आयकर विभाग

वित्त मंत्रालय, भारत सरकार

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धारा 211

एडवांस टैक्स और नियत दिनांक के किस्तों

धारा

धारा संख्या

211

अध्याय शीर्षक

अध्याय XVII - कर संग्रह और वसूली

अधिनियम

आय-कर अधिनियम, 1961

वर्ष

2004

एडवांस टैक्स और नियत दिनांक के किस्तों

एडवांस टैक्स और नियत दिनांक के किस्तों

80[अग्रिम कर की किस्तें और नियत तारीखें81

211. 82[(1) चालू आय पर ऐसा अग्रिम कर, जो धारा 209 में दी गर्इ रीति से संगणित किया जाता है–

() उन सभी कंपनियों द्वारा, जो उसका भुगतान करने के लिए दायी हैं, प्रत्येक वित्तीय वर्ष के दौरान चार किस्तों में देय होगा और प्रत्येक किस्त की नियत तारीख और ऐसी किस्त की रकम वह होगी, जो नीचे की सारणी-1 में उल्लिखित है :

सारणी 1

किस्त की नियत तारीख देय रकम
15 जून को या उसके पूर्व ऐसे अग्रिम कर के कम-से-कम पंद्रह प्रतिशत।
15 सितंबर को या उसके पूर्व ऐसे अग्रिम कर के कम-से-कम पैंतालीस प्रतिशत, जो पूर्वतर किस्त में भुगतान की गर्इ रकम को, यदि कोर्इ हो, घटाकर आए।
15 दिसंबर को या उसके पूर्व ऐसे अग्रिम कर के कम-से-कम पचहत्तर प्रतिशत से, जो पूर्वतर किस्त या किस्तों में भुगतान की गर्इ रकम या रकमों को, यदि कोर्इ हो, घटाकर आए।
15 मार्च को या उसके पूर्व ऐसे अग्रिम कर की संपूर्ण रकम, जो पूर्वतर किस्त या किस्तों में भुगतान की गर्इ रकम या रकमों को, यदि कोर्इ हों, घटाकर आए।

() (कंपनियों से भिन्न) उन सभी निर्धारितियों द्वारा, जो उसका भुगतान करने के लिए दायी हैं, प्रत्येक वित्तीय वर्ष के दौरान तीन किस्तों में देय होगा और प्रत्येक किस्त की नियत तारीख और ऐसी किस्त की रकम वह होगी, जो नीचे की सारणी-2 में उल्लिखित है :

सारणी 2

किस्त की नियत तारीख देय रकम
15 सितंबर को या उसके पूर्व ऐसे अग्रिम कर के कम-से-कम तीस प्रतिशत।
15 दिसंबर को या उसके पूर्व ऐसे अग्रिम कर के कम-से-कम साठ प्रतिशत, जो पूर्वतर किस्त में भुगतान की गर्इ रकम को, यदि कोर्इ हो, घटाकर आए।
15 मार्च को या उसके पूर्व ऐसे अग्रिम कर की संपूर्ण रकम, जो पूर्वतर किस्त या किस्तों में भुगतान की गर्इ रकम या रकमों को, यदि कोर्इ हों, घटाकर आए:

परन्तु यह कि इस अधिनियम के सभी प्रयोजनों के लिए, मार्च के 31वें दिन को या उसके पूर्व अग्रिम कर के रूप में भुगतान की गर्इ रकम को भी उस दिन को समाप्त होने वाले वित्तीय वर्ष के दौरान, भुगतान किया गया अग्रिम कर माना जाएगा।]

(2) यदि धारा 210 की उपधारा (3) या उपधारा (4) के अंतर्गत निर्धारण अधिकारी के आदेश के अनुसरण में, धारा 156 के अंतर्गत जारी की गर्इ मांग की सूचना की तामील उपधारा (1) में उल्लिखित किसी भी नियत, तारीख के बाद की जाती है तो ऐसी सूचना में उल्लिखित अग्रिम कर की, यथास्थिति, संपूर्ण रकम या उसका समुचित भाग, ऐसी प्रत्येक तारीख को या उसके पूर्व देय होगा जो मांग की सूचना की तामील की तारीख के पश्चात् पड़ती है।]

 

80. प्रत्यक्ष कर विधि (संशोधन) अधिनियम, 1987 द्वारा 1.4.1988 से प्रतिस्थापित। इससे पूर्व इसका वित्त अधिनियम, 1969 द्वारा 1.4.1969 से, वित्त अधिनियम, 1972 द्वारा 1.4.1972 से और वित्त अधिनियम, 1978 द्वारा 1.6.1978 से संशोधन किया गया था।

81. तारीख 14.1.1994 का परिपत्र सं. 676, तारीख 16.12.1994 का परिपत्र सं. 697 और तारीख 19.7.1995 का परिपत्र सं. 709 देखिए। ब्यौरे के लिए देखिए टैक्समैन्स मास्टर गाइड टु इन्कम टैक्स ऐक्ट।

82. वित्त अधिनियम, 1994 द्वारा 1.4.1994 से प्रतिस्थापित। प्रतिस्थापन के पूर्व, प्रत्यक्ष कर विधि (संशोधन) अधिनियम, 1987 द्वारा 1.4.1988 से यथा प्रतिस्थापित और बाद में वित्त अधिनियम, 1992 द्वारा 1.4.1992 से यथासंशोधित उपधारा (1) निम्नानुसार थी :

"(1) चालू आय पर ऐसा अग्रिम कर जो धारा 209 में दी गर्इ रीति से परिकलित किया जाता है, उन सभी निर्धारितियों द्वारा संदेय होगा जो प्रत्येक वित्तीय वर्ष के दौरान तीन किस्तों में उसका भुगतान करने के लिए दायी है, नियत तारीख और ऐसी प्रत्येक किस्त में संदेय रकम निम्नलिखित सारणी में उल्लिखित है :

सारणी

किस्त की नियत तारीख संदेय रकम
15 सितंबर को या उसके पूर्व ऐसे अग्रिम आय-कर के तीस प्रतिशत से अन्यून।
15 दिसंबर को या उसके पूर्व अग्रिम कर के साठ प्रतिशत से अन्यून, जो पूर्वतर किस्त में संदत्त रकम को, यदि कोर्इ हो, घटाकर आए।
15 मार्च को या उसके पूर्व ऐसे अग्रिम कर की संपूर्ण रकम, जो पूर्वतर किस्त या किस्तों में संदत्त रकम को, यदि कोर्इ हो, घटाकर आए :

परन्तु यह कि इस अधिनियम के सभी प्रयोजनों के लिए मार्च के 31वें दिन को या उसके पूर्व अग्रिम कर के रूप में संदत्त रकम को, उस दिन को समाप्त होने वाले वित्तीय वर्ष के दौरान संदत्त अग्रिम कर माना जाएगा।"

 

 

[वित्त (सं. 2) अधिनियम, 2004 द्वारा संशोधित रूप में]

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