कुछ दशाओं में बैंककारी कंपनी के समामेलन की स्कीम में संचयित हानि और शेष अवक्षयण मोक के अग्रनयन और मुजरा करने से संबंधित उपबंध
79क[कतिपय मामलों में संचयित हानियों को अग्रनीत करने और उनका मुजरा करने तथा समामेलन की स्कीम में शेष अवक्षयण का मोक—
72कक. जब,—
(i) केंद्रीय सरकार द्वारा बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949 (1949 का 10) की धारा 45 की उपधारा (7) के अधीन मंजूर की गर्इ और प्रवर्तन में लार्इ गर्इ किसी स्कीम के अधीन किसी एक या अधिक बैंककारी कंपनी का किसी अन्य बैंककारी संस्था के साथ समामेलन हुआ है; या
(ii) केंद्रीय सरकार द्वारा, यथास्थिति, बैंककारी कंपनी (उपक्रमों का अर्जन और अंतरण) अधिनियम, 1970 (1970 का 5) की धारा 9 या बैंककारी कंपनी (उपक्रमों का अर्जन और अंतरण) अधिनियम, 1980 (1980 का 40) की धारा 9 या दोनों के अधीन प्रवर्तन में लार्इ गर्इ किसी स्कीम के अधीन एक या अधिक तत्स्थानी नए बैंक या बैंकों का किसी अन्य तत्स्थानी नए बैंक के साथ समामेलन हुआ है; या
(iii) केंद्रीय सरकार द्वारा साधरण बीमा कारबार (राष्ट्रीयकरण) अधिनियम, 1972 (1972 का 57) की धारा 16 के अधीन मंजूर की गर्इ और प्रवर्तन में लार्इ गर्इ किसी स्कीम के अधीन एक या अधिक सरकारी कंपनी या कंपनियों का किसी अन्य सरकारी कंपनी के साथ समामेलन हुआ है,
तब धारा 2 के खंड (1ख) के उपखंड (i) से उपखंड (iii) या धारा 72क में अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी, ऐसी बैंककारी कंपनी या कंपनियों या समामेलित तत्स्थानी नए बैंक या नए बैंकों या समामेलित सरकारी कंपनी या कंपनियों की संचयित हानि और शेष अवक्षयण को, उस पूर्ववर्ष के लिए, जिसमें समामेलन की स्कीम को प्रवर्तन में लाया गया था, यथास्थिति, ऐसी बैंककारी संस्था या समामेलित तत्स्थानी नए बैंक या समामेलित सरकारी कंपनी का मोक या अवक्षयण समझा जाएगा और हानि तथा अवक्षयण के लिए मोक को अग्रनीत किए जाने और मुजरा के संबंध में अधिनियम के अन्य उपबंध तदनुसार लागू होंगे।
स्पष्टीकरण—इस धारा के प्रयोजनों के लिए,—
(i) ''संचयित हानि'' से समामेलित बैंककारी कंपनी या कंपनियों या समामेलित तत्स्थानी नए बैंक या बैंकों या समामेलित सरकारी कंपनी या कंपनियों की ''कारबार या वृत्ति के लाभ और अभिलाभ'' शीर्ष के अधीन उतनी हानि (जो किसी सट्टा कारबार में हुर्इ कोर्इ हानि नहीं है) अभिप्रेत है, जितनी के लिए ऐसी समामेलित बैंककारी कंपनी या कंपनियां या समामेलित तत्स्थानी नया बैंक या नए बैंक या समामेलित सरकारी कंपनी या कंपनियां धारा 72 के उपबंधों के अधीन अग्रनीत और मुजरा किए जाने के लिए हकदार होती, यदि समामेलन नहीं हुआ होता;
(ii) ''बैंककारी कंपनी'' का वही अर्थ होगा जो उसका बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949 (1949 का 10) की धारा 5 के खंड (ग) में है;
(iii) ''बैंककारी संस्था'' का वही अर्थ होगा जो उसका बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949 (1949 का 10) की धारा 45 की उपधारा (15) में है;
(iv) ''तत्स्थानी नया बैंक'' का वही अर्थ होगा, जो उसका, यथास्थिति, बैंककारी कंपनी (उपक्रमों का अर्जन और अंतरण) अधिनियम, 1970 (1970 का 5) की धारा 2 के खंड (घ) या बैंककारी कंपनी (उपक्रमों का अर्जन और अंतरण) अधिनियम, 1980 (1980 का 40) की धारा 2 के खंड (ख) में है;
(v) ''साधारण बीमा कारबार'' का वही अर्थ होगा जो उसका साधारण बीमा कारबार (राष्ट्रीयकरण) अधिनियम, 1972 (1972 का 57) की धारा 3 के खंड (छ) में है;
(vi) ''सरकारी कंपनी'' से कंपनी अधिनियम, 2013 (2013 का 18) की धारा 2 के खंड (45) में यथापरिभाषित सरकारी कंपनी अभिप्रेत है, जो साधारण बीमा कारबार में लगी हुर्इ है और जो साधारण बीमा कारबार (राष्ट्रीयकरण) अधिनियम, 1972 (1972 का 57) की धारा 4 या धारा 5 या धारा 16 के प्रवर्तन द्वारा अस्तित्व में आर्इ है;
(vii) ''शेष अवक्षयण'' से समामेलित बैंककारी कंपनी या कंपनियों या समामेलित तत्स्थानी नए बैंक या बैंकों या समामेलित सरकारी कंपनी या कंपनियों का अवक्षयण के लिए उतना मोक अभिप्रेत है, जो अनुज्ञात होने के लिए शेष रहता है और जिसे ऐसी बैंककारी कंपनी या कंपनियों या समामेलित तत्स्थानी नए बैंक या बैंकों या समामेलित सरकारी कंपनी या कंपनियों को अनुज्ञात किया गया होता, यदि समामेलन नहीं हुआ होता।]
79क. वित्त अधिनियम, 2020 द्वारा 1.4.2020 से प्रतिस्थापित। प्रतिस्थापन से पूर्व धारा 72कक निम्न प्रकार थी
72कक. कुछ दशाओं में बैंककारी कंपनी के समामेलन की स्कीम में संचयित हानि और शेष अवक्षयण मोक के अग्रनयन और मुजरा करने से संबंधित उपबंध.—धारा 2 के खंड (1ख) के उपखंड (i) से (iii) में या धारा 72क में अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी, जहां किसी बैंककारी कंपनी का बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949 (1949 का 10) की धारा 45 की उपधारा (7) के अधीन केन्द्रीय सरकार द्वारा मंजूर की गर्इ और प्रवर्तन में लार्इ गर्इ किसी स्कीम के अधीन किसी अन्य बैंककारी संस्था के साथ कोर्इ समामेलन हो गया है, ऐसी बैंककारी कंमनी की संचयित हानि और शेष अवक्षयण उस पूर्ववर्ष के लिए, जिसमें समामेलन की स्कीम प्रवर्तित की गर्इ थी, ऐसी बैंककारी संस्था की, यथास्थिति, हानि या अवक्षयण मोक समझे जाएंगे तथा इस अधिनियम के हानि और अवक्षयण मोक के मुजरा और अग्रनीत करने से संबंधित अन्य उपबंध तदनुसार लागू होंगे।
स्पष्टीकरण.–इस धारा के प्रयोजनों के लिए,–
(i) "संचयित हानि" से "कारबार या वृत्ति के लाभ और अभिलाभ" शीर्ष के अधीन समामेलक बैंककारी कंपनी की उतनी हानि (जो किसी सट्टे के कारबार में हुर्इ हानि नहीं है) अभिप्रेत है, जिसके लिए ऐसी समामेलक बैंककारी कंपनी धारा 72 के उपबंधों के अधीन अग्रनीत और मुजरा करने के लिए हकदार होती, यदि ऐसा समामेलन नहीं हुआ होता;
(ii) "बैंककारी कंपनी" का वही अर्थ होगा, जो बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949 (1949 का 10) की धारा 5 के खंड (ग) में उसका है;
(iii) "बैंककारी संस्था" का वही अर्थ है, जो बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949 (1949 का 10) की धारा 45 की उपधारा (15) में उसका है;
(iv) "शेष अवक्षयण" से समामेलक बैंककारी कंपनी का उतना अवक्षयण मोक अभिप्रेत है, जो ऐसी बैंककारी कंपनी को अनुज्ञात किए जाने के लिए शेष रहता है और अनुज्ञात किया गया होता, यदि ऐसा समामेलन न हुआ होता।
[वित्त अधिनियम, 2020 द्वारा संशोधित रूप में]

