कर वसूली अधिकारी द्वारा प्रमाणपत्र
कर वसूली अधिकारी द्वारा प्रमाणपत्र
222. 53[(1) जब कोर्इ निर्धारिती कर का भुगतान करने में चूक करता है या चूक करने वाला समझा जाता है, तब कर वसूली अधिकारी अपने हस्ताक्षर से एक विवरण विहित प्ररूप54 में तैयार कर सकेगा, जिसमें निर्धारिती द्वारा शोध्य बकाया की रकम उल्लिखित होगी (ऐसे विवरण को इस अध्याय में इसके आगे और दूसरी अनुसूची में "प्रमाणपत्र" कहा गया है) और उस प्रमाणपत्र में उल्लिखित रकम को द्वितीय अनुसूची में दिए गए नियमों के अनुसार नीचे वर्णित ढंगों में से किसी एक या अधिक के द्वारा ऐसे निर्धारिती से वसूल करने के लिए कार्यवाही करेगा–]
(क) निर्धारिती की चल संपति की कुर्की और विक्रय;
(ख) निर्धारिती की अचल संपत्ति की कुर्की और विक्रय;
(ग) निर्धारिती की गिरफ्तारी और उसका कारागार में निरोध;
(घ) निर्धारिती की चल (जंगम) और अचल (स्थावर) संपत्तियों के प्रबंध के लिए रिसीवर की नियुक्ति।
55[स्पष्टीकरण.–इस उपधारा के प्रयोजनों के लिए, निर्धारिती की चल और अचल संपत्ति के अंतर्गत वह संपत्ति भी होगी जो निर्धारिती द्वारा अपने पति या पत्नी या अवयस्क संतान या पुत्रवधु या पुत्र की अवयस्क संतान को बिना पर्याप्त प्रतिफल के प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से 1 जून, 1973 को या उसके पश्चात् अंतरित की गर्इ है और जो पूर्वोक्त में से किसी के द्वारा धारित है या उसके नाम में है और जहां तक उसकी अवयस्क संतान या उसके पुत्र की अवयस्क संतान को इस प्रकार अंतरित चल या अचल संपत्ति का संबंध है, वह, यथास्थिति, ऐसी अवयस्क संतान या पुत्र की अवयस्क संतान के वयस्कता प्राप्त कर लेने की तारीख के बाद भी, उस तारीख से पूर्व की किसी कालावधि के संबंध में निर्धारिती से शोध्य बकाया की वसूली के लिए निर्धारिती की चल या अचल संपत्ति में सम्मिलित की जाती रहेगी।]
56[(2) इस बात के होते हुए भी कि बकाया की वसूली किसी अन्य ढंग से करने के लिए कार्यवाहियां की गर्इ हैं, कर वसूली अधिकारी उपधारा (1) के अधीन कार्यवाही कर सकेगा।]
53. प्रत्यक्ष कर विधि (संशोधन) अधिनियम, 1989 द्वारा 1.4.1988 से भूतलक्षी प्रभाव से, प्रत्यक्ष कर विधि (संशोधन) अधिनियम, 1987 द्वारा 1.4.1989 से यथा संशोधित उपधारा (1) में निम्नलिखित भाग के स्थान पर प्रतिस्थापित :
"जब कोर्इ निर्धारिती कर का भुगतान करने में व्यतिक्रम करता है या व्यतिक्रम करने वाला समझा जाता है, तब से निर्धारण अधिकारी अपने हस्ताक्षर सहित एक प्रमाणपत्र कर वसूली अधिकारी को भेजेगा, जिसमें निर्धारिती द्वारा देय बकाया की रकम उल्लिखित होगी और कर वसूली अधिकारी ऐसा प्रमाणपत्र प्राप्त होने पर उसमें उल्लिखित रकम को दूसरी अनुसूची में दिए गए नियमों के अनुसार नीचे वर्णित ढंगों में से एक या अधिक के द्वारा ऐसे निर्धारिती से वसूल करने के लिए कार्यवाही करेगा–"
54. कर वसूली अधिकारी द्वारा दिए गए विवरण के प्ररूप के लिए नियम 117ख और प्ररूप सं. 57 देखिए।
55. कराधान विधि (संशोधन) अधिनियम, 1975 द्वारा 1.10.1975 से अंत:स्थापित।
56. प्रत्यक्ष कर विधि (संशोधन) अधिनियम, 1987 द्वारा 1.4.1989 से प्रतिस्थापित। इसके प्रतिस्थापन से पूर्व उपधारा (2) प्रत्यक्ष कर विधि (संशोधन) अधिनियम, 1989 द्वारा 1.4.1988 से भूतलक्षी प्रभाव से यथा संशोधित की गयी थी।
[वित्त अधिनियम, 2013 द्वारा संशोधित रूप में]

