13 : परिपत्र: सं 13, 11-9-2001 दिनांकित
परिपत्र सं.
13
परिपत्र की तिथि
11/09/2001
दस्तावेज़ अपलोड की तिथि
11/09/2001
धारा 115JA/SECTION 115JB एल न्यूनतम वैकल्पिक कर
743. कंपनियों पर न्यूनतम वैकल्पिक कर (मैट)
मेट की मुख्य विशेषताएं वित्त (नं. 2) विधेयक, 1996 ख़बरदार प्रस्तावित खंड 115JA द्वारा कंपनियों पर लगाया जाने का प्रस्ताव.
सरकार 22 जुलाई 1996 पर बजट भाषण में वित्त मंत्री ने घोषणा की थी जो कंपनियों, पर एक न्यूनतम वैकल्पिक कर (मैट) लगाने का प्रस्ताव किया है. एक नई धारा 115JA इस उद्देश्य के लिए आयकर अधिनियम, 1961 में डाला जा रहा है. इस प्रकार के रूप में प्रस्तावित मेट की मुख्य विशेषताएं इस प्रकार हैं:
1बुनियादी ढांचे और ऊर्जा क्षेत्र [धारा 80-ia] में लगे लोगों को छोड़कर केवल कंपनियों के लिए लागू है.
प्र.20. कंपनी अधिनियम, 1956 के तहत अभिकलन पुस्तक मुनाफे का 30 फीसदी deeming द्वारा एक न्यूनतम कर का भुगतान कर योग्य आय के रूप में, एक मामले में कुल आय आयकर अधिनियम के प्रावधानों के तहत अभिकलन के रूप में 1961 कम से कम 30 प्रतिशत है, जहां कुल आय, आयकर अधिनियम के सामान्य प्रावधानों के तहत अभिकलन के रूप में किताब लाभ का अधिक से अधिक 30 फीसदी है, जहां पुस्तक लाभ का प्रतिशत, कर उसी पर वसूल किया जाएगा.
(3)कराधान के मौजूदा दरों पर प्रभावी न्यूनतम वैकल्पिक कर, किताब मुनाफे का 12 प्रतिशत करने के लिए बाहर काम करता है.
(4)मुक्त व्यापार क्षेत्र (FTZs) से उत्पन्न होने वाली आय [धारा 10 ए], 100 प्रतिशत निर्यातोन्मुखी उपक्रमों (ईओयू) [धारा 10 बी], धर्मार्थ गतिविधियों [वर्गों 11 और 12], एक उद्यम पूंजी कंपनी द्वारा निवेश और अन्य छूट दी आय [अनुभाग प्रति 10] वैकल्पिक कर के दायरे से बाहर रखा गया है.
प्र.5. अभिकलन सामान्य कुल आय इतने लंबे समय के निर्यात लाभ से आय अर्जन (FTZ इकाइयों और निर्यातोन्मुख इकाइयों के अलावा) उद्यमों निर्यात आय के अपने घटक नहीं है, जैसा कि किताब मुनाफे के 30 फीसदी की तुलना में कम है, जहां केवल वैकल्पिक कर लागू है इसलिये पुस्तक मुनाफे का 70 प्रतिशत से अधिक, खंड 115JA के प्रावधानों आकर्षित नहीं किया जाएगा. दूसरे शब्दों में, मेट केवल एक निर्धारिती की किताब मुनाफे का हिस्सा बनाने निर्यात मुनाफा कुल मुनाफे का 70 फीसदी से अधिक है, जहां इस तरह के मामलों पर लागू होगी.
इस तहत के रूप में सचित्र है:
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कंपनी एक
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पुस्तक लाभ
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25 X 4 = 100, 100
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कम: निर्यात मुनाफा
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७०
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शेष मुनाफा
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३०
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[लाभ की दर से निर्यात और अन्य गतिविधियों में यही सोचते हैं कि]
गैर निर्यात मुनाफा मुनाफे के 30 फीसदी के बराबर हैं के रूप में न्यूनतम वैकल्पिक कर, इस मामले में लगाया नहीं है. इसलिए, पूरे निर्यात लाभ कर से मुक्त हैं.
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कंपनी बी
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पुस्तक लाभ
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25 X 4 = 100, 100
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कम: निर्यात मुनाफा
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8
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शेष मुनाफा
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२०
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[लाभ की दर से निर्यात और अन्य गतिविधियों में यही सोचते हैं कि]
संतुलन मुनाफा मुनाफे का कम से कम 30 फीसदी हैं, मेट (अन्यथा योग्य हैं) गैर निर्यात गतिविधियों फीसदी निर्यात के कारण 10 फीसदी और 20 शामिल किताब मुनाफे का 30 फीसदी पर लगाया जाएगा. इस प्रकार, निर्यात मुनाफे के 80 फीसदी में से केवल 10 फीसदी अधिभार सहित 4.3 प्रतिशत की प्रभावी दर पर कर उठाना पड़ेगा.
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कंपनी सी
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पुस्तक लाभ
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25 X 4 = 100, 100
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कम: निर्यात मुनाफा
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J
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शेष मुनाफा
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10 रू.
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[लाभ की दर से निर्यात और अन्य गतिविधियों में यही सोचते हैं कि]
संतुलन मुनाफा मुनाफे का कम से कम 30 फीसदी हैं, मेट (अन्यथा योग्य हैं) गैर निर्यात गतिविधियों फीसदी निर्यात के कारण 20 फीसदी और 10 शामिल किताब मुनाफे का 30 फीसदी पर लगाया जाएगा. इस प्रकार, निर्यात मुनाफे के 90 फीसदी में से केवल 20 फीसदी अधिभार सहित 8.6 प्रतिशत की प्रभावी दर पर कर उठाना पड़ेगा.
देखने में अन्य कंपनियों पर कर का बोझ ध्यान में रखते हुए निर्यात कारोबार में लगी कंपनियों पर कर का बोझ बहुत हल्का है.
प्रेस नोट: दिनांक 24 जुलाई 1996 केन्द्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड द्वारा जारी किए गए.
743A. आयकर अधिनियम की धारा 115JB की नई मेट प्रावधानों के तहत अग्रिम कर के भुगतान के लिए दायित्व
वित्त अधिनियम, 2000, निर्धारण वर्ष 2001-02 के लिए कंपनियों पर न्यूनतम वैकल्पिक कर की वसूली के लिए उपलब्ध कराने से, यानी, 2001/01/04 से प्रभाव के साथ, आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 115JB डाला.धारा 115JB धारणा अब तक यह कुल आय के रूप में किसी भी भाग या किताब लाभ के पूरे समझना नहीं है, कंपनियों पर मेट के लिए प्रदान की जाती है, जो तत्कालीन खंड 115JA, से अलग है. हालांकि, धारा 115JB के नए प्रावधान कुल आय पर देय कर पुस्तक लाभ का कम से कम 7.5% है, तो इस प्रावधान के तहत देय कर पुस्तक लाभ का 7.5% होगा कि प्रदान करता है.
प्र.20. उदाहरणों अनुभाग 115JB की नई मेट प्रावधानों के तहत कर के लिए उत्तरदायी कंपनियों की एक बड़ी संख्या में अग्रिम कर भुगतान नहीं कर रहे हैं कि बोर्ड के ध्यान में आ गए हैं. यह खंड 115JB का नया प्रावधान एक घुन्ना कोड है कि बल दिया जा सकता है. उप - धारा (1) देय आयकर गणना की जानी है जिस तरह से नीचे देता है. उप - धारा (2) "पुस्तक लाभ" की गणना के लिए प्रदान करता है. उप - धारा (5) उस रूप में नहीं तो इस खंड में प्रदान बचाने निर्दिष्ट करता है, इस अधिनियम के अन्य सभी प्रावधान है कि खंड में वर्णित एक कंपनी जा रहा है, हर निर्धारिती को लागू नहीं होगी. दूसरे शब्दों में, प्रावधान के तहत देय कर का प्रतिस्थापन और किताब मुनाफे की गणना के तरीके के लिए छोड़कर, परिभाषाओं, वसूलियां, भुगतान, आकलन, आदि चार्ज करने के लिए संबंधित प्रावधान भी शामिल कर के सभी प्रावधानों के संबंध में लागू होगा इस धारा के प्रावधानों की.
(3) आयकर अधिनियम की योजना भी करने के लिए भेजा जाना चाहिए. हर साल वित्त अधिनियम द्वारा निर्धारित किया जा सकता है जो किसी भी कीमत या दरों पर आय कर के लिए आयकर अधिनियम के आरोपों की धारा 4. वित्त अधिनियम में निहित हैं के रूप में अग्रिम कर के भुगतान के लिए देयता, और वित्तीय वर्ष के लिए बल में दरों के आधार पर इसकी गणना के साथ धारा 209 सौदों के साथ धारा 207 से संबंधित है,. टैक्स की दरों में वित्त अधिनियम में प्रदान की जाती हैं. (8) वित्त अधिनियम, 2001 की धारा 2 के पहले provisio, नीचे के रूप में पढ़ता है:
"मामलों में अध्याय बारहवीं या अध्याय बारहवीं ए या अनुभाग 115JB या खंड 161 या धारा 164A या आयकर अधिनियम की धारा 167B लागू की उप - धारा (1 ए) के प्रावधानों, 'एडवांस टैक्स' होगी जो कि उपलब्ध कराया "जैसा भी मामला हो, इस उप - धारा या उस अध्याय या खंड में निर्दिष्ट के रूप में की दर से लगाया दरों के संदर्भ में अभिकलन
धारा 2 के लिए तीसरे परन्तुक (8) वित्त अधिनियम, 2001 के, आगे खंड 115JB तहत आय प्रभार्य के संबंध में अग्रिम कर के माध्यम से देय टैक्स, 2% की एक अधिभार की वृद्धि की जाएगी कि प्रदान करता है. वित्त अधिनियम, 2000, को भी इसी तरह के प्रावधान निहित.
(4) यह सभी कंपनियां नए खंड 115JB में निहित प्रावधानों को ध्यान में रखते हुए अग्रिम कर के भुगतान के लिए उत्तरदायी हैं कि इस प्रकार, बहुतायत से स्पष्ट है. नतीजतन, अग्रिम कर और अग्रिम कर की मोहलत के भुगतान में चूक पर ब्याज के लिए वर्गों 234B और 234C के प्रावधानों को भी लागू होगा जहां मामले वारंट के तथ्यों.
प्र.5. यह अपने क्षेत्र में काम कर रहे सभी अधिकारियों के ध्यान में लाया जा सकता है.
परिपत्र: नहीं 2001 के 13, 2001/09/11 दिनांकित.

