2 : परिपत्र: सं 2, 9-2-2001 दिनांकित
परिपत्र सं.
2
परिपत्र की तिथि
09/02/2001
दस्तावेज़ अपलोड की तिथि
09/02/2001
233. मूल्यह्रास के लिए दावा - जहां आवश्यक ब्यौरे सुसज्जित नहीं किया गया है
1 उत्पादित खाते की किताबें ठीक से रखरखाव नहीं किया गया, क्योंकि कई उदाहरण विधिवत वापसी में दिखाया मूल्यह्रास के लिए निर्धारिती के दावे को आयकर अधिकारी द्वारा विचार नहीं किया गया है, जहां बोर्ड के ध्यान में आ गए हैं और यह करने के प्रावधान लागू करके मुनाफा अनुमान लगाने के लिए जरूरी हो गया था 1922 अधिनियम की धारा 13. आम तौर पर ऐसे मामलों में पीछा पाठ्यक्रम शुद्ध आय अनुमान लगाने के लिए किया गया था. शुद्ध मुनाफे में अनुमान लगाया गया था कि मात्र तथ्य रिटर्न में दावा किया है कि मूल्यह्रास अधिनियम के तहत प्रदान के रूप में विधिवत "की अनुमति" किया गया था कह के लिए एक आधार नहीं हो सकता है कि इस तरह के मामलों में अपीलीय प्राधिकारी के निर्णय. इसके विपरीत, वे कोई मूल्यह्रास वास्तव में पिछले कुछ वर्षों में अनुमति दी गई थी, के बाद धारा 10 के अधीन लाभ या हानि (2) (सात) के नीचे लिखा मूल्य पर पहुंचने के लिए मूल्यह्रास के लिए किसी भी कटौती करने के बिना गणना की जानी है कि, आयोजित परिसंपत्ति.
प्र.20. बोर्ड यह लाभ का अनुमान लगाने का प्रस्ताव किया है और निर्धारित ब्यौरे निर्धारिती द्वारा प्रस्तुत किया गया है, जहां माना जाता है कि, मूल्यह्रास भत्ता अलग से बाहर काम किया जाना चाहिए.ऐसे सभी मामलों में, सकल लाभ का अनुमान किया जाना चाहिए और मूल्यह्रास भत्ता सहित कटौती और भत्ते अलग सकल लाभ से कटौती की जानी चाहिए. यह शुद्ध लाभ का अनुमान किया जाना चाहिए कि माना जाता है, यह मूल्यह्रास के लिए भत्ता के अधीन अनुमान के अनुसार किया जाना चाहिए और मूल्यह्रास भत्ता उधर से कटौती की जानी चाहिए.
(3) सबसे अच्छा निर्णय किया जाता है, जहां भी उपरोक्त प्रक्रिया आवश्यक ब्यौरे निर्धारिती द्वारा प्रस्तुत किया गया है प्रदान की अपनाया जाना चाहिए. आवश्यक ब्यौरे निर्धारिती द्वारा प्रस्तुत नहीं किया गया है और मूल्यह्रास के लिए कोई दावा नहीं बदले में किया गया है जहां मामलों में, आयकर अधिकारी मूल्यह्रास भत्ता की अनुमति के बिना आय का अनुमान चाहिए. ऐसे मामलों में, शुद्ध लाभ का अनुमान अन्यथा की तुलना में स्वाभाविक रूप से अधिक होगा और अनुमान मूल्यह्रास भत्ता पर विचार किए बिना किया गया है कि इस तथ्य को स्पष्ट रूप से निर्धारण आदेश में बाहर लाया जा सकता है. ऐसे मामलों में, मूल्यह्रास संपत्ति के नीचे लिखा मूल्य नहीं मूल्यह्रास वास्तव में निर्धारण वर्ष में अनुमति दी जाएगी के रूप में पिछले वर्ष के अंत में के रूप में ही रहेंगे.
परिपत्र: नहीं 29 डी (xix-14) [एफसं 45/239/65-ITJ], 31-8-1965 दिनांकित.
न्यायिक विश्लेषण
Beco इंजीनियरिंग में - में विस्तार से बताया.कंपनी लिमिटेड सीआईटी वी. [1984] 148 आईटीआर 478 (Punj.. एवं हरियाणा), ऊपर परिपत्र निम्नलिखित टिप्पणियों के साथ समझाया गया था:
"... केन्द्रीय राजस्व बोर्ड अपने सर्कुलर नंबर 29 डी (xix-14) 1965 के में, एफ सं 45/239/65-ITJ, 31 अगस्त 1965 दिनांकित, आवश्यक ब्यौरे नहीं किया गया है कि जहां प्रदान की गई है निर्धारिती द्वारा दी और मूल्यह्रास के लिए कोई दावा नहीं बदले में किया गया है, आईटीओ मूल्यह्रास भत्ता की अनुमति के बिना आय का अनुमान चाहिए. परिपत्र से, यह मामला में निर्धारिती मूल्यह्रास भत्ता दावा नहीं किया गया है, वह आईटीओ से एक ही नहीं दी जा सकती है कि स्पष्ट है. आईटी विभाग द्वारा जारी परिपत्रों उस पर बाध्यकारी होगा कि, केके सेन, एएसी [1965] 56 आईटीआर 198 वी. नवनीत लाल सी. Javeri में सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय की गई है.परिपत्र के साथ पढ़ने के अनुभाग, की भाषा से साफ है कि मामले में एक निर्धारिती मूल्यह्रास दावा नहीं किया गया है, आईटीओ उसे ह्रास का भत्ता नहीं दे सकता कि स्पष्ट है. "(पीपी 481-482)
सीआईटी वी. दोस्तों निगम [1989] 180 आईटीआर 334 (Punj. में - में समझायाऔर हर.), यह नीचे के रूप में मनाया गया:
"मूल्यह्रास के लिए भत्ता उसकी इच्छा के खिलाफ उस पर जोर दिया जा सकता है कि एक नहीं दावा करने निर्धारिती को उपलब्ध एक फायदा है, लेकिन वह कोई gainsaying है. आयकर अधिनियम और उसके अधीन बनाए गए निर्धारित नियमों के अनुसार किसी भी दर पर, मूल्यह्रास का दावा करने के क्रम में, निर्धारिती अपेक्षित ब्यौरे प्रस्तुत करना होगा. ऐसे विवरण के अभाव में, निर्धारिती का लाभ उठाने नहीं कर सकते हैं, और न ही वास्तव में वह करने के लिए, मूल्यह्रास हकदार ठहराया जा सकता है. यह इस अदालत के फैसले के लिए विज्ञापन पर इस संबंध में उचित होगा. Beco इंजीनियरिंग कंपनी लिमिटेड वी. में एक संदर्भ, 1965 के सर्कुलर नंबर 29 डी (xix-14) में किए गए 31 अगस्त 1965 दिनांकित, आवश्यक ब्यौरे है जहां यह प्रावधान है कि जो केन्द्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड द्वारा जारी किया गया था, जहां सीआईटी [1984] 148 आईटीआर 478, निर्धारिती द्वारा दी गई और मूल्यह्रास के लिए कोई दावा नहीं बदले में, आयकर अधिकारी मूल्यह्रास भत्ता की अनुमति के बिना आय का अनुमान चाहिए किया गया है नहीं.इसके अलावा, यह वर्गों 32 (1) (ख) और 34 (1) परिपत्र के साथ पढ़ने की भाषा से, यह एक निर्धारिती मूल्यह्रास दावा नहीं किया था, के मामले में आयकर अधिकारी उसे नहीं दे सकता कि स्पष्ट था कि आयोजित किया गया मूल्यह्रास भत्ता. "(पी.335)
अरुण वस्त्र वी. सीआईटी में - में समझाया [1991] 192 आईटीआर 700 (Guj.), यह नीचे के रूप में मनाया गया:
"... इस संदर्भ में, हम भी 1965 के राजस्व ,29-डी के केंद्रीय बोर्ड के परिपत्र (xix-14) (एफ का उल्लेख कर सकते सं निर्देश दिया है जो 31 अगस्त 1965 दिनांकित 45/239/65-ITJ,), 'कि आवश्यक ब्यौरे निर्धारिती द्वारा प्रस्तुत नहीं किया गया है और मूल्यह्रास के लिए कोई दावा आयकर अधिकारी, बदले में बनाया गया है, जहां मूल्यह्रास भत्ता की अनुमति के बिना आय का अनुमान करना चाहिए. ' निर्धारिती मूल्यह्रास भत्ता दावा नहीं किया था और उसी का दावा करने के लिए नहीं अपने इरादे स्पष्ट कर दिया था के रूप में इस प्रकार, कोई आवश्यक विवरण सुसज्जित है और यह आयकर अधिकारी किसी भी कटौती की अनुमति के लिए कोई अवसर है कि स्पष्ट है थे. यह दावा स्पष्ट रूप से संशोधित रिटर्न दाखिल करने से वापस ले लिया गया है जो कटौती की अनुमति के प्रयोजन के लिए मूल रिटर्न के लिए विज्ञापन पर आयकर अधिकारी को नहीं खोल रहा था. "(पी. 706)
श्री सोमेश्वर सहकारी साखर कारखाना लिमिटेड [वी. सीआईटी में - में समझाया1989] 177 आईटीआर 443 (Bom.), ऊपर परिपत्र निम्नलिखित टिप्पणियों के साथ समझाया गया था:
"हमारा ध्यान सीआईटी [1977] वी. चोकशी धातु रिफाइनरी में गुजरात उच्च न्यायालय के फैसले के 107 आईटीआर 63, 70,71 के लिए करदाता के वकील द्वारा आमंत्रित किया गया था.संदर्भ केन्द्रीय राजस्व बोर्ड के एक परिपत्र के लिए वहाँ बनाया गया था [सर्कुलर संख्या 14 11 अप्रैल 1955 दिनांकित 1955 की (एक्स्ट्रा लार्ज-35),]. विभाग के परिपत्र आवश्यक अधिकारियों को विशेष रूप से राहत का दावा करने और हासिल करने के मामले में, हर उचित तरीके से एक करदाता की सहायता के लिए. . . . इसलिए, रिफंड और राहत का दावा करने के लिए जिम्मेदारी है, यह कानून द्वारा लगाया गया है जिस पर करदाता के साथ टिकी हुई है, हालांकि, अधिकारियों (एक) जो वे स्पष्ट रूप से हकदार हो लेकिन वे छोड़ा गया है जो प्रदर्शित करने के लिए किसी भी रिफंड या राहतें के लिए उनका ध्यान आकर्षित करना चाहिए किसी कारण या दूसरे के लिए दावा करने के लिए .... 'सही मायनों में एक दावा आयकर अधिकारी का कर्तव्य है जो वह हकदार था करने के लिए एक राहत के लिए निर्धारिती द्वारा और कहा कि बनाया जा सकता था कि यह कहते हुए इस फैसले पर भरोसा निर्धारिती के लिए परामर्शदाता इसके बारे में उसे सलाह देने के लिए ही था.
तत्काल मामलों में, इसलिए, आयकर अधिकारी निश्चित रूप से ह्रास का दावा करने के लिए अपने अधिकार का निर्धारिती की सलाह दी हो सकता था लेकिन वह अपने दम पर उन्हें भत्ता नहीं दिया जा सका.
हमारे विचार में, पहले इस मुद्दे पर योग करने के लिए, निर्धारिती ह्रास के कारण एक कटौती का दावा करने का दावा या नहीं करने के लिए एक विकल्प है. वह यह दावा नहीं चुनता है, आयकर अधिकारी ह्रास के कारण कटौती की अनुमति देने का हकदार नहीं है. "(पी. 450)
में स्वीकृत है - ऊपर परिपत्र में भेजा और गर्भित रूप में सी आई टी वी. में अनुमोदित किया गया था Bishambar दयाल एंड कंपनी [निम्नलिखित टिप्पणियों के साथ 1994] 210 आईटीआर 118 (All.),:
"... आयकर अपीलीय ट्रिब्यूनल 1965 के प्रत्यक्ष कर सं 29D के केंद्रीय बोर्ड (xix) के एक परिपत्र पर भरोसा किया, एफ सं 45/239/65-ITC, 31 मार्च 1965 दिनांकित.इस परिपत्र के तहत, बोर्ड आय मूल्यह्रास के संबंध में दावा के लिए निर्धारित ब्यौरे सुसज्जित किया गया है एक शुद्ध दर और निर्धारिती लगाने से गणना की जानी जाने का प्रस्ताव है जहां, मूल्यह्रास अलग से अनुमति दी है और सकल से बाहर कटौती की जानी चाहिए कि निर्देश जारी किया था मुनाफा. आयकर अपीलीय न्यायाधिकरण के आदेश केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड द्वारा जारी परिपत्र के अनुरूप है. आयकर अधिनियम का कोई प्रावधान नहीं आय फ्लैट दर लगाने से गणना की जाती है जहां ह्रास अग्राह्य करने का दावा करता है जो हमारे ध्यान में लाया गया था. हमारी राय में, आयकर अपीलीय न्यायाधिकरण के आदेश कानून के किसी भी वर्णनीय सवाल को जन्म देना नहीं है .... "(पी. 120)
में समझाया - ऊपर परिपत्र (चोपड़ा ब्रदर्स में विस्तार से बताया गया थाभारत) (पी) लिमिटेड वी. आईटीओ [1993] 202 आईटीआर 40 (Chd. - ट्राई बी.), निम्नलिखित शब्दों में:
"... सीखा लेखाकार सदस्य के क्रम में, बोर्ड की पूरी परिपत्र reproduced किया गया था. मूल्यह्रास का भत्ता के बारे में कुछ भी उल्लेख किए बिना शुद्ध लाभ का आकलन करके आय का निर्धारण संपत्ति की बिक्री पर उत्पन्न होने वाले मुनाफे का आकलन करने में कई कानूनी कठिनाइयों का नेतृत्व क्योंकि मैं फिर से परिपत्र पुन: पेश करने की इच्छा नहीं है, लेकिन इस तरह के परिपत्र जारी करने की आवश्यकता पड़ी (2) (सात) भारतीय आयकर अधिनियम, 1922 की धारा 10 के प्रावधानों को लागू करने से.इसलिए बोर्ड, जहां यह लाभ अनुमान लगाने के लिए और निर्धारित ब्यौरे निर्धारिती द्वारा प्रस्तुत किया गया जहां, मूल्यह्रास भत्ता अलग से होना चाहिए प्रस्तावित किया गया था बाहर काम किया है, उस पर विचार किया.ऐसे सभी मामलों में, सकल लाभ का अनुमान किया जाना चाहिए और शुद्ध लाभ में आ जा सकते हैं ताकि मूल्यह्रास भत्ता सहित कटौती और भत्ते अलग से लाभ से कटौती की जानी चाहिए. यह शुद्ध लाभ का अनुमान किया जाना चाहिए कि माना जाता है, यह ह्रास का भत्ता के अधीन अनुमान के अनुसार किया जाना चाहिए और मूल्यह्रास भत्ता उधर से कटौती की जानी चाहिए.इस परिपत्र के पैरा 2 में निहित था क्या था. परिपत्र, इसलिए बहुत स्पष्ट और असंदिग्ध है और आकलन अधिकारी भी शुद्ध लाभ का अनुमान लगाया जा रहा है जहां मामलों में अलग से ह्रास बाहर काम करने के लिए निर्देशित करता है. इसलिए, मैं, सीखा आयुक्त (अपील) परिपत्र अयोग्य कहना है कि खुद को ला सकता है कैसे देख नहीं है. उसके द्वारा दिए गए तर्क बल्कि अजीब है. परिपत्र के पैरा 3 में, बोर्ड एक कदम आगे चला गया है और एक सबसे अच्छा निर्णय मूल्यांकन किया गया था, तब भी जब कि ऊपर उल्लेख किया प्रक्रिया राजनीति का पालन किया जाना चाहिए कि कहा गया है. यह मुझे लगता है मैं जान - बूझकर और sidetracked एक जागरूक डिजाइन के साथ, अभिव्यक्ति का उपयोग कर सकते हैं अगर केन्द्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड के परिपत्र था, जिस तरह से चकित हूँ एक और कारण है. कि सरकार से है जो केन्द्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड की नीति थी क्योंकि लाभकारी परिपत्रों और उदार परिपत्रों आयुक्त (अपील) के स्तर पर विशेष रूप से आकलन अधिकारी के हाथों में सर्वोच्च सम्मान और विचार, प्राप्त करना चाहिए. वे कानूनों को लागू करने में सरकार की मंशा के खिलाफ जाने के लिए नहीं कर रहे हैं. वे लाभ देने से न्याय को अग्रिम चाहिए. राजकोषीय कानूनों को लागू करने में निजी predilections के लिए कोई जगह नहीं है. पत्र की तुलना में अधिक भावना उच्चतम विचार प्राप्त करना चाहिए. मैं हूँ, इसलिए आयकर अधिकारी और आयुक्त (अपील) दोनों परिपत्र की प्रशंसा में और इसे लागू नहीं में गलती की है कि राय की .... "(पीपी 56-57) [जोर आपूर्ति]
जैन कंस्ट्रक्शन कंपनी [वी. सीआईटी - में समझायानिम्नलिखित शब्दों में 2000] 110 चुंगी लगानेवाला 156 (Raj.):
"यह बोर्ड यह आवश्यक धारा के प्रावधानों को लागू करने से परिसंपत्तियों की बिक्री पर उत्पन्न होने वाली कई कानूनी कठिनाइयों की वजह से है जो ह्रास का भत्ता, के बारे में कुछ भी उल्लेख किए बिना शुद्ध लाभ का आकलन करके आय के निर्धारण के लिए उक्त परिपत्र जारी करने के लिए महसूस किया कि प्रतीत होता है 10 (2) (सात).बोर्ड, इसलिए, यह लाभ का अनुमान लगाने का प्रस्ताव किया है और निर्धारित ब्यौरे निर्धारिती द्वारा प्रस्तुत किया गया है जहां, मूल्यह्रास भत्ता अलग से बाहर काम किया जाना चाहिए कि माना जाता है. ऐसे सभी मामलों में, सकल लाभ का अनुमान किया जाना चाहिए और शुद्ध लाभ में आ जा सकते हैं ताकि मूल्यह्रास भत्ता सहित कटौती और भत्ते अलग सकल लाभ से कटौती की जानी चाहिए. यह शुद्ध लाभ का अनुमान किया जाना चाहिए कि माना जाता है, यह ह्रास का भत्ता और मूल्यह्रास भत्ता उधर से कटौती की जानी चाहिए करने के लिए विषय का अनुमान किया जाना चाहिए. "(पीपी 163-165)

