165 : अधिसूचना: 165 जारी करने की तिथि: 10/5/2007
अधिसूचना सं.
165
अधिसूचना तिथि
10/05/2007
दस्तावेज़ अपलोड की तिथि
10/05/2007
अधिसूचना सं. 165/2007, 2007/10/05 दिनांक
यह इस संगठन जैव प्रौद्योगिकी, पश्चिम बंगाल के विवेकानंद इंस्टीट्यूट उप खंड के खंड (ख) के उद्देश्य के लिए केन्द्र सरकार द्वारा अनुमोदित किया गया है कि सामान्य जानकारी के लिए अधिसूचित किया है (1), 1961 आयकर अधिनियम की धारा 35 के (अधिनियम) ने कहा, आयकर नियम के नियम 5C और 5D, 1962 के साथ पठित (नियम) ने कहा, आंशिक रूप से निम्नलिखित के अधीन अनुसंधान गतिविधियों में लगे हुए 'अन्य संस्था' की श्रेणी में 2005/01/04 से प्रभावी स्थितियां, अर्थात्: -
(मैं) को मंजूरी दे दी संगठन के लिए भुगतान रकम वैज्ञानिक अनुसंधान के लिए उपयोग किया जाएगा;
(II) को मंजूरी दे दी संगठन अपने संकाय सदस्यों या उसके नामांकित छात्रों के माध्यम से वैज्ञानिक अनुसंधान के लिए बाहर ले जाएगा;
(Iii) को मंजूरी दे दी संगठन खाते की पुस्तकों को बनाए रखने और मिल जाएगा करने के लिए स्पष्टीकरण के रूप में परिभाषित एक लेखाकार द्वारा लेखा परीक्षा की ऐसी पुस्तकों उप - धारा (2) ने कहा कि अधिनियम की धारा 288 के और विधिवत द्वारा हस्ताक्षरित और सत्यापित तरह के ऑडिट की रिपोर्ट प्रस्तुत ; आयकर या का आयकर (1) ने कहा कि अधिनियम की धारा 139 की उपधारा के तहत आयकर रिटर्न प्रस्तुत की नियत तारीख तक मामले पर अधिकार क्षेत्र होने के निदेशक के आयुक्त को इस तरह के एकाउंटेंट
(Iv) संगठन प्राप्त दान की एक अलग बयान रखेगा और विधिवत लेखा परीक्षक द्वारा प्रमाणित ऐसे बयान की वैज्ञानिक अनुसंधान और एक प्रति के लिए आवेदन मात्रा में ऊपर उल्लेख लेखा परीक्षा की रिपोर्ट साथ करेगा.
प्र.20. केन्द्र सरकार की मंजूरी को वापस लेने जाएगा अनुमोदित संगठन है: -
(क) से (ग) अनुच्छेद 1 के उप अनुच्छेद में निर्दिष्ट खाते की पुस्तकों को बनाए रखने में विफल रहता है; या
(ख) अनुच्छेद 1 के उप पैरा (iii) में निर्दिष्ट अपनी ऑडिट रिपोर्ट प्रस्तुत करने में विफल रहता है; या
(ग) दान के अपने बयान प्रस्तुत करने के लिए प्राप्त विफल रहता है और वैज्ञानिक अनुसंधान के लिए आवेदन रकम (चतुर्थ) अनुच्छेद 1 के उप अनुच्छेद में निर्दिष्ट; या
(घ) प्रामाणिक पाया नहीं कर रहे हैं अपने अनुसंधान गतिविधियों या अपने अनुसंधान गतिविधियों पर ले जाने के लिए रहता है; या
(ई) (1) ने कहा कि अधिनियम की धारा 35 की, ने कहा कि नियम के नियम 5C और 5D के साथ पढ़ने के लिए अनुरूप और उप खंड के खंड (ख) के प्रावधानों का अनुपालन करने के लिए रहता है.
[एफ सं 203/61/2006-ITA-II]

