व्यावसायिक या तकनीकी सेवाओं के लिए शुल्क
23[वृत्तिक या तकनीकी सेवाओं के लिए फीस24
25194ञ. कोर्इ व्यक्ति जो व्यष्टि या हिन्दू अविभक्त कुटुंब नहीं है और जो किसी निवासी को--
(क) वृत्तिक सेवाओं के लिए फीस; या
(ख) तकनीकी सेवाओं के लिए फीस,
के रूप में किसी राशि का संदाय करने का दायी है, पाने वाले के खाते में ऐसी राशि जमा करते समय या उसका नकद रूप में या चैक या ड्राफ्ट जारी करके या किसी अन्य रीति से भुगतान करते समय, इनमें से जो भी पहले हो, ऐसी राशि के पांच प्रतिशत के बराबर रकम की, उसमें सम्मिलित राशि पर आय-कर के रूप में कटौती करेगा :
परन्तु इस धारा के अधीन कोर्इ कटौती--
(अ) 1 जुलार्इ, 1995 से पहले जमा या संदत्त की गर्इ पूर्वोक्त किसी राशि में से नहीं की जाएगी; या
(आ) तब तक नहीं की जाएगी जब तक वित्तीय वर्ष के दौरान पाने वाले के खाते में पूर्वोक्त व्यक्ति द्वारा जमा की गर्इ या संदत्त की गर्इ अथवा जमा किए जाने या संदत्त किए जाने के लिए संभाव्य, यथास्थिति, ऐसी आय की राशि या आय की कुल राशि--
(i) खंड (क) में निर्दिष्ट वृत्तिक सेवाओं के लिए फीस की दशा में, बीस हजार रुपए; या
(ii) खंड (ख) में निर्दिष्ट तकनीकी सेवाओं के लिए फीस की दशा में, बीस हजार रुपए से,
अधिक नहीं है।
(2) जहां निर्धारण अधिकारी का यह समाधान हो जाता है कि उपधारा (1) में निर्दिष्ट राशि को प्राप्त करने वाले किसी व्यक्ति की कुल आय पर, किसी निम्नतर दर पर यथास्थिति, आय-कर की कटौती करना या आय-कर की कटौती न करना न्यायोचित है वहां निर्धारण अधिकारी, ऐसे व्यक्ति द्वारा इस निमित्त किए गए आवेदन पर, उसे ऐसा प्रमाण पत्र देगा, जो उचित हो।
(3) जहां ऐसा कोर्इ प्रमाणपत्र दिया गया हो वहां उपधारा (1) में निर्दिष्ट राशि का संदाय करने के लिए उत्तरदायी व्यक्ति, जब तक ऐसा प्रमाणपत्र निर्धारण अधिकारी द्वारा रद्द न कर दिया जाए, यथास्थिति, ऐसे प्रमाणपत्र में दी गर्इ दरों पर आय-कर की कटौती करेगा या किसी कर की कटौती नहीं करेगा।
स्पष्टीकरण.–इस धारा के प्रयोजनों के लिए--
(क) "वृत्तिक सेवा" से विधि, चिकित्सा, इंजीनियरी, या वास्तुकला वृत्ति या लेखा संकर्म या तकनीकी सलाह वृत्ति या आंतरिक साजसज्जा या विज्ञापन वृत्ति अथवा धारा 44कक या इस धारा के प्रयोजनों के लिए बोर्ड द्वारा अधिसूचित कोर्इ अन्य वृत्ति चलाने के दौरान किसी व्यक्ति द्वारा दी गर्इ सेवाएं अभिप्रेत हैं।
(ख) "तकनीकी सेवाओं के लिए फीस" का वही अर्थ है जो उसका धारा 9 की उपधारा (1) के खंड (vii) के नीचे के स्पष्टीकरण 2 में दिया गया है।
(ग) जहां उपधारा (1) में निर्दिष्ट कोर्इ राशि, ऐसी राशि का संदाय करने के लिए दायी व्यक्ति की लेखा-बहियों में किसी खाते में चाहे वह "उचंत खाते" के नाम ज्ञात हो या किसी अन्य नाम से, जमा की जाती है वहां ऐसी राशि के जमा किए जाने को, पाने वाले के खाते में ऐसी राशि का जमा किया जाना समझा जाएगा और इस धारा के उपबंध तदनुसार लागू होंगे।
23. वित्त अधिनियम, 1995 द्वारा 1.7.1995 से धारा 194ञ और धारा 194ट अंत:स्थापित।
24. नियम 28(5), 30, 31 और 37 तथा प्ररूप सं. 13ड़, 16क और 26ट देखिए।
25. परिपत्र सं. 714, तारीख 3.8.1995, परिपत्र सं. 715, तारीख 8.8.1995, परिपत्र सं. 716, तारीख 9.8.1995, परिपत्र सं. 720, तारीख 30.8.1995, परिपत्र सं. 726, तारीख 18.10.1995 और परिपत्र सं. 766, तारीख 24.4.1998 भी देखिए। ब्यौरे के लिए देखिए टैक्समैन्स मास्टर गाइड टु इन्कम टैक्स ऐक्ट।
[वित्त अधिनियम, 2000 द्वारा संशोधित रूप में]

