आयकर विभाग

वित्त मंत्रालय, भारत सरकार

मुख्य सामग्री पर जाने के लिए यहां क्लिक करें
सुलभता विकल्प
शब्द आकार
सैचुरेशन
मदद

धारा 54घ

भूमि और भवनों के अनिवार्य अर्जन पर पूंजी अभिलाभ कुछ दशाओं में प्रभारित नहीं किया जाना

धारा

धारा संख्या

54घ

अध्याय शीर्षक

अध्याय IV - कुल आय की गणना

अधिनियम

आय-कर अधिनियम, 1961

वर्ष

2020

भूमि और भवनों के अनिवार्य अर्जन पर पूंजी अभिलाभ कुछ दशाओं में प्रभारित नहीं किया जाना

भूमि और भवनों के अनिवार्य अर्जन पर पूंजी अभिलाभ कुछ दशाओं में प्रभारित नहीं किया जाना

भूमि और भवनों के अनिवार्य अर्जन पर पूंजी अभिलाभ कुछ दशाओं में प्रभारित नहीं किया जाना

54घ. (1) उपधारा (2) के उपबंधों के अधीन रहते हुए, जहां पूंजी अभिलाभ किसी विधि के अधीन निर्धारिती के स्वामित्व के किसी औद्योगिक उपक्रम के भागस्वरूप किसी ऐसी पूंजी आस्ति के अनिवार्य अर्जन के रूप में अंतरण से उद्भूत होता है, जो भूमि या भवन या भूमि या भवन में कोर्इ अधिकार है, तथा जिनका प्रयोग उस तारीख से जिसको अंतरण हुआ है, ठीक पहले के दो वर्षों में निर्धारिती द्वारा उक्त उपक्रम के कारबार के प्रयोजन के लिए किया जा रहा था (जिसे इस धारा में आगे मूल आस्ति कहा गया है) और निर्धारिती ने उस तारीख से तीन वर्ष की अवधि के भीतर उक्त उपक्रम को अंतरित करने या पुन: स्थापित करने के लिए या कोर्इ अन्य औद्योगिक उपक्रम स्थापित करने के प्रयोजनों के लिए कोर्इ अन्य भूमि या भवन या किसी अन्य भूमि या भवन में कोर्इ अधिकार खरीदता है या कोर्इ अन्य भवन बनाता है, तो उस पूंजी अभिलाभ के उस पूर्ववर्ष की जिसमें अंतरण हुआ है, आय के रूप में आय-कर लगाए जाने के बजाय उसके संबंध में इस धारा के निम्नलिखित उपबंधों के अनुसार कार्रवार्इ की जाएगी, अर्थात्–

(i) यदि पूंजी अभिलाभ की रकम इस प्रकार खरीदी गर्इ भूमि, भवन या अधिकार की या इस प्रकार बनाए गए भवन की (ऐसी भूमि भवन या अधिकार को इस धारा में आगे नर्इ आस्ति कहा गया है) लागत से अधिक है तो, पूंजी अभिलाभ की रकम और नर्इ आस्ति की लागत के अंतर पर धारा 45 के अधीन पूर्ववर्ष के आय के रूप में आय-कर लगाया जाएगा; और नर्इ आस्ति की बाबत क्रय या निर्माण से तीन वर्ष की अवधि के भीतर उसके अंतरण से होने वाले पूंजी अभिलाभ की संगणना के प्रयोजन के लिए लागत शून्य होगी; या

(ii) यदि पूंजी अभिलाभ की रकम, नर्इ आस्ति की लागत के बराबर या उससे कम है, तो पूंजी अभिलाभ पर धारा 45 के अधीन कर नहीं लिया जाएगा और नर्इ आस्ति की बाबत, क्रय या निर्माण से तीन वर्ष की अवधि के भीतर उसके अंतरण से होने वाले पूंजी अभिलाभों की संगणना के लिए उसकी लागत में से पूंजी अभिलाभ की रकम घटा दी जाएगी।

(2) पूंजी अभिलाभ की वह रकम जिसका निर्धारिती द्वारा उपयोग धारा 139 के अधीन आय की विवरणी देने की तारीख से पूर्व नर्इ आस्ति खरीदने या बनाने में नहीं किया जाता है, ऐसी विवरणी देने से पूर्व उसके द्वारा किसी ऐसे बैंक या संस्था के खाते में जमा की जाएगी [ऐसी जमा किसी भी दशा में, धारा 139 की उपधारा (1) के अधीन उस निर्धारिती की दशा में आय की विवरणी देने के लिए लागू निश्चित तारीख तक की जाएगी] जो स्कीम में विनिर्दिष्ट की जाए और उसका उपयोग ऐसी स्कीम के अनुसार किया जाएगा जो केन्द्रीय सरकार राजपत्र में अधिसूचना द्वारा इस निमित्त बनाए तथा ऐसी विवरणी के साथ ऐसे निक्षेप का सबूत भी होगा और उपधारा (1) के प्रयोजनों के लिए वह रकम, यदि कोर्इ हो, जिसका उपयोग नर्इ आस्ति को खरीदने या बनाने में निर्धारिती द्वारा पहले ही किया जा चुका है, इस प्रकार जमा रकम सहित नर्इ आस्ति की लागत समझी जाएगी :

परन्तु यदि इस उपधारा के अधीन जमा रकम का उपयोग उपधारा (1) में विनिर्दिष्ट अवधि के भीतर नर्इ आस्ति खरीदने या बनाने के लिए पूर्णत: या भागत: नहीं किया जाता है, तो–

(i) इस प्रकार अप्रयुक्त रकम धारा 45 के अधीन उस पूर्ववर्ष की आय के रूप में प्रभारित की जाएगी जिसमें मूल आस्ति के अंतरण की तारीख से तीन वर्ष की अवधि समाप्त होती है; और

(ii) निर्धारिती उपरोक्त स्कीम के अनुसार ऐसी रकम वापस लेने का हकदार होगा।

स्पष्टीकरण.–[वित्त अधिनियम, 1992 द्वारा 1.4.1993 से लोप किया गया।

 

 

 

[वित्त अधिनियम, 2020 द्वारा संशोधित रूप में]

फ़ुटनोट