आयकर विभाग

वित्त मंत्रालय, भारत सरकार

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धारा 80छ

कुछ निधियों, पूर्त संस्थाओं आदि को दान की बाबत कटौती

धारा

धारा संख्या

80छ

अध्याय शीर्षक

अध्याय VIक - कुल आय की गणना में की जाने वाली कटौतियाँ

अधिनियम

आय-कर अधिनियम, 1961

वर्ष

2024 (सं.1)

कुछ निधियों, पूर्त संस्थाओं आदि को दान की बाबत कटौती

कुछ निधियों, पूर्त संस्थाओं आदि को दान की बाबत कटौती

कुछ निधियों, पूर्त संस्थाओं आदि को दान की बाबत कटौती

80छ. (1) किसी निर्धारिती की कुल आय की संगणना करने में इस धारा के उपबंधों के अनुसार और उनके अधीन रहते हुए निम्नलिखित की कटौती की जाएगी, अर्थात् :–

(i) उस दशा में जिसमें धारा (2) में विनिर्दिष्ट राशियों के योग में उसके खंड () के उपखंड (i)या उपखंड (iiiक) या उपखंड (iiiकक) या उपखंड (iiiकख) या उपखंड (iiiख) या उपखंड (iiiड़) या उपखंड(iiiच) या उपखंड (iiiछ) या उपखंड (iiiछक) या उपखंड(iiiज) या उपखंड (iiiजक) या उपखंड (iiiजख) या उपखंड (iiiजग) या उपखंड (iiiजघ) या उपखंड (iiiजड़) या उपखंड (iiiजच) या उपखंड (iiiजछ) या उपखंड (iiiजज) या उपखंड (iiiजझ) या उपखंड (iiiजञ) या उपखंड (iiiजट) या उपखंड (iiiजठ) या उपखंड (iiiजड) या खंड () के उपखंड (vii)में या खंड () या खंड () में विनिर्दिष्ट कोई राशि या राशियां सम्मिलित हैं, यथास्थिति, ऐसी संपूर्ण राशि के या ऐसी प्रकृति की राशियों के बराबर रकम धन ऐसे योग के अतिशेष का पचास प्रतिशत; और

(ii) किसी अन्य दशा में, उपधारा (2) में विनिर्दिष्ट राशियों के योग के पचास प्रतिशत के बराबर रकम।

(2) उपधारा (1) में निर्दिष्ट राशियां निम्नलिखित होंगी, अर्थात् :–

() ऐसी कोई राशियां, जो पूर्ववर्ष में निर्धारिती द्वारा निम्नलिखित को दान के रूप में संदत्त की गई हैं,–

(i) केन्द्रीय सरकार द्वारा स्थापित राष्ट्रीय रक्षा कोष; या

93खख[(ii) राष्ट्रीय समिति द्वारा 17 अगस्त, 1964 को हुए अपने अधिवेशन में अंगीकृत न्यास घोषणा विलेख में निर्दिष्ट जवाहरलाल नेहरू स्मारक निधि; या]

(iii) प्रधानमंत्री का सूखा सहायता कोष; या

(iiiक) प्रधानमंत्री राष्ट्रीय सहायता कोष 93कग[या आपात स्‍थितियों में प्रधानमंत्री नागरिक सहायता और राहत कोष (पीएम केयर्स फंड)]; या

(iiiकक) प्रधानमंत्री आर्मेनिया भूकंप सहायता कोष; या

(iiiकख) अफ्रीका (लोक अभिदाय-भारत) निधि; या

(iiiख) राष्ट्रीय बाल निधि; या

93खख[(iiiग) इंदिरा गांधी स्मारक न्यास जिसकी बाबत घोषणा विलेख नई दिल्ली में 21 फरवरी, 1985 को रजिस्टर किया गया था; या]

93खख[(iiiघ) राजीव गांधी फाउंडेशन, जिसकी बाबत घोषणा विलेख 21 जून, 1991 को नई दिल्ली में रजिस्टर किया गया था; या]

(iiiड़) राष्ट्रीय साम्प्रदायिक सद्भाव प्रतिष्ठान; या

(iiiच) राष्ट्रीय महत्त्व का कोई विद्यालय या कोई शिक्षा संस्था, जो इस निमित्त विहित प्राधिकारी द्वारा अनुमोदित की जाए; या

(iiiछ) 1 अक्तूबर, 1993 को आरम्भ होने वाली और 6 अक्तूबर, 1993 को समाप्त होने वाली अवधि के दौरान महाराष्ट्र मुख्यमंत्री सहायता कोष अथवा मुख्यमंत्री भूकंप सहायता कोष, महाराष्ट्र; या

(iiiछक) गुजरात में भूकंप पीड़ितों को अनन्य रूप से राहत पहुंचाने के लिए गुजरात की राज्य सरकार द्वारा स्थापित कोई कोष; या

(iiiज) साक्षरता और साक्षरता के बाद के क्रियाकलापों और जिले के ग्रामों तथा कस्बों में प्राथमिक शिक्षा के संवर्धन के प्रयोजनों के लिए उस जिले के कलक्टर की अध्यक्षता के अधीन जिले में गठित जिला साक्षरता समिति।

स्पष्टीकरण.–इस उपखंड के प्रयोजनों के लिए ''कस्बा'' से ऐसा कस्बा अभिप्रेत है जिसकी जनसंख्या उस पूर्व जनगणना के अनुसार एक लाख से अधिक न हो जिसके सुसंगत आंकड़े पूर्ववर्ष के प्रथम दिवस के पूर्व प्रकाशित हो गए हों; या

(iiiजक) राष्ट्रीय रुधिर आधान परिषद या कोई राज्य रुधिर आधान परिषद जिसका एकमात्र उद्देश्य भारत में आपरेशन और रक्त बैंकों की आवश्यकता से संबंधित सेवाओं का नियंत्रण, पर्यवेक्षण, विनियमन करना या उन्हें प्रोत्साहन प्रदान करना हो।

स्पष्टीकरण.–इस उपखंड के प्रयोजनों के लिए,–

() ''राष्ट्रीय रुधिर आधान परिषद'' से ऐसी सोसाइटी अभिप्रेत है जो सोसाइटी रजिस्ट्रीकरण अधिनियम, 1860 (1860 का 21) के अधीन रजिस्ट्रीकृत हो और जिसका अध्यक्ष के रूप में अधिकारी, चाहे उसका कोई भी पदनाम हो, भारत सरकार के अपर सचिव से कम पंक्ति का न हो और एड्स नियंत्रण परियोजना से संबंधित हो;

() ''राज्य रुधिर आधान परिषद'' से राष्ट्रीय रुधिर आधान परिषद के साथ परामर्श से सोसाइटी रजिस्ट्रीकरण अधिनियम, 1860 (1860 का 21) के अधीन या भारत के किसी भी भाग में प्रवृत्त उस अधिनियम की तत्समान विधि के अधीन रजिस्ट्रीकृत सोसाइटी अभिप्रेत है और जिसका अध्यक्ष के रूप में अधिकारी, चाहे उसका कोई भी पदनाम हो, उस राज्य के सचिव से कम पंक्ति का न हो और वह स्वास्थ्य विभाग से संबंधित हो; या

(iiiजख) निर्धनों को चिकित्सीय सहायता प्रदान करने के लिए राज्य सरकार द्वारा स्थापित कोई कोष; या

(iiiजग) रक्षा बलों के वर्तमान और भूतपूर्व सदस्यों या उनके आश्रितों के कल्याण के लिए संघ के सशस्त्र बलों द्वारा स्थापित सेना केन्द्रीय कल्याण कोष या भारतीय नौसेना हितकारी कोष या वायुसेना केन्द्रीय कल्याण कोष; या

(iiiजघ) आंध्र प्रदेश मुख्यमंत्री तूफान राहत कोष, 1996; या

(iiiजड़) राष्ट्रीय रुग्णता सहायता कोष; या

(iiiजच) यथास्थिति, किसी राज्य या संघ राज्यक्षेत्र की बाबत मुख्यमंत्री राहत कोष या उपराज्यपाल राहत कोष :

परन्तु यह कि ऐसा कोष,–

() यथास्थिति, राज्य या संघ राज्यक्षेत्र में स्थापित अपनी किस्म का एकमात्र कोष हो;

() यथास्थिति, राज्य या संघ राज्यक्षेत्र के मुख्य सचिव या वित्त विभाग के समग्र नियंत्रण में हो;

() ऐसी रीति में प्रशासित हो जैसा कि, यथास्थिति, राज्य सरकार या उपराज्यपाल विनिर्दिष्ट करे; या

(iiiजछ) केन्द्रीय सरकार द्वारा स्थापित राष्ट्रीय खेलकूद कोष; या

(iiiजज) केन्द्रीय सरकार द्वारा स्थापित राष्ट्रीय संस्कृति कोष; या

(iiiजझ) केन्द्रीय सरकार द्वारा स्थापित प्रौद्योगिकी विकास और उपयोजन कोष, या

(iiiजञ) राष्ट्रीय स्वपरायणता, प्रमस्तिष्क घात, मानसिक मंदता और बहु-नि:शक्तताग्रस्त व्यक्ति कल्याण न्यास अधिनियम, 1999 (1999 का 44) की धारा 3 की उपधारा (1) के अधीन गठित राष्ट्रीय स्वपरायणता, प्रमस्तिष्क घात, मानसिक मंदता और बहु-नि:शक्तताग्रस्त व्यक्ति कल्याण न्यास; या

(iiiजट) केंद्रीय सरकार द्वारा स्थापित स्वच्छ भारत कोष, ऐसी राशि जो निर्धारिती द्वारा कंपनी अधिनियम, 2013 (2013 का 18) की धारा 135 की उपधारा (5) के अधीन कारपोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व के अनुसरण में खर्च की गई है, राशि से भिन्न है;

(iiiजठ) केंद्रीय सरकार द्वारा स्थापित स्वच्छ गंगा निधि, जहां ऐसा निर्धारिती निवासी है और ऐसी राशि, जो निर्धारिती द्वारा कंपनी अधिनियम, 2013 (2013 का 18) की धारा 135 की उपधारा (5) के अधीन कारपोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व के अनुसरण में खर्च की गई है, राशि से भिन्न है;

(iiiजड) स्वापक औषधि और मन:प्रभावी पदार्थ अधिनियम, 1985 (1985 का 61) की धारा 7क के अधीन गठित राष्ट्रीय औषधि दुरुपयोग नियंत्रण निधि; या

(iv) कोई अन्य निधि या कोई संस्था जिसे यह धारा लागू होती है; या

(v) सरकार को या किसी स्थानीय प्राधिकारी को किसी परिवार नियोजन को प्रोन्नत करने के प्रयोजन से भिन्न किसी पूर्त प्रयोजन के लिए उपयोगार्थ; या

(vi) आवास सुविधा की आवश्यकता के संबंध में कार्रवाई करने और उसे पूरा करने के प्रयोजनार्थ या शहरों, नगरों और गांवों की योजना बनाने, विकास या सुधार करने के प्रयोजनार्थ या दोनों के प्रयोजनार्थ अधिनियमित किसी विधि द्वारा या उसके अधीन भारत में गठित कोई प्राधिकरण;

(viक) धारा 10 के खंड (26खख) में निर्दिष्ट कोई निगम; या

(vii) सरकार को या किसी ऐसे स्थानीय प्राधिकारी, संस्था या संगम को, जिसे केन्द्रीय सरकार इस निमित्त अनुमोदित करे, परिवार नियोजन को प्रोन्नत करने के प्रयोजन के लिए;

() किसी मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारे, गिरजाघर या ऐसे अन्य स्थान के, जिसका ऐतिहासिक, पुरातत्वीय या कलात्मक महत्त्व का होना अथवा किसी राज्य या राज्यों के सर्वत्र विख्यात लोक पूजा का स्थान होना केन्द्रीय सरकार द्वारा राजपत्र में अधिसूचित किया गया है, नवीकरण या मरम्मत के लिए दान के रूप में पूर्ववर्ष में निर्धारिती द्वारा भुगतान की गई राशियां।

() निर्धारिती द्वारा जो कोई कंपनी है, पूर्ववर्ष में दान के रूप में भारतीय ओलंपिक एसोसिएशन या भारत में स्थापित किसी अन्य एसोसिएशन या संस्था को, जिसे केन्द्रीय सरकार विहित मार्गदर्शक सिद्धांतों को ध्यान में रखते हुए राजपत्र में अधिसूचना द्वारा विनिर्दिष्ट करे निम्नलिखित के लिए दी गई कोई राशियां,–

(i) भारत में क्रीड़ा और खेलकूद के संबंध में अवसंरचना के विकास के लिए; या

(ii) भारत में क्रीड़ा और खेलकूद के प्रयोजन के लिए;

() निर्धारिती द्वारा 26 जनवरी, 2001 को प्रारम्भ और 30 सितंबर, 2001 को समाप्त होने वाली अवधि के दौरान गुजरात में भूकंप पीड़ितों की सहायता के लिए किसी ऐसे ट्रस्ट, संस्था या कोष में संदत्त कोई राशियां, जिसे यह धारा लागू होती हो।

(3) [वित्त अधिनियम, 1994 द्वारा 1.4.1994 से लोप किया गया।]

(4) जहां उपधारा (1) के खंड () के उपखंड (iv), उपखंड (v), उपखंड (vi), उपखंड (viक) और उपखंड (vii) में खंड () और खंड () में निर्दिष्ट राशियों का योग सकल कुल आय के (जिसमें से उसका वह भाग घटा दिया जाएगा जिस पर आय-कर इस अधिनियम के किसी उपबंध के अधीन भुगतान योग्य नहीं है, और वह रकम भी घटा दी जाएगी जिसकी बाबत निर्धारिती इस अध्याय के किसी अन्य उपबंध के अधीन कटौती का हकदार है) दस प्रतिशत से अधिक है तो वह रकम, जो सकल कुल आय के दस प्रतिशत से अधिक है, उन राशियों के योग की संगणना करने के प्रयोजन के लिए छोड़ दी जाएगी जिनकी बाबत उपधारा (1) के अधीन कटौती अनुज्ञात की जानी है।

(5) यह धारा उपधारा (2) के खंड (क) के उपखंड (iv) में निर्दिष्ट किसी संस्था को या निधि को दिए दान को केवल तभी लागू होती है जबकि वह किसी पूर्त प्रयोजन के लिए भारत में स्थापित है और वह निम्नलिखित शर्तों को पूरा करती है, अर्थात् :–

(i) जहां संस्था या निधि को कोई आय होती है, वहां ऐसी आय धारा 11 और 12 या धारा 10 के या खंड (23कक) या खंड (23ग) के उपबंधों के अधीन उसकी कुल आय में सम्मिलित नहीं की जा सकेगी :

परन्तु जहां किसी संस्था या निधि को होने वाली कोई ऐसी आय है, जो कारबार का लाभ और अभिलाभ है, वहां यह शर्त कि ऐसी आय धारा 11 के उपबंधों के अधीन उसकी कुल आय में सम्मिलित नहीं की जा सकेगी, ऐसी आय के संबंध में तब लागू होगी जब,–

() वह संस्था या निधि ऐसे कारबार की बाबत पृथक लेखा बहियां रखती है;

() उस संस्था या निधि को किए गए दान का ऐसे कारबार के प्रयोजनों के लिए उसके द्वारा प्रत्यक्षत: या अप्रत्यक्षत: प्रयोग नहीं किया जाता है; और

() वह संस्था या निधि दान करने वाले व्यक्ति को इस आशय का प्रमाणपत्र जारी करती है कि वह ऐसे कारबार की बाबत पृथक लेखाबहियां रखती है और उसके द्वारा प्राप्त किए गए दान का ऐसे कारबार के प्रयोजनों के लिए प्रत्यक्षत: या अप्रत्यक्षत: प्रयोग नहीं किया जाएगा;

(ii) उस लिखत में, जिसके अधीन संस्था या निधि गठित की गई है या संस्था अथवा निधि को शासित करने वाले नियमों में कोई ऐसा उपबंध उल्लिखित नहीं है जो उस संस्था या निधि की संपूर्ण आय या आस्ति या उसके किसी भाग का किसी भी समय अंतरण या उपयोजन पूर्त प्रयोजन से भिन्न किसी भी प्रयोजन के लिए करने के लिए हो;

(iii) उस संस्था या निधि का, किसी विशिष्ट धार्मिक समुदाय या जाति के फायदे के लिए होना स्पष्ट नहीं है;

(iv) वह संस्था या निधि अपनी प्राप्तियों और व्यय के नियमित लेखे रखती है;

(v) वह संस्था या निधि, जो लोक पूर्त न्यास के रूप में गठित हैं या सोसायटी रजिस्ट्रीकरण अधिनियम, 1860 (1860 का 21) के अधीन अथवा उक्त अधिनियम के समान किसी ऐसी विधि के अधीन जो भारत के किसी भाग में प्रवृत्त हो, या कंपनी अधिनियम, 1956 (1956 का 1) की धारा 25 के अधीन रजिस्ट्रीकृत है या विधि द्वारा स्थापित विश्वविद्यालय है या कोई अन्य शिक्षा संस्था है जो सरकार से अथवा विधि द्वारा स्थापित विश्वविद्यालय से मान्यताप्राप्त है, या विधि द्वारा स्थापित किसी विश्वविद्यालय से सम्बद्ध है या ऐसी संस्था है जो सरकार या किसी स्थानीय प्राधिकारी द्वारा पूर्णत: या भागत: वित्त पोषित है;

(vi) 31 मार्च, 1992 के पश्चात् किए गए दानों के संबंध में, वह संस्था या निधि, 93कघ[प्रधान आयुक्त या आयुक्त द्वारा अनुमोदित ]

(vii) जहां किसी संस्था या निधि का 1 अप्रैल, 2007 से आरंभ होने वाले और 31 मार्च, 2008 को समाप्त होने वाले पूर्ववर्ष के लिए खंड (vi) के अधीन अनुमोदन किया गया था, वहां इस धारा के प्रयोजनों के लिए और धारा 2 के खंड (15) के परंतुक में किसी बात के होते हुए भी ऐसी संस्था या निधि,–

() 1 अप्रैल, 2008 को आरंभ होने वाले और 31 मार्च, 2009 को समाप्त होने वाले पूर्ववर्ष के लिए पूर्त प्रयोजनों के लिए स्थापित; और

() 1 अप्रैल, 2008 को आरंभ होने वाले और 31 मार्च, 2009 को समाप्त होने वाले पूर्ववर्ष के लिए उक्त खंड (vi) के अधीन अनुमोदित,

की गई समझी जाएगी।

93ख[(viii) संस्था या निधि ऐसे विवरण, ऐसी अवधि के लिए तैयार करेगी जो विहित की जाए और विहित आयकर प्राधिकारी या ऐसे प्राधिकारी द्वारा प्राधिकृत व्यक्ति को ऐसे प्रारूप में प्रदान करेगी या परिदान करना पारित करेगा और ऐसी रीति से सत्यापित करेगी तथा ऐसी विशिष्टियों को ऐसे समय के भीतर, जो विहित किया जाए, उपवर्णित करेगी :

परन्तु यह कि संस्था या निधि उक्त विहित प्राधिकारी को निम्नलिखित का परिदान भी करेगी () किसी गलती को सुधारने के लिए संशोधन विवरण या उस उपधारा के अधीन ऐसे प्ररूप में और ऐसे रीति में सत्यपित, जो विहित किया जाए, परिदत्त विवरण में दी गई जानकारी को जोड़ना, हटाना या अद्यतन करना ; और

(ix) संस्था या निधि दाता को, विशिष्टियों से युक्त ऐसी रीति में और दान की प्राप्ति की तारीख से ऐसे समय के भीतर, जो विहित किया जाए, दान की राशि विनिर्दिष्ट करने वाला एक प्रमाणपत्र देगी ।]

परंतु खंड (vi) में निर्दिष्ट संस्था या निधि अनुमोदन प्रदान के लिए प्रधान कमिश्नर या कमिश्नर को विहित प्ररूप और रीति में एक आवेदन करेगी—

(i) जहां ऐसा संस्‍थान या निधि 1 अप्रैल, 2021 से, तीन मास की अवधि के भीतर खंड (vi) [जैसा कि वह कराधान और अन्य़ विधि (कतिपय उपबंधों का शिथिलीकरण और संशोधन) अधिनियम, 2020 (2020 का 12), द्वारा उसका संशोधन किए जाने से पूर्व था] अनुमोदित किया जाता है ;

(ii) जहां ऐसा संस्‍थान या निधि अनुमोदित की जाती है और ऐसे अनुमोदन की अवधि, उस अवधि की समाप्‍ति से कम से कम छह माह पूर्व समाप्‍त होने वाली है ;

(iii) जहां संस्‍थान या निधि अनंतिम अनुमोदन अवधि समाप्‍त होने के कम से कम छह मास पहले या उसके क्रियाकलापों के प्रारंभ होने के छह मास के भीतर, जो भी पहले हो अनंतिम रूप से अनुमोदित की गई है ;

93गग[(iv) किसी अन्य दशा में, जहां संस्था या निधि ने,—

(अ) उस निर्धारण वर्ष, जिससे उक्त अनुमोदन की ईप्सा की गई है, से सुसंगत पूर्व वर्ष के आरंभ से कम से कम एक मास पूर्व कार्यकलाप आरंभ नहीं किया है ;

(आ) कार्यकलाप आरंभ कर दिया है और जहां उक्त संस्था या निधि की किसी आय या उसके किसी भाग को, ऐसे कार्यकलाप आरंभ करने के पश्चात् किसी समय ऐसे आवेदन की तारीख को या उससे पूर्व समाप्त होने वाले किसी पूर्व वर्ष के लिए धारा 10 के खंड (23ग) के उपखंड (iv) या उपखंड (v) या उपखंड (vi) या उपखंड (viक) या धारा 11 या धारा 12 के लागू होने के कारण कुल आय से अपवर्जित किया गया है :]

परंतु यह और कि प्रधान आयुक्‍त या आयुक्‍त पहले परंतुक के अधीन किए गए किसी आवेदन की प्राप्‍ति पर—

(i) जहां आवेदन उक्‍त परंतुक के खंड (i) के अधीन किया जाता है पांच वर्ष की अवधि के लिए उसे अनुमोदन प्रदान करते हुए एक लिखित आदेश पारित करेगा ;

(ii) जहां आवेदन उक्‍त परंतुक के खंड (ii) या खंड (iii) 93घघ[या खंड (iv) का उपखंड (ख)] के अधीन किया जाता है,—

() उससे ऐसे दस्‍तावेज या सूचना मांग सकेगा या और निम्‍नलिखित के संबंध में स्‍वयं का समाधान करने के क्रम में ऐसी जांच कर सकेगा जो वह उचित समझे—

() ऐसी संस्‍था या निधि के क्रियाकलापों की मौलिकता ; और

() खंड (i) से खंड (v) में अधिकथित सभी शर्तों को पूरा करना;

() उक्‍त खंड (क) की मद (अ) के अधीन क्रियाकलापों की मौलिकता के बारे में उसका समाधान होने और मद (आ) के अधीन सभी शर्तों के पूरा होने के पश्‍चात्—

() पांच वर्ष की अवधि के लिए उसे अनुमोदन प्रदान करते हुए, एक लिखित आदेश पारित करेगा; या

93घक[(आ) यदि उसका समाधान नहीं होता है तो वह सुनवाई का युक्तियुक्त अवसर दिए जाने के पश्चात्,—

 (I)  पहले परंतुक के खंड (ii) या खंड (iii) में निर्दिष्ट किसी मामले में ऐसे आवेदन को नामंजूर करते हुए और साथ ही उसके अनुमोदन को रद्द करते हुए लिखित आदेश पारित करेगा ; या

(II) पहले परंतुक के खंड (iv) के उपखंड (आ) में निर्दिष्ट किसी मामले में ऐसे आवेदन को नामंजूर करते हुए लिखित आदेश पारित करेगा ;]

93घघघ[(iii) जहां आवेदन उक्त परंतुक के खंड (iv) के उपखंड (अ) के अधीन किया गया है या आवेदन उक्त परंतुक के खंड (iv), जैसा कि वह वित्त अधिनियम, 2023 द्वारा उसके संशोधन से ठीक पूर्व यथाविद्यमान था, के अधीन किया गया है, वहां वह उस निर्धारण वर्ष, जिससे अनुमोदन की ईप्सा की गई है, से तीन वर्ष की अवधि के लिए अनंतिम रूप से अनुमोदन मंजूर करते हुए लिखित आदेश पारित करेगा,]

और ऐसे आदेश की एक प्रति संस्‍थान या निधि को भेजेगा :

परंतु यह भी कि 94घघघक[दूसरे परंतुक] के खंड (i), खंड (ii) के उपखंड (ख) और खंड (iii) के अधीन आदेश उस माह के अंत से जिसमें आवेदन प्राप्‍त किया गया है, प्रकल्‍पित क्रमश: तीन मास, छह मास और एक मास की अवधि की समाप्‍ति से पहले ऐसे प्ररूप और रीति में जो विहित की जाए आदेश पारित किया जाएगा :

परंतु यह भी कि दूसरे परंतुक के अधीन प्रदान किया गया अनुमोदन संस्‍थान या निधि को लागू होगा जहां ऐसा आवेदन, —

() पहले परंतुक के खंड (i) के अधीन, उस निर्धारण वर्ष से जिससे ऐसे संस्‍थान या निधि को अनुमोदन पूर्व में प्रदान किया गया था, किया गया है ;

() पहले परंतुक के खंड (iii) के अधीन, पहले निर्धारण वर्ष से जिसके लिए ऐसे संस्‍थान या निधि को अनंतिम रूप से अनुमोदित किया गया था, किया गया है;

() किसी अन्‍य मामले में, उस वित्‍तीय वर्ष जिसमें ऐसा आवेदन किया जाता है के अव्‍यवहित आगामी निर्धारण वर्ष से किया गया है।

(5क) जहां उपधारा (2) में उल्लिखित किसी राशि की बाबत किसी निर्धारण वर्ष के लिए इस धारा के अधीन किसी कटौती का दावा किया जाता है और वह अनुज्ञात की जाती है वहां वह राशि जिसकी बाबत इस प्रकार कटौती अनुज्ञात की गई है, उसी या किसी अन्य निर्धारण वर्ष के लिए इस अधिनियम के किसी अन्य उपबंध के अधीन कटौती के लिए अर्ह नहीं होगी।

(5ख) उपधारा (5) के खंड (ii) और स्पष्टीकरण 3 में किसी बात के होते हुए भी, किसी पूर्ववर्ष में ऐसा खर्च उपगत करने वाली कोई संस्था या निधि, जो धार्मिक प्रकृति की है, जो पूर्ववर्ष में उसकी कुल आय के पांच प्रतिशत से अधिक रकम की न हो, ऐसी संस्था या निधि समझी जाएगी जिसे इस धारा के उपबंध लागू होते हैं।

(5ग) यह धारा उपधारा (2) के खंड () में निर्दिष्ट रकमों की बाबत केवल तब लागू होती है यदि न्यास या संस्था या निधि भारत में किसी पूर्त प्रयोजन के लिए स्थापित की गई हो और निम्नलिखित शर्तें पूरी करती हो, अर्थात् :–

(i) यह उपधारा (5) के खंड (vi) के निबंधनों के अनुसार अनुमोदित है;

(ii) यह गुजरात में भूकंप पीड़ितों को राहत पहुंचाने के लिए आय और व्यय के पृथक् खाते रखती है;

(iii) न्यास या संस्था या निधि को दिए गए दानों का उपयोग केवल गुजरात के भूकंप पीड़ितों को राहत पहुंचाने के लिए 31 मार्च, 2004 को या उसके पूर्व किया गया हो;

(iv) 31 मार्च, 2004 को संदाय की अनुपयोगित शेष रकम 31 मार्च, 2004 को या उसके पूर्व प्रधानमंत्री राष्ट्रीय सहायता कोष में अंतरित कर दी गई हो;

(v) इसने अपनी आय और व्यय का हिसाब-किताब ऐसे प्राधिकारी के समक्ष और ऐसी रीति में 30 जून, 2004 को या उसके पूर्व प्रस्तुत किया हो, जो विहित किए जाएं।

(5घ) इस धारा के अधीन 94[दो] हजार रुपए से अधिक की किसी राशि के दान के संबंध में कटौती तब तक अनुज्ञात नहीं की जाएगी, जब तक ऐसी राशि का संदाय नकद से भिन्न किसी ढंग से नहीं किया जाता है।

94क[(5ङ) आयुक्‍त के समक्ष लंबित सभी आवेदनों को जिन पर उस तारीख को जिसको यह उपधारा प्रवृत्‍त हुई है से पहले उपधारा (5) के खंड (vi) के अधीन कोई आदेश पारित नहीं किया गया है उपधारा (5) के पहले परंतुक के खंड (iv) के अधीन उस तारीख को किए गए आवेदन समझे जाएंगे।]

(6) [***]

स्पष्टीकरण 1–अनुसूचित जातियों, पिछड़े वर्गों, अनुसूचित जनजातियों के या स्त्रियों अथवा बच्चों के फायदे के लिए स्थापित किसी संस्था या निधि को ऐसी संस्था या निधि नहीं समझा जाएगा, जिसका कि उपधारा (5) के खंड (iii) के अर्थ में किसी धार्मिक समुदाय या जाति के फायदे के लिए होना अभिव्यक्त है।

स्पष्टीकरण 2–शंकाओं को दूर करने के लिए यह घोषित किया जाता है कि किसी कटौती से, जिसके लिए निर्धारिती किसी ऐसी संस्था या निधि को, जिसे उपधारा (5) लागू होती है, दिए गए किसी दान की बाबत हकदार है, निम्नलिखित में से किसी एक अथवा दोनों कारणों से ही इन्कार नहीं किया जाएगा, अर्थात्:–

(i) कि धारा 11, धारा 12 या धारा 12क के उपबंधों में से किसी के अननुपालन के कारण संस्था अथवा निधि की आय का कोई भाग दान के बाद कर से प्रभार्य हो गया है;

(ii) कि संस्था या निधि को धारा 13 की उपधारा (2) के खंड() में अंकित किसी विनिधान से प्राप्त होने वाली किसी आय के संबंध में धारा 11 या धारा 12 के अधीन दी जाने वाली छूट से धारा 13 की उपधारा (3) के खंड () के अधीन उस दशा में इन्कार किया जाता है जब उसके द्वारा उक्त खंड () में निर्दिष्ट किसी समुत्थान में विनिहित निधियों का योग उस समुत्थान की पूंजी के पांच प्रतिशत से अधिक न हो।

94कख[स्पष्टीकरण 2क—शंकाओं को दूर करने के लिए यह घोषित किया जाता है कि किसी संस्था या ऐसी निधि, जिसके द्वारा फाइल किए गए किसी निर्धारण वर्ष के लिए आय की विवरणी में, जिस पर उपधारा (5) के उपबंध लागू होते हैं, किए गए किसी स्दाय के संबंध में कटौती के लिए निर्धारिती का दावा समय-समय पर बोर्ड द्वारा विरचित जोखिम प्रबंध युक्ति के अनुसरण में सत्यापन के अधीन, ऐसे प्राधिकरण द्वारा विहित किए गए आयकर प्राधिकरण या प्राधिकृत व्यक्ति के लिए संस्था अथवा निधि द्वारा प्रस्तुत कुए गए उक्त दान के संबंध में जानकारी के आधार पर अनुज्ञात किया जाएगा।]

स्पष्टीकरण 3.–इस धारा में ''पूर्त प्रयोजन'' के अंतर्गत ऐसा कोई प्रयोजन नहीं है जो पूर्ण रूप से या पर्याप्तत: पूर्ण रूप से धार्मिक स्वरूप का है।

स्पष्टीकरण 4.–इस धारा के प्रयोजनों के लिए, ऐसा कोई संगम या संस्था, जिसका उद्देश्य भारत में ऐसे खेलों या क्रीड़ाओं का, जिन्हें केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा विनििर्र्दष्ट करे, नियंत्रण, अधीक्षण, विनियमन या प्रोत्साहन करना है, भारत में पूर्त प्रयोजन के लिए स्थापित संस्था मानी जाएगी।

स्पष्टीकरण 5.–शंकाओं को दूर करने के लिए यह घोषित किया जाता है कि इस धारा के अधीन किसी दान की बाबत कोई कटौती तब तक अनुज्ञात नहीं की जाएगी जब तक कि ऐसा दान धन के रूप में नहीं है।

 

93कग. कराधान और अन्य विधि (कतिपय उपबंधो का शिथिलीकरण और संशोधन) अधिनियम, 2020 द्वारा भूतलक्षी प्रभाव से 1.4.2020 से अंत:स्थापित।

93कघ. कराधान और अन्य विधि (कतिपय उपबंधो का शिथिलीकरण और संशोधन) अधिनियम, 2020 द्वारा 1.4.2021 से "इस निमित्त बनाए गए नियमों के अनुसार आयुक्त द्वारा अनुमोदित; और" शब्दों के स्थान पर प्रतिस्थापित। इससे पूर्व कराधान और अन्य विधि (कतिपय उपबंधो का शिथिलीकरण और संशोधन) अधिनियम, 2020 द्वारा भूतलक्षी प्रभाव से 1.6.2020 "प्रधान आयुक्त या आयुक्त द्वारा अनुमोदित" शब्दों के स्थान पर तथा वित्त अधिनियम, 2020 द्वारा 1.6.2020 से प्रतिस्थापित।

93ख. कराधान और अन्य विधि (कतिपय उपबंधो का शिथिलीकरण और संशोधन) अधिनियम, 2020 द्वारा 1.4.2021 से अतंस्थापित। इससे पूर्व कराधान और अन्य विधि (कतिपय उपबंधो का शिथिलीकरण और संशोधन) अधिनियम, 2020 द्वारा भूतलक्षी प्रभाव से 1.6.2020 से लोप किया गया। लोप से पूर्व वित्त अधिनियम, 2020 द्वारा 1.6.2020 से अंत:स्थापित किया गया जो निम्न प्रकार था।

''(viii) संस्था या निधि ऐसे विवरण, ऐसी अवधि के लिए तैयार करती है, जो विहित की जाए और विहित आय-कर प्राधिकारी या ऐसे प्राधिकारी द्वारा प्राधिकृत व्यक्ति को ऐसे विवरण, ऐसे प्ररूप में परिदत्त ऐसी रीति में सत्यापित और ऐसी विशिष्टियां देते हुए, ऐसे समय के भीतर जो विहित किया जाए, परिदत्त करती है या करवाती है :

परंतु संस्था या निधि विहित प्राधिकारी को किसी त्रुटि का सुधर करने के लिए कोई सही किया हुआ विवरण भी परिदत्त कर सकेगी या इस उपधारा के अधीन प्रस्तुत विवरण में कोई वर्धन, लोप कर सकेगा या सूचना को ऐसे प्ररूप में अद्यतन कर सकेगा और ऐसी रीति में सत्यापित कर सकेगा, जो प्राधिकारी द्वारा विहित की जाए; और

(ix) संस्था या निधि दानकर्ता को ऐसी रीति में दान की रकम को विनिर्दिष्ट करते हुए, जिसमें ऐसी विशिष्टियां अंतर्विष्ट होंगी, दान की प्राप्ति की तारीख से ऐसे समय के भीतर, जो विहित किया जाए, एक प्रमाणपत्र प्रस्तुत करेगी:

परंतु खंड (vi) में निर्दिष्ट संस्था या निधि अनुमोदन अनुदत्त करने के लिए प्रधान आयुक्त या आयुक्त को विहित प्ररूप और रीति में,—

(i) जहां संस्था या निधि को खंड (vi) के अधीन (जैसा कि वह वित्त अधिनियम, 2020 द्वारा उसका संशोधन किए जाने के ठीक पूर्व था) इस परंतुक के प्रभावी होने की तारीख से तीन मास के भीतर, आवेदन करेगी;

(ii) जहां संस्था या निधि का अनुमोदन किया जाता है और ऐसे अनुमोदन की अवधि अवसान होने को है, ऐसी अवधि के अवसान से कम से कम छह मास पूर्व, आवेदन करेगी;

(iii) जहां संस्था या निधि का अनंतिम रूप से अनुमोदन किया गया है, अनंतिम अनुमोदन की अवधि के अवसान से कम से कम छह मास पूर्व या उसके कार्यकलाप प्रारंभ होने के छह मास के भीतर, इनमें से जो भी पूर्वत्तर हो, आवेदन करेगी;

(iv) किसी अन्य दशा में, उस निर्धारण वर्ष से सुसंगत पूर्ववर्ष के प्रारंभ होने से कम से कम एक मास पूर्व, जिससे उक्त अनुमोदन की ईप्सा की गई है, आवेदन करेगी:

परंतु यह और कि प्रधान आयुक्त या आयुक्त पहले परंतुक के अधीन किए गए किसी आवेदन की प्राप्ति पर,—

(i) जहां आवेदन उक्त परंतुक के खंड (i) के अधीन किया गया है, उसे पांच वर्ष की अवधि के लिए अनुमोदन अनुदत्त करते हुए एक लिखित आदेश पारित करेगा;

(ii) जहां आवेदन उक्त परंतुक के खंड (ii) या खंड (iii) के अधीन किया जाता है, वहां—

() उससे ऐसे दस्तावेजों या सूचना की मांग करेगा या ऐसी जांच करेगा, जैसा वह निम्नलिखित के संबंध में स्वयं का समाधन करने के लिए आवश्यक समझे,—

() ऐसी संस्था या निधि के कार्यकलापों की वास्तविकता; और

() खंड (i) से खंड (v) तक में अधिकथित सभी शर्तों का पूरा किए जाने; और

() मद () के अधीन कार्यकलापों की वास्तविकता के संबंध में और उपखंड () की मद () के अधीन सभी शर्तों को पूरा किए जाने के संबंध में स्वयं का समाधन करने के पश्चात्, —

(अ) पांच वर्ष की अवधि के लिए अपना अनुमोदन अनुदत्त करते हुए एक लिखित आदेश पारित करेगा;

(आ) यदि उसका समाधान नहीं होता है तो उसे सुने जाने का युक्तियुक्त अवसर प्रदान करने के पश्चात्, आवेदन को नामंजूर करते हुए और अपने अनुमोदन को भी रद्द करते हुए लिखित आदेश पारित करेगा;

(iii) जहां आवेदन उक्त परंतुक के खंड (iv) के अधीन है, वहां उस निर्धारण वर्ष, जिससे रजिस्ट्रीकरण की ईप्सा की गई है, से तीन वर्ष की अवधि के लिए अनंतिम रूप से अनुमोदन अनुदत्त करते हुए लिखित आदेश पारित करेगा,

और ऐसे आदेश की प्रति संस्था या निधि को भेजेगा:

परंतु यह भी कि पहले परंतुक के खंड (i), खंड (ii) के उपखंड () और खंड (iii) के अधीन आदेश ऐसे प्ररूप और ऐसी रीति में क्रमश: तीन मास, छह मास और एक मास की अवधि, जिसकी गणना उस मास के अंत से की जाएगी, जिसमें आवेदन प्राप्त हुआ था, के अवसान से पूर्व पारित किया जाएगा:

परंतु यह भी कि दूसरे परंतुक के अधीन अनुदत्त अनुमोदन किसी संस्था या निधि को लागू होगा, जहां आवेदन,—

() उस निर्धारण वर्ष से, जिसमें ऐसी संस्था या निधि को पूर्व में अनुमोदन अनुदत्त किया गया था, पहले परंतुक के खंड (i) के अधीन किया जाता है;

() उन निर्धारण वर्षों, जिनके लिए ऐसी संस्था या निधि को अनंतिम रूप से अनुमोदित किया गया था, में से पहले निर्धारण वर्ष के लिए पहले परंतुक के खंड (iii) के अधीन किया जाता है;

() किसी अन्य दशा में, उस वित्तीय वर्ष से तुरंत पश्चात्वर्ती निर्धारण वर्ष से, जिसमें ऐसा अनुमोदन किया जाता है।'';

94. वित्त अधिनियम, 2017 द्वारा 1.4.2018 से ''दस'' के स्थान पर प्रतिस्थापित।

94क. कराधान और अन्य विधि (कतिपय उपबंधो का शिथिलीकरण और संशोधन) अधिनियम, 2020 द्वारा 1.4.2021 से अतंस्थापित। इससे पूर्व कराधान और अन्य विधि (कतिपय उपबंधो का शिथिलीकरण और संशोधन) अधिनियम, 2020 द्वारा भूतलक्षी प्रभाव से 1.6.2020 से लोप किया गया। लोप से पूर्व खंड (5ड़) वित्त अधिनियम, 2020 द्वारा 1.6.2020 से अंत:स्थापित किया गया जो निम्न प्रकार था:

''(5ड़) आयुक्त के समक्ष लंबित सभी आवेदनों को, जिन पर उपधारा (5) के खंड (vi) के अधीन उस तारीख से पूर्व कोई आदेश पारित नहीं किया गया है, जिसको यह उपधारा प्रभावी हुई है, उस तारीख को उपधारा (5) के पहले परंतुक के खंड (iv) के अधीन किए गए आवेदन समझे जाएंगे।''

94कख. कराधान और अन्य विधि (कतिपय उपबंधो का शिथिलीकरण और संशोधन) अधिनियम, 2020 द्वारा 1.4.2021 से अतंस्थापित। इससे पूर्व कराधान और अन्य विधि (कतिपय उपबंधो का शिथिलीकरण और संशोधन) अधिनियम, 2020 द्वारा भूतलक्षी प्रभाव से 1.6.2020 से लोप किया गया। लोप से पूर्व स्पष्टीकरण 2क वित्त अधिनियम, 2020 द्वारा 1.6.2020 से अंत:स्थापित किया गया जो निम्न प्रकार था।

"स्पष्टीकरण 2क—शंकाओं को दूर करने के लिए यह घोषित किया जाता है कि किसी निधि या संस्था, जिसको उपधारा (5) लागू होती है, को किए गए किसी दान के संबंध में कटौती के लिए निर्धारिती द्वारा किसी निर्धारण वर्ष के लिए आय की विवरणी में उसके दावे को उक्त दान के संबंध में संस्था या निधि द्वारा आय-कर प्राधिकारी या ऐसे प्राधिकारी द्वारा प्राधिकृत व्यक्ति को प्रस्तुत सूचना के आधार पर, बोर्ड द्वारा समय-समय पर विरचित जोखिम प्रबंधन रणनीति के अनुसार सत्यापन के अधीन रहते हुए अनुज्ञात किया जाएगा।''

 

 

 

[वित्त अधिनियम, 2024 द्वारा संशोधित रूप मेंें]

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