302 : परिपत्र सं. 302, 02-05-1981 दिनांकित
परिपत्र सं.
302
परिपत्र की तिथि
02/05/1981
दस्तावेज़ अपलोड की तिथि
02/05/1981
धारा 5 एल छूट दी गिफ्ट्स
1443. भारत में निवासियों के लिए अनिवासी दाताओं द्वारा की गई विदेशी मुद्रा या अन्य विदेशी मुद्रा के प्रेषण के माध्यम से उपहार वे खंड के भीतर गिर कि जमीन पर कर योग्य नहीं हैं चाहे (द्वितीय) (ए) की उपधारा (1)
1बोर्ड विदेशी मुद्रा या भारत में निवासियों के लिए अनिवासी दाताओं द्वारा किए गए अन्य विदेशी मुद्रा के प्रेषण के माध्यम से कर देयता के सवाल पर विचार या अन्यथा उपहार का अवसर मिला है.
प्र.20. प्रश्न (1) (ख) (क) जो पढ़ता उपहार कर अधिनियम की धारा 5 के आलोक में यह निर्णय लिया जाना है:
"5. (1) उपहार कर किसी भी व्यक्ति द्वारा किए गए उपहारों के संबंध में इस अधिनियम के तहत आरोप नहीं की जाएगी
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(i)
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(Ii) चल संपत्ति के प्रदेशों के बाहर बैठाना जब तक व्यक्ति
(एक) एक व्यक्ति होने के नाते भारत का नागरिक है और कहा प्रदेशों में मामूली तौर पर निवासी है. "
(3)धारा 5 के प्रावधानों को ध्यान में रखते (1) (ख) (क), क्या assessability के प्रयोजन के लिए प्रासंगिक है प्रतिभाशाली संपत्ति का स्थान उपहार के समय में, है.
(4)एक अनिवासी दाता भारत में एक व्यक्ति और बैंक ड्राफ्ट या चेक या मुद्रा से या भारत के बाहर दान लेने वाला की ओर से प्राप्त होता है के लिए विदेशी मुद्रा या विदेशी मुद्रा में एक उपहार है, तो जाहिर है कि उपहार के लिए कोई दायित्व नहीं होगा इस तरह के एक उपहार के संबंध में कर. ऐसे मामलों में उपहार की विषय वस्तु को भारत से बाहर स्थित संपत्ति होगी वजह यह है कि. इस तरह के विदेशी मुद्रा या विदेशी मुद्रा में संपत्ति भारत में दान लेने वाला के लिए दिया जाता है, जहां चेक या ड्राफ्ट निस्संदेह, अन्यथा उपहार डाक द्वारा अपने दम पर भारत में दान लेने वाला दाता द्वारा भेजा जाता है या जहां फिर, वह है, , उपहार कर के प्रति दायित्व को आकर्षित करेगा.ऐसे एक मामले में उपहार दाता के एक एजेंट और उपहार की विषय - वस्तु के रूप में कार्य करता है के लिए भेजा जाता है, जिसके माध्यम से डाकघर या एजेंसी भारत में स्थित संपत्ति हो जाएगा, क्योंकि यह है.
प्र.5. कुछ स्पष्टीकरण की आवश्यकता है जो स्थिति है, तथापि, एक अनिवासी दाता के पते पर डाक द्वारा दाता द्वारा भेजी जाती है भारत में एक व्यक्ति और बैंक ड्राफ्ट या उपहार का प्रतिनिधित्व चेक करने के लिए विदेशी मुद्रा या विदेशी मुद्रा में एक उपहार है जहां है दान लेने वाला के अनुरोध पर भारत में दान लेने वाला.बोर्ड इन लेनदेन के संबंध में उपहार कर के प्रति कोई दायित्व नहीं होगा कि स्पष्ट. ऐसे एक मामले में उपहार भारत के बाहर दान लेने वाला के एक एजेंट के रूप में बैंक / पोस्ट ऑफिस से प्राप्त किया गया है कहा जा सकता है वह है. यह निष्कर्ष राजकुमार मिल्स लिमिटेड के मामले में निर्णय पर आधारित है सीआईटी [1976] 103 वी. आईटीआर 92, 99, 100 है, जिसमें सुप्रीम कोर्ट द्वारा निर्धारित प्रासंगिक सिद्धांतों की समीक्षा पर बंबई उच्च न्यायालय के उनके lordships उद्धृत : के तहत के रूप में
"चेक डाक से भेजा जाता है, तो रसीद चेक पाने के एक्सप्रेस या निहित अनुरोध पर अपनाया है डाक से भेजने के मोड प्रदान की पोस्ट किया जाता है जहां जगह पर होगा, इस तरह के मामलों में डाकघर एजेंट जा रहा है पाने की, अन्यथा, रसीद चेक पाने के लिए डाकघर द्वारा दिया जाता है जहां जगह पर होगा ".
प्र.6. ऊपर अपने शुल्क में काम करने वाले सभी क्षेत्र के अधिकारियों के ध्यान में लाया जाना चाहिए.
परिपत्र: नहीं 302 [एफ सं 331/2/78-GT], 1981/02/05 दिनांकित.

