आयकर विभाग

वित्त मंत्रालय, भारत सरकार

मुख्य सामग्री पर जाने के लिए यहां क्लिक करें
शब्द आकार
सैचुरेशन
मदद

धारा 35क

पेटेन्ट अधिकारों या कापीराइट (प्रतिलिप्याधिकारों) के अर्जन पर व्यय

धारा

धारा संख्या

35क

अध्याय शीर्षक

अध्याय IV - कुल आय की गणना

अधिनियम

आय-कर अधिनियम, 1961

वर्ष

2019 (सं.1)

पेटेन्ट अधिकारों या कापीराइट (प्रतिलिप्याधिकारों) के अर्जन पर व्यय

पेटेन्ट अधिकारों या कापीराइट (प्रतिलिप्याधिकारों) के अर्जन पर व्यय

पेटेन्ट अधिकारों या कापीराइट (प्रतिलिप्याधिकारों) के अर्जन पर व्यय

35क. (1) कारबार के प्रयोजनों के लिए प्रयुक्त पेटेण्ट अधिकारों या प्रतिलिप्याधिकारों के (जो इसके पश्चात् इस धारा में अधिकारों के रूप में निर्दिष्ट हैं) अर्जन पर 28 फरवरी, 1966 के पश्चात् किंतु 1 अप्रैल, 1998 से पूर्व उपगत पूंजीगत प्रकार के किसी व्यय की बाबत, सुसंगत पूर्ववर्षों में हर एक वर्ष के लिए, ऐसे व्यय की रकम के समुचित प्रभाग के बराबर कटौती, इस धारा के उपबंधों के अधीन और अनुसार अनुज्ञात की जाएगी।

स्पष्टीकरण.–इस धारा के प्रयोजनों के लिए,—

(i) ''सुसंगत पूर्ववर्ष'' से अभिप्रेत है उस पूर्ववर्ष से जिसमें ऐसा व्यय उपगत किया जाता है आरम्भ होने वाले चौदह पूर्ववर्षों, या जहां ऐसा व्यय कारबार के प्रारम्भ से पूर्व उपगत किया जाता है, वहां उस पूर्ववर्ष से जिसमें वह कारबार प्रारंभ हुआ, आरंभ होने वाले चौदह पूर्ववर्ष :

परन्तु जहां अधिकार उस पूर्ववर्ष से, जिसमें उनके अर्जन पर व्यय निर्धारिती द्वारा किया गया था, पूर्ववर्ती किसी वर्ष में प्रारम्भ हुए अर्थात् प्रभावी हुए, वहां यह खण्ड चौदह वर्षों के प्रतिनिर्देश के स्थान पर, उन पूरे वर्षों की संख्या को, जो निर्धारिती द्वारा अधिकार अर्जित किए जाने पर, उनके प्रारम्भ के बाद से बीत गए हैं कम करके चौदह वर्ष के प्रतिनिर्देश और यदि चौदह वर्ष पूर्वोक्त रूप से व्यपगत हो गए हैं तो एक वर्ष के प्रति निर्देश रखकर प्रभावी होगा।

(ii) ''समुचित प्रभाग'' से वह प्रभाग अभिप्रेत है जिसका अंश एक है और जिसका हर (डिनोमिनेटर), सुसंगत पूर्ववर्षों की संख्या है।

(2) जहां अधिकारों की समाप्ति तत्पश्चात् पुन: प्रचलित हुए बिना हो जाती है या जहां संपूर्ण अधिकार या उनका कोर्इ भाग बेच दिया जाता है और विक्रय के आगम (जहां तक उनमें पूंजीगत राशियां समाविष्ट हैं) उनके अर्जन की अनुज्ञात रही लागत से कम नहीं हैं, वहां उपधारा (1) के अधीन कोर्इ कटौती उस पूर्ववर्ष के बाबत, जिसमें अधिकार समाप्त हो जाते हैं या संपूर्ण अधिकार या उनका कोर्इ भाग, जो भी हो बेच दिया जाता है, अथवा किसी पश्चात्वर्ती पूर्ववर्ष की बाबत, अनुज्ञात नहीं की जाएगी।

(3) जहां अधिकारों की समाप्ति या जो तत्पश्चात् पुन: प्रचलित हुए बिना हो जाती है या उन्हें उसके समग्र रूप में बेच दिया जाता है और विक्रय के आगम (जहां तक उनमें पूंजीगत राशियां समाविष्ट हैं) उनके अर्जन की अनुज्ञात रही लागत से न्यून हैं, वहां इतनी कटौती जितनी कि ऐसी अनुज्ञात रही लागत के बराबर हो, उस पूर्ववर्ष की बाबत जिसमें अधिकार समाप्त हो जाते हैं या बेच दिए जाते हैं, जो भी हो, अनुज्ञात की जाएगी।

(4) जहां संपूर्ण अधिकार या उसका कोर्इ भाग बेच दिया जाता है और विक्रय के आगम (जहां तक उनमें पूंजीगत राशियां समाविष्ट हैं) उनके अर्जन की अनुज्ञात रही लागत की रकम से अधिक है, वहां ऐसे आधिक्य का उतना जितना कि अधिकारों के अर्जन की लागत तथा ऐसी अनुज्ञात रही लागत की रकम के अन्तर से अधिक नहीं है, उस पूर्ववर्ष के जिसमें संपूर्ण अधिकार या उनका कोर्इ भाग बेचा जाता है, कारबार की आय के रूप में आय-कर से प्रभार्य होगा।

स्पष्टीकरण.–जहां संपूर्ण अधिकार या उनका कोर्इ भाग उस पूर्ववर्ष में बेचा जाता है जिसमें वह कारबार अस्तित्व में न रहा हो, वहां इस उपधारा के उपबंध इस प्रकार होंगे मानो वह कारबार उस पूर्ववर्ष में अस्तित्व में रहा हो।

(5) जहां अधिकारों का कोर्इ भाग बेचा जाता है और उपधारा (4) लागू नहीं होती है, वहां उपधारा (1) के अधीन अनुज्ञात की जाने वाली कटौती की रकम,–

() विक्रय के आगमों को (जहां तक उनमें पूंजी राशियां समाविष्ट हैं) अधिकारों के अर्जन की अनुज्ञात रही लागत की रकम में से घटाकर; और

() शेष को ऐसे सुसंगत पूर्ववर्षों की संख्या से जो उस पूर्ववर्ष के, जिसके दौरान अधिकार बेचे जाते हैं, आरम्भ में समाप्त नहीं हुए हैं, विभाजित करके,

निकाली जाएगी।

(6) जहां समामेलन की किसी स्कीम में समामेलन कंपनी अधिकारों को समामेलित कम्पनी को (जो एक भारतीय कम्पनी है) बेचती या अन्यथा अन्तरित करती है, वहां,–

(i) उपधारा (3) और (4) के उपबंध समामेलक कम्पनी की दशा में लागू नहीं होंगे; और

(ii) इस धारा के उपबंध समामेलित कम्पनी को, यथासंभव ऐसे लागू होंगे जैसे वे समामेलक कम्पनी को लागू होते यदि पश्चात्कथित ने अधिकार बेचे न होते या अन्यथा अन्तरित न किए होते।

(7) जहां अविलयन की स्कीम में अविलयित कंपनी परिणामी कंपनी (जो भारतीय कंपनी हो) को अधिकार बेचती है या अन्यथा अंतरित करती है,–

(i) उपधारा (3) और (4) के उपबंध अविलयित कंपनी की दशा में लागू नहीं होंगे; और

(ii) इस धारा के उपबंध पारिणामिक कंपनी को यथासंभव ऐसे लागू होंगे जैसे वे अविलयित कंपनी को लागू होते यदि पश्चात् कथित ने अधिकार बेचे नहीं होते या अन्यथा अंतरित न किए होते।

 

 

 

[वित्त अधिनियम, 2019 द्वारा संशोधित रूप में]

फ़ुटनोट