आयकर विभाग

वित्त मंत्रालय, भारत सरकार

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धारा 58

कटौती न करने योग्य रकमें

धारा

धारा संख्या

58

अध्याय शीर्षक

अध्याय IV - कुल आय की गणना

अधिनियम

आय-कर अधिनियम, 1961

वर्ष

2009

कटौती न करने योग्य रकमें

कटौती न करने योग्य रकमें

कटौती न करने योग्य रकमें

7558. 76[(1)] धारा 57 में अंतर्विष्ट किसी प्रतिकूल बात के होते हुए भी, "अन्य स्रोतों से आय" शीर्ष के अधीन प्रभार्य आय की संगणना करने में निम्नलिखित रकम कटौती करने योग्य नहीं होगी, अर्थात्:–

() किसी निर्धारिती की दशा में,–

(i) निर्धारिती के कोर्इ निजी व्यय;

77[(iक) धारा 40क की उपधारा (12)78 में विनिर्दिष्ट प्रकृति का कोर्इ व्यय;]

(ii) इस अधिनियम के अधीन प्रभार्य ऐसा कोर्इ ब्याज जो भारत के बाहर संदेय है (जो 1938 के अप्रैल के प्रथम दिन से पहले सार्वजनिक अभिदाय के लिए पुरोधृत ऋण का ब्याज नहीं है) जिस पर अध्याय 17ख के अधीन कर का संदाय या उसकी कटौती नहीं की गर्इ है 79[* * *];

(iii) कोर्इ ऐसा संदाय जो "वेतन" शीर्षक के अधीन तब प्रभार्य है जबकि वह भारत के बाहर संदेय हो, जब तक कि उस पर अध्याय 17ख के अधीन कर का संदाय या उसकी कटौती न की गर्इ हो;

(iv) 80[* * *]

() 81[* * *]

82[(1क) धारा 40 के खंड () के उपखंड (iiक) के उपबंध जहां तक हो सके "अन्य स्रोतों से आय" शीर्षक के अधीन प्रभार्य आय की संगणना करने में उसी प्रकार लागू होंगे जैसे वे "कारबार या वृत्ति के लाभ और अभिलाभ" शीर्ष के अधीन प्रभार्य आय की संगणना करने में लागू होते हैं।]

83[(2) धारा 40क के उपबंध जहां तक हो सके "अन्य स्रोतों से आय" शीर्षक के अधीन प्रभार्य आय की संगणना करने में उसी प्रकार लागू होंगे जैसे वे "कारबार या वृत्ति के लाभ और अभिलाभ" शीर्ष के अधीन प्रभार्य आय की संगणना करने में लागू होते हैं।]

84[(3) किसी निर्धारिती की दशा में जो विदेशी कंपनी है, धारा 44घ के उपबंध, जहां तक हो सके "अन्य स्रोतों से आय" शीर्ष के अधीन प्रभार्य आय की संगणना करने में उसी प्रकार लागू होंगे जैसे वे "कारबार या वृत्ति के लाभ और अभिलाभ" शीर्ष के अधीन प्रभार्य आय की संगणना करने में लागू होते हैं।]

85[(4) किसी ऐसे निर्धारिती की दशा में जिसकी "अन्य स्रोतों से आय" शीर्ष के अधीन प्रभार्य आय है, किसी व्यय या मोक की बाबत कोर्इ लाटरी, वर्ग पहेली, दौड़ जिसके अंतर्गत घुड़दौड़ भी है, ताश के खेल और अन्य सभी प्रकार के खेल या किसी प्रकार या प्रकृति के जुआ या दांव लगाने से जीत के रूप में आय की संगणना करने में ऐसी आय के संबंध में किसी प्रकार के मोक या व्यय की बाबत किसी प्रकार की कटौती इस अधिनियम के किसी उपबंध के अधीन अनुज्ञात नहीं की जाएगी :

परन्तु इस उपधारा की कोर्इ बात, ऐसे निर्धारिती की, जो ऐसे घोड़ों का स्वामी है जो उसके द्वारा घुड़दौड़ में दौड़ने के लिए रखे जाते हैं, ऐसे घोड़ों को अपने स्वामित्व में रखने और उनके रख-रखाव के कार्य से संबंधित आय की संगणना करने में लागू नहीं होगी।

स्पष्टीकरण.–इस उपधारा के प्रयोजनों के लिए, "घुड़दौड़" से ऐसी घुड़दौड़ अभिप्रेत है जिस पर सट्टा या दाव विधिपूर्ण ढंग से लगाया जा सकता है।]

 

75. सुसंगत केस लॉज़ के लिए, देखिए टैक्समैन्स मास्टर गाइड टु इन्कम टैक्स ऐक्ट।

76. वित्त अधिनियम, 1968 द्वारा 1.4.1968 से अंत:स्थापित और आय-कर (संशोधन) अधिनियम, 1972 की धारा 3 के अनुसार सदैव से वहां विद्यमान समझा गया है।

77. वित्त अधिनियम, 1985 द्वारा 1.4.1986 से अंत:स्थापित।

78. धारा 40क की उपधारा (12) का अब वित्त अधिनियम, 1992 द्वारा 1.4.1993 से लोप कर दिया गया है।

79. "और जिसकी बाबत भारत में कोर्इ व्यक्ति नहीं है जिसे धारा 163 के अधीन अभिकर्ता माना जा सके" शब्दों का वित्त अधिनियम, 1988 द्वारा 1.4.1989 से लोप किया गया।

80. वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1971 द्वारा 1.4.1972 से लोप किया गया। मूल उपखंड वित्त अधिनियम, 1968 द्वारा 1.4.1969 से अंत:स्थापित किया गया था।

81. वित्त अधिनियम, 1988 द्वारा 1.4.1989 से लोप किया गया। लोप से पहले खंड () वित्त अधिनियम, 1963 द्वारा 1.4.1963 से और वित्त अधिनियम, 1968 द्वारा 1.4.1969 से यथा संशोधित किया गया था।

82. उच्चतम न्यायालय द्वारा विनिश्चित कुछ मामलों के बारे में संशोधन अधिनियम की धारा 5 द्वारा विहित व्यावृतियों के अधीन रहते हुए आय-कर (संशोधन) अधिनियम, 1972 द्वारा 1.4.1962 से भूतलक्षी प्रभाव से अंत:स्थापित।

83. वित्त अधिनियम, 1968 द्वारा 1.4.1968 से अंत:स्थापित।

84. वित्त अधिनियम, 1976 द्वारा 1.6.1976 से अंत:स्थापित।

85. वित्त अधिनियम, 1986 द्वारा 1.4.1987 से अंत:स्थापित।

 

 

[वित्त (सं. 2) अधिनियम, 2009 द्वारा संशोधित रूप में]

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