आयकर विभाग

वित्त मंत्रालय, भारत सरकार

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परिपत्र सं.

10/2002

परिपत्र की तिथि

09/10/2002

दस्तावेज़ अपलोड की तिथि

09/10/2002

परिपत्र: सं 10/2002, 09-10-2002 दिनांकित

1174. एक अनिवासी प्रेषण के मामले में अनापत्ति प्रमाण पत्र प्रस्तुत करने

1आयकर अधिनियम की धारा 195, 1961 में प्रावधान है कि कानून के तहत एक अनिवासी किसी भी राशि प्रभार्य को भुगतान के लिए जिम्मेदार किसी भी व्यक्ति को, जब आदाता के खाते में इस तरह के आय के ऋण का समय पर या भुगतान के समय उसके नकद या चेक या ड्राफ्ट या जो भी पहले हो, किसी भी अन्य मोड, बल में दरों पर आयकर उस पर घटा द्वारा.

प्र.20. भारतीय रिजर्व बैंक के एक अनापत्ति प्रमाणपत्र आयकर विभाग से प्राप्त किया गया है, जब तक कोई प्रेषण की अनुमति दी जाएगी कि उनके कार्यालय में मार्गदर्शिका उपलब्ध कराई है. इसके बाद से उनके साथ अब से आयकर विभाग से अनापत्ति प्रमाण पत्र पर और मूल्यांकन अधिकारी को संबोधित (दो प्रतियों में) एक उपक्रम प्रस्तुत प्रेषण करने वाले व्यक्ति पर जोर दिए बगैर भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा अनुमति दी जा सकती प्रेषण कि निर्णय लिया गया है इस परिपत्र को कब्जे रूप में आय कर अधिनियम, 1961 की धारा 288 नीचे दिये गये स्पष्टीकरण के रूप में परिभाषित (एक कर्मचारी के अलावा अन्य) एक लेखाकार से एक प्रमाण पत्र से.प्रेषण करने वाले व्यक्ति बारी में, निर्धारण अधिकारी को उसकी प्रति आगे जाएगा, जो भारतीय रिजर्व बैंक के लेखाकार के बारे में कहा प्रमाण पत्र के साथ उपक्रम प्रस्तुत करेगा.

(3)इस परिपत्र की सामग्री अपने शुल्क में काम कर रहे सभी अधिकारियों के ध्यान में लाया जा सकता है.

अंडरटेकिंग/उपक्रम

सेवा में

            .................................................. ............................

          (मूल्यांकन अधिकारी का पद)

            .................................................. ............................

            .................................................. ............................

I/We...........................................................................................................................................................    (नाम, पता एवं स्थायी खाता संख्या)

............................................ की एक प्रेषण बनाने का प्रस्ताव .................................................. ....

(राशि)

being........................................................................................................................................................... (भुगतान की प्रकृति)

to...................................................................................................................................................................

(नाम और प्रेषण किया गया है जिसे करने के लिए व्यक्ति का पूरा पता)

टैक्स @ जा रहा है ........................ रुपए की राशि को घटाने के बाद ................ .............., जो प्रेषण के बारे में कहा राशि पर स्रोत पर कर छूट की उचित दर है.

प्र.20. आय, देय कर की राशि और वास्तव में भुगतान की गई राशि की प्रकृति और राशि प्रमाणित करने, आयकर अधिनियम की धारा 288 नीचे दिये गये स्पष्टीकरण के रूप में परिभाषित मुनीम से एक प्रमाण पत्र, भी कब्जे में लिया है.

(3)मामले में इसे बनाया प्रेषण की राशि पर वास्तव में देय कर, भुगतान नहीं किया गया या पूरा भुगतान नहीं किया गया है कि पाया जाता है, मैं / हम के अनुसार देय पाया ब्याज के साथ टैक्स के बारे में कहा राशि का भुगतान करने का वचन आयकर अधिनियम के प्रावधानों.

(4)मैं / हम भी आयकर अधिनियम के अनुसार कहा दोष के लिए दंड और अभियोजन पक्ष के प्रावधानों के अधीन किया जाएगा.

प्र.5. मैं / हम भी आय और कर, ब्याज, दंड, आदि, देय उस की प्रकृति और राशि का निर्धारण करने के लिए आयकर विभाग को सक्षम करने के लिए, आदि, अपेक्षित दस्तावेज जमा करने का कार्य.

(नाम और हस्ताक्षर)

तिथि ...............................

जगह ..............................

(अंडरटेकिंग भुगतान करने वाले व्यक्ति की आय की वापसी पर हस्ताक्षर करने के लिए अधिकृत व्यक्ति द्वारा हस्ताक्षरित किया जाएगा).

प्रमाण पत्र

मैं / हम एम / एस ..................................... के खातों की पुस्तकों की जांच की है .......................

.......................................................................................................................................................................

(प्रेषण करने वाले व्यक्ति का नाम, पता और स्थायी खाता संख्या)

प्रेषण की प्रकृति का पता लगाने के लिए,

of..................................................................................................................................................................

                              (प्रेषण की राशि)

to...................................................................................................................................................................

(नाम और प्रेषण किया जा रहा है जिसे करने के लिए व्यक्ति का पूरा पता)

और कर एतद्द्वारा स्रोत उस पर घटाया है और जिस दर पर रुपए की राशि ........................... काट लिया गया है कि प्रमाणित सरकार की साख को उचित दर पर कर और भुगतान किया गया है के रूप में.

            .................................................

                                                                                                एकाउंटेंट

जगह ......................

तिथि .......................

परिपत्र: नहीं 759, 18-11-1997 दिनांकित.

स्पष्टीकरण 1

118-11-1997 सर्कुलर नं 759 भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) द्वारा अपेक्षित के रूप में एक अनिवासी प्रेषण के लिए आयकर अधिकारियों से अनापत्ति प्रमाण पत्र प्रस्तुत करने की आवश्यकता के साथ बांटना बोर्ड द्वारा जारी किया गया था . कहा परिपत्र के पैरा 2 में, यह आगे से प्रेषण निर्धारण अधिकारी को संबोधित दो प्रतियों में एक उपक्रम सुसज्जित करने वाले व्यक्ति प्रदान की आयकर विभाग से अनापत्ति प्रमाण पत्र पर जोर दिए बगैर भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा अनुमति दी जा सकती प्रेषण कहा गया था कि जो कहा परिपत्र को कब्जे में फार्म में आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 288 नीचे दिये गये स्पष्टीकरण में परिभाषित के रूप में एक कर्मचारी के अलावा और एक एकाउंटेंट से एक प्रमाण पत्र के साथ गया था.प्रेषण करने वाले व्यक्ति, बारी में मूल्यांकन अधिकारी को तत्संबंधी एक प्रति आगे जाएगा, जो भारतीय रिजर्व बैंक के लिए लेखाकार के बारे में कहा प्रमाण पत्र के साथ उपक्रम प्रस्तुत किया था.

प्र.20. संदर्भ के एक नंबर आरबीआई भारतीय रिजर्व बैंक की मंजूरी प्राप्त करने के बिना गैर निवासियों के लिए विप्रेषण के कुछ प्रकार की अनुमति देने के लिए अधिकृत डीलरों को अधिकार सौंपे हुए कहा कि बोर्ड द्वारा प्राप्त किया गया है. सर्कुलर नंबर 759 में निर्धारित ऐसे मामलों में, भारतीय रिजर्व बैंक के मूल्यांकन अधिकारी को मुनीम के उपक्रम और प्रमाण पत्र को अग्रेषित नहीं कर सकते हैं. भारतीय रिजर्व बैंक पहले से ही एक परिपत्र जारी किया है - ई. (एमए एस eries) परिपत्र सं 48, दिनांक 29 नवम्बर, 1997 (अनुलग्नक देखें) की एक प्रति के साथ प्रमाण पत्र की एक प्रतिलिपि अग्रेषित करने के लिए उन्हें निर्देशन विदेशी मुद्रा में सभी अधिकृत डीलरों के लिए उपक्रम में संकेत के रूप में आयकर विभाग के मूल्यांकन अधिकारी के कार्यालय के उपक्रम.पूर्वगामी को देखते हुए, यह सर्कुलर नंबर 759 भी विदेशी मुद्रा में अधिकृत डीलरों के माध्यम से किए गए प्रेषण के लिए लागू होगा स्पष्ट किया है कि.

(3)सर्कुलर नंबर 759 के अनुसार, उपक्रम भुगतान करने वाले व्यक्ति की आय की वापसी पर हस्ताक्षर करने के लिए अधिकृत व्यक्ति द्वारा हस्ताक्षर किए जाने की आवश्यकता है एक अनिवासी प्रेषण करने वाले व्यक्ति द्वारा प्रस्तुत किया जाना है. आयकर अधिनियम की धारा 140, 1961 के अनुसार, एक कंपनी के मामले में आय की वापसी पर हस्ताक्षर करने के लिए अधिकृत व्यक्ति, इसलिए, प्रबंध निदेशक द्वारा हस्ताक्षर किए जाने की है प्रबंध निदेशक और प्रत्येक प्रेषण के लिए प्रत्येक उपक्रम है . कंपनियों द्वारा अनुभवी प्रशासनिक कठिनाइयों ओर इशारा करते हुए अभ्यावेदन प्राप्त किया गया है. यह इसलिए, एक वापसी या तो लिखित रूप में उनके द्वारा अधिकृत एक व्यक्ति पर हस्ताक्षर करने के एक अनिवासी करने के लिए एक प्रेषण लेने का समय पर प्रस्तुत किए जाने वाले उपक्रम अधिकृत व्यक्ति द्वारा हस्ताक्षरित किया जाएगा कि निर्णय लिया गया है.

(4)यह भी सर्कुलर नंबर 759 भारतीय रिजर्व बैंक अपनी मुद्रा नियंत्रण मैनुअल के तहत आयकर अधिकारियों से अनापत्ति प्रमाण पत्र का उत्पादन निर्धारित किया था, जिसके लिए उन प्रेषण को कवर किया जाएगा कि स्पष्ट किया जाता है. धारा 195 के तहत एक आदेश (2) टैक्स की कटौती के लिए जिम्मेदार एक व्यक्ति द्वारा प्राप्त किया गया है इसके अलावा, अगर, सर्कुलर नंबर 759 में निर्धारित एक प्रमाण पत्र के साथ एक शपथ पत्र दाखिल करने की नई प्रक्रिया लागू नहीं होगा.

प्र.5. इस परिपत्र की सामग्री अपने शुल्क में काम कर रहे सभी अधिकारियों के ध्यान में लाया जा सकता है.

परिपत्र: सं 767, 22-5-1998 दिनांकित.

उपभवन

ई. (एमए सिरीज) परिपत्र सं. 48, जारी, 29-11-1997 दिनांक
भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा.

1वर्तमान में, प्राधिकृत डीलरों अन्य बातों के अलावा के अधीन आने वाले पैसे के कुछ प्रकार,,, आयकर अधिकारियों से अनापत्ति प्रमाण पत्र / टैक्स क्लीयरेंस सर्टिफिकेट के उत्पादन की अनुमति देने के अधिकार सौंपे जा चुके हैं. निश्चित उद्देश्यों के लिए आने वाले पैसे का अनुमोदन करते हुए इसी तरह, रिजर्व बैंक भी, आयकर अधिकारियों से अनापत्ति प्रमाण पत्र / टैक्स क्लीयरेंस सर्टिफिकेट पर जोर दिया गया है. केन्द्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड द्वारा अधिसूचित रूप में इस प्रक्रिया को अपने सर्कुलर नंबर 759 [एफ में संशोधित किया गया है सं 500/152/96-FTD] दिनांक 18 नवंबर 1997. नई प्रक्रिया के संदर्भ में, विदेशी मुद्रा के प्रेषण बना एक व्यक्ति के बजाय, आवेदकों को एक शपथ पत्र प्रस्तुत करने के लिए आयकर अधिकारियों से अनापत्ति प्रमाण पत्र / टैक्स क्लीयरेंस प्रमाण पत्र प्रस्तुत करने की आवश्यकता नहीं होगी, दो प्रतियों में मूल्यांकन अधिकारी, को संबोधित जो आय की धारा 288 नीचे दिये गये स्पष्टीकरण के रूप में परिभाषित एक साथ (आवेदक के कर्मचारी के अलावा अन्य) अकाउंटेंट से (दो प्रतियों में) एक प्रमाण पत्र के साथ आवेदक का आयकर रिटर्न हस्ताक्षर करने के लिए अधिकृत व्यक्ति के हस्ताक्षर होने चाहिए टैक्स अधिनियम, सरकारी अधिसूचना में निर्धारित प्रपत्रों में 1961.प्राधिकृत डीलरों, इसलिए अनुमति देने से पहले प्रेषण जहां आवश्यक आयकर प्रावधानों के अनुपालन के लिए लेखाकार से एक प्रमाण पत्र के साथ उक्त उपक्रम प्राप्त करना चाहिए.

प्र.20. प्राधिकृत डीलरों चाहिए, उपक्रम में संकेत के रूप में आयकर विभाग के अधिकारी का आकलन के कार्यालय के उपक्रम की एक प्रति के साथ तुरंत आगे, एक साथ प्रमाण पत्र की एक प्रति प्रेषण करने के बाद. अन्य प्रतिलिपि उपक्रम और प्रमाणपत्र में से प्रत्येक रिजर्व बैंक की अधिकृत डीलर / निरीक्षण अधिकारियों की आंतरिक लेखा परीक्षकों द्वारा सत्यापन के लिए रिकॉर्ड पर रखा जाना चाहिए.

(3)Exchange नियंत्रण मैनुअल में संशोधन अलग से सूचित किया जाएगा. इस बीच, प्राधिकृत डीलरों उनके चिंतित घटकों के ध्यान में इस परिपत्र की सामग्री ला सकते हैं.

(4)इस परिपत्र में समाहित निर्देश (3) विदेशी मुद्रा विनियमन अधिनियम, 1973 (1973 का 46) की धारा 73 और किसी भी उल्लंघन या गैर अनुपालन तत्संबंधी अधिनियम के तहत निर्धारित दंड के अधीन है के तहत जारी किए गए हैं.

स्पष्टीकरण 2

1 18-11-1997 सर्कुलर नं 759 भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा अपेक्षित के रूप में एक अनिवासी प्रेषण के लिए आयकर अधिकारियों से अनापत्ति प्रमाण पत्र की आवश्यकता के साथ बांटना केन्द्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड द्वारा जारी किया गया था. उक्त परिपत्र करके, प्रेषण प्रेषण करने वाले व्यक्ति एक एकाउंटेंट से एक प्रमाण पत्र के साथ दो प्रतियों में एक उपक्रम सुसज्जित प्रदान की विभाग से अनापत्ति प्रमाण पत्र पर जोर दिए बगैर भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा किए जाने की अनुमति दी गई. आवेदन और प्रमाण पत्र का प्रारूप उनके सर्कुलर नंबर ई. (एमए सीरीज) 29-11-1997 सर्कुलर नं 48 के माध्यम से भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा प्राधिकृत डीलरों को भेजा गया है.

प्र.20. हालांकि, यह हाल ही में अक्सर प्रमाणपत्रों कर कटौती की जा सकती थी या के प्रावधानों के आधार पर देय था की तुलना में कम दर पर कर की कटौती के निर्धारित जहां कुछ मामलों में स्रोत पर कर की निर्धारित नहीं के बराबर कटौती जारी किए गए हैं कि देखा गया है अधिनियम और लागू dtac. प्रमाणपत्र आवश्यक जानकारी या कर की कटौती के लिए एक निश्चित दर को गोद लेने के लिए कारणों के लिए प्रदान नहीं करता है.यह एक बाद में मंच पर निर्धारिती से जानकारी की अनावश्यक फोन में यह परिणाम है और इस तरह करदाता की ओर से शिकायत की एक परिहार्य धारणा को जन्म देता है. इसलिए, प्रक्रिया को कारगर बनाने के साथ ही स्रोत पर कर की सही कटौती सुनिश्चित करने के लिए, उपक्रम का प्रोफार्मा प्रेषक और एक चार्टर्ड एकाउंटेंट द्वारा जारी किए जाने वाले प्रमाण पत्र द्वारा दिए जाने के लिए फिर से विचार किया और नया स्वरूप दिया गया है इस परिपत्र को अनुबंध ए और बी के रूप में संलग्न हैं, जो निर्धारित किया जा रहा है. 'उपक्रम' के लिए संशोधित प्रोफार्मा के साथ ही 'प्रमाण पत्र' सीबीडीटी की 18-11-1997 सर्कुलर नं 759, के संदर्भ में लागू करने के लिए करेगा. परिपत्र की अन्य आवश्यकताओं को अपरिवर्तित ही रहेंगे. यह प्रेषण बनाने व्यक्तियों अनुबंध एक प्रति के रूप में उपक्रम और प्रमाण पत्र प्रस्तुत करेगा और भारतीय रिजर्व बैंक को बी / बारी में मूल्यांकन अधिकारी को अग्रेषित करेगा जो अधिकृत डीलर बैंकों, उपक्रम में उल्लेख किया है कि इस बात को दोहराया है.

(3)भारतीय रिजर्व बैंक 'उपक्रम' और उनके अधिकृत डीलरों के लिए 'प्रमाण पत्र' के संशोधित प्रारूप प्रसारित करने के लिए अनुरोध किया जा रहा है.

(4)इस परिपत्र को तत्काल प्रभाव से अमल में आता है.

अनुबंध 'ए'

फार्म और आवेदन के लिए प्रेषण के तहत धारा 195
आय कर अधिनियम की

1
नाम और आवेदक और व्यवसाय का मुख्य स्थान का पता
:
प्र.20.
नाम और remitters से अधिक मूल्यांकन अधिकारी होने के क्षेत्राधिकार का पता
:
(3)
आवेदक का पैन नंबर
:
(4)
नाम और प्रेषण और देश towhich प्रेषण के लाभार्थी का पता किया जाता है
:
प्र.5.
राशि और प्रेषण की प्रकृति
:
प्र.6.
स्रोत पर कर कटौती की दर
:
प्र.7.       
दर निर्धारित किया गया है जिसके तहत अधिनियम / DTAA का प्रावधान करने के लिए संदर्भ
:
8
प्रमाण पत्र
 

(मैं) मैं / हम उपर्युक्त स्रोत पर कर की कटौती के प्रति के रूप में ऊपर प्रेषण बनाने का प्रस्ताव है.हम एम / एस से एक प्रमाण पत्र प्राप्त किया है. राशि, प्रकृति और स्रोत पर कर की कटौती की सत्यता को प्रमाणित, आयकर अधिनियम की धारा 288 के रूप में परिभाषित ..... एक लेखाकार है जो.

(Ii) मामले में किसी भी समय पर आयकर प्राधिकरण प्रेषण की राशि पर वास्तव में कर छूट का भुगतान नहीं किया गया या पूरा भुगतान नहीं किया गया है कि या तो पाता है, मैं / हम के कारण ब्याज के साथ टैक्स के बारे में कहा राशि का भुगतान करने का कार्य.

(Iii) मैं / हम भी आयकर अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार कहा दोष के लिए दंड के प्रावधानों के अधीन किया जाएगा.

(चतुर्थ) मैं / हम ऊपर प्रेषण के लाभार्थी की आय के साथ ही आय के तहत हमारे देनदारियों का निर्धारण करने के लिए आवश्यक दस्तावेजों की प्रकृति और राशि का निर्धारण करने के लिए आयकर अधिकारियों को सक्षम करने के लिए, आदि, अपेक्षित दस्तावेज जमा करने का वचन कर स्रोत पर कर की कटौती के लिए जिम्मेदार व्यक्ति के रूप में काम करते हैं.

(V) ऊपर दी गई जानकारी मेरे / हमारे ज्ञान और विश्वास का सबसे अच्छा और कोई प्रासंगिक जानकारी छुपा कर दिया गया है के लिए सच है.

..............................................

नाम और हस्ताक्षर

[प्रेषण करने वाले व्यक्ति का (आयकर अधिनियम की धारा 139 (ए के प्रावधानों के रूप में)) आय विवरणी पर हस्ताक्षर करने के लिए जिम्मेदार एक व्यक्ति द्वारा हस्ताक्षर किए जाने की].

अनुबंध 'बी'

प्रमाण पत्र

मैं / हम एम / एस के बीच समझौते (जहां लागू हो) की जांच की है. .................................................. ............................................... और एम / एस. .................................................. ...... की आवश्यकता

                 लाभार्थी remitters

प्रेषण के साथ ही संबंधित दस्तावेज और प्रेषण की प्रकृति का पता लगाने के लिए आवश्यक खाते की किताबें ऊपर और धारा 195 के प्रावधानों के अनुसार स्रोत पर कर की कटौती की दर निर्धारित करने के लिए. हम इसके द्वारा निम्न प्रमाणित: -

1
नाम और प्रेषण के लाभार्थी और प्रेषण किया जा रहा है, जो करने के लिए विदेशी देश के नाम का पता.
:
 
 
प्र.20.
प्रेषण की राशि विप्रेषण किया जा रहा है जिसके माध्यम से प्रस्तावित तारीख / महीने और बैंक का संकेत विदेशी मुद्रा है.
:
 
 
(3)
स्रोत पर कर कटौती का विवरण, दर, जिस पर कर की कटौती की और कटौती की तारीख दी गई है.
:
विदेशी मुद्रा
भारतीय मुद्रा
 
प्रेषित किया जा राशि
 
.....
.....
 
स्रोत पर कर कटौती
 
.....
......
 
वास्तविक राशि प्रेषित
 
.....
.....
 
दर कटौती की जाती है, जिस पर
 
.....
.....
 
कटौती की तिथि
 
......
.....
(4)
मामले में संकेत के रूप में प्रेषण (2) ऊपर देय कर ऊपर की कमाई कर दिया गया है, चाहे वह करों की शुद्ध है? यदि हां, तो अभिकलन उसके संकेत दिया जा सकता है.
:
 
 
प्र.5.
प्रेषण आदि तकनीकी सेवाओं, ब्याज, लाभांश, के लिए रॉयल्टी, फीस के लिए है, तो प्रेषण कारणों और कर ऐसे खंड के संदर्भ में कटौती करने की आवश्यकता है, जिस पर दर के साथ कवर किया जाता है, जिसके तहत प्रासंगिक DTAA के खंड लागू DTAA की.
:
 
 
प्र.6.
मामले में है कि कर उसके कारण, लागू DTAA के तहत निर्धारित दर से कम दर पर कटौती की गई है.
:
 
 
प्र.7.       
मामले में प्रेषण लेख या चीजों (जैसे, संयंत्र, मशीनरी, उपकरण, आदि) या कंप्यूटर सॉफ्टवेयर की आपूर्ति के लिए है, संकेत मिलता है कृपया: -
:
 
 
 
द. प्रेषण के लाभार्थी को सीधे या परोक्ष रूप से लेख या चीजों की आपूर्ति की इस तरह की गतिविधि पर ले जा रहा है, जिसके माध्यम से भारत में किसी भी स्थायी प्रतिष्ठान है कि क्या वहाँ?
 
 
 
 
ii इस तरह के प्रेषण के कारण या इस तरह के स्थायी स्थापना के साथ जुड़ा हुआ है?
 
 
 
 
III.यदि हां, तो कर के लिए उत्तरदायी है, जो इस तरह के प्रेषण में शामिल आय की राशि.
 
 
 
 
चतुर्थ. यदि नहीं, संक्षिप्त वजह में ही क्यों.
 
 
 
8
मामले में प्रेषण व्यवसाय आय के कारण है 
 
 
 
 
संकेत मिलता है कृपया: -
:
 
 
 
द. ऐसी आय भारत में कर के लिए उत्तरदायी है?
 
 
 
 
ii यदि हां, कर की कटौती की दर पर पहुंचने के लिए आधार.
 
 
 
 
ईई. यदि नहीं, तो उसके कारण बताएं.
 
 
 
9
मामले में कर किसी भी अन्य कारण के लिए स्रोत पर कर काटा नहीं जाता है, तो तत्संबंधी ब्यौरा.
:
 
 
(जहां आवश्यक विधिवत प्रमाणीकृत अलग पत्र संलग्न करें)

.................................................. .......................................

नाम, पता और पंजीकरण संख्या

(आयकर अधिनियम की धारा 288 में परिभाषित के रूप में एक एकाउंटेंट द्वारा हस्ताक्षरित और सत्यापित किया जाना).

परिपत्र: नहीं 10/2002, 2002/09/10 दिनांकित.