भुगतान कर की वसूली के लिए प्रतिनिधि निर्धारिती के अधिकार
संदत्त कर को वसूल करने का प्रतिनिधि निर्धारिती का अधिकार
162. (1) प्रत्येक प्रतिनिधि निर्धारिती जो इस रूप में इस अधिनियम के अधीन किसी राशि का संदाय करता है इस संदत्त राशि को उस व्यक्ति से जिसकी ओर से वह संदाय की जाती है वसूल करने का या उस संदत्त राशि के बराबर रकम को उन धनों में से जो, उसकी प्रतिनिधिक हैसियत में उसके कब्जे में हों या उसके पास आएं, प्रतिधारित का हकदार होगा।
(2) कोर्इ प्रतिनिधि निर्धारिती, या ऐसा कोर्इ व्यक्ति, जिसे प्रतिनिधि निर्धारिती के रूप में निर्धारित किए जाने की आशंका है, उस व्यक्ति को (जो इसके पश्चात् इस धारा में प्रधान के रूप में उल्लिखित है) जिसकी ओर से वह कर का संदाय करने के दायित्वाधीन है अपने द्वारा संदेय किसी धन में इतनी राशि प्रतिधारित कर सकेगा जितनी इस अध्याय के अधीन उसके प्राक्कलित दायित्व के बराबर है तथा इस प्रतिधारित की जाने वाली रकम के बारे में प्रधान और ऐसे प्रतिनिधि निर्धारिती या व्यक्ति के बीच किसी मतभेद की दशा में ऐसा प्रतिनिधि निर्धारिती या व्यक्ति दायित्व के अंतिम परिनिर्धारण के लंबित रहने तक इस प्रकार प्रतिधारित की जाने वाली रकम कथित करने वाला प्रमाणपत्र 98[निर्धारण] अधिकारी से प्राप्त कर सकेगा और इस प्रकार प्राप्त किया गया प्रमाण पत्र उस रकम को रखने (प्रतिधारित करने) के लिए उसका समुचित आधार होगा।
(3) अंतिम परिनिर्धारण के समय ऐसे प्रतिनिधि निर्धारिती या व्यक्ति से वसूल की जाने वाली रकम ऐसे प्रमाणपत्र में विनिर्दिष्ट रकम से उस परिमाण के सिवाय जिस तक कि ऐसे प्रतिनिधि निर्धारिती या व्यक्ति के पास ऐसे समय पर प्रधान की अतिरिक्त आस्तियां हों, अधिक नहीं होगी।
98. प्रत्यक्ष कर विधि (संशोधन) अधिनियम, 1987 द्वारा 1.4.1988 से "आय-कर" के स्थान पर प्रतिस्थापित।
[वित्त अधिनियम, 2002 द्वारा संशोधित रूप में]

