आयकर विभाग

वित्त मंत्रालय, भारत सरकार

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अधिसूचना सं.

137

अधिसूचना तिथि

30/03/2007

दस्तावेज़ अपलोड की तिथि

30/03/2007

अधिसूचना: 137 जारी करने की तिथि: 30/3/2007
अधिसूचना सं. 137/2007, 30-3-2007 दिनांक
 
आयकर अधिनियम, 1961 (1961 का 43) की धारा 10 के खंड (23 सी) के उपखंड (चतुर्थ) द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए केन्द्र सरकार एतद् द्वारा सूचित कि ओर से किसी भी व्यक्ति द्वारा प्राप्त कोई भी आय "तमिलनाडु पूर्व सेवाओं के कर्मियों परोपकार कोष, भूतपूर्व सैनिक कल्याण, 22, राजा मुथैया सलाई, चेन्नई 600003 निदेशालय" (बाद में "संस्था") निम्नलिखित के लिए ऐसे व्यक्ति की कुल आय में शामिल नहीं किया जाएगा की स्थितियां, अर्थात्: -
(क) संस्था अपनी आय को लागू करने, या पूरी तरह से और विशेष रूप से यह स्थापित किया है, जिसके लिए वस्तुओं के लिए और अपनी आय का अधिक से पंद्रह फीसदी अप्रैल के 1 दिन या उसके बाद जमा है, जहां एक मामले में, आवेदन के लिए जमा करेंगे , 2002, किसी भी मामले में पांच साल से अधिक नहीं होगी अपनी आय का पंद्रह प्रतिशत से अधिक राशि के संचय की अवधि;
(ख) इंस्टीट्यूशन निवेश करने या किसी भी एक में से अन्यथा ऊपर उल्लेख किया मूल्यांकन वर्षों के लिए प्रासंगिक पिछले वर्षों के दौरान किसी भी अवधि के लिए (आदि आभूषण, फर्नीचर, के रूप में प्राप्त की और बनाए रखा स्वैच्छिक योगदान के अलावा अन्य) अपने फंड जमा नहीं करेंगे (5) धारा 11 की उप - धारा में निर्दिष्ट रूपों या मोड का या अधिक;
व्यापार में इस तरह के व्यापार के संबंध में बनाए रखा है इंस्टीट्यूशन और खाते से अलग पुस्तकों के उद्देश्यों की प्राप्ति के लिए प्रासंगिक है जब तक कि (ग) इस अधिसूचना, कोई आय जा रहा है लाभ और व्यापार के लाभ के संबंध में लागू नहीं होगा;
(घ) संस्था नियमित रूप से आयकर अधिनियम, 1961 के प्रावधानों के अनुसार इनकम टैक्स प्राधिकरण से पहले अपनी आय का रिटर्न फाइल करेंगे;
(ई) संस्था के विघटन अपने अधिशेष और परिसंपत्तियों की स्थिति में है कि इसी तरह के उद्देश्यों के साथ एक संगठन को दी जाएगी.
(च) संस्थान (2) धारा 288 की उपधारा नीचे दिये गये स्पष्टीकरण में परिभाषित किया और आयकर रिटर्न के साथ प्रस्तुत के रूप में एक लेखाकार द्वारा लेखा परीक्षित अपने खातों मिल जाएगा.निर्धारित प्रपत्र में इस तरह के ऑडिट की रिपोर्ट विधिवत हस्ताक्षरित और सत्यापित तरह के मुनीम से और निर्धारित किया जा सकता है के रूप में इस तरह के ब्यौरे आगे की स्थापना.
प्र.20. यह सूचना केवल संस्था की ओर से आय के प्राप्तकर्ताओं को और न कोई अन्य रसीद या ऐसे प्राप्तकर्ताओं की आय पर लागू होता है. कर देयता या, अन्यथा संस्था की आय का अलग से आयकर अधिनियम, 1961 के प्रावधानों के अनुसार विचार किया जाएगा.
(3)इस अधिसूचना के बाद आकलन वर्ष 2002-03 के लिए लागू है.
(4)ऊपर अधिसूचना यह बाद में संस्था की गतिविधियों वास्तविक नहीं हैं या कि पाया जाता है, तो केंद्र सरकार द्वारा रद्द कर किया जा सकता है कि वे इसे अधिसूचित किया गया था अधीन जो करने के लिए शर्तों के सभी या किसी के साथ अनुसार किया जाता नहीं कर रहे हैं.
[एफ No.197/144/2006-ITA-I]