रिपोर्टों या प्रमाणपत्रों में गलत जानकारी प्रस्तुत करने के लिए शास्ति
16च[रिपोर्टों या प्रमाणपत्रों में गलत जानकारी प्रस्तुत करने के लिए शास्ति
271ञ. इस अधिनियम के उपबंधों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, जहां निर्धारण अधिकारी या आयुक्त (अपील) को इस अधिनियम के अधीन किन्हीं कार्यवाहियों के अनुक्रम में यह पता चलता है कि किसी लेखापाल या किसी वाणिज्यिक बैंककार या किसी रजिस्ट्रीकृत मूल्यांकक ने इस अधिनियम या तद्धीन बनाए गए नियमों के किसी उपबंध के अधीन प्रस्तुत किसी रिपोर्ट या प्रमाणपत्र में ऐसी गलत जानकारी प्रस्तुत की है, तो निर्धारण अधिकारी या आयुक्त (अपील), यथास्थिति, ऐसे लेखापाल या वाणिज्यिक बैंककार या रजिस्ट्रीकृत मूल्यांकक को यह निदेश दे सकेगा कि वह शास्ति के रूप में ऐसी प्रत्येक रिपोर्ट या प्रमाणपत्र के लिए दस हजार रुपए की राशि का संदाय करेगा।
स्पष्टीकरण–इस धारा के प्रयोजनों के लिए,–
(क) "लेखापाल" से धारा 288 की उपधारा (2) के नीचे दिए गए स्पष्टीकरण में निर्दिष्ट कोर्इ लेखापाल अभिप्रेत है;
(ख) "वाणिज्यिक बैंककार" से भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड अधिनियम, 1992 (1992 का 15) की धारा 3 के अधीन स्थापित भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड के साथ रजिस्ट्रीकृत प्रवर्ग 1 का वाणिज्यिक बैंककार अभिप्रेत है;
(ग) "रजिस्ट्रीकृत मूल्यांकक" से धन-कर अधिनियम, 1957 (1957 का 27) की धारा 2 के खंड (णकक) में परिभाषित कोर्इ व्यक्ति अभिप्रेत है।]
16च. वित्त अधिनियम, 2017 द्वारा 1.4.2017 से अंत:स्थापित।
[वित्त अधिनियम, 2017 द्वारा संशोधित रूप में]

