कृषि प्रयोजनों के लिए प्रयुक्त भूमि के अंतरण से होने वाले पूंजी अभिलाभों को कुछ दशाओं में प्रभारित न किया जाना
1[कृषि प्रयोजनों के लिए प्रयुक्त भूमि के अंतरण से होने वाले पूंजी अभिलाभों को कुछ दशाओं में प्रभारित न किया जाना
254ख. 3[(1)] 4[उपधारा (2) के उपबंधों के अधीन रहते हुए, जहां पूंजी अभिलाभ ऐसी पूंजी आस्ति के अंतरण से उद्भूत होता है] जो ऐसी भूमि है जो उस तारीख से जिसको अंतरण हुआ, ठीक पहले के दो वर्षों में निर्धारिती द्वारा या उसके माता-पिता द्वारा खेती के काम के लिए प्रयुक्त की जाती रही है 5[(जिसे इसमें आगे मूल आस्ति कहा गया है)] और निर्धारिती ने उस तारीख के बाद दो वर्ष की अवधि के भीतर कोर्इ दूसरी भूमि, खेती के प्रयोजनों के लिए प्रयुक्त करने के लिए खरीदी है, वहां उस पूंजी अभिलाभ को पूर्ववर्ष की जिसमें वह अंतरण हुआ है, आयकर से प्रभारित करने के बजाय, उसके संबंध में कार्रवार्इ इस धारा के निम्नलिखित उपबंधों के अनुसार की जाएगी, अर्थात्,–
(i) यदि पूंजी अभिलाभ की रकम इस प्रकार खरीदी गर्इ भूमि की (जिसे इसमें इसके पश्चात् नर्इ आस्ति कहा गया है) लागत से अधिक है, तो पूंजी अभिलाभ की रकम तथा नर्इ आस्ति की लागत में अंतर पूर्ववर्ष की आय के रूप में धारा 45 के अधीन प्रभारित किया जाएगा; और नर्इ आस्ति खरीदने से तीन वर्ष की अवधि के भीतर उसके अंतरण से होने वाले उस आस्ति की बाबत पूंजी अभिलाभ की संगणना के प्रयोजनों के लिए लागत शून्य होगी; अथवा
(ii) यदि पूंजी अभिलाभ की रकम नर्इ आस्ति की लागत के बराबर या उससे कम है, तो पूंजी अभिलाभ धारा 45 के अधीन प्रभारित नहीं किया जाएगा; और नर्इ आस्ति खरीदने से तीन वर्ष की अवधि के भीतर उसके अंतरण से होने वाले उस आस्ति के संबंध में पूंजी अभिलाभों की संगणना के प्रयोजनों के लिए उसकी लागत में से पूंजी अभिलाभ की रकम घटा दी जाएगी।]
6[(2) पूंजी अभिलाभ की रकम, जिसका निर्धारिती द्वारा उपयोग धारा 139 के अधीन आय की विवरणी देने की तारीख के पूर्व नर्इ आस्ति खरीदने के लिए नहीं किया जाता है, ऐसी विवरणी देने के पूर्व उसके द्वारा किसी ऐसे बैंक या संस्था में खाते में जमा की जाएगी [ऐसी जमा किसी भी दशा में, धारा 139 की उपधारा (1) के अधीन उस निर्धारिती की दशा में आय की विवरणी देने के लिए लागू निश्चित तारीख तक की जाएगी] जो ऐसी स्कीम में बतार्इ जाए और ऐसी स्कीम7 के अनुसार उसका उपयोग किया जाएगा जो केंद्रीय सरकार राजपत्र में अधिसूचना द्वारा इस निमित्त बनाए और ऐसी विवरणी के साथ ऐसी जमा का सबूत लगाना होगा और उपधारा (1) के प्रयोजनों के लिए वह रकम, यदि कोर्इ है, जो नर्इ आस्ति खरीदने के लिए निर्धारिती द्वारा पहले ही प्रयुक्त की जा चुकी है, इस प्रकार जमा रकम सहित नर्इ आस्ति की लागत समझी जाएगी :
परन्तु यदि इस उपधारा के अधीन जमा रकम का उपयोग उपधारा (1) में विनिर्दिष्ट अवधि के भीतर नर्इ आस्ति खरीदने के लिए पूर्णत: या भागत: नहीं किया जाता है, तो–
(i) इस प्रकार अप्रयुक्त रही रकम धारा 45 के अधीन उस पूर्ववर्ष की आय के रूप में कर से प्रभारित की जाएगी जिसमें मूल आस्ति के अंतरण की तारीख से दो वर्ष की अवधि समाप्त होती है; और
(ii) निर्धारिती उपरोक्त स्कीम के अनुसार ऐसी रकम वापस लेने का हकदार होगा।
स्पष्टीकरण.–8[वित्त अधिनियम, 1992 द्वारा 1.4.1993 से लोप किया गया।]
1. वित्त अधिनियम, 1970 द्वारा 1.4.1970 से अंत:स्थापित।
2. सुसंगत केस लॉज़ के लिए, देखिए टैक्समैन्स मास्टर गाइड टु इन्कम टैक्स ऐक्ट।
3. वित्त अधिनियम, 1978 द्वारा 1.4.1974 से भूतलक्षी प्रभाव से अंत:स्थापित।
4. वित्त अधिनियम, 1987 द्वारा 1.4.1988 से "जहां पूंजी अभिलाभ ऐसी पूंजी आस्ति के अंतरण से उद्भूत होता है" के स्थान पर प्रतिस्थापित।
5. वित्त अधिनियम, 1978 द्वारा 1.4.1974 से भूतलक्षी प्रभाव से अंत:स्थापित।
6. वित्त अधिनियम, 1987 द्वारा 1.4.1988 से प्रतिस्थापित। इससे पूर्व वित्त अधिनियम, 1978 द्वारा 1.4.1974 से भूतलक्षी प्रभाव से अन्त:स्थापित की गर्इ थी।
7. पूंजी अभिलाभ लेखा स्कीम, 1988–सा.का.नि. 724(इ), तारीख 22.6.1988 के पाठ के लिए तथा निक्षेप प्राप्त करने और लेखा रखने के लिए विनिर्दिष्ट बैंकों की प्राधिकृत शाखाओं की सूची के लिए सा.का.नि. 725(इ), तारीख 22.6.1988 के लिए, देखिये टैक्समैन्स डायरेक्ट टैक्सेज सर्कुलर्स।
8. लोप से पहले स्पष्टीकरण वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1991 द्वारा 1.4.1992 से यथासंशोधित, किया गया था।
[वित्त (सं. 2) अधिनियम, 2009 द्वारा संशोधित रूप में]

