अपतट बैंककारी यूनिटों और अन्तरराष्ट्रीय वित्तीय सेवा केन्द्र की कतिपय आय की बाबत कटौतियां
अपतट बैंककारी यूनिटों और अन्तरराष्ट्रीय वित्तीय सेवा केन्द्र की कतिपय आय की बाबत कटौतियां
80ठक. 4कक[(1) जहां किसी निर्धारिती की, जो कोई अनुसूचित बैंक या भारत से बाहर किसी विदेश की विधियों द्वारा या उनके अधीन निगमित कोई बैंक है और जिसका कोई विदेशी बैंककारी यूनिट विशेष आर्थिक जोन में अवस्थित है, सकल कुल आय में उपधारा (2) में निर्दिष्ट कोई आय सम्मिलित है, वहां इस धारा के उपबंधों के अनुसार और उनके अधीन रहते हुए, आय से निम्नलिखित रकम के बराबर की कटौती अनुज्ञात की जाएगी,—
(क) उस पूर्ववर्ष से, जिसमें बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949 (1949 का 10) की धारा 23 की उपधारा (1) के खंड (क) के अधीन अनुमति या भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड अधिनियम, 1992 (1992 का 15) या किसी अन्य सुसंगत विधि के अधीन अनुमति या रजिस्ट्रीकरण प्राप्त किया गया था, सुसंगत निर्धारण वर्ष से आरंभ होने वाले पांच क्रमवर्ती निर्धारण वर्षों के लिए ऐसी आय के सौ प्रतिशत और तत्पश्चात्;
(ख) पांच क्रमवर्ती निर्धारण वर्षो के लिए ऐसी आय के पचास प्रतिशत।
2कक[परंतु 1 अप्रैल, 2023 को या उसके पश्चात् आरंभ होने वाले निर्धारण वर्ष के लिए, इस खंड के अधीन कटौती ऐसी आय की एक सौ प्रतिशत होगी ।]
(1क) जहां किसी निर्धारिती की, जो किसी अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय सेवा केंद्र का कोई यूनिट है, सकल कुल आय में उपधारा (2) में निर्दिष्ट कोई आय सम्मिलित है, वहां इस धारा के उपबंधों के अनुसार और उनके अधीन रहते हुए, निर्धारिती के विकल्प पर आय से, उस पूर्ववर्ष से, जिसमें बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949 (1949 का 10) की धारा 23 की उपधारा (1) के खंड (क) के अधीन अनुमति या भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड अधिनियम, 1992 (1992 का 15) 3कक[अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय सेवा केंद्र प्राधिकरण अधिनियम, 2019 (2019 का 50) के अधीन अनुमति या रजिस्ट्रीकरण अभिप्राप्त किया गया था], सुसंगत निर्धारण वर्ष से आरंभ होने वाली पन्द्रह वर्ष की अवधि में से किन्हीं दस क्रमवर्ती निर्धारण वर्षों के लिए ऐसी आय के सौ प्रतिशत रकम के बराबर की कटौती अनुज्ञात की जाएगी।]
(2) उपधारा (1) 4ख[और उपधारा (1क)] में निर्दिष्ट आय—
(क) किसी विशेष आर्थिक जोन में अपतट बैंककारी यूनिट से; या
(ख) किसी विशेष आर्थिक जोन में अवस्थित उपक्रम या किसी अन्य उपक्रम से, जो किसी विशेष आर्थिक जोन का विकास करता है, विकास और प्रचालन करता है या विकास, प्रचालन और अनुरक्षण करता है, बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949 (1949 का 10) की धारा 6 की उपधारा (1) में निर्दिष्ट कारबार से; या
(ग) किसी अंतरराष्ट्रीय वित्तीय सेवा केन्द्र की किसी यूनिट से उसके ऐसे कारबार से, जिसके लिए विशेष आर्थिक जोन का ऐसे केन्द्र में स्थापित करने का अनुमोदन किया गया है, प्राप्त आय होगी।
4खख[(घ) किसी आस्ति के अंतरण से उद्भूत होने वाली, जो कोई वायुयान 1कक[या पोत का इंजन है], जिसे खंड (ग) में निर्दिष्ट किसी यूनिट द्वारा, इस शर्त के अधीन रहते हुए कि ऐसे यूनिट ने 31 मार्च, 4ग[2025] को या उससे पूर्व प्रचालन आरंभ कर दिया है, किसी व्यक्ति को पट्टे पर दिया गया था।
स्पष्टीकरण- इस खंड के प्रयोजनों के लिए, "वायुयान" 1कक[और "पोत"] का वही अर्थ होगा, जो इसका धारा 10 के खंड (4च) के स्पष्टीकरण (क) में है।
(3) इस धारा के अधीन और कटौती तब तक अनुज्ञात की जाएगी जब तक कि निर्धारिती आय की विवरणी के साथ—
(i) धारा 80ठक की उपधारा (2) के खंड (i) के अधीन, जैसी कि वह इस धारा द्वारा उसके प्रतिस्थापन के ठीक पूर्व विद्यमान थी, केन्द्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड द्वारा विनिर्दिष्ट रूप में धारा 288 की उपधारा (2) के नीचे स्पष्टीकरण में यथा परिभाषित लेखापाल की रिपोर्ट यह प्रमाणित करते हुए नहीं दे देता कि कटौती का इस धारा के उपबंध के अंतर्गत सही रूप से दावा किया गया है; और
4खखख[(ii) बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949 (1949 का 10) की धारा 23 की उपधारा (1) के खंड (क) के अधीन प्राप्त की गई अनुमति की एक प्रति या अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय सेवा केंद्र प्राधिकरण, 2019 (2019 का 50) के अधीन अभिप्राप्त अनुमति या रजिस्ट्रीकरण की प्रति.]
स्पष्टीकरण.—इस धारा के प्रयोजनों के लिए,—
(क) "अंतरराष्ट्रीय वित्तीय सेवा केन्द्र" का वही अर्थ है जो विशेष आर्थिक जोन अधिनियम, 2005 की धारा 2 के खंड (थ) में उसका है;
(ख) "अनुसूचित बैंक" का वही अर्थ है जो भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम, 1934 (1934 का 2) की धारा 2 के खंड (ड़) में उसका है;
(ग) "विशेष आर्थिक जोन" का वही अर्थ है जो विशेष आर्थिक जोन अधिनियम, 2005 की धारा 2 के खंड (यक) में उसका है;
(घ) "यूनिट" का वही अर्थ है, जो विशेष आर्थिक जोन अधिनियम, 2005 की धारा 2 के खंड (यग) में उसका है।
[वित्त अधिनियम, 2024 द्वारा संशोधित रूप में]

