आयकर विभाग

वित्त मंत्रालय, भारत सरकार

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धारा 70

आय के एक ही शीर्ष के अधीन एक स्रोत से होने वाली हानि का दूसरे स्रोत से होने वाली आय के प्रति मुजरा किया जाना

धारा

धारा संख्या

70

अध्याय शीर्षक

अध्याय VI - आय का एकत्रीकरण और हानि समायोजन या अग्रेषण

अधिनियम

आय-कर अधिनियम, 1961

वर्ष

2019 (सं.2)

आय के एक ही शीर्ष के अधीन एक स्रोत से होने वाली हानि का दूसरे स्रोत से होने वाली आय के प्रति मुजरा किया जाना

आय के एक ही शीर्ष के अधीन एक स्रोत से होने वाली हानि का दूसरे स्रोत से होने वाली आय के प्रति मुजरा किया जाना

मुजरा किया जाना, या अग्रनीत किया जाना और मुजरा किया जाना

आय के एक ही शीर्ष के अधीन एक स्रोत से होने वाली हानि का दूसरे स्रोत से होने वाली आय के प्रति मुजरा किया जाना

70. (1) इस अधिनियम में अन्यथा उपबंधित के सिवाय, जहां "पूंजी अभिलाभ" शीर्ष से भिन्न आय के किसी शीर्ष के अधीन आने वाले किसी स्रोत की बाबत किसी निर्धारण वर्ष के लिए अंतिम परिणाम हानि है, वहां निर्धारिती इस बात का हकदार होगा कि वह ऐसी हानि की रकम का मुजरा उसी शीर्ष के अधीन किसी अन्य स्रोत से होने वाली अपनी आय के प्रति करा ले।

(2) जहां किसी अल्पकालिक पूंजी आस्ति की बाबत धारा 48 से धारा 55 के अधीन किसी निर्धारण वर्ष के लिए की गर्इ संगणना का परिणाम हानि है, वहां निर्धारिती इस बात का हकदार होगा कि वह ऐसी हानि की रकम का मुजरा ऐसी आय, यदि कोर्इ हो, के प्रति करा ले, जो किसी अन्य पूंजी आस्ति की बाबत निर्धारण वर्ष के लिए की गर्इ उसी प्रकार की संगणना के अधीन आती है।

(3) जहां किसी पूंजी आस्ति (किसी अल्पकालिक पूंजी आस्ति से भिन्न) की बाबत धारा 48 से धारा 55 के अधीन किसी निर्धारण वर्ष के लिए की गर्इ संगणना का परिणाम हानि है, वहां निर्धारिती इस बात का हकदार होगा कि वह ऐसी हानि की रकम का मुजरा ऐसी आय, यदि कोर्इ हो, के प्रति करा ले, जो किसी अन्य पूंजी आस्ति की बाबत, जो कोर्इ अल्पकालिक पूंजी आस्ति नहीं है, निर्धारण वर्ष के लिए की गर्इ उसी प्रकार की संगणना के अधीन आती है।

 

 

 

[वित्त (सं. 2) अधिनियम, 2019 द्वारा संशोधित रूप में]

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