लेखाओं की संपरीक्षा कराने में असफलता
95[लेखाओं की संपरीक्षा कराने में असफलता
271ख. यदि कोर्इ व्यक्ति 96[* * *] धारा किसी निर्धारण वर्ष से सुसंगत पूर्ववर्ष या पूर्ववर्षों की बाबत अपने लेखाओं की संपरीक्षा कराने में या 97[धारा 44कख के अधीन यथा अपेक्षित ऐसी संपरीक्षा की रिपोर्ट प्रस्तुत करने में] असफल रहता है, तो 98[निर्धारण] अधिकारी यह निदेश दे सकेगा कि ऐसा व्यक्ति शास्ति के रूप में ऐसी राशि का संदाय करेगा जो ऐसे पूर्ववर्ष या पूर्ववर्ष में ऐसे व्यक्ति के, यथास्थिति, कारबार के कुल विक्रय, आवर्त या सकल प्राप्तियों के एक बटा दो प्रतिशत के बराबर रकम या एक लाख रुपए की राशि, उनमें से जो भी कम हो, होगी।]
95. वित्त अधिनियम, 1984 द्वारा 1.4.1985 से अंत:स्थापित।
96. "युक्तियुक्त कारण के बिना" शब्दों का कराधान विधि (संशोधन और प्रकीर्ण उपबंध) अधिनियम, 1986 द्वारा 10.9.1986 से लोप किया गया।
97. वित्त अधिनियम, 1995 द्वारा 1.7.1995 से "ऐसी आडिट रिपोर्ट प्राप्त करना जो धारा 44कख के अधीन अपेक्षित हो या उक्त रिपोर्ट धारा 139 की उपधारा (1) के अधीन फाइल की गर्इ अपनी आय की विवरणी के साथ या धारा 142 की उपधारा (2) के खंड (i) के अधीन नोटिस के उत्तर में दी गर्इ आय की विवरणी के साथ प्रस्तुत करेगा" शब्दों के स्थान पर रखे गए। इससे पहले कुछ शब्द वित्त अधिनियम, 1988 द्वारा 1.4.1989 से कोट किये हुए भाग में अंत:स्थापित हुए थे।
98. प्रत्यक्ष कर विधि (संशोधन) अधिनियम, 1987 द्वारा 1.4.1988 से "आय-कर" के स्थान पर प्रतिस्थापित।
[वित्त अधिनियम, 2000 द्वारा संशोधित रूप में]

