220 : परिपत्र सं. 220, 31-05-1977 दिनांकित
परिपत्र सं.
220
परिपत्र की तिथि
31/05/1977
दस्तावेज़ अपलोड की तिथि
31/05/1977
383. आयकर अधिकारी रुपये से अधिक भुगतान करने की आवश्यकता आराम कर सकते हैं, जब परिस्थितियाँ. नियम 6DD की धारा के तहत पार कर चेक (जे) द्वारा 2500
1 नियम 6DD के खंड (जे) निर्धारिती भुगतान एक बैंक पर तैयार एक क्रास चेक के माध्यम से या एक पार कर से नहीं किया जा सकता है कि आयकर अधिकारी संतुष्ट अनुभाग जहां 40A के तहत कोई पाबंदी (3) किया जाएगा कि प्रदान करता है बैंक ड्राफ्ट-
एक असाधारण या अपरिहार्य परिस्थितियों के कारण. या
बी. ढंग पूर्वोक्त में भुगतान, साध्य नहीं था, या लेन - देन की प्रकृति के संबंध में और उसके शीघ्र निपटारे के लिए आवश्यकता होने, आदाता को वास्तविक कठिनाई का कारण होता है क्योंकि
और भी आदाता का भुगतान और पहचान की असलियत के रूप में आयकर अधिकारी की संतुष्टि के लिए साक्ष्य प्रस्तुत.
प्र.20. यह देखा जाएगा कि जहां रुपये से अधिक की राशि का भुगतान. 2,500 अन्यथा कटा चेक / ड्राफ्ट द्वारा की तुलना में, भुगतान और आदाता की पहचान की असलियत के रूप में साक्ष्य प्रस्तुत करने के अलावा निर्धारिती, उनके मामले में से किसी एक के अंतर्गत आती है कि आयकर अधिकारी को संतुष्ट करने के लिए आवश्यक है, बना है में वर्णित परिस्थितियों (क) और (ख) के ऊपर, वह कोई पाबंदी अनुभाग 40A के तहत बनाया जाना चाहिए का दावा है कि अगर (3).
(3) विभिन्न अभ्यावेदन की वजह से आयकर अधिकारियों द्वारा शासन 6DD (जे) के प्रावधानों की व्याख्या में एकरूपता की कमी के कारण करदाताओं द्वारा अनुभव की जा रही है कि कठिनाइयों के संबंध में बोर्ड द्वारा प्राप्त किया गया है.बोर्ड इन प्रतिवेदनों पर विचार किया है और इस संबंध में आयकर अधिकारियों के बीच दृष्टिकोण की एकरूपता सुनिश्चित करने के लिए कुछ दिशा निर्देश नीचे रखना करने का फैसला किया है.
(4) स्थितियां नियम 6DD (जे) में निर्धारित है जिसमें सभी परिस्थितियों लागू बाहर वर्तनी नहीं किया जा सकता होगा.हालांकि, कहा शासन की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए जो लगता है कि उनमें से कुछ हैं:
एक. क्रेता विक्रेता के लिए नया है, या
. बी लेनदेन खरीदार या विक्रेता या तो एक बैंक खाता नहीं है जहां एक ही स्थान पर बने होते हैं; या
. सी लेनदेन और भुगतान एक बैंक अवकाश पर किया जाता है; या
. डी विक्रेता अन्यथा इस विशेष विक्रेता से तुलना की वजह से माल की अनुपलब्धता को भुगतना होगा क्रास चेक / ड्राफ्ट और क्रेता के कारोबारी हित के माध्यम से भुगतान स्वीकार करने के लिए मना कर रही है; या
. ई विक्रेता, एक कमीशन एजेंट के रूप में काम कर रहा है, वह माल खरीदा है जिस से व्यक्तियों के लिए बदले में नकद भुगतान करने की आवश्यकता नहीं है; या
एफ. विशिष्ट छूट नकदी के माध्यम से किए जाने के लिए भुगतान के लिए विक्रेता द्वारा दिया जाता है.
प्र.5. यह आम तौर पर, नियम 6DD (जे) की आवश्यकताओं को संतुष्ट होता है कि कहा जा सकता है, ऊपर आशय का एक पत्र उनके पते का पूरा विवरण दे विक्रेता से ऊपर सूचीबद्ध श्रेणियों के भीतर गिरने प्रत्येक लेन - देन के संबंध में उत्पादित किया जाता है, बिक्री कर संख्या / लेन - देन की असलियत के बारे में खुद को संतुष्ट करने के लिए आयकर अधिकारी सक्षम करने के लिए समुचित पहचान के प्रयोजनों के लिए स्थायी खाता संख्या, यदि कोई हो,.आयकर अधिकारी, हालांकि, शासन 6DD (जे) का लाभ देने से पहले उसकी संतुष्टि रिकॉर्ड होगा.
प्र.6. इसे आगे भी उपरोक्त परिस्थितियों संपूर्ण लेकिन इनका नहीं कर रहे हैं कि स्पष्ट किया जाता है. यह भी नियम 6DD (जे) की आवश्यकताओं को पूरा करेगा जो उपरोक्त श्रेणियों के भीतर गिरने के अलावा अन्य मामलों हो सकता है.
परिपत्र: नहीं 220 [एफसं 206/17/76-IT (ए) द्वितीय], 31-5-1977 दिनांकित.
न्यायिक विश्लेषण
में समझाया - abovesaid परिपत्र सीआईटी वी. में विस्तार से बताया गया था अवतार सिंह एंड संस [1992] 194 आईटीआर 80 (Punj.निम्नलिखित टिप्पणियों के साथ हरियाणा) और.:
"कहा परिपत्र देखा और सीआईटी वी. नवसारी अपशिष्ट कपास उत्पाद में माना जाता था, [1987] 163 आईटीआर यह यह (वी) ने कहा की 4 पैरा के लिए खंड (i) से प्रकट होता है कि आयोजित किया गया जहां 378 (Guj.), विक्रेता की पहचान में जाना जाता है अगर सवाल में भुगतान वास्तव में सामान खरीदे गए थे जिस से विक्रेता और नियम 6DD (जे) की आवश्यकताओं के लिए नकद में किया गया था, तो इसे पार की जांच करने के लिए विभाग के लिए संभव होगा कि परिपत्र होगा एक पत्र उनके पते का पूरा विवरण दे पैरा 4 में सचित्र श्रेणियों के भीतर गिरने प्रत्येक लेन - देन के संबंध में विक्रेता से उत्पादन किया है अगर संतुष्ट खड़े, समुचित पहचान के प्रयोजनों के लिए बिक्री कर पंजीकरण संख्या, यदि कोई हो, आयकर सक्षम करने के लिए लेन - देन की असलियत के बारे में खुद को संतुष्ट करने के लिए अधिकारी.यह आगे परिपत्र के पैरा 4 में संकेत परिस्थितियों केवल निदर्शी और संपूर्ण नहीं थे कि गयी, लेकिन अंतर्निहित विचार विक्रेता की पहचान स्थापित किया जा सकता है, तो इसे पार जाँच करें कि क्या करने के लिए आयकर अधिकारी के लिए संभव होगा कि था लेन - देन, जैसा कि कहा गया है, वास्तव में, जगह ले लिया है और एक वास्तविक प्रकृति का था.
ऐसा ही एक दृश्य के गिरधारीलाल गोयनका में कलकत्ता उच्च न्यायालय द्वारा व्यक्त की है सीआईटी [1989] 179 यह (P 128 पर.) देखा गया है कि जहां आईटीआर 122, वी.: 'बोर्ड के परिपत्र संपूर्ण नहीं है, यह केवल उदाहरण है और मूल्यांकन अधिकारी के खाते में अपने विवेक के पक्ष में या निर्धारिती के खिलाफ या तो कसरत में आसपास के हालात, व्यापार अवसरवादिता के विचारों और एक विशेष मामले के तथ्यों में ले लिया है.यह भी आयकर अधिकारी समस्या के लिए एक व्यावहारिक दृष्टिकोण रखना और निर्धारिती को कानून और कठिनाई की दिशा के बीच एक संतुलन कायम करना चाहिए कि आयोजित किया गया था. "(पी. 83)
में समझाया - ऊपर परिपत्र वी. नवसारी अपशिष्ट कपास उत्पाद में विस्तार से बताया गया था सीआईटी निम्नलिखित टिप्पणियों के साथ [1987] 163 आईटीआर 378 (Guj.):
"... अनुच्छेद 4 में संकेत मामलों केवल निदर्शी और संपूर्ण नहीं हैं लेकिन अंतर्निहित विचार विक्रेता की पहचान स्थापित किया जा सकता है, तो यह करने के लिए आयकर अधिकारी के लिए संभव हो जाएगा कि है जैसा कि कहा गया है, वास्तव में लेन - देन हुआ था कि क्या पार की जांच और एक वास्तविक प्रकृति का था. इस परिपत्र मई, 1977 में जारी किए जाने आया था, निर्धारिती परिपत्र केवल 6DD (जे) आकर्षित किया जाएगा शासन जिन परिस्थितियों में इंगित करता है के रूप में सहायता में दबाने में जायज़ है. "(पी.380)
में समझाया - abovesaid परिपत्र गिरधारीलाल गोयनका वी. उस पर टिप्पणी कर रहा था सीआईटी निम्नलिखित टिप्पणियों के साथ [1989] 179 आईटीआर 122 (Cal.):
"... बोर्ड के परिपत्र संपूर्ण लेकिन इनका नहीं है. आयकर अधिकारी इस मामले के एक व्यावहारिक दृष्टिकोण में ले लिया है. आयकर अधिकारी समस्याओं के लिए एक व्यावहारिक दृष्टिकोण रखना और निर्धारिती को कानून और कठिनाई की दिशा के बीच एक संतुलन कायम करना चाहिए. उन्होंने कहा कि तकनीकी में खुद जाल में फंसना नहीं चाहिए. सब के बाद, ऑब्जेक्ट वह अन्यथा दावा करने का हकदार है जो कटौती की निर्धारिती वंचित करने के लिए नहीं है. राशि नकद में भुगतान किया है या नकद में प्राप्त किया गया था जहां, मूल्यांकन अधिकारी लेन - देन असली है या नहीं पता लगाने के लिए है और वह लेन - देन वास्तविक है कि पाता है, वह कटौती की अनुमति चाहिए. बोर्ड के परिपत्र इतनी नहीं है; यह केवल उदाहरण है और मूल्यांकन अधिकारी के खाते में उसके विवेक पक्ष में या निर्धारिती के खिलाफ या तो कसरत में आसपास के हालात, व्यापार अवसरवादिता के विचारों और एक विशेष मामले के तथ्यों में ले लिया है. नकद में भुगतान के लिए निर्धारिती और विक्रेता के बीच एक मौखिक समझौते हो सकते हैं. एक विक्रेता चेक स्वीकार करने को तैयार नहीं हो सकता है; नकद भुगतान भी दायर की है कि प्रभाव के लिए एक निर्धारिती और एक प्रमाण पत्र है जो आदाता के अनुरोध पर बनाया जा सकता है; नकद भुगतान किया जाता है, जहां स्थानों में बैंकिंग सुविधाओं के अभाव. ऐसे सभी मामलों असाधारण या अपरिहार्य परिस्थितियों के दायरे में आ जाएगा. "(पी. 128)
: ट्रिनिटी ट्रेडर्स वी. सीआईटी में [1987] 163 आईटीआर 381 (Guj.), ऊपर परिपत्र निम्नलिखित टिप्पणियों के साथ भेजा गया था - में समझाया
"परिपत्र में यह स्पष्ट लागू होगा ये केवल 6DD (जे) के शासन में जो मामलों का उदाहरण उदाहरण हैं कि बनाता है.परिपत्र भी ऊपर आशय का एक पत्र उनके पते, बिक्री कर का पूरा विवरण दे विक्रेता से ऊपर सूचीबद्ध श्रेणियों के भीतर गिरने प्रत्येक लेन - देन के संबंध में उत्पादन किया जाता है, तो नियम 6DD (जे) की आवश्यकताओं को संतुष्ट किया जा सकता है कि बताते हैं संख्या / स्थायी खाता संख्या, यदि कोई हो, लेन - देन की असलियत के बारे में खुद को संतुष्ट करने के लिए आयकर अधिकारी सक्षम करने के लिए समुचित पहचान के प्रयोजनों के लिए. . . . "(पी.384)
में समझाया - abovesaid परिपत्र सीआईटी वी. Badrilal फूलचंद Rodawat में उस पर टिप्पणी की थी, [1987] 167 निम्नलिखित टिप्पणियों के साथ आईटीआर 404 (Raj.):
"यह आयकर अधिकारी पारित किया जब कहा परिपत्र समय पर उपलब्ध नहीं था कि सच में कोई संदेह नहीं है निर्धारण आदेश और अपीलीय सहायक आयुक्त निर्धारिती की अपील पर विचार किया.कहा परिपत्र सकते में निहित दिशा निर्देशों, हमारी राय में, सवाल में भुगतान नियमों के नियम 6DD (जे) के दायरे में गिरने के रूप में माना जा सकता है के रूप में विचार करने के प्रयोजन के लिए ध्यान में रखा जाना. "(पी .410)
में समझाया - ऊपर परिपत्र वेंकट सत्यनारायण इमारती लकड़ी डिपो वी. में भेजा गया था सीआईटी निम्नलिखित टिप्पणियों के साथ [1987] 165 आईटीआर 253 (एपी):
"... योग्यता के आधार पर, हम निर्धारिती नियम 6DD (जे) (ख) केन्द्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड के 31 मई 1977 के सर्कुलर नं 220, के खंड 4 के साथ पढ़ने को देखते हुए भुगतान के लिए छूट के हकदार है कि संतुष्ट हैं .... "(पी.254 का संदर्भ लें)
: आईटीओ [1978] 113 वी. Rajarajeswari वीविंग मिल्स आईटीआर 405 (Ker.), ऊपर परिपत्र निम्नलिखित टिप्पणियों के साथ करने के लिए भेजा गया था - में समझाया
"... हम आयकर अधिनियम की धारा 119 के तहत सटीक गुंजाइश है और एक परिपत्र के दायरे के रूप में पेचीदगियों में enmeshed प्राप्त करना चाहते हैं, और नहीं है के रूप में करने के लिए कि क्या, और, यदि हां, तो किस हद तक, इस तरह के एक परिपत्र बेड़ी कर सकते हैं अधिनियम के अंतर्गत कार्यरत अधिकारियों की न्यायिक या अर्ध न्यायिक विवेक. इस विशेष मामले में, हमने पहले देखा है कि परिपत्र 31 मई 1977 दिनांकित है, और प्रश्न इन अपीलों में उत्पन्न हो गई है जिसके संबंध में आयुक्त के आदेश 21 जून 1976 तिथि है. यह प्रश्न में परिपत्र इन मामलों के लिए कोई आवेदन कर सकते हैं कि, स्पष्ट, इसलिए है. हम परिपत्र केवल clarificatory या घोषणात्मक है कि निर्धारिती के तर्क से प्रभावित नहीं कर रहे हैं. "(पीपी 409-410)
केंद्रीय एजेंसियां [1987] 166 आईटीआर 529 (दिल्ली) वी. भी सीआईटी देखें.
इन पर भरोसा - द्वितीय - ऊपर परिपत्र आईटीओ [1984] कराधान 72 (6A) वी. INGENIEURS और एजेंटों में पर भरोसा किया गया था (All. -. ट्राई बी), कटौती के लिए निर्धारिती के दावे को अनुमति न देने के लिए.
लागू इन - ऊपर परिपत्र इतो वी. Tatikonda सुब्बा राव [1987] 28 TTJ (Hyd.) में निर्दिष्ट और लागू किया गया था146, 150.
में समझाया - ऊपर परिपत्र एस में विस्तार से बताया गया था निम्नलिखित टिप्पणियों के साथ सीआईटी [1988] 173 आईटीआर 340 (एपी), वी. वेंकट सुब्बा राव:
"श्री वाई रत्नाकर 31 मई 1997 ([1997] 108 आईटीआर (सेंट) दिनांक, सर्कुलर नंबर 220 की जा रही है, केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड द्वारा जारी एक परिपत्र पर भरोसा 8). हमने कहा परिपत्र perused है. यह केवल बताते हैं और दिखाता है, हालांकि यह खंड 40A की आवश्यकताओं का अनुपालन करने के लिए साध्य नहीं है, जिसमें न exhaustively-हालात (3). परिपत्र कहीं नहीं यह आदाता का भुगतान और पहचान की सत्यता की स्थापना के लिए शासन 6DD (जे) के लाभ का दावा करने वाले व्यक्ति के लिए आवश्यक नहीं है कि कहते हैं.इसके विपरीत, कहा आवश्यकता बार बार दोहराई है. हमने कहा परिपत्र किसी भी रूप में निर्धारिती के मामले अग्रिम नहीं कर सकता कि राय की है, इसलिए कर रहे हैं. "(पी. 345)
में समझाया - ऊपर परिपत्र निम्नलिखित टिप्पणियों के साथ, सीआईटी [1990] 186 आईटीआर 356 (गुवाहाटी) वी. पॉल ब्रदर्स में विस्तार से बताया गया था:
"उप - धारा में प्रावधान के अनुसरण में (3) धारा 40A की, 6DD शासन लागू किया गया था और परिपत्र सं 220 31 मई, 1977 पर केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड द्वारा जारी किया गया था. धारा 40A, नियम 6DD और परिपत्र सं 220 सुनाना है कि 31 मार्च 1969 के बाद, रुपये से अधिक के व्यय के कारण किसी भी भुगतान. 2500 राजस्व अधिकारियों द्वारा छूट दी गई है जब तक कि एक क्रास चेक द्वारा या रेखांकित बैंक ड्राफ्ट के द्वारा किया जा होगा. . . .
भारतीय संसद करों की चोरी रोकने के लिए उपरोक्त प्रावधानों को शामिल किया. यहां तक कि भुगतान नकद में किया गया है करने के लिए दिखाए जाते हैं जहां वास्तविक मामलों में, निर्धारिती व्यापार के क्षेत्र में, बैंकिंग सुविधाएं पर्याप्त नहीं हैं साबित होता है कि आवश्यकता के लिए रखा जाता है. इसलिए, वास्तविक कठिनाई द्वारा impelled, निर्धारिती नकद में भुगतान करना था. एक ही विचार नियमों में बड़ी रिट है. निर्धारिती नकद में भुगतान करने के सिवाय निर्धारिती के लिए छोड़ दिया है कोई रास्ता नहीं था कि शो होगा. चीजों की प्रकृति में क़ानून, नियम या परिपत्र में, चाहे सभी आकस्मिकताओं विस्तृत रूप से इस तरह से समझा नहीं जा सकता. संसद अनुभाग 40A में सुविधाओं की अपर्याप्तता के लिए भेजा. नियम बनाने की अधिकारियों नियम परिस्थितियों के कुछ सचित्र. छूट का दावा किया और रखा जा सकता है जब राजस्व आगे हालात पूरक. (पीपी 357-358)
में लागू - ऊपर परिपत्र इतो वी. Dhorajia निर्माण कंपनी में लागू किया गया था [1991] 92 सीटीआर (Trib.)निम्नलिखित टिप्पणियों के साथ (Ahd.) 51,:
"... कागज किताब में हम तीन उप ठेकेदारों स्पष्ट समझ पर निर्धारिती फर्म से काम शुरू करने के लिए सहमत हो गए हैं दिखाई देते हैं लगता है कि रूप और जब जरूरत, के रूप में वे नकदी में किए जाने के लिए नहीं होगा उनके लिए भुगतान, साइट पर काम निष्पादित कर रहे थे, जो मजदूरों को भुगतान के लिए नकदी की आवश्यकता हो. काम के स्थल के बारे में 12 किलोमीटर पर बेशक था. दूर बैंक सुविधाओं पार्टियों के लिए उपलब्ध थे जहां जगह से. निर्धारिती फर्म के व्यापार की प्रकृति को देखते हुए, साइट पर मजदूरों को नकद भुगतान करने के लिए उन्हें सक्षम करने के लिए नकद में भुगतान प्राप्त करने वाले उप ठेकेदारों की जिद, आर के प्रावधानों. बोर्ड के सर्कुलर के साथ पढ़ा 6DD (जे) निर्धारिती फर्म के लाभ के लिए लागू होता है. . . . "(पी.62)
इन पर भरोसा - ऊपर परिपत्र इतो वी. में पर भरोसा किया गया था नई कार्ड बोर्ड इंडस्ट्रीज [1992] टैक्स एलआर 80 (Cal. -. ट्राई बी), और ट्रिब्यूनल न्यायाधिकरण के समक्ष निर्धारिती द्वारा पहली बार उत्पादित दस्तावेजों की जांच के लिए मूल्यांकन अधिकारी को मामला प्रेषित.
ऊपर परिपत्र सीआईटी वी. में पर भरोसा किया था - इन पर भरोसा निम्नलिखित टिप्पणियों के साथ मेघदूत बिक्री [1993] 200 आईटीआर 490 (दिल्ली),:
"हमारी राय में, भेजा गया है, जो ने कहा कि सवाल का जवाब स्वयं स्पष्ट है. आयकर ट्रिब्यूनल नकद भुगतान केवल असाधारण और अपरिहार्य परिस्थितियों में किए गए एक तथ्य के रूप में मिल गया है. यह निष्कर्ष यह पहले रखा गया था जो पूरी सामग्री की जांच के बाद ट्रिब्यूनल द्वारा निर्धारित की गई है. इसे आगे भी लेन - देन की असलियत विवाद में नहीं था कि देखा गया है. यह ऐसा है, तो ट्रिब्यूनल ने पाया तथ्यों पर, मामला शासन 6DD (जे) के प्रावधानों के भीतर गिर गए ही नहीं जा रहा है, लेकिन निर्धारिती भी जारी किए गए, 31 मई, 1997 दिनांकित, सर्कुलर नंबर 220 के लाभ का दावा करने के हकदार था केन्द्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड द्वारा.कहा परिपत्र, यह है, अन्य बातों के साथ में, एक विक्रेता क्रास चेक के माध्यम से भुगतान या पार मसौदा और क्रेता के कारोबारी हित को स्वीकार करने से मना कर दिया की वजह अन्यथा विशेष विक्रेता से से माल की अनुपलब्धता को भुगतना होगा, कहा गया है कि तो भुगतान नकद द्वारा किया जाता है, भले ही एक ही कटौती के रूप में स्वीकार्य होगा. "(पीपी492-493)
इन पर भरोसा - ऊपर परिपत्र ड्रिल रॉक इंजीनियरिंग में पर भरोसा किया था.कंपनी (पी.) लिमिटेड वी. आईटीओ [1993] 45 आईटीडी 149 (Hyd. - ट्राई बी.) निम्नलिखित टिप्पणियों के साथ:
"... अनुभाग 40A के शब्दों (3) के साथ ही शासन 6DD (जे) में देख रहे हैं और यह भी 1977 में जारी किए गए बोर्ड के परिपत्र सं 220 अनुभाग 40A की प्राथमिक आवश्यकताओं में से एक (3) आदाता की पहचान से पहले स्थापित किया जाना चाहिए आईटीओ. अनुभाग विशेष रूप से काले धन का लेनदेन पर अंकुश लगाने के क्रम में अधिनियमित किया गया है.हालांकि, हम में से पहले अपीलार्थी उपरोक्त प्रावधानों के साथ ही बोर्ड के परिपत्र की आवश्यकताओं का अनुपालन करने में विफल रहा. इसलिए इन कारणों के लिए भी रहस्य कमीशन की राशि की अनुमति नहीं दी जानी है. "(पी. 199)
में समझाया - ऊपर परिपत्र इतो वी. में विस्तार से बताया गया था पाटीदार ओटाई और दबाने कंपनी लिमिटेड [1994] 51 आईटीडी 7 (Ahd. - ट्राई बी.), निम्नलिखित टिप्पणियों के साथ:
इस तरह कहा परिपत्र के पैरा 4 में वर्णित के रूप में असाधारण और अपरिहार्य परिस्थितियों को स्पष्ट करने वाला यदि बाद "31-5-1977 सर्कुलर नं 220 में 6.1, यह है कि यह आम तौर पर नियम 6DD (जे) की आवश्यकताओं को पूरा करेगा कि स्पष्ट किया गया है सक्षम करने के लिए किसी भी अगर समुचित पहचान के उद्देश्य के लिए, उनके पते, बिक्री कर नंबर, स्थायी खाता संख्या का पूरा विवरण दे विक्रेता से कहा परिपत्र के पैरा 4 में सूचीबद्ध श्रेणियों के भीतर गिरने प्रत्येक लेन - देन के संबंध में उत्पादन किया है आईटीओ लेन - देन की असलियत के बारे में खुद को संतुष्ट करने के लिए.कहा परिपत्र के पैरा 4 में दी गई असाधारण परिस्थिति का चित्रण की एक विक्रेता को पार कर चेक / ड्राफ्ट के माध्यम से भुगतान और खरीदारों के व्यापार के हित को स्वीकार करने से मना कर रही है तो इस से तुलना नहीं तो कारण माल की अनुपलब्धता को भुगतना होगा विशेष विक्रेता. अन्य चित्रण विक्रेता, एक कमीशन एजेंट के रूप में काम कर रहा है, वह माल खरीदा था जिस से व्यक्तियों के लिए बदले में नकद भुगतान करने के लिए आवश्यक है. असाधारण परिस्थितियों के कुछ और उदाहरणों कहा परिपत्र में दी गई है. माननीय गुजरात उच्च न्यायालय सीआईटी वी. नवसारी अपशिष्ट कपास उत्पादों के मामले में [1987] 163 आईटीआर 378 कहा परिपत्र केवल 6DD (जे) के शासन में जो हालात आकर्षित किया जाएगा संकेत मिलता है कि आयोजित किया गया है.अंतर्निहित विचार विक्रेता की पहचान स्थापित किया जा सकता है, यह वास्तव में लेनदेन के रूप में कहा जगह ले लिया है और एक वास्तविक प्रकृति का था कि क्या पार की जांच करने के लिए आईटीओ के लिए संभव हो जाएगा. कहा परिपत्र में दिए गए उदाहरणों केवल निदर्शी और संपूर्ण नहीं हैं. . . . "(पीपी 13-14)
लागू इन - ऊपर परिपत्र इतो 1994 टैक्स एलआर 79 वी. एवन बिक्री निगम में करने के लिए भेजा और लागू किया गया था - निम्नलिखित टिप्पणियों के साथ, (ITAC दिल्ली):
"... सीबीडीटी ख़बरदार सर्कुलर नंबर 220, आदि पेयी उनके पास से नकद भुगतान और एक प्रमाण पत्र के लिए जोर दिया था जहां आयकर नंबर देने से सुसज्जित हैं और बिक्री कर संख्या है कि निर्देश जारी यू / एस 40A (3) चाहिए पाबंदी है नहीं बनाया जाना.इस मामले में एम / एस के लिए पर्याप्त भुगतान. एवन बिक्री निगम पार चेक या बैंक ड्राफ्ट के द्वारा किया गया था. रुपये में से केवल दो भुगतान. 2,600 रु. 4000 नकद भुगतान के लिए जोर दिया होने पार्टी पर नकद द्वारा किया गया था. इन भुगतानों, हमारे विचार में, 6DD (जे) सीबीडीटी के सर्कुलर नंबर 220 के साथ पठित नियम के अंतर्गत आते हैं. रुपये की पाबंदी. 6600 तदनुसार हटा दिया जाता है. "(पी.90)
में समझाया - सीआईटी वी. Janambhumi [1998] 99 चुंगी लगानेवाला 451/225 आईटीआर 517 निम्नलिखित टिप्पणियों के साथ (Gau.):
"परिपत्र ही इन असाधारण और अपरिहार्य होने के लिए कहा जा सकता है जो केवल परिस्थितियों नहीं हैं कि इंगित करता है. लेखन में नहीं रखा जा सकता है जो कुछ अन्य असाधारण और अपरिहार्य परिस्थितियों हो सकता है. आयुक्त (अपील) निर्धारिती भुगतान नकद रुपए से अधिक में बनाया जाना था, जिसके तहत असाधारण और अपरिहार्य परिस्थितियों स्थापित करने में विफल है कि जमीन पर आईटीओ के आदेश को सही ठहराया. २५०० रु. है. असाधारण परिस्थितियों पर विचार करते समय व्यापार मजबूरियों, सुविधा और सुरक्षा भी में देखा जाना चाहिए. "
में समझाया - सीआईटी जीएस ऑटो इंडस्ट्रीज (वी. पी.)लिमिटेड [1998] 144 सीटीआर (Punj. और हर निम्नलिखित टिप्पणियों के साथ) 464.:
"यह क्रास चेक या ड्राफ्ट द्वारा भुगतान स्वीकार करने के लिए विक्रेता से इनकार नकद में भुगतान करने के लिए निर्धारिती की अनुमति दे सकता है कि ऊपर उल्लेख बोर्ड के परिपत्र के अवलोकन से प्रतीत होता. लेकिन, एक ही समय में, यह भी निर्धारिती के कारोबारी हित अन्यथा उस विशेष विक्रेता से तुलना की वजह से माल की अनुपलब्धता का सामना करना पड़ा है कि दिखाया जाना चाहिए. उपखंड (चतुर्थ) परिपत्र की धारा 4 के उपरोक्त के रूप में दोनों शर्तों को पूरा आवश्यकता है.इस रोशनी में, प्राप्तकर्ताओं द्वारा जिद की बात के बाद लड़की (चतुर्थ) परिपत्र की धारा 4 को आकर्षित करने के लिए पर्याप्त नहीं हो सकता. "
में समझाया - सीआईटी वी. श्री महावीर इंडस्ट्रीज [1996] 220 निम्नलिखित टिप्पणियों के साथ आईटीआर 459 (Gau.):
"31 मई 1977 के सर्कुलर नं 220,,, आयकर नियम, 1962 के 6DD (जे) के शासन में जो हालात के कुछ निर्दिष्ट करता लागू होगा.परिपत्र में ही इन असाधारण और अपरिहार्य होने के लिए कहा जा सकता है जो केवल परिस्थितियों नहीं हैं कि इंगित करता है. असाधारण और अपरिहार्य परिस्थितियों प्रत्येक मामले के तथ्यों के आधार पर भिन्न हो सकते हैं. पार्टियों बैंक खातों है और बिल प्रस्तुत करने और भुगतान करने के बीच एक लंबे अंतराल है महज इसलिए, निष्कर्ष निर्धारिती असाधारण और अपरिहार्य परिस्थितियों को दिखाने के लिए कि विफल रही है पर आ नहीं किया जा सकता. यह इस तरह के निष्कर्ष करने के लिए आया था, क्यों असाधारण और अपरिहार्य परिस्थितियों स्थापित करने की विफलता के बारे में निर्णय करने के लिए आने से पहले, अधिकार कारणों दे देना चाहिए. "
में समझाया - सीआईटी जीएस ऑटो इंडस्ट्रीज (वी. पी.)लिमिटेड [1999] 106 चुंगी लगानेवाला 473 (Punj. और हरियाणा) निम्नलिखित शब्दों में.:
"... [सर्कुलर नंबर 220 के अनुसार, क्रास चेक या ड्राफ्ट द्वारा भुगतान स्वीकार करने के लिए विक्रेता से इनकार] नकद में भुगतान करने के लिए निर्धारिती अनुमति दे सकता है. लेकिन, एक ही समय में, यह भी निर्धारिती के कारोबारी हित अन्यथा उस विशेष विक्रेता से तुलना की वजह से माल की अनुपलब्धता का सामना करना पड़ा है कि दिखाया जाना चाहिए. उपखंड (चतुर्थ) परिपत्र की धारा 4 के उपरोक्त के रूप में दोनों शर्तों को पूरा आवश्यकता है.इस रोशनी में, प्राप्तकर्ताओं द्वारा जिद की बात के बाद लड़की (चतुर्थ) परिपत्र की धारा 4 को आकर्षित करने के लिए पर्याप्त नहीं हो सकता. "(पीपी475-476)

