अनुवर्धित आय पर कर
अध्याय 12ड़ख
कतिपय न्यासों और संस्थाओं की अनुवर्धित आय पर कर से संबंधित विशेष उपबंध
अनुवर्धित आय पर कर
115नघ. 47ककक[(1) इस अधिनियम में अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी, जहां कोई विनिर्दिष्ट व्यक्ति किसी पूर्ववर्ष में-
(क) किसी ऐसे रूप में संपरिवर्तित हो गया है, जो धारा 12कक या धारा 12कख के अधीन रजिस्ट्रीकरण प्रदान किए जाने के लिए या धारा 10 के खंड (23ग) के उपखंड (iv) या उपखंड (v) या उपखंड (vi) या उपखंड (viक) के अधीन, अनुमोदन का पात्र नहीं है;
(ख) किसी ऐसे अस्तित्व, जो इसके लिए समान उद्देश्य रखने वाला कोई न्यास या संस्था है, से भिन्न किसी अन्य अस्तित्व में विलय हो गया है जिसके उद्देश्य उसके समान हैं और वह धारा 12कक या धारा 12कख के अधीन रजिस्ट्रीकृत है या धारा 10 के खंड (23ग) के उपखंड (iv) या उपखंड (v) या उपखंड (vi) या उपखंड (viक) के अधीन अनुमोदित है; या
(ग) जो विघटन पर अपनी सभी आस्तियां किसी अन्य विनिर्दिष्ट व्यक्ति को उस मास के , जिसमें विघटन होता है, अंत से बारह मास की अवधि के भीतर अंतरित करने में असफल रहता है,
तब ऐसे विनिर्दिष्ट व्यक्ति की कुल आय के संबंध में प्रभार्य आय-कर के अतिरिक्त विनिर्दिष्ट तारीख को विनिर्दिष्ट व्यक्ति की अनुवर्धित आय कर से प्रभार्य होगी और ऐसा विनिर्दिष्ट व्यक्ति अनुवर्धित आय- पर अधिकतम सीमांत दर पर अतिरिक्त आय-कर (जिसे इसमें इसके पश्चात् अनुवर्धित आय पर कर के रूप में निर्दिष्ट किया गया हैं ) का संदाय करने के लिए दायी होगा।
(2) उपधारा (1) के प्रयोजनों के लिए अनुवर्धित आय से ऐसी रकम अभिप्रेत है, जिसके द्वारा विनिर्दिष्ट तारीख को विनिर्दिष्ट व्यक्ति की कुल आस्तियों का सकल उचित बाजार मूल्य मूल्यांकन की ऐसी रीति, जो विहित की जाए, के अनुसार संगणित ऐसे विनिर्दिष्ट व्यक्ति के कुल दायित्व से अधिक हो जाता है:
परंतु ऐसी आस्ति से संबंधित इतनी अनुवर्धित आय को जो निम्नलिखित आस्ति और दायित्व के कारण है, यदि कोई हो, उपधारा (1) के प्रयोजनों के लिए छोड़ दिया जाएगा अर्थात्:-
(i) कोई ऐसी आस्ति, जिसके संबंध में यह साबित किया गया है कि जिसका विनिर्दिष्ट व्यक्ति द्वारा धारा 10 के खंड (1) में निर्दिष्ट प्रकृति की उसकी आय में से प्रत्यक्षत: अर्जित किया गया है;
(ii) विनिर्दिष्ट व्यक्ति द्वारा उसके सृजन या स्थापना की तारीख से आरंभ होकर उस तारीख को, जिससे धारा 12कक या धारा 12कख के अधीन रजिस्ट्रीकरण या धारा 10 के खंड (23ग) के अधीन अनुमोदन प्रभावी होता है, समाप्त होने वाली अवधि के दौरान अर्जित ऐसी आस्ति, यदि विनिर्दिष्ट व्यक्ति को उक्त अवधि के दौरान धारा 11 और धारा 12 या धारा 10 के खंड (23ग) के उपखंड (iv) या उपखंड (v) या उपखंड (vi) या उपखंड (viक) का कोई फायदा मंजूर नहीं किया गया है:
परंतु यह और कि जहां विनिर्दिष्ट व्यक्ति को उस तारीख से पूर्व, जिससे धारा 12कक या धारा 12कख के अधीन रजिस्ट्रीकरण या धारा 10 के खंड (23ग) के अधीन अनुमोदन प्रभावी होता है, प्रारंभ होने वाले किसी पूर्ववर्ष या वर्षों की बाबत धारा 11 और धारा 12 या धारा 10 के खंड (23ग) के उपखंड (iv) या उपखंड (v) या उपखंड (vi) या उपखंड (viक) का फायदा, धारा 12क की उपधारा (2) के पहले परंतुक या दूसरे परंतुक या धारा 10 के खंड (23ग) के आठवें परंतुक के उपबंधों के कारण मंजूर किया गया है, वहां पहले परंतुक के खंड (ii) के प्रयोजनों के लिए रजिस्ट्रीकरण या अनुमोदन को पूर्वतम पूर्ववर्ष के प्रथम दिन से प्रभावी हुआ समझा जाएगा:
परंतु यह और भी कि उपधारा (1) के खंड (ग) में निर्दिष्ट किसी मामले के संबंध में अनुवर्धित आय की संगणना करते समय ऐसी आस्तियों और दायित्वों, यदि कोई हों, जो ऐसी आस्ति से संबंधित है, जिसे उक्त खंड में विनिर्दिष्ट अवधि के भीतर किसी अन्य विनिर्दिष्ट व्यक्ति को अंतरित कर दिया गया है, की अनदेखी कर दी जाएगी।;
(3) उपधारा (1) के प्रयोजनों के लिए, कोई विनिर्दिष्ट व्यक्ति किसी पूर्ववर्ष में ऐसे रूप मे संपरिवर्तित समझे जाएंगे, जो धारा 12कक या धारा 12कख के अधीन रजिस्ट्रीकरण धारा 10 के खंड (23ग) के उपखंड (iv) या उपखंड (v) या उपखंड (vi) या उपखंड (viक) के अधीन अनुमोदन कि लिए पात्र न हों, यदि,-
(i) धारा 12कक या धारा 12कख के अधीन इसे प्रदान किया गया रजिस्ट्रीकरण या धारा 10 के खंड (23ग) के उपखंड (iv) या उपखंड (v) या उपखंड (vi) या उपखंड (viक) के अधीन अनुमोदन रद्द कर दिया गया है; या
(ii) इसने अपने उद्देश्यों के उपांतरण को अंगीकार किया है या हाथ में लिया है, जो रजिस्ट्रीकरण की शर्तों के अनुरूप नहीं हैं और-
(क) इसने उक्त पूर्ववर्ष में धारा 12कक या धारा 12कख के अधीन नए रजिस्ट्रीकरण या धारा 10 के खंड (23ग) के उपखंड (iv) या उपखंड (v) या उपखंड (vi) या उपखंड (viक) के अधीन अनुमोदन के लिए आवेदन नहीं किया है; या
(ख) धारा 12कक या धारा 12कख के अधीन नए रजिस्ट्रीकरण या धारा 10 के खंड (23ग) के उपखंड (iv) या उपखंड (v) या उपखंड (vi) या उपखंड (viक) के अधीन अनुमोदन के लिए आवेदन पत्र फाइल किया है, किंतु उक्त आवेदन 1[अस्वीकार कर दिया गया है; या]
2[(iii) वह, धारा 10 के खंड (23ग) के पहले परंतुक के खंड (i) या खंड (ii) या खंड (iii) या धारा 12क की उपधारा (1) के खंड (कग) के उपखंड (i) या उपखंड (ii) या उपखंड (iii) के उपबंधों के अनुसार, यथास्थिति, उक्त खंडों या उपखंडों में विनिर्दिष्ट अवधि के भीतर, जो उक्त पूर्ववर्ष में समाप्त हो गई है, आवेदन करने में असफल रहता है ।]
(4) इस बात के होते हुए भी कि इस अधिनियम के उपबंधों के अनुसार संगणित उसकी कुल आय पर किसी 48कक[न्यास या संस्था] द्वारा कोई आय-कर संदेय नहीं है, उपधारा (1) के अधीन अनुवर्धित आय पर ऐसे 48कक[न्यास या संस्था] द्वारा कर संदेय होगा।
(5) यथास्थिति, प्रधान अधिकारी, या 48कक[विनिर्दिष्ट व्यक्ति] और 48कक[विनिर्दिष्ट व्यक्ति] भी निम्नलिखित तारीख से चौदह दिनों के भीतर अनुवर्धित आय पर कर का संदाय केंद्रीय सरकार के पास जमा करने के लिए दायी होंगे,
(i) उस तारीख को जिसको,–
(क) रजिस्ट्रीकरण को रद्द करने वाले आदेश के विरुद्ध धारा 253 के अधीन अपील फाइल करने की अवधि समाप्त हो जाती है और 48कक[विनिर्दिष्ट व्यक्ति] द्वारा कोई अपील फाईल नहीं की गई है; या
(ख) किसी अपील में रजिस्ट्रीकरण के रद्दकरण की पुष्टि करने वाला आदेश 48कक[विनिर्दिष्ट व्यक्ति] द्वारा प्राप्त किया जाता है,
उपधारा (3) के खंड (i) में निर्दिष्ट मामले में;
(ii) पूर्ववर्ष के अंत पर, उपधारा (3) के खंड (ii) के उपखंड (क) 49क[खंड (ii) या खंड (iii)]
में निर्दिष्ट मामले में;
(iii) उस तारीख को, जिसको,–
(क) आवेदन को नामंजूर करने वाले आदेश के विरुद्ध धारा 253 के अधीन अपील करने की अवधि समाप्त हो जाती है और 48कक[विनिर्दिष्ट व्यक्ति] द्वारा कोई अपील फाइल नहीं की गई है; या
(ख) किसी अपील में आवेदन के रद्दकरण की पुष्टि करने वाला आदेश 48कक[विनिर्दिष्ट व्यक्ति] था द्वारा प्राप्त किया जाता है,
उपधारा (3) के खंड (ii) के उपखंड (ख) में निर्दिष्ट मामले में;
(iv) उपधारा (1) के खंड (ख) में निर्दिष्ट मामले में विलयन की तारीख से;
(v) उस तारीख को जब उपधारा (1) के खंड (ग) में निर्दिष्ट बारह मास की अवधि समाप्त हो ।
(6) किसी 48कक[विनिर्दिष्ट व्यक्ति] द्वारा अनुवर्धित आय पर कर उक्त आय की बाबत कर का अंतिम रूप से संदाय समझा जाएगा और 48कक[विनिर्दिष्ट व्यक्ति] या किसी अन्य व्यक्ति द्वारा इस संबंध में किसी और प्रत्यय का दावा इस प्रकार संदत्त कर की रकम की बाबत नहीं किया जाएगा ।
(7) इस अधिनियम के किसी अन्य उपबंध के अधीन 48कक[विनिर्दिष्ट व्यक्ति] या किसी अन्य व्यक्ति को ऐसी आय की बाबत कोई कटौती अनुज्ञात नहीं की जाएगी जिस पर उपधारा (1) के अधीन कर प्रभारित किया गया हो या उस पर कर लगाया गया हो ।
स्पष्टीकरण– इस धारा के प्रयोजनों के लिए,
(i) "संपरिवर्तन की तारीख" से अभिप्रेत है–
(क) उपधारा (3) के खंड (i) में निर्दिष्ट मामले में 48क[धारा 12कक या धारा 12कख के अधीन रजिस्ट्रीकरण] 48ख[धारा 10 के खंड (23ग) के उपखंड (iv) या उपखंड (v) या उपखंड (vi) या उपखंड (viक) के अधीन अनुमोदन] रद्द करने वाले आदेश की तारीख; या
(ख) उपधारा (3) के खंड (ii) में निर्दिष्ट मामले में किसी उद्देश्य को अंगीकार करने या 49कक[उपांतरित करने की तारीख; या]
2[(ग) उपधारा (3) के खंड (iii) में निर्दिष्ट किसी मामले में, यथास्थिति, धारा 12क की उपधारा (1) के खंड (कग) के उपखंड (i) या उपखंड (ii) या उपखंड (iii) के अधीन रजिस्ट्रीकरण हेतु आवेदन करने या धारा 10 के खंड (23ग) के पहले परंतुक के खंड (i) या खंड (ii) या खंड (iii) के अधीन अनुमोदन हेतु आवेदन करने की अंतिम तारीख ;।]
(ii) "निर्दिष्ट तारीख" से अभिप्रेत है–
(क) उपधारा (1) के खंड (क) के अधीन आने वाले किसी मामले में संपरिवर्तन की तारीख;
(ख) उपधारा (1) के खंड (ख) के अधीन आने वाले किसी मामले में विलयन की तारीख; और
(ग) उपधारा (1) के खंड (ग) के अधीन आने वाले किसी मामले में विघटन की तारीख ।
49खख[(iiक) "विनिर्दिष्ट व्यक्ति" से,-
(क) धारा 10 के खंड (23ग) के उपखंड (iv) या उपखंड (v) या उपखंड (vi) या उपखंड (viक) में निर्दिष्ट किसी निधि या संस्था या न्यास या कोई विश्वविद्यालय या अन्य शैक्षणिक संस्था या कोई अस्पताल या अन्य आयुर्विज्ञान संस्था, अभिप्रेत है; या
(ख) धारा 12कक या धारा 12कख के अधीन रजिस्ट्रीकृत कोई न्यास या संस्था;।
(iii)48क[धारा 12कक या धारा 12कख के अधीन] रजिस्ट्रीकरण में, धारा 12क के अधीन प्राप्त कोई रजिस्ट्रीकरण, जैसा कि वह वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1996 (1996 का 33) द्वारा इसके संशोधन के पूर्व विद्यमान था, सम्मिलित होगा।
[वित्त अधिनियम, 2023 द्वारा संशोधित रूप मेंें]

