आयकर विभाग

वित्त मंत्रालय, भारत सरकार

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परिपत्र सं.

18

परिपत्र की तिथि

12/06/1969

दस्तावेज़ अपलोड की तिथि

12/06/1969

परिपत्र सं. 18, 12-06-1969 दिनांकित

1412. 25 फीसदी की सहिष्णुता मार्जिन क्योंकि विवादित कर देयता की पाबंदी के पार हो गई है जहां मामले - चाहे धन की आड़ लिए imposable जुर्माना

1बोर्ड अभ्यावेदन प्राप्त हुआ है कि यहां तक कि बकाया मूल्यांकन की तारीख पर विवादित आयकर और संपत्ति कर की मांग, अस्वीकृत और इस तरह disallowances मूल्यांकन धन का प्रतिशत 25 से अधिक द्वारा दिया गया धन की कमी के लिए खाते हैं, जहां के मामलों में , कुछ संपत्ति कर अधिकारी धारा 18 के तहत जुर्माना लगाने गया है (1) (सी).

प्र.20. इसमें कोई शक नहीं, धारा 2 (एम) के तहत इस तरह के विवादित कर मांगों को शुद्ध धन कंप्यूटिंग के लिए "कर्ज" घटाया रूप में माना जा करने के लिए नहीं कर रहे हैं.लेकिन धारा 35 (2) को विवादित कर अपीलीय प्राधिकार के फैसले के 6 महीने के भीतर भुगतान किया जाता है, जहां संपत्ति कर अधिकारी उस हद तक कटौती की अनुमति के लिए मूल्यांकन में सुधार करवायेगी कि प्रदान करता है. धारा 35 के तहत सुधार के लिए अपने दावे को सुविधाजनक बनाने के लिए (2), करदाता आम तौर पर (विवादित कर सहित) पूरे बकाया के लिए उनके रिटर्न कटौती में दावा करते हैं. इस निर्धारिती की ओर से धोखाधड़ी मंशा या सकल या जानबूझकर उपेक्षा के लिए जिम्मेदार माना नहीं जा सकता है जो एक काफी प्रचलित प्रथा है.

(3)बोर्ड सावधानी बात पर विचार किया है और वे पैरा 1 में उल्लिखित प्रकार के मामलों में करदाता सही शुद्ध धन घोषित करने के लिए विफलता के कारण नहीं था कि साबित करने का दायित्व छुट्टी दे दी है करने के लिए विचार किया जाना चाहिए कि देखने की हैं उनकी ओर से किसी भी धोखाधड़ी या सकल या जानबूझकर उपेक्षा.धारा 18 के तहत कोई जुर्माना (1) (ग) ऐसे मामलों में लगाया जाना चाहिए.

(4)धारा 18 (1) के लिए स्पष्टीकरण की गुंजाइश पर बोर्ड के अन्य निर्देश 15-11-1968 दिनांकित, सर्कुलर नं 8-WT में देखा जा सकता है.

परिपत्र: 18 वें [F.No. 17/25/69-WT], 1969/12/06 दिनांकित.