आयकर विभाग

वित्त मंत्रालय, भारत सरकार

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धारा 2

आय-कर

धारा

धारा संख्या

2

अध्याय शीर्षक

अध्याय II - आयकर की दरें

अधिनियम

वित्त अधिनियम

वर्ष

2014

आय-कर

आय-कर

अध्याय 2

आय-कर की दरें

आय-कर

2. (1) उपधारा (2) और उपधारा (3) के उपबंधों के अधीन रहते हुए, 1 अप्रैल, 2014 को प्रारंभ होने वाले निर्धारण वर्ष के लिए आय-कर, पहली अनुसूची के भाग 1 में विनिर्दिष्ट दरों से प्रभारित किया जाएगा और ऐसे कर में, प्रत्येक दशा में, उसमें उपबंधित रीति से, परिकलित अधिभार, संघ के प्रयोजनों के लिए, बढ़ा दिया जाएगा।

(2) उन दशाओं में, जिनमें पहली अनुसूची के भाग 1 का पैरा क लागू होता है, जहां निर्धारिती की, पूर्ववर्ष में, कुल आय के अतिरिक्त, पांच हजार रुपए से अधिक कोर्इ शुद्ध कृषि-आय है, और कुल आय दो लाख रुपए से अधिक हो जाती है वहां,–

() शुद्ध कृषि-आय को, कुल आय के संबंध में केवल आय-कर प्रभारित करने के प्रयोजन के लिए, खंड (ख) में उपबंधित रीति से हिसाब में लिया जाएगा [अर्थात् मानो शुद्ध कृषि-आय कुल आय के प्रथम दो लाख रुपए के पश्चात् कुल आय में समाविष्ट हो, किंतु कर के दायित्वाधीन न हो]; और

() प्रभार्य आय-कर निम्नलिखित रीति से परिकलित किया जाएगा, अर्थात् :–

(i) कुल आय और शुद्ध कृषि-आय को संकलित कर दिया जाएगा और संकलित आय के संबंध में आय-कर की रकम, उक्त पैरा क में विनिर्दिष्ट दरों से ऐसे अवधारित की जाएगी, मानो ऐसी संकलित आय कुल आय हो;

(ii) शुद्ध कृषि-आय में दो लाख रुपए की राशि बढ़ा दी जाएगी और इस प्रकार बढ़ार्इ गर्इ शुद्ध कृषि-आय के संबंध में आय-कर की रकम, उक्त पैरा क में विनिर्दिष्ट दरों से ऐसे अवधारित की जाएगी, मानो इस प्रकार बढ़ार्इ गर्इ शुद्ध कृषि-आय कुल आय हो;

(iii) उपखंड (i) के अनुसार अवधारित आय-कर की रकम में से उपखंड (ii) के अनुसार अवधारित आय-कर की रकम घटा दी जाएगी और इस प्रकार प्राप्त राशि, कुल आय के संबंध में आय-कर होगी :

परंतु पहली अनुसूची के भाग 1 के पैरा क की मद (II) में निर्दिष्ट प्रत्येक व्यष्टि की दशा में, जो भारत में निवासी है और पूर्ववर्ष के दौरान किसी समय साठ वर्ष का या उससे अधिक, किंतु अस्सी वर्ष से कम आयु का है, इस उपधारा के उपबंध इस प्रकार प्रभावी होंगे मानो "दो लाख रुपए" शब्दों के स्थान पर, "दो लाख पचास हजार रुपए" शब्द रखे गए हों :

परंतु यह और कि पहली अनुसूची के भाग 1 के पैरा क की मद (III) में निर्दिष्ट प्रत्येक व्यष्टि की दशा में, जो भारत में निवासी है और पूर्ववर्ष के दौरान किसी समय अस्सी वर्ष का या उससे अधिक आयु का है, इस उपधारा के उपबंध इस प्रकार प्रभावी होंगे मानो "दो लाख रुपए" शब्दों के स्थान पर, "पांच लाख रुपए" शब्द रखे गए हों।

(3) उन दशाओं में, जिनमें आय-कर अधिनियम, 1961 (1961 का 43) (जिसे इसमें इसके पश्चात् आय-कर अधिनियम कहा गया है) के अध्याय 12 या अध्याय 12क या धारा 115ञख या धारा 115ञग या धारा 161 की उपधारा (1क) या धारा 164 या धारा 164क या धारा 167ख के उपबंध लागू होते हैं, प्रभार्य कर का अवधारण, उस अध्याय या उस धारा में उपबंधित रूप में और, यथास्थिति, उपधारा (1) द्वारा अधिरोपित दरों के या उस अध्याय या उस धारा में विनिर्दिष्ट दरों के प्रति निर्देश से किया जाएगा :

परंतु आय-कर अधिनियम की धारा 111क या धारा 112 के उपबंधों के अनुसार संगणित आय-कर की रकम में, पहली अनुसूची के भाग 1 के, यथास्थिति, पैरा क, पैरा ख, पैरा ग, पैरा घ और पैरा ड़ में यथा उपबंधित अधिभार, संघ के प्रयोजनों के लिए, बढ़ा दिया जाएगा :

परंतु यह और कि किसी ऐसी आय के संबंध में, जो आय-कर अधिनियम की धारा 115क, धारा 115कख, धारा 115कग, धारा 115कगक, धारा 115कघ, धारा 115ख, धारा 115खख, धारा 115खखक, धारा 115खखग, धारा 115खखघ, धारा 115खखड़, धारा 115ड़, धारा 115ञख या धारा 115ञग के अधीन कर से प्रभार्य है, इस उपधारा के अधीन संगणित आय-कर की रकम में,–

() प्रत्येक व्यष्टि या हिंदू अविभक्त कुटुंब या व्यक्ति-संगम या व्यष्टि-निकाय, चाहे वह निगमित हो या न हो, या आय-कर अधिनियम की धारा 2 के खंड (31) के उपखंड (vii) में निर्दिष्ट प्रत्येक कृत्रिम विधिक व्यक्ति या सहकारी सोसाइटी या फर्म या स्थानीय प्राधिकारी की दशा में, जहां कुल आय एक करोड़ रुपए से अधिक है, ऐसे आय-कर के दस प्रतिशत की दर से;

() प्रत्येक देशी कंपनी की दशा में,–

(i) जहां कुल आय एक करोड़ रुपए से अधिक है, किंतु दस करोड़ रुपए से अधिक नहीं है, ऐसे आय-कर के पांच प्रतिशत की दर से;

(ii) जहां कुल आय दस करोड़ रुपए से अधिक है, ऐसे आय-कर के दस प्रतिशत की दर से;

() देशी कंपनी से भिन्न प्रत्येक कंपनी की दशा में,–

(i) जहां कुल आय एक करोड़ रुपए से अधिक है, किंतु दस करोड़ रुपए से अधिक नहीं है, ऐसे आय-कर के दो प्रतिशत की दर से;

(ii) जहां कुल आय दस करोड़ रुपए से अधिक है, ऐसे आय-कर के पांच प्रतिशत की दर से,

परिकलित अधिभार, संघ के प्रयोजनों के लिए, बढ़ा दिया जाएगा :

परंतु यह भी कि उपरोक्त (क) में वर्णित व्यक्तियों की दशा में, जिनकी कुल आय आय-कर अधिनियम की धारा 115ञग के अधीन कर से प्रभार्य है और ऐसी आय एक करोड़ रुपए से अधिक है, ऐसी आय पर आय-कर और उस पर अधिभार के रूप में संदेय कुल रकम एक करोड़ रुपए की कुल आय पर आय-कर के रूप में संदेय कुल रकम आय की उस रकम से अधिक नहीं होगी, जो एक करोड़ रुपए से अधिक है:

परंतु यह भी कि प्रत्येक ऐसी कंपनी की दशा में, जिसकी कुल आय आय-कर अधिनियम की धारा 115ञख के अधीन कर से प्रभार्य है और ऐसी आय एक करोड़ रुपए से अधिक है, किंतु दस करोड़ रुपए से अधिक नहीं है, ऐसी आय पर आय-कर और उस पर अधिभार के रूप में संदेय कुल रकम एक करोड़ रुपए की कुल आय पर आय-कर के रूप में संदेय कुल रकम आय की उस रकम से अधिक नहीं होगी, जो एक करोड़ रुपए से अधिक है :

परंतु यह भी कि प्रत्येक ऐसी कंपनी की दशा में, जिसकी कुल आय आय-कर अधिनियम की धारा 115ञख के अधीन कर से प्रभार्य है और ऐसी आय दस करोड़ रुपए से अधिक है, ऐसी आय पर आय-कर और उस पर अधिभार के रूप में संदेय कुल रकम दस करोड़ रुपए की कुल आय पर आय-कर और अधिभार के रूप में संदेय कुल रकम आय की उस रकम से अधिक नहीं होगी, जो दस करोड़ रुपए से अधिक है।

(4) उन दशाओं में, जिनमें कर, आय-कर अधिनियम की धारा 115ण या धारा 115थक या धारा 115द की उपधारा (2) या धारा 115नक के अधीन प्रभारित और संदत्त किया जाना है, कर उन धाराओं में यथा विनिर्दिष्ट दरों से प्रभारित और संदत्त किया जाएगा और उसमें ऐसे कर के दस प्रतिशत की दर से परिकलित अधिभार, संघ के प्रयोजनों के लिए बढ़ा दिया जाएगा।

(5) उन दशाओं में जिनमें, कर, आय-कर अधिनियम की धारा 193, धारा 194, धारा 194क, धारा 194ख, धारा 194खख, धारा 194घ और धारा 195 के अधीन, प्रवृत्त दरों से, काटा जाना है, उनमें कटौतियां पहली अनुसूची के भाग 2 में विनिर्दिष्ट दरों से की जाएंगी और उन मामलों में, जहां कहीं विहित किया गया हो, उसमें उपबंधित रीति से परिकलित अधिभार, संघ के प्रयोजनों के लिए, बढ़ा दिया जाएगा।

(6) उन दशाओं में, जिनमें कर, आय-कर अधिनियम की धारा 194ग, धारा 194घक, धारा 194ड़, धारा 194ड़ड़, धारा 194च, धारा 194छ, धारा 194ज, धारा 194झ, धारा 194झक, धारा 194ञ, धारा 194ठक, धारा 194ठख, धारा 194ठखक, धारा 194ठग, धारा 194ठघ, धारा 196ख, धारा 196ग और धारा 196घ के अधीन काटा जाना है, कटौतियां उन धाराओं में विनिर्दिष्ट दरों से की जाएंगी और उनमें,–

() प्रत्येक व्यष्टि या हिन्दू अविभक्त कुटुंब या व्यक्ति-संगम या व्यष्टि-निकाय की, चाहे वह निगमित हो या नहीं, या आय-कर अधिनियम की धारा 2 के खंड (31) के उपखंड (vii) में निर्दिष्ट प्रत्येक कृत्रिम विधिक व्यक्ति या सहकारी सोसाइटी या फर्म, जो अनिवासी है, की दशा में, जहां संदत्त या संदत्त किए जाने के लिए संभावित आय या ऐसी आय का योग और कटौतियों के अधीन रहते हुए एक करोड़ रुपए से अधिक है, ऐसे कर के दस प्रतिशत की दर से;

() देशी कंपनी से भिन्न प्रत्येक कंपनी की दशा में,–

(i) जहां संदत्त या संदत्त किए जाने के लिए संभावित आय या ऐसी आय का योग और कटौतियों के अधीन रहते हुए एक करोड़ रुपए से अधिक है, किंतु दस करोड़ रुपए से अधिक नहीं है, ऐसे कर के दो प्रतिशत की दर से;

(ii) जहां संदत्त या संदत्त किए जाने के लिए संभावित आय या ऐसी आय का योग और कटौतियों के अधीन रहते हुए दस करोड़ रुपए से अधिक है, ऐसे कर के पांच प्रतिशत की दर से,

परिकलित अधिभार, संघ के प्रयोजनों के लिए, बढ़ा दिया जाएगा।

(7) उन दशाओं में, जिनमें कर का संग्रहण आय-कर अधिनियम की धारा 194ख के परंतुक के अधीन किया जाना है, ऐसा संग्रहण पहली अनुसूची के भाग 2 में विनिर्दिष्ट दरों से किया जाएगा और उन दशाओं में, जहां कहीं विहित किया गया हो, उसमें उपबंधित रीति से परिकलित अधिभार, संघ के प्रयोजनों के लिए, बढ़ा दिया जाएगा।

(8) उन दशाओं में, जिनमें कर का संग्रहण आय-कर अधिनियम की धारा 206ग के अधीन किया जाना है, ऐसा संग्रहण उस धारा में विनिर्दिष्ट दरों से किया जाएगा और उसमें,–

() प्रत्येक व्यष्टि या हिन्दू अविभक्त कुटुंब या व्यक्ति-संगम या व्यष्टि-निकाय की, चाहे वह निगमित हो या नहीं, या आय-कर अधिनियम की धारा 2 के खंड (31) के उपखंड (vii) में निर्दिष्ट प्रत्येक कृत्रिम विधिक व्यक्ति या सहकारी सोसाइटी या फर्म, जो अनिवासी है, की दशा में, जहां संगृहीत और संग्रहण के अधीन रहते हुए रकम या ऐसी रकमों का योग एक करोड़ रुपए से अधिक है, ऐसे कर के दस प्रतिशत की दर से ;

() देशी कंपनी से भिन्न प्रत्येक कंपनी की दशा में,–

(i) जहां संगृहीत और संग्रहण के अधीन रहते हुए रकम या ऐसी रकमों का योग एक करोड़ रुपए से अधिक है, किंतु दस करोड़ रुपए से अधिक नहीं है, ऐसे कर के दो प्रतिशत की दर से;

(ii) जहां संगृहीत और संग्रहण के अधीन रहते हुए रकम या ऐसी रकमों का योग दस करोड़ रुपए से अधिक है, ऐसे कर के पांच प्रतिशत की दर से,

परिकलित अधिभार, संघ के प्रयोजनों के लिए, बढ़ा दिया जाएगा।

(9) उपधारा (10) के उपबंधों के अधीन रहते हुए, उन दशाओं में, जिनमें आय-कर, प्रवृत्त दर या दरों से, आय-कर अधिनियम की धारा 172 की उपधारा (4) या धारा 174 की उपधारा (2) या धारा 174क या धारा 175 या धारा 176 की उपधारा (2) के अधीन प्रभारित किया जाना है या उक्त अधिनियम की धारा 192 के अधीन "वेतन" शीर्ष के अधीन प्रभार्य आय में से काटा जाना है या संदत्त किया जाना है अथवा उक्त अधिनियम के अध्याय 17ग के अधीन संदेय "अग्रिम कर" की संगणना की जानी है, यथास्थिति, ऐसा आय-कर या "अग्रिम कर", पहली अनुसूची के भाग 3 में विनिर्दिष्ट दर या दरों से इस प्रकार प्रभारित किया जाएगा, काटा जाएगा या संगणित किया जाएगा और ऐसे कर में, उन दशाओं में और उसमें यथा उपबंधित रीति से, परिकलित अधिभार, संघ के प्रयोजनों के लिए, बढ़ा दिया जाएगा :

परंतु उन दशाओं में, जिनमें आय-कर अधिनियम के अध्याय 12 या अध्याय 12क या धारा 115ञख या धारा 115ञग या अध्याय 12चक या धारा 161 की उपधारा (1क) या धारा 164 या धारा 164क या धारा 167ख के उपबंध लागू होते हैं, "अग्रिम कर" की संगणना, यथास्थिति, इस उपधारा द्वारा अधिरोपित दरों के या उस अध्याय या धारा में यथाविनिर्दिष्ट दरों के प्रति निर्देश से की जाएगी :

परंतु यह और कि आय-कर अधिनियम की धारा 111क या धारा 112 के उपबंधों के अनुसार संगणित "अग्रिम कर" की रकम में, पहली अनुसूची के भाग 3 के, यथास्थिति, पैरा क, पैरा ख, पैरा ग, पैरा घ या पैरा ड़ में यथा उपबंधित अधिभार, संघ के प्रयोजनों के लिए, बढ़ा दिया जाएगा :

परंतु यह भी कि आय-कर अधिनियम की धारा 115क, धारा 115कख, धारा 115कग, धारा 115कगक, धारा 115कघ, धारा 115ख, धारा 115खख, धारा 115खखक, धारा 115खखग, धारा 115खखघ, धारा 115खखड़, धारा 115ड़, धारा 115ञख और धारा 115ञग के अधीन कर से प्रभार्य किसी आय के संबंध में पहले परंतुक के अधीन संगणित "अग्रिम कर" में,–

() प्रत्येक व्यष्टि या हिन्दू अविभक्त कुटुंब या व्यक्ति-संगम या व्यष्टि-निकाय की, चाहे वह निगमित हो या नहीं, या आय-कर अधिनियम की धारा 2 के खंड (31) के उपखंड (vii) में निर्दिष्ट प्रत्येक कृत्रिम विधिक व्यक्ति या सहकारी सोसाइटी या फर्म या स्थानीय प्राधिकारी की दशा में, जहां कुल आय एक करोड़ रुपए से अधिक है, ऐसे कर के दस प्रतिशत की दर से;

() प्रत्येक देशी कंपनी की दशा में,–

(i) जहां कुल आय एक करोड़ रुपए से अधिक है, किंतु दस करोड़ रुपए से अधिक नहीं है, ऐसे "अग्रिम कर" के पांच प्रतिशत की दर से;

(ii) जहां कुल आय दस करोड़ रुपए से अधिक है, ऐसे "अग्रिम कर" के दस प्रतिशत की दर से;

() देशी कंपनी से भिन्न प्रत्येक कंपनी की दशा में,–

(i) जहां कुल आय एक करोड़ रुपए से अधिक है, किंतु दस करोड़ रुपए से अधिक नहीं है, ऐसे "अग्रिम कर" के दो प्रतिशत की दर से;

(ii) जहां कुल आय दस करोड़ रुपए से अधिक है, ऐसे "अग्रिम कर" के पांच प्रतिशत की दर से,

परिकलित अधिभार, संघ के प्रयोजनों के लिए, बढ़ा दिया जाएगा :

परंतु यह भी कि उपरोक्त (क) में वर्णित व्यक्तियों की दशा में, जिनकी कुल आय आय-कर अधिनियम की धारा 115ञग के अधीन कर से प्रभार्य है और ऐसी आय एक करोड़ रुपए से अधिक है, ऐसी आय पर "अग्रिम कर" और उस पर अधिभार के रूप में संदेय कुल रकम एक करोड़ रुपए की कुल आय पर "अग्रिम कर" के रूप में संदेय कुल रकम आय की उस रकम से अधिक नहीं होगी, जो एक करोड़ रुपए से अधिक है:

परंतु यह भी कि प्रत्येक ऐसी कंपनी की दशा में, जिसकी कुल आय आय-कर अधिनियम की धारा 115ञख के अधीन कर से प्रभार्य है और ऐसी आय एक करोड़ रुपए से अधिक है, किंतु दस करोड़ रुपए से अधिक नहीं है, ऐसी आय पर "अग्रिम कर" के रूप में संदेय कुल रकम और उस पर अधिभार की रकम एक करोड़ रुपए की कुल आय पर "अग्रिम कर" के रूप में संदेय कुल रकम पर आय की उस रकम से अधिक नहीं होगी, जो एक करोड़ रुपए से अधिक है:

परंतु यह भी कि प्रत्येक ऐसी कंपनी की दशा में, जिसकी कुल आय आय-कर अधिनियम की धारा 115ञख के अधीन कर से प्रभार्य है और ऐसी आय दस करोड़ रुपए से अधिक है, ऐसी आय पर "अग्रिम कर" के रूप में संदेय कुल रकम और उस पर अधिभार की रकम दस करोड़ रुपए की कुल आय पर "अग्रिम कर" के रूप में संदेय कुल रकम पर आय की उस रकम से अधिक नहीं होगी, जो दस करोड़ रुपए से अधिक है।

(10) उन दशाओं में जिनमें, पहली अनुसूची के भाग 3 का पैरा क लागू होता है, जहां निर्धारिती की पूर्ववर्ष में या, यदि आय-कर अधिनियम के किसी उपबंध के आधार पर आय-कर पूर्ववर्ष से भिन्न किसी अवधि की आय के संबंध में प्रभारित किया जाना है, ऐसी अन्य अवधि में कुल आय के अतिरिक्त पांच हजार रुपए से अधिक कोर्इ शुद्ध कृषि-आय भी है और कुल आय दो लाख पचास हजार रुपए से अधिक है, वहां प्रवृत्त दर या दरों से, उक्त अधिनियम की धारा 174 की उपधारा (2) या धारा 174क या धारा 175 या धारा 176 की उपधारा (2) के अधीन आय-कर प्रभारित करने में अथवा उक्त अधिनियम के अध्याय 17ग के अधीन संदेय "अग्रिम कर" की संगणना करने में,–

() शुद्ध कृषि-आय को, कुल आय के संबंध में, केवल, यथास्थिति, ऐसा आय-कर या "अग्रिम कर" प्रभारित या संगणित करने के प्रयोजन के लिए, खंड (ख) में उपबंधित रीति से हिसाब में लिया जाएगा, [अर्थात्, मानो शुद्ध कृषि-आय कुल आय के प्रथम दो लाख पचास हजार रुपए के पश्चात् कुल आय में समाविष्ट हो, किंतु कर के दायित्वाधीन न हो]; और

() यथास्थिति, ऐसा आय-कर या "अग्रिम कर" निम्नलिखित रीति से प्रभारित या संगणित किया जाएगा, अर्थात्:–

(i) कुल आय और शुद्ध कृषि-आय को संकलित कर दिया जाएगा और संकलित आय के संबंध में आय-कर या "अग्रिम कर" की रकम, उक्त पैरा क में विनिर्दिष्ट दरों से ऐसे अवधारित की जाएगी, मानो ऐसी संकलित आय कुल आय हो;

(ii) शुद्ध कृषि-आय में दो लाख पचास हजार रुपए की राशि बढ़ा दी जाएगी और इस प्रकार बढ़ार्इ गर्इ शुद्ध कृषि-आय के संबंध में आय-कर या "अग्रिम कर" की रकम, उक्त पैरा क में विनिर्दिष्ट दरों से ऐसे अवधारित की जाएगी, मानो इस प्रकार बढ़ार्इ गर्इ शुद्ध कृषि-आय कुल आय हो;

(iii) उपखंड (i) के अनुसार अवधारित आय-कर या "अग्रिम कर" की रकम में से उपखंड (ii) के अनुसार अवधारित, यथास्थिति, आय-कर या "अग्रिम कर" की रकम घटा दी जाएगी और इस प्रकार संकलित राशि, कुल आय के संबंध में, यथास्थिति, आय-कर या "अग्रिम कर" होगी:

परंतु ऐसे प्रत्येक व्यष्टि की दशा में, जो पहली अनुसूची के भाग 3 के पैरा क की मद (II) में निर्दिष्ट भारत में निवासी है और पूर्ववर्ष के दौरान किसी समय साठ वर्ष या उससे अधिक, किंतु अस्सी वर्ष से कम की आयु का है, इस उपधारा के उपबंध ऐसे प्रभावी होंगे मानो ‘दो लाख पचास हजार रुपए’ शब्दों के स्थान पर, ‘तीन लाख रुपए’ शब्द रखे गए हों:

परंतु यह और कि ऐसे प्रत्येक व्यष्टि की दशा में, जो पहली अनुसूची के भाग 3 के पैरा क की मद (III) में निर्दिष्ट भारत में निवासी है और पूर्ववर्ष के दौरान किसी समय अस्सी वर्ष का या उससे अधिक की आयु का है, इस उपधारा के उपबंध ऐसे प्रभावी होंगे मानो ‘दो लाख पचास हजार रुपए' शब्दों के स्थान पर, ‘पांच लाख रुपए' शब्द रखे गए हों :

परंतु यह भी कि इस प्रकार संकलित आय-कर या "अग्रिम कर" की रकम पर, प्रत्येक दशा में परिकलित अधिभार, उसमें उपबंधित रीति में, संघ के प्रयोजनों के लिए, बढ़ा दिया जाएगा।

(11) उपधारा (1) से उपधारा (10) में यथा विनिर्दिष्ट और उसमें उपबंधित रीति से परिकलित, संघ के प्रयोजनों के लिए, अधिभार द्वारा बढ़ार्इ गर्इ आय-कर की रकम को, ऐसे आय-कर और अधिभार पर दो प्रतिशत की दर से परिकलित "आय-कर पर शिक्षा उपकर" नाम से ज्ञात, अतिरिक्त अधिभार द्वारा संघ के प्रयोजनों के लिए और बढ़ा दिया जाएगा, जिससे सार्वत्रिक स्तर की क्वालिटी की प्राथमिक शिक्षा उपलब्ध कराने और उसका वित्तपोषण करने की सरकार की प्रतिबद्धता को पूरा किया जा सके:

परंतु इस उपधारा की कोर्इ बात उन दशाओं में लागू नहीं होगी जिनमें आय-कर अधिनियम के अधीन उपधारा (5), उपधारा (6), उपधारा (7) और उपधारा (8) में वर्णित धाराओं के अधीन कर की कटौती या उसका संग्रहण किया जाना है यदि स्रोत पर कर की कटौती के या स्रोत पर कर के संग्रहण के अधीन रहते हुए आय को किसी देशी कंपनी या भारत में निवासी किसी अन्य व्यक्ति को संदत्त किया गया है।

(12) उपधारा (1) से उपधारा (10) में यथा विनिर्दिष्ट और उसमें उपबंधित रीति से परिकलित, संघ के प्रयोजनों के लिए, अधिभार द्वारा बढ़ार्इ गर्इ आय-कर की रकम को, ऐसे आय-कर और अधिभार पर एक प्रतिशत की दर से परिकलित "आय-कर पर माध्यमिक और उच्चतर शिक्षा उपकर" नाम से ज्ञात, अतिरिक्त अधिभार द्वारा संघ के प्रयोजनों के लिए और बढ़ा दिया जाएगा, जिससे सार्वत्रिक स्तर की क्वालिटी की माध्यमिक और उच्चतर शिक्षा उपलब्ध कराने और उसका वित्तपोषण करने की सरकार की प्रतिबद्धता को पूरा किया जा सके:

परंतु इस उपधारा की कोर्इ बात उन दशाओं में लागू नहीं होगी जिनमें आय-कर अधिनियम के अधीन उपधारा (5), उपधारा (6), उपधारा (7) और उपधारा (8) में वर्णित धाराओं के अधीन कर की कटौती या उसका संग्रहण किया जाना है, यदि स्रोत पर कर की कटौती के या स्रोत पर कर के संग्रहण के अधीन रहते हुए आय को किसी देशी कंपनी या भारत में निवासी किसी अन्य व्यक्ति को संदत्त किया गया है।

(13) इस धारा और पहली अनुसूची के प्रयोजनों के लिए,–

() "देशी कंपनी" से कोर्इ भारतीय कंपनी या कोर्इ अन्य ऐसी कंपनी अभिप्रेत है, जिसने 1 अप्रैल, 2014 को प्रारंभ होने वाले निर्धारण वर्ष के लिए, आय-कर अधिनियम के अधीन आय-कर के दायित्वाधीन अपनी आय के संबंध में ऐसी आय में से संदेय लाभांशों (जिनके अंतर्गत अधिमानी शेयरों पर लाभांश भी है) की घोषणा और भारत में उनके संदाय के लिए इंतजाम कर लिए हैं;

() "बीमा कमीशन" से बीमा कारबार की याचना करने या उसे उपाप्त करने के लिए (जिसके अन्तर्गत बीमा पालिसियों को जारी रखने, उनका नवीकरण या उन्हें पुनरुज्जीवित करने से संबंधित कारबार है) कमीशन के रूप में या अन्यथा कोर्इ पारिश्रमिक या इनाम अभिप्रेत है;

() किसी व्यक्ति के संबंध में, "शुद्ध कृषि-आय" से, पहली अनुसूची के भाग 4 में अंतर्विष्ट नियमों के अनुसार संगणित, उस व्यक्ति की किसी भी स्रोत से व्युत्पन्न कृषि-आय की कुल रकम अभिप्रेत है;

() अन्य सभी शब्दों या पदों के, जो इस धारा में या पहली अनुसूची में प्रयुक्त हैं, किन्तु इस उपधारा में परिभाषित नहीं हैं और आय-कर अधिनियम में परिभाषित हैं, वही अर्थ होंगे, जो उनके उस अधिनियम में हैं।

 

 

[वित्त (संख्यांक 2) अधिनियम, 2014]

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