आयकर विभाग

वित्त मंत्रालय, भारत सरकार

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परिपत्र सं.

290

परिपत्र की तिथि

31/03/1981

दस्तावेज़ अपलोड की तिथि

31/03/1981

परिपत्र सं. 290, 31-03-1981 दिनांक

धारा 34A

धन-वापसी

टैक्स की धारा 34A एल रिफंड

1424. निर्धारिती रुपये से उठाया जा रहा है छूट की सीमा का एक परिणाम के रूप में भुगतान कर की वापसी के हकदार बनने. रुपये के लिए 1 लाख. वित्त (नं. 2) अधिनियम, 1980 द्वारा 1.50 लाख - देरी के बिना धन की वापसी के मुद्दे के लिए निर्देश

1वित्त (सं  2) अधिनियम, 1980 रुपये से संपत्ति कर के लिए उत्तरदायी नहीं अधिकतम राशि की सीमा बढ़ाने, संपत्ति कर अधिनियम, 1957 की प्रथम अनुसूची में संशोधन किया है. रुपये को 1,00,000. 1,50,000. नए प्रावधान (2) वित्त (नं. 2) अधिनियम, 1980 की धारा 1 के मामले में 1 अप्रैल 1980 से लागू हो गया है. तदनुसार, उच्च संपत्ति कर छूट की सीमा का लाभ वर्तमान निर्धारण वर्ष, अर्थात् से करदाताओं के लिए उपलब्ध है., 1980-1981.

प्र.20. यह रुपए के बीच लेकर, शुद्ध धन का रिटर्न दाखिल करते समय करदाताओं का एक बड़ा संख्या आत्म मूल्यांकन पर संपत्ति कर का भुगतान किया है कि बोर्ड के ध्यान में लाया गया है. रुपये को 1,00,000. 1,50,000 पिछले वित्त (नं. 2) विधेयक, 1980 के अधिनियमन के लिए. इस तरह करदाता छूट की सीमा रुपये से उठाया गया है कि इस तथ्य को ध्यान में भुगतान कर की वापसी के हकदार बन सकते हैं. रुपये को 1,00,000. 1,50,000.

(3)बिना किसी देरी के जारी होने के कारण के रूप में यदि जल्द ही एक अनुरोध पैरा 2 में उल्लिखित मामलों के प्रकार में बनाया है, आकलन, तत्काल और वापसी ऊपर रखा जाना चाहिए कि बोर्ड की इच्छा,.

(4)ऊपर अपने आरोप में सभी अधिकारियों के ध्यान में लाया जाना चाहिए.

परिपत्र: सं 290 [एफ सं 328/66/80-WT], 31-3-1981 दिनांकित