आय-कर की संगणना करने में अनुज्ञात किया जाने वाला रिबेट
अध्याय 8
98[रिबेट और राहत]
99[क.–आय-कर पर रिबेट
आय-कर की संगणना करने में अनुज्ञात किया जाने वाला रिबेट
87. (1) किसी निर्धारिती की कुल आय पर उस आय-कर की रकम की संगणना करने में जो उस पर किसी निर्धारण वर्ष के लिए लग सकता है, आय-कर राशि में से (जो इस अध्याय के अधीन कटौती किए जाने के पूर्व संगणित की गर्इ है) 1[1क[धारा 87क, धारा 88]], 88क, 88ख, 88ग, 88घ, और 88ड़] के उपबंधों के अनुसार और उनके अध्यधीन, उन धाराओं में विनिर्दिष्ट कटौतियां की जाएंगी।
(2) 1ख[धारा 87क या धारा 88] या धारा 88क 2[या धारा 88ख] 3[या धारा 88ग] 4[या धारा 80घ या धारा 80ड़] के अधीन कटौतियों की रकम का योग, किसी भी दशा में, निर्धारिती की कुल आय पर उस आय-कर की रकम से (जो इस अध्याय के अधीन कटौती दिए जाने के पूर्व निकाली गर्इ है), अधिक नहीं होगा जिससे वह किसी निर्धारण वर्ष के लिए प्रभार्य है।
98. वित्त अधिनियम, 1990 द्वारा 1.4.1991 से "आय-कर की बाबत राहत’’ के स्थान पर प्रतिस्थापित। इससे पूर्व वर्तमान शीर्षक वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1967 द्वारा 1.4.1968 से संशोधित किया गया था।
99. वित्त अधिनियम, 1990 द्वारा 1.4.1991 से अंत:स्थापित।
1. वित्त (सं. 2) अधिनियम, 2004 द्वारा 1.4.2005 से "धारा 88, 88क, 88ख और 88ग" शब्दों और अंकों के स्थान पर प्रतिस्थापित। इससे पूर्व ये शब्द वित्त अधिनियम, 1992 द्वारा 1.4.1993 से और वित्त अधिनियम, 2000 द्वारा 1.4.2001 से संशोधित।
1क. वित्त अधिनियम, 2013 द्वारा 1.4.2014 से "धारा 88" शब्द और अंकों के स्थान पर प्रतिस्थापित।
1ख. वित्त अधिनियम, 2013 द्वारा 1.4.2014 से "धारा 88" शब्द और अंकों के स्थान पर प्रतिस्थापित।
2. वित्त अधिनियम, 1992 द्वारा 1.4.1993 से अंत:स्थापित।
3. वित्त अधिनियम, 2000 द्वारा 1.4.2001 से अंत:स्थापित।
4. वित्त (सं. 2) अधिनियम, 2004 द्वारा 1.4.2005 से अंत:स्थापित।
[वित्त (सं. 2) अधिनियम, 2014 द्वारा संशोधित रूप में]

