आयकर विभाग

वित्त मंत्रालय, भारत सरकार

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परिपत्र सं.

02/2012

परिपत्र की तिथि

22/05/2012

दस्तावेज़ अपलोड की तिथि

22/05/2012

परिपत्र सं. 02/2012, 22-5-2012 दिनांक

वित्त अधिनियम, 2011 - व्याख्यात्मक 2011, वित्त अधिनियम के उपबंधों के नोट

परिपत्र सं 02/2012 [एफ No.142/01/2012-SO (टीपीएल)], 22-5-2012 दिनांकित

व्याख्यात्मक 2011, वित्त अधिनियम के उपबंधों के नोट

एक नजर में संशोधन

धारा / अनुसूची ब्योरे / अनुच्छेद संख्या
  वित्त अधिनियम, 2011
प्रथम अनुसूची दर संरचना, 3.1 - 3.3.6
  1961 आयकर अधिनियम
2 (15) "धर्मार्थ उद्देश्य 'की परिभाषा 4.1-4.4
10 (45) 5.3 - संघ लोक सेवा आयोग द्वारा 5.1 के अध्यक्ष और सदस्यों के कुछ अनुलाभ की छूट
10 (46), 139 (4C) (जी) कुछ निकायों या अधिकारियों या ट्रस्ट या बोर्ड या आयोग के एक निर्धारित आय की छूट से संबंधित प्रावधान 6.1-6.2
10 (47), 139 (4C) (एच), 115A, 194LB इंफ्रास्ट्रक्चर डेट फंड 7.1-7.4
35 (2AA) 8.3 - अनुमोदित वैज्ञानिक अनुसंधान कार्यक्रम 8.1 के लिए किए गए योगदान के लिए भारित कटौती
35AD 9.3 - निर्दिष्ट व्यापार 9.1.1 के सम्मान में निवेश से जुड़े कटौती
80CCE, 36 (1), 40A (9) 10.6 - नई पेंशन प्रणाली (एनपीएस) 10.1 के लिए कर लाभ
80CCF 11.3 - लंबी अवधि के इन्फ्रास्ट्रक्चर बॉन्ड 11.1 में निवेश के लिए कटौती
80-IA (4) (चतुर्थ) 12.3 - बिजली क्षेत्र 12.1 के लिए कर अवकाश के लिए सूर्यास्त खंड का विस्तार
80 आईबी (9) खनिज तेल 13.1 के वाणिज्यिक उत्पादन में लगे हुए उपक्रमों से लाभ और लाभ के संबंध में कटौती - 13.5
92C, 92CA, 92CA (7), 139 14.3.2 - मूल्य निर्धारण 14.1 स्थानांतरण से संबंधित प्रावधान के युक्तिकरण
94a 15.2 - एक गैर सहकारी क्षेत्राधिकार 15.1 में स्थित लोगों के साथ लेनदेन के संबंध में काउंटर उपायों के टूल बॉक्स
115BBD एक कम दर 16.1-16.3 पर कुछ विदेशी लाभांश का कराधान
115R (2) यूनिट धारकों को वितरित आय पर कर 17.1-17.3
115JB न्यूनतम वैकल्पिक कर 18.1.1 - 18.2.5
115JB (6), 115-0 (6), 10 (34) न्यूनतम वैकल्पिक कर (मैट) से संबंधित प्रावधानों और विशेष आर्थिक क्षेत्रों 19.1.1 -19.3.2 के मामले में लाभांश वितरण कर (डीडीटी)
115JC, 115JD, 115JE, 115JF कुछ सीमित दायित्व भागीदारी 20.1 -20.7 लिए वैकल्पिक न्यूनतम टैक्स
131,133 अनुरोधों के बारे में जानकारी का संग्रह इंडिया 21.1 -21.5 बाहर कर अधिकारियों से प्राप्त
139, 296 आय 22.1 -22.5 की वापसी प्रस्तुत से लोगों के एक वर्ग या वर्गों के लिए छूट
143 रिटर्न 23.1 -23.3 की सेंट्रलाइज्ड प्रोसेसिंग
153,153 बी जानकारी 24.1 के आदान प्रदान के मामले में मूल्यांकन के लिए समय सीमा का विस्तार - 24.5
245C (1) समझौता आयोग 25.1 से पहले एक आवेदन दाखिल करने के लिए शर्त में संशोधन - 25.6
245D (4) 26.6 - अपने आदेश 26.1 सुधारने का निपटारा आयोग की पावर
282B दस्तावेज पहचान संख्या 27.1-27.3 के हवाले से की आवश्यकता की चूक
285 28.3 - कुछ गैर निवासियों 28.1 से रिपोर्टिंग आवश्यकता
चौथी अनुसूची 29.3 - भविष्य निधि को मान्यता - ईपीएफओ 29.1.1 से छूट प्राप्त करने के लिए समय सीमा का विस्तार
  1957 संपत्ति कर अधिनियम
22d मामलों के निपटारे के लिए एक आवेदन प्राप्त होने पर प्रक्रिया 26.5
  विशेष आर्थिक क्षेत्र अधिनियम, 2005
दूसरी अनुसूची आयकर अधिनियम में संशोधनों 19.2.2 - 19.3.2

1 परिचय

1.1 वित्त अधिनियम, 2011 संसद द्वारा पारित रूप में (इसके बाद अधिनियम के रूप में), अप्रैल, 2011 के 8 वें दिन पर राष्ट्रपति की स्वीकृति प्राप्त की और 2011 के अधिनियम संख्या 08 के रूप में अधिनियमित किया गया है. इस परिपत्र प्रत्यक्ष करों से संबंधित अधिनियम के प्रावधानों के पदार्थ बताते हैं.

प्र.20. अधिनियम द्वारा किए गए बदलाव

2.1 साधने की है,

(मैं) निर्धारण वर्ष 2011-12 के लिए आयकर की दरें और स्रोत पर कर की कटौती की और अग्रिम कर वित्तीय वर्ष 2011 -12 के दौरान भुगतान किया जाना है किया जाना है, जिसके आधार पर आयकर की दरों में निर्दिष्ट.

(Ii) धारा 2 (15), 10 (34), 35 (2AA), 35AD, 36, 40A संशोधन (9), 80CCE, 80CCF, 80-IA (4) (चतुर्थ). 80 आईबी, 92C, 92CA, मैं ईसा, 115JB (1), 115JB (6), 115-0 (6), 115R (2), 131, 133, 139, 143, 153, 153B, 245C (1), 245D, आयकर अधिनियम में 296, 1961;

(Iii) नए वर्गों / खंड 10 (45), 10 (46) डाला, 10 (47), 94a, 115BBD, 139 (1 सी), 139 (4C) (जी), 139 (4C) (एच), 194LB, आयकर अधिनियम में 285, 1961;

(Iv) वर्गों आयकर अधिनियम में 115JC, 115JD, 115JE, 115JF, 1961 से मिलकर एक नया अध्याय बारहवीं बीए डाला;

(V) आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 282B छोड़े गए;

(Vi) आयकर अधिनियम की चौथी अनुसूची, 1961 के भाग एक के संशोधित नियम 3;

(सात) संपत्ति कर अधिनियम, 1957 के संशोधित अनुभाग 22d;

(आठ) विशेष आर्थिक क्षेत्र अधिनियम, 2005 के दूसरी अनुसूची में संशोधन.

(3) दर - संरचना

निर्धारण वर्ष 2011-12 के लिए कर के लिए उत्तरदायी आय के संबंध में आयकर का 3.1 दरें

निर्धारण वर्ष 2011-12 के लिए कर के लिए उत्तरदायी करदाताओं की सभी श्रेणियों की आय के संबंध में 3.1.1, आयकर की दरों में वित्त अधिनियम, 2011 की प्रथम अनुसूची के भाग 1 में निर्दिष्ट किया गया है. इन दरों वित्तीय वर्ष के दौरान कुछ मामलों में देय वेतन और कर का चार्ज से स्रोत पर अग्रिम कर, कर की कटौती की गणना के प्रयोजनों के लिए वित्त अधिनियम, 2010 की प्रथम अनुसूची के भाग III में निर्धारित उन के रूप में वही कर रहे हैं 2010-11.

मैं के रूप में कर रहे हैं ने कहा कि भाग में निर्दिष्ट दरों की प्रमुख विशेषताएं:

व्यक्तिगत 3.1.2. हिंदू अविभाजित परिवार, व्यक्तियों का संघ, व्यक्तियों या कृत्रिम न्यायिक व्यक्ति के शरीर. - पहली अनुसूची के भाग मैं के पैरा एक, हर व्यक्ति, हिंदू अविभाजित परिवार, व्यक्तियों का संघ, व्यक्तियों के शरीर या एक सहकारी समिति, फर्म के अलावा अन्य कृत्रिम न्यायिक व्यक्ति (के मामले में आयकर की दरों को निर्दिष्ट स्थानीय प्राधिकारी और कंपनी) के तहत के रूप में: -

टैक्स के लिए इनकम प्रभार्य आयकर की दर
एजेंट (भारत में व्यक्तिगत औरत निवासी और भारत में वरिष्ठ नागरिक निवासी अलावा अन्य), एचयूएफ, व्यक्तियों का संघ, व्यक्तियों और कृत्रिम न्यायिक व्यक्ति का शरीर व्यक्ति महिला, भारत में निवासी और पैंसठ वर्ष की आयु से नीचे पैंसठ वर्ष या उससे अधिक की उम्र का है, जो भारत में व्यक्तिगत वरिष्ठ नागरिक, निवासी,
15,000 रुपए तक 1]60]000 शून्य शून्य   शून्य
र 1,60,001 - रु. 1,90,000 ग. 10%
र 1,90,001 - रु. 2]40]000 ग. 10%
र 2,40,001 - रु. 5,00,000 ग. 10%
र 5,00,001 - रु. 8,00,000 क. 20% क. 20% क. 20%
रुपये अधिक है. 8,00,000 ३० % ३० % ३० %

व्यक्तियों के व्यक्तियों या शरीर के हर व्यक्ति, हिंदू अविभाजित परिवार, संघ के मामले में, कोई अधिभार लगाया जाता है.

आयकर पर शिक्षा उपकर नामक एक अतिरिक्त अधिभार सभी मामलों में गणना कर की राशि पर दो प्रतिशत की दर से लगाया जा करने के लिए जारी करेगा. उदाहरण के लिए, आयकर अभिकलन अगर रुपये है. 1,00,000 तो दो फीसदी की शिक्षा उपकर रुपये पर गणना की जानी है. 1,00,000 रुपये बैठती है. 2,000. इसके अलावा, गणना कर की राशि भी इस तरह के आयकर का एक प्रतिशत की दर से आयकर पर माध्यमिक और उच्च शिक्षा उपकर नामक एक अतिरिक्त अधिभार की वृद्धि की जाएगी. इस प्रकार पहले चित्रण, में गणना कर की राशि रुपये है. 1,00,000, दो फीसदी की शिक्षा उपकर रुपये है. 2,000 कहा, माध्यमिक और उच्च शिक्षा उपकर रुपये पर गणना की जाएगी. 1,00,000 रुपये होने के लिए बाहर काम करता है. 1,000. इस मामले में कुल उपकर रुपये की राशि होगी. 3000 (यानी, रुपये. 2,000 + रु. 1000).

3.1.3 सहकारी समितियां - हर सहकारी समिति के मामले में आयकर की दरें वित्त अधिनियम, 2011 की प्रथम अनुसूची के भाग I के पैरा बी में निर्दिष्ट किया गया है. के रूप में निम्नानुसार दरें इस प्रकार हैं: -

टैक्स के लिए इनकम प्रभार्य दर
15,000 रुपए तक 10]000 ग. 10%
र 10.001 रु. 20]000 क. 20%
रुपये अधिक है. 20]000   ३० %

कोई अधिभार लगाया जाएगा. पर शिक्षा उपकर आयकर और आयकर पर माध्यमिक और उच्च शिक्षा उपकर क्रमशः अभिकलन कर की राशि का प्रतिशत और एक प्रतिशत प्रति दो की दर से लगाया जाएगा.

3.1.4 कंपनियों - हर फर्म के मामले में तीस फीसदी की आयकर की दर वित्त अधिनियम, 2011 की प्रथम अनुसूची के भाग I के पैरा सी में निर्दिष्ट किया गया है. कोई अधिभार एक फर्म के मामले में लगाया जाएगा.

आयकर पर शिक्षा उपकर बुलाया अतिरिक्त अधिभार अभिकलन कर की राशि पर दो प्रतिशत की दर से लगाया जा करने के लिए जारी करेगा. इसके अलावा, कर की ऐसी राशि आगे सभी मामलों में, कर की राशि पर एक प्रतिशत की दर पर गणना आयकर पर माध्यमिक और उच्च शिक्षा उपकर नामक एक अतिरिक्त अधिभार की वृद्धि की जाएगी.

3.1.5 स्थानीय अधिकारियों - हर स्थानीय प्राधिकारी के मामले में आयकर की दर वित्त अधिनियम, 2011 की प्रथम अनुसूची के भाग I के पैरा डी फीसदी तीस में निर्दिष्ट किया गया है. कोई अधिभार लगाया जाएगा. हालांकि, शिक्षा उपकर पर आयकर और आयकर पर माध्यमिक और उच्च शिक्षा उपकर क्रमशः अभिकलन कर की राशि का प्रतिशत और एक प्रतिशत प्रति दो की दर से लगाया जाएगा.

3.1.6 कंपनियों - एक कंपनी के मामले में आयकर की दर वित्त अधिनियम, 2011 की प्रथम अनुसूची के भाग I के पैरा ई में निर्दिष्ट किया गया है.

एक घरेलू कंपनी के मामले में आयकर की दर से कुल आय का तीस फीसदी है. अभिकलन कर एक सात का अधिभार और घरेलू कंपनी से एक करोड़ रुपए से अधिक की कुल आय केवल जहां इस तरह के आयकर का एक फीसदी से डेढ़ से बढ़ाया जाएगा.

एक घरेलू कंपनी के अलावा किसी अन्य कंपनी के मामले में, रॉयल्टी 31-3-1961 के बाद किए गए एक अनुमोदित समझौते के तहत सरकार या भारतीय चिंता से प्राप्त है, लेकिन 1976/01/04 पचास प्रतिशत से कम पर कर की जाएगी से पहले. इसी तरह, 29-2-1964 के बाद किए गए एक अनुमोदित समझौते के तहत सरकार या भारतीय चिंता से इस तरह कंपनी द्वारा प्राप्त तकनीकी सेवाओं के लिए शुल्क है, लेकिन 1976/01/04 से पहले, पचास प्रतिशत पर लगाया जाएगा के मामले में. इस तरह कंपनी की कुल आय के संतुलन पर, कर की दर चालीस फीसदी हो जाएगी. अभिकलन कर दो और केवल ऐसी कंपनी से एक करोड़ रुपए से अधिक की कुल आय जहां मामलों में एक फीसदी से डेढ़ की एक अधिभार से बढ़ाया जाएगा.

हालांकि, सीमांत राहत आय से अधिक एक है जिसके द्वारा राशि तक सीमित है एक करोड़ रुपए से अधिक आय से अधिक पर, अधिभार सहित, कि आयकर की अतिरिक्त राशि देय सुनिश्चित करने के लिए हर कंपनी के मामले में अनुमति दी जाएगी करोड़. इसके अलावा, हर कंपनी आयकर अधिनियम, 1961 (अधिनियम) और जहां इस तरह के आय एक करोड़ रुपए से अधिक की धारा 115JB के तहत कर से कुल आय प्रभार्य होने के मामले में, सीमांत राहत प्रदान की जाएगी.

आयकर पर शिक्षा उपकर हर कंपनी के मामले में अधिभार की समावेशी अभिकलन कर की राशि पर दो प्रतिशत की दर से लगाया जा करने के लिए जारी करेगा. इसके अलावा, कर और अधिभार की ऐसी राशि आगे अधिभार के समावेशी अभिकलन कर की राशि का एक प्रतिशत की दर से आयकर पर माध्यमिक और उच्च शिक्षा उपकर नामक एक अतिरिक्त अधिभार की वृद्धि की जाएगी. कोई मामूली राहत शिक्षा उपकर और माध्यमिक और उच्च शिक्षा उपकर के संबंध में उपलब्ध हो जाएगा.

वित्तीय वर्ष 2011-12 के दौरान निश्चित आय से स्रोत पर आयकर की कटौती के लिए 3.2 दरें.

टैक्स वर्गों 193, 194, 194A, 194B, 194BB, 194D और अधिनियम की 195, स्रोत पर आयकर की कटौती के लिए दरों के प्रावधानों के तहत बल में दरों में कटौती की जानी है जिसमें हर मामले में 3.2.1 वित्तीय वर्ष के दौरान 2011-12 के वित्त अधिनियम 2011 की प्रथम अनुसूची के भाग द्वितीय में निर्दिष्ट किया गया है. वित्तीय वर्ष 2011 के दौरान स्रोत पर आयकर की कटौती के लिए दरों -12 ब्याज के रूप में आय है गया मामले में छोड़कर वित्त अधिनियम, 2010 की प्रथम अनुसूची के भाग द्वितीय में निर्दिष्ट उन लोगों के रूप में ही बने रहेंगे अनिवासी को देय, एक कंपनी नहीं किया जा रहा, या स्रोत पर आयकर की कटौती की दर होगी जहां आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 10 (47) में निर्दिष्ट एक बुनियादी सुविधाओं के डेट फंड ने एक विदेशी कंपनी को आयकर अधिनियम के नव डाला खंड 194LB, 1961 में वर्णित के रूप में पांच फीसदी.

3.2.2 सरचार्ज - रूप में इस प्रकार प्रत्येक मामले में स्रोत पर कर कटौती संघ के प्रयोजनों के लिए एक अधिभार की वृद्धि की जाएगी: -

(मैं) हर व्यक्ति, हिंदू अविभाजित परिवार, व्यक्तियों और शरीर व्यक्तियों की एसोसिएशन के मामले में, कोई अधिभार लगाया जाएगा.

(Ii) हर कृत्रिम न्यायिक व्यक्ति के मामले में, कोई अधिभार लगाया जाएगा.

(Iii) कोई अधिभार एक सहकारी समिति और स्थानीय प्राधिकारी के मामले में कटौती की आयकर की राशि पर लगाया जाएगा.

(Iv) हर कंपनी और घरेलू कंपनी के मामले में, कोई अधिभार लगाया जाएगा.

(V) टीडीएस पर अधिभार ही विदेशी कंपनियों को किए गए भुगतान पर लगाया जाएगा. ऐसे मामलों में अधिभार की दर ऐसी आयकर की दो फीसदी है.

3.2.3 शिक्षा उप - अतिरिक्त अधिभार, यदि कोई हो, के मामले में, आयकर और अधिभार का दो फीसदी की दर से संघ के प्रयोजनों के लिए लगाया जारी करेगा आयकर पर शिक्षा उपकर बुलाया निवासियों के लिए और गैर निवासियों के लिए सभी भुगतान के मामले में वेतन भुगतान. उदाहरण के लिए, अगर इस तरह के टैक्स रुपये है. 1,00,000 और अधिभार रुपये है. 2,000. फिर दो फीसदी की शिक्षा उपकर रुपये पर गणना की जानी है. 1,02,000 रुपये होने के लिए बाहर काम करता है. 2,040.

इसके अलावा, कर कटौती की राशि और अधिभार आगे ऐसे सभी मामलों में एक प्रतिशत की दर से आयकर पर माध्यमिक और उच्च शिक्षा उपकर नामक एक अतिरिक्त अधिभार की वृद्धि की जाएगी. इस प्रकार पहले चित्रण, में कटौती की कर की राशि रुपये है. 1.00,000, अधिभार रुपये है. 2,000, दो फीसदी की शिक्षा उपकर रुपये है. 2,040 कहा, माध्यमिक और उच्च शिक्षा उपकर रुपये पर गणना की जाएगी. 1,02,000 रुपये होने के लिए बाहर काम करता है. 1,020. इस मामले में कुल उपकर रुपये की राशि होगी. 3,060 (यानी, रुपये. 2,040 + रु. 1,020).

एडवांस टैक्स, वेतन से स्रोत और वित्तीय वर्ष 2011-12 के दौरान कुछ मामलों में आयकर का चार्ज पर आयकर की कटौती की गणना के लिए 3.3 दरें.

वेतन से स्रोत पर आयकर की कटौती और वित्तीय वर्ष 2011-12 के दौरान अग्रिम कर की गणना के लिए 3.3.1 दरों वित्त अधिनियम, 2011 की प्रथम अनुसूची के भाग III में निर्दिष्ट किया गया है. ये दरें भी त्वरित आकलन किया जाना है जहां मामलों में वर्तमान आय पर वित्तीय वर्ष 2011-12 के दौरान आयकर चार्ज करने के लिए लागू कर रहे हैं, गैर निवासियों को भारत में उत्पन्न होने वाली शिपिंग लाभ के जैसे, अनंतिम मूल्यांकन, व्यक्तियों के आकलन के भारत छोड़ने के रूप में निम्नानुसार दरों रहे हैं आदि कम अवधि के लिए गठित निकायों के कर, मूल्यांकन से बचने के लिए संपत्ति के हस्तांतरण की संभावना है, जो व्यक्ति की है कि वित्तीय वर्ष, मूल्यांकन के दौरान अच्छे के लिए: -

3.3.2 व्यक्तिगत, हिंदू अविभाजित परिवार, व्यक्तियों का संघ, व्यक्तियों या कृत्रिम न्यायिक व्यक्ति की शारीरिक - प्रथम अनुसूची के भाग III के पैरा एक हर व्यक्ति के मामले में आयकर की दरों में निर्दिष्ट करता है. हिंदू अविभाजित परिवार, व्यक्तियों का संघ, व्यक्तियों या (एक सहकारी समिति, फर्म, स्थानीय प्राधिकरण और कंपनी के अलावा अन्य) कृत्रिम न्यायिक व्यक्ति के शरीर, व्यक्तियों के मामले में, बुनियादी छूट की सीमा रुपये से बढ़ाया गया है. रुपये को 1,60,000. 1,80,000. वरिष्ठ नागरिक के लिए पात्रता उम्र पैंसठ वर्ष से साठ साल तक कम हो गया है. इसके अलावा व्यक्तिगत, निवासी करदाताओं के लिए एक नई श्रेणी अस्सी साल या उससे अधिक की उम्र का है, जो निर्मित किया गया है. तदनुसार, भारत में और उम्र के 60 वर्ष से कम उम्र के हर औरत निवासी के लिए छूट की सीमा रुपये है. 1,90,000. इसके अलावा, भारत में हर व्यक्ति के निवासी के लिए और 60 साल या उससे अधिक है लेकिन पिछले वर्ष के दौरान किसी भी समय कम से कम अस्सी साल की उम्र की छूट की सीमा रुपये से उठाया गया है. रुपये को 2,40,000. 2,50,000. भारत में हर व्यक्ति के निवासी के लिए और 80 साल या उससे अधिक की उम्र की छूट की सीमा रुपये है. 20% से 5,00,000 और उसके बाद कर की दर कम रुपये से अधिक आय के लिए लागू होगा. 8,00,000. वित्तीय वर्ष के रूप में निम्नानुसार ऊपर हैं उल्लेख व्यक्तियों के मामले में वर्ष 2011-12 के दौरान कर की दरें: -

टैक्स के लिए इनकम प्रभार्य आयकर की दर
  (भारत में व्यक्तिगत औरत निवासी और भारत में वरिष्ठ नागरिक निवासी अलावा अन्य) व्यक्तिगत, एचयूएफ, व्यक्तियों का संघ, व्यक्तियों और कृत्रिम न्यायिक व्यक्ति के शरीर. व्यक्ति महिला, भारत में और साठ साल से कम उम्र के निवासी. भारत में व्यक्तिगत, निवास. जो साठ साल या उससे अधिक की उम्र का है, लेकिन कम से कम अस्सी साल.  अस्सी साल या उससे अधिक की उम्र का है, जो भारत में व्यक्तिगत निवासी.
15,000 रुपए तक 1, 80,000 शून्य शून्य शून्य शून्य
र 1,80,001 रु. 1,90,000 ग. 10%
र 1,90,001 रु. 2]50]000 ग. 10%
र 2,50,001 रु. 5,00,000 ग. 10%
र 5,00,001 रु. 8,00,000 क. 20% क. 20% क. 20% क. 20%
रुपये अधिक है. 8,00,000 ३० % ३० % ३० % ३० %

कोई अधिभार ऐसे मामलों में लगाया जाएगा.

आयकर पर शिक्षा उपकर अभिकलन कर की राशि पर दो प्रतिशत की दर से लगाया जा करने के लिए जारी करेगा. इसके अलावा, गणना कर की राशि भी इस तरह के आयकर का एक प्रतिशत की दर से आयकर पर माध्यमिक और उच्च शिक्षा उपकर नामक एक अतिरिक्त उपकर की वृद्धि की जाएगी.

3.3.3 सहकारी समितियां - हर सहकारी समिति के मामले में आयकर की दरें वित्त अधिनियम, 2011 की प्रथम अनुसूची के भाग III के अनुच्छेद बी में निर्दिष्ट किया गया है. इस प्रकार है, के रूप में दरों रहे हैं

टैक्स के लिए इनकम प्रभार्य दर
15,000 रुपए तक 10]000 ग. 10%
र 10,001 रु. 20]000 क. 20%
रुपये अधिक है. 20]000 ३० %

कोई अधिभार लगाया जाएगा. पर शिक्षा उपकर आयकर और आयकर पर माध्यमिक और उच्च शिक्षा उपकर क्रमशः अभिकलन कर की राशि का प्रतिशत और एक प्रतिशत प्रति दो की दर से लगाया जाएगा.

3.3.4 कंपनियों - हर फर्म के मामले में, प्रतिशत तीस से आयकर की दर वित्त अधिनियम, 2011 की प्रथम अनुसूची के भाग III के अनुच्छेद सी में निर्दिष्ट किया गया है. कोई सरचार्ज लगाया जाएगा. आयकर पर शिक्षा उपकर अभिकलन कर की राशि पर दो प्रतिशत की दर से लगाया जा करने के लिए जारी करेगा. इसके अलावा, कर की ऐसी राशि आगे सभी मामलों में, कर की राशि पर एक प्रतिशत की दर पर गणना आयकर पर माध्यमिक और उच्च शिक्षा उपकर नामक एक अतिरिक्त उपकर की वृद्धि की जाएगी.

3.3.5 स्थानीय अधिकारियों - हर स्थानीय प्राधिकारी के मामले में आयकर की दर वित्त अधिनियम, 2011 की प्रथम अनुसूची के भाग III के अनुच्छेद डी फीसदी तीस में निर्दिष्ट किया गया है. कोई अधिभार लगाया जाएगा. हालांकि, शिक्षा उपकर पर आयकर और आयकर पर माध्यमिक और उच्च शिक्षा उपकर क्रमशः अभिकलन कर की राशि का प्रतिशत और एक प्रतिशत प्रति दो की दर से लगाया जाएगा.

3.3.6 कंपनियों - एक कंपनी के मामले में आयकर की दर वित्त अधिनियम, 2011 की प्रथम अनुसूची के भाग III के अनुच्छेद ई में निर्दिष्ट किया गया है.

एक घरेलू कंपनी के मामले में आयकर की दर से कुल आय का तीस फीसदी है. अभिकलन कर इस तरह के घरेलू कंपनी से एक करोड़ रुपए से अधिक की कुल आय भी हैं जहां केवल पांच प्रतिशत का अधिभार से बढ़ाया जाएगा.

एक घरेलू कंपनी के अलावा किसी अन्य कंपनी के मामले में, रॉयल्टी 31-3-1961 के बाद किए गए एक अनुमोदित समझौते के तहत सरकार या भारतीय चिंता से प्राप्त है, लेकिन 1976/01/04 पचास प्रतिशत से कम पर कर की जाएगी से पहले. इसी तरह, 29-2-1964 के बाद किए गए एक अनुमोदित समझौते के तहत सरकार या भारतीय चिंता से इस तरह कंपनी द्वारा प्राप्त तकनीकी सेवाओं के लिए शुल्क के मामले में. लेकिन 1976/01/04 से पहले, पचास फीसदी की दर से कर लगाया जाना होगा. इस तरह कंपनी की कुल आय के संतुलन पर, कर की दर चालीस फीसदी हो जाएगी. अभिकलन कर ऐसी कंपनी से एक करोड़ रुपए से अधिक की कुल आय भी हैं जहां केवल दो प्रतिशत का अधिभार से बढ़ाया जाएगा. हालांकि, सीमांत राहत आय से अधिक एक है जिसके द्वारा राशि तक सीमित है एक करोड़ रुपए से अधिक आय से अधिक पर, अधिभार सहित, कि आयकर की अतिरिक्त राशि देय सुनिश्चित करने के लिए हर कंपनी के मामले में अनुमति दी जाएगी करोड़.

हालांकि, शिक्षा उपकर पर आयकर और आयकर पर माध्यमिक और उच्च शिक्षा उपकर कर की राशि की क्रमशः फीसदी और एक फीसदी प्रति दो की दर से लगाया जाएगा अधिभार सहित अभिकलन. कोई मामूली राहत शिक्षा उपकर और माध्यमिक और उच्च शिक्षा उपकर के संबंध में उपलब्ध हो जाएगा.

(4) "धर्मार्थ उद्देश्य 'की परिभाषा

अधिनियम के प्रयोजनों के लिए 4.1; आम जनता उपयोगिता के किसी अन्य वस्तु की उन्नति "" धर्मार्थ उद्देश्य'' दूसरों के बीच में, शामिल हैं. धारा 2 (15) में परिभाषित किया गया है ".

यह व्यापार, वाणिज्य या व्यापार, या किसी भी सेवा प्रदान करने के लिए किसी भी गतिविधि की प्रकृति में किसी भी गतिविधि की तरफ ले जा शामिल है अगर 4.2 हालांकि, "आम जनता उपयोगिता के किसी अन्य वस्तु की उन्नति", एक धर्मार्थ उद्देश्य के रूप में नहीं माना जाता है इस तरह की गतिविधि से आय के किसी भी व्यापार, वाणिज्य या व्यापार, एक उपकर या शुल्क या किसी भी अन्य विचार के लिए, चाहे उपयोग या आवेदन की प्रकृति के कारण, या प्रतिधारण, के संबंध में इस तरह की गतिविधियों से प्राप्तियों में निर्दिष्ट सीमा से ऊपर है, तो पिछले वर्ष.

अधिनियम की धारा 2 (15) के लिए 4.3 द्वितीय परंतुक इस तरह की गतिविधियों से प्राप्तियों के संबंध में निर्दिष्ट मौद्रिक सीमा 25 लाख रुपए के बजाय 10 लाख रुपये होगी प्रदान करने के लिए संशोधन किया गया है.

4.4 प्रयोज्यता - यह संशोधन 1 अप्रैल 2012 से प्रभावी बना दिया गया है और, तदनुसार, आकलन वर्ष 2012-13 और बाद के वर्षों के संबंध में लागू होगा.

प्र.5. संघ लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष और सदस्यों के कुछ अनुलाभ की छूट

यह अधिनियम के तहत विशेष रूप से छूट दी गई है जब तक कि 5.1 अधिनियम के मौजूदा प्रावधानों के सिर 'वेतन' के तहत एक कर्मचारी द्वारा प्राप्त किसी भी अनुलाभ या भत्ते के कराधान के लिए प्रदान करते हैं.

अधिनियम की 5.2 धारा 10 कुल आय के दायरे से निश्चित आय शामिल नहीं है. एक नई धारा 10 (45) के लिए विशेष छूट प्रदान करने के लिए अधिनियम में सम्मिलित किया गया है कि केन्द्र सरकार द्वारा अधिसूचित किया जाएगा जो निर्दिष्ट अनुलाभ और भत्तों के संबंध में सेवा के साथ ही सेवानिवृत्त अध्यक्ष और संघ लोक सेवा आयोग के सदस्य दोनों .

5.3 प्रयोज्यता - यह संशोधन 1 अप्रैल 2008 से retrospectively प्रभावी बना दिया गया है और, तदनुसार, आकलन वर्ष 2008-09 और बाद के वर्षों के संबंध में लागू होगा.

प्र.6. प्रावधान कुछ निकायों या अधिकारियों या ट्रस्ट या बोर्ड या आयोग के एक निर्धारित आय की छूट से संबंधित

अधिनियम की 6.1 धारा 10 कुल आय के दायरे से निश्चित आय शामिल नहीं है. एक नई धारा 10 (46) की स्थापना या गठित केन्द्रीय, राज्य या प्रांतीय अधिनियम द्वारा या गठित की है जो शरीर, अधिकार, बोर्ड, विश्वास या आयोग के किसी भी निर्दिष्ट आय को आयकर से छूट प्रदान करने के लिए अधिनियम में सम्मिलित किया गया है किसी भी व्यावसायिक गतिविधि में लिप्त नहीं है, और इस संबंध में केन्द्र सरकार द्वारा अधिसूचित है जो आम जनता के लाभ के लिए एक गतिविधि को विनियमित करने या प्रशासन के उद्देश्य से केन्द्र सरकार या राज्य सरकार द्वारा. इस तरह अधिसूचित संस्थाओं को भी धारा 139 (अधिनियम की 4C) (जी) के तहत अपनी आय का रिटर्न फाइल करेगा.

6.2 प्रयोज्यता - यह संशोधन LST जून, 2011 से प्रभावी बना दिया गया है.

प्र.7.        इंफ्रास्ट्रक्चर डेट फंड

7.1 बुनियादी ढांचा क्षेत्र के लिए विदेश से लंबी अवधि, कम लागत के फंड को बढ़ाने के क्रम में, प्रोत्साहन समर्पित डेट फंड की स्थापना की सुविधा के लिए अधिनियम में पेश किया गया है.

अधिनियम की 7.2 धारा 10 कुल आय के दायरे से निश्चित आय शामिल नहीं है. निर्धारित दिशा निर्देशों के अनुसार की स्थापना की है, जो किसी भी बुनियादी सुविधाओं ऋण फंड सूचित करने के लिए केन्द्र सरकार को सक्षम करने की शक्ति प्रदान करने के लिए इतनी के रूप में एक नई धारा 10 (47), अधिनियम में सम्मिलित किया गया है. अधिसूचित होने के बाद, इस तरह के ऋण फंड की आय कर से मुक्त किया जाएगा. यह, हालांकि, धारा 139 (अधिनियम की 4C) (एच) के तहत आय का एक रिटर्न फाइल करने की आवश्यकता होगी.

अधिनियम की 7.3 धारा 115A भी ऐसे अधिसूचित बुनियादी ढांचे डेट फंड से एक अनिवासी द्वारा प्राप्त कोई रुचि इस तरह के ब्याज आय की सकल राशि पर पांच प्रतिशत की दर से कर योग्य होगी प्रदान करने के लिए संशोधन किया गया है. इसी खंड 194LB कि कर एक अनिवासी को यह द्वारा भुगतान किसी भी ब्याज पर ऐसे अधिसूचित बुनियादी ढांचे डेट फंड से पांच प्रतिशत की दर से कटौती की जाएगी प्रदान करने के लिए अधिनियम में सम्मिलित किया गया है.

7.4 प्रयोज्यता - यह संशोधन 1 जून 2011 से प्रभावी बना दिया गया है.

8 अनुमोदित वैज्ञानिक अनुसंधान कार्यक्रम के लिए किए गए योगदान के लिए भारित कटौती

आयकर अधिनियम की धारा 35 (2AA) के मौजूदा प्रावधानों के तहत 8.1 प्रतिशत 175 की हद तक भारित कटौती एक राष्ट्रीय प्रयोगशाला या एक विश्वविद्यालय या किसी भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) या करने के लिए भुगतान किसी भी राशि के लिए अनुमति दी गई है एक अनुमोदित वैज्ञानिक अनुसंधान कार्यक्रम के उद्देश्य के लिए एक निर्दिष्ट व्यक्ति.

ऐसे अनुमोदित वैज्ञानिक अनुसंधान कार्यक्रम के लिए अधिक योगदान को प्रोत्साहित करने के लिए 8.2. धारा 35 (2AA) 200 प्रतिशत करने के लिए प्रतिशत 175 से भारित कटौती को बढ़ाने के लिए संशोधन किया गया है.

8.3 प्रयोज्यता - यह संशोधन 1 अप्रैल 2012 से प्रभावी होता है और, तदनुसार, आकलन वर्ष 2012-13 और बाद के वर्षों के संबंध में लागू होगा.

9 निर्दिष्ट कार्य के संबंध में निवेश से जुड़े कटौती

खंड 35AD के मौजूदा प्रावधानों के तहत 9.1.1, निवेश से जुड़े टैक्स प्रोत्साहन राजधानी प्रकृति के किसी भी खर्च के पूरे के संबंध में प्रतिशत कटौती प्रति सौ की अनुमति के माध्यम से प्रदान की जाती है (भूमि, सद्भावना और वित्तीय साधन के अलावा अन्य) पूर्ण किए गए और विशेष रूप से, पिछले वर्ष के दौरान "निर्दिष्ट व्यापार" के प्रयोजनों के लिए इस तरह के व्यय किए गए है जिसमें. पिछले वित्त अधिनियम, 2011 के अधिनियमन के लिए निम्न "निर्दिष्ट व्यवसायों" पूर्वोक्त निवेश से जुड़े कटौती का लाभ उठाने के लिए पात्र थे. -

 (मैं) की स्थापना और एक कोल्ड चेन सुविधा संचालन;

(द्वितीय) की स्थापना और कृषि उत्पादों के भंडारण के लिए एक भंडारण सुविधा संचालन;

(Iii) बिछाने और इस तरह के नेटवर्क का एक अभिन्न हिस्सा होने के भंडारण की सुविधा सहित वितरण के लिए एक पार से देश में प्राकृतिक गैस या कच्चे तेल या पेट्रोलियम तेल पाइपलाइन नेटवर्क, ऑपरेटिंग.

भारत में कहीं भी (चतुर्थ) के निर्माण और परिचालन, दो स्टार या केन्द्र सरकार द्वारा वर्गीकृत के रूप में ऊपर श्रेणी का एक नया होटल:

कहीं भारत, रोगियों के लिए कम से कम एक सौ बेड के साथ एक नया अस्पताल में (वी) के निर्माण और परिचालन,;

(Vi) हो सकता है के रूप में विकसित करने और आसानी हो सकती है, जैसा कि केन्द्रीय सरकार या किसी राज्य सरकार द्वारा तैयार किए झुग्गी बस्ती पुनर्विकास या पुनर्वास के लिए एक योजना के तहत एक आवास परियोजना, निर्माण, और दिशा निर्देशों के अनुसार इस संबंध में बोर्ड द्वारा अधिसूचित निर्धारित.

9.1.2 दो नए कारोबार अर्थात् अनुभाग 35AD, के तहत "निर्दिष्ट व्यापार" के रूप में जोड़ा गया है. -

(एक) के विकास और जैसा भी मामला हो, केन्द्र सरकार या राज्य सरकार द्वारा तैयार किए किफायती आवास के लिए एक योजना के तहत एक आवासीय परियोजना के निर्माण. और के रूप में दिशा निर्देशों के अनुसार इस संबंध में बोर्ड द्वारा अधिसूचित निर्धारित किया जा सकता है; और

भारत में उर्वरक की (ख) उत्पादन.

9.1.3 अनुभाग 35AD तहत पात्रता के लिए आपरेशन के प्रारंभ होने की तिथि, एक नए संयंत्र में या एक मौजूदा संयंत्र में एक नव स्थापित क्षमता में किफायती आवासीय परियोजनाओं और उर्वरक के उत्पादन का दो "निर्दिष्ट व्यवसायों'' के मामले में होगी पर या LST अप्रैल, 2011 के बाद.

9.1.4 प्रयोज्यता - ये संशोधन 1 अप्रैल 2012 से प्रभावी है और उसके अनुसार आकलन वर्ष 2012-13 और बाद के वर्षों के संबंध में लागू होगा.

अनुभाग 73a की 9.2.1 एक पढ़ने अनुभाग 35AD तहत काम एक निर्धारित व्यवसाय केवल मुनाफे और किसी भी अन्य निर्दिष्ट व्यापार के लाभ के खिलाफ अपने घाटे से स्थापित करने में सक्षम हो जाएगा कि निकलता है. पैरा 9.1.1 में चर्चा की, होटल और अस्पतालों के मामले में "व्यापार निर्दिष्ट" खंड 35AD तहत 'नई' होटल या 'नई' अस्पताल के रूप में परिभाषित किया गया है.

9.2.2 इस प्रकार, 'एक नया होटल' "निर्दिष्ट व्यापार" के रूप में परिभाषित किया गया है और अनुभाग 35AD तहत निवेश से जुड़े कटौती के लिए पात्र था यह 2010/01/04 पर या के बाद अभियान शुरू कर दी गई. निवेश से जुड़े कटौती का दावा है कि इस नए होटल के नुकसान सेट बंद एक और निर्दिष्ट व्यापार के लाभ के खिलाफ अनुमति दी गई थी. इस प्रकार, इस नुकसान (धारा 35AD या नहीं के तहत कटौती के लिए पात्र हैं या नहीं) नहीं बल्कि एक पुराने होटल के खिलाफ एक और नए होटल के लाभ के खिलाफ बंद सेट किया जा सकता है. सबसे पहले, यह एक तिथि निर्दिष्ट किया जाता है जब तक कि 'नई' या 'पुरानी' है क्या निर्दिष्ट करने के लिए मुश्किल था. दूसरा, कोई वास्तविक प्रोत्साहन था नई होटल व्यवसाय का नुकसान नहीं निवेश से जुड़े कटौती का दावा किया गया था अगर अन्यथा स्वीकार्य था, जो एक ही करदाता के पुराने होटल के लाभ के खिलाफ सेट बंद की अनुमति नहीं थी.

9.2.3 इसलिए, अनुभाग 35AD शब्द होटलों के मामले में 'निर्दिष्ट व्यापार' की परिभाषा से'' 'नई हटाने के द्वारा गतिविधि की तरह एक समान व्यापार / के खिलाफ एक निर्दिष्ट व्यापार की हानि के सेट बंद की अनुमति के लिए संशोधन किया गया है खंड 35AD तहत अस्पतालों (8) (ग). इस संशोधन के साथ, धारा 73a तहत. खंड 35AD के तहत कटौती का दावा निर्दिष्ट व्यापार की हानि सेट बंद उत्तरार्द्ध अनुभाग 35AD तहत पात्र कटौती है या नहीं, एक और निर्दिष्ट व्यापार के लाभ के खिलाफ के लिए अनुमति दी जाएगी. यह इसलिए, एक अस्पताल या एक होटल चलाने वाले एक व्यक्ति के मामले में बैलेंस शीट वित्तपोषण की अनुमति होगी. व्यक्ति 2010/01/04 के बाद काम शुरू होता है, जो और अनुभाग 35AD के तहत खर्च की कटौती के लिए पात्र है जो एक नए अस्पताल या होटल के नुकसान के साथ इस तरह के एक इकाई के मुनाफे में बंद सेट करने में सक्षम होगा.

9.3 प्रयोज्यता - यह संशोधन 1 अप्रैल 2011 से retrospectively प्रभावी बना दिया गया है और, तदनुसार, आकलन वर्ष 2011-12 और बाद के वर्षों के संबंध में लागू होगा.

10 नई पेंशन प्रणाली (एनपीएस) के लिए कर लाभ

आयकर अधिनियम की 10.1 धारा 80CCD,, धारा 80CCD के तहत कटौती अन्य बातों के साथ प्रदान करता है (1), एक कर्मचारी द्वारा किए गए योगदान का सम्मान है, और नियोक्ता द्वारा किए गए योगदान के संबंध में खंड 80CCD (2) के तहत कटौती में नई पेंशन प्रणाली (एनपीएस) के खाते में कर्मचारी की ओर से. खंड 80CCE के मौजूदा प्रावधानों को ध्यान में रखते वर्गों 80 सी, 80CCC और 80CCD के तहत कुल कटौती एक लाख रुपये से अधिक नहीं हो सकता है.

नई पेंशन प्रणाली (एनपीएस) के खाते में कर्मचारी की ओर से नियोक्ता द्वारा किए गए योगदान के संबंध में खंड 80CCD के तहत है कि कटौती (2), प्रदान करने के लिए इतनी के रूप में 10.2 धारा 80CCE संशोधन किया गया है, सीमा से बाहर रखा जाना होगा नियोक्ता की धारा 80CCE.The योगदान के तहत उपलब्ध कराए गए एक लाख रुपये की इसलिए अधिक है और खंड 80CCE के तहत एक लाख रुपये की कटौती ऊपर निर्धारिती को एक और कटौती के रूप में उपलब्ध हो जाएगा.

अधिनियम के मौजूदा प्रावधानों के तहत 10.3, एक मान्यता प्राप्त भविष्य निधि, एक अनुमोदित सेवानिवृत्ति निधि या एक अनुमोदित ग्रेच्युटी फंड की ओर एक नियोक्ता द्वारा किए गए योगदान की, (चार) और (v) क्रमश: खंड के तहत व्यापार आय से कटौती के रूप में स्वीकार्य है धारा 36 (1), कुछ सीमाओं के अधीन. हालांकि, धारा 36 नई पेंशन प्रणाली (एनपीएस) के खाते में, कर्मचारी की ओर से, नियोक्ता द्वारा किए गए योगदान के संबंध में व्यापार आय से एक समान कटौती के लिए प्रदान नहीं करता है.

10.4 धारा 36 उपधारा में एक नया खंड (IVA) की प्रविष्टि (1), प्रदान करने के लिए संशोधन किया गया है कि किसी कर्मचारी को की ओर से एक पेंशन योजना के प्रति योगदान के माध्यम से एक नियोक्ता के रूप में निर्धारिती द्वारा भुगतान किसी भी राशि नई पेंशन प्रणाली (एनपीएस) खाते, धारा 80CCD में निर्दिष्ट के रूप में यह दस प्रतिशत से अधिक नहीं है सीमा तक, सिर "मुनाफा और व्यापार या पेशे के लाभ 'के तहत नियोक्ता की आय की गणना में कटौती के रूप में अनुमति दी जाएगी पिछले वर्ष में कर्मचारी के वेतन की.

10.5 धारा 40A खर्च या कुछ निश्चित परिस्थितियों में घटाया नहीं भुगतान से संबंधित है. धारा 40A (9) के प्रयोजनों के लिए और धारा 36 (1) (IVA) के तहत प्रदान की हद तक किए गए एक योगदान नियोक्ता के हाथों में कटौती के रूप में अनुमति नहीं दी जा नहीं होगा कि प्रदान करने के लिए संशोधन किया गया है.

10.6 प्रयोज्यता - ये संशोधन 1 अप्रैल 2012 से प्रभावी और, तदनुसार, आकलन वर्ष 2012-13 और बाद के वर्षों के संबंध में लागू होगा.

प्र।11. लंबी अवधि के इन्फ्रास्ट्रक्चर बॉन्ड में निवेश के लिए कटौती

खंड 80CCF, रुपए की राशि के मौजूदा प्रावधानों के तहत 11.1. 20,000 (निर्दिष्ट निवेश के कारण टैक्स बचत के लिए खंड 80CCE के तहत उपलब्ध पर और रुपये की मौजूदा सीमा से ऊपर. 1 लाख), कि राशि का भुगतान किया जाता है, तो एक व्यक्ति या एक हिंदू अविभाजित परिवार की कुल आय की गणना में कटौती के रूप में अनुमति दी है या केन्द्र सरकार द्वारा अधिसूचित ही लंबी अवधि के इन्फ्रास्ट्रक्चर बॉन्ड में निर्धारण वर्ष 2011-12 के लिए प्रासंगिक पिछले वर्ष के दौरान जमा किया.

राशि उक्त बांडों में भुगतान या वित्तीय वर्ष 2011-12 के दौरान जमा किया जाता है, तो 11.2 इस कटौती की उपलब्धता, भी वर्ष 2011-12 (आकलन वर्ष 2012-13) के लिए बढ़ा दिया गया है.

11.3 प्रयोज्यता - यह संशोधन 1 अप्रैल 2012 से प्रभावी होता है और उसी के अनुसार आकलन वर्ष 2012-13 के संबंध में लागू होगा.

प्र.12.     बिजली क्षेत्र के लिए कर अवकाश के लिए सूर्यास्त खंड का विस्तार

खंड के मौजूदा प्रावधानों के तहत 12.1 (चतुर्थ) की उपधारा (4) धारा 80-आइए, लाभ और लाभ की कटौती जो एक उपक्रम, की अनुमति दी है -

यह 1 अप्रैल 1993 से शुरू हो और 31 मार्च, 2011 को समाप्त अवधि के दौरान किसी भी समय बिजली उत्पन्न करने के लिए शुरू होता है (एक) पीढ़ी और बिजली के वितरण के लिए निर्धारित है;

(ख), 1 अप्रैल से शुरू की अवधि के दौरान किसी भी समय नए पारेषण या वितरण लाइनों का एक नेटवर्क बिछाने 1999 और 31 मार्च, 2011 को समाप्त होने से पारेषण या वितरण शुरू होता है:

(ग) 1 अप्रैल 2004 से शुरू हो और 31 मार्च, 2011 को समाप्त अवधि के दौरान किसी भी समय पर्याप्त नवीकरण और पारेषण या वितरण लाइनों के मौजूदा नेटवर्क के आधुनिकीकरण चलाती है.

12.2 ऊपर टर्मिनल दिनांक 31 मार्च 2012 तक का समय, एक वर्ष की अवधि के लिए आगे यानी बढ़ा दिया गया है.

12.3 प्रयोज्यता - यह संशोधन 1 अप्रैल 2012 से प्रभावी होता है और उसी के अनुसार आकलन वर्ष 2012-13 और बाद के वर्षों के संबंध में लागू होगा.

प्र.13. खनिज तेल का वाणिज्यिक उत्पादन में लगे हुए उपक्रमों से लाभ और लाभ के संबंध में कटौती

इसे किसी भी पूरा करता है, तो उप - धारा के मौजूदा प्रावधानों के तहत 13.1 (9) आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 80 आईबी का प्रतिशत सौ की एक सात साल की लाभ से जुड़े कटौती, एक उपक्रम के लिए उपलब्ध है अर्थात्, निम्नलिखित हैं: -

 (मैं) पूर्वोत्तर क्षेत्र में स्थित है और शुरू हो गया या 1 अप्रैल 1997 से पहले खनिज तेल का वाणिज्यिक उत्पादन शुरू होता है;

(Ii) भारत के किसी भी भाग में स्थित है और शुरू हो गया या 1 अप्रैल 1997 को या उसके बाद खनिज तेल का वाणिज्यिक उत्पादन शुरू होता है;

(Iii) खनिज तेल के शोधन में लगे हुए हैं और 1 अक्तूबर को या उसके बाद इस तरह के शोधन शुरू होता है, 1998 नहीं बल्कि बाद में 31 मार्च 2012 की तुलना में है;

(Iv) भारत ख़बरदार संकल्प सं 19018/22/95 की सरकार द्वारा घोषित नई उत्खनन लाइसेंसिंग नीति के तहत अन्वेषण संविदा (नेल्प-VIII) के आगे बोली लगाने की आठवीं दौर के अंतर्गत लाइसेंस ब्लॉक में प्राकृतिक गैस के वाणिज्यिक उत्पादन में लगी हुई है -ONG.DO.VL, 10 फ़रवरी 1999 दिनांकित और 1 अप्रैल 2009 को या उसके बाद प्राकृतिक गैस के वाणिज्यिक उत्पादन शुरू होता है;

(V) कोल बेड मीथेन ब्लॉक के लिए अन्वेषण ठेके के पुरस्कार के लिए बोली लगाने की चतुर्थ दौर के अंतर्गत लाइसेंस ब्लॉक में प्राकृतिक गैस के वाणिज्यिक उत्पादन में लगी हुई है और 1 अप्रैल 2009 को या उसके बाद प्राकृतिक गैस के वाणिज्यिक उत्पादन शुरू होता है.

इस कटौती का दावा करने के प्रयोजनों के लिए 13.2, भारत ख़बरदार संकल्प सं O-19018/22/95-ONG.DO.VL की सरकार द्वारा घोषित नई उत्खनन लाइसेंसिंग नीति के तहत सम्मानित किया गया है जो एक भी अनुबंध के तहत लाइसेंस प्राप्त सभी ब्लाकों , दिनांक 10 फ़रवरी 1999 या बल में या केन्द्र या किसी अन्य तरीके से एक राज्य सरकार द्वारा कुछ समय के लिए किसी भी कानून के अनुसरण में, एक एकल "उपक्रम 'के रूप में इलाज कर रहे हैं.

13.3 इस प्रकार, भारत के किसी भी भाग में स्थित है और खनिज तेल का वाणिज्यिक उत्पादन में लगी हुई है जो एक उपक्रम उपर्युक्त कटौती के लिए पात्र है यह 1 अप्रैल 1997 और बाद किसी भी समय खनिज तेल का वाणिज्यिक उत्पादन शुरू हो गया है या शुरू होता है तो कोई सूर्यास्त की तारीख दी गई है.

13.4 पैरा 13.1 में उल्लेख किया है खनिज तेल के वाणिज्यिक उत्पादन के लिए उपलब्ध कटौती (द्वितीय) अब 31 मार्च 2011 के बाद से सम्मानित एक अनुबंध के अंतर्गत लाइसेंस ब्लॉकों के लिए उपलब्ध नहीं होंगे. इन ब्लॉकों के लिए भारत ख़बरदार संकल्प सं O-19018/22/95-ONG.DO.VL सरकार, दिनांक 10 फ़रवरी 1999 द्वारा घोषित की गई नई अन्वेषण लाइसेंसिंग नीति के तहत या किसी भी कानून के अनुसरण में सम्मानित किया गया अनुबंध के अंतर्गत लाइसेंस प्राप्त कर रहे हैं समय बल में या किसी अन्य तरीके से केन्द्रीय या राज्य सरकार द्वारा किया जा रहा है.

13.5 प्रयोज्यता - यह संशोधन 1 अप्रैल 2012 से प्रभावी होता है और उसी के अनुसार आकलन वर्ष 2012-13 और बाद के मूल्यांकन वर्षों के संबंध में लागू होगा.

प्र.14. मूल्य निर्धारण के लिए स्थानांतरण से संबंधित प्रावधानों को युक्तिसंगत

मूल्य निर्धारण के हस्तांतरण से संबंधित प्रावधान निम्न प्रकार से युक्तिसंगत बनाया गया है: -

अधिनियम की 14.1.1 धारा 92C हाथ की दूरी मूल्य (एएलपी) की गणना के लिए प्रक्रिया प्रदान करता है. खंड सबसे उपयुक्त विधि एएलपी गणना करने के लिए चुना जाना चाहिए कि एएलपी और जनादेश कंप्यूटिंग के तरीके प्रदान करता है. यह भी एक से अधिक कीमत चुना विधि द्वारा निर्धारित किया जाता है, एएलपी ऐसे कीमतों का अंकगणितीय मतलब होना लिया जाएगा कि प्रदान की जाती है. (2) अधिनियम की धारा 92C के लिए दूसरे परंतुक लेन - देन की वास्तविक कीमत और एएलपी (यानी स्वीकार्य भिन्नता) के बीच भिन्नता, ऊपर निर्धारित के रूप में, इस तरह के प्रतिशत से अधिक नहीं है, तो हो सकता है कि प्रदान करने के लिए संशोधन किया गया है इस संबंध में केन्द्र सरकार द्वारा अधिसूचित, वास्तविक मूल्य का है, तो, कोई समायोजन किया जाएगा और वास्तविक कीमत एएलपी के रूप में माना जाएगा.

14.1.2 प्रयोज्यता - यह संशोधन 1 अप्रैल 2012 से प्रभावी बना दिया गया है और यह तदनुसार निर्धारण वर्ष 2012-13 और बाद के मूल्यांकन वर्षों के संबंध में लागू नहीं होगी.

अधिनियम की 14.2.1 धारा 92CA हस्तांतरण मूल्य निर्धारण अधिकारी (टीपीओ) निर्धारण अधिकारी द्वारा टीपीओ में भेजा गया है, जो एक अंतरराष्ट्रीय लेन - देन के संबंध में हाथ की दूरी कीमत तय कर सकते हैं कि प्रदान करता है. इसके अलावा, धारा 92CA (7) एएलपी के निर्धारण के प्रयोजन के लिए, टीपीओ अनुभाग 131 (1) और (6) अधिनियम की धारा 133 के तहत एक निर्धारण अधिकारी को उपलब्ध शक्तियों का प्रयोग कर सकते हैं प्रदान करता है. ये आहूत या मामले की जांच या जांच करने के प्रयोजन के लिए जानकारी के लिए फोन करने की शक्तियां हैं.

अधिनियम की 14.2.2 धारा 92CA उसे पहले कार्यवाही के पाठ्यक्रम में, बाद में उसके द्वारा देखा जाता है जो किसी भी अन्य अंतरराष्ट्रीय लेनदेन के संबंध में एएलपी निर्धारित करने के लिए हस्तांतरण मूल्य निर्धारण अधिकारी को सक्षम करने के लिए संशोधन किया गया है. ये अंतरराष्ट्रीय लेनदेन निर्धारण अधिकारी द्वारा टीपीओ के लिए भेजा अंतरराष्ट्रीय लेनदेन के अलावा होगा. इसके अलावा, (7) अधिनियम की धारा 92CA भी अधिनियम की धारा 133A के तहत प्रदत्त शक्ति का प्रयोग करके मौके पर जांच और सत्यापन का संचालन करने के टीपीओ सक्रिय करने के संशोधन किया गया है.

14.2.2 प्रयोज्यता - ये संशोधन 1 जून 2011 से प्रभावी बना दिया गया है.

14.3.1 आय का रिटर्न दाखिल करने के अलावा, अंतरराष्ट्रीय लेनदेन किए गए हैं जो करदाता भी रिटर्न दाखिल करने की तारीख से पहले पर्चा 3CEB में एक हस्तांतरण मूल्य निर्धारण की रिपोर्ट तैयार करने और फाइल करने के लिए (अधिनियम की धारा 92E के प्रावधानों के तहत) के लिए आवश्यक हैं आय की. अधिनियम की धारा 139 को तैयार करने के लिए आवश्यक हैं, जो कॉर्पोरेट निर्धारिती के मामलों में आयकर रिटर्न दाखिल करने के लिए नियत तारीख के रूप में निर्धारण वर्ष की 30 नवंबर को उपलब्ध कराने और हस्तांतरण मूल्य निर्धारण रिपोर्ट दर्ज करने के लिए संशोधन किया गया है. पहले इस संशोधन के लिए आयकर रिटर्न दाखिल करने की तिथि निर्धारण वर्ष की 30 सितंबर थी.

14.3.2 प्रयोज्यता - यह संशोधन 1 अप्रैल 2011 से प्रभावी बना दिया गया है और यह तदनुसार निर्धारण वर्ष 2011-I2 और बाद के मूल्यांकन वर्षों के संबंध में लागू नहीं होगी.

प्र.15.     एक गैर सहकारी अधिकार क्षेत्र में स्थित लोगों के साथ लेनदेन के संबंध में काउंटर उपायों के टूल बॉक्स.

प्रभावी रूप से भारत, विरोधी परिहार के उपायों के एक सेट के साथ जानकारी का आदान प्रदान नहीं करता है, जो किसी भी देश या क्षेत्र में स्थित व्यक्तियों के साथ एक निवासी निर्धारिती द्वारा लेनदेन को हतोत्साहित करने के क्रम में 15.1 प्रदान किया गया है.

15.2 एक नई धारा 94a विशेष रूप से ऐसे देश या क्षेत्र में स्थित लोगों के साथ किए गए लेनदेन को लागू करने के लिए अधिनियम में सम्मिलित किया गया है. अनुभाग प्रदान करता है,

(मैं) एक भारत के बाहर किसी देश या क्षेत्र को सूचित करने के लिए केन्द्र सरकार को सत्ता सक्षम करने से. अधिसूचित क्षेत्राधिकार क्षेत्र के रूप में, भारत के साथ यह द्वारा सूचना के प्रभावी विनिमय की कमी को ध्यान में रखते;

एक निर्धारिती लेन - देन के लिए पार्टियों में से एक एक अधिसूचित क्षेत्राधिकार क्षेत्र में स्थित एक व्यक्ति है, जहां एक लेन - देन, में प्रवेश करती है (द्वितीय), तो लेन - देन करने के लिए सभी दलों जुड़े उद्यमों होना समझा जाएगा और लेन - देन समझा जाएगा कि एक अंतरराष्ट्रीय लेन - देन होने के लिए और तदनुसार, हस्तांतरण मूल्य निर्धारण के नियमों में इस तरह के लेनदेन पर लागू नहीं होगी;

(Iii) निर्धारिती बोर्ड या प्रासंगिक जानकारी लेने के लिए, अपनी ओर से काम करने वाले किसी अन्य आयकर प्राधिकरण अधिकृत, निर्धारित प्रपत्र में, एक प्राधिकरण प्रस्तुत जब तक किसी भी वित्तीय संस्था के लिए किए गए भुगतान के संबंध में कोई कटौती नहीं की अनुमति होगी कहा वित्तीय संस्था से;

निर्धारिती इस तरह के अन्य दस्तावेजों को बनाए रखता है और प्रस्तुत जब तक (चतुर्थ) अधिसूचित क्षेत्राधिकार क्षेत्र में स्थित एक व्यक्ति के साथ लेन - देन से उत्पन्न होने वाली (मूल्यह्रास सहित) किसी भी अन्य व्यय या भत्ता के संबंध में कोई कटौती अधिनियम के किसी प्रावधान के तहत अनुमति दी जाएगी कि जानकारी के रूप में निर्धारित किया जा सकता है:

(V) किसी भी राशि अधिसूचित क्षेत्राधिकार क्षेत्र में स्थित एक व्यक्ति से प्राप्त होता है, तो, जिम्मेदारी संतोषजनक ढंग से ऐसे व्यक्ति के हाथों में या लाभकारी मालिक के हाथों में इस तरह के पैसे के स्रोत की व्याख्या करने निर्धारिती पर है कि, और ऐसा करने के लिए उसकी विफलता के मामले में, राशि निर्धारिती की आय होना समझा जाएगा;

(Vi) ऐसे क्षेत्र में स्थित एक व्यक्ति के लिए किए गए भुगतान प्रासंगिक अधिनियम के प्रावधान या दर या बल में दरों या 30 फीसदी की दर में निर्दिष्ट दरों के उच्च स्तर पर कर की कटौती करने के लिए उत्तरदायी होगा कि.

प्रयोज्यता - ये संशोधन 1 जून 2011 से प्रभावी बना दिया गया है.

प्र.16. एक कम दर पर कुछ विदेशी लाभांश का कराधान

16.1 एक नई धारा 115BBD निर्धारण वर्ष 2012-13 के लिए प्रासंगिक पिछले वर्ष के लिए एक भारतीय कंपनी की कुल आय निर्दिष्ट विदेशी कंपनी है, तो इस तरह के लाभांश करेगा से प्राप्त लाभांश की तरफ से किसी भी आय भी शामिल है जहां कि प्रदान करने के लिए अधिनियम में पेश किया गया है लाभांश की सकल राशि पर पंद्रह फीसदी (प्लस लागू अधिभार और उपकर) की दर से कर योग्य हो. इस तरह के लाभांश के संबंध में कोई व्यय के कानून के तहत अनुमति दी जाएगी. पहले इस संशोधन के लिए इस तरह के लाभांश स्वीकार्य कटौती को लागू निगमित कर की दर विषय पर लगाया गया. कंपनी की कुल आय, सकल लाभांश से कम हो, के रूप में निगमित कर की दर (प्लस लागू अधिभार और उपकर) पर प्रभार्य होगा.

16.2 इस नई धारा 115BBD के संदर्भ में कोई निर्दिष्ट विदेशी कंपनी भारतीय कंपनी विदेशी कंपनी की इक्विटी शेयर पूंजी के अंकित मूल्य में 26% या उससे अधिक रखती है जिसमें एक विदेशी कंपनी होगी.

16.3 प्रयोज्यता - यह संशोधन 1 अप्रैल 2012 से प्रभावी बना दिया गया है और उसी के अनुसार आकलन वर्ष 2012-13 के संबंध में लागू होगा.

प्र.17. यूनिट धारकों को वितरित आय पर कर

(2) इस अधिनियम के 17.1 धारा 115R एक व्यक्ति या एक एचयूएफ के अलावा किसी अन्य व्यक्ति के लिए एक ऋण फंड द्वारा वितरित आय पर 30% की एक उच्च दर पर अतिरिक्त आय कर की वसूली प्रदान करने के लिए संशोधन किया गया है. संशोधन खंड एक म्युचुअल फंड की दर पर वितरित आय पर अतिरिक्त आयकर का भुगतान करने के लिए उत्तरदायी होगा कि प्रदान करता है

प्राप्तकर्ता मुद्रा बाजार म्युचुअल फंड या लिक्विड फंड द्वारा वितरण के मामले में एक व्यक्ति या एक एचयूएफ है (एक) 25% अगर;

(ख) 30% प्राप्तकर्ता मुद्रा बाजार म्युचुअल फंड या लिक्विड फंड द्वारा वितरण के मामले में किसी भी अन्य व्यक्ति है यदि:

प्राप्तकर्ता मुद्रा बाजार म्युचुअल फंड या लिक्विड फंड के अलावा अन्य ऋण फंड द्वारा वितरण के मामले में एक व्यक्ति या एक एचयूएफ है (ग) 12.5% ​​है; और

प्राप्तकर्ता मुद्रा बाजार म्युचुअल फंड या लिक्विड फंड के अलावा किसी अन्य फंड द्वारा वितरण के मामले में किसी भी अन्य व्यक्ति है (घ) 30% है.

17.2 किसी भी व्यक्ति या एचयूएफ के लिए आय के वितरण के मामले में आयकर की दर में कोई बदलाव नहीं हुआ है. एक इक्विटी ओरिएंटेड फंड से वितरण कर से मुक्त होने के लिए जारी करेगा.

17.3 प्रयोज्यता - यह संशोधन 1 जून 2011 से प्रभावी बना दिया गया है.

प्र.18. न्यूनतम एकांतर कर

पर आयकर देय अगर उपधारा के मौजूदा प्रावधानों के तहत 18.1.1 (1) धारा 1 I5JB की एक कंपनी ने अपने किताब लाभ पर 18% की दर से एक न्यूनतम वैकल्पिक कर (मैट) का भुगतान करने के लिए आवश्यक है कुल आय 1 अप्रैल, 2011 को या उसके बाद शुरू होने निर्धारण वर्ष के लिए प्रासंगिक किसी भी पिछले वर्ष के संबंध में अधिनियम के तहत अभिकलन के रूप में, इस तरह के न्यूनतम कर से भी कम है. कहा अनुभाग के तहत भुगतान कर की राशि को आगे ले जाने की अनुमति दी और तुरंत कर ऋण खंड 115JAA के प्रावधानों के तहत स्वीकार्य हो जाता है जिसमें निर्धारण वर्ष सफल दसवें आकलन वर्ष के लिए देय टैक्स के खिलाफ बंद का सेट है.

18.1.2 मेट की दर अठारह के लिए बढ़ा दिया गया है और एक प्रतिशत से डेढ़ (18.5%) ऐसी किताब लाभ के अठारह फीसदी की मौजूदा दर से.

18.1.3 प्रयोज्यता - यह संशोधन 1 अप्रैल 2012 से प्रभावी होता है और उसी के अनुसार आकलन वर्ष 2012-13 और बाद के मूल्यांकन वर्षों के संबंध में लागू होगा.

18.2.1 मेट कंप्यूटिंग के प्रयोजनों के लिए खंड 115JB के तहत एक कंपनी के बही लाभ खंड में निर्दिष्ट के रूप में ऊपर और नीचे समायोजन के साथ लाभ और हानि खाते के मुताबिक शुद्ध लाभ के रूप में निर्धारित किया जाता है. नीचे समायोजन के एक भाग 80HHC या कंपनी के निर्यात के संबंध में खंड 80HHE या अनुभाग 80HHF के तहत कटौती के लिए पात्र मुनाफे की राशि है.

18.2.2 इन धाराओं के तहत कटौती चरणबद्ध तरीके से समाप्त कर दिया गया है और कोई कटौती 2005/01/04 पर या के बाद शुरुआत निर्धारण वर्ष के लिए स्वीकार्य है.

विधायी आशय के रूप में 18.2.3 केवल अनुभाग 80HHC के तहत कटौती की उपलब्धता की अवधि के दौरान मेट की लेवी से निर्यात मुनाफे को छोड़ने के लिए गया था खंड के अंतर्गत पुस्तक लाभ की गणना करते समय, 80HHE और 80HHF, पात्र मुनाफे की राशि कटौती के रूप में स्वीकार्य नहीं रहे 115JB के बाद 2005/01/04 के बाद कटौती से बाहर चरण, यानी,.

18.2.4 तदनुसार, खंड 1I5JB (चतुर्थ), (वि) और (vi) 2005/01/04 से पूर्वव्यापी प्रभाव के साथ स्पष्टीकरण 1 के खंड omitting द्वारा संशोधन किया गया है ताकि उस अनुभाग 80HHC, 80HHE और 80HHF के तहत कटौती के लिए पात्र मुनाफा नहीं कर सकते 2005/01/04 पर या के बाद शुरुआत मूल्यांकन वर्षों के लिए मेट की लेवी के प्रयोजन के लिए पुस्तक लाभ कंप्यूटिंग में, लाभ और हानि खाते के रूप में दिखाया शुद्ध लाभ से कम किया.

18.2.5 प्रयोज्यता - यह संशोधन 1 अप्रैल 2005 से retrospectively प्रभावी बना दिया गया है और, तदनुसार, आकलन वर्ष 2005-06 और बाद के वर्षों के संबंध में लागू होगा.

प्र.19. विशेष आर्थिक क्षेत्रों के मामले में न्यूनतम वैकल्पिक कर (मैट) और लाभांश वितरण कर (डीडीटी) से संबंधित प्रावधान

खंड 10AA की मौजूदा प्रावधानों के तहत 19.1.1, सौ फीसदी की कटौती के लिए लेख या चीजों के निर्यात से या सेवाओं से एक विशेष आर्थिक क्षेत्र (सेज) में स्थित एक इकाई द्वारा प्राप्त लाभ और लाभ के संबंध में अनुमति दी है पहले लगातार पांच आकलन वर्ष; आगे पांच मूल्यांकन वर्षों के लिए पचास फीसदी की; और इसके बाद अगले पांच साल के लिए वापस जोता निर्यात लाभ के पचास प्रतिशत की.

19.1.2 इसके अलावा, धारा 80 आईएबी के तहत. सौ फीसदी की कटौती से शुरुआत पंद्रह साल के बाहर किसी भी लगातार दस मूल्यांकन वर्षों के लिए कुल आय में से 1 अप्रैल 2005 को या उसके बाद अधिसूचित सेज के विकास के कारोबार से एक उपक्रम से व्युत्पन्न लाभ और लाभ के संबंध में अनुमति दी है वर्ष में जो सेज केन्द्र सरकार द्वारा अधिसूचित किया गया है.

उप खंड के मौजूदा प्रावधानों के तहत 19.1.3 (6) खंड 115JB की, एक छूट अर्जित आय के संबंध में पुस्तक लाभ पर न्यूनतम वैकल्पिक कर (मैट) के भुगतान से अनुमति दी है या से 1 अप्रैल 2005 को या उसके बाद उत्पन्न होने वाली किसी भी व्यापार को आगे बढ़ाया, या जैसा भी मामला हो सेवाओं, एक यूनिट या विशेष आर्थिक क्षेत्र (सेज) में, एक उद्यमी या एक डेवलपर द्वारा गाया.

19.1.4 इसके अलावा, उप - धारा (6) धारा 115 हे के मौजूदा प्रावधानों के तहत छूट एक उपक्रम की कुल आय के संबंध में वितरित मुनाफा [लाभांश वितरण कर (डीडीटी)] पर टैक्स के भुगतान से अनुमति दी है या विकासशील या विकसित करने और परिचालन या विकासशील, परिचालन और (अंतरिम या अन्यथा) को या उसके बाद लाभांश के वैसे, ऐसे डेवलपर या उद्यम द्वारा वितरित या भुगतान की घोषणा की, किसी भी राशि पर किसी भी निर्धारण वर्ष के लिए एक विशेष आर्थिक जोन बनाए रखने में लगे हुए उद्यम 1 अप्रैल, अपनी वर्तमान आय से बाहर 2005. इस तरह वितरित आय, प्राप्तकर्ता के हाथों में, इस अधिनियम की धारा 10 की उप - धारा (34) के तहत भी कर से छूट प्राप्त है.

19.1.5 उपरोक्त प्रावधानों 10 फ़रवरी 2006 से प्रभावी विशेष आर्थिक क्षेत्र अधिनियम, 2005 (एसईजेड अधिनियम) द्वारा आयकर अधिनियम में सम्मिलित थे.

19.2.1 वहाँ विकासशील या विकसित करने और परिचालन या विकासशील, परिचालन में लगे उपक्रम या उद्यम के मामले में एक यूनिट या सेज में या डीडीटी से, एक उद्यमी या एक डेवलपर के मामले में मेट से छूट के लिए प्रदान की कोई सूर्यास्त तारीख थी और एक एसईजेड बनाए रखने.

19.2.2 सेज डेवलपर्स और सेज में इकाइयों के मामले में न्यूनतम वैकल्पिक कर से छूट की उपलब्धता अब (6) प्रभावी नहीं रहेगी करेगा आयकर अधिनियम में सूर्यास्त के साथ ही एसईजेड अधिनियम और खंड 115JB का प्रावधान किया गया है 2012/01/04 से.

19.2.3 प्रयोज्यता - ये संशोधन 1 अप्रैल 2012 से प्रभावित कर लेते हैं और उसी के अनुसार आकलन वर्ष 2012-13 और बाद के वर्षों के संबंध में लागू होगा.

19.3.1 इसके अलावा, सेज डेवलपर्स के मामले में लाभांश वितरण कर से छूट की उपलब्धता लाभांश की घोषणा की, वितरित या 1 जून 2011 को या उसके बाद भुगतान के लिए आयकर अधिनियम के तहत के रूप में अच्छी तरह से एसईजेड अधिनियम बंद कर दिया गया.

19.3.2 प्रयोज्यता - ये संशोधन, 1 जून 2011 को प्रभाव में लाने. स्पष्टीकरण omitting द्वारा और सेज अधिनियम को आयकर अधिनियम की धारा 10 के खंड (34) में संशोधन के अनुरूप 1 जून 2011 से प्रभावी बना दिया गया है.

प्र.20. कुछ सीमित दायित्व भागीदारी के लिए वैकल्पिक न्यूनतम कर:

20.1 सीमित दायित्व भागीदारी अधिनियम, 2008 (एलएलपी) 2009 में प्रभाव में आ गया है. एलएलपी कंपनी के एक शरीर है, साथ ही एक पारंपरिक साझेदारी दोनों की विशेषताएं हैं. आयकर अधिनियम एक साझेदारी फर्म के लिए लागू है के रूप में एक सीमित देयता भागीदारी के लिए एक ही कराधान व्यवस्था का प्रावधान है.

कराधान के लिए एक फर्म के रूप में इलाज किया जा रहा 20.2 एक सीमित देयता भागीदारी, आयकर अधिनियम के तहत एक कंपनी पर निम्नलिखित टैक्स एडवांटेज है: -

 (मैं) यह न्यूनतम वैकल्पिक कर के अधीन नहीं है;

(Ii) यह लाभांश वितरण कर के अधीन नहीं है; और

(Iii) यह अधिभार के अधीन नहीं है.

उस पार लाभ से जुड़ी कटौतियों कर आधार की रक्षा करने के लिए आदेश में 20.3, कुछ सीमित दायित्व भागीदारी के संबंध में विशेष प्रावधानों वाले एक नए अध्याय बारहवीं बीए अधिनियम में सम्मिलित किया गया है.

एक सीमित देयता भागीदारी द्वारा पिछले एक वर्ष के लिए देय नियमित आयकर ऐसे में पिछले साल के लिए देय वैकल्पिक न्यूनतम कर से भी कम है, जहां नया अध्याय बारहवीं बीए, के प्रावधानों के अनुसार 20.4, समायोजित कुल आय होना समझा जाएगा कुल ऐसी सीमित दायित्व भागीदारी की आय और यह अठारह फीसदी और एक आधे की दर पर इस तरह कुल आय पर आय कर का भुगतान करने के लिए उत्तरदायी होगा.

ऊपर के प्रयोजन के लिए 20.5,

कुछ के संबंध में कटौती - (i) "समायोजित कुल आय" शीर्षक "सी के तहत अध्याय छठी ए में शामिल किसी भी धारा के तहत दावा किया कटौती की वृद्धि के रूप में इस नव डाला अध्याय बारहवीं बीए को प्रभावी करने से पहले कुल आय होगी आय "और कटौती अनुभाग 10AA के तहत दावा किया है;

(Ii) "वैकल्पिक न्यूनतम कर" अठारह फीसदी और एक आधे की दर से समायोजित कुल आय पर गणना कर की राशि होगी; और

(Iii) "नियमित रूप से आयकर" इस नव डाला अध्याय बारहवीं बीए के प्रावधानों के अलावा अन्य अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार इसकी कुल आय पर एक सीमित देयता भागीदारी द्वारा पिछले एक वर्ष के लिए देय आयकर की जाएगी.

20.6 यह आगे कर इस नव डाला अध्याय बारहवीं बीए के तहत एक सीमित देयता भागीदारी द्वारा भुगतान (टैक्स क्रेडिट) के लिए ऋण नियमित आय कर से अधिक का भुगतान वैकल्पिक न्यूनतम कर से अधिक की हद तक की अनुमति दी जाएगी कि प्रदान की जाती है. इस टैक्स क्रेडिट तुरंत इस तरह के क्रेडिट स्वीकार्य हो जाता है, जिसके लिए आकलन वर्ष सफल दसवें आकलन वर्ष के लिए आगे ले जाने की अनुमति दी जाएगी. यह नियमित रूप से आयकर वैकल्पिक न्यूनतम कर से अधिक नियमित रूप से आयकर के अतिरिक्त की सीमा तक वैकल्पिक न्यूनतम कर से अधिक है जिसमें एक आकलन वर्ष के लिए बंद सेट होने की अनुमति दी जाएगी.

20.7 प्रयोज्यता - यह संशोधन 1 अप्रैल 2012 से प्रभावी और, तदनुसार, आकलन वर्ष 2012-13 और बाद के वर्षों के संबंध में लागू होगा.

प्र.21. अनुरोधों के बारे में जानकारी का संग्रह भारत से बाहर कर अधिकारियों से प्राप्त

हाजिर कराना, खोज और निरीक्षण के संबंध में एक सूट की कोशिश कर रहा है, जबकि एक सिविल कोर्ट के लिए उपलब्ध हैं के रूप में खंड 131 के मौजूदा प्रावधानों के तहत 21.1 (1) आयकर अधिनियम की, कुछ आयकर अधिकारियों वही शक्तियां प्रदत्त किया गया है एक बैंकिंग कंपनी के किसी अधिकारी सहित और शपथ, खाते की किताबें और अन्य दस्तावेजों और जारी करने के सम्मन के सम्मोहक उत्पादन पर उसे जांच के किसी भी व्यक्ति, के.

21.2 अनुभाग 90 या अधिनियम की धारा 90A के तहत सूचना के आदान प्रदान के लिए एक समझौते के संबंध में भारत से बाहर कर अधिकारियों से प्राप्त अनुरोधों पर जानकारी का शीघ्र संग्रह की सुविधा के लिए आदेश में, धारा 131 में संशोधन किया गया था और नए उप - धारा (2) डाला गया था . नए उप - धारा धारा 90 या 90A में निर्दिष्ट एक समझौते के संबंध में व्यक्तियों की किसी भी व्यक्ति या वर्ग के संबंध में एक जांच या जांच करने के प्रयोजन के लिए, यह किसी भी आयकर प्राधिकरण के लिए सक्षम नहीं होंगे कि प्रदान करता है आयकर के सहायक आयुक्त के पद से नीचे, इस संबंध में बोर्ड द्वारा अधिसूचित रूप में, वर्तमान में खंड 131 में निर्दिष्ट आयकर अधिकारियों को प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करने के लिए (1). इसलिए बोर्ड द्वारा अधिसूचित प्राधिकारी (1) व्यक्तियों की ऐसे व्यक्ति या वर्ग के संबंध में कोई कार्यवाही इसे या किसी भी अन्य आयकर प्राधिकरण के समक्ष लंबित कर रहे हैं कि बावजूद अनुभाग 131 के तहत शक्तियों का प्रयोग करने में सक्षम हो जाएगा.

खाते की किताबें और कानून के तहत किसी भी कार्यवाही में यह समक्ष पेश अन्य दस्तावेज ज़ब्त और बनाए रखने के लिए, बोर्ड द्वारा अधिसूचित रूप में (3) इस अधिनियम के 21.3 इसके अलावा खंड 131, पूर्वोक्त अधिकार को सशक्त करने के लिए संशोधन किया गया था.

21.4 इसी प्रकार के संशोधन भी अधिनियम की धारा 133 के प्रावधानों को बनाया गया है.

21.5 प्रयोज्यता - ये संशोधन, 1 जून 2011 को प्रभाव में लाने.

प्र.22. आय का रिटर्न प्रस्तुत करने से व्यक्ति का एक वर्ग या वर्गों के लिए छूट

धारा 139 में निहित मौजूदा प्रावधानों के तहत 22.1 (1) आयकर अधिनियम की, हर व्यक्ति, पिछले वर्ष के दौरान उसकी कुल आय आयकर के दायरे में नहीं है जो अधिकतम राशि से अधिक है, एक वापसी की प्रस्तुत करने की आवश्यकता है उसकी आय.

एक वेतनभोगी करदाता के मामले में 22.2, पूरे कर देयता स्रोत पर कर कटौती के माध्यम से नियोक्ता द्वारा छुट्टी दे दी है. इस तरह के करदाताओं का पूरा विवरण भी स्रोत (टीडीएस) के बयानों पर कर कटौती के माध्यम से नियोक्ता द्वारा रिपोर्ट कर रहे हैं. इसलिए, आय का कोई अन्य स्रोत नहीं है जहां मामलों में, एक रिटर्न दाखिल मौजूदा जानकारी का दोहराव है.

छोटे करदाताओं पर अनुपालन बोझ कम करने के लिए 22.3, एक नया उप - धारा (1 सी) धारा 139 में डाला जाता है. यह प्रावधान सरकारी राजपत्र, किसी भी वर्ग या, आय का रिटर्न प्रस्तुत कि अधिसूचना में विनिर्दिष्ट की जाए इस तरह की स्थितियों के संबंध होने की आवश्यकता से व्यक्तियों की कक्षाओं में अधिसूचना द्वारा मुक्त करने के लिए केन्द्र सरकार कर सकती है.

22.4 परिणामी संशोधन भी धारा 139 (1 सी) के तहत जारी किए गए किसी भी अधिसूचना संसद के समक्ष रखा जाएगा कि उपलब्ध कराने के लिए खंड 296 के उपबंधों के बने होते हैं.

22.5 प्रयोज्यता - ये संशोधन, 1 जून 2011 को प्रभाव में लाने.

प्र 23 रिटर्न की केंद्रीकृत प्रसंस्करण

सभी रिटर्न शीघ्रता से कार्रवाई कर रहे हैं और कर की वजह से निर्धारिती को देय या वापसी एक निश्चित सीमा में निर्धारित कर रहे हैं, ताकि आयकर अधिनियम, 1961 की 23.1 धारा 143 ख़बरदार वित्त अधिनियम, 2008 में संशोधन किया गया था और रिटर्न की केंद्रीकृत प्रसंस्करण की अवधारणा को पेश किया गया था. धारा 143 के मौजूदा प्रावधानों के तहत (1 बी), केन्द्र सरकार रिटर्न की प्रोसेसिंग के संबंध में एक अधिसूचना जारी करने के लिए रिटर्न की केंद्रीकृत प्रसंस्करण की योजना, को प्रभावी करने के प्रयोजनों के लिए, अधिकार था.

रिटर्न बैचों में संसाधित किया जा रहा है, जहां 23.2 केन्द्रीकृत प्रसंस्करण केन्द्र स्थापित किया गया है. हालांकि, रिटर्न की प्रोसेसिंग में कुछ अधिक functionalities जोड़ा जाना चाहिए. इसलिए, यह 31 मार्च 2012 को 31 मार्च 2011 से धारा 143 (1) के तहत इस तरह की अधिसूचना जारी करने के लिए समय सीमा का विस्तार करने का प्रस्ताव है.

23.3 प्रयोज्यता - यह संशोधन 1 अप्रैल 2011 से पूर्वव्यापी प्रभाव लेता है.

प्र 24 सूचना के आदान प्रदान के मामले में मूल्यांकन के लिए समय सीमा का विस्तार

आयकर अधिनियम की 24.1 धारा 153 के मूल्यांकन और reassessments के पूरा होने के लिए timelimits के लिए प्रदान करता है. आयकर अधिनियम की धारा 153 के स्पष्टीकरण 1 में, निर्दिष्ट निश्चित अवधि उसमें मूल्यांकन या reassessments के पूरा होने के लिए सीमा की अवधि की गणना करते समय बाहर रखा जा रहे हैं.

मूल्यांकन या पुनर्मूल्यांकन, एक नया खंड (आठवीं के पूरा होने के लिए निर्धारित सांविधिक समय सीमा से, धारा 90 या 90A में निर्दिष्ट एक समझौते के तहत भारत से बाहर स्थित न्यायालय में कर अधिकारियों से जानकारी प्राप्त करने में लगने वाले समय को छोड़ने के लिए आदेश में 24.2 ) धारा 153 को स्पष्टीकरण 1 में डाला गया था.

24.3 यह प्रावधान है कि सूचना के आदान प्रदान के लिए एक संदर्भ धारा 90 या 90A और ऐसा अनुरोध सूचना आयुक्त द्वारा प्राप्त होता है जिस पर तारीख के साथ समाप्त करने के लिए भेजा एक समझौते के तहत सक्षम एक अधिकारी के द्वारा किया जाता है जिस तारीख से शुरू होने की अवधि, या जो भी कम हो छह महीने की अवधि, बाहर रखा जाना जाएगा.

24.4 इसी प्रकार के संशोधन भी अधिनियम की धारा 153B के प्रावधानों को बनाया गया है.

24.5 प्रयोज्यता - ये संशोधन, 1 जून 2011 को प्रभाव में लाने.

प्र.25. निपटारा आयोग के समक्ष एक आवेदन दाखिल करने के लिए शर्त में संशोधन

खंड 245C के प्रावधान में निहित 25.1 मौजूदा प्रावधानों (1), एक आवेदन निपटारा आयोग के समक्ष किए जाने के लिए अनुमति देते हैं,

 (मैं) जैसा भी मामला हो कार्यवाही, खोज या खाते की पुस्तकों की एक मांग का एक परिणाम के रूप में खंड 153A के तहत या अनुभाग 153C के तहत आवेदक के खिलाफ शुरू किया गया है, और आय पर देय आयकर की अतिरिक्त राशि का खुलासा आवेदन में पचास लाख रुपये से अधिक है;

(Ii) अन्य मामलों में, आवेदन में बताया आय पर देय आयकर की अतिरिक्त राशि दस लाख रुपये से अधिक है.

जिसका मामला कार्यवाही खाते की पुस्तकों की खोज या मांग का एक परिणाम के रूप में शुरू किया गया है में एक करदाता द्वारा निपटान के लिए एक आवेदन दाखिल करने के लिए मापदंड विस्तार करने के लिए 25.2, एक नया खंड (आइए) अनुभाग 245C के परन्तुक में सम्मिलित किया गया है (1).

25.3 नया खंड, एक आवेदन भी किया जा सकता है यह उल्लेख है कि जहां आवेदक-

(एक), जिसके मामले में कार्यवाही खोज का एक परिणाम के रूप में शुरू किया गया है और एक आवेदन दायर किया है जो में [ऊपर खंड (क) में निर्दिष्ट] व्यक्ति से संबंधित है; और

(ख), जिसके मामले में कार्यवाही भी खोज का एक परिणाम के रूप में मूल्यांकन या आय के पुनर्मूल्यांकन के लिए शुरू किया गया है में एक व्यक्ति है.

अपने आवेदन में बताया आय पर देय आयकर की अतिरिक्त राशि दस लाख रुपये से अधिक है.

एक परिणाम के रूप में 25.4, एक खोज की विषय वस्तु है जो एक करदाता आवेदन में बताया आय पर देय अतिरिक्त आयकर पचास लाख रुपये से अधिक है, तो समाधान के लिए एक आवेदन दाखिल करने की अनुमति दी जाएगी. अपने आवेदन में देय अतिरिक्त आयकर दस लाख रुपये से अधिक है, तो यह भी खोज का विषय वस्तु हैं जो इस तरह के एक करदाता, से संबंधित संस्थाओं, अब, निपटान के लिए एक आवेदन दाखिल करने की अनुमति दी जाएगी.

खंड 245C के परन्तुक के खण्ड (आइए) के तहत एक आवेदन बनाता है जो व्यक्ति के बीच 25.5 रिश्ता (1) और परंतुक के खंड (क) में वर्णित व्यक्ति अनुभाग में एक स्पष्टीकरण डालने से परिभाषित किया गया है.

25.6 प्रयोज्यता - यह संशोधन 1 जून 2011 से प्रभावी होता है.

26 अपने आदेश को सुधारने के लिए समझौता आयोग की पावर

26.1 धारा 245D (4) आयकर अधिनियम की यह ठीक समझे निपटान आयोग आवेदक को सुनवाई का एक मौका देने के बाद और करने के लिए, यह द्वारा प्राप्त आवेदन के द्वारा कवर मामलों पर, एक आदेश पारित कर सकते हैं प्रदान करता है आयुक्त.

26.2 इसके अलावा खंड 245F के तहत (1) निपटान आयोग अधिनियम के तहत आयकर प्राधिकरण में निहित हैं जो सभी शक्तियां प्रदान किया गया है. एक आयकर प्राधिकरण रिकॉर्ड से स्पष्ट किसी भी गलती सुधार के उद्देश्य के लिए यह द्वारा पारित किसी भी आदेश में संशोधन करने की धारा 154 के तहत शक्ति है.

26.3 एक नई उपधारा (6B) विशेष रूप से प्रदान करने के लिए इतनी के रूप में खंड 245D में सम्मिलित किया गया है कि समझौता आयोग मई, स्पष्ट किसी भी गलती सुधार करने के लिए एक दृश्य के साथ अपने आदेश की तिथि से छह महीने की अवधि के भीतर किसी भी समय रिकॉर्ड से, धारा 245D तहत यह द्वारा पारित किसी भी क्रम में संशोधन (4).

समझौता आयोग ऐसा करने के लिए आवेदक और उसके इरादे के आयुक्त को नोटिस दिया गया है और आवेदक और आयुक्त की अनुमति दी है जब तक 26.4 इसे आगे भी आवेदक का दायित्व को संशोधित करने का असर है जो एक संशोधन नहीं किया जा सकेगा कि प्रदान की जाती है सुनवाई का एक अवसर.

26.5 परिणामी संशोधन भी सम्पत्ति कर अधिनियम की धारा 22d में किया गया है.

26.6 प्रयोज्यता - ये संशोधन, 1 जून 2011 को प्रभाव में लाने.

प्र.27. दस्तावेज पहचान संख्या के हवाले से की आवश्यकता की चूक

27.1 आयकर अधिनियम की धारा 282B के तहत हर आयकर प्राधिकरण, जुलाई, 2011 के 1 दिन या उसके बाद, आवंटित करेगा एक कंप्यूटर जनित दस्तावेज पहचान हर नोटिस, आदेश, पत्र के संबंध में नंबर (डीआईएन) या किसी भी अन्य आयकर प्राधिकारी या निर्धारिती या किसी भी अन्य व्यक्ति और ऐसे नंबर करने के लिए उसके द्वारा जारी किए गए किसी भी पत्राचार उस पर उद्धृत किया जाएगा.

27.2 अखिल भारतीय स्तर पर अपेक्षित बुनियादी सुविधाओं की अनुपलब्धता के कारण व्यावहारिक कठिनाइयों को देखते हुए उक्त खंड छोड़ा गया था.

27.3 प्रयोज्यता - यह संशोधन 1 अप्रैल 2011 से प्रभावी होता है.

प्र 28 कुछ गैर निवासियों द्वारा रिपोर्टिंग आवश्यकता

28.1 विदेशी कंपनियों या कंपनियों या व्यक्तियों के संघों भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा अनुमोदन के बाद एक शाखा या एक संपर्क कार्यालय के माध्यम से भारत में कार्य करते हैं. शाखा इकाई की एक स्थायी प्रतिष्ठान का गठन किया है और इसलिए, अपेक्षित विवरण के साथ आय का रिटर्न फाइल करने की जरूरत है. एक अनिवासी कोई व्यावसायिक गतिविधि भारत में बाहर ले जाने की अनुमति दी है कि जमीन पर अपने संपर्क कार्यालय के संबंध में आय का एक रिटर्न फाइल नहीं है.

28.2 एक नई धारा 285 एक अनिवासी भारत में अपने संपर्क कार्यालय की गतिविधियों के संबंध में एक वार्षिक सूचना बयान दाखिल करने के लिए आवश्यक होगा कि उपलब्ध कराने के कानून में सम्मिलित किया गया है. निर्धारित प्रपत्र में निर्धारित विवरण प्रदान करते हैं. फार्म यह संबंधित है जो करने के लिए वित्तीय वर्ष के अंत से साठ दिनों के भीतर दायर किए जाने की आवश्यकता होगी.

28.3 प्रयोज्यता इन संशोधनों 1 जून 2011 से प्रभावी बना दिया गया है.

प्र.29. प्रोविडेंट फंड के लिए पहचान - ईपीएफओ से छूट प्राप्त करने के लिए समय सीमा का विस्तार

आयकर अधिनियम की चौथी अनुसूची के भाग ए में 29.1.1 नियम 4 आयकर अधिनियम के तहत मान्यता प्राप्त करने या बनाए रखने के लिए भविष्य निधि से संतुष्ट करने की आवश्यकता होती है, जो स्थितियों के लिए प्रदान करता है. नियम 4 [खंड (ईए)] की आवश्यकताओं की स्थापना कर्मचारी भविष्य निधि और प्रकीर्ण उपबंध अधिनियम, 1952 (ईपीएफ एंड एमपी एक्ट) की धारा 17 के तहत छूट प्राप्त करेगा कि है.

चौथी अनुसूची के भाग ए में 29.1.2 नियम 3 मुख्य आयुक्त या आयकर आयुक्त उनकी राय में कहा, नियम 4 के तहत निर्दिष्ट शर्तों और स्थितियों को संतुष्ट करता है, जो किसी भी भविष्य निधि को मान्यता देने के हो सकता है कि जो प्रदान करता है बोर्ड के नियमों के द्वारा निर्दिष्ट कर सकता है.

29.1.3 नियम 3, अन्य बातों के साथ के उपनियम (1) के लिए सबसे पहले परंतुक, मान्यता 31 मार्च 2006, और ऐसे भविष्य निधि पर या उससे पहले किसी भी भविष्य निधि के लिए दी गई है, जहां एक मामले में संतुष्ट नहीं है कि निर्दिष्ट करता है इस तरह के फंड 31 दिसंबर 2010 को या उससे पहले इस तरह की शर्तों को पूरा नहीं करता है, तो नियम 4 और बोर्ड इस संबंध में नियमों द्वारा निर्दिष्ट कर सकता है जो किसी भी अन्य शर्तों के खंड (ईए) में निर्धारित शर्तों, ऐसे फंड को मान्यता वापस ले लिया जाएगा.

ईपीएफ एंड एमपी अधिनियम की धारा 17 के तहत छूट की मांग प्रतिष्ठानों द्वारा किए गए आवेदनों पर कार्रवाई करने के लिए कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) के लिए आगे का समय प्रदान करने के लिए 29.2. 31 मार्च 2012 को 31 दिसंबर 2010 से समय सीमा का विस्तार करने के रूप में तो प्रावधान में संशोधन किया गया है.

29.3 प्रयोज्यता - यह संशोधन 1 जनवरी 2011 से पूर्वव्यापी प्रभाव लेता है.

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