कतिपय दशाओं में प्रतिफल के पूर्ण मूल्य के लिए विशेष उपबंध
82[कतिपय दशाओं में प्रतिफल के पूर्ण मूल्य के लिए विशेष उपबंध
50ग. (1) जहां निर्धारिती द्वारा, किसी पूंजीगत आस्ति, जो भूमि या भवन या दोनों है, के अंतरण के परिणामस्वरूप प्राप्त या उपार्जित प्रतिफल ऐसे अंतरण की बाबत स्टाम्प शुल्क के संदाय के प्रयोजन के लिए राज्य सरकार के किसी प्राधिकारी द्वारा (जिसे इसमें इसके पश्चात् इस धारा में "स्टांप मूल्यांकन प्राधिकारी" कहा गया है) अपनाए गए या निर्धारित किए गए 82क[या निर्धारणीय] मूल्य से कम है तो इस प्रकार अपनाया गया या निर्धारित किया गया 82क[या निर्धारणीय] मूल्य धारा 48 के प्रयोजनों के लिए, ऐसे अंतरण के परिणामस्वरूप प्राप्त या उपार्जित प्रतिफल का पूरा मूल्य समझा जाएगा।
वित्त अधिनियम, 2016 द्वारा 1.4.2017 से धारा 50ग की उपधारा (1) में निम्नलिखित परन्तुक अंत:स्थापित किए जाएंगे :
परंतु जहां प्रतिफल की रकम नियत करने वाले करार की तारीख और पूंजी आस्ति के अंतरण के लिए रजिस्ट्रीकरण की तारीख एक नहीं हो, वहां स्टांप मूल्यांकन प्राधिकारी द्वारा करार की तारीख को अंगीकृत या निर्धारित या निर्धारणीय मूल्य को ऐसे अंतरण के लिए प्रतिफल के पूर्ण मूल्य की संगणना करने के प्रयोजनों के लिए लिया जा सकेगा :
परंतु यह और कि पहला परंतुक केवल उस मामले में लागू होगा, जहां प्रतिफल की रकम या उसका कोर्इ भाग अंतरण के लिए करार की तारीख को या उससे पहले किसी पाने वाले के खाते में देय चेक या पाने वाले के खाते में देय बैंक ड्राफ्ट के माध्यम से या किसी बैंक खाते की मार्फत इलेक्ट्रानिक समाशोधन प्रणाली के उपयोग द्वारा प्राप्त किया गया हो।
(2) उपधारा (1) के उपबंधों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, जहां–
(क) निर्धारिती किसी निर्धारण अधिकारी के समक्ष यह दावा करता है कि उपधारा (1) के अधीन स्टांप मूल्यांकन प्राधिकारी द्वारा अपनाया गया या निर्धारित किया गया 82कक[या निर्धारणीय] मूल्य, अंतरण की तारीख को, संपत्ति के उचित बाजार मूल्य से अधिक है;
(ख) उपधारा (1) के अधीन स्टांप मूल्यांकन प्राधिकारी द्वारा इस प्रकार अपनाया गया या निर्धारित किया गया 82कक[या निर्धारणीय] मूल्य किसी अपील या पुनरीक्षण में विवादित नहीं है या किसी अन्य प्राधिकारी, न्यायालय, उच्च न्यायालय के समक्ष कोर्इ निर्देश नहीं किया गया है,
वहां निर्धारण अधिकारी, पूंजीगत आस्ति के मूल्यांकन को किसी मूल्यांकन अधिकारी को निद्रिष्ट कर सकेगा और जहां ऐसा कोर्इ निर्देश किया जाता है वहां धन-कर अधिनियम, 1957 (1957 का 27) की धारा 16क की उपधारा (2), (3), (4), (5) और (6), धारा 23क की उपधारा (1) का खंड (i) और उपधारा (6) और (7), धारा 24 की उपधारा (5), धारा 34कक, धारा 35 और धारा 37 के उपबंध, आवश्यक उपांतरणों सहित ऐसे निर्देश के संबंध में वैसे ही लागू होंगे जैसे कि वे उक्त अधिनियम की धारा 16क की उपधारा (1) के अधीन निर्धारण अधिकारी द्वारा किए गए किसी निर्देश के संबंध में लागू होते हैं।
82ख[स्पष्टीकरण 1]–इस धारा के प्रयोजनों के लिए, "मूल्यांकन अधिकारी" का वही अर्थ है जो उसका धन-कर अधिनियम, 1957 (1957 का 27) की धारा 2 के खंड (द) में है।
82ग[स्पष्टीकरण 2–इस धारा के प्रयोजनों के लिए, "निर्धारणीय" पद से वह कीमत अभिप्रेत है जो कि स्टांप मूल्यांकन प्राधिकारी, तत्समय प्रवृत्त ऐसी किसी अन्य विधि में अंतर्विष्ट किसी प्रतिकूल बात के होते हुए भी अंगीकृत या निर्धारित करता, यदि वह स्टांप शुल्क के संदाय के प्रयोजनों के लिए उस प्राधिकारी को निद्रिष्ट की जाती।]
(3) उपधारा (2) में अंतर्विष्ट उपबंधों के अधीन रहते हुए, जहां उपधारा (2) के अधीन अभिनिश्चित मूल्य उपधारा (1) में निद्रिष्ट स्टांप मूल्यांकन प्राधिकारी द्वारा अपनाए गए या निर्धारित किए गए 82ग[या निर्धारणीय] मूल्य से अधिक है, वहां ऐसे प्राधिकारी द्वारा इस प्रकार अपनाया गया या निर्धारित किया गया 82ग[या निर्धारणीय] मूल्य अंतरण के परिणामस्वरूप प्राप्त या उपार्जित प्रतिफल का पूरा मूल्य माना जाएगा।]
82. वित्त अधिनियम, 2002 द्वारा 1.4.2003 से अंत:स्थापित।
82क. वित्त (सं. 2) अधिनियम, 2009 द्वारा 1.10.2009 से अंत:स्थापित।
82कक. वित्त (सं. 2) अधिनियम, 2009 द्वारा 1.10.2009 से अंत:स्थापित।
82ख. यथोक्त द्वारा पुनर्संख्यांकित।
82ग. वित्त (सं. 2) अधिनियम, 2009 द्वारा 1.10.2009 से अंत:स्थापित।
[वित्त अधिनियम, 2016 द्वारा संशोधित रूप में]

