वित्त अधिनियम, 1999 द्वारा 1.4.2000 से लोप किया गया।
कमीशन, दलाली, आदि
194ज. 18[वित्त अधिनियम, 1999 द्वारा 1.4.2000 से लोप किया गया]
18. लोप किये जाने से पूर्व धारा 194ड़ इस प्रकार थी :
"194ज. कमीशन, दलाली, आदि–(1) कोर्इ व्यक्ति, जो व्यष्टि या हिन्दू अविभक्त कुटुंब नहीं है, और जो किसी निवासी को कमीशन (जो धारा 194घ में निर्दिष्ट बीमा कमीशन नहीं है) या दलाली के रूप में किसी आय का 1 अक्तुबर, 1991 को या उसके पश्चात लेकिन 1 जून, 1992 से पहले संदाय करने के लिए उत्तरदायी है, पाने वाले के खाते में ऐसी आय को जमा करते समय या ऐसी आय का नकद रूप में या चैक या ड्राफ्ट देकर या किसी अन्य रीति से संदाय करते समय, इनमें से जो भी पहले हो, उस पर दस प्रतिशत की दर से आय-कर की कटौती करेगा :
(2) उपधारा (1) के प्रावधान लागू नही होगा–
(अ) ऐसे व्यक्तियों या व्यक्तियों के वर्ग या वर्गो पर जो कि इसके निमित्त केन्द्र सरकार द्वारा उनको हुए या होनेवाले असुविधाओं की सीमा को ध्यान में रखते हुए एवं राजस्व विभाग के हितो के लिए हानिकारक न हो इस बात के बारे में संतुष्ट होकर आधिकारिक राजपत्र में अधिसूचित कर विनिर्दिष्ट कर सकते है;
(ब) जहाँ ऐसे आय की राशि या, स्थिति के अनुसार, ऐसे आयों की राशियों के कुल योग, जो कि वित्त वर्ष के दौरान उपधारा (1) मे उल्लेखित व्यक्ति के द्वारा पानेवाले को दी गयी या उनके खाते में जमा या भुगतान की गयी हों, दो हजार पाँच सौ रुपये से अधिक न हो।
स्पष्टीकरण.–इस धारा के प्रयोजनों के लिए--
(i) "कमीशन या दलाली" के अंतर्गत, दी गर्इ सेवाओं के लिए (जो वृत्तिक सेवाएं नहीं हैं) या माल के क्रय या विक्रय के अनुक्रम में या किसी आस्ति, मूल्यवान वस्तु या चीज से संबंधित किसी संव्यवहार के बारे में किन्हीं सेवाओं के लिए किसी अन्य व्यक्ति की ओर से कार्य करने वाले किसी व्यक्ति द्वारा, प्रत्यक्ष रूप से या अप्रत्यक्ष रूप से प्राप्त या प्राप्य कोर्इ संदाय है;
(ii) "वृत्तिक सेवा" का अर्थ विधि, चिकित्सा, इंजीनियरी या वास्तुकला वृत्ति या लेखा संकर्म या तकनीकी परामर्श या आंतरिक सज्जा वृत्ति या धारा 44कक के प्रयोजनों के लिए बोर्ड द्वारा अधिसूचित कोर्इ अन्य वृत्ति चलाने के प्रक्रम में किसी व्यक्ति द्वारा दी गर्इ सेवाएं हैं;
(iii) जहां कोर्इ आय, ऐसी आय का संदाय करने के लिए दायी व्यक्ति की लेखा बहियों में किसी खाते में, चाहे वह "उचंत खाते" के नाम से ज्ञात हो या किसी अन्य नाम से, जमा की जाती है वहां ऐसी राशि के जमा किए जाने को, पाने वाले के खाते में, ऐसी आय का जमा किया जाना समझा जाएगा और इस धारा के उपबंध तदनुसार लागू होंगे।"
[वित्त अधिनियम, 2000 द्वारा संशोधित रूप में]

