1/2007 : परिपत्र: सं 1/2007, 27-04-2007 दिनांकित
परिपत्र सं.
1/2007
परिपत्र की तिथि
27/04/2007
दस्तावेज़ अपलोड की तिथि
27/04/2007
परिपत्र सं. 1/2007, 27-4-2007 दिनांक
कराधान कानून (संशोधन) अधिनियम, 2006 - संशोधन पर व्याख्यात्मक नोट.
1 {0}{/0}{1}{/1}{2}{/2}{3}{/3}{4}{/4}{5}{/5} {6}परिचय{/6}
1.1 कराधान कानून (संशोधन) अधिनियम, 2006 के संसद द्वारा पारित रूप में (इसके बाद अधिनियम के रूप में), 13 जुलाई, 2006 को राष्ट्रपति की स्वीकृति प्राप्त की और 2006 के अधिनियम संख्या 29 के रूप में अधिनियमित किया गया है.इस परिपत्र आयकर अधिनियम, 1961 को इन संशोधनों से पहले मौजूदा प्रावधानों के संदर्भ में संशोधन की प्रकृति और प्रभाव बताते हैं.
प्र.20. अधिनियम द्वारा किए गए परिवर्तन.
2.1 अधिनियम वर्गों संशोधन किया गया है 2, 10, 12A, 35, 35AC, 35CCA, 40, 40A, 56, 80GGA, 139, 143, 155, 194, मैं, 194J, 246A, 275 और आयकर अधिनियम की 288B, 1961.
(3) टैक्स वसूली अधिकारी की शक्तियां और कार्य.
3.1 आयकर अधिनियम की धारा 2 के खंड (44) के मौजूदा प्रावधानों, 1961 एक टैक्स वसूली अधिकारी को लिखित रूप में सामान्य या विशेष आदेश द्वारा, मुख्य आयुक्त या आयुक्त द्वारा अधिकृत किया जा सकता है जो किसी भी आयकर अधिकारी का मतलब है कि प्रदान एक टैक्स वसूली अधिकारी की शक्तियों का प्रयोग करने के लिए.
वह मुख्य आयुक्त या आयुक्त द्वारा अधिकृत है को प्रदत्त या आवंटित कर रहे हैं, जो शक्तियों और कार्यों का निष्पादन करने के लिए लिखित रूप में सामान्य या विशेष आदेश द्वारा, एक कर वसूली अधिकारी सक्षम करने के लिए इतनी के रूप में 3.2 उक्त खंड के प्रावधानों में संशोधन किया गया है करने के लिए एक, आयकर अधिनियम के तहत अधिकारी का आकलन 1961 और जो निर्धारित किया जा सकता है.
3.3 यह संशोधन 13 जुलाई, 2006 से प्रभावी होता है.
[धारा 2]
(4) पूर्वोत्तर डेवलपमेंट फाइनेंस कॉर्पोरेशन लिमिटेड की आय की छूट.
वित्त अधिनियम, 1996 की 4.1 धारा 86 को 1995 में स्थापित पूर्वोत्तर डेवलपमेंट फाइनेंस कॉर्पोरेशन लिमिटेड को दस वर्ष की अवधि के लिए आयकर से छूट दी गई. यह छूट केवल निर्धारण वर्ष 2005-06 के लिए ऊपर इस प्रकार उपलब्ध था. छूट यह धीरे - धीरे चरणबद्ध तरीके से समाप्त कर दिया जाएगा, जिसके दौरान चार साल की अवधि के लिए आगे बढ़ा दिया गया है. इस प्रयोजन के लिए एक नया खंड (23BBF) के किसी भी आय के लिए आयकर से छूट के लिए प्रदान करने के लिए अधिनियम की धारा 10 में सम्मिलित किया गया है पूर्वोत्तर डेवलपमेंट फाइनेंस कॉर्पोरेशन लिमिटेड का गठन और कंपनी अधिनियम, 1956 के तहत पंजीकृत कंपनी जा रहा है.आय की छूट बाहर खंड (23BBF) चरणों के परन्तुक 2008 आकलन वर्ष के लिए आकलन वर्ष 2006-07 के लिए कर के लिए कुल आय का 20% का समावेश आकलन वर्ष 2007-08 के लिए 40%, 60% के साथ शुरुआत -09 आकलन वर्ष 2010-11 के लिए आकलन वर्ष 2009-10 और 100% के लिए 80%. इस धारा के तहत छूट पूरी तरह से आकलन वर्ष 2010-11 में चरणबद्ध तरीके से समाप्त कर दिया जाएगा और कोई छूट इस आकलन वर्ष और बाद में मूल्यांकन साल में उपलब्ध हो जाएगा.
4.2 प्रयोज्यता: निर्धारण वर्ष बाद 2006-07.
[धारा 3]
प्र.5. उप खंड (iv) और (v) धारा 10 (23 सी) के तहत जारी अधिसूचना के नवीकरण की आवश्यकता को हटाया.
धारा 10 (23 सी), उपखंड (चतुर्थ) या उपखंड (वी) ने कहा कि खंड के के मामले में केन्द्र सरकार द्वारा जारी किए गए किसी भी सूचना के लिए 5.1 आठवीं प्रावधान के तहत है, इस तरह के मूल्यांकन के लिए किसी भी एक समय, प्रभाव में अधिसूचना जारी की जाती है, जिस पर तारीख से पहले शुरू होने के एक आकलन वर्ष या साल सहित वर्ष या साल नहीं, तीन से अधिक मूल्यांकन साल,.
5.2 एक की जरूरत सूचनाओं की आवधिक नवीकरण की आवश्यकता के साथ बांटना महसूस की गई है. सूचनाओं की आवधिक नवीकरण की आवश्यकता उनके नवीकरण में देरी में जिसके परिणामस्वरूप गया है. तीन मूल्यांकन वर्षों के लिए effectivity के उपर्युक्त सीमा (उप - खंड के तहत केंद्र सरकार द्वारा जारी अधिसूचना के संबंध में लागू होगा कि प्रदान करने के रूप में इतनी देरी दूर करने के लिए, धारा 10 (23 सी) को आठवें प्रावधान में संशोधन किया गया है चतुर्थ) या उपखंड (वी) कराधान कानून (संशोधन) विधेयक, 2006 को राष्ट्रपति की स्वीकृति प्राप्त जिस तारीख से पहले.
5.3 कराधान कानून (संशोधन) विधेयक, 2006 2006/07/13 पर राष्ट्रपति की स्वीकृति प्राप्त की. इसलिए, ऊपर संशोधन के कारण कहा उपखंड के तहत केन्द्र सरकार द्वारा जारी किए गए किसी भी अधिसूचना (चतुर्थ) या उपखंड (वी), पर या 2006/07/13 के बाद वापस ले लिया जब तक मान्य होगा और पर कोई आवश्यकता नहीं होगी तीन साल के बाद उसी के नवीकरण की तलाश के लिए निर्धारिती का हिस्सा है.
5.4 प्रयोज्यता: जुलाई, 2006 को या 13 वीं के बाद जारी किए गए नोटिफिकेशन.
[धारा 3]
प्र.6. उप खंड के तहत (चतुर्थ) और (v) या उप खंड (vi) के तहत मंजूरी के लिए और धारा 10 (23 सी) के () के माध्यम से अधिसूचना जारी करने के लिए एक समय सीमा प्रदान करना.
धारा 10 के खंड (23 सी) के मौजूदा प्रावधानों के तहत 6.1, प्रथम प्रावधान के तहत किए गए आवेदन के संबंध में, उप खंड (iv) और (v) या अनुमोदन के अनुदान के लिए नीचे के तहत अधिसूचना जारी करने के लिए कोई समय सीमा नहीं है उप खंड (छह) और () के माध्यम से या इस तरह के आवेदन को खारिज एक आदेश पारित करने के लिए. Resultantly, आवेदन लंबे समय से लंबित रहते हैं.
एक समय सीमा के बाद से 6.2 आवेदनों के निस्तारण में तेजी लाने के लिए आवश्यक है, एक नया परन्तुक कहा अनुभाग के लिए सबसे पहले परंतुक के तहत एक आवेदन पर या तारीख के बाद किया जाता है जहां कि प्रदान करने के लिए धारा 10 (23 सी) में सम्मिलित किया गया है जिस पर कराधान कानून (संशोधन) विधेयक, 2006 () के माध्यम से राष्ट्रपति, उप - खंड (चतुर्थ) या उपखंड (वी) जारी किए गए या उपखंड (vi) या उपखंड के तहत अनुमोदन किया जाएगा के तहत हर अधिसूचना की स्वीकृति जाएगा प्राप्त करता है इस तरह के आवेदन प्राप्त हुआ था, जिसमें इस महीने के अंत से दी जा या आवेदन खारिज एक आदेश बारह महीने की अवधि के भीतर पारित हो जाएगा. राष्ट्रपति की स्वीकृति 2006/07/13 पर प्राप्त किया गया था.
6.3 प्रयोज्यता: जुलाई, 2006 को या 13 वीं के बाद आवेदन किया.
[धारा 3]
प्र.7. खाते हो रही है की आवश्यकता लेखापरीक्षित और फंड या ट्रस्ट या विश्वविद्यालय या खंड के अन्य शैक्षिक संस्था या अस्पताल या उप खंड में निर्दिष्ट (चतुर्थ), (वि), (vi) या () के माध्यम से अन्य चिकित्सा संस्था द्वारा ऑडिट रिपोर्ट प्रस्तुत धारा 10 के (23 सी).
धारा 10 (23 सी) के मौजूदा प्रावधानों के तहत 7.1, किसी भी फंड या ट्रस्ट या संस्था या किसी भी विश्वविद्यालय या अन्य शिक्षा संस्था या किसी भी अस्पताल या उप खंड (iv) में निर्दिष्ट अन्य चिकित्सा संस्था की ओर से कोई आवश्यकता नहीं है (वि), (vi) या आय की वापसी के साथ साथ लेखा परीक्षित लेखे प्रस्तुत करने के लिए धारा 10 (23 सी) के () के माध्यम से.
7.2 एक नया दसवें परंतुक प्रदान करता है जो धारा 10 (23 सी) में सम्मिलित किया गया है कि किसी भी संस्था की कुल आय उप खंड (चतुर्थ), (वि), (vi) में निर्दिष्ट और धारा 10 (23 सी के () के माध्यम से अगर नीचे दिये गये स्पष्टीकरण के रूप में परिभाषित), ने कहा कि उप खंड के प्रावधानों को लागू किए बिना, किसी भी पिछले वर्ष में कर के दायरे में नहीं अधिकतम राशि से अधिक है, यह अपने खातों एक एकाउंटेंट द्वारा उस वर्ष के संबंध में लेखापरीक्षित मिल जाएगा उप अनुभाग 288 और की धारा (2) प्रासंगिक निर्धारण वर्ष के लिए आय की वापसी के साथ साथ इस तरह के अंकेक्षण रिपोर्ट प्रस्तुत करेगा. रिपोर्ट निर्धारित प्रपत्र विधिवत हस्ताक्षर तथा सत्यापन मुनीम से और निर्धारित किया जा सकता है के रूप में इस तरह के ब्यौरे आगे की स्थापना में होना चाहिए. इस प्रयोजन के लिए फार्म सं 10BB अधिसूचना के अनुसार एसओ 1176 (ई) दिनांक 2006/07/25 अधिसूचित कर दिया गया है.
7.3 प्रयोज्यता: निर्धारण वर्ष बाद 2006-07.
[धारा 3]
8 एक धर्मार्थ या धार्मिक विश्वास या संस्था द्वारा खातों की ऑडिट के लिए सीमा की स्थापना.
धाराओं के तहत छूट का लाभ उठाने के लिए पूरी होने की शर्तों के 8.1 एक 11 और 12 अनुभाग 12A के खंड (ख) के मौजूदा प्रावधानों के तहत निहित के रूप में पिछले वर्ष के लिए ट्रस्ट या संस्था के खातों ट्रस्ट या संस्था की कुल आय तहत आय गणना के रूप में जो किसी भी मामले में लेखा परीक्षित किया जाना चाहिए था है आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 11 और धारा 12 के प्रावधानों को लागू किए बिना कि पिछले एक साल में पचास हजार रुपये से अधिक है और निर्धारित प्रपत्र में प्रासंगिक निर्धारण वर्ष के लिए आय की वापसी के साथ साथ इस तरह के ऑडिट की रिपोर्ट प्रस्तुत.
छूट की सीमा या किसी भी पिछले वर्ष में आय कर के दायरे में नहीं है जो अधिकतम राशि 8.2 समय - समय पर संशोधित किया जाता है. पिछले वर्ष में कुल आय नहीं है जो अधिकतम राशि से अधिक है, तो इसलिए, विश्वास या किसी भी पिछले एक साल में पचास हजार रुपए से अधिक संस्था की कुल आय के संबंध में उक्त शर्त खातों लेखा परीक्षा की हो रही है की आवश्यकता के लिए प्रदान करने के लिए संशोधन किया गया है आय कर के दायरे में.
8.3 प्रयोज्यता: निर्धारण वर्ष बाद 2006-07.
[धारा 4]
9 अनुमोदन धारा 35 के तहत दी जानी है, जिसके आधार पर दिशानिर्देश, ढंग और शर्तों (1) (ख) और धारा 35 (1) (ग).
9.1 पिछले कराधान कानून (संशोधन) अधिनियम, 2006 (2006 का No.29) द्वारा संशोधन करने, खंड (ख) और (ग) उप - धारा (1) के खंड 35 में से किसी भी दिशा निर्देशों या के लिए प्रदान नहीं किया करने के लिए प्रावधानों ढंग से या एक वैज्ञानिक रिसर्च एसोसिएशन, विश्वविद्यालय, कॉलेज या अन्य संस्था को केन्द्र सरकार की मंजूरी के अनुदान के संबंध में स्थिति. यह ऐसी संस्थाओं से अनुमोदन के लिए प्राप्त आवेदनों पर कार्रवाई में देरी के परिणामस्वरूप की गई थी. वहाँ था, इसलिए आवेदकों द्वारा पालन किया जाना करने के लिए एक कदम दर कदम तरीके के लिए उपलब्ध कराने के लिए एक की जरूरत है, उनके आवेदनों का व्यवहार किया जायेगा और जो के अधीन शर्तों अनुमोदन एक वैज्ञानिक अनुसंधान संघ को प्रदान किया गया था जिस तरीके खंड के अधीन (द्वितीय) उप - धारा (1) के खंड 35 का और एक विश्वविद्यालय, कॉलेज या (1) धारा 35 की उप - धारा की धारा के तहत अन्य संस्था (तीन) के लिए.
9.2 खंड के लिए मौजूदा प्रावधानों (द्वितीय) और खंड (ग) उप - धारा (1) के खंड 35 के, इसलिए, आवेदक वैज्ञानिक रिसर्च एसोसिएशन, विश्वविद्यालय, कॉलेज या अन्य संस्था में अनुमोदित किया जाएगा कि नीचे रखना करने के लिए संशोधन किया गया है के रूप में इस तरह की स्थितियों के लिए तरीके और इस विषय में दिशा निर्देशों के अनुसार निर्धारित किया जा सकता है. दिशा निर्देशों, (आवेदन प्रपत्र सहित) तरीके और शर्तों के बाद से ऐसा 1856 (ई) दिनांक 2006/10/30 असर अधिसूचना के अनुसार निर्धारित किया गया है.
अनुमोदन वापस ले लिया है एक वैज्ञानिक रिसर्च एसोसिएशन, विश्वविद्यालय, कॉलेज या अन्य संस्था को दी गई है यदि 9.3 इसके अलावा, कराधान कानून (संशोधन) अधिनियम, 2006 दाताओं के मामले में आय की गणना में कटौती इस बात का खंडन आकलन अधिकारी की संभावना परिकल्पना की गई है निर्धारित शर्तों को पूरा नहीं करने के लिए या दिशा निर्देशों का पालन नहीं करने के लिए. देखने में ऐसी संभावना को देखते हुए, एक विवरण (iii) खंड के बाद डाला गया है उपधारा (1) के कटौती जो एक निर्धारिती (यानी दाता) उसके द्वारा किसी भी राशि के भुगतान के कारण हकदार है कि स्पष्ट करने के लिए धारा 35 के एक वैज्ञानिक अनुसंधान संस्था या विश्वविद्यालय या कॉलेज या अन्य संस्था को, निर्धारिती द्वारा इस तरह की राशि का भुगतान करने के बाद, उक्त संस्थाओं में से किसी को दी गई मंजूरी वापस ले लिया है कि जमीन पर महज इनकार नहीं किया जा जाएगा.
9.4 (1) धारा 35 की उप - धारा को दूसरे परंतुक में प्रदर्शित होने अभिव्यक्ति "विहित प्राधिकारी" वित्त अधिनियम, 1999 के द्वारा अभिव्यक्ति "केन्द्र सरकार" द्वारा प्रतिस्थापित किया गया था. ऐसा करते समय कहा, दूसरे परंतुक के अंत में प्रदर्शित होने के शब्द "अधिकार" शब्द "सरकार" से प्रतिस्थापित किया जा करने के लिए याद किया गया था. कराधान कानून (संशोधन) अधिनियम, 2006, इस प्रकार कहा, दूसरे परंतुक में एक सुधारात्मक संशोधन भी किया गया है. शब्द "अधिकार" शब्द "सरकार" से प्रतिस्थापित किया गया है.
9.5 इसके अलावा, इस अधिनियम में तीन मूल्यांकन वर्षों के लिए एक अधिसूचना के effectivity की अवधि के बाहरी सीमा खंड के अधीन केन्द्रीय सरकार द्वारा जारी अधिसूचना के संबंध में लागू होगा कि उपलब्ध कराने के लिए तीसरे परंतुक संशोधन किया गया है (द्वितीय) या खंड (iii ) कराधान कानून (संशोधन) विधेयक, 2005 को राष्ट्रपति की स्वीकृति की तिथि से पहले. किसी भी संस्था को दी गई मंजूरी वापस ले लिया है जब तक Resultantly, स्वीकृति की तिथि को या उसके बाद जारी किए गए किसी भी अधिसूचना प्रवृत्त बने रहेंगे.
9.6 अधिनियम एक आवेदन के संबंध कराधान कानून (संशोधन) को मंजूरी की तारीख को या उसके बाद प्राप्त में है कि उपलब्ध कराने के चौथे प्रावधान डाला गया है विधेयक, हर खंड के अधीन अधिसूचना (द्वितीय) या खंड (iii) जारी किया जाएगा या एक आवेदन खारिज क्रम अनुमोदन के लिए आवेदन केन्द्र सरकार से प्राप्त की है, जिसमें इस महीने के अंत से बारह महीने की समाप्ति से पहले पारित हो जाएगा.
9.7 प्रयोज्यता: निर्धारण वर्ष बाद 2006-07.
[धारा 5]
10 धारा 35 (2AA) - अनुमोदन आदि राष्ट्रीय प्रयोगशाला, के मामले में (यानी दान लेने वाला) में वापस ले लिया जाता है तो वंचित होना नहीं (दाता) अर्थात् एक निर्धारिती के मामले में कटौती
10.1 अधिनियम एक नई व्याख्या की प्रविष्टि के कारण उसमें स्पष्टीकरण renumbering द्वारा धारा 35 की उप - धारा (2AA) संशोधन किया गया है. नई स्पष्टीकरण स्पष्टीकरण 1 और स्पष्टीकरण 2 के रूप में मौजूदा स्पष्टीकरण के रूप में गिने जा चुका है. इसलिए डाला स्पष्टीकरण 1 स्पष्ट किया कि एक निर्धारिती एक राष्ट्रीय प्रयोगशाला, विश्वविद्यालय, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान अथवा उक्त उप में निर्दिष्ट के रूप में अनुमोदित कार्यक्रम [के लिए एक निर्धारित व्यक्ति को उसके द्वारा किसी भी राशि के भुगतान के कारण हकदार है जो करने के लिए कटौती अनुभाग (2AA)] केवल उसके द्वारा इस तरह राशि के भुगतान के बाद, अनुमोदन उक्त संस्थाओं (यानी दान लेने वाला संस्थाओं) के किसी भी वापस ले लिया गया है के लिए दी गई कि जमीन पर निर्धारिती (यानी दाता) को इनकार नहीं किया जा जाएगा.
10.2 प्रयोज्यता: निर्धारण वर्ष बाद 2006-07.
[धारा 5]
प्र।11. धारा 35AC - (दाता) अर्थात् एक निर्धारिती अनुमोदन दान लेने वाला के मामले में वापस ले लिया जाता है तो वंचित होना नहीं होने की स्थिति में कटौती
11.1 अधिनियम की उपधारा के बाद एक विवरण की प्रविष्टि द्वारा आयकर, 1961 की धारा 35AC संशोधन किया गया है (2). इसलिए डाला स्पष्टीकरण एक निर्धारिती (यानी दाता) एक सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी या एक स्थानीय प्राधिकारी या किसी संस्था या संस्था को उसके द्वारा किसी भी राशि के भुगतान के कारण हकदार है जो करने के लिए कटौती निर्धारिती को इनकार नहीं किया जा होगा स्पष्ट किया केवल उसके द्वारा इस तरह की राशि का भुगतान करने के बाद, अनुमोदन ऐसी संस्था या संस्था वापस ले लिया गया है या अनुभाग 35AC में निर्दिष्ट पात्र परियोजना या स्कीम वापस ले लिया गया है को अधिसूचित अधिसूचना के लिए दी गई कि जमीन पर.
11.2 प्रयोज्यता: निर्धारण वर्ष बाद 2006-07.
[धारा 6]
प्र.12. धारा 35CCA - (दाता) अर्थात् एक निर्धारिती अनुमोदन दान लेने वाला के मामले में वापस ले लिया जाता है तो वंचित होना नहीं होने की स्थिति में कटौती
12.1 अधिनियम कहा अनुभाग के उप - धारा (2) के बाद एक विवरण की प्रविष्टि द्वारा आयकर की धारा 35CCA, 1961 में संशोधन किया गया है. इसलिए डाला स्पष्टीकरण एक निर्धारिती एक संघ या संस्था को उसके द्वारा किसी भी राशि के भुगतान के कारण हकदार है जो करने के लिए कटौती केवल जमीन पर निर्धारिती को इनकार नहीं किया जा होगा स्पष्ट किया कि उसे अनुमोदन के द्वारा इस तरह राशि के भुगतान के बाद जैसा भी मामला हो ग्रामीण विकास कार्यक्रम के लिए दी गई या, संघ या संस्था को वापस ले लिया गया है.
12.2 प्रयोज्यता: निर्धारण वर्ष बाद 2006-07.
[धारा 7]
प्र.13. टैक्स किराया और रॉयल्टी के भुगतान पर कटौती नहीं है अगर कटौती आय की गणना में अनुमति दी जाए नहीं - धारा 40 (ए) (आइए)
उपखंड (आइए) खंड 40, अध्याय XVII बी के प्रावधानों के तहत संदर्भित के रूप में, कर कटौती, या देय राशियों से कटौती के बाद कर का भुगतान करने के लिए विफलता, के खण्ड (क) के लिए के मौजूदा प्रावधानों के अनुसार 13.1 एक निवासी, ब्याज, कमीशन या दलाली, तकनीकी सेवाओं के लिए पेशेवर सेवाओं या फीस के लिए फीस, या एक निवासी ठेकेदार या दाता की आय की गणना में इस तरह के भुगतान की पाबंदी में उप ठेकेदार, परिणाम के लिए देय राशि के रूप में.
13.2 अधिनियम किराया और रॉयल्टी का भुगतान करने के लिए मौजूदा प्रावधानों का विस्तार करने के लिए खंड 40 के खण्ड (क) के उक्त उपखंड (आइए) में संशोधन किया है. उपखंड (आइए) तो संशोधन भी शब्दों की परिभाषा "किराए पर" और "रॉयल्टी" के लिए प्रदान करता है.
13.3 प्रयोज्यता: निर्धारण वर्ष बाद 2007-08.
कराधान कानून (संशोधन) के पारित होने के बाद प्राप्त कुछ अभ्यावेदन में 13.4, विधेयक, 2005 और 13 जुलाई, 2007 को बहां सहमति, आशंकाओं खंड 40 के प्रावधानों (क) (आइए) होगा ऊपर के रूप में संशोधन किया है कि व्यक्त किया गया निर्धारण वर्ष 2006-2007 (यानी वित्तीय वर्ष 2005-2006 में किए गए भुगतान के संबंध में) से प्रभावी अनुभाग 194-I के संशोधित प्रावधानों किराया और कर की कटौती करने के लिए संबंधित खंड 194J की उन पर स्रोत पर कर की कटौती से संबंधित है, जबकि व्यावसायिक या तकनीकी सेवाओं के लिए शुल्क (एक) (आइए) 13 जुलाई, 2006, और नहीं वर्ष 2006-07 के लिए आकलन वर्ष 2007-08 से संबंधित होगा, जो एक तारीख से प्रभावी खंड 40 में डाला गया था पर.यह कर वित्तीय वर्ष 2005-2006 के दौरान किराए पर या रॉयल्टी के भुगतान से कटौती नहीं की है, जिसमें किसी भी मामले में स्पष्ट है कि, इसलिए आवश्यक है, आय की गणना में कोई पाबंदी खंड के संशोधित प्रावधानों के संदर्भ में आवश्यक होगा 40 (क) (आइए). उपखंड के एक अध्ययन (आइए) यह स्पष्ट निषेध कर अध्याय XVII बी के तहत स्रोत पर कटौती योग्य है केवल जब आकर्षित किया है और यह कटौती की नहीं या सरकार के खाते में भुगतान नहीं किया है कि बनाता है. कर में संशोधन अनुभाग 194-I के प्रावधानों और 13 जुलाई, 2006 से अनुभाग 194J के तहत घटाया है, आकलन वर्ष 2007-2008 के एक पाबंदी की कटौती नहीं या में टैक्स जमा नहीं करने के लिए आकर्षित किया जाएगा होगा पहला प्रासंगिक निर्धारण वर्ष में जो खंड 40 के प्रावधानों की दृष्टि से (एक) (आइए).
[धारा 8]
प्र.14. व्यय या भुगतान नहीं कुछ निश्चित परिस्थितियों में घटाया - धारा 40A
(3) और उपधारा (4) अनुभाग 40A की उप - धारा में समाहित 14.1 मौजूदा प्रावधान है कि बीस प्रतिशत प्रदान करते हैं. बीस हजार रुपए से अधिक एक राशि में भुगतान नहीं तो एक क्रास चेक या रेखांकित बैंक ड्राफ्ट द्वारा की तुलना में, इस तरह के खर्च के खिलाफ किया जाता है अगर खर्च की कटौती के रूप में अनुमति नहीं दी जाएगी.
14.2 एक चेक को पार कर या बैंक ड्राफ्ट एक गैर परक्राम्य लिखत नहीं पार कर लिया है. इस समय में, यह मुश्किल अंतिम आदाता का पता लगाने और इस प्रकार अनुभाग 40A (3) के प्रावधानों को हराने के लिए बना समर्थन किया जा रहा पार कर जांच में हुई है. हालांकि, वाणिज्यिक बैंकों को आरबीआई के निर्देश, एक खाता पेयी चेक या खाते पेयी बैंक ड्राफ्ट के रूप में प्रति आदाता के खाते के अलावा अन्य किसी भी खाते में जमा नहीं किया जा सकता. अधिनियम तदनुसार (4) एक 'द्वारा, दोनों उप वर्गों में, अभिव्यक्ति' एक बैंक पर या रेखांकित बैंक ड्राफ्ट द्वारा तैयार की गई एक क्रास चेक 'स्थानापन्न aforementioned उप - धारा (3) और उपधारा संशोधन किया गया है खाता पेयी चेक को बैंक या खाता पेयी बैंक ड्राफ्ट 'पर तैयार की.
14.3 ये संशोधन 13 जुलाई, 2006 से प्रभावी.
[धारा 9]
प्र.15. (2) पैसे के किसी भी राशि के संबंध में धारा 56 की उप - धारा के खंड (वी) के प्रावधानों के युक्तिकरण विचार के बिना प्राप्त किया.
धारा 56 की उप - धारा के खंड के 15.1 मौजूदा प्रावधानों (वी) (2) पच्चीस हजार रुपए से अधिक पैसे के किसी भी राशि से किसी से 2004/01/09 पर या के बाद एक व्यक्ति या एक हिंदू अविभाजित परिवार द्वारा विचार किए बिना कि प्राप्त प्रदान व्यक्ति, सिर 'अन्य स्रोतों से आय' के तहत आय कर के दायरे में है. उक्त खंड के परन्तुक खंड लागू नहीं होता जो करने के लिए निम्नलिखित प्राप्तियों को सूचीबद्ध करता है:
(क) किसी भी रिश्तेदार से; या
(ख) व्यक्ति की शादी के अवसर पर; या
(ग) एक इच्छा के तहत या उत्तराधिकार के माध्यम से; या
(घ) दाता की मौत के चिंतन में.
15.2 अधिनियम खंड के aforementioned प्रावधानों (वी), निर्धारित राशि से अधिक पैसे के किसी भी राशि के संबंध में लागू होने पर या के बाद 2004/01/09 लेकिन 1.4.2006 से पहले प्राप्त करेगा कि प्रदान करता है.
15.3 अधिनियम भी खंड के प्रावधानों (वी) धारा 56 (2) के लिए लागू नहीं होगा, जो करने के लिए निम्नलिखित बहिष्करण के लिए उपलब्ध कराया गया है: -
धारा 10 के खंड (20) को स्पष्टीकरण के रूप में परिभाषित (मैं) पैसे की कोई राशि किसी भी स्थानीय प्राधिकरण से प्राप्त; या
(Ii) पैसे की कोई राशि किसी भी फंड या नींव या विश्वविद्यालय या अन्य शिक्षण संस्थान या अस्पताल या अन्य चिकित्सा संस्था या किसी ट्रस्ट या संस्था धारा 10 के खंड (23 सी) में निर्दिष्ट से प्राप्त; या
(Iii) पैसे के किसी भी राशि अनुभाग 12AA तहत पंजीकृत किसी ट्रस्ट या संस्था से प्राप्त किया.
15.4 aforementioned तीन बहिष्करण, अधिनियम के द्वारा प्रदत्त के रूप में, 13 जुलाई, 2006 से प्रभावी हो गया था.इन तीन बहिष्करण, तथापि, 1 अप्रैल, 2005 से प्रभावी बनाया जा करना था.वित्त विधेयक, 2007 के खंड 16, इसलिए, तीन बहिष्करण 1 अप्रैल, 2005 से प्रभावी डाला गया है करने के लिए समझा जाएगा प्रस्ताव.
15.5 इसके अलावा, एक नया खंड (vi) उप - धारा में सम्मिलित किया गया है (2) प्रदान करने के लिए धारा 56 की है कि पैसे की कोई राशि किसी भी व्यक्ति या से एक व्यक्ति या एक हिंदू अविभाजित परिवार द्वारा 1.4.2006 के बाद विचार के बिना प्राप्त कर रहा है, जहां व्यक्तियों और पिछले वर्ष के दौरान प्राप्त सभी ऐसी रकम का कुल मूल्य रुपये से अधिक है. 50,000 / -, ऐसी रकम का कुल मूल्य के पूरे सिर 'अन्य स्रोतों से आय' के तहत ऐसे व्यक्ति या हिंदू अविभाजित परिवार की कुल आय में शामिल किया जाएगा.
15.6 अधिनियम आगे खंड पैसे के किसी भी राशि के लिए लागू नहीं प्राप्त होगा प्रदान करता है कि -
(क) किसी भी रिश्तेदार से; या
(ख) व्यक्ति की शादी के अवसर पर; या
(ग) एक इच्छा के तहत या उत्तराधिकार के माध्यम से; या
दाता की मौत के चिंतन में (घ); या
(ई) धारा 10 के खंड (20) को स्पष्टीकरण के रूप में परिभाषित किसी भी स्थानीय प्राधिकारी से; या
(च) किसी भी फंड या नींव या विश्वविद्यालय या अन्य शिक्षण संस्थान या अस्पताल या अन्य चिकित्सा संस्था या धारा 10 के खंड (23 सी) में निर्दिष्ट किसी ट्रस्ट या संस्था से; या
खंड 12AA तहत पंजीकृत किसी ट्रस्ट या संस्था से (छ).
नया खंड (vi) के प्रयोजनों के लिए 15.7, शब्द "सापेक्ष" मतलब बहां स्पष्टीकरण में परिभाषित किया गया है -
-
व्यक्ति के पति या पत्नी;
-
भाई या व्यक्ति की बहन;
-
भाई या व्यक्ति के पति या पत्नी की बहन;
-
भाई या व्यक्ति के माता - पिता दोनों में से किसी की बहन;
-
किसी भी नज़दीकी लग्न या व्यक्ति के वंशज;
-
किसी भी नज़दीकी लग्न या व्यक्ति के पति या पत्नी के वंशज;
-
व्यक्ति के पति या पत्नी (छह) को खंड (ख) में निर्दिष्ट.
15.8 खंड 56 का नया खंड (vi) में शब्द "सापेक्ष" की परिभाषा (2) खंड में इसकी परिभाषा के समान है (वि).
15.9 प्रयोज्यता: निर्धारण वर्ष बाद 2007-08.
[धारा 10]
प्र.16. धारा 80GGA - (दाता) अर्थात् एक निर्धारिती अनुमोदन दान लेने वाला के मामले में वापस ले लिया जाता है तो वंचित होना नहीं होने की स्थिति में कटौती.
16.1 अधिनियम (क) खंड में कवर संस्थाओं और खंड (एए) के संबंध में खंड (एए) के बाद हर एक व्याख्या डालने आयकर अधिनियम की धारा 80GGA, 1961 में संशोधन किया गया है, खंड (ख) और खंड (बी बी) उप - धारा (2) के स्पष्ट करने के लिए कि एक निर्धारिती एक वैज्ञानिक रिसर्च एसोसिएशन, विश्वविद्यालय, कॉलेज या अन्य संस्था को या प्रोग्राम से बाहर ले जाने के लिए एक संघ या संस्था को उसके द्वारा भुगतान किसी भी राशि के संबंध में हकदार है जो करने के लिए कटौती ग्रामीण विकास, या एक सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी के लिए, या एक स्थानीय प्राधिकारी को या पात्र परियोजना या अनुभाग 35AC में निर्दिष्ट योजना से बाहर ले जाने के लिए एक संघ या संस्था के लिए, क्रमशः, जमीन पर महज इनकार नहीं किया जा सकेगा कि भुगतान करने के बाद जैसा भी मामला हो मंजूरी दी या निर्धारिती द्वारा इस तरह की राशि की अधिसूचना को वापस ले लिया गया है.
16.2 प्रयोज्यता: निर्धारण वर्ष बाद 2006-07.
[धारा 11]
प्र.17. एक विश्वविद्यालय, कॉलेज या अन्य संस्था के मामले में अनिवार्य आयकर रिटर्न के फर्नीचर - धारा 139
धारा 139 की उपधारा (4 सी) के खंड के 17.1 मौजूदा प्रावधानों (ई) हर फंड या संस्था उपखंड (चतुर्थ) या विश्वास या उपखंड (वी) या किसी भी विश्वविद्यालय में निर्दिष्ट संस्था में निर्दिष्ट है कि प्रदान या अन्य शिक्षण संस्थान धारा 10 के खंड (23 सी) के (के माध्यम से) उपखंड (vi) या किसी भी अस्पताल या उपखंड में निर्दिष्ट अन्य चिकित्सा संस्था में करने के लिए भेजा जाएगा, अगर ऐसी संस्थाएं हैं जिनके संबंध में कुल आय निर्धारणीय, धारा 10 के प्रावधानों को लागू किए बिना, आयकर करने, निर्धारित प्रपत्र में पिछले वर्ष की ऐसी आय का रिटर्न प्रस्तुत करने और निर्धारित तरीके से सत्यापित और आगे की स्थापना प्रभार्य नहीं है जो अधिकतम राशि से अधिक अन्य ऐसे जैसे ब्यौरे निर्धारित किया जा सकता है और यह उप - धारा के तहत सजा हो आवश्यक एक वापसी के रूप में अगर आयकर अधिनियम के सभी प्रावधानों को अब तक हो सकता है, के रूप में लागू नहीं होगी (1).
17.2 अधिनियम की धारा 139 की उपधारा (4 सी) के खंड के aforementioned प्रावधानों (ई) के दायरे का विस्तार जिससे किसी भी विश्वविद्यालय या में निर्दिष्ट अन्य शिक्षण संस्थान के उप - खंड (iiiad) और किसी भी अस्पताल या अन्य संस्था में करने के लिए भेजा उपखंड (iiiae) भी ऐसी संस्थाओं की धारा 10 के प्रावधानों को लागू किए बिना, निर्धारणीय हैं जिनके संबंध में कुल आय है, जो अधिकतम राशि से अधिक है, पिछले वर्ष के लिए अपनी आय का रिटर्न प्रस्तुत करने की आवश्यकता होगी निर्धारित प्रपत्र में, आयकर के दायरे में और निर्धारित तरीके से सत्यापित और ऐसे अन्य ब्यौरे आगे की स्थापना नहीं निर्धारित हो सकता है और अगर यह थे के रूप में आयकर अधिनियम के सभी प्रावधानों को अब तक हो सकता है, के रूप में लागू नहीं होगी उप - धारा के तहत सजा हो आवश्यक वापसी (1).
17.3 प्रयोज्यता: निर्धारण वर्ष बाद 2006-07.
17.4 एक विश्वविद्यालय, कॉलेज या अन्य संस्था ऐसी आय का रिटर्न प्रस्तुत करने की आवश्यकता हो ही नहीं सकता है. यह, हालांकि, संस्थाओं खंड के अधीन (द्वितीय) या खंड (ग) उप - धारा (1) के आयकर अधिनियम की धारा 35 के 1961 उनकी आय के रिटर्न प्रस्तुत करने के लिए आवश्यक होना चाहिए मंजूरी दे दी है कि निर्णय लिया गया है. खंड (ख) अधिनियम की धारा 12 के तदनुसार इस आवश्यकता के लिए प्रदान करता है और हर विश्वविद्यालय, कॉलेज या अन्य संस्था खंड (ख) में निर्दिष्ट और खंड (ग) उप - धारा (1) के खंड 35 का है कि नीचे देता है जो धारा 139 के किसी अन्य प्रावधान के तहत आय या नुकसान की अपनी वापसी प्रस्तुत करने की आवश्यकता नहीं है, हर पिछले वर्ष में अपनी आय या नुकसान के संबंध में और आयकर अधिनियम, 1961 के सभी प्रावधानों को लागू नहीं होगी कि अपनी वापसी प्रस्तुत करेगा यह (1) धारा 139 की उपधारा के तहत एक वापसी के रूप में अगर इस तरह की वापसी.
17.5 प्रयोज्यता: निर्धारण वर्ष बाद 2006-07.
[धारा 12]
प्र.18. धारा 143 - केन्द्र सरकार को अनुमोदन की वापसी के लिए अधिकारी मूल्यांकन की सिफारिश
18.1 अधिनियम के तहत खंड (द्वितीय) या खंड (ग) उप - धारा (क वैज्ञानिक रिसर्च एसोसिएशन, विश्वविद्यालय, कॉलेज या अन्य संस्था द्वारा किए गए एक आवेदन स्वीकृत किया जाएगा जो के अनुसार दिशा निर्देशों, तरीके और स्थितियों के लिए प्रदान करता है 1) आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 35 के. अधिनियम में यह भी खंड अनुमोदन इसे वापस लिया है जब तक सेना में रहने के लिए है, जिसका अर्थ है एक समय अनुमोदन के लिए उपलब्ध कराने के जो 35 में संशोधन किया गया है.
18.2 एक प्रावधान उप खंड में पहले परंतुक के बाद डाला गया है (3) विश्वविद्यालय की गतिविधियों के रूप में खुद को संतुष्ट करने के लिए मूल्यांकन अधिकारी की आवश्यकता के लिए धारा 143 का, कॉलेज या अन्य संस्था (द्वितीय) या खंड (खंड में निर्दिष्ट गतिविधियों ने कहा कि संस्थाओं के किसी भी अनुमोदित किया गया था अधीन जो करने के लिए शर्तों के सभी या किसी के साथ अनुसार किया जा रहा नहीं कर रहे हैं iii) उप - धारा (1) के खंड 35 के और, मूल्यांकन अधिकारी एक उचित दे सकता है के बाद चिंतित इकाई को कारण दिखाने का अवसर अनुमोदन की केन्द्र सरकार की सिफारिश वापसी के लिए एक प्रस्ताव भेजें. केन्द्र सरकार के आदेश से अनुमोदन वापस लेने और संबंधित विश्वविद्यालय, कॉलेज या अन्य संस्था को और मूल्यांकन अधिकारी को आदेश की एक प्रति भेज सकते हैं.
18.3 प्रयोज्यता: निर्धारण वर्ष बाद 2006-07.
[धारा 13]
प्र.19. परिवर्तनीय विदेशी मुद्रा के संबंध में कटौती की अनुमति के लिए मूल्यांकन अधिकारी सक्षम करने के लिए अनुभाग 155 का संशोधन प्राप्त या भारत में लाया जाता है.
अनुभाग 155 (13) के मौजूदा प्रावधानों के तहत 19.1, मूल्यांकन अधिकारी एक आकलन आदेश को सुधारने की शक्ति है जिसमें वर्गों 80HHB, 80HHC, 80HHD, 80HHE, 80R, 80 हे आदि विदेशी की राशि पर नहीं दी गई अनुमति के तहत कटौती भारत में परिवर्तनीय विदेशी मुद्रा में प्राप्त नहीं हुआ है, लेकिन बाद में प्राप्त या सक्षम प्राधिकारी के अनुमोदन से भारत में लाया जाता है जो विनिमय.
19.2 इसी तरह के प्रावधानों वर्गों 10A, 10 बी और 10BA के प्रावधानों के संबंध में उपलब्ध नहीं हैं. धारा 10 ए, 10 बी और 10BA भी विदेशी मुद्रा वित्तीय वर्ष की समाप्ति से छह महीने के भीतर या सक्षम प्राधिकारी द्वारा बढ़ाया जा सकता है के रूप में ऐसे समय के भीतर भारत में लाया जा सकता है प्रदान करते हैं. हालांकि, धारा 155 के मौजूदा प्रावधानों के तहत मूल्यांकन अधिकारी वर्गों 10A, 10B या 10BA के तहत कटौती भारत में परिवर्तनीय विदेशी मुद्रा में प्राप्त लेकिन नहीं किया गया है, जो विदेशी मुद्रा की राशि पर अनुमति नहीं दी है जिसमें उसका निर्धारण आदेश को सुधारने का अधिकार नहीं है बाद में सक्षम प्राधिकारी के अनुमोदन से प्राप्त या भारत में लाया गया है.
प्रदान करने के लिए इतनी के रूप में वर्गों 10A या 10B या 10BA, उप - धारा (11A) के तहत आदेश को सुधारने का निर्धारण अधिकारी को सक्षम करने की दृष्टि से 19.3 आयकर अधिनियम की धारा 155 में सम्मिलित किया गया है कि जहां किसी के लिए मूल्यांकन में वर्ष, धारा 10 ए या खंड 10 बी या अनुभाग 10BA के तहत कटौती ऐसी आय भारत में परिवर्तनीय विदेशी मुद्रा में प्राप्त नहीं हुआ है, या भारत के बाहर परिवर्तनीय विदेशी मुद्रा में प्राप्त कर रहा है, या में परिवर्तित किया गया हो रही है कि जमीन पर अनुमति नहीं किया गया है भारत के बाहर परिवर्तनीय विदेशी मुद्रा, द्वारा या भारतीय रिजर्व बैंक की मंजूरी या विनियमित करने भुगतान और व्यवहार के लिए तत्समय प्रवृत्त किसी विधि के अधीन अधिकृत है के रूप में इस तरह के अन्य प्राधिकारी के साथ निर्धारिती की ओर से भारत में लाया नहीं किया गया है विदेशी मुद्रा और बाद में ऐसी आय या हिस्से में तत्संबंधी कर दिया गया है या ढंग पूर्वोक्त में में प्राप्त की, या भारत में लाया जाता है धारा 10 ए या खंड 10 बी या अनुभाग 10BA के तहत कटौती की अनुमति के रूप में तो, मूल्यांकन अधिकारी मूल्यांकन के क्रम में संशोधन होगा जैसा भी मामला हो, उसके लिए इस तरह आय या भाग के संबंध में इतने में प्राप्त होता है, या भारत में लाया. धारा 154 के प्रावधानों, जहां तक हो सके, बहां लागू नहीं होगी, और चार साल की अवधि में इस तरह के आय इतने में मिली है, या भारत में लाया जाता है, जिसमें पिछले साल के अंत से गणना की जाएगी.
19.4 यह संशोधन जुलाई, 2006 13 वीं से प्रभावी होता है.
[धारा 14]
प्र.20. अनुभाग 194-I के तहत किराए पर स्रोत पर कर कटौती के दायरे का विस्तार
अनुभाग 194-मैं में निहित मौजूदा प्रावधानों के तहत 20.1, कर किराए के भुगतान पर स्रोत पर कटौती करने की आवश्यकता है. शब्द "किराए पर" एक साथ फर्नीचर, फिटिंग और ऐसी इमारत के स्वामित्व में है या नहीं, इस के सिवा संबंधित भूमि के साथ (कारखाने के निर्माण सहित) किसी भी इमारत के इस्तेमाल के लिए भुगतान का मतलब है, अन्य बातों के साथ करने के लिए कहा अनुभाग के स्पष्टीकरण में परिभाषित किया गया है पेयी.
20.2 अधिनियम कहा धारा के प्रावधानों आइटम अलग या संयुक्त रूप से किराए पर लिया है कि क्या लागू कर रहे हैं कि उपलब्ध कराने के लिए खंड 194-मैं करने के लिए स्पष्टीकरण में "किराया" की मौजूदा परिभाषा में संशोधन किया गया है. अधिनियम में यह भी अनुभाग 194-I के तहत स्रोत पर कर की कटौती के प्रयोजनों के लिए मशीनरी, संयंत्र और उपकरणों के शामिल किए जाने से आइटम की सूची का विस्तार.
20.3 यह संशोधन जुलाई, 2006 13 वीं से प्रभावी होता है.
20.4 विधेयक के पारित होने और 13 वें पर जुलाई, 2006, कई अभ्यावेदन फीसदी बीस पर स्रोत पर कर कटौती की दर मशीनरी, संयंत्र या के काम पर रखने से प्राप्त किराए के लिए बहुत अधिक थी कि प्रभाव के लिए प्राप्त हुए थे बहां सहमति के बाद उपकरण.ऐसे अभ्यावेदन की परीक्षा के बाद, दस फीसदी की दर से. किसी मशीनरी या संयंत्र या उपकरण के उपयोग के लिए किराए पर लेने के संबंध में टीडीएस की दर के रूप में, 1 जून, 2007 से प्रभावी वित्त विधेयक, 2007 में प्रस्ताव रखा गया है.
[धारा 15]
प्र.21. खंड 194J के तहत व्यावसायिक या तकनीकी सेवाओं के लिए शुल्क पर स्रोत पर कर कटौती के दायरे का विस्तार.
(1) अनुभाग 194J की उप - धारा में समाहित मौजूदा प्रावधानों के तहत 21.1, कर तकनीकी सेवाओं के लिए पेशेवर सेवाओं या फीस के लिए फीस के माध्यम से बीस हजार रुपए से अधिक एक निवासी के लिए एक योग के किसी भी भुगतान पर स्रोत पर कटौती करने की आवश्यकता है पांच फीसदी की दर से. ऐसे योग की.
21.2 अधिनियम (1) "रॉयल्टी" के भुगतान और इस तरह के भुगतान के लिए कहा उपधारा के प्रावधानों की प्रयोज्यता के लिए "धारा 28 के खंड में निर्दिष्ट किसी राशि (VA)" शामिल करने के लिए aforementioned उप - धारा में संशोधन किया है. शब्द "रॉयल्टी" संशोधन खंड के स्पष्टीकरण में परिभाषित किया गया है और उप - धारा (1) के धारा 9 के खंड (vi) को स्पष्टीकरण 2 के रूप में एक ही अर्थ होगा. दोनों के भुगतान पर कर की कटौती के लिए सीमा बीस हजार रुपये पर बरकरार रखा गया है.
21.3 यह संशोधन जुलाई, 2006 13 वीं से प्रभावी होता है.
[धारा 16]
प्र.22. दंड लगाने के लिए सीमा की पट्टी के बारे में अनुभाग 275 के प्रावधानों को युक्तिसंगत.
खंड 275 की उपधारा 22.1 मौजूदा प्रावधानों (1) के तहत के रूप में आयकर अधिनियम के अध्याय XXI, 1961, के तहत दंड अधिरोपित करने के लिए समय सीमा प्रदान करते हैं: -
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प्रासंगिक मूल्यांकन या अन्य आदेश खंड 246 या धारा 246A या अनुभाग 253 के तहत अपीलीय न्यायाधिकरण में अपील के तहत आयुक्त (अपील) के समक्ष अपील की विषय वस्तु है, जहां एक मामले में, एक दंड अधिरोपित करने के लिए एक आदेश के बाद पारित नहीं की जाएगी कार्यवाही, जो बेशक में जुर्माना लगाने के लिए कार्रवाई शुरू की गई है, जिसमें वित्तीय वर्ष की समाप्ति, पूरा, या छह महीने के महीने के अंत से कर रहे हैं जिसमें रूप आयुक्त (अपील) या, के आदेश मामले, अपीलीय न्यायाधिकरण बाद में समाप्त हो रहा है, जो भी इस अवधि के मुख्य आयुक्त या आयुक्त द्वारा प्राप्त किया जा सकता है. हालांकि, इस सीमा के आयुक्त (अपील) 1 जून, उसे करने के लिए बनाई गई अपील के 2003 के निपटान से पहले यह आदेश जारी किया तभी मिलती है;
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प्रासंगिक मूल्यांकन या अन्य आदेश खंड 246 या धारा 246A, और आयुक्त (अपील) के तहत आयुक्त (अपील) के समक्ष अपील की विषय वस्तु है, जहां एक मामले में 1 जून, 2003 को या उसके बाद क्रम ऐसी अपील के निपटान गुजरता , दंड अधिरोपित एक आदेश कार्यवाही, जुर्माना लगाने के लिए जो कार्रवाई के दौरान शुरू की गई है, जिसमें वित्तीय वर्ष की समाप्ति से पहले पारित हो जाएगा, वित्तीय वर्ष के अंत से पूरा हो, या एक वर्ष के भीतर कर रहे हैं जिसमें आयुक्त (अपील) के आदेश मुख्य आयुक्त या जो भी बाद में आयुक्त द्वारा प्राप्त होता है;
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प्रासंगिक मूल्यांकन या अन्य आदेश संशोधन के ऐसे आदेश पारित कर दिया है, जिसमें इस महीने के अंत से छह महीने की समाप्ति के बाद, धारा 263 या धारा 264 के तहत संशोधन का विषय है, जहां एक मामले में;
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किसी भी अन्य मामले में, कार्यवाही, जो बेशक में जुर्माना लगाने के लिए कार्रवाई शुरू की गई है, जिसमें वित्तीय वर्ष की समाप्ति के बाद, पूरा कर रहे हैं, या महीने के अंत से छह महीने के लगाने के लिए जो कार्रवाई में जुर्माना बाद में समाप्त हो रहा है, जो भी अवधि, शुरू की है.
(जुर्माना या आयुक्त द्वारा मूल्यांकन के बाद संशोधन के आधार पर, जुर्माना लगाने के लिए कार्यवाही छोड़ने के लगाने के लिए एक आदेश में संशोधन की सुविधा के लिए के रूप में तो 22.2 अनुभाग 275 में एक नई उपधारा (1 ए) सम्मिलित किया गया है अपील) या अपीलीय न्यायाधिकरण या उच्च न्यायालय या उच्चतम न्यायालय या खंड 263 या आयुक्त द्वारा अनुभाग 264 के तहत. यह एक मामले में जहां प्रासंगिक मूल्यांकन या अन्य आदेश खंड 246 या धारा 246A या अनुभाग के तहत अपीलीय न्यायाधिकरण में अपील के तहत आयुक्त (अपील) के समक्ष अपील की विषय वस्तु ने कहा है कि उप - धारा में प्रदान की गई है 253 या धारा 260A या खंड 263 या धारा 264 और एक आदेश लगाने या बढ़ाने या दंड को कम करने या जुर्माना लगाने के लिए कार्यवाही छोड़ने के तहत खंड 261 या संशोधन के तहत सुप्रीम कोर्ट में एक अपील के तहत उच्च न्यायालय में अपील से पहले पारित हो जाता है आयुक्त (अपील) या, अपीलीय न्यायाधिकरण या उच्च न्यायालय या उच्चतम न्यायालय के आदेश के मुख्य आयुक्त या आयुक्त, या खंड 263 या 264 के तहत संशोधन का आदेश पारित कर दिया है, एक आदेश थोप या द्वारा प्राप्त होता है आयुक्त (अपील) या, अपीलीय न्यायाधिकरण या उच्च न्यायालय या उच्चतम न्यायालय के इस तरह के आदेश को प्रभावी करने के द्वारा संशोधित रूप को बढ़ाने या दंड को कम करने या जुर्माना लगाने के लिए कार्यवाही छोड़ने मूल्यांकन के आधार पर पारित किया जा सकता है या खंड 263 या 264 के तहत संशोधन का आदेश. इस उपधारा के तहत एक संशोधन आदेश फिर से इस उपधारा के तहत संशोधित किया जा सकता है.
कहा उपधारा (1 ए) के लिए सबसे पहले परंतुक में 22.3, यह कोई आदेश लगाने या बढ़ाने या कम करने या रद्द करने की सजा या के तहत कार्यवाही छोड़ने उपधारा निर्धारिती सुनवाई या उसे एक देने के बिना पारित किया जाएगा ने कहा है कि प्रदान की गई है सुना है, और किया जा रहा है की उचित अवसर आयुक्त (अपील) या, अपीलीय न्यायाधिकरण या उच्च न्यायालय या उच्चतम न्यायालय के आदेश के मुख्य आयुक्त द्वारा प्राप्त की है, जिसमें इस महीने के अंत से छह महीने की समाप्ति के बाद या आयुक्त, या खंड 263 या धारा 264 के तहत संशोधन का आदेश पारित कर दिया है.
कहा उपधारा (1 ए) के बाद दूसरे परंतुक में 22.4, यह धारा 274 के प्रावधानों के इस उप - धारा के तहत लगाने या जुर्माना बढ़ाने या कम करने के आदेश के संबंध में आवेदन करना होगा कि व्यवस्था की गई है.
22.5 इसके अलावा, एक खंड (जावेद) (1) आयकर अधिनियम की धारा 246A, 1961 की उप - धारा में सम्मिलित किया गया है ताकि जुर्माना लगाने या बढ़ाने के एक आदेश के खिलाफ आयुक्त (अपील) के लिए एक अपील के लिए प्रदान करने के लिए खंड 275 की उप - धारा (1 ए) के तहत.
22.6 ये संशोधन 13 जुलाई, 2006 से प्रभावी.
[धारा 17 और 18]
प्र 23 आदि कर, के बंद गोलाई
आयकर अधिनियम की धारा 288B के 23.1 मौजूदा प्रावधानों, 1961 प्रदान कि (स्रोत या अग्रिम में देय पर कर छूट सहित) कर की राशि, ब्याज, दंड, जुर्माना या किसी भी अन्य राशि देय, और कारण धन वापसी की राशि आयकर अधिनियम के प्रावधानों के तहत, निकटतम रुपया को राउंड ऑफ किया जाएगा.
23.2 कहा अनुभाग देय किसी भी राशि, और कारण धन वापसी की राशि, आयकर अधिनियम, 1961 के प्रावधानों के तहत दस रुपए के निकटतम गुणज तक और इस के लिए गोल किया जाएगा कि उपलब्ध कराने के लिए एक नया अनुभाग द्वारा प्रतिस्थापित किया गया है उद्देश्य पैसे से मिलकर एक रुपया के किसी भी हिस्से पर ध्यान नहीं दिया जा जाएगा और इस तरह की राशि दस में से किसी एक से अधिक नहीं है, तो उस राशि में पिछले आंकड़ा पांच या उससे अधिक है, तो उसके बाद, फिर, वह राशि है जो अगले उच्च राशि की वृद्धि की जाएगी पिछले आंकड़ा पांच से कम है तो दस में से किसी एक से अधिक और, राशि दस में से किसी एक से अधिक है जो अगले कम राशि घटा दी जायेगी.
23.3 यह संशोधन जुलाई, 2006 13 वीं से प्रभावी होता है.
[धारा 19]

