह्रास के कारण कोई कटौती नहीं की अनुमति है या पहले किसी भी अवधि के लिए किसी भी व्यक्ति की कुल आय की गणना में भारतीय आयकर अधिनियम, 1922 या आयकर अधिनियम, 1961 के तहत स्वीकार्य है किया गया है निर्धारिती द्वारा मशीनरी या संयंत्र की स्थापना करने के लिए.

इसके अलावा इस टैक्स रियायत नए व्यापार के लिए हस्तांतरित किया मशीनरी या संयंत्र के कुल मूल्य है कि व्यापार में इस्तेमाल किया मशीनरी या संयंत्र के कुल मूल्य का 20 प्रतिशत से अधिक नहीं है जहां एक मामले में वंचित नहीं किया जाएगा.

वित्त अधिनियम, 1981

6.6 नई धारा की योजना इस टैक्स रियायत का लाभ का avails जो निर्धारिती मुक्त व्यापार क्षेत्र में औद्योगिक उपक्रमों के संबंध में अन्य कर रियायतों के लिए पात्र नहीं होगा कि या तो 5 साल कर के दौरान छुट्टी की अवधि या कर छुट्टी की अवधि समाप्त होने के बाद किसी भी समय. इस उद्देश्य को सुरक्षित करने के लिए, उप - धारा (4) नई धारा 10 ए की कुल तुरंत अंतिम निर्धारण वर्ष सफल निर्धारण वर्ष के लिए प्रासंगिक पिछले वर्ष के लिए निर्धारिती की आय या की गणना के संबंध में निम्नलिखित प्रावधान किया गया है कर अवकाश की अवधि या बाद में किसी भी निर्धारण वर्ष के लिए प्रासंगिक किसी भी पिछले साल की:

1 धारा 33, धारा 36 (1) (नौ) करेगा करने के पहले परंतुक के तहत परिवार नियोजन के संबंध में धारा 35 और पूंजीगत व्यय के तहत वैज्ञानिक अनुसंधान पर खर्च के तहत खंड 32A, विकास छूट के तहत धारा 32, निवेश भत्ता के तहत ह्रास से संबंधित प्रावधान हर भत्ता या कटौती है कि विभाग में करने के लिए भेजा और करने के लिए या भवन, मशीनरी, संयंत्र या उपक्रम के व्यवसाय या किसी के उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल किया फर्नीचर के संबंध में कर अवकाश की अवधि में शामिल आकलन साल से किसी के लिए स्वीकार्य संबंधित के रूप में यदि लागू इस तरह पिछले साल से किसी में इस तरह के व्यापार के प्रयोजनों के लिए किए गए व्यय कि आकलन वर्ष के लिए ही करने के लिए पूरा प्रभाव दिया गया था. इस प्रावधान का स्वाभाविक परिणाम है कि धारा 32 के तहत अनवशोषित ह्रास का प्रतिनिधित्व करने के लिए किसी भी राशि (2), अनवशोषित निवेश भत्ता अनुभाग 32A धारा 35 के तहत वैज्ञानिक अनुसंधान पर (3) (ख), अनवशोषित पूंजीगत व्यय के तहत (4), या धारा 36 के लिए सबसे पहले परंतुक के तहत परिवार नियोजन के संबंध में असमाप्त पूंजीगत व्यय (1) (नौ) किसी भी बाद आकलन वर्ष के लिए कर अवकाश की अवधि के संबंध में आगे बढ़ाया नहीं जाएगा या मुनाफे के खिलाफ बंद सेट. दूसरे शब्दों में, यह मूल्यह्रास, निवेश भत्ता, विकास छूट, वैज्ञानिक अनुसंधान पर या परिवार नियोजन के लिए पूंजीगत व्यय के लिए भत्ते पूरी तरह से पाँच प्रारंभिक आकलन के लिए प्रासंगिक पिछले वर्षों में से किसी में औद्योगिक उपक्रम की आय से अवशोषित कर रहे थे कि माना जाता है साल और अनवशोषित भत्ता या कटौती की कोई राशि पांच वर्ष कर छुट्टी की अवधि के बाद किसी भी निर्धारण वर्ष के लिए आगे बढ़ाया जा रहा है कि.

प्र.20. धारा 72 के तहत सिर "मुनाफा और व्यापार या पेशे के लाभ" के तहत कोई हानि (1) या धारा 74 के तहत सिर "पूंजीगत लाभ" के तहत (1) और से किसी के संबंध में खंड 80J तहत कोई कर छुट्टी की कमी (3) कर अवकाश की अवधि में शामिल आकलन साल, अब तक इस तरह के नुकसान या कमी के रूप में औद्योगिक उपक्रम के व्यापार से संबंधित होगा, आगे बढ़ाया या तुरंत में शामिल आकलन वर्ष के पिछले सफल निर्धारण वर्ष के आय की गणना में बंद सेट किया कर अवकाश की अवधि या बाद में किसी भी निर्धारण वर्ष में.

(3) निर्धारिती या नव स्थापित छोटे पैमाने से लाभ और लाभ के संबंध में कटौती करने के लिए संबंधित खंड 80HHA (नीचे (पिछड़े क्षेत्रों में नव स्थापित औद्योगिक उपक्रमों से लाभ और लाभ के संबंध में कटौती से संबंधित) धारा 80HH के तहत कटौती के लिए पात्र नहीं होगा में शामिल तुरंत अंतिम निर्धारण वर्ष सफल निर्धारण वर्ष के लिए प्रासंगिक किसी भी पिछले साल के लिए मुनाफे और औद्योगिक उपक्रम के लाभ के संबंध में खंड 80J तहत या धारा 80-I के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में) में या कर छुट्टी के संबंध में औद्योगिक उपक्रमों कर अवकाश की अवधि या बाद में किसी भी निर्धारण वर्ष.

(4) धारा 32, तुरंत कर छुट्टी की अवधि में शामिल अंतिम निर्धारण वर्ष और हर बाद निर्धारण वर्ष सफल निर्धारण वर्ष के लिए औद्योगिक उपक्रम के व्यापार के प्रयोजनों के लिए उपयोग किसी भी संपत्ति की "नीचे लिखा मूल्य" के अंतर्गत मूल्यह्रास भत्ता कंप्यूटिंग में निर्धारिती दावा किया था और वास्तव में कर अवकाश की अवधि में शामिल मूल्यांकन वर्षों में से प्रत्येक के लिए मूल्यह्रास भत्ता इजाजत दी गई थी, तो के रूप में गणना की जाएगी.

वित्त अधिनियम, 1981

6.7 एक विशेष उपबंध (7) नई धारा 10 ए के मुनाफे और यह कर रियायत का लाभ उठाने के लिए नहीं मुक्त व्यापार क्षेत्र में स्थित एक औद्योगिक उपक्रम से लाभ प्राप्त कर लेता है, जो एक निर्धारिती को एक विकल्प देने के लिए उप - धारा में किया गया है. इस तरह के एक निर्धारिती (1) या धारा 139 के तहत (2), मूल रूप से या विस्तार पर तय है, चाहे पहले आकलन के लिए आयकर रिटर्न प्रस्तुत करने के लिए धारा 139 के तहत अनुमति दी समय की समाप्ति से पहले लिखित रूप में एक घोषणा प्रस्तुत करने की आवश्यकता होगी नई योजना के तहत कर छूट इस धारा के प्रावधानों उसे लागू नहीं किया जा सकता है और वह ऐसा करता है, तो इस धारा 10 ए के प्रावधानों के पाँच में से किसी के लिए उसे करने के लिए लागू नहीं होगा कि, उसे करने के लिए उपलब्ध है वर्ष जिसके लिए आकलन साल जिसके लिए कर अवकाश प्रावधानों सामान्य रूप से उसे लागू होगा. व्यवस्था कुछ निर्धारिती भारत के बाकी हिस्सों में नई योजना की तुलना में अधिक आकर्षक उद्योगों के संबंध में उपलब्ध सामान्य कर रियायतें मिल सकती है कि विचार पर किया गया है.

वित्त अधिनियम, 1981

नई धारा 10 ए (5) 6.8 उप - धारा मुनाफे और मुक्त व्यापार क्षेत्र में स्थित मौजूदा औद्योगिक उपक्रमों से लाभ पाने निर्धारिती को एक विकल्प प्रदान करता है. तदनुसार, मुनाफे और औद्योगिक इकाइयों से लाभ पाने निर्धारिती, उनके विकल्प पर पांच साल की असमाप्त अवधि के लिए पूरा कर छुट्टी का दावा करने के हकदार होंगे 1977-78 1980-81 के लिए मूल्यांकन वर्षों के लिए प्रासंगिक पिछले वर्षों में से किसी में स्थापित . मौजूदा इकाइयों के संबंध में कर रियायत कुछ निर्धारिती मौजूदा प्रावधानों के तहत नई औद्योगिक उपक्रमों के संबंध में अनुमति दी जाती है जो सामान्य कर रियायतों का लाभ उठाने के लिए यह अधिक लाभदायक मिल सकता है कि विचार पर वैकल्पिक बनाया जा रहा है. तदनुसार, 1980-81 के लिए 1977-78 में पांच प्रारंभिक आकलन वर्ष की असमाप्त अवधि के लिए यह कर रियायत का लाभ के लिए पात्र हो जाएगा मूल्यांकन वर्षों के लिए प्रासंगिक किसी भी पिछले वर्ष में स्थापित एक औद्योगिक उपक्रम से लाभ और लाभ पाने के लिए एक निर्धारिती उनके मामले में उपलब्ध. इस तरह के एक विकल्प धारा 139 (1) या 139 (2) आयकर अधिकारी को प्रस्तुत द्वारा निर्धारण वर्ष 1981-82 के लिए, एक घोषणा के तहत आयकर रिटर्न की प्रस्तुत के लिए अनुमति दी गई समय की समाप्ति से पहले प्रयोग किया जाना है नई धारा 10 ए के प्रावधानों के पांच साल की अवधि की असमाप्त भाग के आकलन के वर्षों में से प्रत्येक के लिए उसे करने के लिए लागू किया जा सकता है कि लेखन में वह ऐसा करता है, तो नई धारा 10 ए की उपधारा के प्रावधानों (4) आकलन वर्ष के लिए प्रासंगिक पिछले साल तुरंत कर छुट्टी की अवधि के अंतिम निर्धारण वर्ष और बाद के मूल्यांकन वर्षों के सफल होने के लिए उसकी कुल आय की गणना में लागू होगी.

वित्त अधिनियम, 1981

6.9 यह निर्धारिती बनाकर योजना से बाहर opts जब तक धारा 10 ए के आकलन वर्ष 1981-82 या बाद में किसी भी निर्धारण वर्ष के लिए प्रासंगिक पिछले वर्ष के दौरान मुक्त व्यापार क्षेत्र में स्थापित सभी औद्योगिक उपक्रमों के संबंध में लागू होगी कि नोट किया जाए उप - धारा के तहत एक घोषणापत्र (7) समय के भीतर उस उपधारा के तहत अनुमति दी. पूर्व निर्धारण वर्ष 1981-82 के लिए प्रासंगिक पिछले वर्ष स्थापित करने के लिए औद्योगिक उपक्रमों के मामले में, हालांकि, धारा 10 ए के प्रावधानों निर्धारिती (5) के तहत अनुमति दी समय के भीतर उप - धारा के तहत एक घोषणापत्र में आता है सिर्फ अगर लागू होगी इन उप वर्गों.

वित्त अधिनियम, 1981

उप - धारा की 6.10 प्रावधान (8) और उप - धारा (9) खंड के 80-मैं भी वे के तहत करने के लिए भेजा एक औद्योगिक उपक्रम के संबंध में लागू के रूप में नई धारा 10 ए में निर्दिष्ट औद्योगिक उपक्रम के संबंध में लागू होगा धारा 80-मैं. लागू उप - धारा के तहत (8) धारा 80-I की, यह एक निर्धारिती कई इकाइयां हैं जहां कि प्रदान की जाती है, मुक्त व्यापार क्षेत्र और कुछ बाहर में कुछ, मुक्त व्यापार क्षेत्र में इकाई के मुनाफे के बाद गणना की जाएगी माल की लागत लेने के इस तरह के सामान के बाजार मूल्य के आधार पर इकाई को या से स्थानांतरित कर दिया. धारा 80-I के लागू उप - धारा (9) निर्धारिती के बीच घनिष्ठ संबंध के कारण जहां, मामलों में मुक्त व्यापार क्षेत्र में योग्यता उपक्रम के लिए जिम्मेदार ठहराया जा सकता है कि उचित लाभ निर्धारित करने के लिए आयकर अधिकारी अधिकार और किसी भी अन्य व्यक्ति या किसी अन्य कारण से, कारोबार के दौरान तो मुक्त व्यापार क्षेत्र में स्थापित औद्योगिक उपक्रम है कि व्यापार में पैदा होने की उम्मीद की जा सकती है जो साधारण मुनाफे से ज्यादा निकला है कि व्यवस्था की है. यह प्रावधान सहयोगी चिंताओं या एक ही चिंता की विभिन्न इकाइयों के बीच मुनाफे के हेरफेर से नए कर रियायतें के दुरुपयोग से बचने के लिए एक दृश्य के साथ बनाया गया है.

वित्त अधिनियम, 1981

6.11 यह संशोधन 1981/01/04 से प्रभावी में आ गए और आकलन वर्ष 1981-82 और बाद के वर्षों के संबंध में तदनुसार लागू है.

[वित्त अधिनियम की धारा 3]

वित्त अधिनियम, 1981

वेतनभोगी करदाताओं के मामले में स्वीकार्य मानक कटौती की स्थापना - धारा 16

7.1 धारा 16 के तहत (मैं), वेतनभोगी करदाता अपनी कर योग्य वेतन की गणना में एक मानक कटौती के हकदार हैं. पिछले वित्त अधिनियम द्वारा किए गए संशोधन के लिए, मानक कटौती रुपये तक वेतन का 20 फीसदी के बराबर राशि में अनुमति दी गई थी. 10,000 रुपये और एक समग्र उच्चतम सीमा के अधीन संतुलन, का 10 फीसदी. 3,500. इस मानक कटौती, हालांकि, रुपये के लिए प्रतिबंधित किया गया था. निम्नलिखित मामलों में 1000:

एक. कर्मचारी अपने नियोक्ता से वाहन भत्ते की प्राप्ति में है, या जहां

बी. वह अन्यथा अपने कर्तव्यों के प्रदर्शन में पूर्ण और विशेष रूप से, या उपयोग के लिए उसके नियोक्ता द्वारा किसी मोटर कार, मोटर साइकिल, स्कूटर या किसी भी अन्य इंजन से साइकिल के साथ प्रदान की जाती है, जहां

सी. वह स्वामित्व या नियोक्ता द्वारा काम पर रखा मोटर कारों की एक पूल से बाहर (पूर्ण और विशेष रूप से अपने कर्तव्यों के प्रदर्शन में से othewise) किसी एक या एक से अधिक मोटर कारों के उपयोग की अनुमति दी जाती है.

वित्त अधिनियम, 1981

हाल के वर्षों में 7.2, के रूप में भी सामान्य चल रहा है और मरम्मत के रखरखाव पर खर्च में मोटर वाहनों की पूंजी लागत में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है. इस स्थिति, और वेतनभोगी करदाता को राहत के एक साधन के रूप में देखने के लिए, वित्त अधिनियम रुपये का बढ़ाया समग्र उच्चतम सीमा के अधीन वेतन आय का 20 फीसदी वेतन आय के सभी स्तरों पर मानक कटौती बढ़ गई है. 5,00

वित्त अधिनियम, 1981

वाहन भत्ते की प्राप्ति में एक निर्धारिती के मामले में 7.3, अपने कर्तव्यों के निष्पादन में पूरी तरह जरूरी है और विशेष रूप से इस तरह के भत्ते से बाहर किए गए व्यय की राशि आयकर से मुक्त है. एक कर्मचारी को दी गई अतिरिक्त वाहन भत्ता, हालांकि, कर्मचारी की कर योग्य आय में includible है. इसलिए, वैध आवश्यकताओं से अधिक भुगतान की गई राशि कर योग्य आय में शामिल किया गया है जहां एक मामले में, मानक कटौती की मात्रा सीमित करने के लिए कोई औचित्य होना प्रकट नहीं करता है. मानक कटौती रुपये तक सीमित नहीं किया जाएगा तो यह है कि वित्त अधिनियम तदनुसार धारा 16 (क) के परन्तुक के खण्ड (i) लोप हो गया है. वाहन भत्ते की प्राप्ति में हैं, जो कर्मचारियों के मामले में 1,000. यह, हालांकि, एक मोटर कार, मोटर साइकिल, आदि के साथ प्रदान किया गया है, या जो वह उपयोग की अनुमति है जहां वेतनभोगी कर्मचारियों के मामले में मानक कटौती के प्रतिबंध के संबंध में स्थिति में कोई बदलाव नहीं आया है कि नोट किया जाए मोटर खंड (ख) में निर्दिष्ट के रूप में नियोक्ता द्वारा स्वामित्व या किराए पर कारों, या खंड का एक पूल से बाहर एक या एक से अधिक मोटर कारों (iii) परंतुक की धारा 16 (i). इन मामलों में, मानक कटौती रुपये के लिए प्रतिबंधित कर दिया जाएगा. 1000 और एक वाहन के प्रावधान के द्वारा प्रतिनिधित्व दस्तूरी का मूल्य नियमों के प्रावधानों के अनुसार निर्धारित करना होगा. कोई परिवर्तन मोटर कार के प्रावधान के द्वारा प्रतिनिधित्व दस्तूरी एक रियायती आधार पर कर लगाया जाता है कि विचार पर इस प्रावधान के संबंध में किया गया है.

वित्त अधिनियम, 1981

7.4 यह प्रावधान 1982/01/04 से प्रभावी होगा और, तदनुसार, आकलन वर्ष 1982-83 और बाद के वर्षों के संबंध में लागू होगा.

[वित्त अधिनियम की धारा 4]

वित्त अधिनियम, 1981

धारा 32A और अनुभाग 80HHA - औद्योगिक नीति पर बयान के अनुसरण में एक छोटे पैमाने पर औद्योगिक उपक्रम की परिभाषा में संशोधन

आयकर अधिनियम के मौजूदा प्रावधानों के तहत 8.1, निम्न कर रियायतें अर्थात् छोटे पैमाने पर औद्योगिक उपक्रमों के मामले में उपलब्ध हैं:

1 निवेश भत्ता के लिए ग्यारहवीं अनुसूची में सूची में निर्दिष्ट कम प्राथमिकता के एक लेख या बात सहित किसी भी लेख या बात के निर्माण या उत्पादन के व्यापार के उद्देश्य के लिए एक छोटे पैमाने पर औद्योगिक उपक्रम में स्थापित किसी मशीनरी या संयंत्र के संबंध में स्वीकार्य है आयकर अधिनियम [धारा 32A (2) (बी) (ख)].

प्र.20. एक निर्धारिती 10 प्रारंभिक आकलन वर्ष [खंड 80HHA के लिए एक ग्रामीण क्षेत्र में स्थापित एक छोटे पैमाने पर औद्योगिक उपक्रम से व्युत्पन्न लाभ और लाभ के 20 फीसदी के बराबर रकम के बारे में उनकी कर योग्य आय की गणना, में, कटौती के हकदार है ].

(3) एक छोटे पैमाने पर औद्योगिक उपक्रम के मालिक एक निर्धारिती एक छोटे से व्युत्पन्न (25 एक कंपनी के मामले में प्रतिशत) के मुनाफे और लाभ के 20 फीसदी के बराबर रकम के बारे में उनकी कर योग्य आय की गणना में, एक कटौती के हकदार है पैमाने पर 8 प्रारंभिक आकलन वर्ष (10 साल के लिए आयकर अधिनियम को ग्यारहवीं अनुसूची में सूची में निर्दिष्ट कम प्राथमिकता के एक लेख या बात सहित किसी भी लेख या बात है, के निर्माण या उत्पादन में लगे हुए किया जा सकता है जो औद्योगिक उपक्रम एक सहकारी समिति के मामले में) [धारा 80-मैं (2), दूसरे परंतुक].

वित्त अधिनियम, 1981

पिछले साल के अंतिम दिन से अधिक नहीं है ऊपर के रूप में संदर्भित कर रियायतें के प्रयोजनों के लिए 8.2, एक "छोटे पैमाने पर औद्योगिक उपक्रम" मशीनरी या संयंत्र के कुल मूल्य स्थापित जिसमें एक औद्योगिक उपक्रम के रूप में परिभाषित किया गया है रुपये. 10 लाख. जुलाई 1980 में किए गए औद्योगिक नीति पर वक्तव्य में सरकार ने रुपये से छोटे पैमाने पर औद्योगिक उपक्रमों की व्यापकता के मामले में निवेश की सीमा बढ़ाने के अपने निर्णय की घोषणा की. रुपये के लिए 10 लाख रुपए. लघु उद्योगों के विकास को बढ़ावा देने और उनके तेजी से विकास सुनिश्चित करने के लिए एक उपाय के रूप में 1980/01/08 से प्रभाव के साथ 20 लाख,.

वित्त अधिनियम, 1981

: 8.3 छोटे पैमाने पर औद्योगिक उपक्रम की परिभाषा में उक्त बदलाव को देखते हुए, वित्त अधिनियम के तहत के रूप में प्रासंगिक प्रावधानों में निम्न संशोधन किया गया है

1 किसी भी निर्धारिती 31 जुलाई 1980 के बाद समाप्त होने के पिछले एक वर्ष में एक छोटे पैमाने पर औद्योगिक उपक्रम में किसी मशीनरी या संयंत्र स्थापित किया गया है जहां मशीनरी या संयंत्र के कुल मूल्य में स्थापित किया है, वह निर्दिष्ट दरों पर निवेश छूट के लिए पात्र हो जाएगा पिछले साल के आखिरी दिन के रूप में औद्योगिक उपक्रम रुपये से अधिक नहीं है. 20 लाख. पिछले वर्ष 31 जुलाई 1980 के बाद समाप्त हो गया, और पिछले वर्ष के अंतिम दिन के रूप में औद्योगिक उपक्रम में स्थापित मशीनरी या संयंत्र के मूल्य रुपये से अधिक नहीं है जहां एक मामले में. 20 लाख, निर्धारिती भले की मशीनरी 1 अगस्त 1980 या पर या उस तारीख के बाद से पहले स्थापित किया गया है कि क्या निवेश छूट के हकदार होंगे.

प्र.20. खंड 80HHA के तहत किसी भी ग्रामीण इलाके में एक छोटे पैमाने पर औद्योगिक उपक्रम से व्युत्पन्न लाभ और लाभ की आंशिक छूट के लिए प्रावधान करने के संबंध में वित्त अधिनियम को पिछले वर्ष 31 जुलाई 1980 के बाद समाप्त होता है जहां, औद्योगिक उपक्रम माना जाएगा कि प्रदान करता है एक छोटे पैमाने पर औद्योगिक उपक्रम के रूप में पिछले वर्ष के अंतिम दिन उसमें स्थापित मशीनरी या संयंत्र के कुल मूल्य रुपये से अधिक नहीं है. 20 लाख. इस खंड में एक और संशोधन एक औद्योगिक उपक्रम पहले के वर्षों में मशीनरी या संयंत्र में निवेश रुपए को पार कर उस कारण के लिए कर रियायत के लिए पात्र नहीं था, जहां एक मामले में है कि सुरक्षित करने का इरादा है. ऐसे उपक्रम है कि खंड में निर्दिष्ट 10 साल की अवधि की असमाप्त भाग के लिए यह कर रियायत का लाभ के लिए पात्र होंगे 10 लाख, प्रासंगिक पिछले साल के अंत में मशीनरी या संयंत्र में कुल निवेश रुपये से अधिक नहीं है, बशर्ते कि . 20 लाख. उदाहरण के लिए, जहां औद्योगिक उपक्रम कहा उपक्रम में स्थापित मशीनरी या संयंत्र के मूल्य रुपये से अधिक हो गई है कि कारण के लिए प्रारंभिक 3 मूल्यांकन वर्षों के लिए पात्र नहीं था. 10 लाख, इस तरह के एक उपक्रम आकलन वर्ष 1981-82 या पिछले साल के लिए प्रासंगिक बाद किसी भी निर्धारण वर्ष के साथ शुरू 7 आकलन वर्ष की शेष अवधि के लिए खंड 80HHA तहत कर रियायत के लिए पात्र होंगे बशर्ते कि मशीनरी के मूल्य या संयंत्र रुपये से अधिक नहीं था चिंतित पिछले वर्ष के अंतिम दिन के रूप में उसमें स्थापित. 20 लाख.

(3) खंड 80HHA में एक "छोटे पैमाने पर औद्योगिक उपक्रम" के संशोधित परिभाषा भी धारा 80-I में कर अवकाश प्रावधान के प्रयोजनों के लिए लागू होगी.

वित्त अधिनियम, 1981

8.4 इन प्रावधानों 1981/01/04 से प्रभावी में आ गए और आकलन वर्ष 1981-82 और बाद के वर्षों के संबंध में तदनुसार लागू कर रहे हैं.

[5 वर्गों और वित्त अधिनियम के 10]

वित्त अधिनियम, 1981

धारा 33A - विकास भत्ता से संबंधित प्रावधान के उदारीकरण

9.1 अनुभाग 33A के तहत भारत में चाय बढ़ रही है और निर्माण के कारोबार पर ले जाने के एक निर्धारिती चाय झाड़ियों रोपण की वास्तविक लागत के संदर्भ में विकास भत्ता के वैसे, उनकी कर योग्य लाभ की गणना में, एक कटौती के हकदार है. विकास भत्ता पहले छोड़ दिया गया था जो या नव वृक्षारोपण के तहत लाया जाता है जो किसी भी भूमि पर चाय की झाड़ियों रोपण की लागत का 50 प्रतिशत की दर से दी जाती है. विकास भत्ता के संबंध में कटौती दो चरणों में दी जाती है. कटौती पहले भूमि है कि साल तक रोपण की वास्तविक लागत के संदर्भ में, रोपण के लिए तैयार किया गया था, जिसमें पिछले वर्ष से गिना दूसरे को पिछले वर्ष का मुनाफा कंप्यूटिंग में अनुमति दी है. कटौती अगले भूमि रोपण के लिए तैयार किया गया था, जिसमें पिछले वर्ष से गिना चौथे पिछले साल के मुनाफे कंप्यूटिंग में अनुमति दी है. दूसरे चरण में अनुमति दी जाए विकास भत्ता की मात्रा (एक) वास्तविक चार लेखा वर्षों के दौरान किए गए रोपण की लागत, और के संबंध में अभिकलन विकास भत्ता की राशि (ख) विकास भत्ता की अनुमति दी के बीच अंतर के बराबर है पहले चरण में, यानी, दूसरा लेखा वर्ष के संबंध में.

वित्त अधिनियम, 1981

9.2 रोपण की वास्तविक लागत जमीन तैयार करने की लागत शामिल है; बीज, काटने और नर्सरी की लागत; रोपण और replanting की लागत; और भूमि पिछले साल सफल रोपण और 3 के लिए तैयार किया गया है जो पिछले साल के लिए रखरखाव तत्संबंधी की लागत. हालांकि, इस तरह रुपए की लागत से अधिक है. मैदानों या रुपये में जमीन के लिए प्रति हेक्टेयर 10,000. पहाड़ी क्षेत्रों में स्थित भूमि के संबंध में प्रति हेक्टेयर 12,500, अतिरिक्त राशि विकास भत्ते की राशि की गणना के प्रयोजन के लिए नजरअंदाज कर दिया है.

वित्त अधिनियम, 1981

9.3 चाय झाड़ियों रोपण की लागत में काफी वृद्धि होने के संबंध में, वित्त अधिनियम निम्नलिखित तरीके से विकास भत्ते की राशि की गणना के प्रयोजनों के लिए रोपण की लागत की मौद्रिक सीमा सीमा को उठाया गया है:

द. चाय बागानों के मैदानों में बैठाना के लिए र 30]000
ii चाय बागानों दार्जिलिंग जिले के अलावा अन्य पहाड़ी क्षेत्रों में बैठाना के लिए र 35]000
ईई. चाय बागानों दार्जिलिंग जिले के पहाड़ी क्षेत्रों में बैठाना के लिए र 40]000

इस प्रयोजन के लिए, "दार्जिलिंग के जिला" यह वित्त विधेयक, 1981 को लोकसभा में पेश किया गया था, जिस पर तारीख की जा रही 28 फरवरी, 1981 को अस्तित्व में के रूप में दार्जिलिंग के जिला मतलब है.

वित्त अधिनियम, 1981

9.4 यह प्रावधान 1982/01/04 से प्रभावी होगा और, तदनुसार, आकलन वर्ष 1982-83 और बाद के वर्षों के संबंध में लागू होगा.

[वित्त अधिनियम की धारा 6]

वित्त अधिनियम, 1981

अनुमोदित वित्तीय निगमों और सार्वजनिक आवास वित्त कंपनियों के मामले में विशेष आरक्षित करने के लिए स्थानांतरित कर मुनाफे के संबंध में कटौती के कुल की मात्रा में वृद्धि - धारा 36 (1) (आठ)

10.1 धारा 36 (1) (आठ), भारत में औद्योगिक या कृषि विकास के लिए लंबे समय तक वित्त प्रदान करने में लगे हुए वित्तीय निगमों को मंजूरी दे दी और निर्माण या घरों की खरीद के लिए लंबी अवधि के वित्त उपलब्ध कराने के कारोबार पर ले जाने में लगे सार्वजनिक कंपनियों को मंजूरी दी भारत में आवासीय प्रयोजनों के लिए, किसी भी करने से पहले अभिकलन को अपनी कुल आय का 40 प्रतिशत करने के लिए एक विशेष रिजर्व खाते में इस तरह के लाभ के लिए उन्हें बाहर से हस्तांतरित राशि के संबंध में उनकी कर योग्य लाभ की गणना में कटौती के हकदार अधिनियम के अध्याय वीआईए के तहत कटौती. साल की अवधि में इस खाते पर कटौती की सकल, तथापि, चुकता पूंजी की राशि से अधिक नहीं हो सकता है.

वित्त अधिनियम, 1981

10.2 अनुमोदित वित्तीय निगमों और सार्वजनिक आवास वित्त कंपनियों को महत्वपूर्ण सामाजिक - आर्थिक उद्देश्यों को बढ़ावा देने में लगे हुए हैं. ऐसे निगमों और उनके कार्यों के पैमाने पर विस्तार करने के लिए कंपनियों को सक्षम करने की दृष्टि से, वित्त अधिनियम 200 के लिए चुकता पूंजी का 100 प्रतिशत से साल की अवधि में कटौती के कुल की छत की मात्रा बढ़ गई है ऐसे चुकता पूंजी का प्रतिशत.

वित्त अधिनियम, 1981

10.3 यह प्रावधान 1982/01/04 से प्रभावी होगा और, तदनुसार, आकलन वर्ष 1982-83 और बाद के वर्षों के संबंध में लागू होगा.

[वित्त अधिनियम की धारा 7]

वित्त अधिनियम, 1981

भारत में, या निकासी या उत्पादन की, खनिज तेल या प्राकृतिक गैस के लिए पूर्वेक्षण में लगी विदेशी कंपनियों को कर रियायत - धारा 42 और नई धारा 293A

11.1 धारा 42 के लिए पूर्वेक्षण, या खनिज तेल की निकासी या उत्पादन से मिलकर किसी भी व्यवसाय के लाभ और लाभ का निर्धारण करने में स्वीकार्य आदि का खर्च और भत्तों के संबंध में लचीला कटौती, हासिल करने के लिए मशीनरी प्रदान करता है. इस अनुच्छेद के प्रावधानों केन्द्र सरकार के लिए पूर्वेक्षण के लिए संबंधित व्यक्ति, या की निकासी या उत्पादन, खनिज तेल और केंद्र सरकार के साथ एक समझौता किया है, जहां केवल लागू किया जा सकता है इस तरह के कारोबार में एक भागीदार है. धारा 42 आगे केंद्र सरकार और संबंधित व्यक्ति के बीच समझौते में इस तरह के प्रावधान खर्च, बना रहे हैं ड्रिलिंग या अन्वेषण गतिविधियों और रिक्तीकरण भत्ता और जहां पर हुए निष्फल या निष्फल अन्वेषण या व्यय के माध्यम से व्यय के संबंध में प्रावधान कर सकता है कि प्रदान करता है या भत्ता आयकर अधिनियम के सामान्य प्रावधानों के अनुसार समझौते और नहीं के अनुसार गणना की जाएगी.

वित्त अधिनियम, 1981

11.2 वित्त अधिनियम अर्थात्, धारा 42 में निम्न संशोधन किया गया है:

1 यह केन्द्र सरकार सीधे खनिज तेल, के, या निकासी या उत्पादन के लिए पूर्वेक्षण लेकिन इस तरह के एक सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम, के रूप में अपने उम्मीदवार के माध्यम से इस तरह के आपरेशनों के लिए बाहर ले सकता से मिलकर व्यापार में शामिल नहीं हो सकता है कि संभावना है, यह प्रदान की गई है इस तरह के व्यापार में भाग लेने के साथ ही इस तरह के पद के उम्मीदवार का हो सकता है.

प्र.20. मौजूदा प्रावधान के तहत, केंद्र सरकार और संबंधित व्यक्ति के बीच समझौता नहीं बल्कि मूल्यह्रास भत्ता के संबंध में व्यय की निर्दिष्ट श्रेणियों के भत्ता के संबंध में प्रावधान कर सकता है. इस तरह के एक समझौते, इसलिए, मूल्यह्रास भत्ता की गणना के लिए एक अंतर के आधार के लिए प्रदान नहीं कर सकते. यह प्रावधान समझौते के तहत अनुमत कटौती के रूप में अच्छी तरह मूल्यह्रास भत्ता कवर कर सकते हैं कि प्रदान करने के लिए संशोधन किया गया है.

वित्त अधिनियम, 1981

11.3 प्रादेशिक जल महाद्वीपीय शेल्फ, विशेष आर्थिक क्षेत्र और अन्य समुद्री जोन अधिनियम, 1976 ('क्षेत्रीय जल अधिनियम') भारत के विशिष्ट आर्थिक क्षेत्र के जल क्षेत्र और क्षेत्र की सीमा से सटे एक क्षेत्र यह बताता है कि 200 समुद्री है बेस लाइन से मील. इस विशेष आर्थिक क्षेत्र में केंद्र सरकार प्राकृतिक संसाधनों का अन्वेषण, शोषण, संरक्षण और प्रबंधन के उद्देश्य के लिए अधिकारों प्रभु गया है. (7) प्रादेशिक जल अधिनियम की धारा 7 के तहत केन्द्र सरकार ने इसे ठीक समझे भारत में बल या किसी में कुछ समय के लिए, इस तरह के प्रतिबंध और संशोधनों के साथ, किसी भी कानून का विस्तार करने के लिए सरकारी राजपत्र में एक अधिसूचना जारी करने का अधिकार है विशेष आर्थिक क्षेत्र या उसके किसी हिस्से को उसका हिस्सा है और यह इस तरह के अधिनियमन के प्रवर्तन को सुविधाजनक बनाने के लिए आवश्यक विचार कर सकते हैं के रूप में इस तरह के प्रावधान करने. किसी भी तरह के अधिनियमन इतना बढ़ा दिया है जहां कहा क्षेत्र या उसके यह इतना बढ़ा दिया गया है जो किसी भी भाग भारत के राज्यक्षेत्र के एक भाग के रूप में अगर, यह प्रभाव पड़ेगा. यह विशेष आर्थिक क्षेत्र के लिए प्रत्यक्ष कर अधिनियमों का विस्तार करने, जल क्षेत्र, अधिनियम के मामले में एक अधिसूचना जारी करने का प्रस्ताव है.

वित्त अधिनियम, 1981

मौजूदा प्रावधानों के तहत 11.4, एक अनिवासी एकत्रित या उत्पन्न होने वाले या भारत में प्राप्त की आय अकेले आय कर के दायरे में है. आयकर अधिनियम विशेष आर्थिक क्षेत्र, आय एकत्रित या उत्पन्न होने के लिए बढ़ा दिया या ऐसे क्षेत्र में एक अनिवासी द्वारा प्राप्त हो जाने के बाद भी आयकर के दायरे में होगा. वर्तमान में, हमारे देश में तेल की खोज और उत्पादन के क्षेत्र में विदेशी कंपनियों की भागीदारी मोर्चे की मांग है और सरकार एक भागीदारी आधार पर ऐसी कंपनियों के साथ समझौतों में प्रवेश करने के सवाल जांच कर रही है. तेल की खोज और उत्पादन के व्यापार में भाग लेने के लिए विदेशी कंपनियों को प्रोत्साहित करने की दृष्टि से केन्द्र सरकार ने आयकर अधिनियम के प्रावधानों के आराम करने और संशोधित करने का अधिकार ले लिया है. इस प्रयोजन के लिए एक नई धारा 293A सरकारी राजपत्र, छूट, दर में कमी या आयकर में के संबंध में अन्य संशोधन में एक अधिसूचना द्वारा, बनाने के लिए केन्द्र सरकार को सक्षम करने के लिए, आयकर अधिनियम में सम्मिलित किया गया है यह यह आवश्यक या समीचीन तो, अर्थात् जनता के हित में करने के लिए समझता है, तो नीचे बताए व्यक्तियों की किसी भी वर्ग के पक्ष:

1 केन्द्र सरकार संघ या कि सरकार या खनिज तेल, के, या निकासी या उत्पादन के लिए पूर्वेक्षण से मिलकर किसी भी व्यवसाय में है कि सरकार द्वारा अधिकृत किसी भी व्यक्ति की भागीदारी के लिए समझौते भी किए हैं व्यक्तियों किसके साथ.

प्र.20. कि सरकार या इस संबंध में यह द्वारा अधिसूचित किसी भी व्यक्ति, या किसी भी जहाज, विमान, मशीनरी या आपूर्ति कर उन द्वारा किए गए खनिज तेल, के, या निकासी या उत्पादन के लिए पूर्वेक्षण से मिलकर किसी भी व्यवसाय के सिलसिले में किसी भी सेवा या सुविधाएं प्रदान करने के व्यक्तियों इस तरह के कारोबार के सिलसिले में संयंत्र, बिक्री के माध्यम से या भाड़े के द्वारा या नहीं.

(3) व्यक्तियों की कर्मचारी (1) में निर्दिष्ट और (2) ऊपर.

इस प्रावधान के अनुसरण में केन्द्र सरकार द्वारा जारी किए गए किसी भी सूचना को संसद के प्रत्येक सदन के समक्ष रखे जाने की आवश्यकता होगी. धारा 42 और धारा 293A "खनिज तेल" के प्रयोजन के लिए भी पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस शामिल होंगे.

वित्त अधिनियम, 1981

11.5 इन प्रावधानों 1981/01/04 से प्रभावी में आ गए हैं.

[धारा 8 और वित्त अधिनियम के 22]

वित्त अधिनियम, 1981

विकलांग आश्रितों पर चिकित्सा खर्च के संबंध में कटौती की मात्रा में वृद्धि - धारा 80 डी

धारा 80 डी के तहत 12.1, एक विकलांग आश्रित के (नर्सिंग सहित) चिकित्सा उपचार पर खर्च वसूल निवासी व्यक्तियों और हिंदू अविभाजित परिवारों को अपनी कुल आय की गणना में इस तरह के व्यय के संबंध में एक निर्धारित कटौती के हकदार हैं. इस उद्देश्य के लिए विकलांग आश्रित पति, पत्नी, भाई, बहन या किसी नज़दीकी लग्न या उस व्यक्ति के वंशज, या इस तरह के अलावा अन्य किसी भी व्यक्ति पर निर्भर नहीं है, जो हिंदू अविभाजित परिवार का सदस्य होने, व्यक्तिगत के एक रिश्तेदार का मतलब उनके समर्थन या रखरखाव के लिए व्यक्ति या हिंदू अविभाजित परिवार. विकलांग आश्रित काफी सामान्य कार्य के लिए ऐसे व्यक्ति की क्षमता को कम करने या एक लाभकारी रोजगार में उलझाने का प्रभाव है एक पंजीकृत चिकित्सक द्वारा प्रमाणित है, जो एक शारीरिक या मानसिक विकलांगता से पीड़ित हो जाना चाहिए. अनुमति दी जाए कटौती वास्तव में विकलांग आश्रित के इलाज के लिए निर्धारिती द्वारा किए गए व्यय उस राशि से कम है या यह अधिक है, भले ही एक निर्धारित राशि का है. कटौती के निर्धारित राशि (एक) रुपये है. विकलांग आश्रित एक अस्पताल, नर्सिंग होम, चिकित्सा संस्था या विकलांग व्यक्तियों की देखभाल के लिए एक संस्था होने के लिए केन्द्र सरकार द्वारा अधिसूचित किसी अन्य संस्था में पिछले वर्ष के दौरान कम नहीं 182 से अधिक दिनों के लिए भर्ती कराया गया है जहां एक मामले में 2,400 और शुल्क या शुल्क जैसे अस्पताल, नर्सिंग होम या संस्था, और (ख) रुपये को देय हैं. 600, किसी भी अन्य मामले में. प्रासंगिक पिछले वर्ष के दौरान विकलांग आश्रित के किसी भी अगर किसी भी मामले में, कटौती की राशि, आय से कम होने की आवश्यकता है. इसके अलावा, इस धारा के तहत कटौती केवल एक विकलांग आश्रित के संबंध में अनुमति दी है निर्धारिती एक से अधिक विकलांग आश्रित के इलाज पर व्यय हो सकता है, भले ही.

वित्त अधिनियम, 1981

12.2 वित्त अधिनियम अर्थात् धारा 80 डी, के प्रावधानों में निम्न परिवर्तन कर दिया है:

1 चिकित्सा व्यय की लागत में काफी वृद्धि को देखते हुए, कटौती की मात्रा रुपये के मौजूदा स्तर से उठाया गया है. रुपये के लिए 2,400. 4,800 रुपये और से. रुपये के लिए 600. 1,200.

प्र.20. प्रासंगिक पिछले वर्ष के दौरान विकलांग आश्रित के आय से कटौती की राशि की कमी की आवश्यकता के मौजूदा प्रावधान हटा दिया गया है.

(3) आश्रित विकलांग चुना किसी भी एक के संबंध में कटौती सीमित प्रावधान हटा दिया गया है. दूसरे शब्दों में, निर्धारिती उसकी विकलांग आश्रितों में से हर एक के संबंध में निर्धारित राशि की कटौती प्राप्त करने के लिए पात्र होगा.

वित्त अधिनियम, 1981

12.3 इन प्रावधानों 1982/01/04 से प्रभावी होगा और, तदनुसार, आकलन वर्ष 1982-83 और बाद के वर्षों के संबंध में लागू होगा.

[वित्त अधिनियम की धारा 9]

वित्त अधिनियम, 1981

धारा 80M और नौवीं अनुसूची - आयकर अधिनियम को नौवीं अनुसूची में इलेक्ट्रॉनिक उद्योग के कुछ क्षेत्रों का समावेश

आयकर अधिनियम को 13.1 नौवीं अनुसूची अर्थात् निम्नलिखित टैक्स रियायतें, के हकदार वर्तमान में कर रहे हैं जो प्राथमिकता उद्योगों की एक सूची है:

1 खंड 80M तहत, पूर्ण कटौती फ़रवरी 28, 1975 के बाद का गठन और कंपनी अधिनियम, 1956 के तहत पंजीकृत एक भारतीय कंपनी से एक घरेलू कंपनी द्वारा प्राप्त लाभांश के माध्यम से आय के संबंध में दी गई है और निर्माण या उत्पादन में विशेष रूप से या लगभग विशेष रूप से लगे हुए अर्थात् नौवीं अनुसूची में विनिर्दिष्ट निम्नलिखित लेख या चीजों में से किसी एक या एक से अधिक की:

1 अलौह धातुओं.

प्र.20. फेरो मिश्र और विशेष स्टील्स.

(3) स्टील कास्टिंग और फोर्जिंग.

(4) इलेक्ट्रिक मोटर्स.

प्र.5. औद्योगिक और कृषि मशीनरी.

प्र.6. पृथ्वी से बढ़ मशीनरी.

प्र.7.        मशीन टूल्स.

8 उर्वरक, अर्थात्, अमोनियम सल्फेट, अमोनियम सल्फेट नाइट्रेट (डबल नमक), अमोनियम नाइट्रेट, कैल्शियम अमोनियम नाइट्रेट (nitrolime पत्थर), अमोनियम क्लोराइड, अधिभास्वीय, यूरिया और नाइट्रोजन और ऐसे अमोनियम फॉस्फेट, फास्फोरस के रूप में, दोनों युक्त सिंथेटिक मूल के मिश्रित उर्वरकों, अमोनियम सल्फेट फॉस्फेट और अमोनियम nitrophosphate.

9 सोडा ऐश.

10 कास्टिक सोडा.

प्र।11. वाणिज्यिक वाहन.

प्र.12.     जहाजों.

प्र.13. टायर और ट्यूब.

प्र.14. कागज, लुगदी और अखबारी कागज.

प्र.15.     सीमेंट.

प्र.16. कीटनाशकों.

प्र.17. (सोडा एश और क्रमशः आइटम 9 और 10 में उल्लेख किया है कास्टिक सोडा के अलावा अन्य) अकार्बनिक भारी रसायन.

प्र.18. कार्बनिक भारी रसायन.

प्र.19. औद्योगिक विस्फोटक.

प्र.20. धारा 5 (1) (xxa) संपत्ति कर अधिनियम की, एक निर्धारिती, निर्माण के व्यापार पर ले जाने का मुख्य उद्देश्य के साथ स्थापित कंपनियों में इक्विटी शेयरों के मूल्य के संबंध में संपत्ति कर से छूट के हकदार है निर्माण या पाँच प्रारंभिक आकलन के वर्षों के लिए किसी भी सीमा के बिना आयकर अधिनियम को नौवीं अनुसूची में सूची में विनिर्दिष्ट किसी एक या एक से अधिक लेख या चीजों का उत्पादन.

वित्त अधिनियम, 1981

हाल के वर्षों में 13.2, इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग के अतिरिक्त रोजगार सृजन की दृष्टि से महत्व ग्रहण कर लिया और हमारे निर्यात के लिए आगे आ गया है. इस उद्योग के लिए एक और प्रोत्साहन देने के क्रम में वित्त अधिनियम अर्थात् नौवीं अनुसूची में आइटम नंबर 33 के रूप में इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग के निम्नलिखित क्षेत्रों को शामिल किया गया है:

"इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और कच्चे माल कंप्यूटर; और peripherals; संचार उपकरण; प्रक्रिया नियंत्रण, उपकरण, औद्योगिक और व्यावसायिक ग्रेड इलेक्ट्रॉनिक उपकरण. "

वित्त अधिनियम, 1981

13.3 वित्त अधिनियम भी लाभांश घरेलू कंपनियों से प्राप्त की है कि खंड (क) उप - धारा (1) के परिणाम के साथ उसमें नई आइटम नंबर 33 शामिल करने के लिए कुछ खास अंतर - कॉर्पोरेट लाभांश के संबंध में कटौती करने के लिए संबंधित खंड 80M का संशोधन किया गया है विनिर्माण भारतीय कंपनियों से पिछले पैराग्राफ में निर्दिष्ट निर्दिष्ट इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों में ऐसी कंपनियों की कुल आय की गणना में पूरी तरह से घटाया होगा. नौवीं अनुसूची में विनिर्दिष्ट इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों उद्योग के शामिल किए जाने का एक और परिणाम व्यक्तियों और हिंदू अविभाजित परिवारों पांच के लिए निर्दिष्ट इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के विनिर्माण कंपनियों के इक्विटी शेयरों के मूल्य के संबंध में संपत्ति कर से छूट को पूरा करने के हकदार होंगे कि होगा किसी भी सीमा के बिना प्रारंभिक आकलन साल.

वित्त अधिनियम, 1981

13.4 इन प्रावधानों 1982/01/04 से प्रभावी होगा और, तदनुसार, आकलन वर्ष 1982-83 और बाद के वर्षों के संबंध में लागू होगा.

[धारा 11 और वित्त अधिनियम के 23]

वित्त अधिनियम, 1981

पुस्तक प्रकाशन उद्योग के लिए कर रियायतों की एक्सटेंशन - धारा 80QQ

14.1 अनुभाग 80QQ के तहत, मुद्रण और किताबें, या छपाई की गतिविधि के बिना पुस्तकों के प्रकाशन के प्रकाशन के भारत में एक व्यापार पर ले जाने के लिए किसी भी व्यक्ति, के बराबर राशि का, उसकी कर योग्य आय की गणना में, एक कटौती के हकदार है 20 प्रति इस तरह के व्यापार के लाभ और लाभ का प्रतिशत. इस कटौती के लिए ऊपर स्वीकार्य और आकलन वर्ष 1980-81 सहित था. तो मुद्रित पुस्तकें भी उसके द्वारा प्रकाशित कर रहे हैं जब तक कि इस धारा के तहत कटौती, पुस्तकों की छपाई का कारोबार करता है जो एक निर्धारिती को स्वीकार्य नहीं है. इस खंड के प्रयोजनों के लिए, अभिव्यक्ति "किताबें" अखबारों, पत्रिकाओं, पत्रिकाओं, डायरी, ब्रोशर, पर्चे और एक समान प्रकृति के अन्य प्रकाशनों को शामिल नहीं करता.

वित्त अधिनियम, 1981

भारत में पुस्तक प्रकाशन उद्योग के लिए निरन्तर प्रोत्साहन प्रदान करने की दृष्टि से 14.2, वित्त अधिनियम निर्धारण वर्ष 1981-82 के साथ शुरुआत और आकलन वर्ष 1985-86 के समाप्त होने के पाँच आकलन वर्ष की अवधि के लिए आगे इस टैक्स रियायत का लाभ बढ़ा दिया गया है .

वित्त अधिनियम, 1981

14.3 यह प्रावधान 1981/01/04 से प्रभाव के साथ लागू हो गया है.

[वित्त अधिनियम की धारा 12]

वित्त अधिनियम, 1981

शेयर विनिर्देशों के बिना व्यक्तियों की कई संघों के माध्यम से कर परिहार प्रतिक्रिया करने के लिए प्रावधान - धारा 86 और नई धारा 167A

धारा 4 के तहत 15.1, आयकर हर व्यक्ति की पिछले वर्ष की कुल आय के संबंध में वार्षिक वित्त अधिनियम में निर्दिष्ट दर या दरों पर एक आकलन वर्ष के लिए प्रभार्य है. अभिव्यक्ति "व्यक्ति", अन्य बातों के साथ, व्यक्तियों का एक संघ में शामिल करने के लिए धारा 2 (31) में परिभाषित किया गया है. अभिव्यक्ति "व्यक्तियों की एसोसिएशन" आयकर अधिनियम में परिभाषित नहीं किया गया है. हालांकि, सुप्रीम कोर्ट व्यक्तियों का एक संघ बनाने के लिए, सदस्यों को किसी भी आय के उत्पादन के उद्देश्य के लिए एक साथ शामिल होना होगा कि एक मामले में देखा गया है. दो या दो से अधिक व्यक्तियों को स्वेच्छा से एक निश्चित उद्देश्य के लिए एक साथ संयुक्त केवल अगर व्यक्तियों का एक संघ का गठन किया जा सकता है. अत: सदस्यों की ओर से इच्छा व्यक्तियों के एक संघ की एक आवश्यक घटक है.

वित्त अधिनियम, 1981

मौजूदा प्रावधानों के तहत 15.2, व्यक्तियों का एक संघ की आय एक व्यक्ति पर लागू वार्षिक वित्त अधिनियम में निर्दिष्ट दरों पर एक अलग निर्धारणीय इकाई की आय के रूप में आयकर करने का आरोप लगाया है. इसके अलावा, व्यक्तियों का एक संघ के एक सदस्य के मामले में, कोई कर ऐसे सदस्य आयकर पहले से ही संघ द्वारा भुगतान किया गया है जिस पर व्यक्ति का संघ से प्राप्त करने के हकदार है जो राशि के किसी भी हिस्से पर देय है. इस तरह भाग, हालांकि, इस तरह के सदस्य के मामले में लागू आयकर की दर निर्धारित करने के लिए ध्यान में रखा है. दूसरे शब्दों में, व्यक्तियों का संघ से आय की हिस्सेदारी दर उद्देश्यों के लिए ही इस तरह के सदस्यों के आकलन में शामिल किया जाता है.

वित्त अधिनियम, 1981

15.3 यह व्यक्तियों की एसोसिएशन के मूल्यांकन से संबंधित मौजूदा प्रावधानों यह गठन के सदस्यों के शेयरों को निर्दिष्ट के बिना व्यक्तियों के संघ के गठन से कुछ व्यक्तियों द्वारा दुरुपयोग किया गया है कि पाया गया है. ऐसे मामलों में काम करने का ढंग एक उच्च आय के साथ एक निर्धारिती उनमें से प्रत्येक को हकीकत में निर्धारिती की आय क्या है की एक छोटा सा हिस्सा घोषित करने के साथ, व्यक्तियों के संघों की एक बड़ी संख्या है कि बनाता है. इस उपकरण के तहत, व्यक्तियों की एसोसिएशन की आय का कोई हिस्सा भी सदस्यों के शेयरों के बाद से दर प्रयोजनों के लिए अपने सदस्यों के आकलन में शामिल किया जा सकता है अनिर्दिष्ट छोड़ दिया जाता है और देखभाल के सदस्यों नहीं है यह सुनिश्चित करने के लिए लिया जाता है व्यक्तियों की एसोसिएशन के जीवन के दौरान किसी भी आय प्राप्त करते हैं. तदनुसार, आयकर केवल या छूट की सीमा से नीचे मामलों की व्यापकता, में, यह है के बाद से कर के लिए उत्तरदायी नहीं हो सकता है जो अपनी आय पर व्यक्तियों की एसोसिएशन द्वारा देय है. इस व्यवस्था का शुद्ध परिणाम वास्तव में ऐसी आय प्राप्त करने का हकदार है और कौन है जो निर्धारिती एक पूरी उसके पास से कारण है कि कर के केवल एक बहुत छोटा सा अंश भुगतान करता है के रूप में व्यक्तियों की एसोसिएशन के इस तरह के आय diverts है.

वित्त अधिनियम, 1981

15.4 सदस्यों के शेयरों को परिभाषित करने के बिना व्यक्ति का कई संघों के सृजन के माध्यम से कर परिहार पर इस तरह के प्रयास प्रतिक्रिया करने के क्रम में वित्त अधिनियम प्रदान करने के लिए एक नई धारा 167A डाला गया है कि जहां व्यक्तियों का एक संघ (के सदस्यों की हिस्सेदारी ऐसे एसोसिएशन की आय में) एक कंपनी या एक सहकारी समिति अनिश्चित या अनजान हैं नहीं किया जा रहा है, कर अधिकतम सीमांत दर पर इस तरह के सहयोग की वजह से कुल आय पर वसूल किया जाएगा. इस प्रयोजन के लिए अभिव्यक्ति "अधिकतम सीमांत दर" के रूप में निर्दिष्ट व्यक्तियों के एक संघ के मामले में आय का उच्चतम स्लैब के संबंध में लागू (यदि कोई हो, आयकर पर अधिभार सहित) आयकर की दर का मतलब प्रासंगिक वर्ष के अधिनियम वित्त. उप - धारा (2) खंड के 167A, ऐसे एसोसिएशन की आय के किसी भी भाग में लोगों की ऐसी एसोसिएशन के सदस्यों की व्यक्तिगत शेयरों अनिश्चित या अनजान हैं जहां यह प्रावधान है कि एसोसिएशन द्वारा देय आयकर की कुल होगी -

(मैं) के सदस्यों के शेयरों अधिकतम सीमांत दर पर अनिश्चित या अज्ञात हैं जो इस तरह कुल आय की ओर से गणना की आयकर की राशि; और

(Ii) अगर यह थे एसोसिएशन कुल आय के इस तरह के शेष भाग पर प्रभार्य हो गया होता, जिसके साथ सदस्यों के शेयरों अनिश्चित या अज्ञात हैं, जिसमें इसकी कुल आय, आयकर की राशि की शेष राशि के संबंध में इसकी कुल आय.

इस प्रयोजन के लिए, यह ऐसे शेयर एसोसिएशन के गठन की तारीख को या उसके बाद किसी भी समय ascertainable नहीं कर रहे हैं, तो आय में सदस्यों की हिस्सेदारी अनिश्चित या अज्ञात के रूप में माना जाएगा कि निर्धारित किया गया है.

वित्त अधिनियम, 1981

15.5 वित्त अधिनियम भी अनुभाग 167A, जिसका शेयर में एसोसिएशन के सदस्यों में से प्रत्येक के तहत निर्धारणीय है जो व्यक्तियों के एक संघ के मामले में है कि प्रदान करने के लिए धारा 86 के खंड में एक स्पष्टीकरण (वी) डालने से धारा 86 में संशोधन किया गया है आय या ऐसी एसोसिएशन की आय का हिस्सा एसोसिएशन के सदस्य की आय पर लागू आयकर की दर का निर्धारण करने के प्रयोजनों के लिए, अनिश्चित या अज्ञात इच्छाशक्ति है, कुल में बराबर का हिस्सा प्राप्त करने के हकदार नहीं समझा जा संघ की इस तरह की कुल आय और संघ की कुल आय की कुल आय या भाग में ऐसे सदस्यों की व्यक्तिगत शेयर की आय या भाग तदनुसार निर्धारित किया जाएगा.

वित्त अधिनियम, 1981

इस प्रकार के रूप उक्त प्रावधान का 15.6 असर होगा:

1 अपनी आय के पूरे में व्यक्तियों के एक संघ के सदस्यों के शेयरों अनिश्चित या अज्ञात कहाँ हैं, संघ अपनी पूरी आय पर अधिकतम सीमांत दर पर आय कर के दायरे में होगा. इसके अलावा, इस तरह के संघ के एक सदस्य की आय को लागू करने के लिए आयकर की दर का निर्धारण करने के प्रयोजनों के लिए, हर सदस्य संघ की कुल आय में बराबर का हिस्सा है और राशि के प्राप्त करने का हकदार माना जाएगा ताकि निर्धारित आय दर प्रयोजनों के लिए अपने आकलन में शामिल किया जाएगा.

प्र.20. अपनी आय का केवल एक हिस्सा अनिश्चित या अज्ञात हैं जिसमें व्यक्तियों के एक संघ के सदस्यों के शेयरों, संघ इस तरह के हिस्से के संबंध में अधिकतम सीमांत दर पर आय कर के दायरे में हो जाएगा, जहां जबकि अपनी आय का संतुलन जो में सदस्यों के शेयरों विशिष्ट हैं, सामान्य दरों पर प्रभार्य होगा. इसके अलावा, इस तरह के संघ के एक सदस्य की आय को लागू करने के लिए आयकर की दर का निर्धारण करने के प्रयोजन के लिए, हर सदस्य में एसोसिएशन की कुल आय के इस भाग में बराबर का हिस्सा पाने की हकदार हो समझा जाएगा सदस्यों के शेयरों अनिश्चित या अज्ञात हैं और सदस्यों के शेयरों निर्दिष्ट कर रहे हैं, जिसमें एसोसिएशन की आय का वह हिस्सा में सदस्य के शेयर की वृद्धि के रूप में शेयर की राशि तो, जो निर्धारित, में शामिल किया जाएगा दर प्रयोजनों के लिए सदस्य का मूल्यांकन.

वित्त अधिनियम, 1981

15.7 इन प्रावधानों 1981/01/04 से प्रभावी में आ गए और आकलन वर्ष 1981-82 और बाद के वर्षों के संबंध में तदनुसार लागू कर रहे हैं.

[धारा 13 और वित्त अधिनियम के 16]

वित्त अधिनियम, 1981

मौखिक ट्रस्टों की रचना के माध्यम से कर परिहार प्रतिक्रिया करने के लिए प्रावधान - धारा 160 और नई धारा 164A

धारा 160 के तहत 16.1, अभिव्यक्ति "प्रतिनिधि निर्धारिती", लेखन में एक विधिवत निष्पादित साधन द्वारा घोषित एक ट्रस्ट के तहत नियुक्त एक ट्रस्टी भी शामिल है कि क्या (मुसलमान वक्फ मान्य अधिनियम, 1913 के तहत मान्य है जो किसी भी वक्फ विलेख सहित) वसीयती या अन्यथा.

अब तक, एक ट्रस्ट के तहत नियुक्त एक ट्रस्टी वह लिखित रूप में एक विधिवत निष्पादित साधन द्वारा घोषित एक ट्रस्ट के तहत नियुक्त किया गया है कहा नहीं जा सकता है के बाद से मौखिक रूप से इस प्रावधान के दायरे में नहीं किया गया था की घोषणा की. इस तरह के एक ट्रस्ट के संदर्भ बाद में लेखन के लिए कम हो गई थी तथ्य यह है कि इस स्थिति को बदल नहीं किया. नतीजतन, वर्गों प्रतिनिधि निर्धारिती से संबंधित 160-167 में निहित प्रावधानों के मौखिक ट्रस्टों के मामले में लागू नहीं कर रहे थे और उसी के अनुसार इस तरह के एक ट्रस्ट के आय के तहत लागू सामान्य दरों पर एक अलग इकाई के रूप में आय कर के दायरे में था वार्षिक वित्त अधिनियमों. यह एक विवेकाधीन विश्वास के मामले में मौखिक रूप से बनाए गए इस प्रकार है, अधिकतम सीमांत दर पर इस तरह के विश्वास की आय पर टैक्स के आरोप से संबंधित धारा 164 के प्रावधानों को भी लागू नहीं किया गया. मौखिक ट्रस्टों की रचना के माध्यम से कर परिहार के प्रयास का प्रतिकार करने की दृष्टि से, वित्त अधिनियम, पहले उदाहरण में प्रदान करने के लिए (1) धारा 160 की उपधारा में एक नया खंड (वी) डाला गया है कि के तहत नियुक्त एक ट्रस्टी एक मौखिक विश्वास है कि वह प्राप्त करता है या की ओर से या किसी भी व्यक्ति के लाभ के लिए प्राप्त करने के हकदार है जो आय के संबंध में एक "प्रतिनिधि निर्धारिती" होगा. वित्त अधिनियम भी धारा 160 के खंड (चतुर्थ) के प्रयोजनों के लिए एक नया स्पष्टीकरण डाला गया है (1). स्पष्टीकरण के तहत, (मुसलमान वक्फ मान्य अधिनियम, 1913 के तहत मान्य है जो एक वक्फ विलेख सहित) लेखन में एक विधिवत निष्पादित साधन द्वारा घोषित नहीं किया जाता है जो एक विश्वास लिखित रूप में एक विधिवत निष्पादित साधन द्वारा घोषित एक विश्वास होना माना जाएगा अगर न्यासी या न्यासियों द्वारा और विश्वास का उद्देश्य या उद्देश्यों के बाहर स्थापित करने पर हस्ताक्षर किए लेखन में एक बयान, न्यासी या न्यासियों, लाभार्थी या लाभार्थियों और विश्वास संपत्ति का विवरण निर्धारित समय के भीतर तैयार किया है और आयकर अधिकारी को भेजा है सीमा. न्यास 1 जून 1981 से पहले घोषित कर दिया गया है, निर्धारित समय सीमा 1 सितंबर 1981 हो जाएगा और किसी भी अन्य मामले में, विश्वास की घोषणा की तारीख से तीन महीने. धारा 160 के खंड के प्रयोजनों (वी) के लिए (1), अभिव्यक्ति "मौखिक ट्रस्ट", मुसलमान वक्फ मान्य कानून के तहत मान्य है जो किसी भी वक्फ विलेख सहित (लेखन में एक विधिवत निष्पादित साधन द्वारा घोषित नहीं किया जाता है जो एक विश्वास का मतलब 1913) और जो भी लिखित रूप में एक विधिवत निष्पादित साधन द्वारा घोषित एक विश्वास होना करने के लिए नए स्पष्टीकरण 1 के तहत नहीं समझा जाता है.

वित्त अधिनियम, 1981

16.2 वित्त अधिनियम भी एक मौखिक विश्वास के मामले में टैक्स के आरोप के लिए उपलब्ध कराने के लिए एक नई धारा 164A डाला गया है. नई धारा 164A के तहत, एक ट्रस्टी प्राप्त करता है या एक मौखिक भरोसा के तहत की ओर से या किसी भी व्यक्ति के लाभ के लिए प्राप्त करने के हकदार है जो किसी भी आय अधिकतम सीमांत दर पर आय कर के दायरे में होगा. इस प्रयोजन के लिए अभिव्यक्ति "अधिकतम सीमांत दर" धारा 164 नीचे दिये गये स्पष्टीकरण 2 के रूप में एक ही अर्थ है (3). तदनुसार, "अधिकतम सीमांत दर" प्रासंगिक वर्ष के वित्त अधिनियम में निर्दिष्ट के रूप में व्यक्तियों के एक संघ के मामले में आय का उच्चतम स्लैब के संबंध में लागू (आयकर पर अधिभार सहित) आयकर की दर का मतलब है.

वित्त अधिनियम, 1981

इस प्रकार के रूप उपरोक्त प्रावधानों का 16.3 असर होगा:

. मैं एक मौखिक विश्वास, बाद में लिखित रूप में दर्ज की गई और निर्दिष्ट तरीके से आयकर अधिकारी को सूचित नहीं कर रहे हैं जिसका शर्तें, सभी मामलों में अधिकतम सीमांत दर पर आय कर के दायरे में होगा; और

द्वितीय. एक मौखिक विश्वास, शर्तें जिसका बाद में लिखित रूप में दर्ज की गई और निर्दिष्ट तरीके से आयकर अधिकारी को सूचित कर रहे हैं, लाभार्थियों के शेयरों अनिश्चित हैं मामलों में जहां अधिकतम सीमांत दर पर आय कर के दायरे में होना चाहिए और होगा अज्ञात है. हालांकि, इस तरह के शेयरों में जाना जाता है, जहां कर एक ही तरीके से और लाभार्थियों से लगाया या वसूली योग्य होगा के रूप में उसी हद तक न्यासियों से लगाया और बरामद किया जाएगा.

वित्त अधिनियम, 1981

16.4 इन प्रावधानों 1981/01/04 से प्रभावी में आ गए और आकलन वर्ष 1981-82 और बाद के वर्षों के संबंध में तदनुसार लागू कर रहे हैं.

[धारा 14 और वित्त अधिनियम के 15]

वित्त अधिनियम, 1981

कुछ मामलों में अग्रिम कर के भुगतान के लिए सीमा की स्थापना - धारा 208

17.1 आयकर (आदि लॉटरी, घोड़े दौड़ से जीता, से जीत के रास्ते से पूंजीगत लाभ या आय के अलावा अन्य) निर्धारिती की वर्तमान आय पर निर्दिष्ट तारीख से तीन बराबर किश्तों में हर वित्तीय वर्ष के दौरान अग्रिम में भुगतान करने की आवश्यकता है उत्तरदायी कहा वित्तीय वर्ष के बाद अगले आकलन वर्ष के लिए कर लिए. टैक्स अग्रिम करने निर्धारिती विषय की आय निर्धारित सीमा से अधिक है, जहां केवल एडवांस टैक्स देय है. एक कंपनी, एक स्थानीय प्राधिकारी और एक पंजीकृत फर्म के अलावा अन्य एक निर्धारिती के मामले में इस निमित्त विनिर्दिष्ट मौद्रिक सीमा रु था. 12,000. वित्त अधिनियम व्यक्तियों के मामले में छूट की सीमा बढ़ा दी हैं, (छूट सीमा से अधिक स्वतंत्र कुल आय होने के एक या अधिक सदस्यों के साथ उन लोगों की तुलना में अन्य) हिंदू अविभाजित परिवार, रुपये से आदि व्यक्तियों, अपंजीकृत फर्मों, संघों,. रुपये के लिए 12,000. 15,000. निर्धारिती की ऐसी श्रेणियों के संबंध में अग्रिम कर के भुगतान के प्रयोजन के लिए विनिर्दिष्ट मौद्रिक सीमा रु से उठाया गया है. रुपये के लिए 12,000. उनके मामले में छूट की सीमा के साथ मेल खाना करने के लिए 15,000. हालांकि, यह स्वतंत्र कुल आय छूट सीमा से अधिक के साथ एक या अधिक सदस्यों की हिंदू अविभाजित परिवारों के मामले में, इस संबंध में निर्दिष्ट सीमा रुपए के मौजूदा स्तर पर बनाए रखा गया है कि ध्यान दिया जाना चाहिए. केवल 12,000.

वित्त अधिनियम, 1981

17.2 इन प्रावधानों 1981/01/06 से प्रभावी में आ गए हैं.

[वित्त अधिनियम की धारा 17]

वित्त अधिनियम, 1981

धारा 252, 253, 256 और 269C - अपीलीय न्यायाधिकरण के सदस्य और संबंधित मामलों की योग्यता से संबंधित प्रावधानों का संशोधन

आयकर अधिनियम के तहत 18.1, एक आयकर अधिकारी द्वारा पारित एक आदेश से एक अपील अपीलीय सहायक आयुक्त में निहित है, और आयकर (अपील) के आयुक्त को कुछ मामलों में. द्वारा या निरीक्षण सहायक आयुक्त की मंजूरी के साथ पारित आदेशों से अपील आयकर (अपील) के आयुक्त को झूठ बोलते हैं. अपीलीय सहायक आयुक्त या आयुक्त (अपील) के एक आदेश से दूसरी अपील आयकर अपीलीय ट्रिब्यूनल में निहित है. आयकर आयुक्त द्वारा पारित निश्चित आदेश से अपील भी आयकर अपीलीय न्यायाधिकरण के लिए झूठ बोलते हैं. अन्य प्रत्यक्ष कर अधिनियमों अपीलीय न्यायाधिकरण को दायर किया जा सकता है जो अपीलों के संबंध में व्यावहारिक रूप से समान प्रावधान शामिल हैं.

वित्त अधिनियम, 1981

वर्तमान में 18.2, केन्द्र सरकार यह शक्तियों का प्रयोग और आयकर अधिनियम द्वारा अपीलीय न्यायाधिकरण को प्रदत्त कृत्यों का निर्वहन करने के लिए उचित समझे के रूप में कई न्यायिक और एकाउंटेंट सदस्यों से मिलकर एक अपीलीय ट्रिब्यूनल गठित करने का अधिकार है. अपीलीय न्यायाधिकरण में एक न्यायिक सदस्य या एक एकाउंटेंट सदस्य के रूप में नियुक्त किया जा रहा है के लिए योग्यता इस प्रकार हैं:

क न्यायिक सदस्य:

(मैं) व्यक्ति को कम से कम 10 साल के लिए एक सिविल न्यायिक पद के लिए आयोजित किया जाना चाहिए था,

(Ii) व्यक्ति कम से कम 3 साल के लिए, या (नहीं जीआर. तृतीय नीचे) केंद्रीय कानूनी सेवा का सदस्य होना चाहिए

(Iii) वह कम से कम 10 साल के लिए एक वकील के रूप में अभ्यास में किया जाना चाहिए था.

ख. लेखाकार सदस्य:

(मैं) व्यक्ति एक चार्टर्ड एकाउंटेंट के रूप में या एक पंजीकृत लेखाकार के रूप में या आंशिक रूप से एक चार्टर्ड एकाउंटेंट के रूप में और आंशिक रूप से एक पंजीकृत लेखाकार के रूप में कम से कम 10 साल के लिए अभ्यास में किया गया, या होना चाहिए था

(Ii) वह कम से कम 3 साल के लिए आयकर की एक सहायक आयुक्त के रूप में कार्य किया जाना चाहिए था.

वित्त अधिनियम, 1981

18.3 वित्त अधिनियम न्यायिक और लेखाकार आयकर अपीलीय न्यायाधिकरण के सदस्य, अर्थात् के रूप में नियुक्ति के लिए योग्यता में निम्न संशोधन किया गया है:

1 कम से कम 3 साल के लिए सेंट्रल कानूनी सेवा के एक सदस्य के लिए किया गया है और उस सेवा या किसी समकक्ष या उच्च पद की ग्रेड मैं में एक के बाद आयोजित किया गया है जो एक व्यक्ति को आयकर अपीलीय न्यायाधिकरण के एक न्यायिक सदस्य के रूप में नियुक्ति के लिए पात्र होंगे. वह कम से कम 3 साल के लिए नहीं ग्रेड III नीचे एक के बाद आयोजित किया था, तो अब तक केन्द्रीय कानूनी सेवा के एक सदस्य ऐसी नियुक्ति के लिए योग्य है.

प्र.20. अपीलीय न्यायाधिकरण के एक न्यायिक सदस्य के रूप में नियुक्ति के लिए योग्यता व्यक्तियों के मामले में उच्च न्यायालय के एक न्यायाधीश एक वकील के रूप में एक न्यायिक पद धारण करने या अभ्यास के रूप में नियुक्ति के लिए योग्यता के साथ एक सममूल्य पर लाया गया है. तदनुसार, एक व्यक्ति, आयकर अपीलीय न्यायाधिकरण के एक न्यायिक सदस्य के रूप में नियुक्ति के लिए योग्य होगा अगर

. एक वह कम से कम 10 साल के लिए भारत के राज्य क्षेत्र में एक न्यायिक कार्यालय में आयोजित किया गया है;

बी. वह कम से कम 10 साल के लिए एक वकील के रूप में अभ्यास में किया गया है.

प्रयोजन के लिए, एक व्यक्ति भारत के राज्यक्षेत्र में न्यायिक कार्यालय में आयोजित किया गया है अवधि के दौरान जो कंप्यूटिंग में, व्यक्ति को एक वकील किया गया है या एक ट्रिब्यूनल का एक सदस्य या किसी भी पद के कार्यालय में आयोजित किया गया है, जिसके दौरान किसी भी अवधि को शामिल किया जाएगा संघ या कानून का विशेष ज्ञान की आवश्यकता होती है एक राज्य के अधीन. इसके अलावा, एक व्यक्ति एक अधिवक्ता की गई है अवधि के दौरान जो कंप्यूटिंग में, एक व्यक्ति विशेष की आवश्यकता होती है, न्यायिक कार्यालय या एक न्यायाधिकरण या संघ या राज्य के अधीन किसी अन्य पद के एक सदस्य के कार्यालय में आयोजित किया गया है, जिसके दौरान किसी भी अवधि को शामिल किया जाएगा वह एक वकील बन जाता है कानून का ज्ञान होने के बाद.

(3) कम से कम 3 साल के लिए आयकर, या किसी भी अन्य समकक्ष या उच्च पद के आयुक्त के पद पर कार्य किया है जो भारतीय आयकर सेवा, ग्रुप ए से संबंधित एक व्यक्ति को एक लेखाकार सदस्य के रूप में नियुक्ति के लिए पात्र होंगे.

वित्त अधिनियम, 1981

एक विभागीय अपील के मामले में छोड़कर प्रस्तावित सीमा शुल्क ट्रिब्यूनल, ट्रिब्यूनल में अपील दाखिल करने के लिए शुल्क से संबंधित प्रावधानों के तहत 18.4 रुपये हो जाएगा. 200 आयकर अधिनियम के तहत इस तरह के शुल्क रुपये में तय हो गया था. 125 केवल. वित्त अधिनियम में प्रस्तावित सीमा शुल्क ट्रिब्यूनल के तहत निर्धारित स्तर तक आयकर अपीलीय न्यायाधिकरण के समक्ष अपील के लिए फीस बढ़ा दी हैं. उच्च न्यायालय के संदर्भ में आवेदन दाखिल करने के लिए शुल्क भी रुपये से बढ़ जाती है. रुपये के लिए 125. 200, प्रस्तावित सीमा शुल्क ट्रिब्यूनल के संबंध में दिए गए.

वित्त अधिनियम, 1981

ट्रिब्यूनल में अपील के लिए और हाई कोर्ट के संदर्भ में आवेदन दाखिल करने के लिए शुल्क की स्थापना के संबंध में 18.5 प्रावधानों 1981/01/06 से प्रभाव में ले लिया है. तदनुसार, मूल्यांकन कार्यवाही 31-3-1971 लेकिन उसके बाद 1981/01/06 से पहले शुरू किए गए थे, जहां एक मामले में, देय शुल्क रूपये होगा. 125, जबकि मूल्यांकन कार्यवाही 31-5-1981, रुपये की बढ़ी फीस के बाद शुरू किया गया है, जहां एक मामले में. 200 देय हो जाएगा. इस प्रयोजन के लिए मूल्यांकन कार्यवाही, निर्धारिती एक नोटिस आयकर रिटर्न या निर्धारिती स्वेच्छा से आयकर रिटर्न दायर किया है जिस तारीख को दाखिल करने के लिए उस पर फोन के साथ परोसा गया था जिस पर तिथि पर शुरू किया गया है समझा जाएगा पहले जो भी है. इस प्रकार, विवाद सवाल करने के लिए मूल्यांकन करने के लिए संबंधित है, जहां रुपये की मौजूदा शुल्क या नहीं. 125 रुपए या की बढ़ी फीस. 200 मूल्यांकन कार्यवाही शुरू की है करने के लिए समझा रहे हैं, जिस पर तारीख पर निर्भर करेगा निर्धारिती द्वारा देय होगा.

[धारा 18, 19, 20 और वित्त अधिनियम के 21]

वित्त अधिनियम, 1981

ग्यारहवीं अनुसूची का संशोधन

19.1 ग्यारहवीं अनुसूची कतिपय निर्दिष्ट उद्देश्यों के लिए लेख या कम प्राथमिकता के चीजों की सूची में शामिल है और अर्थात् आयकर अधिनियम के निम्नलिखित प्रावधानों के लिए प्रासंगिक है:

1 अनुभाग 32A के तहत, निर्माण के व्यवसाय के उद्देश्यों के लिए नई मशीनरी या संयंत्र स्थापित किया गया है जो एक निर्धारिती, ग्यारहवीं अनुसूची में विनिर्दिष्ट कम प्राथमिकता के एक लेख या बात के अलावा अन्य किसी भी लेख या बात है, के उत्पादन या निर्माण, एक के हकदार है उसकी कर योग्य लाभ की गणना में ऐसी मशीनरी या संयंत्र की वास्तविक लागत का 25 फीसदी की दर से निवेश भत्ता.

प्र.20. खंड 80CC के तहत, एक व्यक्ति, एक हिन्दू अविभाजित परिवार या गोवा, दमन और दीव तथा दादरा और नगर हवेली के संघ शासित क्षेत्रों में संपत्ति के समुदाय की प्रणाली द्वारा संचालित विवाहित जोड़ों से मिलकर व्यक्तियों का एक संघ में, एक कटौती के हकदार है कुछ शर्तों के अधीन ग्यारहवीं अनुसूची में विनिर्दिष्ट कम प्राथमिकता के किसी भी लेख या बात के निर्माण में लगे लोगों की तुलना में अन्य बातों के साथ, कुछ औद्योगिक कंपनियों, के शेयरों की कीमत के संबंध में कर योग्य आय की गणना,.

(3) धारा 80-I के तहत, एक नव स्थापित औद्योगिक उपक्रम से कोई लाभ और लाभ प्राप्त कर लेता है, जो एक निर्धारिती कुछ शर्तों के अधीन इस तरह के लाभ और लाभ का एक निर्धारित प्रतिशत, की, कर योग्य आय की गणना में, एक कटौती के हकदार है. इस संबंध में निर्धारित शर्तों के ऐसे औद्योगिक उपक्रम ग्यारहवीं अनुसूची में सूची में विनिर्दिष्ट किसी लेख या बात के निर्माण या उत्पादन में लगे हुए किया जाना चाहिए नहीं है.

एक छोटे पैमाने पर औद्योगिक उपक्रम (1) और (3) यह कम प्राथमिकता के किसी भी लेख या बात के निर्माण या उत्पादन में लगे हुए किया जा सकता है, भले ही इसके बाद के संस्करण में निर्दिष्ट कर रियायतें पाने का हकदार है, तथापि, है.

वित्त अधिनियम, 1981

वहाँ 19.2 कम प्राथमिकता के रूप में सूचीबद्ध उद्योगों में से कुछ के इलाज के लिए थोड़ा औचित्य हो दिखाई दिया. अर्थात्, निम्नलिखित लेख या बातें उधर से बाहर करने के लिए इतनी के रूप में एक समीक्षा पर वित्त अधिनियम ग्यारहवीं अनुसूची में संशोधन किया है:

8 टीवी रिसीवर सेट प्रसारण; (ट्रांजिस्टर सेट सहित) रेडियो; (कैसेट रिकार्डर और टेप डेक सहित) radiograms और टेप रिकार्डर.

प्र।11. बिजली के पंखे.

प्र.12.     घरेलू बिजली के उपकरणों, इस सूची में किसी अन्य मद के अंतर्गत आने वाले नहीं.

स्पष्टीकरण: "घरेलू बिजली के उपकरणों" सामान्य रूप से घरेलू और इस तरह, होटल, रेस्तरां, हॉस्टल, कार्यालयों, शिक्षण संस्थानों और अस्पतालों के रूप में स्थानों में इस्तेमाल इसी तरह के उपकरणों में इस्तेमाल बिजली के उपकरणों का मतलब है.

प्र.13. घर के फर्नीचर, बर्तन, क्रॉकरी और कटलरी इस सूची में किसी अन्य मद के अंतर्गत आने वाले नहीं.

प्र.14. प्रेशर कुकर.

प्र.15.     निर्वात बोतल और अन्य निर्वात वाहिकाओं.

प्र.16. मेज के बर्तन और sanitaryware.

प्र.17. ग्लास और कांच के बने पदार्थ.

प्र.18. चीनी मिट्टी के बरतन और porcelainware.

प्र.19. मोजाइक टाइल्स और टाइल घुटा हुआ.

प्र.20. जैविक सतह सक्रिय एजेंटों, सतह सक्रिय तैयारियाँ और कपड़े धोने की तैयारी साबुन युक्त किया जाए या नहीं.

प्र.21. सिंथेटिक डिटर्जेंट.

26 पिगमेंट, रंग, पेंट, enamels, वार्निश, अश्वेतों और सेल्यूलोज रोगन.

प्र.29. एम्पलीफायरों या जनता के समाधान के लिए उपयोग किसी अन्य उपकरण.

वित्त अधिनियम, 1981

19.3 यह प्रावधान 1982/01/04 से प्रभावी होगा और, तदनुसार, आकलन वर्ष 1982-83 और बाद के वर्षों के संबंध में लागू होगा.

[वित्त अधिनियम की धारा 24]

संपत्ति कर अधिनियम में संशोधन

वित्त अधिनियम, 1981

मौखिक ट्रस्टों के माध्यम से कर परिहार के लिए खामियों को दूर करने के उपाय - धारा 21

धारा 21 के तहत 20.1 (1), वार्ड, की एक अदालत प्रशासक जनरल, एक अधिकारी ट्रस्टी या किसी भी रिसीवर या प्रबंधक या किसी अन्य की ओर से या किसी भी ट्रस्टी पर संपत्ति का प्रबंधन करने के लिए एक अदालत के किसी भी आदेश के तहत नियुक्त किसी अन्य व्यक्ति एक ट्रस्ट के तहत नियुक्त जिसकी ओर से या जिसका लाभ के लिए पर एक व्यक्ति से पर लगाया और वसूली योग्य होगी लिखित में एक विधिवत निष्पादित साधन द्वारा घोषित की तरह ढंग से और उसी हद तक, उसके द्वारा आयोजित किसी भी संपत्ति के संबंध में संपत्ति कर के लिए शुल्क लिया जाता है ऐसी संपत्ति आयोजित कर रहे हैं.

वित्त अधिनियम, 1981

20.2 धारा 21 (4) विश्वास की संपत्ति में लाभार्थियों के शेयरों अनिश्चित या अनजान हैं जहां एक भी मामले में, इस तरह के विश्वास का शुद्ध धन की तरह ढंग से और उसी हद तक संपत्ति कर के दायरे में होगा कि प्रदान करता है इस पर लगाया और भारत का नागरिक है और अनुसूची मैं की मैं भाग में या 3 फीसदी की दर से निर्दिष्ट दरों पर भारत का निवासी है जो एक व्यक्ति से वसूली की जाएगी, के रूप में जो भी कोर्स राजस्व को अधिक फायदेमंद होगा .

वित्त अधिनियम, 1981

धारा 21 (1) या धारा 21 के 20.3 प्रावधानों (4) विश्वास के संदर्भ बाद में लेखन के लिए कम कर रहे हैं या नहीं, एक मौखिक विश्वास के तहत एक न्यासी या न्यासियों द्वारा आयोजित की संपत्ति पर लागू नहीं हैं.इस तरह के एक न्यास ऐसे न्यास बनाया गया था जब समय पर लिखित रूप में एक विधिवत निष्पादित साधन द्वारा घोषित किए जाने की नहीं माना जा सकता, क्योंकि यह है. यह कई निर्धारिती उचित संपत्ति कर देयता से परहेज अन्य बातों के साथ एक दृश्य के साथ मौखिक ट्रस्टों की एक बड़ी संख्या है, के निर्माण की युक्ति का सहारा है कि पाया गया है.

वित्त अधिनियम, 1981

मौखिक ट्रस्टों के माध्यम से कर परिहार को रोकने के दृष्टिकोण के साथ 20.4, वित्त अधिनियम अर्थात्, निम्नलिखित प्रावधान किया गया है:

1एक नए उप - धारा (4 क) संपत्ति कर के दायरे में संपत्ति एक मौखिक विश्वास के तहत एक ट्रस्टी द्वारा आयोजित कर रहे हैं जहां कि प्रदान करने के लिए धारा 21 में सम्मिलित किया गया है, संपत्ति कर पर लगाया जाता है और ऐसे में ट्रस्टी से बरामद किया जाएगा इस पर लगाया और भारत का नागरिक है और अनुसूची मैं की मैं भाग में या 3 फीसदी की दर से निर्दिष्ट दरों पर भारत का निवासी है जो एक व्यक्ति से वसूली योग्य होगा के रूप में ढंग की तरह है और उसी हद तक, जो भी कोर्स राजस्व के लिए अधिक फायदेमंद होगा.

प्र.20. एक मौखिक भरोसा है, हालांकि, लेखन में एक विधिवत निष्पादित साधन द्वारा घोषित एक ट्रस्ट के रूप में माना जाएगा यदि विश्वास का उद्देश्य बाहर स्थापित ट्रस्टी द्वारा हस्ताक्षर किए लिखित रूप में एक बयान, न्यासी, लाभार्थियों और ट्रस्ट संपत्ति के रूप में ब्यौरे निर्धारित समय सीमा के भीतर संपत्ति कर अधिकारी को भेजा है. इस संबंध में निर्धारित समय सीमा एक मौखिक भरोसा उस तारीख से पहले बनाया है और किसी भी अन्य मामले में किया गया है जहां 1981/01/06 से तीन महीने की अवधि है, विश्वास की घोषणा की तारीख से तीन महीने की अवधि.

वित्त अधिनियम, 1981

इस प्रकार के रूप में इन प्रावधानों का 20.5 शुद्ध प्रभाव हो जाएगा:

1शर्तें जिसका बाद में लेखन के लिए कम और ऊपर निर्दिष्ट के रूप में संपत्ति कर अधिकारी को सूचित नहीं किया गया है एक मौखिक भरोसा, भारत का नागरिक है और एक निवासी की है जो एक व्यक्ति के लिए लागू दरों पर संपत्ति कर के दायरे में हो जाएगा भारत या 3 फीसदी की दर से, जो भी कोर्स राजस्व को अधिक लाभकारी है.

प्र.20. एक मौखिक विश्वास, बाद में लेखन के लिए कम और निर्दिष्ट तरीके से संपत्ति कर अधिकारी को सूचित किया गया है जिसका शर्तें, एक व्यक्ति भारत का नागरिक और उन पर भारत के निवासी के लिए लागू दरों पर संपत्ति कर के दायरे में हो जाएगा ट्रस्ट संपत्ति में लाभार्थियों के शेयरों अनिश्चित या अज्ञात हैं अगर अनुसूची मैं की मैं भाग में या 3 फीसदी की दर से निर्दिष्ट, जो भी कोर्स राजस्व को अधिक लाभकारी है. हालांकि, ट्रस्ट संपत्ति में लाभार्थियों के शेयरों नियत या ascertainable कहां हैं, यह लाभार्थियों से लगाया और वसूली योग्य हो जाएगा, के रूप में संपत्ति कर एक ही तरीके से और उसी हद तक न्यासियों से पर और वसूली लगाया जाएगा.

वित्त अधिनियम, 1981

20.6 इन प्रावधानों वर्गों 160 और पैराग्राफ 16.1-16.3 में निर्दिष्ट आयकर अधिनियम की 164 में वित्त अधिनियम द्वारा किए गए संशोधनों के समान हैं.

वित्त अधिनियम, 1981

20.7 इन प्रावधानों 1981/01/04 से प्रभावी में आ गए और आकलन वर्ष 1981-82 और बाद के वर्षों के संबंध में तदनुसार लागू कर रहे हैं.

[वित्त अधिनियम की धारा 26]

वित्त अधिनियम, 1981

सदस्यों के शेयरों अनिश्चित या अज्ञात हैं जिसमें व्यक्तियों के संघों के माध्यम से कर परिहार के लिए खामियों को दूर करने के उपाय - नई अनुभाग 21AA और धारा 41

संपत्ति कर अधिनियम के तहत 21.1, व्यक्तियों और हिंदू अविभाजित परिवारों के कर योग्य संस्थाओं हैं लेकिन व्यक्तियों के एक संघ का शुद्ध धन पर संपत्ति कर के लिए शुल्क नहीं लिया जाता है.एक व्यक्ति या एक हिंदू अविभाजित परिवार व्यक्तियों का एक संघ का एक सदस्य है, व्यक्तियों के सहयोग से ऐसे सदस्य के हित के मूल्य नियमों के प्रावधानों के अनुसार निर्धारित और सदस्य का शुद्ध धन में includible है .

वित्त अधिनियम, 1981

21.2 उदाहरण कुछ निर्धारिती विशेष रूप से उचित कर देनदारी से बचने के लिए एक दृश्य के साथ उसमें सदस्यों के शेयरों को परिभाषित करने के बिना व्यक्तियों के संघों की एक बड़ी संख्या के निर्माण के लिए सहारा था, जहां सरकार की जानकारी में आया था.मौजूदा प्रावधानों के तहत ascertainable है जो संघ में सदस्य के हित की ही मूल्य उनकी कुल धन में includible है. तदनुसार, इस हद तक संघ में सदस्य के हित के मूल्य का पता लगाया या अज्ञात है नहीं किया जा सकता है, कोई संपत्ति कर उसके संबंध में ऐसे सदस्य द्वारा देय है.

वित्त अधिनियम, 1981

21.3 सदस्यों के शेयरों को परिभाषित करने के बिना व्यक्ति का कई संघों के माध्यम से कर परिहार पर इस तरह के प्रयास का मुकाबला करने के लिए, वित्त अधिनियम संघों के मामले में मूल्यांकन के लिए उपलब्ध कराने के लिए संपत्ति कर अधिनियम में एक नई धारा 21AA डाला गया है उसके संपत्ति में सदस्यों के शेयरों को परिभाषित नहीं है, जो व्यक्ति की.उप - धारा (1) नई धारा की 21AA संपत्ति कर के दायरे में संपत्ति (एक कंपनी या एक सहकारी समिति के अलावा अन्य) व्यक्तियों का एक संघ और कहा एसोसिएशन के सदस्यों की व्यक्तिगत शेयरों में से आयोजित कर रहे हैं जहां कि प्रदान करता है आय या अपने गठन की तारीख को या उसके बाद, अनिश्चित या अज्ञात हैं किसी भी समय संघ की संपत्ति, संपत्ति कर पर लगाया जाता है और इस पर लगाया है के रूप में तरह तरह और उसी हद तक इस तरह के सहयोग से बरामद किया जाएगा और भारत का नागरिक है और अनुसूची मैं की मैं भाग में या 3 फीसदी की दर से निर्दिष्ट दरों पर भारत का निवासी है जो एक व्यक्ति से वसूली, जो भी कोर्स राजस्व को अधिक लाभकारी है.

वित्त अधिनियम, 1981

(2) नई धारा 21AA की 21.4 उपधारा तरह के एक संघ द्वारा किए गए किसी भी व्यवसाय या पेशे रोक दिया गया है या इसे भंग कर रहा है, जहां जहां, संपत्ति कर अधिकारी इस तरह के शुद्ध धन के एक आकलन करने का अधिकार है कि प्रदान करता है एसोसिएशन कोई समाप्ति या विघटन हुआ था और जुर्माना की लेवी या उक्त अधिनियम के तहत किसी भी राशि प्रभार्य से संबंधित संपत्ति कर अधिनियम के अन्य प्रावधानों में आवश्यक संशोधनों के साथ इस तरह के मूल्यांकन के लिए लागू होगा मानो.

वित्त अधिनियम, 1981

खंड 21AA की 21.5 उप - धारा (3) व्यक्तियों का एक संघ पर एक दंड लगाने का संपत्ति कर अधिकारी या अपीलीय सहायक आयुक्त या आयुक्त (अपील) के अधिकार के, किसी के लिए (1) उपधारा में निर्दिष्ट चूक एसोसिएशन अपना कारोबार बंद कर दिया गया है या भंग कर दिया गया है, के बाद भी धारा 18 या संपत्ति कर अधिनियम की धारा 18A के तहत में करने के लिए भेजा.

वित्त अधिनियम, 1981

(4) नई धारा 21AA की 21.6 उप - धारा ऐसी समाप्ति या विघटन के समय में व्यक्तियों के संघ के एक सदस्य और मृतक है जो ऐसे व्यक्ति के लिए एक कानूनी प्रतिनिधि था जो हर व्यक्ति, संयुक्त रूप से और अलग - अलग उत्तरदायी होगा कि प्रदान करता है कर दंड की राशि या इस तरह के सहयोग से और संपत्ति कर अधिनियम के अन्य प्रावधानों द्वारा देय किसी भी अन्य योग भी इस तरह के मूल्यांकन या जुर्माना या अन्य राशि के लागू करने के संबंध में लागू होगा.

वित्त अधिनियम, 1981

21.7 उप - धारा (5) नई धारा 21AA की किसी भी निर्धारण वर्ष के संबंध में किसी भी समाप्ति या विघटन किसी भी कार्यवाही के बाद जगह लेता है उपधारा में निर्दिष्ट (4) से ऐसी कार्यवाही व्यक्तियों के खिलाफ जारी रखा जा सकता है, शुरू किया है जहां कि प्रदान करता है इन कार्रवाइयों में इस तरह के बंद या भंग करने और संपत्ति कर अधिनियम के प्रावधानों के समय पर खड़ा था, जिस पर मंच के हिसाब से लागू होंगे.

वित्त अधिनियम, 1981

21.8 नई धारा 21AA को स्पष्टीकरण विशेष रूप से प्रदान करता है कि संघ का शुद्ध धन, खंड (xv) में निर्दिष्ट कुछ छूट, (XVI), (XXII), (XXIII) कम्प्यूटिंग में, (XXIV), (XXV), (XXVI (1) धारा 5 की उपधारा), (XXVII), (XXVIII) और (XXIX) को ध्यान में नहीं लिया जाएगा.दूसरे शब्दों में, व्यक्तियों का संघ का शुद्ध धन कंप्यूटिंग में, उक्त खंड में प्रदान की संपत्ति के बहिष्कार के बारे में प्रावधान लागू नहीं होगा.

वित्त अधिनियम, 1981

वित्त अधिनियम के 21.9 धारा 31 को भंग कर दिया गया है, जो संघ से संबंधित किसी मामले के संबंध में संपत्ति कर अधिनियम के तहत नोटिस हो सकता है कि उपलब्ध कराने के लिए नोटिस की सेवा से संबंधित धारा 41 में एक नई उपधारा (4) डाला गया है तुरंत उसके विघटन से पहले इस तरह के संघ के एक सदस्य था, जो किसी भी व्यक्ति पर कार्य किया.

वित्त अधिनियम, 1981

21.10 ये प्रावधान 1981/01/04 से प्रभावी में आ गए और आकलन वर्ष 1981-82 और बाद के वर्षों के संबंध में तदनुसार लागू कर रहे हैं.

[धारा 27 और वित्त अधिनियम के 31]


न्यायिक विश्लेषण

में समझाया - CWT में Mulam क्लब वी. [1991] 191 आईटीआर 370 (Ker.) alove परिपत्र निम्नलिखित टिप्पणियों के साथ समझाया गया था:

". . . उस परिपत्र सदस्यों के शेयरों अनिश्चित या अज्ञात हैं जिसमें व्यक्तियों के संघों के माध्यम से कर परिहार के लिए खामियों को दूर करने के उपाय बताते हैं. खंड डायरेक्ट टैक्स 1 अप्रैल 1989 से प्रभावी कानून (संशोधन) अधिनियम, 1987, और 1989 के वित्त अधिनियम द्वारा द्वारा संशोधित किया गया था. धारा 21AA निर्धारण वर्ष 1981-82 से आपरेशन में इस प्रकार है, लेकिन यह करने के लिए लागू करने और आकलन वर्ष 1980-81 के समावेशी नहीं है. . . . "(पी. 379)

वित्त अधिनियम, 1981

धारा 24, 26 और 27 - अपीलीय न्यायाधिकरण या उच्च न्यायालय के संदर्भ में आवेदन करने के लिए अपील के संबंध में फीस की वृद्धि

धारा 24 के अंतर्गत 22.1 (4) और (2) संपत्ति कर अधिनियम की धारा 26 रुपए का शुल्क. 125 अपीलीय न्यायाधिकरण के लिए अपील के संबंध में एक निर्धारिती द्वारा देय है.इसी तरह, रुपये की धारा 27 के तहत (1) एक शुल्क. 125 उच्च न्यायालय को एक संदर्भ आवेदन के संबंध में एक निर्धारिती द्वारा देय है. वित्त अधिनियम रुपये से इस संबंध में शुल्क देय में इजाफा किया है. रुपये के लिए 125. 200 मूल्यांकन कार्यवाही 31-3-1971 लेकिन उसके बाद 1981/01/06 से पहले शुरू किया गया है, जहां रुपये की मौजूदा शुल्क. 125 निर्धारिती द्वारा देय होगा. कहां, हालांकि, मूल्यांकन कार्यवाही 31-5-1981, रुपये की बढ़ी फीस के बाद शुरू कर रहे हैं. 200 देय होगा. इस प्रयोजन के लिए मूल्यांकन कार्यवाही निर्धारिती एक नोटिस प्रासंगिक निर्धारण वर्ष या तिथि के लिए नेट धन का रिटर्न फाइल करने के लिए उस पर फोन के साथ परोसा गया था जिस पर तिथि पर शुरू किया गया है समझा जाएगा, जिस पर नेट की वापसी धन जो भी पहले हो निर्धारिती द्वारा स्वेच्छा से सुसज्जित किया गया था. विवाद मूल्यांकन से संबंधित है इस प्रकार, जहां, सवाल है कि क्या रुपए की मौजूदा शुल्क. 125 रुपए या की बढ़ी फीस. 200 मूल्यांकन कार्यवाही शुरू कर दी गई है समझा रहे हैं, जिस पर तारीख पर निर्भर करेगा देय होगा.

वित्त अधिनियम, 1981

22.2 यह संशोधन वर्गों 253 और पैराग्राफ 18.4 और 18.5 में निर्दिष्ट आयकर अधिनियम के 256 में किए गए संशोधन के लिए इसी तरह की है.

वित्त अधिनियम, 1981

22.3 इन प्रावधानों 1981/01/06 से प्रभावी में आ गए हैं.

[धारा 28 वित्त अधिनियम की 30 को

 

उपहार कर अधिनियम में संशोधन

वित्त अधिनियम, 1981

धारा 23, 25 और 26 - अपीलीय न्यायाधिकरण और उच्च न्यायालय के संदर्भ में आवेदन करने के लिए अपील के संबंध में फीस की वृद्धि

रुपये की धारा 23 के तहत 23.1 (4) और धारा 25 (2), एक शुल्क. 125 अपीलीय ट्रिब्यूनल में अपील के संबंध में एक निर्धारिती द्वारा देय है. इसी प्रकार धारा 26 (1), रुपये का शुल्क. 125 उच्च न्यायालय को एक संदर्भ आवेदन के संबंध में एक निर्धारिती द्वारा देय है. वित्त अधिनियम रुपये से इस संबंध में शुल्क देय उठाया गया है. रुपये के लिए 125. 200 तदनुसार, मूल्यांकन कार्यवाही 31-3-1971 लेकिन उसके बाद 1981/01/06 से पहले शुरू किए गए थे, जहां एक मामले में, देय शुल्क रुपए हो जाएगा. 125 कहां, हालांकि, मूल्यांकन कार्यवाही 31-5-1981, रुपये की बढ़ी फीस के बाद शुरू कर रहे हैं. 200 देय हो जाएगा. इस प्रयोजन के लिए मूल्यांकन कार्यवाही निर्धारिती एक नोटिस प्रासंगिक निर्धारण वर्ष या उपहार की वापसी होने की दिनांक के लिए उपहार के रिटर्न फाइल करने के लिए उस पर फोन के साथ परोसा गया था जिस पर तिथि पर शुरू किया गया है समझा जाएगा जो भी पहले हो प्रासंगिक निर्धारण वर्ष, के लिए स्वेच्छा से निर्धारिती द्वारा दायर की. विवाद मूल्यांकन से संबंधित है जहां इस प्रकार, मौजूदा शुल्क या बढ़ाया शुल्क देय नहीं होगा सवाल है कि क्या आकलन की कार्यवाही शुरू कर दी गई है समझा रहे हैं, जिस पर तारीख पर निर्भर करेगी.

वित्त अधिनियम, 1981

23.2 ये संशोधन अनुभाग 253 और पैराग्राफ 18.4 और 18.5 में निर्दिष्ट आयकर अधिनियम की धारा 256 में वित्त अधिनियम द्वारा किए गए संशोधनों के समान हैं.

वित्त अधिनियम, 1981

23.3 ये संशोधन 1981/01/06 से प्रभाव में ले लिया है.

 

ब्याज कर अधिनियम में संशोधन

वित्त अधिनियम, 1981

धारा 16 - अपीलीय ट्रिब्यूनल में अपील के संबंध में शुल्क के भुगतान से संबंधित प्रावधान में संशोधन

रुपये की धारा 16 के तहत 28.1 (6), एक शुल्क. 125 अपीलीय ट्रिब्यूनल में अपील के संबंध में एक निर्धारिती द्वारा देय है. वित्त अधिनियम रुपये से शुल्क उठाया गया है. रुपये के लिए 125. 1981/01/06 से प्रभाव के साथ 200. तदनुसार, जहां मूल्यांकन कार्यवाही 1981/01/06 रुपये की मौजूदा शुल्क से पहले शुरू किए गए थे. 125 देय होगा. कहां, हालांकि, मूल्यांकन कार्यवाही 31-5-1981, रुपये की बढ़ी फीस के बाद शुरू कर रहे हैं. 200 देय हो जाएगा. इस प्रयोजन के लिए मूल्यांकन कार्यवाही निर्धारिती एक नोटिस प्रासंगिक निर्धारण वर्ष या तिथि के लिए प्रभार्य ब्याज का रिटर्न फाइल करने के लिए उस पर फोन के साथ परोसा गया था जिस पर तिथि पर शुरू किया गया है समझा जाएगा, जिस पर प्रभार्य की वापसी प्रासंगिक निर्धारण वर्ष के लिए ब्याज जो भी पहले हो, स्वेच्छा से निर्धारिती द्वारा दायर किया गया था. विवाद मूल्यांकन से संबंधित है जहां इस प्रकार, मौजूदा शुल्क या बढ़ाया शुल्क देय होगा कि क्या सवाल मूल्यांकन कार्यवाही शुरू कर दी गई है समझा रहे हैं, जिस पर तारीख पर निर्भर करेगा.

वित्त अधिनियम, 1981

28.2 यह संशोधन पैरा 18.5 में निर्दिष्ट आयकर अधिनियम की धारा 253 में किए गए संशोधन के लिए इसी तरह की है.

वित्त अधिनियम, 1981

28.3 यह प्रावधान 1981/01/06 से प्रभाव में ले लिया है.

[वित्त अधिनियम की धारा 44]

होटल प्राप्ति कर अधिनियम में संशोधन

वित्त अधिनियम, 1981

धारा 19 - अपीलीय ट्रिब्यूनल में अपील के संबंध में शुल्क के भुगतान से संबंधित प्रावधान में संशोधन

रुपये की धारा 19 के तहत 29.1 (6), एक शुल्क. 125 अपीलीय ट्रिब्यूनल में अपील के संबंध में एक निर्धारिती द्वारा देय है. वित्त अधिनियम रुपये से शुल्क उठाया गया है. रुपये के लिए 125. 1981/01/06 से प्रभाव के साथ 200. तदनुसार, मूल्यांकन कार्यवाही 1981/01/06 रुपये की मौजूदा शुल्क से पहले शुरू किए गए थे, जहां एक मामले में. 125 देय होगा. कहां, हालांकि, मूल्यांकन कार्यवाही 31-5-1981, रुपये की बढ़ी फीस के बाद शुरू कर रहे हैं. 200 देय होगा. इस प्रयोजन के लिए मूल्यांकन कार्यवाही निर्धारिती एक नोटिस प्रासंगिक निर्धारण वर्ष या तिथि के लिए प्रभार्य प्राप्तियों का रिटर्न फाइल करने के लिए उस पर फोन के साथ परोसा गया था जिस पर तिथि पर शुरू किया गया है समझा जाएगा, जिस पर प्रभार्य की वापसी प्रासंगिक निर्धारण वर्ष के लिए प्राप्तियों जो भी पहले हो निर्धारिती द्वारा स्वेच्छा से दायर किया गया था. विवाद मूल्यांकन से संबंधित है जहां इस प्रकार, मौजूदा शुल्क या बढ़ाया शुल्क देय होगा कि क्या सवाल मूल्यांकन कार्यवाही शुरू कर दी गई है समझा रहे हैं, जिस पर तारीख पर निर्भर करेगा.

वित्त अधिनियम, 1981

29.2 यह संशोधन पैरा 18.5 में निर्दिष्ट आयकर अधिनियम की धारा 253 में किए गए संशोधन के लिए इसी तरह की है.

वित्त अधिनियम, 1981

29.3 यह प्रावधान 1981/01/06 से प्रभाव में ले लिया है.

[वित्त अधिनियम की धारा 45]

कंपनियों (मुनाफा) में संशोधन अधिनियम अधिकर

वित्त अधिनियम, 1981

अग्रिम अतिरिक्त कर के भुगतान से संबंधित प्रावधानों की प्रविष्टि - 7 दिन और 9A करने के लिए नई वर्गों 7A

24.1 कंपनियों (मुनाफा) अधिकर अधिनियम वैधानिक कटौती से अधिक कंपनियों के प्रभार्य मुनाफे पर अतिरिक्त कर लगाने का प्रावधान है. इस प्रयोजन के लिए, "प्रभार्य मुनाफा" मोटे तौर पर कर देय उस से कम के रूप में आयकर अधिनियम (कुछ कटौती करने के लिए विषय) के प्रयोजनों के लिए निर्धारित कुल आय मतलब करने के लिए परिभाषित किया गया है. वैधानिक कटौती रुपये है. 2 लाख या जो भी अधिक हो कंपनी की पूंजी का 15 फीसदी. अतिरिक्त कर के प्रयोजनों के लिए कंपनी की पूंजी (i) चुकता शेयर पूंजी का कुल मतलब है; (द्वितीय) विकास छूट और निवेश भत्ता रिजर्व; और (iii) बहां श्रेय ऐसी मात्रा को छोड़कर अन्य भंडार के रूप में कर योग्य आय की गणना में कटौती के रूप में अनुमति दी गई है.

वित्त अधिनियम, 1981

24.2 आयकर और अधिकर दोनों आयकर के विपरीत अब तक अधिकर तुरंत प्रासंगिक निर्धारण वर्ष पिछले वित्त वर्ष के दौरान अग्रिम में देय नहीं था, कंपनियों द्वारा देय कर रहे हैं. वित्त अधिनियम अग्रिम में अतिरिक्त कर के भुगतान के लिए विशेष इंतजाम किया है. इन प्रावधानों कंपनियों द्वारा अग्रिम कर के भुगतान से संबंधित आयकर अधिनियम में संगत प्रावधानों की तर्ज पर मोटे तौर पर कर रहे हैं.

वित्त अधिनियम, 1981

24.3 वित्त अधिनियम अतिरिक्त कर का भुगतान अग्रिम से संबंधित एक नया खंड 7A डाला गया है. इस प्रयोजन के लिए अभिव्यक्ति "प्रभार्य राशि", किसी भी पिछले वर्ष के संबंध में वैधानिक कटौती से अधिक के रूप में पिछले वर्ष की कंपनी के प्रभार्य लाभ के बहुत मायने रखता है. इसके अलावा, अभिव्यक्ति किसी भी वित्तीय वर्ष के दौरान एक कंपनी द्वारा देय अतिरिक्त कर अग्रिम के संबंध में "वर्तमान प्रभार्य राशि" तुरंत कहा वित्तीय वर्ष निम्न निर्धारण वर्ष के लिए प्रासंगिक पिछले वर्ष के कंपनी के प्रभार्य राशि का मतलब है.

वित्त अधिनियम, 1981

(2) नई धारा 7A के 24.4 उपधारा कि अधिकर वित्तीय वर्ष के बाद अगले आकलन वर्ष के लिए कर के लिए उत्तरदायी 'कंपनियों वर्तमान प्रभार्य राशि के संबंध में प्रत्येक वित्तीय वर्ष के दौरान अग्रिम में देय होगा प्रदान करता है. उप - धारा (3) खंड 7A के अग्रिम अधिकर नियमित मूल्यांकन को अंतिम रूप दिया या जहां केंद्रित किया गया है के संबंध में नवीनतम पिछले वर्ष की प्रभार्य राशि अपनाकर गणना की जाएगी कि प्रदान करता है के आधार पर एक बाद में पिछले वर्ष की प्रभार्य राशि एक अनंतिम मूल्यांकन धारा 7 के तहत किया गया है जो पहले के एक आकलन वर्ष के लिए एक नियमित आकलन में निर्धारित प्रभार्य राशि से अधिक है, अनंतिम मूल्यांकन के लिए अपनाया के रूप में प्रभार्य राशि अग्रिम अतिरिक्त कर का भुगतान करने के लिए आधार होगा. अतिरिक्त कर की राशि अधिनियम को तीसरी अनुसूची में निर्दिष्ट दरों पर प्रभार्य राशि पर गणना की जाएगी.

वित्त अधिनियम, 1981

(4) नई धारा 7A के 24.5 उपधारा कि अधिकर निर्दिष्ट तारीखों पर तीन बराबर किश्तों में वित्तीय वर्ष में भुगतान किया जाएगा प्रदान करता है. इस निमित्त विनिर्दिष्ट तिथियाँ हैं:

प्रभार्य राशि का प्रतिशत कम से कम 75 निर्धारण वर्ष के लिए प्रासंगिक पिछले साल कहा वित्तीय मे 31 दिसम्बर को या उससे पहले समाप्त हो जाती है, जिसके लिए एक स्रोत या स्रोतों से प्राप्त होता है, जहां एक मामले में मैं. 15 जून, 15 सितंबर और 15 दिसंबर वर्ष; और

द्वितीय. 15 सितंबर, 15 दिसंबर और 15 मार्च, किसी भी अन्य मामले में.

हालांकि, यह जहां करदाता के किसी भी वर्ग के सम्मान में, बोर्ड धारा 211 के प्रावधान के तहत (1) आयकर अधिनियम की, के बजाय 15 मार्च पर अग्रिम कर की अंतिम किस्त के भुगतान के लिए अधिकृत है, कि प्रदान की गई है वित्त वर्ष की 15 दिसंबर की, इस तरह के मामलों में अग्रिम अतिरिक्त कर की अंतिम किस्त भी बजाय 15 दिसंबर की 15 मार्च को देय होगा.

वित्त अधिनियम, 1981

24.6 उप - धारा (5) नई धारा 7A के हर कंपनी पर या पहली किस्त यह द्वारा देय है और जहां यह नियमित रूप से hithertofore का आकलन नहीं किया गया है जिस पर तारीख से पहले अग्रिम अधिकर के एक बयान प्रस्तुत करने के लिए आवश्यक हो जाएगा प्रदान करता है कि इस तरह के एक अग्रिम अतिरिक्त कर की अंतिम किस्त अपने मामले में कारण है पहले कंपनी ने अपने मौजूदा प्रभार्य राशि का एक अनुमान और अग्रिम अतिरिक्त कर देय उस पर प्रस्तुत करने के लिए आवश्यक हो जाएगा. नियमित मूल्यांकन के माध्यम से मूल्यांकन किया गया है और निर्धारित समय सीमा के भीतर बयान सुसज्जित किया गया है जो एक कंपनी, तीन समान किस्तों में अग्रिम अतिरिक्त कर का भुगतान करने की आवश्यकता होगी. पहले से नियमित मूल्यांकन के माध्यम से मूल्यांकन किया नहीं किया गया है जो एक कंपनी अगर समाप्त नहीं किया है के रूप में अपने मामले में लागू या एक मुश्त राशि में तारीखों के इस तरह पर यह द्वारा दिए अनुमान के अनुसार अग्रिम अतिरिक्त कर का भुगतान करने की आवश्यकता होगी ही ऐसी तारीखों के अंतिम नहीं समाप्त हो गया.

वित्त अधिनियम, 1981

24.7 उप - धारा (6) खंड 7A के पहले ही नियमित मूल्यांकन के माध्यम से मूल्यांकन किया गया है और अग्रिम अधिकर के एक बयान प्रस्तुत करने की आवश्यकता है जो एक कंपनी पर या तारीख से पहले का अनुमान है कि जहां प्रदान करता है, जिस पर अग्रिम अतिरिक्त कर की पहली किस्त वर्तमान प्रभार्य राशि अग्रिम अधिकर अपने बयान के अनुसार यह द्वारा देय है जिस पर प्रभार्य राशि से भी कम हो, या किसी अन्य कारण से होने की संभावना है कि उसके मामले में देय है, यह द्वारा देय अग्रिम अतिरिक्त कर की राशि कम हो जाएगा यह भुगतान करने के लिए आवश्यक हो गया होता, जो इस तरह के अग्रिम अतिरिक्त कर की राशि की तुलना में, यह आयकर अधिकारी को वर्तमान प्रभार्य राशि दिखा ऐसे बयान के एवज और यह द्वारा देय अग्रिम अधिकर में एक अनुमान भेज सकते हैं और अनुसार इस तरह की राशि का भुगतान समान किस्तों में अनुमान के साथ.

वित्त अधिनियम, 1981

24.8 उप - धारा (7) अनुभाग 7A का प्रावधान है कि जहां अग्रिम अतिरिक्त कर की अंतिम किस्त अपने मामले में देय है जिस पर पर या तारीख से पहले अग्रिम अधिकर अनुमानों के अपने बयान के लिए भेजा गया है जो एक कंपनी है कि देय पर अग्रिम अतिरिक्त कर की राशि अपने मौजूदा प्रभार्य राशि अपने बयान में दिखाया गया है कि कम से कम होगा, यह अपने विकल्प पर आयकर अधिकारी को अग्रिम अतिरिक्त कर का कम अनुमान भेजने और निर्दिष्ट तारीखों पर इस तरह के अनुमान के अनुसार अग्रिम अतिरिक्त कर की राशि का भुगतान कर सकते हैं समय सीमा समाप्त हो नहीं है या एक मुश्त राशि में ही अगर ऐसी तारीखों के अंतिम समाप्त नहीं हो जाता.

वित्त अधिनियम, 1981

24.9 उप - धारा (8) खंड के 7A अपने वर्तमान प्रभार्य राशि पर देय अग्रिम अतिरिक्त कर में 20 फीसदी की अपने बयान या अनुमान में यह द्वारा के रूप में देय दिखाया अग्रिम अतिरिक्त कर से अधिक होने की संभावना है, जहां कि प्रदान करता है, जैसे कि एक कंपनी की आवश्यकता होगी पर या अग्रिम अतिरिक्त कर की अंतिम किस्त यह द्वारा देय है और समाप्त नहीं किया है जो निर्दिष्ट तारीखों पर अग्रिम अतिरिक्त कर की इस तरह की राशि का भुगतान जिस तारीख से पहले यह द्वारा देय उच्च अग्रिम अधिकर के एक अनुमान भेजने के लिए. यह, हालांकि, धारा 209A के परन्तुक के तहत अपनी शक्तियों का प्रयोग करते हुए आयकर आयुक्त (4) या धारा 212 (3) आयकर अधिनियम के उच्च अनुमान प्रस्तुत करने के लिए किसी भी कंपनी की अनुमति दी है कि जहां प्रदान की गई है एक महीने की विस्तारित अवधि के भीतर अग्रिम आयकर की, एक ऐसी कंपनी इस तरह विस्तारित तारीख को या उससे पहले अग्रिम अतिरिक्त कर की शेष राशि का भुगतान कर सकते हैं.

वित्त अधिनियम, 1981

24.10 उप - धारा (9) अनुभाग 7A की एक कंपनी अग्रिम अतिरिक्त कर के भुगतान के लिए विनिर्दिष्ट तारीख को या उससे पहले यह द्वारा देय अपनी अग्रिम अतिरिक्त कर के संशोधित अनुमान भेजने और पहले से ही भुगतान किसी भी किस्त के संबंध में अतिरिक्त या कमी को समायोजित कर सकते हैं प्रदान करता है कि बाद में किसी भी किस्तों में. खंड 7A के तहत बयान या अनुमान फार्म सं 16 या इस संबंध में निर्धारित 17 में भेजा जाना है और उसमें निर्धारित ढंग से सत्यापित हो गया है.

वित्त अधिनियम, 1981

24.11 न्यू अनुभाग 7B वित्त वर्ष के दौरान कंपनी द्वारा भुगतान अग्रिम अतिरिक्त कर की कुल राशि पर निर्धारित अतिरिक्त कर की राशि से अधिक है जिसके द्वारा राशि पर प्रतिवर्ष 12 प्रतिशत की दर से केन्द्रीय सरकार द्वारा साधारण ब्याज के भुगतान के लिए प्रदान करता है नियमित मूल्यांकन, नियमित रूप से मूल्यांकन करने की तारीख के लिए प्रासंगिक निर्धारण वर्ष की 1 अप्रैल से. यह प्रावधान आयकर अधिनियम की धारा 214 की तर्ज पर मोटे तौर पर है.

वित्त अधिनियम, 1981

कंपनी ब्याज का भुगतान करने के लिए आवश्यक है जो परिस्थितियों में निर्दिष्ट 24.12 न्यू अनुभाग 7C. उप - धारा (1) वित्त वर्ष के दौरान कंपनी द्वारा भुगतान अग्रिम अतिरिक्त कर की कुल राशि का मूल्यांकन अतिरिक्त कर की राशि का प्रतिशत, ऐसी कंपनी दर से साधारण ब्याज का भुगतान करने की आवश्यकता होगी कम 831/3 से अधिक है, जहां कि प्रदान करता है प्रतिवर्ष 12 फीसदी की नियमित मूल्यांकन की तिथि को निर्धारण वर्ष की 1 अप्रैल से इस तरह की कमी की मात्रा पर. उप - धारा (2) खंड के 7C जहां एक कंपनी अग्रिम अतिरिक्त कर या अग्रिम अतिरिक्त कर या पहले से नियमित मूल्यांकन के माध्यम से मूल्यांकन नहीं किया नई कंपनी के बयान के एवज में अनुमान के बयान सुसज्जित नहीं किया गया है कि प्रदान करता अनुमान सुसज्जित नहीं किया गया है अग्रिम अतिरिक्त कर की, एक ऐसी कंपनी का मूल्यांकन अतिरिक्त कर की राशि पर नियमित रूप से मूल्यांकन की तिथि को निर्धारण वर्ष की 1 अप्रैल से प्रति वर्ष 12 फीसदी की दर से साधारण ब्याज अदा करना होगा.

वित्त अधिनियम, 1981

24.13 उप - धारा (3) खंड 7C (8) इस तरह के अनुमान को नहीं भेजा है अनुभाग 7A के तहत अग्रिम अधिकर के एक उच्च अनुमान प्रस्तुत करने की आवश्यकता है जो एक कंपनी है, यह 12 की दर से ब्याज का भुगतान करने के लिए आवश्यक हो जाएगा, जहां यह प्रावधान है कि भुगतान अग्रिम अतिरिक्त कर का आकलन अतिरिक्त कर की कम हो जाता है जिसके द्वारा राशि पर नियमित रूप से मूल्यांकन की तिथि को निर्धारण वर्ष की 1 अप्रैल से प्रतिवर्ष फीसदी. उप - धारा (4) अनुभाग 7C का प्रावधान है कि एक अनंतिम मूल्यांकन धारा 7, उप - धारा के तहत ब्याज के तहत बनाया गया है, जहां एक मामले में (1) या (2) और (3) पर तारीख तक गणना की जाएगी प्रावधिक का मूल्यांकन अतिरिक्त कर का भुगतान कर दिया गया है और उसके बाद ब्याज प्रावधिक का मूल्यांकन अतिरिक्त कर का आकलन अतिरिक्त कर की कम हो जाता है जिसके द्वारा राशि पर निर्धारित दर पर गणना की जाएगी जो. उप - धारा (5) अनुभाग के 7C नियम 13C में निर्दिष्ट किया गया है के रूप में इस तरह के मामलों और ऐसी परिस्थितियों में खंड 7C के तहत कंपनी द्वारा देय ब्याज को कम या माफ करने के लिए आयकर अधिकारी कर सकती है.

वित्त अधिनियम, 1981

7C ब्याज देय था जिस पर राशि की अपील, पुनरीक्षण, सुधार या अनुभाग में निर्दिष्ट किसी अन्य क्रम का एक परिणाम के रूप में कम हो गया है, जहां एक मामले में ब्याज की राशि में कमी के लिए प्रदान करता है (6) खंड के 24.14 उप - धारा 18, धारा 260 या आयकर अधिनियम की धारा 262 के साथ पठित. ब्याज की राशि इतनी कम है, और ब्याज की अतिरिक्त राशि का भुगतान किया गया है, जहां इस तरह के अतिरिक्त वापस किया जाना आवश्यक हो जाएगा. इस अनुभाग और अनुभाग -9 ए के प्रयोजनों के लिए, अभिव्यक्ति उधर से किसी भी कटौती करने के बिना नियमित मूल्यांकन के आधार पर निर्धारित अतिरिक्त कर का मतलब है "अतिरिक्त कर का आकलन किया".

इस धारा के प्रावधानों धारा 215 और आयकर अधिनियम की धारा 217 के रूप में उसी तर्ज पर मोटे तौर पर कर रहे हैं.

वित्त अधिनियम, 1981

24.15 न्यू खंड 7 दिन इस तरह के भुगतान के अंतर पर कमी थी, जिसके दौरान अवधि के लिए सालाना 12 फीसदी की दर से, पहले दो किश्तों में से किसी में देय अग्रिम अतिरिक्त कर की राशि कम हो गया है जो एक कंपनी द्वारा ब्याज के भुगतान के लिए प्रदान करता है प्रत्येक किस्त में भुगतान की गई राशि और वास्तव में वित्त वर्ष के दौरान यह द्वारा भुगतान कुल अग्रिम अधिकर के लिए कंपनी होने के संबंध के द्वारा भुगतान किया जाना चाहिए था जो राशि के बीच. इस अनुच्छेद के प्रावधानों को मोटे तौर पर आयकर अधिनियम की धारा 216 के उस से मेल खाती है.

वित्त अधिनियम, 1981

24.16 न्यू अनुभाग -9 ए एक गलत अनुमान बनाने के लिए या अग्रिम अतिरिक्त कर का भुगतान करने के लिए विफलता के लिए एक कंपनी द्वारा देय दंड का प्रावधान है. एक कंपनी अनुभाग 7A के तहत अग्रिम अतिरिक्त कर का एक झूठा बयान सुसज्जित किया गया है जहां (5) (एक), एक ऐसी कंपनी फीसदी से कम 10 नहीं होगा जो दंड का भुगतान करने के लिए उत्तरदायी होगा, लेकिन द्वारा 1 आधा गुना राशि से अधिक नहीं होगा, जो वास्तव में वित्तीय वर्ष के दौरान भुगतान अधिकर 831/3 प्रति आकलन किया अधिकर प्रतिशत या कंपनी जो भी कम हो अग्रिम अधिकर, की एक सही बयान दर्ज किया था तभी देय हो गया होता जो राशि से कम हो जाता है. एक कंपनी है कहाँ, उचित कारण के बिना, (5) (एक), यह कम से कम 10 प्रतिशत है, लेकिन जो नहीं होगा जो एक राशि का जुर्माना करने के लिए उत्तरदायी होगा अनुभाग 7A के अनुसार अग्रिम अधिकर के बयान प्रस्तुत करने में विफल आकलन किया अधिकर प्रतिशत 831/3 के 1 आधा बार से अधिक नहीं होगा.

वित्त अधिनियम, 1981

एक कंपनी अनुभाग 7A के तहत अग्रिम अधिकर के एक झूठे अनुमान सुसज्जित किया गया है कहाँ 24.17 (5) (बी) / 7A (6) / 7A (7) / 7A (9), की तुलना में यह कम नहीं हो जाएगा, जो एक दंड के लिए उत्तरदायी होगा 10 फीसदी है, लेकिन जो वास्तव में वित्तीय वर्ष के दौरान भुगतान अतिरिक्त कर का कम हो जाता है जिसके द्वारा 1 आधा गुना राशि से अधिक नहीं होगा

(मैं) 831/3 प्रति आकलन किया अधिकर प्रतिशत, या

(Ii) खंड 7A के तहत सजा बयान के अनुसार देय अग्रिम अतिरिक्त कर की राशि (5) (ए), जो भी कम हो.

एक कंपनी अनुभाग 7A के तहत अग्रिम अधिकर के एक झूठे अनुमान सुसज्जित किया गया है जहां (8), यह प्रतिशत 10 से कम नहीं होगा, लेकिन जो अधिकर वास्तव दौरान भुगतान जिसके द्वारा 1 आधा गुना राशि से अधिक नहीं होगा, जो एक दंड के लिए उत्तरदायी होगा वित्तीय वर्ष का आकलन किया अधिकर के 831/3 फीसदी से कम हो. पहले से नियमित मूल्यांकन के माध्यम से मूल्यांकन किया नहीं किया गया है जो एक नई कंपनी है, उचित कारण के बिना, खंड 7A के तहत अग्रिम अतिरिक्त कर का अनुमान प्रस्तुत करने में नाकाम रही है जहां (5) (ख), यह एक राशि का जुर्माना करने के लिए उत्तरदायी होगा प्रतिशत कम से कम 10 नहीं होगा, लेकिन जो आकलन किया अधिकर प्रतिशत 831/3 के 1 आधा गुना से अधिक नहीं होगी. उचित कारण खंड 7A के तहत देय अग्रिम अतिरिक्त कर का अनुमान प्रस्तुत करने में विफल रहा बिना एक कंपनी है कहाँ (8), यह प्रतिशत 10 से कम नहीं होगा जो एक दंड का भागी होगा लेकिन अधिकर के 1 आधा गुना राशि से अधिक नहीं होगा, जो खंड 7A के तहत अग्रिम अतिरिक्त कर के अपने बयान के अनुसार देय (5) (क) या खंड 7A के तहत अग्रिम अतिरिक्त कर का अनुमान (5) (ख) या खंड 7A के तहत बयान के एवज में अनुमान (6) 831 से कम हो जाता है आकलन किया अधिकर के / 3 फीसदी.

वित्त अधिनियम, 1981

नई धारा -9 ए को 24.18 स्पष्टीकरण आयुक्त अनुभाग 209A के परन्तुक के तहत अपनी शक्तियों का प्रयोग करते हुए (4) या धारा 212 (3) आयकर अधिनियम के अग्रिम कर का अनुमान प्रस्तुत करने के लिए तिथि बढ़ा दी गई है और जहां यह प्रावधान है कि ऐसे बढ़ाया तारीख वित्तीय वर्ष से परे हो जाता है, तो उप - धारा के प्रयोजन के लिए (2) (ख) अनुभाग -9 ए की, इस तरह विस्तारित तारीख को या उससे पहले करदाता द्वारा भुगतान अग्रिम अतिरिक्त कर की राशि भी भुगतान अग्रिम अतिरिक्त कर के रूप में माना जाएगा वित्तीय वर्ष के दौरान.

वित्त अधिनियम, 1981

24.19 ये प्रावधान 1981/01/04 से प्रभावी होगा और वित्तीय वर्ष 1981-82 के दौरान अग्रिम अतिरिक्त कर का भुगतान या अग्रिम अतिरिक्त कर के भुगतान में चूक के संबंध में लागू होगा.

[धारा 35 वित्त अधिनियम के 39]

वित्त अधिनियम, 1981

अपीलीय न्यायाधिकरण के लिए अपील के संबंध में शुल्क के भुगतान से संबंधित प्रावधानों का संशोधन - धारा 12

रुपये की धारा 12 के तहत 25.1 (6), एक शुल्क. 125 अपीलीय ट्रिब्यूनल में अपील के संबंध में देय है. वित्त अधिनियम रुपये से इस संबंध में शुल्क देय उठाया गया है. रुपये के लिए 125. 1 जून 1981 से प्रभावी 200. तदनुसार, जहां मूल्यांकन कार्यवाही 31-3-1971 के बाद शुरू किए थे, लेकिन 1981/01/06 से पहले, रुपये की मौजूदा शुल्क. 125 देय होगा. कहां, हालांकि, मूल्यांकन कार्यवाही 31-5-1981, रुपये की बढ़ी फीस के बाद शुरू कर रहे हैं. 200 देय हो जाएगा. इस प्रयोजन के लिए मूल्यांकन कार्यवाही निर्धारिती एक नोटिस प्रासंगिक निर्धारण वर्ष या तिथि के लिए प्रभार्य लाभ का रिटर्न फाइल करने के लिए उस पर फोन के साथ परोसा गया था जिस पर तिथि पर शुरू किया गया है समझा जाएगा, जिस पर प्रभार्य की वापसी प्रासंगिक निर्धारण वर्ष के लिए लाभ स्वेच्छा से निर्धारिती द्वारा प्रस्तुत किया गया था. विवाद मूल्यांकन से संबंधित है जहां इस प्रकार, मौजूदा शुल्क या बढ़ाया शुल्क देय होगा कि क्या सवाल मूल्यांकन कार्यवाही शुरू कर दी गई है समझा रहे हैं, जिस पर तारीख पर निर्भर करेगा.

वित्त अधिनियम, 1981

25.2 यह संशोधन पैरा 18.3 में निर्दिष्ट आयकर अधिनियम की धारा 253 में किए गए संशोधन के लिए इसी तरह की है.

वित्त अधिनियम, 1981

25.3 यह प्रावधान 1981/01/06 से प्रभावी होता है.

[वित्त अधिनियम की धारा 40]

वित्त अधिनियम, 1981

विदेशी कंपनियों के लिए कर रियायतें भारत में खनिज तेल, के, या निकासी या उत्पादन के लिए पूर्वेक्षण में लगे - नई अनुभाग 24AA

26.1 पैरा 11.4 में कहा गया है, भारत में तेल की खोज या उत्पादन के क्षेत्र में विदेशी कंपनियों की भागीदारी की मांग कर रहा है और सरकार एक भागीदारी आधार पर ऐसी कंपनियों के साथ समझौतों में प्रवेश करने के सवाल की जांच वर्तमान में है. इस स्थिति के संदर्भ में यह केन्द्र सरकार अधिकर अधिनियम के प्रावधानों को आराम या संशोधित करने का अधिकार होना चाहिए कि आवश्यक माना जाता था. तदनुसार, वित्त अधिनियम केन्द्र सरकार के लिए समझौता किया है, जिसके साथ विदेशी कंपनियों के पक्ष में अधिकर के संबंध में छूट, दर में कमी या अन्य संशोधन करने के लिए केन्द्र सरकार को सक्षम करने के लिए एक दृश्य के साथ एक नई धारा 24AA डाला गया है एसोसिएशन या कि सरकार या किसी के लिए पूर्वेक्षण के व्यापार, या खनिज तेल और प्राकृतिक गैस की निकासी या उत्पादन में यह द्वारा अधिकृत किसी भी व्यक्ति की भागीदारी. इस पावर, तेल अन्वेषण या उत्पादन के कारोबार से ऐसे विदेशी कंपनियों द्वारा अर्जित प्रभार्य लाभ के संबंध में उपलब्ध हो जाएगा किसी भी किनारे पर या बंद किनारे के क्षेत्रों में या किसी के साथ संबंध में किसी भी सेवा या सुविधा प्रदान करने के व्यवसाय से चाहे के लिए पूर्वेक्षण, या कि सरकार या इस ओर या वैसे, चाहे इस तरह के कारोबार के सिलसिले में किसी भी जहाज, विमान, मशीनरी या संयंत्र की आपूर्ति उन में यह द्वारा अधिसूचित किसी भी व्यक्ति द्वारा किए गए खनिज तेल, या उत्पादन की निकासी से मिलकर व्यापार बिक्री के लिए या किराया द्वारा. इस प्रावधान के तहत टैक्स रियायतें संसद के दोनों सदनों के पटल पर रखा जाएगा जो सरकारी राजपत्र में एक अधिसूचना के द्वारा प्रदान किया जाएगा.

वित्त अधिनियम, 1981

26.2 यह संशोधन संशोधन के समान है अनुच्छेद 11.4 में निर्दिष्ट आयकर अधिनियम की धारा 293A में किए जाने का प्रस्ताव रखा.

वित्त अधिनियम, 1981

26.3 यह संशोधन 1981/01/04 से प्रभाव में ले लिया है.

[वित्त अधिनियम की धारा 42]

वित्त अधिनियम, 1981

आदि लाभांश, रॉयल्टी, के बहिष्कार से संबंधित प्रावधान का संशोधन - प्रथम अनुसूची

27.1 अधिकर वैधानिक कटौती से अधिक में अपने प्रभार्य मुनाफे पर हर कंपनी द्वारा देय है. अभिव्यक्ति "प्रभार्य मुनाफा" पिछले वर्ष के लिए आयकर अधिनियम के तहत अभिकलन और आयकर देय से कम के रूप में पहली अनुसूची के प्रावधानों के अनुसार समायोजित किया एक निर्धारिती की कुल आय मतलब करने के लिए परिभाषित किया गया है. प्रथम अनुसूची के नियम 1 निम्नलिखित मदों की कटौती के लिए प्रदान करता है:

मैं पूंजीगत लाभ.

. द्वितीय मुआवजा या (ii) आयकर अधिनियम की धारा 28 में निर्दिष्ट अन्य भुगतान;

तृतीय मुनाफे और जीवन बीमा के किसी भी व्यवसाय के लाभ.

. चतुर्थ धारा 41 के तहत आयकर को आय प्रभार्य (2);

वी. केन्द्र सरकार द्वारा भुगतान किया है और आयकर मुक्त या राज्य सरकार की प्रतिभूतियों से होने की घोषणा सिर "प्रतिभूतियों पर ब्याज" के तहत आयकर अधिनियम के तहत आय प्रभार्य जारी आयकर मुक्त और आयकर उस पर राज्य सरकार द्वारा देय है;

छठी आयकर अधिनियम की धारा 80 जी के तहत छूट के लिए योग्य है जो दान की राशि का 50 प्रतिशत.

सातवीं घोषणा और भारत के भीतर लाभांश के भुगतान के लिए निर्धारित की व्यवस्था की है, जो एक भारतीय कंपनी या कंपनी से लाभांश के माध्यम से आय.

. सरकार या किसी स्थानीय प्राधिकारी या किसी भी भारतीय चिंता से प्राप्त रॉयल्टी के माध्यम से आठवीं आय;

ग्यारहवीं एक विदेशी कंपनी, सरकार या किसी स्थानीय प्राधिकारी या किसी भी भारतीय चिंता से तकनीकी सेवाएं प्रदान करने के लिए ब्याज या शुल्क के माध्यम से अपनी आय के मामले में.;

एक्स. एक बैंकिंग कंपनी के मामले में

(क) (1) बैंकिंग कंपनी अधिनियम, 1949 या धारा 11 के तहत भारतीय रिजर्व बैंक के साथ यह द्वारा जमा (2) (बी) (ख) के, या धारा 17 के तहत आरक्षित निधि को हस्तांतरित किसी भी राशि

(ख) कुछ शर्तों के कुल आय विषय कंप्यूटिंग में कटौती के रूप में स्वीकार्य नहीं हैं जो भंडार को हस्तांतरण,

जो भी अधिक है;

निर्यात के सिलसिले में वित्त अधिनियम के तहत अनुमति दी कुल आय पर आयकर प्रभार्य से किसी भी कटौती की ग्यारहवीं. राशि.

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आयकर अधिनियम के तहत 27.2, लाभांश के माध्यम से आय सिर "अन्य स्रोतों से आय 'के तहत कर का आरोप लगाया है और जिस तरह के द्वारा भुगतान किसी भी उचित राशि के संबंध में, सबसे पहले, कटौती करने के बाद धारा 56 के तहत गणना है कि कंपनी की ओर से इस तरह के लाभांश को साकार करने और दूसरी बात, किसी भी अन्य व्यय के संबंध में, पूंजीगत खर्च के अलावा, बाहर रखी या बनाने के उद्देश्य के लिए या पूरी तरह से और विशेष रूप से खर्च करने के प्रयोजन के लिए एक बैंकर या किसी भी अन्य व्यक्ति को कमीशन या पारिश्रमिक ऐसे शेयरों की खरीद में उपयोग उधारी पर ब्याज का भुगतान के रूप में, इस तरह के आय कमाई.

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27.3 पिछले साल वित्त (नं. 2) अधिनियम, 1980 है कि देने के बाद, है, इंटरकोर्पोरेट लाभांश के संबंध में कटौती लाभांश की शुद्ध राशि पर अनुमति दी जाएगी कि उपलब्ध कराने के लिए आयकर अधिनियम में एक नई धारा 80AA डाला आदि उधार पर ब्याज के संबंध में कटौती, और नहीं क्लॉथ ट्रेडर्स के मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा आयोजित किया गया था के रूप में इस तरह के लाभांश की सकल राशि के आधार पर (पी)लिमिटेड अपर वी..सीआईटी [1979] 118 आईटीआर 243. नई धारा 80AA 1 अप्रैल 1968, वह यह है कि आयकर अधिनियम में अध्याय के माध्यम से परिचय होने की तिथि से पूर्वव्यापी प्रभाव के साथ अंतर्निहित मंशा स्पष्ट करने के लिए शुरू की गई थी. कई मामलों में, उच्च न्यायालयों भी अधिकर अधिनियम के अंतर्गत प्रभार्य मुनाफे की गणना के प्रयोजनों के लिए, आइटम (सात) के संबंध में, लाभांश की सकल राशि कुल आय से बाहर रखा जाना चाहिए कि आयोजित किया है. विधायी आशय केवल अतिरिक्त कर से वास्तव में कुल आय में शामिल किया गया है और उसी के अनुसार उच्च न्यायालय के फैसलों घरेलू कंपनियों से उनके द्वारा प्राप्त लाभांश के संबंध में कंपनियों को अनायास ही लाभ देने में हुई है जो लाभांश की राशि मुक्त करने के लिए किया जा सकता था.

वित्त अधिनियम, 1981

प्रभार्य मुनाफा कंप्यूटिंग में है कि प्रदान करने के लिए इतनी के रूप में 27.4 वित्त अधिनियम तदनुसार प्रथम अनुसूची के नियम 1 में एक नया स्पष्टीकरण डाला गया है, आय या लाभ और लाभ जो उपरोक्त अनुच्छेद 27.1 में नियम 1 में निर्दिष्ट और निर्दिष्ट की राशि शामिल खड़ा अकेले कुल आय में प्रभार्य लाभ से कटौती की जाएगी. दूसरे शब्दों में, (वर्गों 80M और 80mm के तहत कटौती सहित) सभी कटौतियों की अनुमति के बाद आयकर अधिनियम के प्रयोजनों के लिए अभिकलन लाभांश और रॉयल्टी की राशि केवल अधिकर के प्रयोजन के लिए बाहर रखा जाएगा.

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27.5 यह प्रावधान 1981/01/04 से लागू हो गया है और, तदनुसार, आकलन वर्ष 1981-82 और बाद के वर्षों के संबंध में लागू होगा.

[वित्त अधिनियम की धारा 43]

अनिवार्य जमा योजना में संशोधन
(आयकर दाताओं) अधिनियम

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एक और दो साल के लिए आयकर दाताओं के मामले में अनिवार्य जमा योजना का विस्तार

अनिवार्य जमा योजना (आयकर दाताओं) अधिनियम, भारत के नागरिक, हिंदू अविभाजित परिवारों और विवेकाधीन ट्रस्ट की न्यासी हैं व्यक्तियों, जो अनिवार्य मूल्यांकन वर्षों के लिए Depo-बैठता बनाने के लिए आवश्यक हैं के तहत 30.1 1975-76 1981-82 के लिए उनके "वर्तमान आय" रुपये से अधिक है, (समावेशी दोनों). 15,000. अर्थव्यवस्था में बचत के स्तर को बढ़ाने के लिए जारी आवश्यकता को देखते हुए, यह एक और दो ​​साल के लिए आयकर दाताओं के मामले में अनिवार्य जमा योजना जारी रखने का फैसला किया है, यानी, आकलन साल 1982-83 और 1983 के लिए - 84. जमा करेंगे की दरों, तथापि, अपरिवर्तित ही रहेंगे.

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अनिवार्य जमा का पुनर्भुगतान

मौजूदा प्रावधानों के तहत 30.2, किसी भी वित्तीय वर्ष में एक जमाकर्ता से बने या बरामद अनिवार्य जमा जमा कर दिया या बरामद किया गया था, जिसमें वित्तीय वर्ष के अंत से 2 वर्ष की समाप्ति से शुरू पांच समान किस्तों में प्रतिदेय है. आयकर अधिकारी, हालांकि, पहले जमा की अदायगी या उसके साथ चरम कठिनाई के मामलों में रुचि होने के कारण उस पर साथ किसी भी किस्त की अनुमति देने का अधिकार है.

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1977 में किए गए एक संशोधन के तहत 30.3, उम्र के 70 साल से अधिक कर रहे व्यक्तियों को, जो किसी भी अनिवार्य जमा करने की आवश्यकता से छूट दी गई है. वित्त अधिनियम एक व्यक्ति को एक वित्तीय वर्ष में 70 साल की उम्र तक पहुँच गया है जहां, अनिवार्य जमा खाते में अपने क्रेडिट के लिए खड़े संतुलन, उनके विकल्प पर, की समाप्ति पर उसे प्रतिदेय होगी कि प्रदान करके स्थिति को उदार बनाया गया है इस तरह वित्तीय वर्ष. किसी भी व्यक्ति 1981/01/04 से पहले 70 साल की उम्र को पार कर गया है जहां वह तो अगर वांछित, अनिवार्य जमा खाते में अपने क्रेडिट के लिए खड़े राशि 1981/01/06 पर, उसे करने के लिए प्रतिदेय होगी.

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पैरा 30.1 में चर्चा की 30.4 संशोधन 1 अप्रैल 1981 को अस्तित्व में आ गया है और संशोधन 1981/01/06 से प्रभाव में ले लिया है अनुच्छेद 30.3 में करने के लिए भेजा.

[वित्त अधिनियम की धारा 53]