आयकर विभाग

वित्त मंत्रालय, भारत सरकार

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परिपत्र सं.

परिपत्र सं. 10/2018

परिपत्र की तिथि

31/12/2018

दस्तावेज़ अपलोड की तिथि

31/12/2018

परिपत्र संख्या 10/2018 [एफ.सं. 173/626/2018-आईटीए-I], दिनांक 31-12-2018

(परिपत्र सं. 02/2019 [(एफ.नं. 173/616/2018-आईटीए-I)], दिनांक 4-1-2019] द्वारा निरस्त

 

आयकर अधिनियम, 1961 ('अधिनियम') की धारा 56(2)(viiक) को उस आय के कराधान के लिए मुहैया कराई गई है जहां एक कंपनी, जिसमें जनता वास्तविक रूप ('निर्दिष्ट कंपनी') से हित नहीं लेती या एक फर्म शून्य या कम प्रतिफल के लिए एक व्यक्ति से एक निर्दिष्ट कंपनी के शेयर प्राप्त करती है।

2. बोर्ड के समक्ष यह प्रतिनिधित्व किया गया है कि अधिनियम की धारा 56(2)(viiक) में प्रयुक्त शब्द 'प्राप्ति', विस्तृत अर्थ के तौर पर और उस मामले में आय के कराधान का कारण हो सकती है जहां शेयर निर्दिष्ट कंपनी द्वारा बोनस शेयर, अधिकार शेयर और उसी प्रकार के पसंदीदा शेयरों या लेनदेन या के निगर्मन के रूप शामिल शेयरों के नए निगर्मन के परिणामस्वरूप एक फर्म या एक निर्दिष्ट कंपनी द्वारा प्राप्त होते हैं।

3. मामले की जांच की गई है, वाक्यांश (viiक) को वित्त अधिनियम, 2010 के द्वारा अधिनियम की धारा 56(2) में शामिल किया गया। ज्ञापन वित्त विधेयक, 2010 के प्रावधानों को स्पष्ट करते हुए, अन्य विषयों के साथ-साथ, कथित वाक्यांश को शामिल करने के लिए निम्नलिखित विधान संबंधी मंशा को मुहैया करता है '-

"असूचीबद्ध शेयरों के उचित बाजारी कीमत से कम मूल्यों पर उनके स्थानांतरण की प्रथा को रोकने के लिए, अपर्याप्त प्रतिफल या शून्य प्रतिफल के लिए एक कंपनी ( उस कंपनी के तौर पर नहीं जिसमें जनता वास्तविक रूप से हित लेती है ) के शेयरों में किए गए लेनदेनों को अपनी सीमा में शामिल करने के लिए भी धारा 56 का संशोधन प्रस्तावित है जहां प्राप्तकर्ता एक फर्म या एक कंपनी है (उस कंपनी के तौर पर नहीं जिसमें जनता वास्तविक रूप से हित लेती है)"

3. विधान संबंधी प्रयोजन से ऐसा प्रतीत होता है कि वाक्यांश (viiक) को शून्य या अपर्याप्त प्रतिफल के लिए एक निर्दिष्ट कंपनी के स्थानांतरित शेयरों की प्रथा से रोकने के प्रतिरोधी प्रावधान के तौर पर अधिनियम की धारा 56(2) में शामिल किया गया था। इसलिए, निर्दिष्ट कंपनी द्वारा उक्त पैरा 2 में निर्दिष्टानुसार शेयरों के नए निगर्मन हेतु कथित वाक्यांश (viiक) के इन प्रावधानों को लागू करने की मंशा कभी नही थी। शून्य या अपर्याप्त प्रतिफल के लिए एक शेयरों के स्थांतरण हेतु धारा 56(2)(viiक) में शामिल प्रतिरोधी प्रावधान को लागू करने के लिए विधान संबंधी अर्थ को देखते हुए एतद्द्वारा स्पष्ट किया जाता है कि अधिनियम की धारा 56(2)(viiक) उस मामले में लागू होगा जहां एक निर्दिष्ट कंपनी या फर्म शून्य या अपर्याप्त प्रतिफल के लिए स्थानांतरण के माध्यम से निर्दिष्ट कंपनी के शेयरों को प्राप्त करती है। इसलिए, अधिनियम की धारा 56(2)(viiक)  के प्रावधान निर्दिष्ट कंपनी द्वारा उक्त पैरा 2 में निर्दिष्टानुसार नए निगर्मन के परिणामस्वरूप निर्दिष्ट कंपनी या फर्म द्वारा शेयरों की प्राप्ति की स्थिति में लागू नहीं होेंगे।