आयकर विभाग

वित्त मंत्रालय, भारत सरकार

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परिपत्र सं.

07/2012

परिपत्र की तिथि

21/09/2012

दस्तावेज़ अपलोड की तिथि

21/09/2012

परिपत्र सं. 07/2012, 21-09-2012 दिनांक

आयकर अधिनियम की धारा 194LC, 1961 - भारतीय कंपनी से ब्याज के रूप में आय - ऋण समझौतों / दीर्घकालिक इन्फ्रास्ट्रक्चर बॉन्ड और धारा 194LC के प्रयोजन के लिए ब्याज की दर का अनुमोदन

परिपत्र सं. 7/2012 [F.No. 142/17/2012-SO (टीपीएल)], 21-9-2012 दिनांकित

वित्त अधिनियम, 2012 आयकर अधिनियम में अनुभाग 194LC शुरू की है. यह खंड भारत के बाहर एक स्रोत से ऐसी कंपनियों द्वारा विदेशी मुद्रा में किए गए कर्ज पर भारतीय कंपनियों द्वारा ब्याज भुगतान पर 5% की दर से कम रोक कर का प्रावधान है. केन्द्र सरकार के अनुमोदन के अधीन कवर कर रहे हैं (जो कहा अनुभाग में "उधार पैसा" के रूप में संदर्भित) उधार के दो मोड, मुख्यतः कर रहे हैं:

  क  एक ऋण समझौते के तहत उधार पैसा

  ख.  लंबी अवधि के इंफ्रास्ट्रक्चर बांड

प्र.20. इसे आगे भी केन्द्र सरकार द्वारा अनुमोदित के रूप में खंड 194LC के तहत पात्रता के उद्देश्य के लिए इस तरह के कर्ज पर ब्याज की दर, हो जाएगा कि प्रदान की जाती है.

(3) रोक कर की कम दर उधार पैसा या 2012/01/07 से 30-6-2015 तक की अवधि के दौरान जारी किए गए बांड के लिए है.

(4) इसलिए, केन्द्र सरकार के अनुमोदन के ऋण समझौते या बांड जारी है और इस तरह के कर्ज पर भुगतान किया जाना ब्याज की दर दोनों के संबंध में आवश्यक है.

प्र.5. प्रत्येक और हर विशिष्ट मामले में अनुमोदन से जुड़े एक तंत्र प्रदान करने, भारतीय कंपनियों द्वारा किए जा विदेशी उधारी या बंधन मुद्दों के मामलों की एक बड़ी संख्या के लिए किया जाएगा कि इस तथ्य को ध्यान में रखते बांड की उधारकर्ता / जारीकर्ता पर परिहार्य अनुपालन बोझ पड़ेगा. एतद्द्वारा ऋण समझौतों का सम्मान करते हैं और लंबी अवधि के बुनियादी ढांचे अवधि के अंक में खंड 194LC के प्रयोजनों के लिए केन्द्र सरकार की मंजूरी बता देते [केन्द्र सरकार के अनुमोदन के साथ] अनुपालन बोझ और कठिनाई, केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड कम करने के लिए पारस ए, बी और सी नीचे में वर्णित शर्तों को पूरा करना है, जो भारतीय कंपनियों द्वारा बांड: -

ऋण के लिए समझौतों के संबंध में ए

  क  पैसे का उधार एक ऋण समझौते के तहत होना चाहिए.

  ख.  भारतीय कंपनी द्वारा ऋण समझौते के तहत उधार पैसा उप खंड के खंड (घ) के साथ पालन करना चाहिए (3) विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम, अधिसूचना संख्या FEMA3/2000-RB अर्थात के साथ 1999 पढ़ने की धारा 6 की. समय - समय पर यथासंशोधित विदेशी मुद्रा प्रबंधन (उधार लेने या विदेशी मुद्रा में उधार) विनियम 2000, 3 मई 2000 दिनांक, स्वचालित मार्ग के तहत या अनुमोदन मार्ग के तहत या तो, (इसके बाद "ईसीबी नियमों" के रूप में करने के लिए कहा गया है).

  ग.  उधार कंपनी समझौते के संबंध में भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) द्वारा जारी एक ऋण पंजीकरण संख्या (LRN) प्राप्त किया जाना चाहिए.

  घ.  उधार का कोई हिस्सा 1 जुलाई 2012 से पहले कहा समझौते के तहत जगह ले ली है.

  ङ.  समझौते केवल कम विदहोल्डिंग कर की दरों का लाभ लेने के लिए विदेशी मुद्रा में उधार लेने के लिए एक मौजूदा समझौते के पुनर्गठन नहीं होना चाहिए.

  छ.  ईसीबी नियमों के तहत भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा निर्धारित राशि के रूप में और अन्य शर्तों के अंतिम उपयोग उधार बनाया गया है जिसके तहत ऋण समझौते की पूरी अवधि के दौरान पालन किया जाना चाहिए.

बांड के मुद्दे के संबंध में बी

  क  भारतीय कंपनी द्वारा बांड जारी स्वचालित मार्ग के तहत या अनुमोदन मार्ग के तहत या तो ईसीबी नियमों के तहत अधिकृत किया जाना चाहिए.

  ख.  बांड जारी भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा जारी किए गए एक ऋण पंजीकरण संख्या होनी चाहिए.

  ग.  शब्द "दीर्घकालिक" जारी किए जाने वाले बॉन्ड तीन साल या उससे अधिक की मूल परिपक्वता अवधि होना चाहिए कि इसका मतलब है.

  घ.  बांड जारी आय "बुनियादी ढांचा क्षेत्र" केवल उपयोग किया जाना चाहिए.

  ङ.  शब्द "बुनियादी ढांचा क्षेत्र" ईसीबी नियमों के तहत भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा इसे करने के लिए सौंपा है के रूप में एक ही अर्थ होगा.

ब्याज की सी. दर

इसके अलावा, केन्द्र सरकार भी ऋण समझौते से या के माध्यम से उधार लेने के लिए लागू है के रूप में ईसीबी नियमों के तहत भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा निर्दिष्ट सभी में लागत छत के भीतर है, जो ब्याज के किसी भी दर के रूप में खंड 194LC के प्रयोजन के लिए ब्याज दर को मंजूरी दी है मामले के रूप में एक बांड जारी, उसके कार्यकाल को ध्यान में रखते हुए, हो सकता है.

प्र.6. खंड 194LC के प्रयोजनों के लिए केन्द्र सरकार द्वारा अनुमोदित के रूप में ऊपर के दृश्य में, ऊपर शर्तों को संतुष्ट करता है, जो किसी भी ऋण समझौते या बांड जारी, इलाज किया जाएगा.

प्र.7.        भारतीय कंपनी विदेशी मुद्रा में इस तरह के बांड की सदस्यता प्राप्त करता है और इस तरह के बांड जारी अनुभाग 194LC के प्रयोजन के लिए, ईसीबी नियमों के तहत मंजूरी नहीं शामिल किया गया है, जहां अन्य लंबी अवधि के इंफ्रास्ट्रक्चर बांड के मामले में मामले के आधार पर मामले पर होगी.

8 भारतीय कंपनी के लंबी अवधि के बांड जारी के संबंध में आवश्यक अनुमोदन यू / एस 194LC प्राप्त करने के प्रयोजन के लिए, इसलिए, के प्रासंगिक विवरण के साथ सदस्य (आईटी), केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड को लिखित में आवेदन कर सकते हैं उद्देश्य, अवधि और ब्याज की दर.

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