आयकर विभाग

वित्त मंत्रालय, भारत सरकार

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धारा 2

आयकर

धारा

धारा संख्या

2

अध्याय शीर्षक

अध्याय II - आयकर की दरें

अधिनियम

वित्त अधिनियम

वर्ष

2002

आयकर

आयकर

अध्याय 2

आय-कर की दरें

आय-कर

2. (1) उपधारा (2) और उपधारा (3) के उपबंधों के अधीन रहते हुए, 1 अप्रैल, 2002 को प्रारंभ होने वाले निर्धारण वर्ष के लिए आय-कर, पहली अनुसूची के भाग 1 में विनिर्दिष्ट दरों पर प्रभारित किया जाएगा और आय-कर अधिनियम, 1961 (1961 का 43) के (जिसे इसमें आगे आय-कर अधिनियम कहा गया है) अध्याय 8क के अधीन परिकलित आय-कर में से रिबेट घटाने के बाद बचे ऐसे कर में प्रत्येक दशा में उसमें वर्णित रीति से संघ के प्रयोजनार्थ परिकलित अधिभार बढ़ा दिया जाएगा।

(2) उन दशाओं में, जिनमें पहली अनुसूची के भाग 1 का पैरा क लागू होता है, जहां निर्धारिती की, पूर्ववर्ष में, कुल आय के अतिरिक्त कोर्इ शुद्ध कृषि आय पांच हजार रुपए से अधिक है और कुल आय पचास हजार रुपए से अधिक है वहां–

() शुद्ध कृषि आय को कुल आय के संबंध में केवल आय-कर प्रभारित करने के प्रयोजनार्थ खंड () में उपबंधित रीति से हिसाब में लिया जाएगा [अर्थात् मानो शुद्ध कृषि आय, कुल आय के पहले पचास हजार रुपए के पश्चात् कुल आय में शामिल हो, किंतु कर के दायित्वाधीन न हो]; और

() प्रभारित किया जाने वाला आय-कर निम्नलिखित रीति से परिकलित किया जाएगा, अर्थात्:–

(i) कुल आय और शुद्ध कृषि आय को संकलित किया जाएगा और संकलित आय पर आय-कर की रकम, उक्त पैरा क में विनिर्दिष्ट दरों से ऐसे तय की जाएगी, मानो ऐसी संकलित आय कुल आय हो;

(ii) शुद्ध कृषि आय में पचास हजार रुपए की राशि बढ़ा दी जाएगी और इस प्रकार बढ़ार्इ गर्इ शुद्ध कृषि आय के संबंध में आय-कर की रकम उक्त पैरा क में विनिर्दिष्ट दरों से ऐसे तय की जाएगी, मानो इस प्रकार बढ़ार्इ गर्इ शुद्ध कृषि आय कुल आय हो;

(iii) उपखंड (i) के अनुसार तय की गर्इ आय-कर की रकम में से उपखंड (ii) के अनुसार तय की गर्इ आय-कर की रकम घटा दी जाएगी और इस प्रकार निकली राशि कुल आय के संबंध में आय-कर होगी :

परन्तु अध्याय 8क के अधीन परिकलित आय-कर के रिबेट की रकम घटाकर निकली आय-कर की रकम में, उक्त पैरा में उपबंधित रीति से हर दशा में संघ के प्रयोजनार्थ, परिकलित अधिभार बढ़ा दिया जाएगा और इस प्रकार निकली राशि कुल आय के संबंध में आय-कर होगी।

(3) उन दशाओं में, जिनमें आय-कर अधिनियम के अध्याय 12 या अध्याय 12क या धारा 161 की उपधारा (1क) या धारा 164 या धारा 164क या धारा 167ख के उपबंध लागू होते हैं, प्रभारित किया जाने वाला कर उस अध्याय या उस धारा में उपबंधित रीति से और, यथास्थिति, उपधारा (1) द्वारा अधिरोपित दरों के या उस अध्याय या उस धारा में विनिर्दिष्ट दरों के प्रति निर्देश से तय किया जाएगा:

परन्तु धारा 112 और 113 के उपबंधों के अनुसार संगणित आय-कर की रकम में, संघ के प्रयोजनार्थ, अधिभार या पहली अनुसूची के भाग 1 के यथास्थिति पैरा क, पैरा ख, पैरा ग, पैरा घ या पैरा ड़ में उपबंधित अधिभार बढ़ा दिया जाएगा :

परन्तु यह और कि किसी ऐसी आय के संबंध में जिस पर आय-कर अधिनियम की धारा 115क, धारा 115कख, धारा 115कग, धारा 115कगक, धारा 115कघ, धारा 115ख, धारा 115खख, धारा 115खखक, धारा 115ड़ और धारा 115ञ ख के अधीन कर प्रभारित किया जाना है, इस उपधारा के अधीन संगणित आय-कर की रकम में, ऐसे आय-कर के दो प्रतिशत की दर से परिकलित अधिभार, संघ के प्रयोजनार्थ, बढा दिया जाएगा :

परन्तु यह भी कि किसी विदेशी कंपनी द्वारा कोर्इ अधिभार देय नहीं होगा।

(4) उन दशाओं में, जिनमें कर आय-कर अधिनियम की धारा 115प के अंतर्गत प्रभारित और अदा किया जाना है, कर उक्त धारा में विनिर्दिष्ट दर पर प्रभारित और अदा किया जाएगा और उसमें ऐसे कर के पांच प्रतिशत की दर पर परिकलित अधिभार, संघ के प्रयोजनार्थ, बढ़ा दिया जाएगा:

(5) उन दशाओं में, जिनमें कर आय-कर अधिनियम की धारा 193, धारा 194, धारा 194क, धारा 194ख, धारा 194खख, धारा 194घ और धारा 195 के अधीन लागू दरों से काटा जाना है, कटौतियां पहली अनुसूची के भाग 2 में विनिर्दिष्ट दरों से की जाएंगी और उसमें हर दशा में, उसमें उपबंधित रीति से, परिकलित अधिभार, संघ के प्रयोजनार्थ, बढ़ा दिया जाएगा।

(6) उन दशाओं में, जिनमें कर आय-कर अधिनियम की धारा 194ग, धारा 194ड़, धारा 194ड़ड़, धारा 194च, धारा 194छ, धारा 194ज, धारा 194झ, धारा 194ञ, धारा 194ट, धारा 194ठ, धारा 196क, धारा 196ख, धारा 196ग और धारा 196घ के अधीन काटा जाना है, कटौतियां उन धाराओं में विनिर्दिष्ट दरों पर की जाएंगी और उसमें ऐसे कर के पांच प्रतिशत की दर से परिकलित अधिभार, संघ के प्रयोजनार्थ, बढ़ा दिया जाएगा।

(7) उन दशाओं में, जिनमें कर आय-कर अधिनियम की धारा 194ख के परन्तुक के अधीन या धारा 206ग के अधीन संगृहीत किया जाना है, ऐसा संग्रहण, यथास्थिति, उस धारा में विनिर्दिष्ट दरों पर या पहली अनुसूची के भाग 2 में विनिर्दिष्ट दरों पर किया जाएगा और हर दशा में, उसमें उपबंधित रीति से, परिकलित अधिभार, संघ के प्रयोजनार्थ, बढ़ा दिया जाएगा।

(8) उपधारा (9) के उपबंधों के अधीन रहते हुए, उन दशाओं में, जिनमें आय-कर, लागू दर या दरों पर, आय-कर अधिनियम की धारा 172 की उपधारा (4) या धारा 174 की उपधारा (2) या धारा 174क या धारा 175 या धारा 176 की उपधारा (2) के अधीन प्रभारित किया जाना है या "वेतन" शीर्ष के अंतर्गत प्रभारित की जाने वाली आय में से उक्त अधिनियम की धारा 192 के अधीन काटा जाना है या अदा किया जाना है अथवा जिसमें उक्त अधिनियम के अध्याय 17ग के अधीन संदेय "अग्रिम कर" लागू दर या दरों पर संगणित किया जाना है, वहां, यथास्थिति, ऐसा आय-कर या "अग्रिम कर" पहली अनुसूची के भाग 3 में विनिर्दिष्ट दर या दरों पर प्रभारित किया जाएगा, काटा जाएगा या संगणित किया जाएगा और उक्त अधिनियम के अध्याय 8क के अधीन परिकलित आय-कर में से रिबेट घटाकर आए ऐसे कर को, जो हर दशा में उसमें उपबंधित रीति से परिकलित किया गया हो संघ के प्रयोजनार्थ, बढ़ा दिया जाएगा :

परन्तु उन दशाओं में, जिनमें आय-कर अधिनियम के अध्याय 12 या अध्याय 12क या धारा 115ञ ख या धारा 161 की उपधारा (1क) या धारा 164 या धारा 164क या धारा 167ख के उपबंध लागू होते हैं, "अग्रिम कर", यथास्थिति, इस उपधारा द्वारा अधिरोपित दरों के या उक्त अध्याय या धारा में विनिर्दिष्ट दरों के प्रति निर्देश से संगणित किया जाएगा :

परन्तु यह और कि आय-कर अधिनियम की धारा 112 के उपबंधों के अनुसार संगणित आय-कर की रकम में पहली अनुसूची के भाग 3 के, यथास्थिति, पैरा क, पैरा ख, पैरा ग, पैरा घ या पैरा ड़ में उपबंधित अधिभार, संघ के प्रयोजनार्थ, बढ़ा दिया जाएगा :

परन्तु यह भी कि ऐसी किसी आय के संबंध में, जिस पर आय-कर अधिनियम की धारा 115क, धारा 115कख, धारा 115कग, धारा 115कगक, धारा 115कघ, धारा 115ख, धारा 115खख, धारा 115खखक, धारा 115खखख, धारा 115ड़ और धारा 115ञ ख के अधीन कर प्रभारित किया जाना है, पहले परन्तुक के अधीन संगणित "अग्रिम कर" में ऐसे कर के पांच प्रतिशत की दर से परिकलित अधिभार, संघ के प्रयोजनार्थ, बढ़ा दिया जाएगा।

(9) उन दशाओं में, जिनमें पहली अनुसूची के भाग 3 का पैरा क लागू होता है, जहां निर्धारिती की पूर्ववर्ष में अथवा, यदि आय-कर अधिनियम के किसी उपबंध के आधार पर आय-कर पूर्ववर्ष से भिन्न किसी अवधि की आय के संबंध में प्रभारित किया जाना है, ऐसी अन्य अवधि में कुल आय के अलावा पांच हजार रुपए से अधिक कोर्इ शुद्ध कृषि आय भी है और कुल आय पचास हजार रुपए से अधिक हो जाती है वहां लागू दर या दरों पर उक्त अधिनियम की धारा 174 की उपधारा (2) या धारा 174क या धारा 175 या धारा 176 की उपधारा (2) के अधीन आय-कर प्रभारित करने में अथवा उक्त अधिनियम के अध्याय 17ग के अधीन संदेय "अग्रिम-कर" की संगणना करने में,–

() शुद्ध कृषि आय को कुल आय के संबंध में, यथास्थिति, केवल ऐसा आय-कर या "अग्रिम-कर" प्रभारित या संगणित करने के प्रयोजनार्थ खंड () में उपबंधित रीति से हिसाब में लिया जाएगा [अर्थात् मानो शुद्ध कृषि आय कुल आय के पहले पचास हजार रुपए के पश्चात् कुल आय में शामिल हो किंतु कर के दायित्वाधीन न हो]; और

() यथास्थिति, ऐसा आय-कर या "अग्रिम कर" निम्न रीति से प्रभारित या संगणित किया जाएगा, अर्थात् :–

(i) कुल आय और शुद्ध कृषि आय को संकलित किया जाएगा और संकलित आय पर आय-कर या "अग्रिम कर" की रकम, उक्त पैरा क में विनिर्दिष्ट दरों से ऐसे तय की जाएगी मानो ऐसी संकलित आय कुल आय हो;

(ii) शुद्ध कृषि आय में पचास हजार रुपए की राशि बढ़ा दी जाएगी और इस प्रकार बढ़ार्इ शुद्ध कृषि आय के संबंध में आय-कर या "अग्रिम कर" की रकम, उक्त पैरा क में विनिर्दिष्ट दरों से ऐसे तय की जाएगी मानो शुद्ध कृषि आय कुल आय हो;

(iii) उपखंड (i) के अनुसार तय की गर्इ आय-कर या "अग्रिम कर" की रकम में से उपखंड (ii) के अनुसार तय की गर्इ, यथास्थिति, आय-कर या "अग्रिम कर" की रकम घटा दी जाएगी और इस प्रकार निकली राशि कुल आय के संबंध में यथास्थिति, आय-कर या "अग्रिम कर" होगी :

परन्तु उक्त अधिनियम के अध्याय 8क के अधीन परिकलित आय-कर के रिबेट को घटाकर, निकली आय-कर या "अग्रिम कर" की रकम में हर दशा में, उसमें उपबंधित रीति से, परिकलित अधिभार, संघ के प्रयोजनार्थ, बढ़ा दिया जाएगा।

(10) इस धारा और पहली अनुसूची के प्रयोजनों के लिए–

() "देशी कंपनी" से कोर्इ भारतीय कंपनी या कोर्इ अन्य ऐसी कंपनी अभिप्रेत है जिसने 1 अप्रैल, 2002 को प्रारंभ होने वाले निर्धारण वर्ष के संबंध में आय-कर अधिनियम के अधीन आय-कर के दायित्वाधीन अपनी आय की बाबत ऐसी आय में से देय लाभांशों की (जिनके अंतर्गत अधिमानी शेयरों पर लाभांश भी हैं) घोषणा किए जाने और उनका संदाय भारत में किए जाने के लिए विहित इंतजाम कर लिए हैं;

() "बीमा कमीशन" से बीमा कारबार चाहने या पाने के लिए (जिसके अंतर्गत बीमा पालिसियों के जारी रखने, उनका नवीकरण करने या पुन: चालू करने से संबंधित कारबार भी है) कमीशन के रूप में या अन्यथा कोर्इ पारिश्रमिक या र्इनाम अभिप्रेत है;

() किसी व्यक्ति के संबंध में, "शुद्ध कृषि आय" से, पहली अनुसूची के भाग 4 में वर्णित नियमों के अनुसार उस व्यक्ति की संगणित कृषि आय की कुल रकम अभिप्रेत है चाहे वह किसी भी स्रोत से प्राप्त हुर्इ हो;

() अन्य सभी शब्दों या पदों के, जो इस धारा में और पहली अनुसूची में प्रयोग किये गए हैं, किंतु इस उपधारा में परिभाषित नहीं है और आय-कर अधिनियम में परिभाषित हैं, वे ही अर्थ होंगे जो उनके क्रमश: उस अधिनियम में हैं।

 

 

[वित्त अधिनियम, 2002]

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