सूट द्वारा या अन्य कानून के तहत वसूली प्रभावित नहीं
वाद के द्वारा या अन्य विधि के अंतर्गत वसूली का प्रभावित न होना
232. इस अध्याय में उल्लिखित वसूली के विभिन्न ढंग–
(क) सरकार को देय ऋणों की वसूली से संबद्ध तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि को; या
(ख) निर्धारिती द्वारा देय बकाया की वसूली के लिए वाद संस्थित करने के सरकार के अधिकार को,
किसी प्रकार प्रभावित नहीं करेंगे और इस बात के होते हुए भी कि देय कर इस अध्याय में उल्लिखित किसी ढंग से निर्धारिती से वसूल किया जा रहा है, यथास्थिति, 95[निर्धारण] अधिकारी या सरकार द्वारा ऐसी किसी विधि या वाद का मार्ग अपनाना विधिपूर्ण होगा।
95. प्रत्यक्ष कर विधि (संशोधन) अधिनियम, 1987 द्वारा 1.4.1988 से "आय-कर" के स्थान पर प्रतिस्थापित।
[वित्त अधिनियम, 2008 द्वारा संशोधित रूप में]

