कटौती न करने योग्य रकमें
कटौती न करने योग्य रकमें
40. धारा 30 से 38 तक में किसी प्रतिकूल बात के होते हुए भी, "कारबार या वृत्ति के लाभ और अभिलाभ" शीर्ष के अधीन प्रभार्य आय की संगणना करने में, निम्नलिखित रकमों की कटौती नहीं की जाएगी,—
(क) किसी निर्धारिती की दशा में—
(i) इस अधिनियम के अधीन प्रभार्य कोर्इ ब्याज (जो 1 अप्रैल, 1938 के पूर्व लोक अभिदाय के लिए जारी किसी ऋण पर ब्याज नहीं है), स्वामिस्व, तकनीकी सेवाओं के लिए फीस या अन्य राशि, जो—
(अ) भारत के बाहर; या
(आ) भारत में किसी अनिवासी को, जो कंपनी नहीं है, या किसी विदेशी कंपनी को,
संदेय है, जिस पर कि अध्याय 17ख के अधीन कर स्रोत पर काटे जाने योग्य है और ऐसे कर की कटौती नहीं की गर्इ है या कटौती करने के पश्चात् उसका धारा 139 की उपधारा (1) में विनिर्दिष्ट देय तारीख को या उससे पहले संदाय नहीं किया गया है :
परंतु जहां ऐसी किसी राशि की बाबत कर की कटौती किसी पश्चात्वर्ती वर्ष में की गर्इ है या कटौती पूर्ववर्ष के दौरान की गर्इ है किन्तु उसका संदाय धारा 139 की उपधारा (1) में विनिर्दिष्ट देय तारीख के पश्चात् किया गया है, वहां ऐसी राशि को ऐसे पूर्ववर्ष की आय की संगणना करने में कटौती के रूप में अनुज्ञात किया जाएगा जिसमें ऐसे कर का संदाय किया गया है।
35कक[परंतु यह और कि जहां कोर्इ निर्धारिती, किसी ऐसी राशि पर अध्याय 17ख के उपबंधों के अनुसार संपूर्ण कर या उसके किसी भाग की कटौती करने में असफल रहता है, किंतु उसे धारा 201 की उपधारा (1) के पहले परंतुक के अधीन व्यतिक्रमी निर्धारिती नहीं समझा जाता है, वहां इस उपखंड के प्रयोजनों के लिए, यह समझा जाएगा कि निर्धारिती ने, उक्त परंतुक में निर्दिष्ट आदाता द्वारा आय की विवरणी प्रस्तुत करने की तारीख को उस राशि पर कर की कटौती कर ली है और उसका संदाय कर दिया है;]
स्पष्टीकरण.—इस उपखंड के प्रयोजनों के लिए—
(अ) "स्वामिस्व" का वही अर्थ है, जो धारा 9 की उपधारा (1) के खंड (vi) के स्पष्टीकरण 2 में है;
(आ) "तकनीकी सेवाओं के लिए फीस" का वही अर्थ है जो धारा 9 की उपधारा (1) के खंड (vii) के स्पष्टीकरण 2 में है;
(iक) किसी निवासी को संदेय किसी ब्याज, का तीस प्रतिशत, जिस पर अध्याय 17ख के अधीन स्रोत पर कर काटे जाने योग्य है और ऐसे कर की कटौती नहीं की गर्इ है अथवा कटौती के पश्चात् धारा 139 की उपधारा (1) में विहित देय तारीख को या उसके पूर्व उसका संदाय नहीं किया गया है:
परन्तु जहां किसी ऐसी राशि की बाबत, कर की किसी पश्चात्वर्ती वर्ष में कटौती की गर्इ है या उसकी पूर्ववर्ष के दौरान कटौती की गर्इ है किन्तु धारा 139 की उपधारा (1) में विनिर्दिष्ट देय तारीख के पश्चात् उसका संदाय किया गया है, वहां उस राशि के तीस प्रतिशत को उस पूर्ववर्ष की, जिसमें ऐसे कर का संदाय किया गया है, आय की संगणना करने में कटौती के रूप में अनुज्ञात किया जाएगा :
परंतु यह और कि जहां निर्धारिती किसी ऐसी राशि पर अध्याय 17ख के उपबंधों के अनुसार संपूर्ण कर या उसके किसी भाग की कटौती करने में असफल रहता है किंतु उसे धारा 201 की उपधारा (1) के पहले परंतुक के अधीन व्यतिक्रमी निर्धारिती नहीं समझा जाता है, वहां इस उपखंड के प्रयोजन के लिए, यह समझा जाएगा कि निर्धारिती ने उक्त परंतुक में निर्दिष्ट 36क[***] आदाता द्वारा आय की विवरणी प्रस्तुत करने की तारीख को उस राशि पर कर की कटौती कर ली है और उसका संदाय कर दिया है।
स्पष्टीकरण.—इस उपखंड के प्रयोजनों के लिए,--
(i) "कमीशन या दलाली" का वही अर्थ है जो धारा 194ज के स्पष्टीकरण के खंड (i) में उसका है;
(ii) "तकनीकी सेवाओं के लिए फीस" का वही अर्थ है जो धारा 9 की उपधारा (1) के खंड (vii) के स्पष्टीकरण 2 में उसका है;
(iii) "वृत्तिक सेवा" का वही अर्थ है जो धारा 194ञ के स्पष्टीकरण के खंड (क) में उसका है;
(iv) "काम" का वही अर्थ है जो धारा 194ग के स्पष्टीकरण 3 में उसका है;
(v) "किराया" का वही अर्थ होगा जो धारा 194झ के स्पष्टीकरण के खंड (i) में है;
(vi) "स्वामिस्व" का वही अर्थ होगा जो धारा 9 की उपधारा (1) के खंड (vi) के स्पष्टीकरण 2 में है;
(iख) किसी विनिर्दिष्ट सेवा के लिए किसी अनिवासी को संदत्त या संदेय कोर्इ प्रतिफल जिस पर वित्त अधिनियम, 2016 के अध्याय 8 के उपबंध के अधीन समकरण उद्ग्रहण की कटौती की जानी है और ऐसे उद्ग्रहण की कटौती नहीं की गर्इ है या कटौती करने के पश्चात् उसका धारा 139 की उपधारा (1) में यथाविनिर्दिष्ट नियत तारीख को या उससे पूर्व संदाय नहीं किया गया है :
परंतु जहां ऐसे किसी प्रतिफल के संबंध में किसी पश्चात्वर्ती वर्ष में समकरण उद्ग्रहण की कटौती की गर्इ है या पूर्ववर्ष के दौरान कटौती की गर्इ है किंतु धारा 139 की उपधारा (1) में विनिर्दिष्ट नियत तारीख के पश्चात् संदत्त किया गया है तो ऐसी राशि को पूर्ववर्ष जिसमें ऐसे उद्ग्रहण का संदाय किया गया है कि आय की संगणना में कटौती के रूप में अनुज्ञात किया जाएगा।
(iग) अध्याय 12ज के अधीन अनुषंगी फायदा कर के मद्दे संदत्त कोर्इ राशि;
(ii) किसी कारबार या वृत्ति के लाभों या अभिलाभों पर उद्गृहीत कोर्इ रेट या कर अथवा किन्हीं ऐसे लाभों या अभिलाभों के अनुपात पर या अन्यथा उनके आधार पर निर्धारित किसी रेट या कर की बाबत दी गर्इ कोर्इ राशि।
स्पष्टीकरण 1.—शंकाओं को दूर करने के लिए, यह घोषित किया जाता है कि इस उपखंड के प्रयोजनों के लिए उद्गृहीत किसी रेट या कर के मद्दे संदत्त किसी राशि में, यथास्थिति, धारा 90 के अधीन कर की राहत या धारा 91 के अधीन संदेय भारतीय आय-कर से कटौती के लिए पात्र कोर्इ रकम सम्मिलित है और वह सदैव से उसमें सम्मिलित की गर्इ समझी जाएगी।
स्पष्टीकरण 2.—शंकाओं को दूर करने के लिए, यह घोषित किया जाता है कि इस उपखंड के प्रयोजनों के लिए उद्गृहीत किसी रेट या कर के मद्दे संदत्त किसी राशि में धारा 90क के अधीन कर की राहत के लिए कोर्इ राशि सम्मिलित है;
(iiक) धन-कर की बाबत दी गर्इ कोर्इ राशि।
स्पष्टीकरण.—इस उपखण्ड के प्रयोजनों के लिए 'धन-कर' से अभिप्रेत है, धन-कर अधिनियम, 1957 (1957 का 27) के अधीन प्रभार्य धन-कर या भारत के बाहर किसी देश में प्रवृत्त किसी विधि के अधीन प्रभार्य वैसा ही कोर्इ कर या निर्धारिती द्वारा चलाए गए कारबार या वृत्ति की आस्तियों के मूल्य या उसमें लगायी गयी पूंजी के प्रति निर्देश से ऐसी विधि के अधीन प्रभार्य कोर्इ कर, चाहे उस रकम की संगणना में, जिसके प्रति निर्देश से ऐसा कर प्रभारित किया गया है, कारबार या वृत्ति के ऋण कटौती के रूप में अनुज्ञात किए जाते हों या नहीं, किंतु कारबार या वृत्ति की किसी विशिष्ट आस्ति के मूल्य के प्रति निर्देश से प्रभार्य कर इसके अंतर्गत नहीं है;
(iiख) (अ) ऐसा स्वामिस्व, अनुज्ञप्ति फीस, सेवा फीस, विशेषाधिकार फीस, सेवा प्रभार या कोर्इ अन्य फीस या प्रभार, चाहे वह किसी भी नाम से ज्ञात हो, जिसका अनन्य रूप से राज्य सरकार द्वारा किसी राज्य सरकार उपक्रम पर उद्ग्रहण किया जाता है, संदत्त कोर्इ रकम; या
(आ) ऐसी कोर्इ रकम जो राज्य सरकार द्वारा किसी राज्य सरकार उपक्रम से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से विनियोजित की जाती है।
स्पष्टीकरण.—इस उपखंड के प्रयोजनों के लिए, राज्य सरकार उपक्रम के अंतर्गत निम्नलिखित है—
(i) राज्य सरकार के किसी अधिनियम द्वारा या उसके अधीन स्थापित कोर्इ निगम;
(ii) ऐसी कोर्इ कंपनी, जिसमें पचास प्रतिशत से अधिक समादत्त साधारण शेयर पूंजी राज्य सरकार द्वारा धारित की जाती है;
(iii) ऐसी कोर्इ कंपनी, जिसमें पचास प्रतिशत से अधिक समादत्त साधारण शेयर पूंजी, खंड (i) या खंड (ii) में निर्दिष्ट सत्ता द्वारा (चाहे एकल रूप से या साथ मिलाकर) धारित की जाती है;
(iv) ऐसी कोर्इ कंपनी या निगम, जिसमें राज्य सरकार के पास अधिकांश निदेशकों की नियुक्ति करने या प्रबंधन या नीति विषयक विनिश्चयों पर नियंत्रण रखने का प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से, जिसके अंतर्गत उसकी शेयरधारिता या प्रबंधन अधिकारों या शेयरधारक करारों या मतदान करारों के आधार पर या किसी अन्य रीति में, अधिकार है;
(v) राज्य सरकार के किसी अधिनियम द्वारा या उसके अधीन स्थापित अथवा गठित या राज्य सरकार के स्वामित्वाधीन या उसके नियंत्रणाधीन कोर्इ प्राधिकरण, बोर्ड या संस्था या निकाय;
(iii) कोर्इ ऐसा संदाय, जो "वेतन" शीर्ष के अधीन प्रभार्य है, यदि यह,—
(अ) भारत के बाहर; या
(आ) किसी अनिवासी को,
संदेय है और यदि अध्याय 17ख के अधीन उस पर न तो कर का संदाय किया गया है, न ही उसकी उससे कटौती की गर्इ है;
(iv) कोर्इ ऐसा संदाय, जो निर्धारिती के कर्मचारियों के फायदे के लिए स्थापित भविष्य निधि या अन्य निधि में किया गया हो, उस दशा के सिवाय जबकि निर्धारिती ने यह सुनिश्चित करने के लिए कारगर इन्तजाम कर लिए हैं कि उस निधि में से किए गए किन्हीं ऐसे संदायों में से जो "वेतन" शीर्ष के अधीन कर से प्रभार्य है, कर स्रोत पर ही काट लिया जाएगा;
(v) धारा 10 के खंड (10गग) में निर्दिष्ट किसी नियोजक द्वारा वास्तव में संदत्त कोर्इ कर;
(ख) किसी ऐसी फर्म की दशा में, जो फर्म के रूप में निर्धारणीय है,—
(i) किसी ऐसे भागीदार को, जो कार्यकारी भागीदार नहीं है, वेतन, बोनस, कमीशन या पारिश्रमिक का, चाहे वह किसी भी नाम से ज्ञात हो (जिसे इसमें इसके पश्चात् "पारिश्रमिक" कहा गया है) कोर्इ भुगतान; या
(ii) किसी ऐसे भागीदार को, जो कार्यकारी भागीदार है, पारिश्रमिक का, या किसी भागीदार को ब्याज का, कोर्इ संदाय जो, दोनों में से प्रत्येक दशा में, भागीदारी विलेख की शर्तों द्वारा प्राधिकृत नहीं है या उनके अनुसार नहीं है; या
(iii) किसी ऐसे भागीदार को, जो कार्यकारी भागीदार है, पारिश्रमिक का, या किसी भागीदार को ब्याज का, कोर्इ संदाय जो, दोनों में से प्रत्येक दशा में, भागीदारी विलेख के निबंधनों द्वारा प्राधिकृत है और उनके अनुसार है, किंतु जो (ऐसे भागीदारी विलेख की तारीख के पूर्व आने वाली) किसी ऐसी अवधि से संबंधित है जिसके लिए ऐसा संदाय किसी पूर्वतर भागीदारी विलेख द्वारा प्राधिकृत नहीं था या उसके अनुसार नहीं है, अत: फिर भी किसी पूर्वतर भागीदारी विलेख द्वारा ऐसे संदाय के लिए प्राधिकार की अवधि के अंतर्गत ऐसे पूर्वतर भागीदारी विलेख की तारीख के पूर्व की कोर्इ अवधि नहीं आती है; या
(iv) किसी भागीदार को ब्याज का कोर्इ संदाय जो भागीदारी विलेख के निबंधनों द्वारा प्राधिकृत है और उसके अनुसार है तथा जो ऐसे भागीदारी विलेख की तारीख के पश्चात् आने वाली किसी अवधि से संबंधित है, जहां तक कि ऐसी रकम बारह प्रतिशत प्रतिवर्ष की दर से परिकलित साधारण ब्याज की रकम से अधिक है; या
(v) किसी ऐसे भागीदार को जो कार्यकारी भागीदार है, पारिश्रमिक का कोर्इ संदाय जो भागीदारी विलेख के निबंधनों द्वारा प्राधिकृत है और उनके अनुसार है तथा जो ऐसे भागीदारी विलेख की तारीख के पश्चात् आने वाली किसी अवधि से संबंधित है, जहां तक कि पूर्ववर्ष के दौरान सभी भागीदारों को किए गए ऐसे संदाय की रकम ऐसी कुल रकम से अधिक है जो निम्नलिखित रूप में संगणित की जाए :—
| (क) बही लाभ के प्रथम 3,00,000 रुपए पर या किसी हानि की दशा में | 1,50,000 रुपए या बही लाभ के 90 प्रतिशत की दर से, इनमें से जो भी अधिक हो; |
| (ख) बही लाभ के अतिशेष पर | 60 प्रतिशत की दर से: |
परन्तु 1 अप्रैल, 1993 को प्रारम्भ होने वाले निर्धारण वर्ष से सुसंगत पूर्ववर्ष के दौरान भागीदार को इस खंड के अधीन किसी संदाय के संबंध में, भागीदारी विलेख के निबंधनों में, उक्त पूर्ववर्ष के दौरान किसी समय, ऐसे संदाय के लिए उपबंध किया जा सकेगा।
स्पष्टीकरण 1.—जहां कोर्इ व्यष्टि, किसी अन्य व्यक्ति की ओर से या उसके फायदे के लिए, किसी फर्म में भागीदार है (ऐसे भागीदार और अन्य व्यक्ति को इसमें इसके पश्चात् क्रमश: "प्रतिनिधि की हैसियत में भागीदार" और "इस प्रकार प्रतिनिधित्व प्राप्त व्यक्ति" कहा गया है) वहां,—
(i) प्रतिनिधि की हैसियत से भागीदार से भिन्न ऐसे व्यक्ति को फर्म द्वारा दिया गया ब्याज इस खण्ड के प्रयोजनों के लिए हिसाब में नहीं लिया जाएगा;
(ii) प्रतिनिधि की हैसियत से भागीदार के नाते ऐसे व्यक्ति को फर्म द्वारा दिया गया ब्याज और इस प्रकार प्रतिनिधित्व प्राप्त व्यक्ति को फर्म द्वारा दिया गया ब्याज इस खण्ड के प्रयोजनों के लिए हिसाब में लिया जाएगा।
स्पष्टीकरण 2.—जहां कोर्इ व्यक्ति फर्म में प्रतिनिधि की हैसियत से भिन्न रूप में फर्म में भागीदार है, वहां ऐसे व्यक्ति को फर्म द्वारा दिया गया ब्याज इस खण्ड के प्रयोजनों के लिए हिसाब में नहीं लिया जाएगा, यदि उसके द्वारा ऐसा ब्याज किसी दूसरे व्यक्ति की ओर से या किसी और व्यक्ति के फायदे के लिए प्राप्त किया गया है।
स्पष्टीकरण 3.—इस खण्ड के प्रयोजनों के लिए 'बही लाभ' से शुद्ध लाभ अभिप्रेत है जो, फर्म के सभी भागीदारों को दिए गए या देय पारिश्रमिक की कुल राशि को शामिल करके अध्याय 4घ में बतार्इ गर्इ रीति से संगणित सुसंगत पूर्ववर्ष के लाभ और हानि लेखा में दिखार्इ गर्इ हो, यदि शुद्ध लाभ की संगणना करते समय ऐसी रकम की कटौती की गर्इ है।
स्पष्टीकरण 4.—इस खण्ड के प्रयोजनों के लिए, "कार्यकारी भागीदारी" से ऐसा व्यक्ति अभिप्रेत है जो उस फर्म के, जिसका वह भागीदार है, कारबार या वृति के काम में सक्रिय रूप से लगा हुआ है;
(खक) किसी व्यक्ति-संगम या व्यष्टि-निकाय की दशा में, [जो किसी कंपनी या सहकारी सोसाइटी या सोसाइटी रजिस्ट्रीकरण अधिनियम, 1860 (1860 का 21) के अधीन या भारत के किसी भाग में प्रवृत्त उस अधिनियम के समान किसी विधि के अधीन रजिस्ट्रीकृत किसी सोसाइटी से भिन्न है] ऐसे संगम या निकाय द्वारा ऐसे संगम या निकाय के किसी सदस्य को दिए गए ब्याज, वेतन, बोनस, कमीशन या पारिश्रमिक का चाहे वह किसी भी नाम से ज्ञात हो, कोर्इ भुगतान।
स्पष्टीकरण 1.—जहां किसी संगम या निकाय द्वारा संगम या निकाय के किसी ऐसे सदस्य को, जिसने संगम या निकाय को ब्याज का संदाय भी कर दिया है, ब्याज का संदाय किया जाता है, वहां इस खंड के अधीन अनुज्ञात किए जाने वाले ब्याज की रकम ऐसी रकम तक सीमित होगी, जिससे संगम या निकाय द्वारा सदस्य को किए गए ब्याज का संदाय, सदस्य द्वारा संगम या निकाय को दिए गए ब्याज से अधिक हो जाता है।
स्पष्टीकरण 2.—जहां कोर्इ व्यष्टि, किसी अन्य व्यक्ति की ओर से या उसके फायदे के लिए किसी संगम या निकाय का सदस्य है (ऐसे सदस्य और अन्य व्यक्ति को इसमें इसके पश्चात् क्रमश: "प्रतिनिधि की हैसियत में सदस्य" और "इस प्रकार प्रतिनिधित्व प्राप्त व्यक्ति", कहा गया है) वहां,—
(i) संगम या निकाय द्वारा ऐसे व्यष्टि को या ऐसे व्यष्टि द्वारा संगम या निकाय को, जो प्रतिनिधि की हैसियत में सदस्य से भिन्न है, संदत्त किया गया ब्याज इस खंड के प्रयोजनों के लिए हिसाब में नहीं लिया जाएगा;
(ii) संगम या निकाय द्वारा ऐसे व्यष्टि को या ऐसे व्यष्टि द्वारा संगम या निकाय को प्रतिनिधि की हैसियत में सदस्य के रूप में संदत्त ब्याज और संगम या निकाय द्वारा ऐसे व्यष्टि को जिसका इस प्रकार प्रतिनिधित्व किया जाता है या ऐसे व्यष्टि द्वारा जिसका इस प्रकार प्रतिनिधित्व किया जाता है, संगम या निकाय को दिया गया ब्याज इस खंड के प्रयोजनों के लिए हिसाब में लिया जाएगा।
स्पष्टीकरण 3.—जहां कोर्इ व्यष्टि किसी संगम या निकाय में कोर्इ ऐसा सदस्य है जो प्रतिनिधि की हैसियत से सदस्य से भिन्न है, वहां संगम या निकाय द्वारा ऐसे व्यष्टि को दिया गया ब्याज इस खंड के प्रयोजनों के लिए हिसाब में नहीं लिया जाएगा, यदि ऐसा ब्याज उसके द्वारा किसी अन्य व्यक्ति की ओर से या उसके फायदे के लिए प्राप्त किया जाता है।
(ग) [प्रत्यक्ष कर विधि (संशोधन) अधिनियम, 1987 द्वारा 1.4.1989 से लोप किया गया। इससे पूर्व वित्त अधिनियम, 1963 द्वारा 1.4.1963 से, वित्त अधिनियम, 1964 द्वारा 1.4.1964 से, वित्त अधिनियम, 1965 द्वारा 1.4.1965 से, वित्त अधिनियम, 1968 द्वारा 1.4.1969 से, वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1971 द्वारा 1.4.1972 से, वित्त अधिनियम, 1984 द्वारा 1.4.1985 से और प्रत्यक्ष कर विधि (संशोधन) अधिनियम, 1987 द्वारा 1.4.1988 से इसे संशोधित किया गया था।]
(घ) [वित्त अधिनियम, 1988 द्वारा 1.4.1989 से लोप किया गया।]
[वित्त अधिनियम, 2021 द्वारा संशोधित रूप में]

