भुगतान के लिए जिम्मेदार व्यक्ति का अर्थ
''संदाय करने के लिए उत्तरदायी'' व्यक्ति का अर्थ]
204. 6-18[इस अध्याय के पूर्वगामी उपबंधों तथा *धारा 285] के प्रयोजनों के लिए ''संदाय करने के लिए उत्तरदायी व्यक्ति'' पद से अभिप्रेत है :–
(i) केन्द्रीय सरकार या राज्य सरकार द्वारा संदायों से भिन्न ''वेतन'' शीर्ष के अधीन प्रभार्य आय के संदायों की दशा में, स्वयं नियोजक या यदि नियोजक कंपनी है तो स्वयं कंपनी, जिसके अंतर्गत उसका प्रधान अधिकारी भी है;
(ii) केन्द्रीय सरकार या राज्य सरकार द्वारा या उनकी ओर से किए गए संदायों से भिन्न ''प्रतिभूतियों पर ब्याज'' शीर्ष के अधीन प्रभार्य आय के संदायों की दशा में स्थानीय प्राधिकारी, निगम या कंपनी, जिसके अंतर्गत उसका प्रधान अधिकारी भी है।
19[(iiक) किसी अनिवासी भारतीय को संदेय किसी ऐसी राशि की दशा में जो किसी ऐसी विदेशी मुद्रा आस्ति के, जो कोर्इ अल्पकालिक पूंजी आस्ति नहीं है, उसके द्वारा अंतरण के प्रतिफल के रूप में कोर्इ राशि है, प्राधिकृत व्यवहारी, जो अनिवासी भारतीय को ऐसी राशि प्रेषित करने के लिए, या विदेशी मुद्रा विनियमन अधिनियम, 1973 (1973 का 46) और उसके अधीन बनाए गए नियमों के अनुसार रखे गए अनिवासी (विदेशी) खाते में ऐसी राशि जमा करने के लिए उत्तरदायी है;]
(iii) इस अधिनियम के उपबंधों के अधीन प्रभार्य किसी अन्य राशि के 20[यथास्थिति, जमा किए जाने या संदाय की दशा में] स्वयं संदायकर्ता या यदि संदायकर्ता कंपनी है तो स्वयं कंपनी, जिसके अंतर्गत उसका प्रधान अधिकारी भी है।
21[स्पष्टीकरण.–इस धारा के प्रयोजनों के लिए–
(क) ''अनिवासी भारतीय'' और ''विदेशी मुद्रा आस्ति'' के वही अर्थ हैं जो उनके अध्याय 12क में हैं;
(ख) ''प्राधिकृत व्यवहारी''22 का वही अर्थ है जो उसका विदेशी मुद्रा विनियमन अधिनियम, 1973 (1973 का 46) की धारा 2 के खंड (ख) में है।]
6-18. वित्त (संñ 2) अधिनियम, 2004 द्वारा 1.10.2004 से "धारा 192 से" शब्दों से प्रारम्भ होने वाले और "धारा 285" से समाप्त होने वाले भाग के स्थान पर प्रतिस्थापित। प्रतिस्थापन से पूर्व, वित्त (संñ 2) अधिनियम, 1967 द्वारा 1.4.1967 से, वित्त अधिनियम, 1972 द्वारा 1.4.1972 से, वित्त अधिनियम, 1973 द्वारा 1.4.1973 से, वित्त अधिनियम, 1978 द्वारा 1.4.1978 से, प्रत्यक्ष कर विधि (दूसरा संशोधन) अधिनियम, 1989 द्वारा 1.11.1989 से, वित्त (संñ 2) अधिनियम, 1991 द्वारा 1.10.1991 से, वित्त अधिनियम, 1994 द्वारा 1.6.1994 से, वित्त अधिनियम, 1995 द्वारा 1.7.1995 से और वित्त अधिनियम, 1999 द्वारा 1.6.1999 से यथासंशोधित कोट किया गया भाग इस प्रकार था :
"धारा 192 से धारा 194 तक, धारा 194क, धारा 194ख, धारा 194खख, धारा 194ग, धारा 194घ, धारा 194ड़, धारा 194ड़ड़, धारा 194च, धारा 194छ, धारा 194ज, धारा 194झ, धारा 194ञ, धारा 194ट, धारा 194ठ, धारा 195 से धारा 203 तक तथा धारा 285।"
19. वित्त अधिनियम, 1986 द्वारा 1.6.1986 से अंत:स्थापित।
20. वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1967 द्वारा 1.4.1967 से ''संदाय की दशा में'' के स्थान पर प्रतिस्थापित।
* वित्त अधिनियम, 1987 द्वारा 1.6.1987 से धारा 285 का अब लोप कर दिया गया है।
21. वित्त अधिनियम, 1986 द्वारा 1.6.1986 से अंत:स्थापित।
22. ''प्राधिकृत व्यवहारी'' की परिभाषा के लिए पूर्वपृष्ठ 1.308 पर पाद टिप्पण 9 देखिए।
[वित्त अधिनियम, 2005 तथा विशेष आर्थिक जोन अधिनियम, 2005 द्वारा संशोधित रूप में]

