आयकर विभाग

वित्त मंत्रालय, भारत सरकार

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धारा 80ददक

भारत से बाहर की गर्इ सेवाओं के लिए प्राप्त पारिश्रमिक के संबंध में कटौती

धारा

धारा संख्या

80ददक

अध्याय शीर्षक

अध्याय VIक - कुल आय की गणना में की जाने वाली कटौतियाँ

अधिनियम

आय-कर अधिनियम, 1961

वर्ष

2019 (सं.2)

भारत से बाहर की गर्इ सेवाओं के लिए प्राप्त पारिश्रमिक के संबंध में कटौती

भारत से बाहर की गर्इ सेवाओं के लिए प्राप्त पारिश्रमिक के संबंध में कटौती

भारत से बाहर की गर्इ सेवाओं के लिए प्राप्त पारिश्रमिक के संबंध में कटौती

80ददक. (1) जहां किसी व्यष्टि की, जो भारत का नागरिक है, सकल कुल आय में ऐसा पारिश्रमिक सम्मिलित है जो उसे भारत के बाहर उसके द्वारा की गर्इ सेवा के लिए किसी नियोजक से (जो विदेशी नियोजक या भारतीय समुत्थान है) विदेशी करेंसी में प्राप्त होता है, वहां इस धारा के उपबंधों के अनुसार और अध्यधीन, ऐसे पारिश्रमिक में से, जो निर्धारिती द्वारा या उसकी ओर से संपरिवर्तनीय विदेशी मुद्रा में उस पूर्ववर्ष की समाप्ति से छह मास की अवधि के भीतर, जो सक्षम प्राधिकारी इस निमित्त अनुज्ञात करे, भारत में लाया जाता है–

(i) 1 अप्रैल, 2001 को आरंभ होने वाले किसी निर्धारण वर्ष के लिए ऐसे पारिश्रमिक के साठ प्रतिशत;

(ii) 1 अप्रैल, 2002 को आरंभ होने वाले किसी निर्धारण वर्ष के लिए ऐसे पारिश्रमिक के पैंतालीस प्रतिशत;

(iii) 1 अप्रैल, 2003 को आरंभ होने वाले किसी निर्धारण वर्ष के लिए ऐसे पारिश्रमिक के तीस प्रतिशत;

(iv) 1 अप्रैल, 2004 को आरंभ होने वाले किसी निर्धारण वर्ष के लिए ऐसे पारिश्रमिक के पंद्रह प्रतिशत,

के बराबर रकम की कटौती अनुज्ञात की जाएगी और 1 अप्रैल, 2005 को प्रारंभ होने वाले निर्धारण वर्ष तथा किसी पश्चात्वर्ती निर्धारण वर्ष की बाबत कोर्इ कटौती अनुज्ञात नहीं की जाएगी :

परन्तु इस उपधारा के अधीन कोर्इ कटौती तब तक अनुज्ञात नहीं की जाएगी जब तक कि निर्धारिती आय की विवरणी के साथ विहित प्ररूप में एक प्रमाणपत्र यह प्रमाणित करते हुए प्रस्तुत न कर दे कि इस धारा के उपबंधों के अनुसार कटौती का दावा ठीक प्रकार से किया जा चुका है।

(2) इस धारा के अधीन कटौती–

(i) ऐसे व्यष्टि की दशा में, जो ऐसी सेवा के ठीक पहले केन्द्रीय सरकार या किसी राज्य सरकार की सेवा में है या था तभी अनुज्ञात की जाएगी जब ऐसी सेवा केन्द्रीय सरकार द्वारा प्रायोजित की जाती है; और

(ii) किसी अन्य व्यष्टि की दशा में, तभी अनुज्ञात की जाएगी जब वह तकनीशियन हो और भारत से बाहर उसकी सेवा के निबंधन और शर्तें केन्द्रीय सरकार या विहित प्राधिकारी द्वारा इस संबंध में अनुमोदित की जाती हैं।

स्पष्टीकरण.– इस धारा के प्रयोजनों के लिए,–

() ''विदेशी करेंसी'' का वही अर्थ होगा जो उसका विदेशी मुद्रा प्रबंध अधिनियम, 1999 (1999 का 42) में है;

() ''विदेशी नियोजक'' का अर्थ है,–

(i) किसी विदेशी राज्य की सरकार; या

(ii) विदेशी उद्यम; या

(iii) भारत के बाहर स्थापित कोर्इ संगम या निकाय;

() ''तकनीशियन'' से ऐसा व्यक्ति अभिप्रेत है जिसे–

(i) निर्माण या विनिर्माण कार्य या खनन या विद्युत या किसी अन्य रूप में शक्ति के उत्पादन या वितरण का; या

(ii) कृषि, पशुपालन, दुग्ध उद्योग, गहरे समुद्र में मछली पकड़ने या पोत निर्माण का; या

(iii) लोक प्रशासन या औद्योगिक या कारबार प्रबंधन का; या

(iv) लेखाकर्म का; या

(v) प्राकृतिक या एप्लाइड साइंस (जिसके अंतर्गत आयुर्विज्ञान भी है) या सामाजिक विज्ञान का; या

(vi) किसी अन्य विषय का, जो बोर्ड इस संबंध में विहित करे,

विशेष ज्ञान या अनुभव है और जो ऐसी हैसियत में नियोजित है जिसमें ऐसे विशेष ज्ञान और अनुभव का वास्तव में उपयोग किया जाता है।

() ''सक्षम प्राधिकारी'' का अर्थ है भारतीय रिजर्व बैंक या ऐसा अन्य प्राधिकारी जिसे विदेशी मुद्रा में संदाय और संव्यवहार को विनियमित करने के लिए तत्समय प्रवृत्त किसी विधि के अधीन प्राधिकृत किया गया है।

 

 

 

[वित्त (सं. 2) अधिनियम, 2019 द्वारा संशोधित रूप में]

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