1/2011 : परिपत्र सं. 1/2011, 06-4-2011 दिनांकित
परिपत्र सं.
1/2011
परिपत्र की तिथि
06/04/2011
दस्तावेज़ अपलोड की तिथि
06/04/2011
आयकर अधिनियम
परिपत्र
आयकर: व्याख्यात्मक 2010, वित्त अधिनियम के उपबंधों के नोट्स
सर्कुलर नंबर 1/2011 [F.No. 142/1/2011-SO (टीपीएल)], 2011/06/04 दिनांकित
एक नज़र में संशोधन
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धारा / अनुसूची
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ब्योरे / अनुच्छेद संख्या
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वित्त अधिनियम
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प्रथम अनुसूची
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दर संरचना, 3.1-3.3-6
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आयकर अधिनियम
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2 (15)
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, "धर्मार्थ उद्देश्य 'की परिभाषा में बदलें 4.1-4.4
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1
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आय एक अनिवासी, 5.1-5.4 के लिए जमा या भारत में पैदा होती समझा
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10AA
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विशेष आर्थिक क्षेत्र (एसईजेड) में इकाइयों के मामले में छूट दी मुनाफे की संगणना, 6.1-6.2
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12A
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अनुभाग 12A के तहत प्राप्त पंजीकरण की कैंसलेशन 7.1-7.4
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35, 10 (21)
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वैज्ञानिक अनुसंधान और विकास के लिए भारित कटौती, 8.1-8.8
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35AD
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निवेश की निर्दिष्ट व्यवसायों के लिए कटौती जुड़ा है, 9.1.1-9.3.2
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40 (क) (आइए), 201, 271B
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टीडीएस प्रावधानों, 10.1.1-10.2.3 का पालन न करने के कारण खर्च की पाबंदी
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44AB, 44AD
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कारोबार की सीमा या खातों के ऑडिट के उद्देश्य के लिए और प्रकल्पित कराधान के लिए सकल प्राप्तियों, 11.1-11.5
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32, 47, 35DDA, 43, 47A, 49, 72A, 115JAA
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एक सीमित देयता भागीदारी (एलएलपी) में एक निजी कंपनी या एक असूचीगत सार्वजनिक कंपनी के रूपांतरण, 12.1-12.9
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५६
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कुछ लेनदेन का कराधान विचार किए बिना या अपर्याप्त विचार के लिए, 13.1-13.7
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80C
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लंबी अवधि के इन्फ्रास्ट्रक्चर बॉन्ड, 14.1-14.2 के संबंध में कटौती
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80डी
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केंद्रीय सरकार स्वास्थ्य योजना (सीजीएचएस), 15.1-15.4 के लिए योगदान के संबंध में कटौती
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80 आईबी (10)
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आवास परियोजनाओं, 16.1-16.5 के विकास और निर्माण के लिए कटौती
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80 आईडी
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एक होटल या राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में एक कन्वेंशन सेंटर (राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र), 17.1-17.3 के मुनाफे की कटौती
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115JB
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खंड 115JB, 18 के तहत न्यूनतम वैकल्पिक कर 0.1-18.3
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143
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रिटर्न की केंद्रीकृत प्रसंस्करण, 19.1-19.4
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194B, 194BB, 194C, 194D, 194H, 194-मैं, 194J
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स्रोत (टीडीएस) पर कर कटौती से संबंधित प्रावधानों को युक्तिसंगत, 20.1-20.3
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203, 206C
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स्रोत (टीडीएस) और स्रोत पर कर संग्रह (टीसीएस), 21.1-21.3 पर कर कटौती का प्रमाणपत्र
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245A, 245C, 245D
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समझौता आयोग, 22.1-22.5
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256, 260A
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अपील के दाखिल करने में देरी को नज़रअंदाज़ करने के लिए उच्च न्यायालय की शक्ति, 23.1-23.7
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282B
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दस्तावेज पहचान संख्या, 24.1-24.2
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प्रथम अनुसूची
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गैर जीवन बीमा कारोबार की आय के कराधान, 25.1-25.5
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1 परिचय
1.1 वित्त अधिनियम, 2010 के संसद द्वारा पारित रूप में (इसके बाद अधिनियम के रूप में), मई, 2010 के 8 वें दिन पर राष्ट्रपति की स्वीकृति प्राप्त की और 2010 के अधिनियम संख्या 14 के रूप में अधिनियमित किया गया है.इस परिपत्र प्रत्यक्ष करों से संबंधित अधिनियम के प्रावधानों के पदार्थ बताते हैं.
प्र.20. अधिनियम द्वारा किए गए बदलाव
2.1 अधिनियम है
(मैं) निर्धारण वर्ष 2010-11 के लिए आयकर की दरें और स्रोत पर कर की कटौती की और अग्रिम कर वित्तीय वर्ष 2010-11 के दौरान भुगतान किया जाना है किया जाना है, जिसके आधार पर आयकर की दरों में निर्दिष्ट.
(Ii) धारा 2, 35AD, 35DDA, 40 (क) (आइए), 43, 44AB, 47, 47A, 49, 56, 72A, 80 सी, 80 डी, 80 9, 10, 10AA, 12A, 32, 35, संशोधन आईबी, 80 आईडी, 115JAA, 115JB, 143, 194B, 194BB, 194C, 194D, 194H, 194-मैं, 194J, 201, 203, 206C, 245A, 245C, 245D, 260A, 271B, की 282B आय आयकर अधिनियम, 1961;
(Iii) आयकर अधिनियम, 1961 की एक नई धारा 80CCF डाला;
(चतुर्थ) की प्रथम अनुसूची के भाग ख के नियम 5 में संशोधन, चौथी अनुसूची और आयकर अधिनियम के तेरहवें अनुसूची, 1961 के भाग ख के भाग एक के 3 शासन;
(V) में संशोधन वर्गों 22A, 22d, 27 और संपत्ति कर अधिनियम की 27A, 1957;
(3) दर - संरचना
निर्धारण वर्ष 2010-11 के लिए कर के लिए उत्तरदायी आय के संबंध में आयकर का 3.1 दरें
निर्धारण वर्ष 2010-11 के लिए कर के लिए उत्तरदायी करदाताओं की सभी श्रेणियों की आय के संबंध में 3.1-1, आयकर की दरों अधिनियम की प्रथम अनुसूची के भाग I में निर्दिष्ट किया गया है. इन दरों एडवांस टैक्स, वेतन से स्रोत पर कर की कटौती और कुछ में देय कर का चार्ज की गणना के प्रयोजनों के लिए वित्त (संख्या 2) अधिनियम, 2009 की प्रथम अनुसूची के भाग III में निर्धारित उन के रूप में वही कर रहे हैं वित्तीय वर्ष 2009-10 के दौरान मामले हैं.
मैं के रूप में कर रहे हैं ने कहा कि भाग में निर्दिष्ट दरों की प्रमुख विशेषताएं:
3.1-2 व्यक्ति, हिंदू अविभाजित परिवार, व्यक्तियों का संगम, व्यक्तियों या कृत्रिम न्यायिक व्यक्ति के शरीर. - पहली अनुसूची के भाग मैं के पैरा एक, हर व्यक्ति, हिंदू अविभाजित परिवार, व्यक्तियों का संघ, व्यक्तियों के शरीर या एक सहकारी समिति, फर्म के अलावा अन्य कृत्रिम न्यायिक व्यक्ति (के मामले में आयकर की दरों को निर्दिष्ट स्थानीय प्राधिकारी और कंपनी) के तहत के रूप में: -
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टैक्स के लिए इनकम प्रभार्य
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आयकर की दर
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एजेंट (भारत में व्यक्तिगत औरत निवासी और भारत में वरिष्ठ नागरिक निवासी अलावा अन्य), एचयूएफ, व्यक्तियों का संघ, व्यक्तियों और कृत्रिम न्यायिक व्यक्ति का शरीर
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व्यक्ति महिला, भारत में निवासी और पैंसठ वर्ष की आयु से नीचे
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पैंसठ वर्ष या उससे अधिक की उम्र का है, जो भारत में व्यक्तिगत वरिष्ठ नागरिक, निवासी,
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15,000 रुपए तक 1]60]000
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शून्य
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शून्य
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शून्य
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| र 1,60,001 -
र 1,90,000
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ग. 10%
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शून्य
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शून्य
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| र 1,90,001 -
र 2]40]000
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ग. 10%
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ग. 10%
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शून्य
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| र 2,40,001 -
र 3]00]000
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ग. 10%
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ग. 10%
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ग. 10%
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| र 3,00,001 -
5, 00,000
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क. 20%
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क. 20%
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क. 20%
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| 5 रुपये, 00,001
और ऊपर
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३० %
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३० %
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३० %
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व्यक्तियों के व्यक्तियों या शरीर के हर व्यक्ति, हिंदू अविभाजित परिवार, संघ के मामले में, कोई अधिभार लगाया जाएगा.
आयकर पर शिक्षा उपकर नामक एक अतिरिक्त अधिभार सभी मामलों में, गणना कर की राशि पर दो प्रतिशत की दर से लगाया जा करने के लिए जारी करेगा. उदाहरण के लिए, आयकर अभिकलन अगर रुपये है. 1,00,000, फिर दो फीसदी की शिक्षा उपकर रुपये पर गणना की जानी है. 1,00,000 रुपये बैठती है. 2,000. इसके अलावा, गणना कर की राशि भी इस तरह के आयकर का एक प्रतिशत की दर से आयकर पर माध्यमिक और उच्च शिक्षा उपकर नामक एक अतिरिक्त अधिभार की वृद्धि की जाएगी. कोई मामूली राहत शिक्षा उपकर के संबंध में उपलब्ध हो जाएगा.
3.1-3 सहकारी समितियां - हर सहकारी समिति के मामले में आयकर की दरें अधिनियम की प्रथम अनुसूची के भाग I के पैरा बी में निर्दिष्ट किया गया है. दरों "followsâ € के रूप में कर रहे हैं
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टैक्स के लिए इनकम प्रभार्य
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दर
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15,000 रुपए तक 10]000
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ग. 10%
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र 10,001 - रुपये. 20]000
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क. 20%
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रुपये अधिक है. 20]000
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३० %
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कोई अधिभार लगाया जाएगा. पर शिक्षा उपकर आयकर और आयकर पर माध्यमिक और उच्च शिक्षा उपकर क्रमशः अभिकलन कर की राशि का प्रतिशत और एक प्रतिशत प्रति दो की दर से लगाया जाएगा. कोई मामूली राहत शिक्षा उपकर के संबंध में उपलब्ध हो जाएगा.
3.1-4 कंपनियों - हर फर्म के मामले में तीस फीसदी की आयकर की दर अधिनियम की प्रथम अनुसूची के भाग I के पैरा सी में निर्दिष्ट किया गया है. कोई अधिभार अब एक फर्म के मामले में लगाया जाएगा.
आयकर पर शिक्षा उपकर बुलाया अतिरिक्त अधिभार सभी मामलों में, गणना कर की राशि पर दो प्रतिशत की दर से लगाया जा करने के लिए जारी करेगा. इसके अलावा, कर की ऐसी राशि आगे सभी मामलों में, कर की राशि पर एक प्रतिशत की दर पर गणना आयकर पर माध्यमिक और उच्च शिक्षा उपकर नामक एक अतिरिक्त अधिभार की वृद्धि की जाएगी. कोई मामूली राहत शिक्षा उपकर के संबंध में उपलब्ध हो जाएगा.
3.1-5 स्थानीय अधिकारियों - हर स्थानीय प्राधिकारी के मामले में आयकर की दर अधिनियम की प्रथम अनुसूची के भाग I के पैरा डी फीसदी तीस में निर्दिष्ट किया गया है. कोई अधिभार लगाया जाएगा.हालांकि, शिक्षा उपकर पर आयकर और आयकर पर माध्यमिक और उच्च शिक्षा उपकर क्रमशः अभिकलन कर की राशि का प्रतिशत और एक प्रतिशत प्रति दो की दर से लगाया जाएगा. कोई मामूली राहत शिक्षा उपकर के संबंध में उपलब्ध हो जाएगा.
3.1-6 कंपनियों - एक कंपनी के मामले में आयकर की दर अधिनियम की प्रथम अनुसूची के भाग I के पैरा ई में निर्दिष्ट किया गया है.
एक घरेलू कंपनी के मामले में आयकर की दर से कुल आय का तीस फीसदी है. अभिकलन कर इस तरह के घरेलू कंपनी से एक करोड़ रुपए से अधिक की कुल आय जहां एक मामले में दस प्रतिशत का अधिभार से बढ़ाया जाएगा.
एक घरेलू कंपनी के अलावा किसी अन्य कंपनी के मामले में, रॉयल्टी 31-3-1961 के बाद किए गए एक अनुमोदित समझौते के तहत सरकार या भारतीय चिंता से प्राप्त है, लेकिन 1976/01/04 पचास प्रतिशत से कम पर कर की जाएगी से पहले. इसी तरह, 29-2-1964 के बाद किए गए एक अनुमोदित समझौते के तहत सरकार या भारतीय चिंता से इस तरह कंपनी द्वारा प्राप्त तकनीकी सेवाओं के लिए शुल्क है, लेकिन 1976/01/04 से पहले, पचास प्रतिशत से कम पर कर दिया जाएगा. इस तरह कंपनी की कुल आय के संतुलन पर, कर की दर चालीस फीसदी हो जाएगी. अभिकलन कर दो और केवल ऐसी कंपनी से एक करोड़ रुपए से अधिक की कुल आय जहां मामलों में एक फीसदी से डेढ़ की एक अधिभार से बढ़ाया जाएगा.
हालांकि, सीमांत राहत आय से अधिक एक है जिसके द्वारा राशि तक सीमित है एक करोड़ रुपए से अधिक आय से अधिक पर, अधिभार सहित, कि आयकर की अतिरिक्त राशि देय सुनिश्चित करने के लिए हर कंपनी के मामले में अनुमति दी जाएगी करोड़. इसके अलावा, हर कंपनी अनुभाग आयकर अधिनियम की 115JB और जहां इस तरह के आय एक करोड़ रुपए से अधिक के तहत कर से कुल आय प्रभार्य होने के मामले में, सीमांत राहत प्रदान की जाएगी.
आयकर पर शिक्षा उपकर हर कंपनी के मामले में अधिभार की समावेशी अभिकलन कर की राशि पर दो प्रतिशत की दर से लगाया जा करने के लिए जारी करेगा. इसके अलावा, कर और अधिभार की ऐसी राशि आगे अधिभार के समावेशी अभिकलन कर की राशि का एक प्रतिशत की दर से आयकर पर माध्यमिक और उच्च शिक्षा उपकर नामक एक अतिरिक्त अधिभार की वृद्धि की जाएगी.
वित्तीय वर्ष 2010-11 के दौरान निश्चित आय से स्रोत पर आयकर की कटौती के लिए 3.2 दरें.
टैक्स वर्गों 193, आयकर अधिनियम की 194, 194A, 194B, 194BB, 194D और 195, की कटौती के लिए दरों को आय के प्रावधानों के तहत बल में दरों में कटौती की जानी है जिसमें हर मामले में 3.2-1 वित्तीय वर्ष 2010-11 के दौरान स्रोत पर कर अधिनियम की प्रथम अनुसूची के भाग द्वितीय में निर्दिष्ट किया गया है. वित्तीय वर्ष 2010-11 के दौरान स्रोत पर आयकर की कटौती के लिए दर वित्त (संख्या 2) अधिनियम, 2009 की प्रथम अनुसूची के भाग द्वितीय में निर्दिष्ट उन लोगों के रूप में ही बने रहेंगे.
3.2-2 अधिभार - प्रत्येक मामले में स्रोत पर कर कटौती के रूप में निम्नानुसार संघ के प्रयोजनों के लिए एक अधिभार की वृद्धि की जाएगी: एक € "
(मैं) हर व्यक्ति, हिंदू अविभाजित परिवार, व्यक्तियों और शरीर व्यक्तियों की एसोसिएशन के मामले में, कोई अधिभार लगाया जाएगा.
(Ii) हर कृत्रिम न्यायिक व्यक्ति के मामले में, कोई अधिभार लगाया जाएगा.
(Iii) कोई अधिभार एक सहकारी समिति और स्थानीय प्राधिकारी के मामले में कटौती की आयकर की राशि पर लगाया जाएगा.
(Iv) हर कंपनी और घरेलू कंपनी के मामले में, कोई अधिभार लगाया जाएगा.
(V) टीडीएस पर अधिभार ही विदेशी कंपनियों को किए गए भुगतान पर लगाया जाएगा.ऐसे मामलों में अधिभार की दर ऐसी आयकर का 2.5 फीसदी है.
3.2-3 शिक्षा उप - अतिरिक्त अधिभार, आयकर पर शिक्षा उपकर कहा जाता है, यदि कोई हो, के मामले में, आयकर और अधिभार का दो प्रतिशत की दर से संघ के प्रयोजनों के लिए लगाया जारी करेगा निवासियों के लिए और गैर निवासियों के लिए सभी भुगतान के मामले में वेतन भुगतान.उदाहरण के लिए, अगर इस तरह के टैक्स रुपये है. 1,00,000 और अधिभार रुपये है. 10,000, फिर दो फीसदी की शिक्षा उपकर रुपये पर गणना की जानी है. 1,10,000 रुपये होने के लिए बाहर काम करता है. 2,200.
इसके अलावा, कर कटौती की राशि और अधिभार आगे ऐसे सभी मामलों में एक प्रतिशत की दर से आयकर पर माध्यमिक और उच्च शिक्षा उपकर नामक एक अतिरिक्त अधिभार की वृद्धि की जाएगी. इस प्रकार पहले चित्रण, में कटौती की कर की राशि रुपये है. 1,00,000, अधिभार रुपये है. 10,000, दो फीसदी की शिक्षा उपकर रुपये है. 2,200 कहा, माध्यमिक और उच्च शिक्षा उपकर रुपये पर गणना की जाएगी. 1,10,000 रुपये होने के लिए बाहर काम करता है. 1,100. इस मामले में कुल उपकर रुपये की राशि होगी. 3300 (यानी, रुपये.2200 + रु. 1100).
एडवांस टैक्स, वेतन से स्रोत और वित्तीय वर्ष 2010-11 के दौरान कुछ मामलों में आयकर का चार्ज पर आयकर की कटौती की गणना के लिए 3.3 दरें.
वेतन से स्रोत पर आयकर की कटौती और वित्तीय वर्ष 2010-11 के दौरान अग्रिम कर की गणना के लिए 3.3-1 दरों अधिनियम की प्रथम अनुसूची के भाग III में निर्दिष्ट किया गया है. ये दरें भी त्वरित आकलन किया जाना है जहां मामलों में वर्तमान आय पर वित्तीय वर्ष 2010-11 के दौरान आयकर चार्ज करने के लिए लागू कर रहे हैं, गैर निवासियों को भारत में उत्पन्न होने वाली शिपिंग लाभ के जैसे, अनंतिम मूल्यांकन, व्यक्तियों के आकलन के भारत छोड़ने उस वित्तीय वर्ष के रूप में निम्न दरों रहे हैं आदि कर, कम अवधि के लिए गठित निकायों के आकलन से बचने के लिए संपत्ति के हस्तांतरण की संभावना है, जो व्यक्ति के मूल्यांकन के दौरान अच्छे के लिए: एक € "
3.3-2 व्यक्ति, हिंदू अविभाजित परिवार, व्यक्तियों का संगम, व्यक्तियों या कृत्रिम न्यायिक व्यक्ति के शरीर - प्रथम अनुसूची के भाग III के पैरा एक हर व्यक्ति के मामले में आयकर की दरों में निर्दिष्ट करता है.हिंदू अविभाजित परिवार, व्यक्तियों का संघ, व्यक्तियों या (एक सहकारी समिति, फर्म, स्थानीय प्राधिकरण और कंपनी के अलावा अन्य) कृत्रिम न्यायिक व्यक्ति के शरीर. व्यक्तियों के मामले में, बुनियादी छूट की सीमा रुपये के रूप में अपरिवर्तित बनी हुई है. 1,60,000. भारत में और उम्र के 65 वर्ष से कम उम्र के हर औरत निवासी के लिए छूट की सीमा भी रुपये के रूप में अपरिवर्तित बनी हुई है. 1,90,000. इसके अलावा, भारत में और पिछले वर्ष के दौरान किसी भी समय 65 साल या उससे अधिक की उम्र के हर व्यक्ति के निवासी के लिए छूट की सीमा रुपये के रूप में अपरिवर्तित बनी हुई है. 2,40,000. ऐसे सभी मामलों में टैक्स स्लैब चौड़ा किया गया है.
वित्तीय वर्ष के रूप में निम्नानुसार ऊपर हैं उल्लेख व्यक्तियों के मामले में वर्ष 2010-11 के दौरान कर की दरें: -
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टैक्स के लिए इनकम प्रभार्य
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आयकर की दर
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एजेंट (भारत में व्यक्तिगत औरत निवासी और भारत में वरिष्ठ नागरिक निवासी अलावा अन्य), एचयूएफ, व्यक्तियों का संघ, व्यक्तियों और कृत्रिम न्यायिक व्यक्ति का शरीर
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व्यक्ति महिला, भारत में निवासी और पैंसठ वर्ष की आयु से नीचे
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पैंसठ वर्ष या उससे अधिक की उम्र का है, जो भारत में व्यक्तिगत वरिष्ठ नागरिक, निवासी,
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15,000 रुपए तक 1]60]000
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शून्य
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शून्य
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शून्य
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| र 1,60,001 -
र 1,90,000
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ग. 10%
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शून्य
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शून्य
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| र 1,90,001 -
र 2]40]000
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ग. 10%
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ग. 10%
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शून्य
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| र 2,40,001 -
र 5,00,000
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ग. 10%
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ग. 10%
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ग. 10%
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| र 5,00,001 -
Rs.8, 00,000
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क. 20%
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क. 20%
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क. 20%
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Rs.8, 00001 और ऊपर
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३० %
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३० %
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३० %
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कोई अधिभार ऐसे मामलों में लगाया जाएगा.
आयकर पर शिक्षा उपकर अभिकलन कर की राशि पर दो प्रतिशत की दर से लगाया जा करने के लिए जारी करेगा. इसके अलावा, गणना कर की राशि भी इस तरह के आयकर का एक प्रतिशत की दर से आयकर पर माध्यमिक और उच्च शिक्षा उपकर नामक एक अतिरिक्त उपकर की वृद्धि की जाएगी. कोई मामूली राहत शिक्षा उपकर के संबंध में उपलब्ध हो जाएगा.
3.3-3 सहकारी समितियां - हर सहकारी समिति के मामले में आयकर की दरें अधिनियम की प्रथम अनुसूची के भाग III के अनुच्छेद बी में निर्दिष्ट किया गया है. दरों "followsâ € के रूप में कर रहे हैं
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टैक्स के लिए इनकम प्रभार्य
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दर
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15,000 रुपए तक 10]000
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ग. 10%
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र 10,001 - रुपये. 20]000
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क. 20%
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रुपये अधिक है. 20]000
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३० %
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कोई अधिभार लगाया जाएगा. पर शिक्षा उपकर आयकर और आयकर पर माध्यमिक और उच्च शिक्षा उपकर क्रमशः अभिकलन कर की राशि का प्रतिशत और एक प्रतिशत प्रति दो की दर से लगाया जाएगा. कोई मामूली राहत शिक्षा उपकर के संबंध में उपलब्ध हो जाएगा.
3.3-4 कंपनियों - हर फर्म के मामले में, प्रतिशत तीस से आयकर की दर अधिनियम की प्रथम अनुसूची के भाग III के अनुच्छेद सी में निर्दिष्ट किया गया है. कोई सरचार्ज लगाया जाएगा.आयकर पर शिक्षा उपकर अभिकलन कर की राशि पर दो प्रतिशत की दर से लगाया जा करने के लिए जारी करेगा. इसके अलावा, कर की ऐसी राशि आगे सभी मामलों में, कर की राशि पर एक प्रतिशत की दर पर गणना आयकर पर माध्यमिक और उच्च शिक्षा उपकर नामक एक अतिरिक्त उपकर की वृद्धि की जाएगी. कोई मामूली राहत शिक्षा उपकर के संबंध में उपलब्ध हो जाएगा.
3.3-5 स्थानीय अधिकारियों - हर स्थानीय प्राधिकारी के मामले में आयकर की दर अधिनियम की प्रथम अनुसूची के भाग III के अनुच्छेद डी फीसदी तीस में निर्दिष्ट किया गया है. कोई अधिभार लगाया जाएगा.हालांकि, शिक्षा उपकर पर आयकर और आयकर पर माध्यमिक और उच्च शिक्षा उपकर क्रमशः अभिकलन कर की राशि का प्रतिशत और एक प्रतिशत प्रति दो की दर से लगाया जाएगा. कोई मामूली राहत शिक्षा उपकर के संबंध में उपलब्ध हो जाएगा.
3.3-6 कंपनियों - एक कंपनी के मामले में आयकर की दर अधिनियम की प्रथम अनुसूची के भाग III के अनुच्छेद ई में निर्दिष्ट किया गया है.
एक घरेलू कंपनी के मामले में आयकर की दर से कुल आय का तीस फीसदी है. अभिकलन कर इस तरह के घरेलू कंपनी से एक करोड़ रुपए से अधिक की कुल आय जहां एक मामले में सात प्रतिशत और आधे से एक अधिभार से बढ़ाया जाएगा.
एक घरेलू कंपनी के अलावा किसी अन्य कंपनी के मामले में, रॉयल्टी 31-3-1961 के बाद किए गए एक अनुमोदित समझौते के तहत सरकार या भारतीय चिंता से प्राप्त है, लेकिन 1976/01/04 पचास प्रतिशत से कम पर कर की जाएगी से पहले. इसी तरह, 29-2-1964 के बाद किए गए एक अनुमोदित समझौते के तहत सरकार या भारतीय चिंता से इस तरह कंपनी द्वारा प्राप्त किया, लेकिन 1976/01/04 से पहले, पचास प्रतिशत से कम पर कर की जाएगी तकनीकी सेवाओं के लिए शुल्क में. इस तरह कंपनी की कुल आय के संतुलन पर, कर की दर चालीस फीसदी हो जाएगी. अभिकलन कर दो और ऐसी कंपनी से एक करोड़ रुपए से अधिक की कुल आय जहां मामले में एक फीसदी से डेढ़ की एक अधिभार से बढ़ाया जाएगा. हालांकि, सीमांत राहत आय से अधिक एक है जिसके द्वारा राशि तक सीमित है एक करोड़ रुपए से अधिक आय से अधिक पर, अधिभार सहित, कि आयकर की अतिरिक्त राशि देय सुनिश्चित करने के लिए हर कंपनी के मामले में अनुमति दी जाएगी करोड़.
हालांकि, शिक्षा उपकर पर आयकर और आयकर पर माध्यमिक और उच्च शिक्षा उपकर कर की राशि की क्रमशः फीसदी और एक फीसदी प्रति दो की दर से लगाया जाएगा अधिभार सहित अभिकलन. कोई मामूली राहत शिक्षा उपकर के संबंध में उपलब्ध हो जाएगा.
(4) "धर्मार्थ उद्देश्य 'की परिभाषा में बदलें
आयकर अधिनियम के प्रयोजनों के लिए 4.1, "धर्मार्थ प्रयोजन" दूसरों के बीच में, "आम जनता उपयोगिता के किसी अन्य वस्तु की उन्नति 'भी शामिल है, जो धारा 2 (15) में परिभाषित किया गया है.
यह व्यापार, वाणिज्य या व्यापार, या के संबंध में किसी भी सेवा प्रदान करने के लिए किसी भी गतिविधि की प्रकृति में किसी भी गतिविधि की तरफ ले जा शामिल है अगर 4.2 हालांकि, "आम जनता उपयोगिता के किसी अन्य वस्तु की उन्नति", एक धर्मार्थ उद्देश्य नहीं है इस तरह की गतिविधि से आय के किसी भी व्यापार, वाणिज्य या व्यापार, एक उपकर या शुल्क या किसी भी अन्य विचार के लिए, चाहे उपयोग या आवेदन की प्रकृति के कारण, या प्रतिधारण,.
4.3 वाणिज्यिक प्रकृति की कोई रसीद पर पूर्ण प्रतिबंध ऐसी गतिविधियों से विविध कारणों से प्राप्त जो संगठनों को कठिनाई पैदा हो सकती है.इसलिए, धारा 2 (15) "आम जनता उपयोगिता के किसी अन्य वस्तु की उन्नति 'ए' धर्मार्थ प्रयोजन" रहेगा कि प्रदान करने के लिए संशोधन किया गया है यदि व्यापार, वाणिज्य या व्यापार की प्रकृति में किसी भी गतिविधि से कुल प्राप्तियां , या किसी भी व्यापार, वाणिज्य या व्यापार के संबंध में किसी भी सेवा प्रदान करने के लिए किसी भी गतिविधि को पिछले वर्ष में 10 लाख रुपये से अधिक नहीं है.
4.4 प्रयोज्यता - यह संशोधन 1 अप्रैल 2009 से retrospectively प्रभावी बना दिया गया है और, तदनुसार, आकलन वर्ष 2009-10 और बाद के वर्षों के संबंध में लागू होगा.
प्र.5. आय एक अनिवासी को जमा या भारत में पैदा होती समझा
5.1 धारा 9 आय अर्जित करते हैं या भारत में पैदा होंगी, जहां स्थितियों के लिए प्रदान करता है.ख़बरदार वित्त अधिनियम, 1976, एक स्रोत शासन खंड की प्रविष्टि के माध्यम से धारा 9 में प्रदान किया गया (वी), (vi) और (सात) उप - धारा (1) में ब्याज, रॉयल्टी या तकनीकी सेवाओं के लिए शुल्क के माध्यम से आय के लिए क्रमश: .यह इन धाराओं के तहत वर्णित के रूप में भुगतान के मामले में, आय उसमें निर्दिष्ट परिस्थितियों में एकत्रित होने या अनिवासी करने के लिए भारत में पैदा समझा जाएगा कि, अन्य बातों के साथ प्रदान किया गया.स्रोत शासन शुरू करने का इरादा भी सेवाओं के रूप में लंबे समय तक वे भारत में उपयोग किया जाता है के रूप में भारत के बाहर प्रदान की जाती हैं जहां मामलों में, धारा 9 में एक कानूनी कथा बनाकर, कर ब्याज, रॉयल्टी और तकनीकी सेवाओं के लिए शुल्क के लिए ले गया था. स्रोत नियम, इसलिए, सेवाओं के प्रतिपादन के situs प्रासंगिक नहीं है कि इसका मतलब है. यह दाता या भारत में ऐसी सेवाओं की कर देयता का निर्धारण करेगा जो दाता द्वारा सेवाओं के उपयोग के situs की situs है. यह 2007 तक कानून की बसे स्थिति थी.
5.2 हालांकि, तो होना € ™ ble सुप्रीम कोर्ट, Ishikawajima-Harima भारी उद्योग लिमिटेड वी. डीआईटी [2007] 288 आईटीआर 408 के मामले में, किसी भी तरह के आय के लिए धारा 9, में deeming कथा के बावजूद में कर योग्य होने के लिए आयोजित की है कि भारत, ऐसी आय और भारत के राज्यक्षेत्र के बीच पर्याप्त क्षेत्रीय गठजोड़ होना चाहिए.इसे आगे भी इस तरह के क्षेत्रीय गठजोड़ स्थापित करने के लिए, सेवाओं भारत में उपयोग के रूप में के रूप में अच्छी तरह से भारत में प्रदान किया जाना है कि आयोजित किया. इस व्याख्या भारत में प्रतिपादन सेवा की situs के रूप में लंबे समय तक सेवाएं भारत में उपयोग किया जाता है के रूप में प्रासंगिक नहीं है कि विधायी मंशा के अनुसार नहीं था. इसलिए, स्रोत शासन के बारे में संदेह को दूर करने के लिए, एक विवरण (2) 1 जून से पूर्वव्यापी प्रभाव, 1976 ख़बरदार साथ धारा 9 की उपधारा नीचे डाला गया था वित्त अधिनियम, 2007.स्पष्टीकरण आय (वी), (vi) खंड के तहत अर्जित किए जाने या भारत में पैदा होंगी, और (सात) की उपधारा (1) के खंड 9, ऐसी आय की कुल आय में शामिल किया जाएगा, जहां कि स्पष्ट करने की मांग की परवाह किए बिना अनिवासी व्यापार या भारत में व्यापार संबंध के एक घर या जगह है कि क्या अनिवासी,.हालांकि, कर्नाटक उच्च न्यायालय, DCIT वी. जिंदल थर्मल पावर कंपनी लिमिटेड के मामले में अपने फैसले में (टीडीएस), आयोजित किया गया है कि स्पष्टीकरण, अपने मौजूदा स्वरूप में, एकत्रित होने या धारा 9 के तहत एक अनिवासी को पैदा करने के लिए समझा जा करने के लिए किसी भी आय के लिए भारत में सेवाओं का प्रतिपादन की आवश्यकता के साथ दूर नहीं करता है.यह स्पष्टीकरण का एक सादे पढ़ने पर कि आयोजित किया गया है, भारत में सेवाएं प्रदान और भारत में सेवा के उपयोग Ishikawajima-Harima भारी उद्योग लिमिटेड (पूर्व) के मामले में अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा निर्धारित मापदंड स्पष्टीकरण से अछूते और अप्रभावित रहता है.
5.3 पूर्वोक्त स्रोत शासन की विधान के इरादे के बारे में कोई संदेह को दूर करने के लिए, इस विवरण के लिए विशेष रूप से एक अनिवासी की आय वी एकत्रित होने या (खंड के अधीन भारत में पैदा होती है यह समझा जाएगा कि राज्य के लिए एक नई व्याख्या के साथ प्रतिस्थापित किया गया है ) या खंड (vi) या खंड (सात) की उपधारा (1) के धारा 9 और उसकी कुल आय में शामिल किया जाएगा, चाहे या नहीं, (एक) अनिवासी व्यापार या व्यवसाय के एक घर या जगह नहीं है भारत में कनेक्शन; या (ख) अनिवासी भारत में सेवाएं प्रदान की.
5.4 प्रयोज्यता - यह संशोधन 1 जून 1976 से retrospectively प्रभावी बना दिया गया है और, तदनुसार, आकलन वर्ष 1977-78 और बाद के वर्षों के संबंध में लागू होगा.
प्र.6. विशेष आर्थिक क्षेत्रों में इकाइयों के मामले में छूट दी मुनाफा (एसईजेड) की संगणना
6.1 धारा 10AA 2006/10/02 से प्रभाव के साथ विशेष आर्थिक क्षेत्र अधिनियम 2005 द्वारा आयकर अधिनियम में डाला गया था.वित्त (संख्या 2) अधिनियम, 2009 के माध्यम से, धारा 10AA (7) आयकर अधिनियम की, 1961 में संशोधन किया गया था और "उपक्रम द्वारा" शब्द निर्धारण वर्ष 2010 से "निर्धारिती द्वारा" के लिए रख दिए गए - 11 और बाद के आकलन के वर्षों. मौजूदा सूत्र उन निर्धारिती की तुलना में एक की तुलना केवल एसईजेड में इकाइयों कर रहे थे, जो उन निर्धारिती सेज और घरेलू टैरिफ क्षेत्र (डीटीए) दोनों में कई इकाइयां हैं, जो संबंध है insofar के रूप में भेदभावपूर्ण माना जाता था के रूप में यह किया गया था. विसंगति को दूर करने की दृष्टि से, आयकर अधिनियम की धारा 10AA की उप - धारा के प्रावधानों (7) में संशोधन किया गया.
6.2 प्रयोज्यता - पहले के वर्षों के लिए संशोधन प्रभावी बनाने के क्रम में, उप - धारा (7) के लिए एक परंतुक प्रदान करने के लिए डाला गया है कि उप - धारा के प्रावधान (7), वित्त द्वारा संशोधित (नं. 2) अधिनियम, 2009, आकलन वर्ष 2006-07 और बाद के मूल्यांकन वर्षों के लिए लागू है.
प्र.7. अनुभाग 12A के तहत प्राप्त पंजीकरण रद्द
7.1 धारा 12AA धर्मार्थ गतिविधियों में लिप्त एक ट्रस्ट या संस्था के पंजीकरण से संबंधित प्रक्रिया प्रदान करता है.धारा 12AA (3) पहले से विश्वास या संस्था की गतिविधियों गैर वास्तविक या अपनी गतिविधियों को ऐसे ट्रस्ट या संस्था की स्थापना की थी, जिसके लिए वस्तुओं के अनुसार नहीं हैं होना पाया जाता है, तो खंड 12AA तहत दी पंजीकरण किया जा सकता है बशर्ते कि ट्रस्ट या संस्था को सुनवाई का एक अवसर प्रदान करने के बाद आयुक्त ने रद्द कर दिया.
7.2 पंजीकरण रद्द करने की शक्ति निहित है और पंजीकरण देने का अधिकार से बहती है.हालांकि, कुछ मामलों में न्यायिक फैसलों आयुक्त यह विशेष रूप से खंड 12AA में उल्लेख नहीं है के रूप में खंड 12A के प्रावधानों के तहत किसी भी विश्वास या संस्था द्वारा पहले प्राप्त हुई थी जो पंजीकरण रद्द करने का अधिकार नहीं है कि आयोजित किया है.
7.3 इसलिए, अनुभाग 12AA आयुक्त भी यह वित्त (संख्या 2) अधिनियम, 1996 द्वारा संशोधन से पहले खड़ा था के रूप में खंड 12A के तहत प्राप्त पंजीकरण रद्द कर सकते हैं कि प्रदान करने के लिए संशोधन किया गया है.
7.4 प्रयोज्यता - यह संशोधन 1 जून 2010 से प्रभावी लागू किया गया है और उसी के अनुसार आकलन वर्ष 2011-12 और बाद के मूल्यांकन वर्षों के लिए लागू नहीं होगी.
8 वैज्ञानिक अनुसंधान और विकास के लिए भारित कटौती
8.1 (1) (ख) आयकर अधिनियम की धारा 35 के मौजूदा प्रावधानों की वस्तु है कि एक अनुमोदित वैज्ञानिक अनुसंधान संस्था का भुगतान किसी भी राशि का 125 प्रतिशत की सीमा तक व्यवसाय आय से एक भारित कटौती के लिए प्रदान वैज्ञानिक अनुसंधान या एक अनुमोदित विश्वविद्यालय, कॉलेज या वैज्ञानिक अनुसंधान के लिए प्रयोग की जाने वाली अन्य संस्था को उपक्रम.इसके अलावा, धारा 35 के तहत कार्रवाई की (2AA), 125 प्रतिशत की सीमा तक भारित कटौती भी एक राष्ट्रीय प्रयोगशाला या एक विश्वविद्यालय या प्रौद्योगिकी का एक भारतीय संस्थान (आईआईटी) या के लिए एक निर्धारित व्यक्ति के लिए भुगतान किसी भी राशि के लिए अनुमति दी गई है एक अनुमोदित वैज्ञानिक अनुसंधान कार्यक्रम का उद्देश्य.
8.2 वैज्ञानिक अनुसंधान के प्रयोजनों के लिए इस तरह अनुमोदित संस्थाओं के लिए अधिक योगदान को प्रोत्साहित करने के लिए, अधिनियम प्रतिशत 175 फीसदी 125 से भारित कटौती को बढ़ाने के लिए संशोधन किया गया है.
8.3 धारा 35 (1) (ग) एक अनुमोदित और अधिसूचित विश्वविद्यालय के लिए भुगतान किसी भी राशि का 125 प्रतिशत की सीमा तक व्यवसाय आय से एक भारित कटौती के लिए उपलब्ध कराने, कॉलेज या अन्य संस्था सामाजिक विज्ञान या में अनुसंधान पर ले जाने के लिए इस्तेमाल किया जाएगा सांख्यिकीय अनुसंधान.धारा 80GGA ऐसे संघ में किए गए दान के लिए कटौती, विश्वविद्यालयों, आदि की अनुमति देता है
मौजूदा धारा 10 (21) के तहत 8.4, छूट को मंजूरी दे दी और धारा 35 के तहत अधिसूचित किया गया था जो एक वैज्ञानिक अनुसंधान एसोसिएशन की आय के संबंध में दी गई थी (1) (ख).विश्वविद्यालय, कॉलेज या तो (1) (ख) या धारा 35 के तहत (1) (ग) भी निर्दिष्ट शर्तों के अधिनियम विषय की धारा 10 (23 सी) के तहत अपनी आय से छूट के लिए अर्हता प्राप्त कर धारा 35 के तहत मंजूरी दे दी है, जो अन्य संस्थानों .
8.5 सामाजिक विज्ञान या सांख्यिकीय अनुसंधान में अनुसंधान करने में लगे हुए हैं जो संघों मौजूदा धारा 35 के प्रावधानों के दायरे में नहीं थे (1) (ग).इस तरह के अनुसंधान संघों को भी अपने आय के संबंध में छूट के हकदार नहीं थे.
अपने उद्देश्य सामाजिक विज्ञान या सांख्यिकीय अनुसंधान के क्षेत्र में अनुसंधान के उपक्रम के रूप में है जो एक अनुमोदित रिसर्च एसोसिएशन शामिल करने के लिए इतनी के रूप में 8.6 इसलिए (1) (ग) अधिनियम की धारा 35 में संशोधन किया गया है.अधिनियम की धारा 10 (21) भी उनकी आय के संबंध में ऐसे संगठनों को छूट प्रदान करने के लिए इतनी के रूप में संशोधन किया गया है. यह छूट वैज्ञानिक अनुसंधान के उपक्रम एक अनुमोदित रिसर्च एसोसिएशन अपनी आय के संबंध में छूट के हकदार है, जिसके तहत एक ही शर्तों के अधीन किया जाएगा. ऐसे संगठनों के लिए किए गए दान के लिए कटौती की allowability शामिल करने के लिए एक संशोधन भी किया गया है.
धारा 35 आयकर अधिनियम की (2AB) के मौजूदा प्रावधानों के तहत 8.7, एक कंपनी वैज्ञानिक अनुसंधान पर किए गए व्यय के 150 प्रतिशत की भारित कटौती (किसी भूमि या भवन की लागत की प्रकृति में खर्च नहीं किया जा रहा) की अनुमति दी है एक अनुमोदित घर में अनुसंधान और विकास सुविधा पर.आगे घर में अनुसंधान में निवेश करने के लिए कॉरपोरेट सेक्टर को प्रोत्साहित करने के लिए, अधिनियम प्रतिशत से 200 प्रतिशत 150 से भारित कटौती को बढ़ाने के लिए संशोधन किया गया है.
8.8 प्रयोज्यता - ये संशोधन 1 अप्रैल 2011 से प्रभावी बना दिया गया है और, तदनुसार, आकलन वर्ष 2011-12 और बाद के वर्षों के संबंध में लागू होगा.
9 निर्दिष्ट कारोबार के लिए निवेश से जुड़े कटौती
वित्त (नं. 2) अधिनियम, 2009 के द्वारा शुरू की गई थी जो 9.1.1 निवेश से जुड़े टैक्स प्रोत्साहन, अनुमति देता है, भूमि, सद्भावना और वित्तीय साधन के अलावा अन्य राजधानी प्रकृति के किसी भी व्यय (के पूरे के संबंध में 100 फीसदी कटौती ) ऐसे व्यय किए गए है जिसमें पिछले वर्ष के दौरान "निर्दिष्ट व्यापार" के प्रयोजनों के लिए, पूर्ण और विशेष रूप से किए गए.इस तरह के "निर्दिष्ट व्यापार" की स्थापना और संचालन कोल्ड चेन सुविधाओं, कृषि उपज के भंडारण के लिए सुविधाओं भंडारण और बिछाने और एक पार से देश में प्राकृतिक गैस या कच्चे तेल या पेट्रोलियम तेल पाइपलाइन नेटवर्क के संचालन के व्यापार में शामिल हैं.
9.1.2 अनुभाग 35AD तहत निवेश जुड़े हुए कर प्रोत्साहन का लाभ अब मौजूदा व्यवसाय के अलावा निम्न निर्दिष्ट कारोबार के लिए बढ़ा दिया गया है: एक € "
भारत में कहीं भी (मैं) के निर्माण और परिचालन, दो स्टार का एक नया होटल या केन्द्र सरकार और अप्रैल, 2010 के 1 दिन या उसके बाद शुरू आपरेशनों द्वारा वर्गीकृत श्रेणी से ऊपर;
(Ii) भारत में कहीं भी, कम से कम एक सौ मरीजों के लिए बेड और 1 अप्रैल 2010 को या उसके बाद ऑपरेशन शुरू के साथ एक नया अस्पताल में निर्माण और परिचालन,;
(Iii) मई के रूप में विकसित करने और स्लम फिर से विकास या दिशा निर्देशों के अनुसार पुनर्वास जैसा भी मामला हो, केन्द्र सरकार या राज्य सरकार द्वारा तैयार किए, और इस संबंध में बोर्ड द्वारा अधिसूचित के लिए एक योजना के तहत एक आवासीय परियोजना का निर्माण निर्धारित और अप्रैल, 2010 के 1 दिन या उसके बाद ऑपरेशन शुरू किया.
इस धारा के तहत छूट का दावा किया है और किसी भी निर्धारण वर्ष के लिए निर्दिष्ट कार्य के संबंध में अनुमति दी है, जहां, कोई कटौती के प्रावधानों के तहत अनुमति दी जाएगी प्रदान करने के लिए इतनी के रूप में 9.2.1 उप - धारा (3) खंड 35AD की एवजी किया गया है उसी या किसी भी अन्य निर्धारण वर्ष के लिए इस तरह निर्दिष्ट व्यापार के संबंध में शीर्षक "निश्चित आय के संबंध में सी. कटौती 'के तहत अध्याय छठी ए.ऐसा ही एक संशोधन अनुभाग 80A में किया गया है.
9.2.2 प्रयोज्यता - ये संशोधन 1 अप्रैल 2011 से प्रभावी लागू कर दिया गया है और उसी के अनुसार आकलन वर्ष 2011-12 और बाद के मूल्यांकन वर्षों के लिए लागू होगी.
9.3.1 € ~ सामान्य वाहक capacityâ € ™ पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस नियामक बोर्ड द्वारा निर्दिष्ट नियमों के आधार पर पार से देश में प्राकृतिक गैस या कच्चे तेल या पेट्रोलियम तेल पाइपलाइन नेटवर्क के लिए नए सिरे से परिभाषित किया गया है का मतलब.
9.3.2 प्रयोज्यता - यह संशोधन 1 अप्रैल 2010 से पूर्व प्रभाव से लागू कर दिया गया है और उसी के अनुसार आकलन वर्ष 2010-11 और बाद के मूल्यांकन वर्षों के लिए लागू होगी.
10 टीडीएस प्रावधानों का पालन न करने के कारण खर्च की पाबंदी
खंड 40 के 10.1.1 मौजूदा प्रावधान (क) (आइए) आयकर अधिनियम की ब्याज, कमीशन, ब्रोकरेज, व्यावसायिक फीस, आदि ऐसे खर्च पर टैक्स काट लिया नहीं था, या बाद की तरह खर्च की पाबंदी के लिए प्रदान कटौती पिछले वर्ष के दौरान भुगतान नहीं किया गया था.कर की कटौती के पिछले वर्ष के आखिरी महीने के दौरान किया जाता है के मामले में कर रिटर्न दाखिल करने की नियत तारीख को या उससे पहले जमा किया जाता है हालांकि, अगर कोई पाबंदी किया जाता है.
10.1.2 अनुभाग पिछले वर्ष के दौरान कर की कटौती के बाद, एक ही (पर या उपधारा में निर्दिष्ट आयकर रिटर्न दाखिल करने की तारीख से पहले भुगतान किया गया है कि अगर कोई पाबंदी किया जाएगा प्रदान करने के लिए संशोधन किया गया है कहा 1) धारा 139 के.
10.1.3 प्रयोज्यता - यह संशोधन 1 अप्रैल 2010 से पूर्वव्यापी प्रभाव लेता है और उसके अनुसार आकलन वर्ष 2010-11 और बाद के वर्षों के संबंध में लागू होगा.
धारा 201 अधिनियम की (1 ए) के मौजूदा प्रावधानों के तहत 10.2.1, एक व्यक्ति कटौती के बाद टैक्स या कर के भुगतान घटा विफलता के मामले में हर महीने या महीने के भाग के लिए एक प्रतिशत पर साधारण ब्याज का भुगतान करने के लिए उत्तरदायी है.
10.2.2 कटौती के बाद कर की जमा में देरी के अभ्यास को हतोत्साहित करने के लिए, अधिनियम एक और प्रति एक से डेढ़ फीसदी की वर्तमान एक से कटौती के बाद कर का भुगतान न करने के लिए ब्याज की दर को बढ़ाने के लिए संशोधन किया गया है हर महीने या महीने के भाग के लिए प्रतिशत.
10.2.3 प्रयोज्यता - यह संशोधन 1 जुलाई 2010 से प्रभावी होता है.
प्र।11. कारोबार की सीमा या खातों के ऑडिट के उद्देश्य के लिए और प्रकल्पित कराधान के लिए सकल प्राप्तियों
खंड 44AB के मौजूदा प्रावधानों के तहत 11.1, व्यापार पर ले जाने के लिए हर व्यक्ति को व्यापार में कुल बिक्री, टर्नओवर या सकल प्राप्तियों को पिछले वर्ष में चालीस लाख रुपये से अधिक हो जाने उनके खातों लेखापरीक्षित पाने के लिए आवश्यक है.इसी तरह, एक पेशे पर ले जाने के एक व्यक्ति के पेशे में सकल प्राप्तियों को पिछले वर्ष में दस लाख रुपये से अधिक हो जाने उनके खातों लेखापरीक्षित पाने के लिए आवश्यक है.
11.2 छोटे व्यवसायों और पेशेवरों के अनुपालन बोझ को कम करने के लिए, अधिनियम पंद्रह लाख रुपये में करने के लिए व्यापार पर और दस लाख रुपए से ले जाने के व्यक्तियों के मामले में साठ लाख रुपए तक चालीस लाख रुपये से सीमा को बढ़ाने के लिए संशोधन किया गया है पेशे पर ले जाने के व्यक्तियों के मामले.
11.3 उपरोक्त को देखते हुए, इस अधिनियम को भी एक लाख एक लाख रुपये से, लेखा अनुभाग 44AB तहत लेखापरीक्षित पाने के लिए या इस तरह के ऑडिट की एक रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए विफलता के लिए खंड 271B के तहत लगाया अधिकतम जुर्माना बढ़ाने के लिए संशोधन किया गया है पचास हजार रुपए.
खंड 44AD तहत प्रकल्पित कराधान के उद्देश्य के लिए 11.4, अधिनियम साठ लाख रुपए तक चालीस लाख रुपये से कुल कारोबार या सकल प्राप्तियों की सीमा को बढ़ाने के लिए संशोधन किया गया है.
11.5 प्रयोज्यता - ये संशोधन 1 अप्रैल 2011 से प्रभावी और, तदनुसार, आकलन वर्ष 2011-12 और बाद के वर्षों के संबंध में लागू होगा.
प्र.12. एक सीमित देयता भागीदारी में एक निजी कंपनी या एक असूचीगत सार्वजनिक कंपनी के रूपांतरण (एलएलपी)
साझेदारी फर्म के रूप में लागू उसी तर्ज पर आयकर अधिनियम में LLPs के कराधान के लिए प्रदान की 12.1 वित्त (नं. 2) अधिनियम, 2009.धारा 56 और सीमित देयता भागीदारी अधिनियम, 2008 की धारा 57 एक एलएलपी में एक निजी कंपनी के रूपांतरण या (इसके बाद कंपनी के रूप में कहा गया है) एक गैर सूचीबद्ध सार्वजनिक कंपनी अनुमति देते हैं. आयकर अधिनियम के मौजूदा प्रावधानों के तहत एक एलएलपी में एक कंपनी के रूपांतरण निश्चित कर निहितार्थ था. रूपांतरण पर एक शेयरधारक द्वारा कंपनी में आयोजित की संपत्ति या शेयरों के हस्तांतरण के पूंजीगत लाभ कर की वसूली को आकर्षित किया. इसी प्रकार आगे आदि घाटा, अनवशोषित मूल्यह्रास, के ले जाने के उत्तराधिकारी एलएलपी के लिए उपलब्ध नहीं था.
12.2 अनुभाग 56 और सीमित देयता भागीदारी अधिनियम की धारा 57 के अनुसार एक एलएलपी में एक कंपनी के रूपांतरण पर एक शेयरधारक द्वारा कंपनी में आयोजित की संपत्ति या शेयरों के हस्तांतरण, 2008 नहीं होगा तो इसलिए अधिनियम में संशोधन किया गया है कुछ शर्तों के अधीन धारा 45 के तहत पूंजीगत लाभ कर के प्रयोजनों के लिए एक हस्तांतरण के रूप में माना जाता है.ये शर्तें हैं:
(I) कंपनी की सभी परिसंपत्तियों और देनदारियों एलएलपी की संपत्ति और देनदारियों हो;
(Ii) कंपनी के शेयरधारकों को कंपनी में उनके हिस्सेदारी के रूप में उसी अनुपात में एलएलपी के भागीदार बन जाते हैं;
(Iii) एलएलपी में लाभ और पूंजी योगदान में हिस्सेदारी के अलावा और कोई ध्यान भागीदारों के लिए उठता है;
(Iv) कंपनी के पूर्व शेयरधारकों रूपांतरण की तारीख से 5 साल की अवधि के लिए एलएलपी के लाभ का कम से कम 50 प्रतिशत प्राप्त करने का हकदार को जारी;
(वी) [सिर "मुनाफा और व्यापार या पेशे के लाभ 'के तहत कर योग्य हैं जो] कंपनी के कारोबार में कुल बिक्री, टर्नओवर या सकल प्राप्तियां पिछले साल पिछले तीन में से किसी में साठ लाख रुपये से अधिक नहीं है; और
(Vi) कोई राशि रूपांतरण की तारीख से 3 साल की अवधि के लिए कंपनी की संचित लाभ से बाहर किसी भी साथी को प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से, भुगतान किया जाता है.
12.3 अधिनियम आगे ले जाने और सेट बंद व्यापार हानि, अनवशोषित मूल्यह्रास और उपरोक्त शर्तों का उल्लेख को पूरा जो उत्तराधिकारी एलएलपी के लिए स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति योजना के तहत किए गए व्यय का परिशोधन की अनुमति देने के लिए संशोधन किया गया है.
12.4 अधिनियम ऊपर निर्धारित की गई शर्तों का अनुपालन नहीं कर रहे हैं, कंपनी द्वारा या शेयरधारकों द्वारा लाभ उठाया लाभ, उत्तराधिकारी एलएलपी या पूर्ववर्ती कंपनी के शेयरधारक के मुनाफे और लाभ होना समझा जाएगा कि प्रदान करने के लिए संशोधन किया गया है , जैसा भी मामला हो, की आवश्यकताओं के साथ पालन नहीं कर रहे हैं, जिसमें पिछले साल के लिए कर के दायरे में.
12.5 अधिनियम पूर्ववर्ती कंपनी और उत्तराधिकारी एलएलपी के लिए कुल मूल्यह्रास स्वीकार्य से अधिक नहीं होगी कि प्रदान करने के लिए संशोधन किया गया है, किसी भी पिछले एक साल में, रूपांतरण जगह नहीं लिया था के रूप में यदि निर्धारित दरों पर गणना ह्रास.
12.6 अधिनियम उत्तराधिकारी एलएलपी के मामले में संपत्ति के ब्लॉक की वास्तविक लागत रूपांतरण की तारीख पर पूर्ववर्ती कंपनी के मामले में संपत्ति के ब्लॉक के नीचे लिखा मान जाएगी प्रदान करने के लिए संशोधन किया गया है.
12.7 यह भी उत्तराधिकारी एलएलपी के लिए पूंजी परिसंपत्ति के अधिग्रहण की लागत पूर्ववर्ती कंपनी यह अधिग्रहण किया है जिसके लिए लागत होना समझा जाएगा कि प्रदान की जाती है.
12.8 अधिनियम आगे उत्तराधिकारी एलएलपी में एक साथी की पूंजी परिसंपत्ति जा रहा है अधिकार के अधिग्रहण की लागत से ठीक पहले कंपनी में शेयर या शेयरों की उसे अधिग्रहण की लागत से बनने समझा जाएगा कि प्रदान करने के लिए संशोधन किया गया है इसके रूपांतरण .
खंड 115JB के तहत एक कंपनी द्वारा भुगतान कर के संबंध में 12.9 क्रेडिट खंड 115JAA के तहत ही इस तरह कंपनी की अनुमति दी है. यह खंड 115JAA के तहत टैक्स क्रेडिट के उत्तराधिकारी एलएलपी के लिए अनुमति नहीं दी जाएगी कि स्पष्ट किया जाता है.
12.10 प्रयोज्यता - ये संशोधन 1 अप्रैल 2011 से प्रभावी और, तदनुसार, आकलन वर्ष 2011-12 और बाद के वर्षों के संबंध में लागू होगा.
प्र.13. विचार के बिना या अपर्याप्त विचार के लिए कुछ लेनदेन का कराधान
धारा 56 के पहले मौजूदा प्रावधानों के तहत 13.1 (2) (सात), पैसे के किसी भी राशि या विचार के बिना या अपर्याप्त विचार के लिए प्राप्त हुआ है, जो वस्तु के रूप में किसी भी संपत्ति (रुपये की निर्धारित सीमा से अधिक में. 50,000) एक व्यक्ति द्वारा या एक एचयूएफ अन्य sourcesâ € ™ से € ~ आय एक सिर के तहत प्राप्तकर्ता के हाथों में आय कर के दायरे में है.हालांकि, रिश्तेदारों से या शादी के अवसर पर या एक वसीयत के तहत प्राप्तियां इस प्रावधान के दायरे से बाहर हैं. धारा 56 के प्रयोजनों के लिए संपत्ति की मौजूदा परिभाषा (2) (सात) अचल संपत्ति भूमि या भवन या दोनों, शेयरों और प्रतिभूतियों, आभूषण, पुरातात्विक संग्रह, ड्राइंग, पेंटिंग, मूर्तिकला या कला के किसी भी काम किया जा रहा शामिल हैं.
13.2 ये एक व्यक्ति या एक एचयूएफ प्राप्तकर्ता तभी लागू किया गया है जो विरोधी दुरुपयोग प्रावधान हैं.इसलिए, कम उचित बाजार मूल्य से विचार किए बिना या एक कीमत पर बजाय एक व्यक्ति या एक एचयूएफ की एक फर्म या एक कंपनी, एक कंपनी के शेयरों के हस्तांतरण के विरोधी दुरुपयोग प्रावधान से आकर्षित नहीं किया गया था. ज्यादा उनके उचित बाजार मूल्य से कम कीमत पर अनलिस्टेड शेयरों के हस्तांतरण की प्रथा को रोकने के लिए, धारा 56 भी (जनता में काफी रुचि रखते हैं, जिसमें एक कंपनी होने के नाते नहीं) एक कंपनी के शेयरों में किए गए अपने दायरे लेनदेन के भीतर या तो के लिए शामिल करने के लिए संशोधन किया गया था प्राप्तकर्ता एक फर्म या एक कंपनी (जनता में काफी रुचि रखते हैं, जिसमें एक कंपनी होने के नाते नहीं) है जहां अपर्याप्त विचार या विचार के बिना. यह भी खंड के तहत स्थानांतरण के रूप में नहीं माना जाता है, जो व्यापार पुनर्गठन, एकीकरण और डीमर्जर के लिए किए गए लेनदेन (माध्यम), (विक), (vicb), (VID) और (सात) अधिनियम की धारा 47 के बाहर करने के लिए प्रदान की जाती है.
13.3 प्रयोज्यता-यह संशोधन 1 जून 2010 से प्रभावी बना दिया है और उसके अनुसार आकलन वर्ष 2011-12 और बाद के वर्षों के संबंध में लागू किया गया है.
धारा 56 के 13.4 प्रावधान (2) (सात) बेहिसाब आय का शोधन को रोकने के लिए एक काउंटर चोरी के तंत्र के रूप में शुरू किए गए थे.प्रावधानों के प्रकार में इस तरह के लेनदेन को कर के दायरे का विस्तार करना था. आशय व्यवसाय या व्यापार के सामान्य कोर्स में में प्रवेश लेनदेन कर के लिए नहीं है, जो के मुनाफे आय के विशिष्ट सिर के तहत कर योग्य हैं. इसलिए, संपत्ति की परिभाषा (2) (सात) ~ propertyâ € ™ प्राप्तकर्ता की एक पूंजी परिसंपत्ति की प्रकृति में है जो एक € करने के लिए आवेदन किया है और इसलिए शेयर के लिए लागू नहीं होगा कि धारा 56 प्रदान करने के लिए संशोधन किया गया है इन व्यापार, कच्चे माल और ऐसे प्राप्तकर्ता की किसी भी व्यवसाय के उपभोज्य.
अचल संपत्ति लेनदेन के कई मामलों में 13.5, एक संपत्ति की बुकिंग और एक योग्य अंतर में जो परिणाम पंजीकरण, पर ऐसी संपत्ति की प्राप्ति के बीच एक समय अंतराल है.धारा 56 की इसलिए खंड (सप्तम) (2) यह अचल संपत्ति प्राप्त होने पर ही किसी भी विचार के बिना लागू होगा और अचल संपत्ति के संबंध में अपर्याप्त ध्यान के मामलों को शामिल लेनदेन के बारे में शर्त को हटाने के लिए है कि प्रदान करने के लिए संशोधन किया गया है.
13.6 प्रयोज्यता - ये संशोधन 1 अक्टूबर 2009 से retrospectively प्रभावी बना दिया गया है और, तदनुसार, आकलन वर्ष 2010-11 और बाद के वर्षों के संबंध में लागू होगा.
13.7 ~ propertyâ € ™ धारा 56 के तहत प्रदान के रूप में एक € की परिभाषा ~ bullionâ € ™ € â के संबंध में लेनदेन में शामिल करने के लिए संशोधन किया गया है.यह संशोधन 1 जून 2010 से प्रभावी बना दिया गया है और, तदनुसार, आकलन वर्ष 2011-12 और बाद के वर्षों के संबंध में लागू होगा.
13.8 धारा 142A (1) मूल्यांकन अधिकारी धारा 56 के प्रयोजनों के लिए संपत्ति के मूल्य के एक अनुमान के लिए मूल्यांकन अधिकारी के लिए एक संदर्भ बनाने के लिए अनुमति देने के लिए संशोधन किया गया है (2).यह संशोधन 1 जुलाई 2010 से प्रभावी बना दिया है और उसके अनुसार आकलन वर्ष 2011-12 और बाद के वर्षों के संबंध में लागू किया गया है.
प्र.14. लंबी अवधि के इंफ्रास्ट्रक्चर बांड के संबंध में कटौती
अधिसूचित किया जा सकता है के रूप में 14.1 बुनियादी ढांचा क्षेत्र में निवेश को बढ़ावा देने की नीति जोर के साथ धुन में, एक नई धारा 80CCF वित्तीय वर्ष 2010-11 के दौरान कहा कि सदस्यता प्रदान करने के लिए आयकर अधिनियम में सम्मिलित किया गया था (लंबी अवधि के इन्फ्रास्ट्रक्चर बॉन्ड के लिए बनाया ) केंद्र सरकार द्वारा रुपये की सीमा तक. 20,000, एक व्यक्ति या एक हिंदू अविभाजित परिवार की आय की गणना में कटौती के रूप में दी जाएगी.यह कटौती धारा 80 सी, 80CCC और अधिनियम के 80CCD के तहत तक 1 लाख रुपए की बचत पर अधिक और कर कटौती के मौजूदा समग्र सीमा से ऊपर हो जाएगा.
14.2 प्रयोज्यता - यह संशोधन 1 अप्रैल 2011 से प्रभाव के साथ लागू किया गया है और आकलन वर्ष 2011-12 के लिए ही लागू होगी.
प्र.15. केंद्रीय सरकार स्वास्थ्य योजना (सीजीएचएस) के योगदान के संबंध में कटौती
धारा 80 डी, अधिकतम रू तक एक स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी की दिशा में भुगतान किए गए प्रीमियम के संबंध में कटौती के पुराने प्रावधानों के तहत 15.1. 15,000 स्वयं, पति और आश्रित बच्चों के लिए उपलब्ध है.रुपये की एक और कटौती. 15,000 भी निर्भर माता - पिता के संबंध में एक बीमा पॉलिसी खरीदने के लिए अनुमति दी है. कटौती रुपये तक बढ़ाया है. दोनों ही मामलों में 20,000 बीमित व्यक्ति 65 साल या उससे ऊपर की उम्र के है.
15.2 केंद्रीय सरकार स्वास्थ्य योजना (सीजीएचएस) एक सेवा के लिए उपलब्ध चिकित्सा सुविधा और सेवानिवृत्त सरकारी सेवकों है.इस सुविधा के लिए स्वास्थ्य बीमा पॉलिसियों के माध्यम से उपलब्ध सुविधाओं के लिए समान है.
कुल आय में से 15.3 कटौती अब धारा 80 डी के प्रावधानों के तहत इस तरह के योगदान को शामिल करके सीजीएचएस में किए गए योगदान के संबंध में अनुमति दी गई है. खंड में वर्णित के रूप में कटौती वर्तमान कुल करने के लिए सीमित हो जाएगा.
15.4 प्रयोज्यता - यह संशोधन 1 अप्रैल 2011 से प्रभाव के साथ लागू किया गया है और उसी के अनुसार आकलन वर्ष 2011-12 और बाद के मूल्यांकन वर्षों के लिए लागू होगी.
प्र.16. आवास परियोजनाओं के विकास और निर्माण के लिए कटौती
धारा 80 आईबी (10) के मौजूदा प्रावधानों के तहत 16.1 प्रतिशत कटौती प्रति 100 31-3-2008 से पहले एक स्थानीय प्राधिकारी द्वारा अनुमोदित आवासीय परियोजनाओं के विकास और निर्माण से एक उपक्रम द्वारा प्राप्त मुनाफे के संबंध में उपलब्ध है.यह लाभ, अन्य बातों के साथ, निम्न स्थितियों के लिए उपलब्ध विषय है:
(क) परियोजना परियोजना स्थानीय प्राधिकारी द्वारा मंजूरी दे दी है जिसमें वित्तीय वर्ष के अंत से 4 साल के भीतर पूरा किया जाना है.
(ख) आवासीय परियोजना में शामिल दुकानें और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के निर्मित क्षेत्र कुल निर्मित आवास परियोजना के क्षेत्र या 2,000 वर्ग फीट की दर 5 फीसदी से अधिक नहीं होना चाहिए इनमें से जो भी कम है.
वैश्विक मंदी और आवास क्षेत्र में परिणामी मंदी की वजह से असाधारण स्थितियों के लिए अनुमति देने के लिए 16.2, धारा के तहत कर लाभ प्राप्त करने के लिए अर्हता प्राप्त करने के क्रम में एक आवासीय परियोजना के पूरा होने के लिए अनुमति दी गई अवधि, मौजूदा 4 साल से बढ़ा दी गई है आवासीय परियोजना स्थानीय प्राधिकारी द्वारा मंजूरी दे दी है जिसमें वित्तीय वर्ष के अंत से 5 साल के लिए.इस विस्तार को या उसके बाद 2005/01/04 लेकिन 31-3-2008 को या उससे पहले अनुमोदित आवासीय परियोजनाओं के लिए उपलब्ध हो जाएगा.
16.3 इसके अलावा, पात्र आवासीय परियोजनाओं में दुकानें और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के निर्मित क्षेत्र के लिए मानदंडों को भी निवासियों के लिए बुनियादी सुविधाओं को सक्षम करने के क्रम में बढ़ाया गया है.पात्र आवासीय परियोजना में शामिल किया जा सकता है जो दुकानें और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों का हुक्म निर्मित क्षेत्र कुल आवासीय परियोजना का निर्मित क्षेत्र या जो भी अधिक हो 5000 वर्ग फीट का तीन प्रतिशत की वृद्धि हुई है. यह लाभ पूरा करने के लिए लंबित हैं जिस पर या के बाद 2005/01/04 लेकिन 31-3-2008 से पहले अनुमोदित परियोजनाओं के लिए उपलब्ध हो जाएगा.
16.4 प्रयोज्यता - ये संशोधन 1 अप्रैल 2010 से पूर्व प्रभाव से लागू कर दिया गया है और उसी के अनुसार आकलन वर्ष 2010-11 और बाद के मूल्यांकन वर्षों के लिए लागू होगी.
16.5 देखिये निर्देश No.4/2009 30-6-2009 दिनांकित, बोर्ड पहले से ही विकसित करने के उपक्रमों तथा निर्माण आवास परियोजनाओं के संबंध में धारा 80 आईबी (10) के तहत कटौती के बारे में स्पष्ट किया गया है.यह कटौती निर्धारिती हर वर्ष में परियोजना के आंशिक पूरा होने से लाभ दिखा रहा है जहां एक वर्ष के लिए वर्ष के आधार पर दावा किया जा सकता है कि स्पष्ट किया गया था. मामले में यह धारा 80 आईबी (10) में कहा गया है 4 साल की निर्धारित समय सीमा के भीतर परियोजना को पूरा करने की शर्त को संतुष्ट नहीं किया गया है कि पाया जाता है, पहले के वर्षों में निर्धारिती को दी गई कटौती वापस लिया जाना चाहिए.
ऊपर संकेत के रूप में इस परियोजना के पूरा होने के लिए और आवासीय परियोजना में शामिल दुकानें और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों का हुक्म निर्मित क्षेत्र के लिए समय सीमा के बारे में स्थितियों को आराम दिया गया है. तदनुसार, पहले के वर्षों में एक निर्धारिती को दी गई कटौती संशोधित शर्तों से संतुष्ट नहीं हैं तो ही वापस लिया जाना चाहिए.
प्र.17. राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में एक होटल या एक कन्वेंशन सेंटर के मुनाफे की कटौती (राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र)
17.1 धारा आयकर अधिनियम की 80 आईडी, पांच साल के लिए 100 फीसदी कटौती करने का प्रावधान है एक दो सितारा, तीन सितारा या चार सितारा श्रेणी होटल के व्यवसाय से या के व्यापार से एक उपक्रम द्वारा प्राप्त मुनाफे का भवन, ऐसे होटल अवधि 2007/01/04 दौरान कामकाज शुरू कर दिया गया है या इस तरह के कन्वेंशन सेंटर का निर्माण किया है प्रदान की दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र और फरीदाबाद, गुड़गांव, गौतम बुद्ध नगर और गाजियाबाद जिलों में स्थित एक कन्वेंशन सेंटर, मालिक और संचालन 31-3-2010 को.
अक्टूबर, 2010 में राष्ट्रमंडल खेलों के आलोक में स्थापित होने के लिए इन सुविधाओं के लिए कुछ और समय प्रदान करने के लिए 17.2, खंड (क) और (ख) धारा 80 आईडी का होटल है, जिसके द्वारा तिथि बढ़ाने के लिए संशोधन किया गया है कामकाज शुरू करने या कन्वेंशन सेंटर 31 जुलाई 2010 को मौजूदा 31 मार्च 2010 से, निर्माण किया जाना है करने के लिए.
17.3 प्रयोज्यता - यह संशोधन 1 अप्रैल 2011 से प्रभाव के साथ लागू किया गया है और उसी के अनुसार आकलन वर्ष 2011-12 और बाद के मूल्यांकन वर्षों के लिए लागू होगी.
प्र.18. खंड 115JB तहत न्यूनतम वैकल्पिक कर
आयकर अधिनियम की धारा 115JB के मौजूदा प्रावधानों के तहत 18.1, एक कंपनी ने अपने किताब लाभ पर न्यूनतम वैकल्पिक कर (मैट) का भुगतान करने के लिए आवश्यक है, तो आयकर कुल आय पर देय, में अधिनियम के तहत अभिकलन के रूप में अप्रैल, 2010 के 1 दिन या उसके बाद शुरू होने निर्धारण वर्ष के लिए प्रासंगिक किसी भी पिछले वर्ष के संबंध में इस तरह के न्यूनतम से भी कम है.खंड 115JB के तहत भुगतान कर की राशि को आगे ले जाने की अनुमति और दसवें निर्धारण वर्ष तुरंत कर ऋण खंड 115JAA के प्रावधानों के तहत स्वीकार्य हो जाता है जिसमें निर्धारण वर्ष सफल तक देय टैक्स के खिलाफ बंद का सेट है.
(1) अनुभाग 115JB के 18.2 उपधारा फीसदी मौजूदा पंद्रह फीसदी अठारह मेट दर को बढ़ाने के लिए संशोधन किया गया है.
18.3 प्रयोज्यता - यह संशोधन 1 अप्रैल 2011 से प्रभावी लागू कर दिया है और उसके अनुसार आकलन वर्ष 2011-12 और बाद के मूल्यांकन वर्षों के लिए लागू किया गया है.
प्र.19. रिटर्न की केंद्रीकृत प्रसंस्करण
सभी रिटर्न शीघ्रता से कार्रवाई कर रहे हैं और कर की वजह से निर्धारिती को देय या वापसी एक निश्चित सीमा में निर्धारित कर रहे हैं तो यह है कि आयकर अधिनियम की 19.1 धारा 143, 1961 ख़बरदार वित्त अधिनियम, 2008 और रिटर्न की केंद्रीकृत प्रसंस्करण की अवधारणा को संशोधन किया गया था, शुरू की गई थी .धारा 143 के मौजूदा प्रावधानों के तहत (1 बी), केन्द्र सरकार रिटर्न की ऐसी प्रोसेसिंग के संबंध में एक अधिसूचना जारी करने के लिए रिटर्न की केंद्रीकृत प्रसंस्करण की योजना, को प्रभावी करने के प्रयोजनों के लिए, अधिकार था. इस तरह की एक अधिसूचना 31 मार्च 2010 तक जारी किया जा सकता है.
रिटर्न बैचों में संसाधित किया जा रहा है, जहां 19.2 केन्द्रीकृत प्रसंस्करण केन्द्र स्थापित किया गया है.हालांकि, रिटर्न की प्रोसेसिंग में कुछ अधिक functionalities यह एक पूरी तरह खत्म करने के लिए अंत प्रक्रिया बनाने के लिए जोड़ा जा करने की आवश्यकता हो सकती है. इसलिए, यह 31 मार्च 2011 को 31 मार्च 2010 से धारा 143 (1) के तहत इस तरह की अधिसूचना जारी करने के लिए समय सीमा का विस्तार करने का प्रस्ताव है.
इसी तर्ज पर 19.3 परिणामी संशोधन आयकर अधिनियम की धारा 115WE में किए जाने का प्रस्ताव है.
19.4 प्रयोज्यता - ये संशोधन 1 अप्रैल 2010 से पूर्वव्यापी प्रभाव में लाने का प्रस्ताव है.
प्र.20. स्रोत (टीडीएस) पर कर कटौती से संबंधित प्रावधानों को युक्तिसंगत
आयकर अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार स्रोत पर कर की कटौती की योजना के तहत 20.1, किसी भी व्यक्ति को किसी भी निर्दिष्ट राशि के भुगतान के लिए जिम्मेदार हर व्यक्ति निर्धारित दर से स्रोत पर कर कटौती और भीतर केन्द्र सरकार के साथ इसे जमा करने के लिए आवश्यक है निर्धारित समय.हालांकि, कोई कटौती भुगतान निर्धारित सीमा से सीमा से अधिक नहीं है तो बनाया जाना आवश्यक है.
20.2 मुद्रास्फीति के लिए समायोजित करने के लिए और भी कटौती करने और करदाताओं का अनुपालन बोझ को कम करने के लिए, अधिनियम के रूप में वर्गों 194B, 194BB, 194C, 194D, 194H, 194-मैं और 194J में उल्लेख भुगतान के लिए सीमा बढ़ाने के लिए संशोधन किया गया है के तहत:
| क्रम सं.
बेच
|
अनुभाग
|
भुगतान की प्रकृति
|
मौजूदा सीमा
भुगतान की सीमा
(रुपये में)
|
संशोधित सीमा
भुगतान की सीमा
(रुपये में)
|
|
1
|
194B
|
लॉटरी या पहेली पहेली से जीत
|
5]000
|
10]000
|
|
प्र.20.
|
194BB
|
घोड़ा दौड़ से जीत
|
2]500
|
5]000
|
|
(3)
|
194C
|
ठेकेदारों को भुगतान
|
20]000
(एक एकल के लिए
लेन - देन)
50]000
(की कुल के लिए
लेनदेन के दौरान
वित्तीय वर्ष)
|
30]000
(एक एकल के लिए
लेन - देन)
75,000 रूपये
(की कुल के लिए
लेनदेन के दौरान
वित्तीय वर्ष)
|
|
(4)
|
194D
|
बीमा आयोग
|
5]000
|
20]000
|
|
प्र.5.
|
194H
|
आयोग या ब्रोकरेज
|
2]500
|
5]000
|
|
प्र.6.
|
194-I
|
किराया भुगतान
|
1]20]000
|
1]80]000
|
|
प्र.7.
|
194J
|
व्यावसायिक या तकनीकी सेवाओं के लिए शुल्क
|
20]000
|
30]000
|
20.3 प्रयोज्यता - ये संशोधन 1 जुलाई 2010 से प्रभावी.
प्र.21. स्रोत (टीडीएस) और स्रोत पर कर संग्रह (टीसीएस) पर कर कटौती का प्रमाणपत्र
अनुभाग 203 का 21.1 मौजूदा प्रावधानों (3) आयकर अधिनियम की 1 अप्रैल 2010 को या उसके बाद deductee को deductor द्वारा टीडीएस प्रमाण पत्र के प्रस्तुत की आवश्यकता के साथ बांटना.इसी प्रकार खंड 206C के तहत (5) अधिनियम, स्रोत पर कर की एक कलेक्टर भी कर 1 अप्रैल 2010 को या उसके बाद एकत्र किया गया है जिस से व्यक्ति को कर संग्रह प्रमाण पत्र जारी करने की आवश्यकता नहीं होगी.
21.2 टीडीएस / टीसीएस प्रमाणपत्र deductee / collectee के लिए एक महत्वपूर्ण दस्तावेज का गठन किया है कि इस तथ्य पर विचार, अधिनियम deductor / कलेक्टर भी 1 अप्रैल 2010 के बाद deductee / collectee को टीडीएस / टीसीएस प्रमाण पत्र प्रस्तुत करने के लिए जारी रहेगा कि संशोधन किया गया है.
21.3 प्रयोज्यता - ये संशोधन, 1 अप्रैल से retrospectively 2010 को प्रभाव में लाने.
प्र.22. समझौता आयोग
निपटारा आयोग के समक्ष एक आवेदन और निपटान आयोग द्वारा एक आवेदन के निपटान के लिए समय की दाखिल करने के लिए शर्तों संशोधित किया गया है. परिवर्तन के रूप में नीचे हैं: एक € "
अनुभाग 245A जो एक आवेदन किया जा सकता है के संबंध में (ख), शब्द "मामले", के मौजूदा प्रावधानों के तहत 22.1 लंबित किया जा सकता है जो किसी भी निर्धारण वर्ष या आकलन वर्ष के संबंध में किसी भी व्यक्ति के मूल्यांकन के लिए किसी भी कार्यवाही के रूप में परिभाषित किया गया है एक आवेदन निपटान आयोग को किया जाता है, जिस पर आज की तारीख में एक मूल्यांकन अधिकारी पहले.हालांकि, यह दूसरों के बीच, मूल्यांकन या एक खोज से या खाते की किताबें या अन्य दस्तावेज़ या अधिनियम के तहत शुरू की किसी भी संपत्ति की मांग का एक परिणाम के रूप में जिसके परिणामस्वरूप पुनर्मूल्यांकन के लिए कार्यवाही को बाहर रखा गया. अधिनियम मूल्यांकन या खोज से उत्पन्न पुनर्मूल्यांकन के लिए या खाते की किताबें या अन्य दस्तावेज़ या किसी भी संपत्ति की मांग का एक परिणाम के रूप में कार्यवाही शामिल करने के लिए संशोधन किया गया है, एक "मामला" की परिभाषा के भीतर निपटारा आयोग द्वारा स्वीकार किया जा सकता है. अनुभाग 245A के लिए स्पष्टीकरण (ख) मूल्यांकन या पुनर्मूल्यांकन के लिए कार्यवाही जिनकी आय खोज का एक परिणाम के रूप में या के रूप में मूल्यांकन या पुनर्मूल्यांकन किया जा रहा है एक व्यक्ति के मामले में शुरू किया गया समझा और निष्कर्ष निकाला जा करेगा जिस तारीख को निर्दिष्ट करने के लिए संशोधन किया गया है खाते की किताबें या अन्य दस्तावेज़ या किसी भी संपत्ति की मांग का नतीजा है.
आवेदन में बताया आय पर देय आयकर की अतिरिक्त राशि तीन लाख रुपये से अधिक है, तो आयकर अधिनियम की धारा 245C के मौजूदा प्रावधानों के तहत 22.2, एक आवेदन, निपटान आयोग के समक्ष दायर किया जा सकता है.एक आवेदन मूल्यांकन या पुनर्मूल्यांकन के लिए कार्यवाही खोज का एक परिणाम के रूप में या खाते की पुस्तकों की मांग या का एक परिणाम के रूप में शुरू किया गया है, जहां मामलों में, निपटान आयोग के समक्ष दायर किया जा सकता है प्रदान करने के लिए इतनी के रूप में खंड 245C के परन्तुक प्रतिस्थापित किया गया है अन्य दस्तावेजों या किसी भी संपत्ति, आवेदन में बताया आय पर देय आयकर की अतिरिक्त राशि पचास लाख रुपये से अधिक है. इसे आगे भी आवेदन में बताया आय पर देय आयकर की अतिरिक्त राशि दस लाख रुपये से अधिक है, तो अन्य मामलों में, एक आवेदन, समझौता आयोग से पहले किया जा सकता है, कि प्रस्तावित है.
खंड 245D आयकर अधिनियम की (4 ए) के मौजूदा प्रावधानों के तहत 22.3, समझौता आयोग आवेदन किया गया था, जिसमें इस महीने के अंत से बारह महीने के भीतर एक आदेश पारित करेगा.समझौता आयोग,, 1 जून 2010 से पहले, एक आदेश पारित करेगा 1 जून 2007 को या उसके बाद दायर एक आवेदन के संबंध में है, लेकिन है कि प्रदान करने के लिए इसके अलावा, खंड (ख) उप - धारा (4 क) का संशोधन किया गया है बारह महीने की अवधि के भीतर.समझौता आयोग, जून, 2010 को या 1 के बाद किए गए एक आवेदन के संबंध में, अंत में से अठारह महीने के भीतर एक आदेश पारित करेगा कि प्रदान करने के लिए इतनी के रूप में एक नया खंड (ग) उप - धारा में (4 ए) सम्मिलित किया गया है आवेदन किया जाता है, जिसमें महीने.
22.4 परिणामी संशोधन ऊपर उल्लेख किया परिवर्तनों को प्रभावी करने के लिए अनुभाग 22A और संपत्ति कर अधिनियम की धारा 22d में किया गया है.
22.5 प्रयोज्यता - ये संशोधन 1 जून 2010 से प्रभावी बना दिया गया है.
प्र 23 अपील के दाखिल करने में देरी को नज़रअंदाज़ करने के लिए उच्च न्यायालय की पावर
अनुभाग 260A के 23.1 मौजूदा प्रावधानों (2) आयकर अपीलीय न्यायाधिकरण के आदेश के खिलाफ अपील से आदेश प्राप्त होने की तारीख से एक सौ और बीस दिन की अवधि के भीतर उच्च न्यायालय के समक्ष दायर किया जा सकता है प्रदान निर्धारिती या आयुक्त.उप - धारा (7) आयकर अधिनियम की धारा 260A के सिविल प्रक्रिया, 1908 (1908 का 5) की संहिता के प्रावधानों के रूप में दूर हो सकती है, जैसा कि इस धारा के तहत दायर एक अपील के मामले में लागू नहीं होगी प्रदान करता है उच्च न्यायालय के समक्ष.
23.2 दिल्ली उच्च न्यायालय, धारा 260A के प्रावधानों की व्याख्या करते हुए उच्च न्यायालय में एक अपील की दाखिल करने में देरी को नज़रअंदाज़ करने की शक्ति है कि आयोजित किया गया है.हालांकि, इलाहाबाद, मुंबई, कोलकाता, गुवाहाटी और छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय अन्यथा आयोजित किया है. इसलिए यह पूर्वव्यापी विशेष रूप से यह है कि अगर हाई कोर्ट, एक सौ और बीस दिन की अवधि की समाप्ति के बाद एक अपील स्वीकार कर सकते हैं कि उपलब्ध कराने के लिए आयकर अधिनियम की धारा 260A में उप - धारा (2) सम्मिलित करने के लिए प्रदान की गई है ऐसी अवधि के भीतर अपील दायर नहीं करने के लिए पर्याप्त कारण था कि वहाँ संतुष्ट.
इसी तर्ज पर 23.3 परिणामी संशोधन संपत्ति कर अधिनियम की धारा 27 क में किया गया है.
23.4 प्रयोज्यता - ये संशोधन, 1 अक्टूबर से retrospectively 1998 को प्रभाव में लाने.
23.5 आयकर अधिनियम की धारा 256 के तहत आयकर अपीलीय न्यायाधिकरण उच्च न्यायालय में एक मामले का उल्लेख कर सकता है.मामले में आयकर अपीलीय न्यायाधिकरण उच्च न्यायालय, निर्धारिती या आयुक्त को एक मामले का उल्लेख करने से इनकार कर दिया, जहां की तारीख से छह महीने की अवधि के भीतर ट्रिब्यूनल के इस तरह के इनकार के खिलाफ उच्च न्यायालय में अपील दायर करने की अनुमति दी गई वह इनकार के एक आदेश के साथ परोसा गया था. यह इस तरह के भीतर ही दाखिल नहीं करने के लिए पर्याप्त कारण था कि वहाँ संतुष्ट है, तो छह महीने की अवधि की समाप्ति के बाद एक आवेदन स्वीकार करने के लिए उच्च न्यायालय को सशक्त करने के लिए इतनी के रूप में खंड 256 में उपधारा (2) के retrospectively सम्मिलित किया गया है अवधि.
इसी तर्ज पर 23.6 परिणामी संशोधन संपत्ति कर अधिनियम की धारा 27 में किया गया है.
23.7 प्रयोज्यता - ये संशोधन, 1 जून से retrospectively 1981 को प्रभाव में लाने.
प्र 24 दस्तावेज पहचान संख्या
24.1 धारा 282B (दस्तावेज पहचान संख्या का आबंटन) 1 अक्टूबर 2010 से प्रभावी आयकर अधिनियम में वित्त (नं. 2) अधिनियम, 2009 द्वारा डाला एक नया खंड है.इस धारा के प्रावधानों के तहत, एक आयकर प्राधिकरण हर नोटिस, आदेश, पत्र या कोई पत्राचार किसी अन्य आयकर प्राधिकारी या निर्धारिती को या किसी अन्य व्यक्ति और ऐसी संख्या के मुद्दे से पहले दस्तावेज पहचान संख्या उत्पन्न एक कंप्यूटर आवंटित करने की आवश्यकता है उस पर उद्धृत किया जाएगा. यह भी एक आयकर प्राधिकरण द्वारा या ऐसे प्राधिकारी की ओर से प्राप्त हर दस्तावेज, पत्र, पत्राचार, केवल दस्तावेज पहचान संख्या उत्पन्न आवंटन और एक कंप्यूटर के हवाले से के बाद स्वीकार किया जाएगा कि प्रदान करता है. अखिल भारतीय स्तर पर खंड 282B में उल्लिखित सेवाओं के सभी पहलुओं को कवर करने के लिए, यह जगह में अपेक्षित बुनियादी ढांचे और सुविधाओं के लिए आवश्यक होगा. दस्तावेज पहचान संख्या 1 जुलाई 2011 को या उसके बाद जारी किए जाने की आवश्यकता होगी कि प्रदान करने के लिए इतनी के रूप में धारा 282B संशोधन किया गया है.
24.2 प्रयोज्यता - संशोधन 1 अक्टूबर 2010 से प्रभावी बना दिया गया है.
प्र.25. गैर जीवन बीमा कारोबार की आय के कराधान
आयकर अधिनियम की प्रथम अनुसूची के साथ पठित 25.1 धारा 44 बीमा कंपनियों की आय की गणना की योजना प्रदान करता है.उक्त अनुसूची के नियम 5 के अनुसार, गैर जीवन बीमा कारोबार की आय एक के रूप में लिया जाता है € ~ नियमों के अनुसार तैयार लाभ और कंपनी के लॉस अकाउंट के मुताबिक टैक्स और appropriationsâ € ™ से पहले लाभ, द्वारा बनाई गई कुछ समायोजन के अधीन बीमा नियामक विकास प्राधिकरण (आईआरडीए),.
25.2 वित्त (नं. 2) अधिनियम, 2009 गैर जीवन बीमा कारोबार की प्रशंसा या खातों में के लिए ऋण लिया निवेश की वसूली पर लाभ के मामले में है कि प्रदान की प्रथम अनुसूची में संशोधन आय के रूप में माना जाएगा और में शामिल किया कुल आय की गणना.
25.3 अचेतन लाभ की प्रकृति में किया जा रहा निवेश के मूल्य में वृद्धि आईआरडीए के नियमों के अनुसार गैर जीवन बीमा कारोबार का लाभ या हानि का निर्धारण करने के लिए खाते में नहीं लिया है.अधिनियम इसलिए निवेश के मूल्य में वृद्धि के कारण अचेतन लाभ कुल आय में शामिल नहीं किया जाएगा कि प्रदान करने के लिए संशोधन किया गया है. इसी तरह, कटौती इस एक एहसास नुकसान नहीं है के रूप में निवेश के मूल्य में कमी की वजह से नुकसान के लिए प्रावधान के लिए अनुमति नहीं दी जाएगी.
25.4 यह भी एक ही पहले से ही श्रेय या लाभ और हानि खाते में डेबिट नहीं है अगर निवेश की प्राप्ति पर कोई लाभ या हानि, कुल आय की गणना के प्रयोजन के लिए जोड़ा या काटा जाएगा कि उपलब्ध कराई गई है.
25.5 प्रयोज्यता - यह संशोधन 1 अप्रैल 2011 से प्रभावी होता है और, तदनुसार, आकलन वर्ष 2011-12 और बाद के वर्षों के संबंध में लागू होगा.
एनएन

