न्यूनतम वैकल्पिक कर एवं वैकल्पिक न्यूनतम कर
प्रारम्भ में न्यूनतम वैकल्पिक कर (मैट) की अवधारणा को कम्पनियों पर पेश किया गया और उत्तरोत्तर यह वैकल्पिक न्यूनतम कर (एएमटी) के रूप में सभी करदाताओं पर लागू की गयी। इस भाग में आप मैट और एएमटी से सम्बन्धित विभिन्न प्रावधानों के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
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अस्वीकरण: इस दस्तोवज में मौजूद विषय केवल जानकारी के लिए है। इसका उद्देश्य जनता तक सूचना को जल्द और आसानी से पहुंचाना है और इसे कानूनी दस्तोवजों के तौर पर नही समझा जाना चाहिए।
जनता को सलाह दी जाती है कि विषय का सत्यापन सरकारी अधिनियमों/नियमों/अधिसूचनाओं आदि से करें। |
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एमएटी और एएमटी
एमएटी का अर्थ न्यूनतम वैकल्पिक कर है और एएमटी का अर्थ वैकल्पिक न्यूनतम कर है। शुरू में एमएटी की विचार धारा को कंपनियों के लिए पेश किया गया था और प्रगतिशील रूप में एएमटी के सभी करदाताओं के लिए भी लागू किया गया था। इस भाग में आप एमएटी और एएमटी से सम्बंधित विभिन्न प्रावधानों के बारे में ज्ञान प्राप्त कर सकते हैं। सर्वप्रथम हम एमएटी के प्रावधानों के बारे में समझेंगे बाद में एएमटी के प्रावधानों के बारे में समझेंगे।
एमएटी लगाने का उद्देश्य
कभी-कभी यह हो सकता है कि करदाता कंपनी होने पर, वर्ष के दौरान आय उत्सर्जित करें लेकिन आयकर कानून के विभिन्न प्रावधानों के लाभ उठाने के लिए (जिसे छूट, कटौती, मूल्य ह्रास आदि) वह अपनी कर देयता को कम करें अथवा किसी प्रकार के कर का भुगतान न करें। कर देने वाली कंपनियों के कर न दिए जाने बढ़ते मामलों के चलते एमएटी को प्रभावी आंकलन वर्ष 1988-89 में वित्त अधिनियम, 1987 द्वारा आरंभ किया गया। इसके बाद वित्त अधिनियम 1990 द्वारा निरस्त किया गया तथा प्रभावी तिथि 1-4-1997 से वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1996 द्वारा फिर से लागू किया गया
एमएटी के परिचय का उद्देश्य ''शून्य कर कम्पनियों'' को कर निर्धारण में लाने का है। जो पर्याप्त खाता लाभ और अच्छे लाभांश का भुगतान होने के वावजूद विभिन्न कर रियायते और आयकर कानून के तहत उपलब्ध कराए गए प्रोत्साहन के लिए कर का भुगतान नहीं करते हैं।
एमएटी की शुरूआत के बाद आज की एमएटी के प्रावधानों में कई परिवर्तन किए गए हैं। तथा यह प्रणाली खंड 115ञख के प्रावधानों के अनुसार कम्पनियों पर लगाया जाता है।
एमएटी के मूल प्रावधान
एमएमटी की अवधारण के अनुसार एक कम्पनी की कर देयता नियम में से अधिक की होगी:
• आयकर कानून के सामान्य प्रावधानों के अनुसार कम्पनी की कर देयता की गणना अर्थात कम्पनी की कर योग्य आय पर कर लागू होने वाली कर दर के अनुसार कर का अभिकलन। उक्त प्रणाली में कर गणना सामान्य कर देयता की शर्त हो सकती है।
• खाता लाभ (खाता लाभ अभिकलन का तरीका आगे के भाग में चर्चित है) पर 18.5% की दर से कर गणना (लागू उपकर और अधिभार अतिरिक्त)। खाता लाभ पर 18.5% की दर लागू करने पर कर की गणना को (लागू उपकर और अधिभार अतिरिक्त) को एमएटी कहते हैं।
टिप्पणी :-
एमएटी कंपनी की स्थिति में 9 प्रतिशत की दर पर लगाया जाता है (साथ ही अधिभार तथा उपकर लागू है), अंतर्राष्ट्रीय वित्त सेवा केंद्र की इकाई के तौर पर तथा अपनी आय को केवल परिवर्तनीय विदेशी मुद्रा में ही प्राप्त करता है
उदाहरण:
ऐसेम मिनरल प्रा. लि. की कर योग्य आय, आयकर अधिनियम के प्रावधानों के तहत गणना करने पर 8,40,000/- रु है। अनुभाग 115ञख के प्रावधानों के अनुसार गणना करने पर कंपनी का खाता लाभ 18,40,000/- रु है। ऐसेम मिनरल प्रा. लि. की कर देयता क्या है (उपकर और अधिभार को छोड़कर)?
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एक कंपनी की कर देयता, जो अधिक हो: (i) सामान्य कर देयता या (ii) एम ए टी, एक भारतीय कंपनी के लिए लागू सामान्य कर दर 30% है (लागू उपकर और अधिभार अतिरिक्त)। 8,40,000/- रु पर 30% की दर से 2,52,000/- रु का कर बनेगा (उपकर अतिरिक्त)। कंपनी का खाता लाभ 18,40,000/- रु है। एमएटी दायित्व 18,40,000/- रु पर 18.50% की दर से 3,40,000/- रु आएगा (उपकर और अधिभार को छोड़कर)।.
अत: ऐसेम मिनरल प्रा. लि. की कर देयता 3,40,000/- रु (लागू उपकर अतिरिक्त) होगी जो कि सामान्य कर देयता से अधिक है।
नोट : *एक घरेलू कंपनी 25 प्रतिशत की दर पर करयोग्य है अगर इसकी कारोबार या कुल प्राप्ति पिछले वर्ष 2024-25 में रू. 400 करोड़ से अधिक नहीं होती। इस मामले में, यह कल्पना की गई है कि कंपनी का कारोबार पिछले वर्ष 2024-25 में रू. 400 से अधिक है।
उदाहरण:-
आयकर अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार गणना करने पर एस एम एनर्जी प्रा. लि. की कर योग्य आय 28,40,000/- रु है। अनुभाग 115 ञख के प्रावधानों के अनुसार गणना पर कंपनी का खाता लाभ 18,40,000/- रु है। एस एम एनर्जी प्रा. लि. की कर देयता (उपकर और अधिभार को छोड़कर) क्या है?
एक कंपनी की कर देयता, इनमें से जो अधिक हो: (i) सामान्य कर देयता, या (ii) एम ए टी। एक भारतीय कंपनी के लिए लागू सामान्य कर दर 30% है (लागू उपकर और अधिभार अतिरिक्त)। 28,40,000/- रु पर 30% की दर से 8,52,000/- रु (उपकर अतिरिक्त) का कर बनेगा। कंपनी का खाता लाभ 18,40,000/- रु है। 18,40,000/- रु पर 18.50% की दर से (उपकर और अधिभार को छोड़कर) 3,40,400/- रु का एमएटी दायित्व आएगा।
अत: एमएटी दायित्व से अधिक होने के कारण एस एम एनर्जी प्रा. लि. की कर देयता 8,52,000/- रु (लागू उपकर अतिरिक्त) होगी।
नोट : *एक घरेलू कंपनी 25 प्रतिशत की दर पर करयोग्य है अगर इसकी कारोबार या कुल प्राप्ति पिछले वर्ष 2024-25 में रू. 400 करोड़ से अधिक नहीं होती। इस मामले में, यह कल्पना की गई है कि कंपनी का कारोबार पिछले वर्ष 2024-25 में रू. 400 से अधिक है।
एमएटी की प्रयोज्यता तथा गैर-प्रयोज्यता:
अनुभाग 115ञख के अनुसार, कंपनी होने के नाते हर करदाता एमएटी भुगतान के लिए उत्तरदायी है, अगर किसी भी संबंधित वर्ष का आयकर, आयकर अधिनियम के प्रावधानों के तहत गणना करने पर खाता लाभ के 18.50% + अधिभार (एस सी) + शिक्षा उपकर (ई सी) + माध्यमिक और उच्च शिक्षा उपकर से कम है।
अपलिखित से यह देखा जा सकता है कि एमएटी के प्रावधान हर कंपनी चाहे वो सार्वजनिक हो या निजी और भारतीय हो या विदेशी पर लागू है। हालांकि धारा 115ञख (5क) के अनुसार, धारा 115ख में निर्दिष्ट जीवन बीमा व्यवसाय से एकत्रित कंपनी की आय पर एमएटी लागू नहीं होगा। इसके अलावा, धारा 115फ-ण के अनुसार एमएटी के प्रावधान टन भारत कराधान के लिए उत्तरदायी नौ-परिवहन आय पर लागू नहीं होंगे, अर्थात् धारा 115फ से 115फयग में प्रदान टन भार कराधान योजना।
पूर्वप्रभावी तिथि 01/04/2001 सहित वित्त अधिनियम, 2016 द्वारा संशोधितानुसार धारा 115´ख हेतु स्पष्टीकरण 4 के अनुसार, यह स्पष्ट किया जाता है एमएटी प्रावधान लागू नहीं होंगे तथा निर्धारिती हेतु कभी लागू नहीं के तौर पर समझे जाऐंगे, यदि -
(i) निर्धारिती देश अथवा निर्दिष्ट क्षेत्र का निवासी है जिसके साथ भारत ने धारा 90 की उप-धारा (1) में संदर्भित समझौता किया है अथवा केंद्र सरकार ने धारा 90क की उप-धारा (1) के अंतर्गत कोई समझौता किया है तथा निर्धारिती के पास ऐसे समझौते के प्रावधानों के अनुसार भारत में स्थाई संस्थान नहीं है अथवा
(ii) निर्धारिती उस राष्ट्र का निवासी है जिसके साथ भारत का वाक्यांश (i) में संदर्भित प्रकार के समझौता न किया हो तथा निर्धारिती को कंपनियों के संबंध में फिलहाल के लिए प्रभावी किसी कानून के अंतर्गत पंजीकरण की आवश्यकता नहीं है।
आगे, धारा 115´ख हेतु स्पष्टीकरण 4क के अनुसार जैसा वित्त अधिनियम, 2018 द्वारा शामिल किया गया है, एमएटी के प्रावधान विदेशी कंपनी, जिसकी कुल आय में धारा 44ख, 44खख, 44खखक या 44खखचा हेतु संदर्भित व्यापार से लाभ और प्राप्ति शामिल है, हेतु लागू नहीं होंगे और ऐसी आय को उन धाराओं में निर्दिष्ट दरों पर कर हेतु प्रस्तुत किया गया है
खाता लाभ का अर्थ:-
धारा 115ञख (2) के लिए स्पष्टीकरण के अनुसार धारा 115ञख के उद्देश्यों के लिए ''खाता लाभ'' कंपनी अधिनियम (अब कंपनी अधिनियम, 2013 की अनुसूची 111) के अनुसूची III के अनुसार इस संबंध में कुछ वस्तुओं की वृद्धि और कमी को निर्धारित करके पी एण्ड एल खाता में दिखाया जाने वाला शुद्ध लाभ है। मदों को निम्नानुसार घटाया या बढ़या जा सकेगा
खाता लाभ की गणना
| विवरण | रु. |
| कंपनी अधिनियम (अब कंपनी अधिनियम, 2013 अनुसूची 111) की अनुसूची vi के अनुसार तैयार लाभ और हानि खाते में शुद्ध लाभ। | xxxxx |
| जोडे़ं: निम्नलिखित वस्तुएं (अगर वे पी एण्ड एल खाते में ऋण में दिखाई गई हैं) | |
| आयकर भुगतान किया/देय तथा उसका प्रावधान (*) | xxxxx |
| किसी भी नाम पर किसी भी भंडार में डाली गई राशि (धारा 33 क ग के अंतर्गत निर्दिष्ट भंडार को छोड़कर) | xxxxx |
| अनिश्चित देनदारियों के लिए प्रावधान | xxxxx |
| सहायक कंपनियों के घाटे के लिए प्रावधान | xxxxx |
| लाभांश भुगतान/प्रस्तावित | xxxxx |
| धारा 10 [धारा 10 (38) के अलावा], धारा 11 और धारा 12 के तहत छूट प्राप्त आय के संबंध में व्यय | xxxxx |
| आय, से संबद्ध व्यय की राशि अथवा राशियां, व्यक्तियों के संघ अथवा व्यक्तियों की निकाय की आय में करदाता के शेयर के तौर पर, जिस पर कोई आयकर धारा 86 के प्रावधानों के अनुसार नहीं दिया जाता है। | (XXXXX) |
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विदेशी कंपनी के तौर पर करदाता को उपार्जित अथवा उत्पन्न आय से संबंद्धित व्यय की राशि अथवा राशियां, जो निम्न से हो : (क) प्रतिभूतियों में लेनदेन पर उत्पन्न पूंजीगत प्राप्ति अथवा (ख) अध्याय XII में निर्दिष्ट दर अथवा दरों पर कर हेतु वसूलनीय तकनीकी सेवाओं के लिए ब्याज, रायल्टी अथवा शुल्क यदि उक्त आय पर देययोग्य आयकर एमएटी की दर से कम हो |
XXXXX |
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पूंजीगत परिसंपत्ति के स्थानांतरण पर काल्पनिक हानि का प्रतिनिधित्व करने वाली राशि, धारा 47 के वाक्यांश (xvii) में संदर्भित उस न्यास द्वारा आवंटित इकाईयों के विनिमय में व्यापारिक न्यास को विशेष उद्देश्य के साधन अथवा शेयर के तौर पर, अथवा धारा 47 के वाक्यांश (xvii) में संदर्भित इकाईयों के स्थानांतरण पर हानि की राशि अथवा कथित इकाईयों की वहन राशि में किसी परिवर्तन के परिणामस्वरूप काल्पनिक हानि का प्रनिधित्व करने वाली राशि धारा 115खखच के अंतर्गत कर हेतु वसूलनीय पेटेंट के संबंध में रायल्टी के रूप में आय से संबंधित व्यय |
XXXXX |
| पी एंड एल खाते के नामे मूल्यह्रास की राशि | xxxxx |
| अस्थगित कर और उसके प्रावधान | xxxxx |
| किसी भी संपत्ति के मूल्य में कमी के लिए प्रावधान | xxxxx |
| ऐसी परिसंपत्ति के निपटान अथवा सेवानिवृत्ति पर पुर्नमूल्यांकन से संबंधित पुर्नमूल्यांकन आरक्षित निधि में स्थाईत्व राशि यदि लाभ तथा हानि खाते हेतु जमा नहीं होता। | xxxxx |
| विनिमय के संमय शेयरों की वहन राशि अथवा कथित वाक्यांश में संदर्भित इकाईयों के साथ विनियमित शेयरों की लागत पर विचार करते हुए आंकी गई धारा 47 के वाक्यांश (xvii) में संदर्भित इकाईयों के स्थानांतरण पर प्राप्ति की राशि जहां ऐसे शेयर लाभ अथवा हानि खाते, जो भी स्थिति हो सकती है, के माध्यम से लागत को छोड़कर राशि पर व्यवहारित होती है। | XXXXX |
| कम: निम्नलिखित वस्तुएं (अगर पी एंड एल खाते में जमा की गई हो) | |
| किसी भी आरक्षित निधि से निकासी राशि या प्रावधान अगर पी एंड एल खाते में जमा किया गया हो [(**) | (xxxxx) |
| धारा 10 [धारा 10 (38) के अलावा], धारा 11 व धारा 12 के तहत छूट प्राप्त आय | (xxxxx) |
| पी एंड एल खाते से मूल्यह्रास की राशि की निकासी (परिसंपत्ति के पूर्नमूल्यांकन पर मूल्यह्रास को छोड़कर) | (xxxxx) |
| पूर्नमूल्यांकन आरक्षण से निकाली हुई राशि तथा पी एंड एल खाते में जमा की गई जो कि पुर्नमूल्यांकन मूल्यह्रास से ज्यादा न हो, | (xxxxx) |
| आय की राशि, व्यक्तियों के संघ अथवा व्यक्तियों की निकाय की आय में करदाता के शेयर के तौर पर, जिस पर कोई आयकर धारा 86 के प्रावधानों के अनुसार देययोग्य नहीं है, यदि ऐसी राशि लाभ तथा हानि खाते हेतु जमा होती है। | XXXXX |
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करदाता हेतु उत्पन्न अथवा उपार्जित आय की राशि, विदेशी कंपनी के तौर पर, जो (क) प्रतिभूतियों पर लेनदेन पर उत्पन्न पूंजीगत प्राप्तियां अथवा (ख) अध्याय XII में निर्दिष्ट दर अथवा दरों पर कर हेतु वसूलनीय तकनीकी सेवा के लिए ब्याज, रायल्टी अथवा शुल्क |
XXXXX |
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यदि ऐसी आय लाभ तथा हानि खाते हेतु जमा की जाती है तथा उक्त आय पर देययोग्य आयकर एमएटी की दर से कम होता है निम्न का प्रतिनिधित्व करने वाली राशि (यदि कोई हो, लाभ तथा हानि खाते हेतु जमा) (क) पूंजीगत परिसंपत्ति के स्थानांतरण पर काल्पनिक प्राप्ति, धारा 47 के वाक्यांश (xvii) हेतु संदर्भित उस न्यास द्वारा आवंटित विनिमय इकाईयों में व्यापारिक न्यास के विशेष उद्देश्य साधन के शेयर के तौर पर अथवा (ख) कथित इकाईयों की वहन राशि में किसी परिवर्तन के परिणामस्वरूप काल्पनिक आय अथवा (ग) धारा 47 के वाक्यांश (xvii) हेतु संदर्भित इकाईयों के स्थानांतरण पर प्राप्ति |
XXXXX |
| कथित वाक्यांश में संदर्भित इकाईयों के साथ विनियमित शेयरों की लागत पर विचार करते हुए आंकी गई धारा 47 के वाक्यांश (xvii) में संदर्भित इकाईयों के स्थानांतरण पर काल्पनिक प्राप्ति की प्रतिनिधित्व राशि अथवा विनिमय के समय शेयरों की वहन राशि जहां ऐसे शेयर लाभ अथवा हानि खाते, जो भी स्थिति हो सकती है, के माध्यम से लागत को छोड़कर राशि पर वहन होती है | XXXXX |
| धारा 115खखच के अंतर्गत कर हेतु वसूलनीय पेटेंट के संबंध में रायल्टी के रूप में आय | XXXXX |
| बही खाते के अनुसार अग्रेषित नुकसान या अनवशोषित मूल्यह्रास इनमें से जो कम हो (दिवालिया की प्रक्रिया से गुजर रही कंपनी को छोड़कर एक कंपनी)। | (xxxxx) |
| एक रुग्ण औद्योगिक कंपनी के मुनाफे जब तक कि वे इसका निवल मूल्य शून्य/सकारात्मक नहीं हो जाता। | (xxxxx) |
| अस्थगित कर, अगर पी एंड एल खाते में जमा हो | (xxxxx) |
| एमएटी गणना के लिए इस्तेमाल किए जाना वाला खाता लाभ | xxxxx |
(*) आयकर की राशि में शामिल होगा-
(i) धारा 115-ण (लाभांश वितरण कर अर्थात डी.डी.टी.) के तहत वितरित लाभ पर कोई कर या खंड 115 द के तहत वितरित आय पर कर।
(ii) इस अधिनियम के तहत लगाया गया कोई ब्याज,
(iii) समय-समय पर केन्द्रीय अधिनियमों द्वारा लगाया गया अधिकार, यदि हो
(iv) आयकर पर शिक्षा उपकर, यदि कोई हो, समय-समय पर केन्द्रीय अधिनियमों द्वारा लगाया जाने वाला; और
(v) यदि कोई हो, केन्द्रीय अधिनियमों द्वारा लगाया जाने वाला माध्यमिक और उच्च शिक्षा उपकर।
(**) 1-4-1997 के बाद बनाए गए आरक्षण या प्रावधान में से निकासी की जा सकती है, यदि ऐसे आरक्षण के बनाए जाने वाले साल का बही लाभ हस्तांतरण अथवा प्रावधानों हेतु स्थानांतरित राशि से बढ़ा हो (जिसमें से बतायी गयी राशि निकाली हो)।
उदाहरण के लिए, सरकारी अनुदान मूल्यह्रास संपत्ति से संबंधित विशेष आरक्षण (जो पी.&एल. खाता नहीं है) प्राप्ति के वर्ष में जमा हो और प्रभारित मूल्यह्रास के अनुपात में संपत्ति के जीवन में आरक्षण से पी.&एल. खाते में हस्तांतरित राशि का भाग स्वीकृत होता है। जिस वर्ष में ये अनुदान विशेष आरक्षण में जमा हुए तब वे एमएटी के अनुसार खाता लाभ के शुद्ध लाभ गणना में नहीं जोड़े गए । इसलिए, पी.&एल. में हस्तांतरण के वर्ष में पी.&एल. को हस्तांतरित राशि एमएटी प्रयोजनों के लिए खाता लाभ की गणना में शुद्ध लाभ से घटायी नहीं जायेगी।
भारतीय लेखांकन मानक (आईएंडडी एएस) अनुपालन कंपनियों के लिए बही लाभ का अर्थ
1. वित्त अधिनियम, 2017 द्वारा नई शामिल धारा 115´ख(2क) के अनुसार, धारा 115´ख के लिए भारतीय एएस अनुपालन कंपनी के लिए "बही लाभ" का अर्थ वह बही लाभ है जैसा धारा 115´ख(2) के स्पष्टीकरण 1 के अनुसार आंके गए बही लाभ है जिसे
(क) लाभ और हानि, जिसे लाभ या हानि हेतु पुर्नवर्गीकृत नहीं किया जाएगा, के विवरण में अन्य व्यापक आय को जमा की गई सभी राशियों द्वारा बढ़ाई गई
(ख) लाभ और हानि, जिसे लाभ या हानि हेतु पुर्नवर्गीकृत नहीं किया जाएगा, के विवरण में अन्य व्यापक आय को निकालकर सभी राशियों द्वारा घटाई गई
(ग) भारतीय एएस 10 के परिशिष्ट क के अनुसार कंपनियों के डिमर्जर में शेयरधारकों को गैर-नगद के वितरण पर लाभ और हानि के वर्णन से निकाली गई कुल राशि या सभी राशियों द्वारा बढ़ोत्तरी और
(घ) भारतीय एएस 10 के परिशिष्ट क के अनुसार कंपनियों के डिमर्जर में शेयरधारकों को गैर-नगद के वितरण पर लाभ और हानि के वर्णन हेतु जमा की गई कुल राशि या सभी राशियों द्वारा कमी
2. ओआईसी हेतु जमा/निकाला गया कोई मद जिसे लाभ या हानि के लिए पुर्न-वर्गीकृत न किया गया हो, उसे बही लाभ की गणना के लिए नजरअंदाज किया जाएगा यदि मद
(i) भारतीय एएस 16 और भारतीय एएस 38 के अंतर्गत निश्चित परिसंपत्ति और अमूर्त परिसंपत्तियों के लिए अतिरिक्त पुर्नमूल्यांकन या
(ii) भारतीय एएस 16 और भारतीय एएस 38 के अंतर्गत निश्चित परिसंपत्ति और अमूर्त परिसंपत्तियों के लिए अतिरिक्त पुर्नमूल्यांकन या
लेकिन पिछले वर्ष जिसमें परिसंपत्ति या निवेश का बही लाभ जैसा उक्त बिंदु (i) या (ii) में संदर्भित है, निवृत्त, प्रवृत्त, वसूल या अन्य स्थानांतरित होता है उसे निपटाई गई परिसंपत्ति या निवेश हेतु संबंधित सीमा तक उक्त बिंदु (i) और (ii) की राशि द्वारा बढ़ाया या घटाया जाएगा।
3. परिणामी कंपनी की स्थिति में, जहां उपक्रम की परिसंपत्तियां और देयताओं को इसके द्वारा प्राप्त किया जा रहा हो डिमर्जर से तुरंत पहले डिमर्ज कंपनी के बही खातों में दिखाई देने वाली विभिन्न राशियों पर रिकॉर्ड किया जाता है, ऐसी राशि में कोई भी परिवर्तन परिणामी कंपनी के बही लाभ की गणना के लिए नजरअंदाज किया जाएगा।
4. अभी तक भारतीय एएस अनुपालन कंपनी के बही लाभ की गणना के लिए, आप निम्नानुसार आगे बढ़ सकते हैं
| विवरण | राशि |
| तालिका क में आंके गए अनुसार बही लाभ | XXXXX |
| उक्त बिंदु (3) में निर्दिष्टानुसार समायोजन | XXXXX |
| निश्चित परिसंपत्ति व अमूर्त परिसंपत्ति के उसके निपटान या स्थानांतरण के वर्ष में पुर्नमूल्यांकन लाभ/हानि के लिए समायोजन वर्ष में एफवीटीओसीआई पर आंके गए ईक्विटी साधनों में निवेश से लाभ या हानियों का समायोजन यदि उनका निपटान हुआ हो या स्थानांतरण | XXXXX |
| किसी अन्य ओआईसी मदों के लिए समायोजन जिसे लाभ या हानि हेतु पुर्नवर्गीकृत नहीं किया जाएगा | XXXXX |
| एमएटी की गणना के लिए प्रयोग किये जाने वाला बही लाभ | XXXXX |
5. मौजूदा भारतीय जीएएपी से भारतीय एएस हेतु परागमन के कारण उत्पन्न समायोजन को बैलेंस शीट में अन्य ईक्विटी के अंतर्गत रिकॉर्ड किया जाना आवश्यक है। इन समायोजनाओं की राशि परागमन राशि के तौर पर निर्दिष्ट है। ऐसे समायोजनाओं की राशि जिसे पुर्न वर्गीकृत नहीं किया जाएा (जैसा वित्त अधिनियम, 2018 द्वारा संशोधित है) वह कुछ अपवादों के अनुसार भारतीय एएस को पहली बार अपनाने के वर्ष से प्रारंभ करते हुए 5 वर्षों की अवधि में समान रूप से बही लाभ की गणना में शामिल होना चाहिए।
एमएटी जमा धन:
पहले भाग में की गयी चर्चा के अनुसार, एक कंपनी सामान्य कर दायित्व या एमएटी प्रावधान के तहत दायित्व, जो इनमें से ऊंचा हो, का भुगतान करेगी। यदि किसी भी वर्ष में कंपनी एमएटी के प्रति दायित्व का भुगतान करती है तो आने वाले वर्षों में सामान्य कर देयता से ऊपर एमएटी क्रेडिट का दावा कर सकती है। आगे ले जाने और एमएटी क्रेडिट के समायोजन संबंधित प्रावधान खंड 115ञकक में दिए गए हैं।
बशर्ते कि जहां विदेशी कर ऋण (एफटीसी) की राशि को आयकर अधिनियम के सामान्य प्रावधानों के अंतर्गत निर्धारिती द्वारा देययोग्य कर के समक्ष ऐसे स्वीकार्य एफटीसी की राशि से अधिक एमएटी के समक्ष स्वीकृत किया गया तब इस उपधारा के अंतर्गत एफटीसी की गणना के दौरान ऐसी अतिरिक्त राशि को नजरअंदाज किया जाएगा
उदाहरण:
एसेम खनिज प्रा. लि. की वित्तीय वर्ष 2025-26 में आयकर अधिनियम के सामान्य प्रावधानों के तहत कर देयता 8,40,000/- रु. है तथा एमएटी प्रावधान के तहत दायित्व 10,00,000/- रु. है। धारा 115ञकक के तहत क्या कंपनी आगे आने वाले वर्षों में एमएटी क्रेडिट का दावा कर सकती है?
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एमएटी का भुगतान करने वाली एक कंपनी सामान्य कर देयता से अधिक के भुगतान पर एमएटी क्रेडिट का दावा कर सकती है। इस मामले में एसेम खनिज लि. का वर्ष 2025-26 में सामान्य प्रावधानों में 8,40,000/- रु. का दायित्व है और अनुभाग 115ञख के प्रावधानों के तहत 10,00,000/- रु. (जो कि सामान्य कर दायित्व से अधिक है) अत: कंपनी को 10,00,000/- रु. का भुगतान करना होगा अर्थात् एमएटी प्रावधान के तहत दायित्व।
अनुभाग 115ञकक के तहत, अगर किसी वर्ष में कंपनी एमएटी दायित्व का भुगतान करती है, तो सामान्य कर दायित्व से अधिक का एमएटी क्रेडिट का दावा कर सकती है। इस मामले में एमएटी दायित्व ज्यादा है, अत: कंपनी 1,60,000/- रु. का (ज्यादा एमएटी, सामान्य कर दायित्व 8,40,000/- रु. से) एमएटी क्रेडिट का दावा कर सकती है।
आगे लाए गए एमएटी का समायोजन
पहले की गई चर्चा के अनुसार, एक कंपनी सामान्य कर दायित्व से अधिक के एमएटी भुगतान पर एमएटी क्रेडिट का दावा कर सकती है। एमएटी का क्रेडिट कंपनी द्वारा आने वाले वर्षों में प्रयोग किया जा सकता है। क्रेडिट का समायोजन उस वर्ष में होगा जिसमें सामान्य प्रावधानों द्वारा कंपनी का दायित्व एमएटी दायित्व से अधिक हो। आगे लाए गए एमएटी क्रेडिट का समायोजन आने वाले वर्षों में होगा, जो कि सामान्य प्रावधानों के अनुसार कुल आयकर और एमएटी प्रावधानों के कर के बीच में अन्तराल की सीमा तक सीमित है।
उदाहरण:
ए एम एनर्जी प्रा. लि. का वित्त वर्ष 2023-24 के लिए सामान्य आयकर अधिएसेम नियम प्रावधानों के तहत 18,40,000/- रु. का कर दायित्व है और एमएटी प्रावधान के तहत 18,00,000/- रु. का 2,00,000/- रु. का एमएटी क्रेडिट आगे लाया गया है। क्या कंपनी एमएटी क्रेडिट का समायोजन कर सकती है? अगर हां, तो एमएटी क्रेडिट समायोजन के बाद कंपनी की कर देयता कितनी होगी?
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एमएटी क्रेडिट का समायोजन कंपनी उस वर्ष में कर सकती है, जब सामान्य प्रावधानों के तहत दायित्व एमएटी दायित्व से अधिक हो। इस मामले में सामान्य प्रावधानों के तहत 18,40,000/- का दायित्व है तथा एमएटी प्रावधानों के तहत 18,00,000/- रु. का दायित्व है। सामान्य प्रावधानों के अनुसार दायित्व एमएटी दायित्व से अधिक है अत: कंपनी एमएटी क्रेडिट का समायोजन कर सकती है।
आगे लाए गए एमएटी क्रेडिट का समायोजन आने वाले वर्षों में होगा, जो कि सामान्य प्रावधानों के तहत कुल आयकर और एमएटी प्रावधानों कर के बीच में अन्तराल की सीमा तक सीमित है। इसलिए एमएटी क्रेडिट समायोजन के बाद, एमएटी प्रावधानों के तहत कंपनी का दायित्व से कम नहीं हो सकता। इस मामले में एमएटी के अनुसार 18,00,000/- रु. का दायित्व है तथा एमएटी क्रेडिट समायोजन के बाद कंपनी का दायित्व 18,00,000/- रु. से कम नहीं हो सकता। अत: 2,00,000/- रु. के क्रेडिट में से कंपनी 40,000/- रु. के क्रेडिट का दावा कर सकती है और शेष 1,60,000/- रु. का क्रेडिट आगे ले जाया जा सकता है।
एमएटी क्रेडिट को आगे बढ़ाने की अवधि
पहले की गई चर्चा के अनुसार, कंपनी एमएटी क्रेडिट को समायोजन के लिए आने वाले वर्षों में आगे ले जा सकती है, हालांकि, एमएटी क्रेडिट मात्र अगले 15 साल के लिए आगे बढ़ाया जा सकता है, उसके बाद यह कालातीत हो जायेगा। अन्य शब्दों में, अगर कंपनी एमएटी क्रेडिट का प्रयोग 15 वर्षों की अवधि (जिस वर्ष से यह क्रेडिट उत्पन्न हुआ हो) में प्रयोग नहीं करती है तो, ऐसा क्रेडिट कालातीत हो जायेगा। कर दाता को इस क्रेडिट के संबंध में किसी भी ब्याज का भुगतान नहीं होगा।
चार्टर्ड अकाउंटेंट से प्रतिवेदन
हर कंपनी जिस पर धारा 115 ञख के प्रावधान लागू होते हैं उसको फार्म नं. 29ख पर चार्टर्ड अकाउंटेंट से खाता लाभ सत्यापित प्रतिवेदन, लेना होगा जो धारा 115ञख के प्रावधानों के अनुपालन का सत्यापन करेगा। रिपोर्ट धारा 44कख में संदर्भित निर्दिष्ट तिथि से पहले प्राप्त की जानी चाहिए। फार्म न 29 ख में लेखा रिपार्ट इलैक्ट्रानिक रूप से भरी जानी चाहिए?
एमएटी से संबंधित प्रावधान
एमएटी के प्रावधान केवल निगमित करदाता पर लागू होते हैं। गैर-निगमित करदाता पर यह प्रावधान संशोधित तरीके से लागू होते हैं जिसे वैकल्पिक न्यूनतम कर अर्थात एएमटी कहा जाता है। अत: यह कहा जा सकता है कि एमएटी कंपनी पर लागू होता है और एएमटी व्यक्ति पर जो कि कंपनी नहीं है। एएमटी से संबंधित प्रावधान धारा 115ञग और 115ञच में दिये गये हैं।
भिन्न करदाताओं पर एएमटी लागू होने संबंधित मूल प्रावधान
एएमटी के प्रावधान हर उस गैर-निगमित करदाता पर लागू होंगे जिसने धारा 80ज से 80ददख (80द को छोड़कर) (ii) धारा 35कघ के अंतर्गत कटौती तथा (iii) धारा 10कक के तहत कटौती का दावा किया है। अत: एएमटी के प्रावधान गैर-निगमित करदाता जिसने उक्त चर्चित धाराओं के अंतर्गत कटौती का दावा नहीं किया है । हालांकि, इस संबंध में निम्नलिखित बिंदुओं को ध्यान में रखना चाहिए।
• एएमटी के प्रावधान किसी व्यक्ति या अविभाजित हिन्दू परिवार या व्यक्तियों का एक संघ या व्यक्तियों के निकाय (निगमित हो या नहीं) या एक कृत्रिम न्यायिक व्यक्ति पर लागू होंगे यदि उस की कुल समायोजित आय (बाद में चर्चित) 20,00,000/- रु. से अधिक है। धारा (115ञङङ)।
• एएमटी के प्रावधान हर व्यक्ति पर लागू होंगे (अर्थात एक व्यक्ति या एक एच.यू.एफ. या एक ए.ओ.पी./बी.ओ.आई. या कृत्रिम न्यायिक व्यक्ति के अलावा) आय की परवाह किए बगैर। व्यक्ति की परिभाषा के लिए धारा 2(31) संदर्भित करें
• आगे एएमटी के प्रावधान उस व्यक्ति के लिए लागू नही होते जिसने धारा 115खकग या धारा 11खकघ के अंतर्गत उपलब्ध रियायत कर व्यवस्था का प्रयोग किया हो
(क) जिसने धारा 115खकग, धारा 11खकघ या धारा 115खकड़ के तहत उपलब्ध रियायती कर व्यवस्था का प्रयोग किया है; या
(ख) किसी व्यक्ति की कुल आय के संबंध में देय आयकर की गणना धारा 115खकग(1क) के तहत की जाती है।
एपीए या द्वितीयक समायोजन के कारण विगत वर्षों के बही लाभ की पुनर्गणना
वित्त अधिनियम, 2021 ने धारा 115ञख में एक नई उप-धारा (2घ) पेश की है। यह प्रदान किया गया है कि निर्धारण अधिकारी, निर्धारिती द्वारा एक आवेदन पर, पिछले वर्षों के बही लाभ और उस पर देय कर की फिर से गणना करेगा यदि निर्धारिती की वर्तमान वर्ष की आय में प्रत्यावर्तन के कारण एक अग्रिम मूल्य निर्धारण समझौते के कारण वृद्धि हुई है। धारा 92गग के तहत निर्धारिती या धारा 92गड़ के तहत किए जाने वाले द्वितीयक समायोजन के कारण।
सीबीडीटी निर्धारण अधिकारी द्वारा पिछले वर्षों के बही लाभ की पुनर्गणना के तरीके को अधिसूचित कर सकता है। इसके अलावा, यह प्रदान किया गया है कि धारा 154 के तहत गलती के सुधार के लिए, उक्त धारा में निर्दिष्ट 4 वर्ष की अवधि की गणना उस वित्तीय वर्ष के अंत से की जाएगी जिसमें इस तरह का आवेदन निर्धारण अधिकारी द्वारा प्राप्त किया जाता है।
धारा 115ञख की उप-धारा (2घ) के दो प्रावधान भी सम्मिलित किए गए हैं। पहला परंतुक प्रदान करता है कि बही लाभ की पुनर्गणना का लाभ केवल तभी उपलब्ध होगा जब निर्धारिती ने किसी बाद के निर्धारण वर्ष में एमएटी क्रेडिट का उपयोग नहीं किया हो। दूसरे शब्दों में, यदि इस तरह के निर्धारिती ने किसी बाद के निर्धारण वर्ष की कर देयता के भुगतान के लिए एमएटी क्रेडिट का उपयोग किया है, तो वह धारा 115(2घ) के लाभ का दावा करने के लिए पात्र नहीं होगा।
दूसरे परंतुक में, यह प्रदान किया गया है कि निर्धारिती आकलन वर्ष 2020-21 को या उससे पहले केवल पिछले वर्षों के बही लाभ की पुनर्गणना के लिए आवेदन कर सकता है। इसके अलावा, निर्धारिती पिछले वर्षों के लाभ की पुनर्गणना के कारण देय कर में कमी के कारण उत्पन्न होने वाले धनवापसी, यदि कोई हो, पर ब्याज का दावा करने के लिए पात्र नहीं होगा।
एएमटी की दर
गैर-निगमित करदाता के मामले में एएमटी कुल समायोजित आय पर 18.5% की दर लगाया जाता है। (बाद में चर्चा की जाएगी) लागू उपकर और अधिकार भी लगाए जायेंगे। हालांकि, एएमटी 9 प्रतिशत की दर पर लगाया जाता है यदि यूनिट के तौर पर गैर-निगमति निर्धारिती अंतर्राष्ट्रीय वित्त सेवाओं में स्थित हो और परिवर्तनीय विदेशी विनिमय में से ही अपनी आय प्राप्त करता हो। अधिभार और अधिकर जहां लागू हो वह भी लागू होगा
* आंकलन वर्ष 2023-24 से प्रभावी, वित्त अधिनियम, 2022 ने सहकारी समिति के मामले में एएमटी की दर 18.5% से घटाकर 15% कर दी है।
कुल समायोजित आय का अर्थ
गैर-निगमित करदाता के मामले में, कुल समायोजित आय की गणना निम्नलिखित प्रकार से होती है।
| विवरणी | (रु.) |
| करदाता की कर योग्य आय | xxxx |
|
जोड़ें: धारा 80ज से 80ददख (80त को छोड़कर) के तहत कटौती का दावा की गई राशि जोड़ें: धारा 35 क घ के अंतर्गत कटौती के दावे की राशि (धारा 32 के प्रावधानों के अनुसार स्वीकार्य मूल्यह्रास की राशि को कम करके) |
xxxx |
| जोड़ें: धारा 10कक के तहत दावा की गई राशि | xxxx |
| समायोजित कुल आय | xxxx |
एक अनिगमित करदाता के मामले में जिस पर एएमटी के प्रावधान लागू है, कर देयता
ए.एम.टी की धारणा के अनुसार, एक अनिगमित करदाता की दर देयता निम्नलिखित से उच्चतर होगी: जिन पर एएमटी के प्रावधान लागू होते हैं
आयकर अधिनियम के सामान्य प्रावधानों के अनुसार गणना की गयी कर देयता अर्थात, उस पर लागू करदाता की कर योग्य आय पर कर की गणना। उपरोक्त ढंग से गणना किये गये कर को सामान्य कर देयता के रूप में माना जायेगा।
• समायोजित कुल आय पर 18.5% की दर से (अधिभार और उपकर जो भी लागू हो को जोड़ते हुए) गणना किया गया कर। समायोजित कुल आय पर 18.5% की दर से (अधिभार और उपकर जो भी लागू हो को जोड़ते हुए) गणना किये गये कर को एएमटी कहा जाता है।
हालांकि, एएमटी 9 प्रतिशत की दर पर लगाया जाता है यदि यूनिट के तौर पर गैर-निगमति निर्धारिती अंतर्राष्ट्रीय वित्त सेवाओं में स्थित हो और परिवर्तनीय विदेशी विनिमय में से ही अपनी आय प्राप्त करता हो। अधिभार और अधिकर जहां लागू हो वह भी लागू होगा (निर्धारण वर्ष 2019-20 से लागू)
उदाहरण
वर्ष 2025-26 के लिए श्री कुमार (निवासी और 39 वर्षीय) की कर योग्य आय की गणना आयकर अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार रु. 28,40,000 है। उसने किताबों पर रायल्टी के संदर्भ में धारा 80ययख के तहत रु. 2,00,000 की कटौती का दावा किया। क्या वह एएमटी के लिए उत्तरदायी होगा? वर्ष के लिए उसकी कर देयता क्या होगी?
**
एएमटी के प्रावधान एक अनियमित करदाता पर लागू होंगे यदि उसने धारा 80ज से 80ददख (धारा 80 त) को छोड़कर धारा 35कघ तथा 10कक के अंतर्गत के तहत कटौती के लिए कोई दावा किया है। आगे, एएमटी के प्रावधान केवल एक व्यक्ति या एक हिन्दू अविभाजित परिवार या एक व्यक्तियों का संघ या एक व्यक्तिगत बड़ी (अनिगमित है या नहीं) या एक कृत्रिम न्यायिक व्यक्ति के लिए लागू होंगे। यदि ऐसे व्यक्ति समायोजित कुल आय रु. 20,00,000 से अधिक है। इस मामले में, श्री कुमार ने धारा 80ययख के तहत कटौती का दावा किया और समायोजित कुल आय रु. 20,00,000 से अधिक है और, अत: एएमटी के प्रावधान उस पर लागू होंगे।
एएमटी के प्रावधान लागू करने पर, श्री कुमार की कर देयता निम्नलिखित की उच्चतर होगी:
• आयकर कानून के सामान्य प्रावधानों के अनुसार गणना की गई कर देयता, अर्थात उस पर लागू कर दर द्वारा कर दाता की कर योग्य आय पर किये गये कर की गणना। उपरोक्त तरीके से की गई कर की गणना सामान्य कर देयता के रूप में मानी जा सकती है।
• समायोजित कुल आय पर 18.5% की दर से (अधिभार और उपकर जो भी लागू हो को जोड़ते हुए) गणना किया गया कर। समायोजित कुल आय पर 18.5% की दर से (अधिभार और उपकर जो भी लागू हो को जोड़ते हुए) लागू करते हुए गणना किया गया कर एएमटी कहलाता है।
उसकी कर योग्य आय रु. 28,40,000 है, निर्धारण वर्ष 2026-27 के लिए 60 वर्ष से नीचे की उम्र के एक व्यक्ति पर लागू कर दर को लागू करते हुए रु. 28,40,000 पर कर 6,64,500 आता है। 4% के स्वास्थ्य व शिक्षा उपकर के बाद कर देयता रु. 6,91,080 आती है।
समायोजित कुल आय रु. 30,40,000 (रु. 28,40,000 + रु. 2,00,000 अर्थात, धारा 80ददख के तहत कटौती आती है। रु. 3,40,000 पर 18.5% की दर से एएमटी रु. 5,62,400 आती है। 4% के उपकर स्वास्थ्य व शिक्षा के बाद एएमटी देयता रु. 5,84,896 आयेगी।
उपरोक्त गणना से यह पाया जा सकता है कि आयकर के सामान्य प्रावधानों के अनुसार कर देयता एएमटी के प्रावधानों के अनुसार कर देयता से अधिक है और, अत: श्री कुमार की कर देयता रु. 6,91,080 आयेगी।
उदाहरण
वर्ष 2025-26 के लिये श्री अजय (निवासी और 34 वर्षीय) कि कर योग्य आय की गणना आयकर अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार रु. 20,84,000 है। धारा 80ञञक के अंतर्गत कर योग्य आय की गणना रु. 5,00,000 की कटौती के बाद की गई है। क्या वह एएमटी के लिये उत्तरदायी होगा? वर्ष के लिये उसकी कर देयता क्या होगी?
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एएमटी के प्रावधान एक अनियमित कर दाता के लिए लागू होंगे यदि उसमें धारा 80ज से 80ददख (धारा 80त को छोड़कर) के तहत धारा 35कघ तथा धारा 10कक के अंतर्गत कटौती के लिये कोई दावा किया है। आगे एएमटी के प्रावधान केवल एक व्यक्ति या एक हिन्दू अविभाजित परिवार या एक व्यक्तियों का संघ या एक स्वायत्त बॉडी (अनियमित है या नही) या एक कृत्रिम न्यायिक व्यक्ति के लिये लागू होने यदि ऐसे व्यक्ति की समायोजित कुल आय रु. 20,00,000 से अधिक है। इस मामले में श्री अजय ने धारा 80ययख के तहत कटौती का दावा किया और उसकी समायोजित कुल आय रु. 20,00,000 से अधिक है और, अत: एएमटी के प्रावधान उस पर लागू होंगे।
एएमटी के प्रावधान लागू करते हुए, श्री अजय की कर देयता निम्नलिखित में से उच्चतर होगी:
• आयकर कानून के सामान्य प्रावधानों के अनुसार गणना की गयी कर देयता, अर्थात, उस पर लागू कर दर से कर दाता की कर योग्य आय पर की गयी गणना से कर/उपरोक्त ढंग से की गयी गणना से कर सामान्य कर देयता के रूप में माना जायेगा।
• समायोजित कुल आय पर 18.5% की दर से (अधि भार और उपकर जोड़ते हुए) गणना किये गये कर। समायोजित कुल आय पर गणना किये गये 18.5% की दर से (अधिभार और उपकर जोड़ते हुए) लागू करते हुए गणना किया गया कर एएमटी कहलाता है।
उसकी कर योग्य आय रु. 20,84,000 है, आंकलन वर्ष 2026-27 के लिए 60 वर्षों से नीचे की उम्र के एक व्यक्ति के लिये कर दर लागू करते हुए रु. 20,84,000 पर कर 4,50,200 आयेगा। 2% तथा 1% के उपकर के बाद कर देयता रु. 4,55,208 आयेगी।
समायोजित कुल आय रु. 25,84,000 (रु. 20,84,000 + रु. 5,00,000 अर्थात, धारा 80 ददख के तहत कटौती) आयेगी। रु. 25,84,000 पर 18.5% की दर से एएमटी रु. 4,78,040 आयेगी। 4% के उपकर के बाद एएमटी कर देयता रु. 4,97,162 आयेगी।
उपरोक्त गणना से यह पाया जा सकता है कि एएमटी के प्रावधानों के अनुसार करदेयता सामान्य प्रावधानों के अनुसार कर देयता से अधिक है और अत: श्री अजय की कर देयता रु. 4,97,162 (अर्थात, एएमटी के अनुसार) आयेगी। एएमटी के खाते पर श्री अजय द्वारा जमा किया गया अतिरिक्त कर एएमटी जमा के अनुसार दावा किया जा सकता है और अगले वर्ष (वर्षों) में समायोजन के लिये आगे ले जाया जा सकता है (एएमटी जमा से सम्बन्धित प्रावधानों की चर्चा बाद में की गयी है)।
एएमटी क्रेडिट
जैसा कि पिछले भाग में चर्चा की गयी, एक अनिगमित करदाता को सामान्य कर देयता या एएमटी के प्रावधानों के अनुसार कर देयता के उच्चतर का भुगतान करना होगा। यदि किसी वर्ष में करदाता एएमटी के अनुसार देयता का भुगतान करता है, तब वह उपरोक्त भुगतान की गयी एम.एम.टी. के बाद के वर्ष (वर्षों) में जमा का दावा करने के लिये अर्ह है।
बशर्ते कि जहां विदेशी कर ऋण (एफटीसी) की राशि को आयकर अधिनियम के सामान्य प्रावधानों के अंतर्गत निर्धारिती द्वारा देययोग्य कर के समक्ष ऐसे स्वीकार्य एफटीसी की राशि से अधिक एमएटी के समक्ष स्वीकृत किया गया तब इस उपधारा के अंतर्गत एफटीसी की गणना के दौरान ऐसी अतिरिक्त राशि को नजरअंदाज किया जाएगा
उदाहरण
आयकर अधिनियम के सामान्य प्रावधानों के तहत वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए एसीम इन्टरप्राइजेज (एक साझेदारी फर्म) की करदेयता रु. 8,40,000 है और एएमटी के प्रावधानों के अनुसार कर देयता रु. 10,00,000 है। क्या बाद के वर्ष (वर्षों) में यह किसी एएमटी जमा का दावा करने के लिए अर्ह होगा।
एएमटी का भुगतान करने वाला एक अनिगमित कर दाता सामान्य कर देयता के अतिरिक्त में से भुगतान किये गये एएमटी के जमा का दावा करने के लिए अर्ह है। इस मामले में सामान्य प्रावधानों के तहत वर्ष 2025-26 के लिए एसीम इन्टरप्राइजेज की कर देयता रु. 8,40,000 है और एएमटी के प्रावधानों के अनुसार रु. 10,00,000 (जो कि सामान्य कर देयता से अधिक है) है, और यहाँ, फर्म को रु. 10,00,000 अर्थात एएमटी प्रावधानों के अनुसार कर देयता का भुगतान करना होगा।
यदि किसी वर्ष में एक करदाता एएमटी के अनुसार कर देयता का भुगतान करता है, तब यह सामान्य कर देयता से अधिक का भुगतान अतिरिक्त एएमटी के एएमटी जमा का दावा करने के लिए अर्ह है। इस मामले में एएमटी की कर देयता उच्चतम है, और, यहाँ, फर्म रु. 1,60,000 (रु. 8,40,000 की सामान्य कर देयता से अधिक के अतिरिक्त होते हुए) का एएमटी जमा का दावा करने के लिए अर्ह होगी।
अग्रेषित एएमटी जमा का समायोजन
जैसा कि पहले चर्चा की जा चुकी है एक अनिगमित करदाता सामान्य कर देयता से अधिक का भुगतान अतिरिक्त एएमटी के जमा एएमटी का दावा करने के लिए अर्ह है। जमा एएमटी का उपयोग करदाता द्वारा बाद के वर्ष (वर्षों) में किया जा सकता है। जमा का समायोजन वर्ष जिसमें सामान्य प्रावधानों के अनुसार करदाता की देयता एएमटी देयता से अधिक है, में समायोजित की जा सकती है। लाये एएमटी जमा के संदर्भ में खाना की अनुमति सामान्य प्रावधानों के और एएमटी के प्रावधानों के अनुसार उसकी कुल आय पर कर के बीच अन्तर को बढ़ाने के लिए बाद के वर्ष (वर्षों) में दी जायेगी।
उदाहरण
आयकर अधिनियम के सामान्य प्रावधानों के तहत वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए एसीम इन्टरप्राइजेज (एक साझेदारी पर) की कर देयता रु. 18,40,000 है और एएमटी के प्रावधानों के अनुसार देयता रु. 18,00,000 है) यह रु. 2,00,000 की जमा एएमटी आगे लाई गयी है। क्या फर्म जमा एएमटी का समायोजन कर सकती है? यदि हाँ तब कितना और जमा एएमटी के समायोजन के पश्चात फर्म की कर देयता क्या होगी?
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सामान्य प्रावधानों के अनुसार अनिगमित कर दाता की कर देयता जिस वर्ष में एएमटी कर देयता से अधिक है, में एएमटी जमा समायोजित की जा सकती है। इस मामले में, आयकर अधिनियम के सामान्य प्रावधानों के अनुसार कर देयता रु. 18,40,000 है और मैट के प्रावधानों के अनुसार कर देयता रु. 18,00,000 है। सामान्य प्रावधानों के अनुसार कर देयता एएमटी के प्रावधानों के अनुसार कर देयता से अधिक है। और, यहाँ, फर्म एएमटी जमा का समायोजन कर सकती है।
आगे लायी गयी एएमटी के सम्बन्ध में खाना की अनुमति बाद के पक्षों में सामान्य प्रावधानों के अनुसार कर देयता को बढ़ाने के लिये बाद के वर्षों में दी जायेगी। इस प्रकार, एएमटी जमा के खाना के पश्चात फर्म की देयता एएमटी के प्रावधानों के अनुसार देयता से कम नहीं हो सकती है। इस मामले में, एएमटी के अनुसार कर देयता रु. 18,00,000 है, और अत: जमा एएमटी का संभंजन का दावा करने के बाद, फर्म की देयता 18,00,000 से कम नहीं हो सकती। अत:, रु. 2,00,000 के जमा के अलावा कम्पनी केवल रु. 40,000 के जमा का दावा कर सकती है और रु. 1,60,000 का जमा बकाया अगले वर्ष (वर्षों) के लिए लाया जा सकता है।
अवधि जिसके लिए जमा मैट आगे ले जाया जा सकता है
जैसा कि पहले चर्चा की गई, एक अनिगमित कर दाता बाद के वर्ष (वर्षों) में समायोजन के लिये जमा एएमटी को आगे ले जा सकता है, तथापि, जमा एएमटी केवल 15 वर्षों के लिये आगे ले जायी जा सकती है इसके बाद इसका पतन हो जायेगा। दूसरे शब्दों में यदि जमा एएमटी अनिगमित कर दाता द्वारा 15 वर्षों की एक अवधि (उस वर्ष से जिसमें इस प्रकार का जमा उत्पन्न हुआ था) के भीतर उपयोग नहीं की जा सकी, तब इस प्रकार के जमा का पतन हो जायेगा। इस प्रकार के जमा के सम्बन्ध में कर दाता द्वारा कोई ब्याज का भुगतान नहीं किया जायेगा।
चार्टड एकाउंटेंट से आख्या
प्रत्येक अनिगमित करदाता जिसके लिये एएमटी के प्रावधान लागू हो ।
धारा 44कख में संदर्भित तिथि से पहले प्रपत्र सं. 29ग में चार्टर्ड अकाउंटेंट से रिपोर्ट प्राप्त करना आवश्यक है
एएमटी तथा एमएटी पर एमसीक्यू
प्रश्न 1. एमएटी का अर्थ है
(क) न्यूनतम वैकिल्पक कर (ख) न्यूनतम स्वीकृत कर
(ग) न्यूनतम स्वीकार्य कर (घ) न्यूनतम समायोजन कर
सही उत्तर : (क)
सही उत्तर की प्रमाणिकता :
मैट का अर्थ है न्यूनतम वैकल्पिक कर तथा एमटी का अर्थ है वैकल्पिक न्यूनतम कर। प्रारंभिक तौर पर मैट की संकल्पना कंपनियों के लिए आंरभ की गई थी तथा आगे यह एमएमटी के रूप में अन्य सभी करदाताओं के लिए स्वीकार्य हो गई
इसलिए विकल्प (क) सही विकल्प है
प्रश्न 2. एमएटी का अर्थ है
(क) स्वीकार्य न्यूनतम कर (ख) समायोज्य न्यूनतम कर
(ग) वैकल्पिक न्यूनतम कर (घ) स्वीकार्य न्यूनतम कर
सही उत्तर : (ग)
सही उत्तर की प्रमाणिकता :
मैट का अर्थ है न्यूनतम वैकल्पिक कर तथा एमटी का अर्थ है वैकल्पिक न्यूनतम कर। प्रारंभिक तौर पर मैट की संकल्पना कंपनियों के लिए आंरभ की गई थी तथा आगे यह एमएमटी के रूप में अन्य सभी करदाताओं के लिए स्वीकार्य हो गई
इसलिए विकल्प (ग) सही विकल्प है
प्रश्न 3. धारा 115 ञख के अनुसार, कंपनी के तौर पर प्रत्येक करदाता मैट के लिए उत्तरदायी है, यदि किसी वर्ष के संबंध में आयकर के प्रावधानों के अनुसार आंकी गई कुल आय पर देययोग्य आयकर उसके लेखा लाभ, अधिभार (एससी), शिक्षा उपकर (ईसी), माध्यमिक तथा उच्च शिक्षा उपकर (एसएचईसी) के 15.50 प्रतिशत से कम हो
(क) सही (ख) गलत
सही उत्तर : (ख)
सही उत्तर की प्रमाणिकता
धारा 115 ञख के अनुसार, कंपनी के तौर पर प्रत्येक करदाता मैट के लिए उत्तरदायी है, यदि किसी वर्ष के संबंध में आयकर के प्रावधानों के अनुसार आंकी गई कुल आय पर देययोग्य आयकर उसके लेखा लाभ, अधिभार (एससी), शिक्षा उपकर (ईसी), माध्यमिक तथा उच्च शिक्षा उपकर (एसएचईसी) के 18.50 प्रतिशत से कम हो
चूंकि प्रश्न में दिया गया विवरण गलत है इसलिए विकल्प (ख) सही विकल्प है
प्रश्न 4. धारा 115 ञख (5क) के अनुसार, मैट धारा 115ख हेतु संदर्भित जीवन बीमा व्यापार हेतु कंपनी से एकत्रित अथवा उत्पन्न होने वाली किसी आय पर लागू नहीं होगा
(क) सही (ख) गलत
सही उत्तर : (क)
सही उत्तर की प्रमाणिकता
धारा 115 ञख (5क) के अनुसार, मैट धारा 115ख हेतु संदर्भित जीवन बीमा व्यापार हेतु कंपनी से एकत्रित अथवा उत्पन्न होने वाली किसी आय पर लागू नहीं होगा
चूंकि प्रश्न में दिया गया विवरण सही है इसलिए विकल्प (क) सही विकल्प है
प्रश्न 5. मैट के प्रावधान टनभार कराधान अर्थात् धारा 115फ से 115फयग में उपलब्धानुसार टनभार कराधान योजना, हेतु उत्तरदायी शिपिंग आय पर लागू होगा
(क) सही (ख) गलत
सही उत्तर : (ख)
सही उत्तर की प्रमाणिकता
मैट के प्रावधान टनभार कराधाना अर्थात् धारा 115फ से 115फयग में उपलब्धानुसार टनभार कराधान योजना, हेतु उत्तरदायी शिपिंग आय पर लागू नही होगा
चूंकि प्रश्न में दिया गया विवरण गलत है इसलिए विकल्प (ख) सही विकल्प है
प्रश्न 6. धारा 115 ञख(2) हेतु विवरण 1 के अनुसार धारा 115 ञख के उद्देश्य के लिए 'लेखा लाभ" का अर्थ इस संबंध में कुछ मदों द्वारा घटाए तथा बढ़ाए जाने के अनुसार कंपनी अधिनियम .................... के अनुसार तैयार पी तथा एल लेखा में दर्शाया गया निवल लाभ है
(क) अनुसूची V (ख) अनुसूची VI (अब अनुसूची III )
(ग) अनुसूची IV (घ) अनुसूची I
सही उत्तर : (ख)
सही उत्तर की प्रमाणिकता
धारा 115 ञख(2) हेतु विवरण 1 के अनुसार धारा 115 ञख के उद्देश्य के लिए 'लेखा लाभ" का अर्थ इस संबंध में कुछ मदों द्वारा घटाए तथा बढ़ाए जाने के अनुसार कंपनी अधिनियम (अब कंपनी अधिनियम, 2013 हेतु अनुसूची III) अनुसूची VI के अनुसार तैयार पी तथा एल लेखा में दर्शाया गया निवल लाभ है
इसलिए विकल्प (ख) सही विकल्प है
प्रश्न 7. यदि मैट के अनुसार कंपनी किसी वर्ष में देयता का भुगतान करती है तो वह अनुवर्ती वर्ष (वर्षों) में सामान्य कर देयता के अंतिरिक्त दिए गए मैट के क्रेटिड के दावे का हकदार है।
(क) सही (ख) गलत
सही उत्तर : (क)
सही उत्तर की प्रमाणिकता
यदि मैट के अनुसार कंपनी किसी वर्ष में देयता का भुगतान करती है तो वह अनुवर्ती वर्ष (वर्षों) में सामान्य कर देयता के अंतिरिक्त दिए गए मैट के क्रेटिड के दावे का हकदार है। मैट क्रेटिड के आगामी हस्तांतरण तथा समायोजन से संबंधित प्रावधान धारा 115 ञकक में दिए गए हैं
चूंकि प्रश्न में दिया गया विवरण सही हैं इसलिए विकल्प (क) सही विकल्प है
प्रश्न 8. गैर-निगमित करदाता की स्थिति में, एएमटी समायोजित कुल आय पर ............. प्रतिशत की दर से लगाई जाती है
(क) 20.00 (ख) 18.50
(क) 15.00 (ख) 10.00
सही उत्तर : (ख)
सही उत्तर की प्रमाणिकता
गैर-निगमित करदाता की स्थिति में, एएमटी समायोजित कुल आय पर 18.5 प्रतिशत की दर से लगाई जाती है
इसलिए विकल्प (ख) सही विकल्प है
प्रश्न 9. प्रत्येक गैर-निगमित करदाता जिसपर एएमटी के प्रावधान लागू होते हैं, को आय की वापसी के भरने की नियत तिथि को अथवा पूर्व प्रपत्र सं..............में चार्टर्ड अकाउंटेंट से रिपोर्ट प्राप्त करना आपेक्षित है
(क) 29 (ख) 29क
(ग) 29ख (ख) 29ग
सही उत्तर : (घ)
सही उत्तर की प्रमाणिकता
प्रत्येक गैर-निगमित करदाता जिसपर एएमटी के प्रावधान लागू होते हैं, को आय की वापसी के भरने की नियत तिथि को अथवा पूर्व प्रपत्र सं. प्रपत्र सं. 29ग में चार्टर्ड अकाउंटेंट से रिपोर्ट प्राप्त करना आपेक्षित है
इसलिए विकल्प (घ) सही विकल्प है

