साधारण शेयर बचत स्कीम के अधीन किए गए विनिधान की बाबत कटौती
53क[साधारण शेयर बचत स्कीम के अधीन किए गए विनिधान की बाबत कटौती
80गगख. (1) जहां किसी निर्धारिती ने, जो–
(क) व्यष्टि है; या
(ख) हिन्दू अविभक्त कुटुम्ब है, 54[***]
(ग) 55[***]
पूर्ववर्ष में कर से प्रभार्य अपनी आय में से धारा 10 के खंड (23घ) के अधीन उल्लिखित किसी पारस्परिक निधि के या भारतीय यूनिट ट्रस्ट अधिनियम, 1963 (1963 का 52) के अधीन स्थापित भारतीय यूनिट ट्रस्ट के कोर्इ यूनिट, किसी ऐसी स्कीम के अनुसार, जो केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, इस निमित्त विनिर्दिष्ट करे (जिसे इस धारा में इसके पश्चात् साधारण शेयर बचत स्कीम कहा गया है), बनार्इ गर्इ किसी योजना के अधीन अर्जित किए हैं, वहां उसे, इस धारा के उपबंधों के अनुसार और उनके अधीन रहते हुए उसकी कुल आय की संगणना करने में, विनिधान की गर्इ उतनी रकम की, जो उस पूर्ववर्ष में दस हजार रुपए की रकम से अधिक नहीं है, कटौती अनुज्ञात की जाएगी :
56[परन्तु इस उपधारा के अधीन 1 अप्रैल, 1992 के या उसके पश्चात् विनिधान की गर्इ किसी रकम के संबंध में, कोर्इ कटौती अनुज्ञात नहीं की जाएगी।]
(2) जहां साधारण शेयर बचत स्कीम के अधीन बनार्इ गर्इ किसी योजना के अधीन जारी किए गए यूनिटों में निर्धारिती द्वारा विनिधान की गर्इ कोर्इ राशि, जिसकी बाबत उपधारा (1) के अधीन कटौती अनुज्ञात की गर्इ है, यथास्थिति, ऐसे यूनिटों की पुन: खरीद के रूप में या योजना की समाप्ति पर, उसे निधि या ट्रस्ट द्वारा, किसी पूर्ववर्ष में, पूर्णत: या भागत: वापस की जाती है तो वह निर्धारिती की उस पूर्ववर्ष की आय समझी जाएगी और तद्नुसार कर से प्रभार्य होगी।
(3) इस अधिनियम के किसी अन्य उपबंध में किसी बात के होते हुए भी, जहां उपधारा (1) के अधीन कटौती अनुज्ञात किए जाने के पश्चात् किसी हिन्दू अविभक्त कुटुम्ब के सदस्यों के बीच विभाजन हो गया है या व्यक्तियों का संगम विघटित कर दिया गया है, वहां उपधारा (2) के उपबंध ऐसे लागू होंगे मानो उसमें निर्दिष्ट आय प्राप्त करने वाला व्यक्ति निर्धारिती हो।]
53क. वित्त अधिनियम, 1990 द्वारा 1.4.1991 से अंत:स्थापित।
54. वित्त अधिनियम, 1994 द्वारा 1.4.1991 से भूतलक्षी प्रभाव से "या" शब्द का लोप किया गया।
55. यथोक्त द्वारा लोप किया गया। वित्त अधिनियम, 1990 द्वारा 1.4.1991 से अंत:स्थापित, खंड (ग) लोप से पूर्व निम्नानुसार था :
"(ग) व्यक्ति-संगम या व्यष्टि निकाय जो दोनों ही मामलों में गोवा राज्य तथा दादरा और नागर हवेली एवं दमण और दीव संघ राज्यक्षेत्रों में प्रवृत्त समुदाय सम्पत्ति की पद्धति द्वारा शासित केवल पति और पत्नी से मिलकर बना हो।"
56. वित्त अधिनियम, 1992 द्वारा 1.4.1993 से अंत:स्थापित।
[वित्त अधिनियम, 2015 द्वारा संशोधित रूप में]
[वित्त अधिनियम, 2016 द्वारा संशोधित रूप में]

