आयकर विभाग

वित्त मंत्रालय, भारत सरकार

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परिपत्र सं.

307

परिपत्र की तिथि

23/06/1981

दस्तावेज़ अपलोड की तिथि

23/06/1981

परिपत्र सं. 307, 23-06-1981 दिनांकित

चैनल्स 139 156

मूल्यांकन के लिए प्रक्रिया

धारा 139 आय के एल रिटर्न

794. विभाग के रजिस्टरों पर मौजूदा सभी करदाताओं को डाक द्वारा रिक्त वापसी रूपों भेजा जा रहा है - सर्कुलर नं 296 और 297 में निर्देश वापस ले लिया

1संदर्भ बोर्ड के परिपत्र सं 296 [एफ लिए आमंत्रित किया है अपने सर्कुलर नंबर 297 द्वारा संशोधित सं 220/3/81-IT (ए) द्वितीय], 31-3-1981 दिनांकित [एफ सं 220/3/81-IT (ए) द्वितीय], 1981/10/04 दिनांकित [अनुलग्नक यह वापसी रूपों की दो प्रतियां करने के लिए अपने दम पर विभाग द्वारा भेजा जाना चाहिए कि वांछित था जिसमें मैं और अनुलग्नक द्वितीय] कर योग्य सीमा से ऊपर विभाग होने आय के रजिस्टर पर सभी निर्धारिती.

प्र.20. यह बात कमिश्नर का सम्मेलन, 1981 में चर्चा की गई है और यह आयकर कार्यालय और चयनित डाकघरों के माध्यम से उनके वितरण में काउंटरों में वापसी रूपों की आपूर्ति के अलावा, वापसी रूपों से थोक में लिया जाता है कि बाहर बताया गया था अपने ग्राहकों के लिए आयकर चिकित्सकों. यह भी अपने आप ही सब करदाता को रिटर्न रूपों भेजने श्रम और कई मामलों में के रूप में अच्छी तरह दोहराव के लिए राशि सकता है जो बहुत सारा पैसा शामिल हो सकता है कि बाहर बताया गया था. इसके अलावा, करदाता को भी गलत रूपों भेजने की संभावना है. एक आयकर चिकित्सकों एसोसिएशन भी पैरा 1 में निर्दिष्ट निर्देश संशोधित किया जाना चाहिए कि सुझाव दिया है. मामला इसलिए, फिर से विचार किया गया है और यह पुराने व्यवहार को अपनाने का फैसला किया है.यह भी वापसी रूपों वेतनभोगी करदाताओं के मामले में विभाग / संगठन के कर्मचारियों के लिए आपूर्ति के लिए थोक में एक संगठन के विभाग या जन सम्पर्क अधिकारी के सिर के लिए भेजा जा सकता है कि फैसला किया है.यह भी एक अनुरोध पर डाक द्वारा किसी भी निर्धारिती को शीघ्र आपूर्ति रूपों इस संबंध में बनाया गया है का फैसला किया है.

(3)इस परिपत्र ऊपर उल्लेख सर्कुलर नं 296 और 297 में निहित निर्देशों का स्थान लेता है.

परिपत्र: सं 307 [एफ सं 220/3/81 / (ए) द्वितीय], 23-6-1981 दिनांकित.

अनुलग्नक मैं - परिपत्र सं. 296, 31-3-1981 दिनांक
स्पष्टीकरण में निर्दिष्ट

1समय में आयकर रिटर्न दाखिल करने के लिए और वापसी रूपों प्राप्त करने के लिए आयकर अधिकारियों के करीब पहुंच में असुविधा से बचने के लिए आयकर विभाग के रजिस्टरों पर मौजूदा करदाताओं को सक्षम करने के लिए एक दृश्य के साथ, यह बोर्ड द्वारा निर्णय लिया गया है कि वित्तीय वर्ष 1981-82 से, रिक्त आयकर रिटर्न रूपों की दो प्रतियां विभाग के रजिस्टरों पर मौजूदा सभी करदाताओं को साधारण डाक के माध्यम से चिंतित ITOs द्वारा भेजा जाएगा.वापसी रूपों भेजते समय आईटीओ भी इसके साथ आत्म मूल्यांकन कर और आयकर अधिनियम की धारा 209A के तहत किए जाने के लिए अग्रिम कर के बयानों की दो प्रतियां के भुगतान के लिए चालान रूपों के साथ भेज देंगे.

प्र.20. इसे आगे भी संपत्ति कर रिटर्न फार्म की दो प्रतियां भी आयकर रिटर्न रूपों के साथ साथ विभाग के रजिस्टरों पर संपत्ति कर निर्धारिती विद्यमान हैं, जो उन सभी के लिए भेजा जाना चाहिए कि निर्णय लिया गया है.

(3)यह व्यवस्था आयकर कार्यालयों में और चयनित डाकघरों के माध्यम से काउंटरों में वापसी रूपों की आपूर्ति की मौजूदा व्यवस्था के अतिरिक्त है. करदाताओं के लिए थोक में वापसी रूपों मेलिंग वहीं धारा 139 के तहत नोटिस (2) या 14 (2) जारी होने की उम्मीद नहीं कर रहे हैं. हालांकि, रिटर्न नियत तिथि तक प्राप्त नहीं कर रहे हैं, जहां मामलों में, धारा 139 के तहत नोटिस (2) / 14 (2) आयकर अधिनियम / संपत्ति कर अधिनियम की वापसी रूपों के साथ साथ पंजीकृत के माध्यम से अलग से भेजा जाएगा पोस्ट या नोटिस सर्वर.

(4)एक अनुपालन रिपोर्ट आदि रूपों, देने वाले प्रभाव के लिए बोर्ड को आयुक्त द्वारा हर वर्ष 31 मई तक भेजा जा सकता है, उसके आरोप में सभी निर्धारिती को आपूर्ति की गई है.

अनुलग्नक द्वितीय - परिपत्र सं. 297, 1981/10/04 दिनांक
स्पष्टीकरण में निर्दिष्ट

संदर्भ 31-3-1981 दिनांकित, बोर्ड के परिपत्र सं 296 के लिए आमंत्रित किया है आयुक्तों साधारण डाक से विभाग के रजिस्टर पर मौजूदा निर्धारिती को, आदि वापसी रूपों की दो प्रतियां भेजने के लिए ITOs निर्देशित करने के लिए कहा गया था जिसके द्वारा . इस दिशा आदि रूपों वापसी उस हद तक संशोधित किया गया है, केवल जिनकी आय फ़ाइल पर नवीनतम वापसी / आकलन के अनुसार उन निर्धारिती को भेजा जाना चाहिए निर्धारण वर्ष 1981-82 या बाद के वर्षों के लिए लागू कर योग्य सीमा से ऊपर है, और भी अनुभाग 237 के तहत वापसी का दावा निर्धारिती को.